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उत्तर कुंजी — मनोविज्ञान | RBSE Class 11 | विषय कोड 19 | ncertclasses.com
माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, राजस्थान, अजमेर
उत्तर कुंजी — मनोविज्ञान Answer Key — Psychology Model Paper 2025-26
विषय कोड : 19कक्षा : 11सैद्धान्तिक : 70 अंकसभी 36 प्रश्न हलशिक्षक / स्व-अध्ययन हेतु
खण्ड
प्रश्न
प्रकार
अंक
इस Key में
अ
Q.1–20
MCQ
20
✅ उत्तर + कारण
ब
Q.21–30
अतिलघूत्तर
20
✅ मॉडल उत्तर
स
Q.31–33
लघूत्तर (दोनों विकल्प)
15
✅ बिंदुवार उत्तर
द
Q.34–36
निबंधात्मक (दोनों विकल्प)
15
✅ विस्तृत उत्तर
खण्ड — अ | MCQ उत्तर (1 अंक प्रत्येक)
Q.1मनोविज्ञान की "मन एवं व्यवहार का विज्ञान" परिभाषा1 अंक
✅(C)मॉर्गन एवं किंग — इन्होंने मनोविज्ञान को "मन एवं व्यवहार का विज्ञान" कहा। विलियम जेम्स ने "चेतना का विज्ञान" और वाटसन ने "केवल व्यवहार का विज्ञान" कहा था।
✅(B)विलहेम वुन्ट — लाइपजिग, जर्मनी (1879) — मनोविज्ञान को स्वतंत्र विज्ञान का दर्जा दिलाने वाला यह ऐतिहासिक कदम था। वुन्ट को "आधुनिक मनोविज्ञान के जनक" कहा जाता है।
Q.3प्रयोग विधि की मुख्य विशेषता1 अंक
✅(B)स्वतंत्र व आश्रित चर पर नियंत्रण — प्रयोग विधि में स्वतंत्र चर (Independent Variable) को जानबूझकर बदला जाता है और आश्रित चर (Dependent Variable) पर उसके प्रभाव का अध्ययन किया जाता है। अन्य चर नियंत्रित रखे जाते हैं।
Q.4व्यक्ति अध्ययन की सबसे बड़ी सीमा1 अंक
✅(B)परिणामों का सामान्यीकरण कठिन — एक व्यक्ति का गहन अध्ययन (Case Study) अनूठी जानकारी देता है, परंतु उन निष्कर्षों को सभी लोगों पर लागू नहीं किया जा सकता।
Q.5एरिकसन — किशोरावस्था की मुख्य चुनौती1 अंक
✅(B)पहचान बनाम भूमिका भ्रम (Identity vs Role Confusion) — 12–18 वर्ष। किशोर प्रश्न करता है "मैं कौन हूँ?" सफल समाधान पर "निष्ठा" (Fidelity) विकसित होती है।
💡 याद करें: अवस्था 5 = किशोरावस्था = पहचान — परीक्षा में सबसे अधिक पूछा जाता है!
