🔗 संबंधित महत्वपूर्ण लिंक (RBSE Class 9 Sanskrit – 2025-26)
ANSWER KEY
माध्यमिक शिक्षा बोर्डः, राजस्थानम्, अजमेरः
कक्षा 9 संस्कृत (विषय कोड : 71) — मॉडल पेपर | सत्र 2025-26
🗝️ उत्तर तालिका — अंकन योजना सहित15
अपठितावबोधनम्
25
रचनात्मकम्
25
व्याकरणम्
35
पठितावबोधनम्
विभागः – 1 | अपठितावबोधनम् उत्तराणि 15 अंक
(क) दीर्घ गद्यांश — उत्तराणि10 अंक
प्र. 1 — शीर्षकम् 1 अंक
उत्तरम् : "अस्माकं भारतवर्षम्" / "भारत-देशः" / "भारतमाता" / "विशाला भारतभूमिः"
📝 कोई भी उचित शीर्षक जो गद्यांश के भाव को व्यक्त करे — 1 अंक।
प्र. 2 — एकपदेन उत्तरम् (½ × 4 = 2) 2 अंक
| प्रश्नः | उत्तरम् |
|---|---|
| (i) भारतस्य उत्तरे कः अस्ति? | हिमालयः |
| (ii) हिमालयः भारतस्य किम् इव अस्ति? | मुकुटस्वरूपः |
| (iii) भारतस्य दक्षिणे किम् अस्ति? | सागरः |
| (iv) भारतमातरम् के उपासते? | भारतीयाः / वयम् |
प्र. 3 — पूर्णवाक्येन उत्तरम् (1 × 3 = 3) 3 अंक
(i) गङ्गादयः नद्यः हिमालयपर्वतात् उद्भवन्ति।
(ii) "अनेकता में एकता" भारतस्य विशेषता अस्ति।
(iii) जनाः परस्परं सौहार्देन जीवन्ति।
📝 पूर्णवाक्य में उत्तर आवश्यक। मात्र एकपद पर ½ अंक।
प्र. 4 — भाषिककार्यम् (1 × 4 = 4) 4 अंक
| क्र. | प्रश्नः | उत्तरम् |
|---|---|---|
| (i) | कर्तृपदम् / क्रियापदम् | कर्तृपदम् = भारतीयाः | क्रियापदम् = जीवन्ति |
| (ii) | विशेषणम् / विशेष्यम् | विशेषणम् = सर्वे | विशेष्यम् = जनाः |
| (iii) | 'वयं' सर्वनामस्य संज्ञा | भारतीयाः / अस्माकं देशस्य जनाः |
| (iv) | 'विशाला' पर्यायः + 'उत्तरे' विलोमः | पर्यायः = विस्तृता / बृहत् | विलोमः = दक्षिणे |
(ख) लघु गद्यांश — उत्तराणि5 अंक
प्र. 5–7 — उत्तराणि 5 अंक
प्र. 5 (i) आचार्याः ज्ञानम् ददति।
प्र. 5 (ii) विद्यालयः ज्ञानस्य मन्दिरम् अस्ति।
प्र. 6 (i) पुस्तकालये नानाविधाः पुस्तकानि सन्ति।
प्र. 6 (ii) छात्राः क्रीडाक्षेत्रे क्रीडन्ति।
प्र. 7 (i) कर्तृपदम् = छात्राः | क्रियापदम् = पठन्ति
प्र. 7 (ii) 'मन्दिरम्' — पर्यायपदम् अनुच्छेदे = विद्यालयः
विभागः – 2 | रचनात्मकम् कार्यम् — आदर्श उत्तराणि 25 अंक
प्र. 8 — अभिनन्दनपत्रम् (आदर्श प्रारूपम्) 5 अंक
जयपुरतः दिनाङ्कः : ................
प्रिय मित्र रमेश !
सादरं नमस्ते।
अहं त्वां जानामि यत् त्वम् अस्मिन् वर्षे परीक्षायां प्रथमस्थानम् प्राप्तवान्। एतत् श्रुत्वा मम हृदयम् आनन्देन पूरितम् अभवत्। भवतः परिश्रमः एव सफलः जातः। त्वां पुरस्काराय हार्दिकाभिनन्दनानि। परमेश्वरः त्वाम् एवंविधे भविष्येऽपि सफलतां यच्छतु इति मम शुभकामनाः।
तव मित्रम्,
सुरेशः
प्रिय मित्र रमेश !
