भारत, अर्थात इंडिया NCERT Class 6 Social Science Chapter 5 Notes in Hindi | Bharat Arthaat India

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भारत, अर्थात इंडिया – NCERT कक्षा 6 सामाजिक विज्ञान अध्याय 5 नोट्स | ncertclasses.com
कक्षा 6 · सामाजिक विज्ञान · अध्याय 5

भारत, अर्थात इंडिया

समाज का अध्ययन: भारत और उसके आगे – अतीत के चित्रपट
NCERT पाठ्यपुस्तक | पुनर्मुद्रण 2026-27
सम्पूर्ण नोट्स परीक्षा उपयोगी SVG चित्र सहित प्रश्नोत्तर
अध्याय परिचय
विषयसामाजिक विज्ञान
कक्षा6
अध्याय5
शीर्षकभारत, अर्थात इंडिया
पुस्तकसमाज का अध्ययन: भारत और उसके आगे
NCERT PDFfhes105.pdf ↗
पुनर्मुद्रण2026-27
महत्वपूर्ण प्रश्नभारत को कैसे परिभाषित करें? प्राचीन नाम क्या थे?

1. अध्याय का परिचय

"भारत में प्रारंभिक काल से ही आध्यात्मिक और सांस्कृतिक एकता स्थापित हो गई थी, जो हिमालय और दो समुद्रों के बीच इस महान मानवता की जीवनधारा का अभिन्न अंग बन गई।"
— श्री अरविंद

आज का भारत एक आधुनिक राष्ट्र है जिसकी परिभाषित सीमाएँ, राज्य और ज्ञात जनसंख्या है। परंतु 500, 2000 या 5000 वर्ष पूर्व यह भूखंड बहुत अलग स्वरूप में था। विश्व के इस भाग को हम प्रायः 'भारतीय उपमहाद्वीप' कहते हैं। इसके अलग-अलग नाम रहे हैं और इसकी सीमाएँ भी समय के साथ बदलती रही हैं।

इस अध्याय में हम जानेंगे कि भारत को उसके अपने निवासियों ने क्या नाम दिए और विदेशों से आए आगंतुकों ने इसे किन नामों से पुकारा। ये नाम हमें प्राचीन पुस्तकों, यात्रियों के वृत्तांतों और शिलालेखों में मिलते हैं।

मुख्य बात
निवासी का अर्थ है – वे लोग जो एक स्थान विशेष में रहते हैं।
भारत के नाम दो स्रोतों से मिले: (1) भारतीय ग्रंथों से तथा (2) विदेशी आगंतुकों और आक्रमणकारियों से।

2. ऋग्वेद और 'सप्त सैंधव'

ऋग्वेद भारत का सबसे प्राचीन ग्रंथ है जो हजारों वर्ष पुराना है। इस ग्रंथ में उपमहाद्वीप के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र का नाम 'सप्त सैंधव' अर्थात 'सात नदियों की भूमि' दिया गया है।

सप्त सैंधव – सात नदियों की भूमि (ऋग्वेद) हिमालय पर्वत श्रृंखला सिंधु झेलम चेनाब रावी व्यास सतलज सरस्वती सप्त सैंधव (सात नदियों की भूमि) सिंधु नदी ऋग्वेद में उल्लेख 'सैंधव' शब्द 'सिंधु' नदी से आया है। अर्थ – एक नदी या सिंधु। स्रोत: NCERT कक्षा 6 सामाजिक विज्ञान अध्याय 5 | ncertclasses.com

चित्र: ऋग्वेद में वर्णित 'सप्त सैंधव' – उत्तर-पश्चिमी भारत की सात नदियों की भूमि

याद रखें
'सैंधव' शब्द 'सिंधु' से आया है। इसका अर्थ है – सिंधु नदी या सामान्यतः एक नदी। ऋग्वेद में उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र को 'सप्त सैंधव' कहा गया है क्योंकि वहाँ सात प्रमुख नदियाँ प्रवाहित होती थीं।