Q.6पियाजे — मूर्त संक्रियात्मक चरण की आयु1 अंक
✅(C) 7–11 वर्षपियाजे के चार चरण: (1) संवेदी-गामक 0–2 वर्ष → (2) पूर्व-संक्रियात्मक 2–7 वर्ष → (3) मूर्त संक्रियात्मक 7–11 वर्ष (संरक्षण, वर्गीकरण) → (4) औपचारिक संक्रियात्मक 12+
Q.7चयनात्मक अवधान का उदाहरण1 अंक
✅(C)शोर में किसी की आवाज़ पर ध्यान देना — इसे "cocktail party effect" कहते हैं। कई उद्दीपकों में से एक को चुनकर ध्यान देना = चयनात्मक अवधान।
Q.8गेस्टाल्ट — समीपता का नियम1 अंक
✅(B)पास-पास की वस्तुओं को एक समूह मानना — जो वस्तुएँ स्थान में नजदीक होती हैं, मस्तिष्क उन्हें एक इकाई के रूप में देखता है।
अन्य गेस्टाल्ट नियम: समानता, संपूर्णता (Closure), सातत्य (Continuity), सरलता (Simplicity)
Q.9पावलव — अनुबंधित उद्दीपक (CS)1 अंक
✅(B) घंटी की ध्वनिपावलव के प्रयोग में: US=भोजन (अनुबंधन-रहित) → UR=लार → CS=घंटी (अनुबंधित उद्दीपक) → CR=केवल घंटी सुनकर लार (अनुबंधित अनुक्रिया)
Q.10अधिगत असहायपन — खोजकर्ता1 अंक
✅(C) सेलिगमैन (Seligman)मार्टिन सेलिगमैन ने कुत्तों पर प्रयोग किया। बार-बार असफलता के बाद प्राणी प्रयास करना छोड़ देता है — यह "Learned Helplessness" है। अवसाद (Depression) का एक मनोवैज्ञानिक कारण।
Q.11STM की धारण क्षमता1 अंक
✅(B) 7±2 इकाई (मिलर का नियम)जॉर्ज मिलर (1956) ने अपने प्रसिद्ध लेख "The Magical Number Seven" में बताया कि STM की क्षमता 5 से 9 इकाई (7±2) होती है। समय सीमा 20–30 सेकंड।
Q.12व्यवधान सिद्धांत — विस्मरण का कारण1 अंक
✅(B)नई सूचनाओं का पुरानी सूचनाओं से टकराव — दो प्रकार: (1) पूर्वक्रियाशील व्यवधान — पुरानी सूचना नई को बाधित करे; (2) पश्चक्रियाशील व्यवधान — नई सूचना पुरानी को बाधित करे।
Q.13निगमनात्मक तर्कना1 अंक
✅(B)सामान्य से विशेष की ओर जाते हैं। उदाहरण: "सभी मनुष्य नश्वर हैं (सामान्य) → राम मनुष्य है → राम नश्वर है (विशेष)"। आगमनात्मक = विशेष से सामान्य।
Q.14मानसिक स्थिरता (Mental Set)1 अंक
✅(C)पुरानी सफल विधि पर निर्भर रहना — Mental Set समस्या समाधान में बाधा बनती है क्योंकि व्यक्ति नई रणनीति सोचने की बजाय पुरानी विधि दोहराता रहता है।
Q.15मास्लो पदानुक्रम — उच्चतम स्तर1 अंक
✅(D) आत्म-अभिसाक्षात्कार (Self-Actualisation)मास्लो के 5 स्तर (नीचे से): शारीरिक → सुरक्षा → प्रेम/अपनत्व → सम्मान → आत्म-अभिसाक्षात्कार। यह B-Need है — पूरी होने पर और बढ़ती है।
Q.16PTSD — विकार का प्रकार1 अंक
✅(C) अभिघातज उत्तर दबाव विकारPTSD (Post-Traumatic Stress Disorder) — किसी भयावह घटना (युद्ध, दुर्घटना, बलात्कार) के बाद लंबे समय तक डर, nightmares, flashbacks। यह निषेधात्मक संवेग से जुड़ा विकार है।
Q.17आकृति-पृष्ठभूमि सिद्धांत — विचारधारा1 अंक
✅(C) गेस्टाल्ट मनोविज्ञानकोर्टकर, वर्दाइमर, कोफ्का और कोहलर — गेस्टाल्ट मनोवैज्ञानिकों ने बताया कि मस्तिष्क किसी एक भाग (आकृति) को बाकी (पृष्ठभूमि) से अलग करके देखता है।