सादरं नमस्ते।
अहं त्वां जानामि यत् त्वम् अस्मिन् वर्षे परीक्षायां प्रथमस्थानम् प्राप्तवान्। एतत् श्रुत्वा मम हृदयम् आनन्देन पूरितम् अभवत्। भवतः परिश्रमः एव सफलः जातः। त्वां पुरस्काराय हार्दिकाभिनन्दनानि। परमेश्वरः त्वाम् एवंविधे भविष्येऽपि सफलतां यच्छतु इति मम शुभकामनाः।
तव मित्रम्,
सुरेशः
📝 अंकन : प्रारूप (1) + विषय-वस्तु (3) + भाषा-शुद्धि (1) = 5 अंक।
— अथवा —
अवकाशप्रार्थनापत्रम् — मुख्य बिंदु : सेवायाम् / श्रीमन् प्राचार्यमहोदयाय / विनम्रनिवेदनम् / रोगस्य उल्लेखः / तीनदिवसाः / अनुमतिप्रार्थना / धन्यवादाः / आवेदकस्य नाम-कक्षा
प्र. 9 — वार्तालापः / अनुच्छेदलेखनम् 5 अंक
आदर्श वार्तालापः :
आचार्यः : रमेश, भवान् गृहकार्यम् अकरोत् वा?
छात्रः : आम् आचार्य! अहम् गृहकार्यम् कृतम्।
आचार्यः : परीक्षा कदा अस्ति?
छात्रः : आगामिसप्ताहे परीक्षा अस्ति।
आचार्यः : किम् पठितवान् भवान्?
छात्रः : अहं संस्कृतव्याकरणम् च गद्यपाठम् पठितवान्।
छात्रः : आम् आचार्य! अहम् गृहकार्यम् कृतम्।
आचार्यः : परीक्षा कदा अस्ति?
छात्रः : आगामिसप्ताहे परीक्षा अस्ति।
आचार्यः : किम् पठितवान् भवान्?
छात्रः : अहं संस्कृतव्याकरणम् च गद्यपाठम् पठितवान्।
— अथवा —
अनुच्छेदलेखनम् — "विद्यालयस्य वर्णनम्" (आदर्श उत्तरम्) :
अस्माकं विद्यालयः अतीव सुन्दरः अस्ति। अत्र बहवः कक्षाः सन्ति। आचार्याः प्रतिदिनं छात्रेभ्यः ज्ञानं ददति। विद्यालये एकः विशालः पुस्तकालयः अपि अस्ति। क्रीडाक्षेत्रे छात्राः क्रीडन्ति। विद्यालयस्य उद्यानः सदा हरितः सुन्दरश्च भवति।
📝 भाषा-शुद्धि + विषय-वस्तु + संस्कृत-वाक्य-संरचना = 5 अंक।
प्र. 10 — चित्रवर्णनम् 5 अंक
आदर्श उत्तरम् :
अयम् एकः सुन्दरः उद्यानः अस्ति। उद्याने बहवः विविधाः वृक्षाः सन्ति। वृक्षेषु विचित्राणि पुष्पाणि विकसितानि सन्ति। उद्याने बालाः आनन्देन क्रीडन्ति। समीपे एका नदी मन्दं मन्दं प्रवहति। वृक्षेषु पक्षिणः मधुरं गायन्ति। जनाः प्रातःकाले उद्याने भ्रमन्ति च।
अयम् एकः सुन्दरः उद्यानः अस्ति। उद्याने बहवः विविधाः वृक्षाः सन्ति। वृक्षेषु विचित्राणि पुष्पाणि विकसितानि सन्ति। उद्याने बालाः आनन्देन क्रीडन्ति। समीपे एका नदी मन्दं मन्दं प्रवहति। वृक्षेषु पक्षिणः मधुरं गायन्ति। जनाः प्रातःकाले उद्याने भ्रमन्ति च।
📝 संकेतानुसार वाक्य-निर्माण, भाषा-शुद्धि = 5 अंक।
प्र. 11 — कथाक्रम-संयोजनम् 4 अंक
| दिया क्रम | वाक्यांश | सही क्रम |
|---|---|---|
| 1 | तस्य वचनं श्रुत्वा काकः मोदितः अभवत्। | 5 |
| 2 | एकस्मिन् वने एकः काकः निवसति स्म। | 1 |
| 3 | चतुरः सः स्वर्णकाकः अचिन्तयत्। | 7 |
| 4 | लोभात् बालिका रोदिष्यति। | 8 |
| 5 | तदा एका बालिका तम् उद्याने अपश्यत्। | 3 |
| 6 | स्वर्णकाकः तस्यै क्षुद्रं पिटकम् अददात्। | 6 |
