🔗 RBSE Class 11 Sanskrit Sahitya (2026) — Quick Links
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🔑 उत्तर कुंजी / ANSWER KEY
माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, राजस्थान, अजमेर
पाठ्यक्रम सत्र 2025–2026
संस्कृत साहित्य | विषय कोड – 12 | कक्षा – 11
पुस्तक : शाश्वती प्रथमो भागः📥 Model Paper + More Resources: ncertclasses.com
शिक्षकों के लिए नोट: यह उत्तर कुंजी आदर्श उत्तर प्रदान करती है। जहाँ वैकल्पिक उत्तर संभव हैं, वे हरे रंग में दिए गए हैं। प्रत्येक प्रश्न के अंकभार के अनुसार मूल्यांकन करें।
| विभाग | विषय | प्रश्न संख्या | पूर्णांक |
|---|---|---|---|
| 1 | पठितावबोधनम् | 1 – 7 | 40 |
| 2 | संस्कृत साहित्यस्य इतिहास | 8 – 10 | 10 |
| 3 | अपठितावबोधनम् | 11 | 08 |
| 4 | रचनात्मककार्यम् | 12 – 14 | 12 |
| 5 | अनुप्रयुक्त व्याकरणम् | 15 – 22 | 30 |
| कुल / Total | 100 | ||
विभाग 1 — पठितावबोधनम्
40 अंक
प्र. 1
बहुविकल्पात्मक प्रश्नाः (सप्त)
1×7 = 7
सही उत्तर (Correct Options)
प्र. (1)
(क)
किरातार्जुनीयम्
प्र. (2)
(ख)
पञ्च
प्र. (3)
(क)
रंगमञ्चस्य पश्चात् भागः
प्र. (4)
(क)
विक्रमादित्यस्य
प्र. (5)
(ख)
वाल्मीकिः
प्र. (6)
(ख)
शूद्रकः
प्र. (7)
(क)
700
प्र. 2
पाठ्यपुस्तकात् अंशत्रयम् (गद्यांश + पद्यांश + नाट्यांश)
6+6+6 = 18
【क】 गद्यांश — उत्तराणि
"अस्माकं देशः भारतवर्षः अस्ति… वयं सर्वे एकस्यैव राष्ट्रस्य नागरिकाः स्मः।"
(क) एकपदेन — ½×2=1
| प्रश्नः | उत्तरम् |
|---|---|
| (i) अस्माकं देशः कः ? | भारतवर्षः |
| (ii) अस्मिन् देशे का विद्यते ? | एकता |
(ख) पूर्णवाक्येन — 1×2=2
| प्रश्नः | आदर्श उत्तरम् |
|---|---|
| (i) वयं कीदृशाः जनाः स्मः ? | वयं एकस्यैव राष्ट्रस्य नागरिकाः स्मः। |
| (ii) वयं परस्परं कथं जीवामः ? | वयं परस्परं स्नेहेन जीवामः। |
(ग) भाषिककार्यम् — 1×3=3
| कार्यम् | उत्तरम् |
|---|---|
| (i) कर्तृक्रियापद | वयं — जीवामः / देशः — अस्ति |
| (ii) विशेषण-विशेष्य | नानाधर्माः (विशेषणम्) — धर्माः (विशेष्यम्) |
| (iii) 'नागरिकाः' पर्यायः | जनाः / पुरवासिनः |
【ख】 पद्यांश — उत्तराणि
विद्या ददाति विनयं, विनयाद् याति पात्रताम्।
पात्रत्वाद् धनमाप्नोति, धनात् धर्मं ततः सुखम्॥
पात्रत्वाद् धनमाप्नोति, धनात् धर्मं ततः सुखम्॥
(क) एकपदेन — ½×2=1
| प्रश्नः | उत्तरम् |
|---|---|
| (i) विद्या किं ददाति ? | विनयम् |
| (ii) धनात् किं लभते ? | धर्मम् (ततः सुखम्) |