Q.18स्किनर — धनात्मक पुनर्बलन1 अंक
✅(B)वांछित व्यवहार के बाद पुरस्कार देना — धनात्मक पुनर्बलन = वांछित व्यवहार की संभावना बढ़ाने के लिए सुखद उद्दीपक जोड़ना (शाबाशी, इनाम)। ऋणात्मक पुनर्बलन = कष्टकर उद्दीपक हटाना।
Q.19भारत में मनोविज्ञान — अग्रणी1 अंक
✅(B) डॉ. एन.एन. सेनगुप्तडॉ. नरेंद्रनाथ सेनगुप्त ने 1916 में कलकत्ता विश्वविद्यालय में भारत की प्रथम मनोविज्ञान प्रयोगशाला स्थापित की। इन्हें "भारतीय मनोविज्ञान के जनक" कहा जाता है।
Q.20सहसम्बन्ध गुणांक का मान1 अंक
✅(C) −1 से +1 के बीच+1 = पूर्ण धनात्मक सह-संबंध | 0 = कोई संबंध नहीं | −1 = पूर्ण ऋणात्मक सह-संबंध। यह कारण-प्रभाव नहीं, केवल सम्बन्ध बताता है।
खण्ड — ब | अतिलघूत्तर उत्तर (2 अंक प्रत्येक)
Q.21मनोविज्ञान की दो शाखाएँ + अध्ययन क्षेत्र2 अंक
मनोविज्ञान की दो प्रमुख शाखाएँ:
1. नैदानिक मनोविज्ञान (Clinical Psychology): मानसिक विकारों का निदान, उपचार और रोकथाम। थेरेपी, काउंसलिंग।
2. शैक्षिक मनोविज्ञान (Educational Psychology): शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया, बालकों के विकास, अभिप्रेरणा एवं मूल्यांकन का अध्ययन। (अन्य मान्य: सामाजिक, औद्योगिक, परामर्श, स्वास्थ्य, खेल मनोविज्ञान आदि)
1 अंक — प्रत्येक शाखा + अध्ययन क्षेत्र
Q.22प्रेक्षण विधि vs प्रयोग विधि — दो अंतर2 अंक
आधार
प्रेक्षण विधि
प्रयोग विधि
नियंत्रण
चर पर नियंत्रण नहीं
स्वतंत्र चर नियंत्रित
उद्देश्य
प्राकृतिक व्यवहार देखना
कारण-प्रभाव स्थापित करना
उदाहरण
बच्चे की कक्षा में देखना
प्रयोगशाला में परीक्षण
1 अंक — प्रत्येक सही अंतर
Q.23किशोरावस्था की दो प्रमुख चुनौतियाँ2 अंक
1. पहचान की खोज (Identity Crisis): एरिकसन के अनुसार किशोर "मैं कौन हूँ?" प्रश्न से जूझता है। माता-पिता, मित्र, समाज — सभी की अपेक्षाओं के बीच स्वयं को स्थापित करना चुनौती है।
2. समकक्ष दबाव (Peer Pressure) और जोखिम व्यवहार: मित्र-समूह का प्रभाव तीव्र होता है। नशे की लत, असुरक्षित संबंध, हिंसा जैसे जोखिम बढ़ जाते हैं।
1 अंक — प्रत्येक चुनौती की व्याख्या
Q.24अवधान को प्रभावित करने वाले चार कारक2 अंक
चार प्रमुख कारक:
1. उद्दीपक की तीव्रता — तेज आवाज़, चमकीला रंग अधिक ध्यान खींचता है।
2. नवीनता — अपरिचित या असामान्य वस्तु ध्यान आकर्षित करती है।
3. अभिरुचि एवं रुझान — जिस विषय में रुचि हो, उस पर ध्यान स्वतः जाता है।
4. गति एवं परिवर्तन — चलती हुई वस्तु स्थिर से अधिक ध्यान खींचती है।
½ अंक — प्रत्येक कारक (4×½ = 2)
Q.25प्रेक्षणात्मक अधिगम + बंडूरा का प्रयोग2 अंक
प्रेक्षणात्मक अधिगम (Observational Learning): किसी दूसरे व्यक्ति के व्यवहार को देखकर सीखना। इसे "सामाजिक अधिगम" या "मॉडलिंग" भी कहते हैं।