| 7 | स च काकः स्वर्णमयः आसीत्। | 2 |
| 8 | बालिका वृहत्तमं पिटकम् ऐच्छत्। | 4 |
सही क्रम : 2 → 7 → 3 → 5 → 1 → 6 → 4 → 8
📝 प्रत्येक सही क्रम = ½ अंक × 8 = 4 अंक।
प्र. 12 — अनुवादकार्यम् (षट् वाक्यानि × 1 = 6) 6 अंक
| क्र. | हिन्दी वाक्यम् | संस्कृत अनुवादः |
|---|---|---|
| 1 | भारत हमारा देश है। | भारतं अस्माकं देशः अस्ति। |
| 2 | विद्यार्थी विद्यालय जाते हैं। | छात्राः विद्यालयं गच्छन्ति। |
| 3 | वृक्ष पर पक्षी बैठे हैं। | वृक्षे पक्षिणः तिष्ठन्ति। |
| 4 | माता भोजन पकाती है। | माता भोजनं पचति। |
| 5 | गुरु ज्ञान देते हैं। | गुरुः ज्ञानं ददाति। |
| 6 | बालक खेलता है। | बालकः क्रीडति। |
| 7 | हम सब मिलकर रहते हैं। | वयं सर्वे मिलित्वा निवसामः। |
| 8 | नदी में जल बहता है। | नद्यां जलं प्रवहति। |
📝 कोई भी 6 वाक्य × 1 अंक = 6 अंक। व्याकरण-शुद्धि आवश्यक।
विभागः – 3 | व्याकरणम् — उत्तराणि 25 अंक
प्र. 13 — स्वरसन्धिः (1 × 2 = 2) 2 अंक
| पदम् | सन्धि / विच्छेदः | भेदः |
|---|---|---|
| हिम + आलयः | हिमालयः | दीर्घसन्धिः (अ+आ = आ) |
| नायकः | न + अयकः = ने + अ → नै → नाय (न + अय् = ने) | अयादिसन्धिः |
| महा + ईशः | महेशः | गुणसन्धिः (आ + ई = ए) |
| गुरूपदेशः | गुरु + उपदेशः | दीर्घसन्धिः (उ+उ = ऊ) |
प्र. 14 — विसर्गसन्धिः (1 × 2 = 2) 2 अंक
| पदम् | सन्धि/विच्छेदः | नियमः |
|---|---|---|
| रामः + चलति | राम्श्चलति / रामश्चलति | विसर्गस्य श् (श् श् स्) — विसर्ग + च → श्च |
| मनोबलम् | मनः + बलम् | विसर्ग + व/ब/भ = ओ (उत्व/लोप) |
| छात्रः + पठति | छात्रः पठति (विसर्ग बना रहता है) | विसर्ग + प/फ → विसर्ग यथावत् |
| निः + कलङ्कः | निष्कलङ्कः | विसर्गस्थाने ष् (विसर्ग + क/ख = ष्क) |
प्र. 15 — समासज्ञानम् (3 अंक) 3 अंक
| पदम् | विग्रहः / पदनिर्माणम् | समासनाम |
|---|---|---|
| राजपुरुषः | राज्ञः पुरुषः | तत्पुरुषसमासः (षष्ठी) |
| त्रिभुवनम् | त्रयाणां भुवनानां समाहारः | द्विगुसमासः |
| पीताम्बरः | पीतं अम्बरं यस्य सः | बहुव्रीहिसमासः |
| विद्या + अर्थी | विद्यार्थी | तत्पुरुषः (द्वितीया) |
| माता च पिता च | मातापितरौ / पितरौ | द्वन्द्वसमासः |
📝 प्रत्येक सही विग्रह + समासनाम = ½+½ = 1 अंक (कोई 3 × 1 = 3)
प्र. 16 — कारकम् — विभक्तिप्रयोगः (3 अंक) 3 अंक
| वाक्यम् | सही रूपम् | विभक्तिः |
|---|---|---|
| रामः ___ (वन) गच्छति। | वनम् | द्वितीया (कर्म) |
| छात्रः ___ (आचार्य) नमति। | आचार्याय | चतुर्थी (सम्प्रदान) |
| बालकः ___ (हस्त) फलं खादति। | हस्तेन | तृतीया (करण) |
| नगरे ___ (अनेक) विद्यालयाः सन्ति। | अनेकाः | प्रथमा (बहुवचनम्) |
| ___ (राम) भ्राता लक्ष्मणः। | रामस्य | षष्ठी (सम्बन्ध) |