3. महाभारत और भारतवर्ष

महाभारत में भारत के क्षेत्र

महाभारत भारत के सबसे प्रसिद्ध ग्रंथों में से एक है। इसमें अनेक क्षेत्रों को सूचीबद्ध किया गया है जो आज भी पहचाने जा सकते हैं –

महाभारत में नामआधुनिक समतुल्य
काश्मीरलगभग आज का कश्मीर
कुरूक्षेत्रआज का हरियाणा (भाग)
वंगबंगाल का भाग
प्राग्ज्योतिषकुछ-कुछ असम का भाग
कच्छआज का कच्छ
केरललगभग आज का केरल

विद्वान सामान्यतः इस बात से सहमत हैं कि यह महाकाव्य सा.सं.पू. की कुछ शताब्दियों पूर्व से लिखा जाने लगा था।

'भारतवर्ष' शब्द की उत्पत्ति

महाभारत में 'भारतवर्ष' शब्द का प्रयोग स्पष्ट रूप से सम्पूर्ण उपमहाद्वीप के लिए किया गया है। इस ग्रंथ में अनगिनत नदियों और लोगों के नाम सम्मिलित हैं।

भारतवर्ष की व्याख्या
भारतवर्ष = भरत का देश

'भरत' वह नाम है जो सर्वप्रथम ऋग्वेद में उल्लिखित हुआ था। वहाँ इसका अभिप्राय लोगों के एक प्रमुख वैदिक समूह से है। बाद के साहित्य में विभिन्न महाराजाओं के लिए भी 'भरत' नाम उल्लिखित हुआ।

4. जम्बूद्वीप

महाभारत में भारतीय उपमहाद्वीप के लिए एक और नाम आता है – 'जम्बूद्वीप'

जम्बूद्वीप का अर्थ
जम्बूद्वीप = जामुन वृक्ष के फल का द्वीप

यह वास्तव में भारत में पाया जाने वाला एक सामान्य पेड़ है जिसे जम्बुल वृक्ष, मालाबार प्लम या जामुन वृक्ष भी कहते हैं। आगे चलकर 'जम्बूद्वीप' भारतीय उपमहाद्वीप का पर्याय बन गया।

5. विष्णु पुराण की परिभाषा

कुछ शताब्दियों के बाद भारतीय उपमहाद्वीप के लिए सामान्यतया 'भारत' नाम का प्रयोग किया जाने लगा। प्राचीन ग्रंथ विष्णु पुराण में यह परिभाषा इस प्रकार दी गई है –

उत्तरं यत् समुद्रस्य हिमाद्रेश्च दक्षिणम्
वर्षं तद् भारतं नाम...


अर्थ: वह देश जो समुद्र के उत्तर में और हिमाच्छादित पर्वतों के दक्षिण में है, उसे भारत कहते हैं।
— विष्णु पुराण
हिमालय (उत्तर में हिमाच्छादित पर्वत) दक्षिण की ओर भारत (समुद्र के उत्तर तथा हिमालय के दक्षिण का देश) समुद्र (दक्षिण में – हिंद महासागर) उत्तर की ओर स्रोत: विष्णु पुराण | ncertclasses.com

चित्र: विष्णु पुराण में भारत की भौगोलिक परिभाषा

आज भी उपयोग
यह नाम 'भारत' आज भी प्रयोग में है। उत्तर भारत में इसे सामान्यतया 'भारत' लिखा जाता है, जबकि दक्षिण भारत में प्रायः 'भारतम्' लिखा जाता है।
तमिल साहित्य में भी यही परिभाषा
2000 वर्ष पूर्व प्राचीन तमिल साहित्य की एक कविता में एक राजा की प्रशंसा की गई है जिसका नाम "दक्षिण में केप कुमारी (कन्याकुमारी) से उत्तर में महान पर्वत (हिमालय) तक, पूर्व के महासागर से पश्चिम के महासागर" तक जाना जाता था।