बंडूरा का बोबो डॉल प्रयोग (1961): बच्चों को एक वयस्क को inflatable doll (Bobo) के साथ आक्रामक व्यवहार करते देखने दिया। बाद में बच्चों ने भी वैसा ही व्यवहार किया — बिना किसी पुनर्बलन के। यह सिद्ध किया कि देखकर सीखा जा सकता है।
1 अंक — परिभाषा1 अंक — प्रयोग
Q.26LTM के दो प्रकार + उदाहरण2 अंक
दीर्घकालिक स्मृति के दो मुख्य प्रकार:
1. घोषणात्मक (Declarative) स्मृति: तथ्यों और घटनाओं की स्मृति जिसे शब्दों में बताया जा सके।
• अर्थपूर्ण (Semantic): सामान्य ज्ञान — "दिल्ली भारत की राजधानी है।"
• घटनापरक (Episodic): व्यक्तिगत अनुभव — "मेरी पहली परीक्षा।"
2. प्रक्रियामूलक (Procedural) स्मृति: कौशल और आदतों की स्मृति जो व्यवहार में दिखती है। उदाहरण: साइकिल चलाना, टाइपिंग।
1 अंक — प्रत्येक प्रकार + उदाहरण
Q.27सृजनात्मक चिन्तन की दो विशेषताएँ2 अंक
1. विचलनशील चिन्तन (Divergent Thinking): एक समस्या के अनेक समाधान सोचने की क्षमता। यह पारंपरिक सोच से हटकर नई दिशाओं में जाता है।
2. मौलिकता (Originality): सृजनात्मक विचार पूर्णतः नए होते हैं — पहले कभी नहीं सोचे गए। इसके साथ "प्रवाहशीलता" (Fluency — अनेक विचार उत्पन्न करना) और "लचीलापन" (Flexibility) भी होता है।
चिह्न ह्रास सिद्धांत: इस सिद्धांत के अनुसार जब कोई सूचना सीखी जाती है, तो मस्तिष्क में एक स्मृति-चिह्न (Memory Trace / Engram) बनता है।
समय के साथ, यदि उस सूचना का उपयोग नहीं किया जाता, तो स्मृति-चिह्न धीरे-धीरे कमजोर होता जाता है और अंततः लुप्त हो जाता है — यही विस्मरण है।
सीमा: इससे यह नहीं समझाया जा सकता कि बचपन की पुरानी यादें क्यों याद रहती हैं जबकि नई बातें भूल जाती हैं।
1 अंक — परिभाषा/सिद्धांत1 अंक — सीमा/विशेषता
Q.30संवेग की दो विशेषताएँ + दो मूल संवेग2 अंक
दो विशेषताएँ:
1. तीव्रता: संवेग अचानक और तीव्रता से उभरता है — जैसे अचानक भय या आनंद।
2. शारीरिक परिवर्तन: संवेग में हृदय की गति, श्वसन, रक्तचाप में परिवर्तन होता है।
दो मूल संवेग (पॉल एकमैन के अनुसार):
1. भय (Fear) — खतरे की स्थिति में।
2. क्रोध (Anger) — बाधा या अन्याय पर। (अन्य मान्य: आनंद, दुःख, घृणा, आश्चर्य)
1 अंक — दो विशेषताएँ1 अंक — दो मूल संवेग
खण्ड — स | लघूत्तर उत्तर — दोनों विकल्प (5 अंक प्रत्येक)
Q.31(अ)जाँच की प्रमुख विधियाँ + प्रयोग विधि की विशेषताएँ व सीमाएँ5 अंक
प्रमुख जाँच विधियाँ:
(1) प्रेक्षण विधि (2) प्रयोग विधि (3) सर्वेक्षण (4) व्यक्ति अध्ययन (5) मनोवैज्ञानिक परीक्षण (6) सहसम्बन्धात्मक अनुसंधान
प्रयोग विधि की विशेषताएँ:
• नियंत्रण: स्वतंत्र चर बदला जाता है, शेष नियंत्रित।
• कारण-प्रभाव संबंध: एकमात्र विधि जो कारणता सिद्ध कर सकती है।
• पुनरावृत्ति योग्य: प्रयोग दोबारा किया जा सकता है।
• वस्तुनिष्ठता: व्यक्तिगत पूर्वाग्रह कम होता है।
प्रयोग विधि की सीमाएँ:
• कृत्रिम (प्रयोगशाला) वातावरण में व्यवहार स्वाभाविक नहीं होता।