प्र. 17 — प्रत्ययाः (3 अंक) 3 अंक
| धातुः | प्रत्ययः | निर्मितं पदम् | अर्थः |
|---|---|---|---|
| पठ् | तुमुन् | पठितुम् | पढ़ने के लिए |
| खाद् | क्त्वा | खादित्वा | खाकर |
| गम् | क्त | गतः | गया हुआ |
| पठ् | शतृ | पठन् | पढ़ता हुआ |
| सुन्दर | तमप् | सुन्दरतमः | सबसे सुंदर |
| गुरु | तरप् | गुरुतरः | अधिक भारी |
📝 6 में से कोई भी 6 सही = 3 अंक (½ × 6)।
प्र. 18 — 'पठ्' धातोः लट्लकाररूपाणि (1½ अंक) 1½ अंक
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | पठति | पठतः | पठन्ति |
| मध्यमपुरुषः | पठसि | पठथः | पठथ |
| उत्तमपुरुषः | पठामि | पठावः | पठामः |
प्र. 19 — गम्/भू धातुरूपाणि (1½ अंक) 1½ अंक
| लकारः / पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|
| गम् / लोट् / प्रथम | गच्छतु | गच्छताम् | गच्छन्तु |
| भू / लङ् / मध्यम | अभवः | अभवतम् | अभवत |
प्र. 20 — 'बालक' शब्दरूपाणि (1½ अंक) 1½ अंक
| विभक्तिः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|
| द्वितीया | बालकम् | बालकौ | बालकान् |
| तृतीया | बालकेन | बालकाभ्याम् | बालकैः |
| चतुर्थी | बालकाय | बालकाभ्याम् | बालकेभ्यः |
| पञ्चमी | बालकात् | बालकाभ्याम् | बालकेभ्यः |
| षष्ठी | बालकस्य | बालकयोः | बालकानाम् |
| सप्तमी | बालके | बालकयोः | बालकेषु |
प्र. 21 — 'रमा' शब्दरूपाणि (1½ अंक) 1½ अंक
| विभक्तिः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | रमा | रमे | रमाः |
| द्वितीया | रमाम् | रमे | रमाः |
| तृतीया | रमया | रमाभ्याम् | रमाभिः |
| षष्ठी | रमायाः | रमयोः | रमाणाम् |
| सप्तमी | रमायाम् | रमयोः | रमासु |
प्र. 22 — संख्यावाचक शब्दाः (2 अंक) 2 अंक
| अंक | 1 | 2 | 3 | 4 | 5 | 10 | 100 | 1000 |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| संस्कृत | एकः | द्वौ | त्रयः | चत्वारः | पञ्च | दश | शतम् | सहस्रम् |
प्र. 23 — 'तत्' शब्दरूपाणि (2 अंक) 2 अंक
| विभक्तिः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | सः | तौ | ते |
| द्वितीया | तम् | तौ | तान् |
| षष्ठी | तस्य | तयोः | तेषाम् |
प्र. 24 — उपसर्गाः (2 अंक) 2 अंक
| पदम् | उपसर्गः | मूलधातुः |
|---|---|---|
| प्रगच्छति | प्र | गम् |
| उपविशति | उप | विश् |
| आगच्छति | आ | गम् |
| निर्गच्छति | निः (निर्) | गम् |
| अनुसरति | अनु | सृ / सर् |
| अभिवादयति | अभि | वद् |
📝 6 में से कोई 4 सही = 2 अंक (½ × 4)।
विभागः – 4 | पठितावबोधनम् — उत्तराणि 35 अंक
प्र. 25 — बहुचयनात्मक प्रश्नाः (1 × 7 = 7) 7 अंक
| प्र. | पाठः | उत्तरम् | सही विकल्पः |
|---|---|---|---|
| (i) | स्वर्णकाकः | ब | पिटकम् |
| (ii) | भ्रान्तो बालः | स | प्रकृतेः |