यह बताता है कि प्राचीन भारतीय अपने भूगोल को भली-भाँति जानते थे और पूरे देश के लिए एक समान परिभाषा का प्रयोग करते थे।

6. सम्राट अशोक और जम्बूद्वीप

भारत के नाम के संबंध में हमें एक भारतीय सम्राट अशोक से बहुत महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है। अशोक का समय लगभग 250 सा.सं.पू. माना जाता है।

अशोक के शिलालेख
अशोक ने हमारे लिए अनेक शिलालेख (पत्थरों पर लिखे अभिलेख) छोड़े हैं। उनमें से एक में उन्होंने 'जम्बूद्वीप' नाम का उपयोग सम्पूर्ण भारत का वर्णन करने के लिए किया है।

उस समय इस 'जम्बूद्वीप' में शामिल थे –
  • आज का भारत
  • बांग्लादेश
  • पाकिस्तान
  • अफगानिस्तान के कुछ भाग

7. विदेशियों ने इंडिया नाम कैसे रखा?

फारसी (ईरानी) नामकरण

विदेशियों में सर्वप्रथम प्राचीन ईरान (फारस) के निवासियों ने भारत का उल्लेख किया था।

  • छठी शताब्दी सा.सं.पू. में एक फारसी सम्राट ने सिंधु नदी के क्षेत्र (जिसे 'सिंधु' या 'सिंध' कहा जाता था) पर नियंत्रण किया।
  • फारसी भाषा में 'स' ध्वनि 'ह' में बदल जाती थी।
  • इसलिए फारसियों ने भारत को 'हिंद', 'हिंदू' जैसे रूपों से निर्दिष्ट किया।
ध्यान दें
प्राचीन फारसी में 'हिंदू' पूर्णतया एक भौगोलिक शब्द है। यहाँ इसे हिंदू धर्म से संदर्भित नहीं किया गया है

यूनानी नामकरण

इन्हीं फारसी स्रोतों के आधार पर प्राचीन यूनानियों ने इस भाग को 'इंडोई' अथवा 'इंडिके' नाम दिया। उन्होंने 'हिंदू' शब्द के पहले अक्षर 'ह' को हटा दिया क्योंकि यह अक्षर यूनानी भाषा में नहीं था

चीनी नामकरण

प्राचीन चीनियों ने भी भारत से सम्पर्क स्थापित किया था। विभिन्न ग्रंथों में उन्होंने भारत का उल्लेख 'यिन्तू' या 'यिंदू' से किया। यह शब्द भी मूलतः 'सिंधु' से ही जुड़ा माना जाता है।

एक अन्य चीनी शब्द 'तियन्जू' का भी प्रयोग मिलता है। यह बताता है कि चीनियों का बुद्ध की भूमि के रूप में भारत के प्रति कितना सम्मान था।

ज्ञानवर्धक
ज्युआनज़ैंग (Xuanzang) – पूर्व में इसे ह्वेनसांग उच्चारित किया जाता था – ने 7वीं सा.सं. में चीन से भारत की यात्रा की। उन्होंने भारत के कई भागों का भ्रमण किया, विद्वानों से मिले, बौद्ध ग्रंथों को एकत्रित किया और 17 वर्ष बाद चीन वापस लौटकर संस्कृत से चीनी भाषा में उन पांडुलिपियों का अनुवाद किया।

हिंदुस्तान नाम

'हिंदुस्तान' शब्द आज से लगभग 1800 वर्ष पूर्व सर्वप्रथम एक फारसी शिलालेख में प्रयोग किया गया था। बाद में भारत पर आक्रमण करने वालों ने भारतीय उपमहाद्वीप को वर्णित करने के लिए इसी शब्द का प्रयोग किया।