• कई मानवीय व्यवहारों पर प्रयोग नैतिक दृष्टि से संभव नहीं।
• महँगा और समय-साध्य।
• जटिल सामाजिक व्यवहार का प्रयोगशाला में अध्ययन कठिन।
1 अंक — विधियों की सूची2 अंक — प्रयोग विधि की विशेषताएँ2 अंक — सीमाएँ
Q.31(ब)सर्वेक्षण अनुसंधान — प्रकार एवं उपयोग5 अंक
सर्वेक्षण अनुसंधान: बड़ी जनसंख्या से जानकारी एकत्र करने की विधि। इसमें प्रतिभागियों से प्रश्नों के उत्तर लिए जाते हैं — प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष।
प्रमुख प्रकार:
1. प्रश्नावली (Questionnaire): लिखित प्रश्न, स्व-प्रशासित। सबसे सामान्य।
2. साक्षात्कार (Interview): आमने-सामने या फोन पर। गहराई से जानकारी।
3. अभिवृत्ति मापनी (Rating Scale): किसी विषय पर मत जानना (Likert Scale)।
4. ऑनलाइन सर्वेक्षण: आधुनिक, त्वरित, बड़ी संख्या।
उपयोग/महत्त्व:
• जन-मत, सामाजिक समस्याओं, स्वास्थ्य व्यवहार का अध्ययन।
• सरल उदाहरण: चुनाव पूर्व सर्वेक्षण, छात्रों की शैक्षिक समस्याएँ जानना।
• सीमा: उत्तरदाता झूठ बोल सकते हैं, नमूना पक्षपाती हो सकता है।
1 अंक — परिभाषा2 अंक — प्रकार2 अंक — उपयोग + सीमा
Q.32(अ)गेस्टाल्ट प्रात्यक्षिक संगठन के नियम (चार)5 अंक
गेस्टाल्ट सिद्धांत का मूल: "संपूर्ण, अपने अवयवों के योग से अधिक होता है।" मस्तिष्क उद्दीपकों को संगठित रूप में देखता है।
चार प्रमुख नियम:
1. समीपता (Proximity): पास-पास की वस्तुएँ एक समूह मानी जाती हैं।
◆◆ ◆◆ ◆◆ → तीन जोड़े दिखते हैं।
2. समानता (Similarity): एक जैसी दिखने वाली वस्तुएँ एक समूह।
○○●●○○●● → गोले और भरे वृत्त अलग-अलग समूह।
3. संपूर्णता (Closure): अधूरी आकृति को मस्तिष्क पूरा मान लेता है।
खुला हुआ वृत्त भी वृत्त दिखता है।
4. सातत्य (Continuity): वस्तुएँ सीधी या धाराप्रवाह रेखा के रूप में देखी जाती हैं।
आकृति-पृष्ठभूमि (Figure-Ground): किसी एक भाग को केंद्र (आकृति) और बाकी को पृष्ठभूमि के रूप में देखना। रुबिन का फूलदान-चेहरा द्वि-स्थिर चित्र प्रसिद्ध उदाहरण है।
1 अंक — परिचय/मूल विचार3 अंक — चार नियम (¾ प्रत्येक)1 अंक — Figure-Ground
Q.32(ब)प्रत्यक्षण पर सामाजिक-सांस्कृतिक प्रभाव + प्रत्यक्षीय स्थैर्य5 अंक
सामाजिक एवं सांस्कृतिक प्रभाव:
• सांस्कृतिक संदर्भ: अलग-अलग संस्कृतियों में एक ही वस्तु का अर्थ अलग होता है। उदाहरण: गाय — भारत में पूजनीय, पश्चिम में साधारण पशु।
• अभ्यास एवं अनुभव: रेडियोलॉजिस्ट X-ray में जो देखता है, आम आदमी नहीं देख सकता।
• प्रेरणा एवं आवश्यकता: भूखे व्यक्ति को खाने की चीजें पहले दिखती हैं।
• पूर्वाग्रह (Perceptual Set): पहले से बनी धारणाएँ प्रत्यक्षण को बदल देती हैं।
प्रत्यक्षीय स्थैर्य (Perceptual Constancy):
उद्दीपक बदलने पर भी वस्तु को वही देखना जो वह वास्तव में है।
• आकार स्थैर्य: दूर की कार छोटी दिखती है पर हम जानते हैं वह उतनी ही बड़ी है।