| (iii) | गोदोहनम् | अ | कृषकः |
| (iv) | जटायोः शौर्यम् | ब | सीतायाः |
| (v) | सूक्तिमौक्तिकम् | स | विभिन्नग्रन्थाः |
| (vi) | पर्यावरणम् | अ | वनानां संरक्षणम् |
| (vii) | भारतीवसन्तगीतिः | स | NCERT शेमुष्याः |
प्र. 26 — स्वर्णकाकः गद्यांश (5 अंक) 5 अंक
(i) एकपदेन : बालिका विनम्रा मनोरमा च आसीत्।
(ii) एकपदेन : बालिका वने काष्ठानि अचिनोत् / चिनोति स्म।
(iii) पूर्णवाक्येन : निर्धना वृद्धा स्त्री पुरा किमपि ग्रामे न्यवसत्।
(iv) पूर्णवाक्येन : स्वर्णकाकः बालिकायै एकं पिटकं दातुम् इच्छति।
(v) भाषिककार्यम् : कर्तृपदम् = बालिका | क्रियापदम् = गच्छति
(vi) भाषिककार्यम् : 'निर्धना' विलोमः = धनवती / धनिका / सधना
प्र. 27 — भारतीवसन्तगीतिः पद्यांश (5 अंक) 5 अंक
(i) एकपदेन : कविः वाण्याः कृते गानम् याचते।
(ii) एकपदेन : कोमल-मलय-समीरः अस्ति। (कोमलः)
(iii) पूर्णवाक्येन : कविः वाणीं मुदा पिके मधुरं गानं कर्तुं प्रार्थयति।
(iv) पूर्णवाक्येन : 'मलय-समीरः' इत्युक्तेन दक्षिण दिशा से आने वाला सुगन्धित मन्द पवन बोध्यते।
(v) भाषिककार्यम् : 'मधुरम्' पर्यायः = मनोहरम् / सुरभिः | विलोमः = कटुम् / अमधुरम्
प्र. 28 — श्लोकस्य भावार्थः (3 अंक) 3 अंक
विद्या ददाति विनयं, विनयाद् याति पात्रताम्।
पात्रत्वाद् धनमाप्नोति, धनाद् धर्मं ततः सुखम्॥
पात्रत्वाद् धनमाप्नोति, धनाद् धर्मं ततः सुखम्॥
प्रसङ्गः (1 अंक) : यह श्लोक नीतिशतकम् से लिया गया है। यह विद्या के महत्त्व को प्रतिपादित करता है।
भावार्थः (2 अंक) : विद्या विनम्रता देती है। विनम्रता से योग्यता प्राप्त होती है। योग्यता से धन मिलता है। धन से धर्म और धर्म से सुख की प्राप्ति होती है। इस प्रकार विद्या ही सभी सुखों का मूल है।
📝 प्रसङ्ग (1) + भावार्थ (2) = 3 अंक। हिन्दी में लिखना मान्य।
प्र. 29 — गद्यपाठस्य सारलेखनम् (4 अंक) 4 अंक
(अ) 'स्वर्णकाकः' — सार (आदर्श उत्तर) :
एक गाँव में एक गरीब वृद्धा अपनी विनम्र पुत्री के साथ रहती थी। एक दिन वन में उसे एक सोने का कौआ मिला। कौए ने परिश्रमी बालिका को एक छोटा पिटारा दिया जो सोने से भरा था। उसी गाँव की एक लोभी बालिका ने भी यह सुना और उसने जाकर बड़ा पिटारा माँगा। लालच के कारण बड़े पिटारे में साँप और बिच्छू निकले और वह रोने लगी। इस कथा का संदेश है — लोभ से बचो और परिश्रम करो।
— अथवा —
(ब) 'भ्रान्तो बालः' — सार :
एक बालक शाला में पढ़ना नहीं चाहता था। वह सोचता था कि पशु-पक्षी भी बिना पाठशाला के सीखते हैं। किन्तु चींटी, मधुमक्खी, मकड़ी आदि प्रकृति से सीखते हैं। बालक ने जाना कि वास्तव में प्रकृति भी एक पाठशाला है। अंत में वह भी प्रकृति और विद्यालय दोनों से सीखने लगा।
📝 मुख्य बिंदु (3) + भाषा (1) = 4 अंक।