8. नाम-परिवर्तन का ऐतिहासिक क्रम

भारत के नाम – ऐतिहासिक परिवर्तन क्रम भारतीयों द्वारा दिए गए नाम सप्त सैंधव ऋग्वेद (सबसे प्राचीन) जम्बूद्वीप महाभारत / अशोक भारतवर्ष / भारत सर्वाधिक प्रचलित नाम विदेशियों द्वारा दिए गए नाम सिंधु मूल शब्द हिंद/हिंदू फारसी रूपांतरण इंडोई/इंडिके यूनानी ('ह' हटाया) India लैटिन / अंग्रेजी इंडिया आज का नाम सिंधु मूल शब्द हिंदू मध्यवर्ती रूप इंदू चीनी मध्य रूप यिंदू / यिन्तू चीनी नाम भारतीय नाम फारसी → यूनानी → अंग्रेजी चीनी मार्ग स्रोत: NCERT कक्षा 6 सामाजिक विज्ञान अध्याय 5 | ncertclasses.com

चित्र: भारत के नामों का ऐतिहासिक परिवर्तन क्रम – भारतीय एवं विदेशी नामों का उद्भव

9. विभिन्न भाषाओं में भारत के नाम

भाषा / स्रोतनाममूल
संस्कृत (ऋग्वेद)सप्त सैंधवसात नदियों की भूमि
संस्कृत (महाभारत)भारतवर्ष / जम्बूद्वीपभरत का देश / जामुन वृक्ष का द्वीप
संस्कृत (विष्णु पुराण)भारतहिमालय व समुद्र के बीच का देश
फारसी (प्राचीन ईरानी)हिंद / हिंदू'सिंधु' का फारसी रूपांतरण
यूनानीइंडोई / इंडिकेफारसी 'हिंद' से ('ह' हटाकर)
लैटिन / अंग्रेजीIndiaयूनानी 'इंडिके' से
चीनीयिन्तू / यिंदू / तियन्जू'सिंधु' से जुड़े रूप
अरबी और फारसी (मध्यकालीन)हिंदुस्तानफारसी शिलालेखों और मध्यकालीन प्रयोग से
तमिलभारतम्संस्कृत 'भारत' का रूप

10. भारतीय संविधान में नाम

संविधान की परिभाषा
संविधान – किसी देश के आधारभूत सिद्धांतों और कानूनों को बताने वाला प्रलेख। भारतीय संविधान 1950 में लागू हुआ

भारतीय संविधान, जो सर्वप्रथम अंग्रेजी में लिखा गया था, की शुरुआत में ही यह वाक्यांश आता है –

"India, that is Bharat..."

संविधान के हिंदी अनुवाद में यही "भारत, अर्थात इंडिया" लिखा गया है।

संविधान का भाग 1, अनुच्छेद 1 में लिखा है – "भारत, अर्थात इंडिया, राज्यों का संघ होगा।"

11. अध्याय सारांश

  • भारत एक प्राचीन भूमि है जिसे इसके इतिहास के क्रम में अनेक नाम दिए गए हैं।
  • ऋग्वेद में उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र को 'सप्त सैंधव' कहा गया है।
  • महाभारत में 'भारतवर्ष' तथा 'जम्बूद्वीप' दोनों नाम मिलते हैं।
  • विष्णु पुराण में भारत को समुद्र के उत्तर और हिमाच्छादित पर्वतों के दक्षिण का देश कहा गया है।
  • सम्राट अशोक के शिलालेखों में 'जम्बूद्वीप' का प्रयोग मिलता है।
  • विदेशियों ने सिंधु → हिंद → इंडोई/इंडिके → India जैसे नाम दिए।
  • चीनियों ने 'यिन्तू', 'यिंदू' और 'तियन्जू' जैसे नामों का उपयोग किया।
  • 'हिंदुस्तान' नाम का प्रयोग बाद के फारसी/मध्यकालीन परंपरा में मिलता है।
  • भारतीय संविधान में देश को "India, that is Bharat" कहा गया है।

12. सही/गलत (पाठ्यपुस्तक अभ्यास उत्तर)