• रंग स्थैर्य: रोशनी बदलने पर भी कोयला काला और दूध सफेद दिखता है।
• आकृति स्थैर्य: दरवाजा खुलने पर उसकी आकृति बदलती दिखती है पर हम उसे आयताकार मानते हैं।
Q.33(अ)संज्ञानात्मक अधिगम + कोहलर का अन्तर्दृष्टि अधिगम5 अंक
संज्ञानात्मक अधिगम: वह अधिगम जिसमें व्यक्ति केवल उद्दीपक-अनुक्रिया नहीं, बल्कि सोचकर, समझकर, संबंध जोड़कर सीखता है। मानसिक प्रक्रियाएँ — ध्यान, स्मृति, चिन्तन — केंद्रीय भूमिका निभाती हैं।
कोहलर का अन्तर्दृष्टि अधिगम (Insight Learning): प्रयोग: वुल्फगैंग कोहलर ने चिम्पांजी "सुल्तान" पर प्रयोग किया। एक लंबी छड़ी, एक छोटी छड़ी और केला छत से लटकाया गया। पिंजरे में बाधा भी थी। परिणाम: सुल्तान ने अचानक समझकर (Aha! moment) दोनों छड़ियाँ जोड़ीं और केला उतारा।
अन्तर्दृष्टि की विशेषताएँ:
• समस्या का अचानक हल (Sudden Solution)।
• एक बार सीखा तो भूलता नहीं (Retention)।
• अन्य स्थितियों में भी लागू होता है (Transfer)।
• परीक्षण-त्रुटि नहीं — पूरी स्थिति को समझकर हल।
Q.33(ब)स्किनर का क्रियाप्रसूत अनुबंधन + धनात्मक vs ऋणात्मक पुनर्बलन5 अंक
क्रियाप्रसूत अनुबंधन (Operant Conditioning — B.F. Skinner):
जब कोई व्यवहार उसके परिणामों के कारण बढ़ता या घटता है। स्किनर ने "Skinner Box" में चूहे पर प्रयोग किया। चूहे ने लीवर दबाया → भोजन मिला → व्यवहार बार-बार दोहराया।
पुनर्बलन के प्रकार (Reinforcement Types):
प्रकार
अर्थ
उदाहरण
धनात्मक (+)
सुखद उद्दीपक जोड़ना
शाबाशी, पुरस्कार, अंक
ऋणात्मक (−)
कष्टकर उद्दीपक हटाना
परीक्षा में पास होने पर फीस माफ
दंड (+Pun)
कष्टकर उद्दीपक जोड़ना
गलत उत्तर पर डाँट
विराम
सुखद उद्दीपक हटाना
TV बंद करना
मुख्य अंतर: धनात्मक = कुछ दो; ऋणात्मक = कुछ हटाओ — दोनों व्यवहार बढ़ाते हैं (यह दंड नहीं है!)। अनुप्रयोग: कक्षा में पुरस्कार प्रणाली, Token Economy, व्यवहार चिकित्सा।
खण्ड — द | निबंधात्मक उत्तर — दोनों विकल्प (5 अंक प्रत्येक)
Q.34(अ)मानव विकास की विकासात्मक अवस्थाएँ — समग्र दृष्टि5 अंक
विकास का अर्थ: गर्भाधान से मृत्यु तक होने वाले शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, संज्ञानात्मक परिवर्तनों की निरंतर प्रक्रिया।
प्रसवपूर्व अवस्था (Prenatal) — गर्भाधान से जन्म:
तीन चरण: जर्मिनल (0–2 सप्ताह) → एम्ब्रियो (2–8 सप्ताह) → भ्रूण (8 सप्ताह–जन्म)। सभी मूल अंगों का निर्माण।
शैशवावस्था (0–2 वर्ष):
तेज शारीरिक विकास। पियाजे का संवेदी-गामक चरण। एरिकसन: विश्वास vs अविश्वास। भाषा की शुरुआत।
किशोरावस्था (12–18/20 वर्ष):
यौवनारंभ, तीव्र हार्मोनल परिवर्तन। औपचारिक संक्रियात्मक चिन्तन (पियाजे)। पहचान बनाम भूमिका भ्रम (एरिकसन)। साथियों का प्रभाव तीव्र।
प्रौढ़ावस्था एवं वृद्धावस्था:
• प्रौढ़ावस्था: करियर, परिवार, जिम्मेदारी। एरिकसन: आत्मीयता vs एकांत, उत्पादकता vs जड़ता।