(ख) पूर्णवाक्येन — 1×2=2
| प्रश्नः | आदर्श उत्तरम् |
|---|---|
| (i) विनयात् किं प्राप्यते ? | विनयात् पात्रता प्राप्यते। |
| (ii) पात्रत्वात् किं भवति ? | पात्रत्वात् धनम् आप्नोति। |
(ग) भाषिककार्यम् — 1×3=3
| कार्यम् | उत्तरम् |
|---|---|
| (i) 'सुखम्' विलोमः | दुःखम् |
| (ii) 'धनम्' पर्यायः | वित्तम् / अर्थः / द्रव्यम् |
| (iii) क्रियापदम् | ददाति / याति / आप्नोति |
पर्यायों में से कोई एक सही उत्तर स्वीकार्य है।
【ग】 नाट्यांश — उत्तराणि
सूत्रधारः — आर्ये! श्रोतारः प्रतीक्षन्ते…
नटी — …अद्य वयं 'शाकुन्तलम्' इति नाटकं प्रस्तुतुम् इच्छामः।
नटी — …अद्य वयं 'शाकुन्तलम्' इति नाटकं प्रस्तुतुम् इच्छामः।
(क) एकपदेन — ½×2=1
| प्रश्नः | उत्तरम् |
|---|---|
| (i) अद्य कस्य नाटकस्य प्रदर्शनम् ? | शाकुन्तलम् |
| (ii) के प्रतीक्षन्ते ? | श्रोतारः |
(ख) पूर्णवाक्येन — 1×2=2
| प्रश्नः | आदर्श उत्तरम् |
|---|---|
| (i) सूत्रधारः नटीं किं वदति ? | सूत्रधारः नटीं वदति — आर्ये! श्रोतारः प्रतीक्षन्ते, नाटकस्य प्रारम्भः भवतु। |
| (ii) नटी किं करोति ? | नटी नाटकप्रारम्भाय सम्मतिं ददाति। |
(ग) भाषिककार्यम् — 1×3=3
| कार्यम् | उत्तरम् |
|---|---|
| (i) संज्ञा-सर्वनाम | सूत्रधारः / नटी (संज्ञा) — वयम् / आर्ये (सर्वनामः) |
| (ii) 'सूत्रधारः' विशेषणम् | नाट्यांशे विशेषणं नास्ति; परन्तु 'मुख्य पात्रम्' इति संकल्पः |
| (iii) 'प्रारभामहे' कर्तृपदम् | वयम् (अस्माद्) |
प्र. 3
पद्यस्य अन्वयलेखनम्
3
आदर्श अन्वयः
अन्वयः —
विद्या विनयम् ददाति।
विनयात् पात्रतां याति।
पात्रत्वात् धनम् आप्नोति।
धनात् धर्मम् ततः सुखम् (लभते)।
रिक्त स्थान भराने का क्रम: विनयम् → विनयात् → पात्रत्वात् → धर्मम् → सुखम्। प्रत्येक रिक्त स्थान = 0.6 अंक (3÷5)।
प्र. 4
सूक्तवचनस्य हिन्दीभाषायां भावार्थलेखनम्
2
आदर्श भावार्थः — "यद्भावं तद्भवति"
हिन्दी भावार्थ: इस सूक्ति का अर्थ है — "जैसा भाव होता है, वैसा ही परिणाम होता है।"
अर्थात् मनुष्य जो सोचता है, जो भावना रखता है — उसी के अनुसार उसका जीवन और कार्य ढलते हैं।
सकारात्मक भाव से सकारात्मक परिणाम और नकारात्मक भाव से नकारात्मक परिणाम मिलते हैं।
यह सूक्ति मन की शक्ति को दर्शाती है।
1 अंक — सूक्ति का अर्थ स्पष्ट करना
1 अंक — भाव का विस्तार / व्यावहारिक उदाहरण
प्र. 5
गद्यपाठस्य हिन्दीभाषायां सारलेखनम् — 'भारतीयसंस्कृतिः'
3
आदर्श सारः (हिन्दी — लगभग 60-70 शब्द)
