Marwari Mission 100
RBSE 12th Hindi: अलंकार महाकोश (Complete Encyclopedia)
Source: www.ncertclasses.com | Marwari Mission 100
अलंकार (Alankar): परिभाषा, भेद और उदाहरण
काव्यशास्त्र | कक्षा 12 हिंदी अनिवार्य (RBSE) | गहन अध्ययन
- 1. सिलेबस व ब्लूप्रिंट
- 2. पत्र व प्रारूप लेखन
- 3. भाषा, व्याकरण व लिपि
- 4. शब्द शक्ति (Deep Dive)
- 5. अलंकार (वर्तमान लेख)
"काव्य की शोभा बढ़ाने वाले तत्व"
| शाब्दिक अर्थ | आभूषण (Jewelry) |
| मूल धातु | अलम् + कृ |
| प्रवर्तक आचार्य | भामह (काव्यालंकार) |
| RBSE सिलेबस | 9 अलंकार (2 अंक) |
अलंकार का शाब्दिक अर्थ है 'आभूषण' या 'गहना'। जिस प्रकार आभूषण पहनने से शरीर की सुंदरता बढ़ जाती है, उसी प्रकार काव्य में अलंकारों के प्रयोग से चमत्कार और सौंदर्य उत्पन्न होता है।
- आचार्य दंडी (काव्यादर्श)
1. शब्दालंकार (Word-based Figures of Speech)
जहाँ काव्य में शब्दों के विशेष प्रयोग से चमत्कार उत्पन्न हो। यदि शब्द बदल दिया जाए (पर्यायवाची रख दें), तो चमत्कार समाप्त हो जाता है।
(क) अनुप्रास (Alliteration)
जब एक ही वर्ण (Letter) की आवृत्ति बार-बार हो।
(यहाँ 'भ' वर्ण की आवृत्ति 5 बार हुई है।)
(ख) यमक (Yamak) Most Important
जब कोई शब्द दो या दो से अधिक बार आए, लेकिन हर बार उसका अर्थ अलग हो, वहां यमक अलंकार होता है।
"कनक कनक ते सौ गुनी, मादकता अधिकाय।
वा खाये बौराय जग, या पाये बौराय॥"
विश्लेषण:
- पहला कनक = धतूरा (जिसे खाने से नशा होता है)।
- दूसरा कनक = सोना/स्वर्ण (जिसे पाने से अहंकार का नशा होता है)।
(ग) श्लेष (Pun)
'श्लेष' का अर्थ है 'चिपकना'। जब शब्द एक ही बार प्रयुक्त हो, लेकिन संदर्भ के अनुसार उसके एक से अधिक अर्थ निकलें।
"पानी गये न ऊबरे, मोती मानुष चून।"
विश्लेषण: यहाँ 'पानी' शब्द एक बार आया है, पर अर्थ तीन हैं:
- मोती के पक्ष में = चमक।
- मनुष्य के पक्ष में = इज्जत/प्रतिष्ठा।
- चून (आटा) के पक्ष में = जल।
(घ) वक्रोक्ति (Vakrokti)
वक्र + उक्ति = टेढ़ा कथन। जब वक्ता किसी और अभिप्राय से बात कहे, लेकिन श्रोता (सुनने वाला) उसका जानबूझकर दूसरा (टेढ़ा) अर्थ निकाले।
कृष्ण (दरवाजा खटखटाते हुए): "को तुम हो?"
राधा: "हैं घनश्याम हम।" (राधा जानती है कि ये कृष्ण हैं, पर मजे लेती हैं)
राधा (टेढ़ा अर्थ): "तौ बरसो कित जाय।"
(अगर तुम घनश्याम/काले बादल हो, तो कहीं जाकर बरसो, यहाँ क्या काम?)
2. अर्थालंकार (Meaning-based Figures of Speech)
यहाँ चमत्कार शब्द में नहीं, अर्थ में होता है। शब्द बदलने पर भी अलंकार बना रहता है।
(क) विरोधाभास (Oxymoron)
जहाँ वास्तविक विरोध न होकर केवल विरोध का आभास हो। दो विपरीत चीजें एक साथ दिखाई जाएं।
"या अनुरागी चित्त की, गति समुझै नहिं कोय।
ज्यों-ज्यों बूड़े श्याम रंग, त्यों-त्यों उज्ज्वल होय॥"
विश्लेषण: काले रंग (श्याम/कृष्ण भक्ति) में डूबने पर कोई उज्ज्वल (सफेद/पवित्र) कैसे हो सकता है? यह ऊपरी विरोध है, पर गहरा अर्थ सही है।
(ख) अतिशयोक्ति (Hyperbole)
जब किसी बात का वर्णन लोक-सीमा से बढ़ा-चढ़ाकर किया जाए।
"हनुमान की पूंछ में, लगन न पायी आग।
लंका सिगरी जल गई, गए निसाचर भाग॥"
(पूंछ में आग लगने से पहले ही लंका का जल जाना असंभव है, अतः अतिशयोक्ति है।)
(ग) विभावना (Vibhavana)
जहाँ बिना कारण के ही कार्य हो जाए। (Cause is missing, but Effect happens).
"बिनु पग चलै सुनै बिनु काना।
कर बिनु कर्म करै विधि नाना॥"
(बिना पैरों के चलना, बिना कानों के सुनना - कारण के बिना कार्य हो रहा है।)
(घ) संदेह (Doubt)
जब किसी वस्तु को देखकर अंत तक यह निश्चय न हो पाए कि यह वही वस्तु है या दूसरी। 'कि', 'या', 'अथवा' शब्दों का प्रयोग होता है।
"सारी बीच नारी है कि नारी बीच सारी है।
कि सारी ही की नारी है कि नारी ही की सारी है॥"
(दुशासन तय नहीं कर पा रहा कि द्रौपदी साड़ी की बनी है या साड़ी द्रौपदी की।)
(ङ) भ्रांतिमान (Illusion)
जब समानता के कारण एक वस्तु को भूल से दूसरी वस्तु समझ लिया जाए और उसी अनुसार क्रिया भी कर दी जाए। (False certainty).
"जानि श्याम को श्याम घन, नाच उठे वन मोर।"
(मोरों ने श्री कृष्ण को 'काला बादल' समझ लिया और नाचने भी लगे। भ्रम पक्का हो गया।)
3. महा-तुलना (Master Comparisons)
विद्यार्थी अक्सर इन जोड़ों में गलती करते हैं। यह चार्ट रट लें।
A. संदेह vs भ्रांतिमान (Confusion Matrix)
| संदेह (Sandeh) | भ्रांतिमान (Bhrantiman) |
|---|---|
| इसमें दुविधा (Doubt) बनी रहती है। निर्णय नहीं होता। | इसमें भ्रम (Illusion) पक्का हो जाता है। झूठा ज्ञान सही मान लिया जाता है। |
| कीवर्ड्स: कि, या, अथवा, कैधौं। | कीवर्ड्स: जानि, मानि, समझि। |
| यह रस्सी है या सांप? (डर के मारे खड़ा है) | रस्सी को सांप समझकर भाग गया। (क्रिया हो गई) |
B. यमक vs श्लेष (Word Play)
| यमक (Yamak) | श्लेष (Shlesh) |
|---|---|
| शब्द बार-बार आता है। | शब्द एक ही बार आता है। |
| हर बार अर्थ अलग होता है। | एक ही शब्द में कई अर्थ चिपके होते हैं। |
| कनक कनक (दो शब्द, दो अर्थ) | पानी (एक शब्द, तीन अर्थ) |
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