कथनसही/गलतकारण
'ऋग्वेद' में भारत के संपूर्ण भूगोल का वर्णन किया गया है। ❌ गलत ऋग्वेद में केवल उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र 'सप्त सैंधव' का उल्लेख है, सम्पूर्ण भूगोल का नहीं।
'विष्णु पुराण' में संपूर्ण उपमहाद्वीप का वर्णन किया गया है। ✅ सही विष्णु पुराण में 'भारत' को समुद्र के उत्तर और हिमालय के दक्षिण का सम्पूर्ण देश बताया गया है।
अशोक के समय 'जम्बूद्वीप' में आज का भारत, अफगानिस्तान के कुछ क्षेत्र, बांग्लादेश और पाकिस्तान सम्मिलित थे। ✅ सही अशोक के शिलालेख इसके समर्थन में उद्धृत किए जाते हैं।
महाभारत में कश्मीर, कच्छ और केरल समेत कई क्षेत्रों को सूचीबद्ध किया गया है। ✅ सही महाभारत में काश्मीर, कुरूक्षेत्र, वंग, प्राग्ज्योतिष, कच्छ, केरल आदि अनेक क्षेत्रों का वर्णन है।
'हिंदुस्तान' शब्द का प्रयोग 2000 वर्ष से भी पहले सर्वप्रथम एक यूनानी शिलालेख में किया गया था। ❌ गलत यह शब्द फारसी परंपरा से जुड़ा माना जाता है, यूनानी शिलालेख से नहीं।
प्राचीन फारसी में 'हिंदू' शब्द का उपयोग हिंदू धर्म के लिए किया गया है। ❌ गलत प्राचीन फारसी में 'हिंदू' एक भौगोलिक शब्द था, धार्मिक नहीं।
विदेशी यात्रियों द्वारा इंडिया को 'भारत' नाम दिया गया। ❌ गलत 'भारत' नाम भारतीय परंपरा से आया है। विदेशियों ने 'सिंधु' आधारित नाम दिए।

13. परीक्षा उपयोगी प्रश्नोत्तर

'इंडिया' नाम का क्रम इस प्रकार रहा: सिंधु नदी → फारसियों ने 'हिंद/हिंदू' कहा → यूनानियों ने 'ह' हटाकर 'इंडोई/इंडिके' कहा → लैटिन में 'India' बना → अंग्रेजी में 'India' और हिंदी में 'इंडिया' बन गया।
भारतवर्ष का अर्थ है – 'भरत का देश'। 'भरत' वह नाम है जो सर्वप्रथम ऋग्वेद में लोगों के एक प्रमुख वैदिक समूह के लिए उल्लिखित हुआ था। महाभारत में यह नाम सम्पूर्ण उपमहाद्वीप के लिए प्रयुक्त हुआ।
जम्बूद्वीप का अर्थ है – 'जामुन वृक्ष के फल का द्वीप'। जामुन (जम्बुल वृक्ष) भारत में सामान्यतः पाया जाने वाला पेड़ है। महाभारत में और सम्राट अशोक के शिलालेखों में इस नाम का प्रयोग सम्पूर्ण भारतीय उपमहाद्वीप के लिए हुआ है।
विष्णु पुराण के अनुसार – "वह देश जो समुद्र के उत्तर में और हिमाच्छादित पर्वतों के दक्षिण में है, उसे भारत कहते हैं।" यहाँ 'हिमाच्छादित पर्वत' = हिमालय और 'समुद्र' = हिंद महासागर।
सप्त सैंधव का अर्थ है – 'सात नदियों की भूमि'। यह नाम ऋग्वेद में भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र के लिए दिया गया है। 'सैंधव' शब्द 'सिंधु' नदी से आया है।
अशोक के समय (लगभग 250 सा.सं.पू.) 'जम्बूद्वीप' में शामिल थे – आज का भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के कुछ भाग
चीनियों ने भारत के लिए 'यिन्तू', 'यिंदू' तथा 'तियन्जू' जैसे नामों का प्रयोग किया। ये रूप 'सिंधु' से जुड़े माने जाते हैं।
भारतीय संविधान के भाग 1, अनुच्छेद 1 में लिखा है – "India, that is Bharat, shall be a Union of States." हिंदी में – "भारत, अर्थात इंडिया, राज्यों का संघ होगा।"
'हिंदुस्तान' शब्द आज से लगभग 1800 वर्ष पूर्व एक फारसी शिलालेख में पहली बार प्रयोग किया गया था। बाद में भारत पर आक्रमण करने वालों ने भारतीय उपमहाद्वीप को इसी नाम से पुकारा।
महाभारत में अनेक क्षेत्र सूचीबद्ध हैं जैसे – काश्मीर (कश्मीर), कुरूक्षेत्र (हरियाणा), वंग (बंगाल), प्राग्ज्योतिष (असम), कच्छ (गुजरात) और केरल