भारतीय संस्कृति विश्व की सबसे प्राचीन और समृद्ध संस्कृतियों में से एक है। यहाँ अनेक धर्म, भाषाएँ और परम्पराएँ एक साथ विकसित हुई हैं। 'वसुधैव कुटुम्बकम्' की भावना इसकी आत्मा है। यहाँ गुरु-शिष्य परम्परा, यज्ञ, संस्कार और वेद-पुराण सदियों से जीवित हैं। भारतीय संस्कृति त्याग, सेवा और सहिष्णुता सिखाती है और विश्व को शांति का सन्देश देती है।
1 अंक — संस्कृति की प्राचीनता
1 अंक — मुख्य विशेषताएँ
1 अंक — भाषा-शुद्धि + शब्दसीमा
प्र. 6
शब्दार्थलेखनम् (षट्शब्दानाम्)
½×6 = 3
शब्दार्थाः
| शब्दः | अर्थः (संस्कृते) | हिन्दी अर्थ |
|---|---|---|
| (i) पात्रता | योग्यता | योग्यता / अधिकार |
| (ii) विनयः | नम्रता / शिष्टाचारः | विनम्रता |
| (iii) धर्मः | कर्तव्यम् / नियमः | धर्म / कर्तव्य |
| (iv) सूत्रधारः | नाटकस्य प्रमुखः संचालकः | नाटक का निर्देशक |
| (v) नेपथ्यम् | रंगमञ्चस्य पश्चाद्भागः | मंच का पिछला भाग |
| (vi) आत्मगतम् | स्वमनसि उक्तम् | मन में कही बात |
प्र. 7
रेखाङ्कितपदानि आधृत्य प्रश्ननिर्माणम् (चत्वारः)
1×4 = 4
आदर्श प्रश्नाः
| मूलवाक्यम् | आदर्शप्रश्नः |
|---|---|
| (i) कालिदासः महाकविः आसीत्। | कः महाकविः आसीत् ? |
| (ii) रामायणे चतुर्विंशतिसहस्रश्लोकाः। | कस्मिन् चतुर्विंशतिसहस्रश्लोकाः सन्ति ? |
| (iii) नाटकम् रंगमञ्चे प्रदर्श्यते। | किं रंगमञ्चे प्रदर्श्यते ? |
| (iv) विद्यया विनयः प्राप्यते। | कया विनयः प्राप्यते ? |
प्रश्ननिर्माण में उचित प्रश्नवाचक शब्द (कः/किम्/कया/कस्मिन्) का प्रयोग आवश्यक है। — प्रत्येक 1 अंक।
विभाग 2 — संस्कृत साहित्यस्य इतिहास
10 अंक
प्र. 8
प्रमुख लेखकानां संक्षिप्त परिचयः (द्वयोः)
6 (3+3)
आदर्श उत्तर — कोई भी दो
(क) कालिदासः
| बिन्दु | विवरण |
|---|---|
| समयः (काल) | चतुर्थ-पञ्चम शती ई. (गुप्तकाल) |
| प्रमुख कृतयः | रघुवंशम्, कुमारसम्भवम्, मेघदूतम्, अभिज्ञानशाकुन्तलम्, विक्रमोर्वशीयम्, मालविकाग्निमित्रम् |
| विशेषता | उपमा कालिदासस्य। प्रकृतिचित्रण, श्रृङ्गाररस, सुललित भाषाशैली। |
(ख) भवभूतिः
| बिन्दु | विवरण |
|---|---|
| समयः | अष्टम शती ई. (राष्ट्रकूटकाल) |
| प्रमुख कृतयः | उत्तररामचरितम्, मालतीमाधवम्, महावीरचरितम् |
| विशेषता | करुणरस प्रधान। "एको रसः करुण एव।" गम्भीर दार्शनिक भाव। |
(ग) माघः (वैकल्पिक)
| बिन्दु | विवरण |
|---|---|
| समयः | सप्तम शती ई. |
| प्रमुख कृति | शिशुपालवधम् (20 सर्ग, 1800+ श्लोक) |
| विशेषता | "माघे सन्ति त्रयो गुणाः।" — ओजस्वी शैली, शब्दालंकार-प्रधान। |
1 अंक — काल/समय
1 अंक — कृतियाँ