प्र. 30 — प्रश्ननिर्माणम् (1 × 4 = 4) 4 अंक
| मूलवाक्यम् | प्रश्नवाक्यम् |
|---|---|
| बालिका वनम् गच्छति। | बालिका कुत्र गच्छति? |
| आचार्यः ज्ञानं ददाति। | कः ज्ञानं ददाति? |
| रामः वनम् अगच्छत्। | रामः कुत्र अगच्छत्? |
| पक्षी वृक्षे तिष्ठति। | पक्षी कुत्र / कस्मिन् तिष्ठति? |
📝 कः / का / के / कम् / कुत्र / कदा / कथम् — उचित प्रश्नवाचक का प्रयोग = 1 अंक प्रत्येक।
प्र. 31 — श्लोकस्य अन्वयः (2 अंक) 2 अंक
उद्यमेन हि सिध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः।
न हि सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति मुखे मृगाः॥
न हि सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति मुखे मृगाः॥
अन्वयः : कार्याणि हि उद्यमेन सिध्यन्ति, मनोरथैः (न सिध्यन्ति)। हि सुप्तस्य सिंहस्य मुखे मृगाः न प्रविशन्ति।
भावार्थः (हिन्दी) : कार्य परिश्रम से सिद्ध होते हैं, केवल इच्छा करने से नहीं। जिस प्रकार सोते हुए सिंह के मुख में हिरण स्वयं नहीं आते, उसी प्रकार बिना परिश्रम के सफलता नहीं मिलती।
प्र. 32 — श्लोकद्वयलेखनम् (3 अंक) 3 अंक
सूक्तिमौक्तिकम् से — आदर्श श्लोकाः :
(1) विद्या ददाति विनयं, विनयाद् याति पात्रताम्।
पात्रत्वाद् धनमाप्नोति, धनाद् धर्मं ततः सुखम्॥
अर्थः : विद्या विनय देती है, विनय से योग्यता, योग्यता से धन, धन से धर्म और धर्म से सुख प्राप्त होता है।
पात्रत्वाद् धनमाप्नोति, धनाद् धर्मं ततः सुखम्॥
अर्थः : विद्या विनय देती है, विनय से योग्यता, योग्यता से धन, धन से धर्म और धर्म से सुख प्राप्त होता है।
(2) उद्यमेन हि सिध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः।
न हि सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति मुखे मृगाः॥
अर्थः : परिश्रम से ही कार्य सिद्ध होते हैं, केवल इच्छा से नहीं।
न हि सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति मुखे मृगाः॥
अर्थः : परिश्रम से ही कार्य सिद्ध होते हैं, केवल इच्छा से नहीं।
📝 प्रत्येक श्लोक (1) + अर्थ (½) = 1½ × 2 = 3 अंक।
प्र. 33 — शब्दार्थलेखनम् (½ × 4 = 2) 2 अंक
| संस्कृत पदम् | हिन्दी अर्थः |
|---|---|
| स्वर्णमयः | सोने से बना / स्वर्ण से निर्मित |
| परिश्रमशीला | परिश्रमी / मेहनती (स्त्री) |
| उद्यमेन | परिश्रम से / प्रयास से |
| विनयम् | विनम्रता / शिष्टाचार |
| मनोरथः | इच्छा / मन की कामना |
| पर्यावरणम् | वातावरण / प्रकृति-परिवेश |
📝 कोई भी 4 सही × ½ = 2 अंक।
⚠️ यह उत्तर तालिका केवल शिक्षक / स्व-मूल्यांकन हेतु है।
📜 निर्धारित पुस्तकम् : शेमुषी प्रथमो भागः (NCERT) | ॐ तत्सत्
Answer Key | कक्षा 9 संस्कृत | RBSE 2025-26 | ncertclasses.com | Print: Ctrl+P


No comments:
Post a Comment