• वृद्धावस्था: शारीरिक ह्रास परंतु प्रज्ञा की वृद्धि। एरिकसन: अखंडता vs निराशा। सेवानिवृत्ति का समायोजन।
1 अंक — विकास का अर्थ + प्रसवपूर्व1 अंक — शैशव + बाल्यावस्था2 अंक — किशोरावस्था (विस्तृत)1 अंक — प्रौढ़/वृद्धावस्था
Q.34(ब)किशोरावस्था की चुनौतियाँ + एरिकसन का सिद्धांत5 अंक
किशोरावस्था की परिभाषा: 12–18/20 वर्ष। शारीरिक, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक परिवर्तनों की तीव्र अवस्था। "तूफान एवं तनाव" (Storm and Stress — Hall) की अवस्था।
प्रमुख चुनौतियाँ:
1. यौवनारंभ (Puberty): हार्मोनल, शारीरिक परिवर्तन से सामंजस्य।
2. पहचान संकट: "मैं कौन हूँ?" — मूल्य, विश्वास, भूमिका स्थापित करना।
3. साथियों का दबाव: नशा, हिंसा, जोखिम व्यवहार।
4. माता-पिता से स्वतंत्रता: संघर्ष और निर्भरता का द्वंद्व।
5. शैक्षिक एवं करियर दबाव: भविष्य की चिंता।
एरिकसन का मनोसामाजिक सिद्धांत — अवस्था 5: संघर्ष: पहचान (Identity) बनाम भूमिका भ्रम (Role Confusion)
किशोर विभिन्न भूमिकाएँ — छात्र, पुत्र, मित्र, नागरिक — में से अपनी स्थायी पहचान बनाता है। सफल समाधान पर: "निष्ठा" (Fidelity) — अपने मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता। असफल होने पर: भूमिका भ्रम — अस्थिरता, असमंजस।
निदान/सुझाव: परिवार का सहयोग, शिक्षकों का मार्गदर्शन, जीवन कौशल शिक्षा, करियर काउंसलिंग।
एटकिंसन-शिफरिन मॉडल (1968):
सूचना तीन क्रमिक भंडारों से होकर गुजरती है। प्रत्येक की अलग क्षमता और अवधि है।
तीनों स्मृतियों की तुलना:
विशेषता
संवेदी स्मृति
STM
LTM
अवधि
0.5–3 सेकंड
20–30 सेकंड
आजीवन
क्षमता
असीमित
7±2 इकाई
असीमित
कूटन
इन्द्रिय-संवेदना
ध्वनि/अर्थ
अर्थ/छवि
विस्मरण
क्षय
क्षय/व्यवधान
व्यवधान/संकेत
उदाहरण
चमकती बिजली
फोन नंबर
बचपन की यादें
कार्यकारी स्मृति (Working Memory — Baddeley): STM का आधुनिक मॉडल। चार घटक: ध्वन्यात्मक पाश, दृश्य-स्थानिक स्केचपैड, केंद्रीय कार्यकारी, एपिसोडिक बफर।
1 अंक — मॉडल का परिचय/प्रवाह3 अंक — तुलनात्मक तालिका1 अंक — Working Memory / अतिरिक्त बिंदु
Q.35(ब)विस्मरण के कारण + स्मृति वृद्धि के उपाय5 अंक
विस्मरण के प्रमुख कारण:
1. चिह्न ह्रास (Trace Decay): समय के साथ स्मृति-चिह्न का कमजोर होना।
2. व्यवधान (Interference): पूर्वक्रियाशील (पुरानी बाधित करे) + पश्चक्रियाशील (नई बाधित करे)।
3. संकेत अनुपस्थिति: उचित संकेत (cue) न मिलने पर सूचना मिलती नहीं।
4. दमन (Repression — फ्रायड): कष्टकर यादें अचेतन में दब जाती हैं।
5. अवरोध: सूचना पहुँची ही नहीं — ध्यान न देने से LTM में कूटन नहीं हुई।
स्मृति वृद्धि के उपाय:
1. विस्तृत पुनरावृत्ति (Elaborative Rehearsal): अर्थ समझकर याद करना — सतही नहीं।
2. संगठन एवं वर्गीकरण: सूचनाओं को श्रेणीबद्ध करना।
3. स्मृति-सहायक संकेत (Mnemonics): शब्द-संक्षेप, तुकबंदी, चित्र।