1 अंक — विशेषता/शैली
× 2 लेखक = 6 अंक
प्र. 9
नाट्यविषयक शब्दावलीपरिचयः
2
आदर्श परिभाषाः
| शब्दः | परिभाषा (संस्कृते/हिन्दी) |
|---|---|
| नान्दी | नाटकस्य आरम्भे देवताः आशीर्वादाय उच्चारिताः श्लोकाः। (नाटक के प्रारम्भ में देवस्तुति — मंगलाचरण।) |
| भरतवाक्यम् | नाटकस्य अन्ते राजाय / सर्वेभ्यः शुभाशंसावचनम्। (नाटक के अन्त में आशीर्वाद-वाक्य।) |
प्र. 10
रामायणम् / महाभारतम् — संक्षिप्त परिचयः
2
आदर्श उत्तर — (कोई एक)
🔹 रामायणम्
रचयिता: महर्षि वाल्मीकि | काण्डाः: 7 (बालकाण्ड से उत्तरकाण्ड) |
श्लोकसंख्या: 24,000 (चतुर्विंशतिसहस्र) |
महत्त्वम्: भारतीय संस्कृति का आधार, आदर्श पुत्र, आदर्श राजा, आदर्श पत्नी के चरित्र का वर्णन।
🔹 महाभारतम्
रचयिता: महर्षि वेदव्यास | पर्वाणि: 18 |
श्लोकसंख्या: 1,00,000 (एक लक्ष) |
महत्त्वम्: विश्व का सबसे बड़ा महाकाव्य, भगवद्गीता इसी में। धर्म-अधर्म का महासंग्राम।
विभाग 3 — अपठितावबोधनम्
08 अंक
प्र. 11
अपठितगद्यांशः — "प्रकृतिरक्षणम्"
8
प्रकृतिः अस्माकं माता अस्ति… स्वच्छपर्यावरणे एव सुखं विद्यते।
उत्तराणि
(क) एकपदेन — 1×2=2
| प्रश्नः | उत्तरम् |
|---|---|
| (i) प्रकृतिः अस्माकं का अस्ति ? | माता |
| (ii) वृक्षाः के सन्ति ? | मित्राणि |
(ख) पूर्णवाक्येन — 1×3=3
| प्रश्नः | आदर्श उत्तरम् |
|---|---|
| (i) वृक्षाः किं किं यच्छन्ति ? | वृक्षाः वर्षाम् आनयन्ति, वायुशुद्धिं कुर्वन्ति, छायां च प्रयच्छन्ति। |
| (ii) मानवाः किं कुर्वन्ति ? | मानवाः स्वार्थवशात् वृक्षान् छिन्दन्ति, पर्यावरणं च नाशयन्ति। |
| (iii) अस्माभिः किं कर्तव्यम् ? | अस्माभिः वृक्षान् रोपयेम, जलं रक्षेम, वायुदूषणं वारयेम। |
(ग) भाषिककार्यम् — ½×4=2
| कार्यम् | उत्तरम् |
|---|---|
| (i) विशेषण-विशेष्य | स्वच्छम् (विशेषण) — पर्यावरणम् (विशेष्य) |
| (ii) 'नाशयन्ति' कर्तृपदम् | मानवाः |
| (iii) 'मित्रभावेन' विभक्तिः | तृतीया विभक्तिः (करण कारकम्) |
| (iv) 'छिन्दन्ति' विलोमक्रिया | रोपयन्ति / वर्धयन्ति |
(घ) समुचितशीर्षकम् — 1
✅ स्वीकार्य शीर्षकाः (कोई एक) —
"प्रकृति-रक्षणम्" /
"वृक्षाणां महत्त्वम्" /
"पर्यावरणस्य रक्षणम्" /
"वृक्षाः अस्माकं मित्राणि"
विभाग 4 — रचनात्मककार्यम्
12 अंक
प्र. 12
पत्रलेखनम् — औपचारिक / अनौपचारिक
4
आदर्श औपचारिक प्रार्थनापत्रम् (अवकाशार्थम्)
सेवायाम्,
श्रीमन्तः प्राचार्यमहोदयाः,
_______ विद्यालयः, जोधपुरम्।
विषयः — ज्वरपीडितस्य अवकाशार्थं प्रार्थनापत्रम्।
मान्यवर,