14. पाठ्यपुस्तक के अन्य प्रश्नों के उत्तर

प्रश्न 1: अध्याय के आरंभ में दिए गए उद्धरण का क्या अर्थ है?

उत्तर: श्री अरविंद का यह उद्धरण बताता है कि भारत में सबसे प्रारंभिक काल से ही एक गहरी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक एकता विद्यमान थी। यह एकता हिमालय (उत्तर में) और दो समुद्रों – अरब सागर (पश्चिम) तथा बंगाल की खाड़ी (पूर्व) – के बीच रहने वाली महान मानवता की जीवनधारा का अभिन्न अंग रही है। अर्थात् भारत केवल एक भौगोलिक इकाई नहीं बल्कि एक सांस्कृतिक-आध्यात्मिक एकता वाला देश है।

प्रश्न 3: यदि आपका जन्म 2000 वर्ष पूर्व हुआ होता और देश का नामकरण करने का अवसर मिलता, तो आप क्या नाम चुनते?

उत्तर (सुझाव): यह एक कल्पनाशीलता पर आधारित प्रश्न है। विद्यार्थी अपनी पसंद का नाम दे सकते हैं। उदाहरण के लिए – "मैं 'भारतवर्ष' नाम चुनता/चुनती क्योंकि यह हमारे पूर्वजों की स्मृति को संजोए रखता है और ऋग्वेद से जुड़ा है। इसमें इस भूमि की सांस्कृतिक महानता झलकती है।"

प्रश्न 4: प्राचीन काल में विश्व के विभिन्न भागों से लोग भारत की यात्रा क्यों करते थे?

उत्तर: प्राचीन काल में लोग भारत आते थे –

  1. व्यापार के लिए – भारत मसाले, रेशम, कपड़े और रत्नों के लिए प्रसिद्ध था।
  2. ज्ञान प्राप्ति के लिए – भारत के विश्वविद्यालय और विद्या-केंद्र प्रसिद्ध थे।
  3. धार्मिक तीर्थयात्रा के लिए – बुद्ध की जन्मभूमि के रूप में भारत कई देशों के यात्रियों को आकर्षित करता था।
  4. सैन्य अभियानों के लिए – कई विदेशी आक्रमणकारी भारत की समृद्धि से प्रभावित होकर आए।
  5. भूगोल और अन्वेषण के लिए – कुछ यात्री यहाँ के समाज, भूगोल, वनस्पति और जीव-जंतुओं को समझने आए।

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अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख NCERT की पाठ्यपुस्तक 'समाज का अध्ययन: भारत और उसके आगे – अतीत के चित्रपट', कक्षा 6 (पुनर्मुद्रण 2026-27) पर आधारित विद्यार्थियों की सहायतार्थ तैयार किया गया है। यह NCERT की अधिकृत सामग्री नहीं है। NCERT की मूल पाठ्यपुस्तक एवं आधिकारिक PDF के लिए देखें – https://ncert.nic.in/textbook/pdf/fhes105.pdf | सभी सामग्री केवल शैक्षिक उद्देश्य के लिए है। © ncertclasses.com

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