4. विश्राम एवं नींद: नींद में LTM consolidation होती है।
5. अभ्यास (spaced repetition): थोड़े-थोड़े अंतर से दोहराना।
व्यावहारिक सुझाव: Mind Map बनाएँ, किसी को पढ़ाएँ (Feynman Technique), context-dependent memory का उपयोग।
2 अंक — विस्मरण के 5 कारण2 अंक — स्मृति वृद्धि के उपाय1 अंक — व्यावहारिक सुझाव
🔺 पिरामिड (नीचे → ऊपर): शारीरिक → सुरक्षा → प्रेम/अपनत्व → सम्मान → आत्म-अभिसाक्षात्कार
अभिप्रेरणा (Motivation): वह आंतरिक अवस्था जो व्यक्ति को किसी लक्ष्य की ओर क्रियाशील करती है, व्यवहार को दिशा देती है और उसे बनाए रखती है।
मास्लो का आवश्यकता पदानुक्रम (1943): D-Needs (न्यूनता आवश्यकताएँ) — स्तर 1–4:
1. शारीरिक: भूख, प्यास, नींद — सबसे मूलभूत।
2. सुरक्षा: शारीरिक, आर्थिक, भावनात्मक सुरक्षा।
3. प्रेम/अपनत्व: परिवार, मित्र, समूह से जुड़ाव।
4. सम्मान: आत्म-सम्मान, दूसरों से मान्यता। B-Need (विकास आवश्यकता) — स्तर 5:
5. आत्म-अभिसाक्षात्कार: अपनी पूर्ण क्षमता का विकास, सृजनात्मकता, अर्थपूर्ण जीवन।
स्व-अभिप्रेरणा (Intrinsic/Self-Motivation):
बाहरी पुरस्कार की आवश्यकता के बिना, केवल आंतरिक संतोष, जिज्ञासा या रुचि से कार्य करना।
उदाहरण: छात्र जो बिना इनाम के पढ़ता है क्योंकि उसे ज्ञान से आनंद मिलता है। Deci & Ryan का Self-Determination Theory: स्वायत्तता, दक्षता, सम्बन्धता — तीनों पूरे हों तो स्व-अभिप्रेरणा उच्च।
आलोचना: सभी आवश्यकताएँ सदैव क्रमिक नहीं होतीं। कुछ लोग सुरक्षा छोड़कर कला/आदर्श के लिए जीते हैं।
Q.36(ब)संवेग का स्वरूप, विशेषताएँ, अभिव्यक्ति + परीक्षा-दुश्चिन्ता प्रबंधन5 अंक
संवेग का स्वरूप (Emotion):
तीव्र, अल्पकालिक, जटिल मनोदैहिक अवस्था जो व्यवहार को प्रभावित करती है। इसके चार घटक: (1) व्यक्तिपरक अनुभव (2) शारीरिक उत्तेजना (3) संज्ञानात्मक मूल्यांकन (4) व्यवहारात्मक अभिव्यक्ति।
विशेषताएँ:
• तीव्रता और अचानकपन।
• शारीरिक परिवर्तन — हृदय गति, श्वसन, पसीना।
• संस्कृति का प्रभाव — अभिव्यक्ति सांस्कृतिक नियमों से बंधी।
• एकमैन के 6 सार्वभौमिक संवेग: भय, क्रोध, दुःख, आनंद, आश्चर्य, घृणा।
परीक्षा-दुश्चिन्ता (Examination Anxiety):
परीक्षा के पहले या दौरान अत्यधिक चिंता, भय, घबराहट। शारीरिक लक्षण: पसीना, हाथ काँपना, पेट दर्द। मानसिक: blank mind, एकाग्रता नहीं।
परीक्षा-दुश्चिन्ता प्रबंधन के उपाय:
1. तैयारी: नियमित अध्ययन, revision — आत्मविश्वास का सबसे बड़ा स्रोत।
2. गहरी श्वास/ध्यान: परीक्षा से पहले 5 मिनट श्वास व्यायाम।
3. सकारात्मक आत्म-वार्ता: "मैं कर सकता हूँ" — Positive Self-Talk।
4. समय प्रबंधन: परीक्षा में प्रश्न पत्र पहले पढ़ें, आसान से शुरू करें।
5. पर्याप्त नींद: परीक्षा से पहले 7–8 घंटे की नींद अनिवार्य।
6. काउंसलिंग: गंभीर दुश्चिन्ता में मनोवैज्ञानिक परामर्श।
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