सविनयं निवेदनं अस्ति यत् अहं गतद्वयाहात् ज्वरपीडितः अस्मि। चिकित्सकेन विश्रामः आदिष्टः अतः विद्यालयं आगन्तुं अशक्तोऽस्मि। अतः दिनद्वयस्य (दिनाङ्कः ______ तः _______ पर्यन्तम्) अवकाशं प्रदातुं कृपया अनुग्रहं करोतु।
भवतः आज्ञाकारी शिष्यः,
_______ (नाम)
कक्षा — 11, क्रमांकः — _______
दिनाङ्कः — _______________
श्रीमन्तः प्राचार्यमहोदयाः,
_______ विद्यालयः, जोधपुरम्।
विषयः — ज्वरपीडितस्य अवकाशार्थं प्रार्थनापत्रम्।
मान्यवर,
सविनयं निवेदनं अस्ति यत् अहं गतद्वयाहात् ज्वरपीडितः अस्मि। चिकित्सकेन विश्रामः आदिष्टः अतः विद्यालयं आगन्तुं अशक्तोऽस्मि। अतः दिनद्वयस्य (दिनाङ्कः ______ तः _______ पर्यन्तम्) अवकाशं प्रदातुं कृपया अनुग्रहं करोतु।
भवतः आज्ञाकारी शिष्यः,
_______ (नाम)
कक्षा — 11, क्रमांकः — _______
दिनाङ्कः — _______________
1 अंक — प्रारूप (Format)
1 अंक — विषयवस्तु
1 अंक — भाषाशुद्धि
1 अंक — उचित समाप्ति
प्र. 13
संकेताधारितम् अनुच्छेद लेखनम्
4
आदर्श अनुच्छेदः — "विद्यायाः महत्त्वम्"
विद्यायाः महत्त्वम्
विद्या मानवस्य सर्वोत्तमं धनम् अस्ति। विद्यया मनुष्यः सभ्यः, सुसंस्कृतः च भवति। विद्याविहीनः मानवः पशुवत् भवति। "विद्या ददाति विनयम्" — इति उक्तिः सर्वविदिता अस्ति। विद्या न चौरेण हर्तुं शक्यते, न च दायादैः विभक्तुम्। अतः विद्यार्जने सर्वे छात्राः निरन्तरं प्रयतेरन्। विद्यैव मानवस्य जीवने प्रकाशं ददाति।
विद्या मानवस्य सर्वोत्तमं धनम् अस्ति। विद्यया मनुष्यः सभ्यः, सुसंस्कृतः च भवति। विद्याविहीनः मानवः पशुवत् भवति। "विद्या ददाति विनयम्" — इति उक्तिः सर्वविदिता अस्ति। विद्या न चौरेण हर्तुं शक्यते, न च दायादैः विभक्तुम्। अतः विद्यार्जने सर्वे छात्राः निरन्तरं प्रयतेरन्। विद्यैव मानवस्य जीवने प्रकाशं ददाति।
1 अंक — परिचय/प्रस्तावना
2 अंक — मुख्यविचार (2-3 वाक्य)
1 अंक — उपसंहार + भाषाशुद्धि
अन्य विषयों (दीपावली / पर्यावरण) के लिए भी समान अंकभार। लगभग 60-80 शब्द आवश्यक।
प्र. 14
अनुवादकार्यम् (हिन्दी → संस्कृत)
4 (1×4)
आदर्श संस्कृतानुवादः
| हिन्दी वाक्यम् | संस्कृत अनुवादः |
|---|---|
| (i) भारत एक महान देश है। | भारतः एकः महान् देशः अस्ति। |
| (ii) छात्र प्रतिदिन विद्यालय जाते हैं। | छात्राः प्रतिदिनं विद्यालयं गच्छन्ति। |
| (iii) पुस्तक ज्ञान का भंडार है। | पुस्तकं ज्ञानस्य भण्डारः अस्ति। |
| (iv) माता सबसे बड़ी गुरु होती है। | माता सर्वेषाम् प्रमुखा गुरुः भवति। |
व्याकरण-सम्मत वैकल्पिक उत्तर भी स्वीकार्य। प्रत्येक सही अनुवाद = 1 अंक।
विभाग 5 — अनुप्रयुक्त व्याकरणम्
30 अंक
प्र. 15
वर्णानाम् उच्चारणस्थानम् + प्रयत्नानि
3 (1×3)
उत्तराणि
| वर्णः | उच्चारणस्थानम् | प्रयत्नः (बाह्य) | प्रयत्नः (आभ्यन्तर) |
|---|---|---|---|
| 'क' | कण्ठः (Guttural) | श्वासः (Unaspirated) | स्पृष्टः |
| 'त' | दन्तः (Dental) | श्वासः | स्पृष्टः |
| 'प' | ओष्ठः (Labial) | श्वासः | स्पृष्टः |
उच्चारणस्थान + प्रयत्न दोनों लिखने पर पूर्ण अंक। केवल स्थान लिखने पर ½ अंक।
प्र. 16
सन्धिः — सन्धिकरणम् / सन्धिविच्छेदः
3
उत्तराणि
(क) सन्धिकरणम्
| पदानि | सन्धिः | सन्धिप्रकारः |
|---|---|---|
| राम + अयनम् | रामायणम् | दीर्घसन्धिः (अ+अ=आ) |
| हिम + आलयः | हिमालयः | दीर्घसन्धिः (अ+आ=आ) |
| वाक् + ईशः | वागीशः | व्यञ्जनसन्धिः (क्→ग्) |
(ख) सन्धिविच्छेदः
| समस्तपदम् | विच्छेदः | सन्धिप्रकारः |
|---|---|---|
| विद्यालयः | विद्या + आलयः | दीर्घसन्धिः |
| देवेन्द्रः | देव + इन्द्रः | गुणसन्धिः (अ+इ=ए) |
| नमस्ते | नमः + ते | विसर्गसन्धिः (ः→स्) |
प्र. 17
शब्दरूपाणि — राम / नदी / पितृ (द्वयोः)
4 (2+2)
रामशब्दः (अकारान्त, पुल्लिंग)
| विभक्तिः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | रामः | रामौ | रामाः |
| द्वितीया | रामम् | रामौ | रामान् |
| तृतीया | रामेण | रामाभ्याम् | रामैः |
| चतुर्थी | रामाय | रामाभ्याम् | रामेभ्यः |
| पञ्चमी | रामात् | रामाभ्याम् | रामेभ्यः |
| षष्ठी | रामस्य | रामयोः | रामाणाम् |
| सप्तमी | रामे | रामयोः | रामेषु |
| सम्बोधन | हे राम! | हे रामौ! | हे रामाः! |
नदीशब्दः (ईकारान्त, स्त्रीलिंग)
| विभक्तिः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | नदी | नद्यौ | नद्यः |
| द्वितीया | नदीम् | नद्यौ | नदीः |
| तृतीया | नद्या | नदीभ्याम् | नदीभिः |
| चतुर्थी | नद्यै | नदीभ्याम् | नदीभ्यः |
| पञ्चमी | नद्याः | नदीभ्याम् | नदीभ्यः |
| षष्ठी | नद्याः | नद्योः | नदीनाम् |
| सप्तमी | नद्याम् | नद्योः | नदीषु |
| सम्बोधन | हे नदि! | हे नद्यौ! | हे नद्यः! |
प्र. 18
धातुरूपाणि — लट्लकार (द्वयोः)
4 (2+2)
भू (भव्) — परस्मैपदी, लट्लकार
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | भवति | भवतः | भवन्ति |
| मध्यमपुरुषः | भवसि | भवथः | भवथ |
| उत्तमपुरुषः | भवामि | भवावः | भवामः |
पठ् — परस्मैपदी, लट्लकार
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | पठति | पठतः | पठन्ति |
| मध्यमपुरुषः | पठसि | पठथः | पठथ |
| उत्तमपुरुषः | पठामि | पठावः | पठामः |
प्र. 19
प्रत्ययः — कृदन्त / तद्धित / स्त्री
4
उत्तराणि
| विभाग | प्रक्रिया | नवपदम् |
|---|---|---|
| (क-i) पठ् + क्त | पठ् + त | पठितः (पढ़ा हुआ) |
| (क-ii) गम् + तुमुन् | गम् + तुम् | गन्तुम् (जाने के लिए) |
| (क-iii) लिख् + क्त्वा | लिख् + त्वा | लिखित्वा (लिखकर) |
| (ख-i) वन + मयट् | वन + मय | वनमयः (वन से भरा) |
| (ख-ii) राजन् + इनि | राजन् + इन् | राजी / राजिन् |
| (ग-i) बालक + टाप् | बालक + आ | बालिका |
| (ग-ii) छात्र + डीप् | छात्र + ई | छात्री |
प्र. 20
अव्यय प्रयोगाः
4
उत्तराणि
| वाक्यम् (रिक्तस्थानम्) | उचितम् अव्ययम् |
|---|---|
| (i) सः _______ गच्छति। (धीरे-धीरे) | शनैः |
| (ii) _______ परीक्षा अस्ति। (आज) | अद्य |
| (iii) सः _______ आगच्छत्। (अचानक) | सहसा |
| (iv) _______ पठ। (दोबारा) | पुनः |
प्र. 21
विभक्ति प्रयोगाः (उपपदविभक्तयः)
4
उत्तराणि
| पदम् | विभक्तिः | कारकम् | कारणम् |
|---|---|---|---|
| विद्यालयम् | द्वितीया | कर्म | गत्यर्थ क्रिया के साथ द्वितीया |
| रामेण | तृतीया | करण | क्रिया के साधन में तृतीया |
| भोजनाय | चतुर्थी | सम्प्रदान | उद्देश्य / प्रयोजन में चतुर्थी |
| वृक्षात् | पञ्चमी | अपादान | अलग होने में पञ्चमी |
प्र. 22
समासः — विग्रह + समास-नाम
4
उत्तराणि
(क) समासविग्रहः
| समस्तपदम् | विग्रहः | समासः |
|---|---|---|
| राजपुरुषः | राज्ञः पुरुषः | षष्ठीतत्पुरुषः |
| पञ्चपात्रम् | पञ्चानां पात्राणां समाहारः | द्विगुसमासः |
(ख) समस्तपदनिर्माणम्
| विग्रहः | समस्तपदम् | समासः |
|---|---|---|
| रामस्य भक्तः | रामभक्तः | षष्ठीतत्पुरुषः |
| नीलम् उत्पलम् | नीलोत्पलम् | कर्मधारयः |
समास का नाम लिखना आवश्यक — बिना नाम के ½ अंक कटेगा।
📊 मूल्यांकन दिशानिर्देश (Marking Scheme)
शिक्षकों हेतु
अंक वितरण नियम
| प्रकार | नियम |
|---|---|
| एकपदेन उत्तर | ½ अंक — केवल सही पद। गलत/अधूरा = 0। |
| पूर्णवाक्येन उत्तर | 1 अंक — संपूर्ण वाक्य + व्याकरणशुद्धि। ½ यदि अर्थ सही किन्तु भाषा अशुद्ध। |
| भाषिककार्यम् | वैकल्पिक सही उत्तर स्वीकार्य। संकल्प स्पष्ट होना चाहिए। |
| निबंध/पत्र/अनुच्छेद | Content (2) + Language (1) + Format (1) = 4 अंक। |
| व्याकरण | प्रत्येक सही रूप = निर्धारित अंक। अंशतः सही = ½। |
| MCQ | केवल OMR/उत्तर-पुस्तिका में अंकित विकल्प। काटने पर 0। |


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