कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 13 — हमारा पर्यावरण
NCERT / RBSE पाठ्यक्रम 2026–27 · करके सीखिए · चार सचित्र आरेख शामिल
प्रस्तुति: NCERTClasses टीम — पाठ्यपुस्तक विशेषज्ञों एवं अनुभवी शिक्षकों द्वारा तैयार।
आधार: NCERT कक्षा 10 विज्ञान पाठ्यपुस्तक, अध्याय 13 एवं माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, राजस्थान का पाठ्यक्रम 2026–27।
प्रकाशित: 24 सितंबर 2026 · अंतिम अद्यतन: 24 सितंबर 2026
अगर धरती से अचानक सारे बैक्टीरिया और फफूंद ग़ायब हो जाएँ, तो क्या होगा? कोई शिकारी नहीं मरेगा, कोई बीमारी नहीं फैलेगी — फिर भी वैज्ञानिकों के अनुसार कुछ ही वर्षों में पूरा पारितंत्र चरमरा जाएगा। क्यों?
और प्लास्टिक की थैली मिट्टी में सैकड़ों साल तक पड़ी रह सकती है, जबकि केले का छिलका कुछ ही दिनों में ग़ायब — आख़िर यह फ़र्क़ कहाँ से आता है?
- पारितंत्र = जैविक घटक (जीव) + अजैविक घटक (मिट्टी, हवा, पानी) — आपस में जुड़े हुए।
- उत्पादक → प्राथमिक उपभोक्ता → द्वितीयक उपभोक्ता → तृतीयक उपभोक्ता — आहार श्रृंखला।
- दस प्रतिशत नियम — हर पोषण स्तर पर सिर्फ़ 10% ऊर्जा ही आगे बढ़ती है, 90% ऊष्मा में नष्ट।
- जैविक आवर्धन — हानिकारक रसायन ऊपरी स्तर पर जाकर सबसे ज़्यादा जमा होते हैं।
- ओज़ोन क्षरण — CFC रसायनों के कारण, हानिकारक पराबैंगनी किरणों से बचाव कम होता है।
- अपघटनीय व अनअपघटनीय अपशिष्ट — कम करें, दोबारा उपयोग करें, पुनर्चक्रित करें।
कैसे पढ़ें — पहले सोचिए या ख़ुद करके देखिए, फिर व्याख्या पढ़िए:
🔍 जिज्ञासा · 🧪 करके देखिए · 📖 समझिए · 🔗 जोड़िए · ✅ जाँचिए
"जाँचिए" तीन स्तरों में है — 1, 2, 3।
विषय-सूची
- आधार जाँच
- पारितंत्र — जैविक व अजैविक घटक
- आहार श्रृंखला और आहार जाल
- ऊर्जा प्रवाह — दस प्रतिशत नियम
- जैविक आवर्धन
- ओज़ोन परत क्षरण
- अपशिष्ट प्रबंधन
- आपकी सीढ़ी
- अंकन योजना
- सामान्य ग़लतियाँ
- अंतिम परीक्षण
- शब्दावली
- अभिभावक व शिक्षक के लिए
- NCERT से आगे
आधार जाँच
- प्रकाश संश्लेषण किसे कहते हैं? (कक्षा 9)
- स्वपोषी (autotroph) और परपोषी (heterotroph) में क्या अंतर है?
- बैक्टीरिया एक-कोशिकीय है या बहु-कोशिकीय?
उत्तर
1. पौधों द्वारा सूर्य के प्रकाश से अपना भोजन (ग्लूकोज़) बनाने की प्रक्रिया। 2. स्वपोषी अपना भोजन ख़ुद बनाते हैं (जैसे पौधे); परपोषी दूसरों पर निर्भर रहते हैं (जैसे जंतु)। 3. एक-कोशिकीय। इसी अध्याय में देखेंगे कि यही छोटे-छोटे जीव पूरे पारितंत्र को कैसे टिकाए रखते हैं।
1. पारितंत्र — जैविक व अजैविक घटक
🔍 जिज्ञासा — तालाब, जंगल और मछलीघर (एक्वेरियम) — तीनों में क्या समान है, और मछलीघर को बार-बार साफ़ व संतुलित क्यों रखना पड़ता है, जबकि तालाब ख़ुद-ब-ख़ुद चलता रहता है?
📖 समझिए — किसी क्षेत्र के सभी जीव (जैविक घटक) और उनका भौतिक परिवेश — मिट्टी, हवा, पानी, तापमान (अजैविक घटक) — मिलकर एक पारितंत्र (ecosystem) बनाते हैं। यह प्रकृति की एक कार्यात्मक इकाई है, जहाँ दोनों घटक लगातार एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं।
| प्रकार | उदाहरण |
|---|---|
| प्राकृतिक पारितंत्र | जंगल, तालाब, समुद्र |
| मानव-निर्मित पारितंत्र | फ़सल का खेत, एक्वेरियम, बग़ीचा |
जैविक घटकों को उनकी भोजन-प्राप्ति के तरीक़े के अनुसार बाँटा जाता है:
| समूह | पहचान | उदाहरण |
|---|---|---|
| उत्पादक | सूर्य के प्रकाश से अपना भोजन ख़ुद बनाते हैं | हरे पौधे, शैवाल |
| प्राथमिक उपभोक्ता (शाकाहारी) | सीधे उत्पादकों को खाते हैं | हिरण, बकरी, टिड्डा |
| द्वितीयक उपभोक्ता (माँसाहारी) | प्राथमिक उपभोक्ताओं को खाते हैं | मेंढक, साँप |
| तृतीयक उपभोक्ता | शीर्ष परभक्षी | शेर, बाज़ |
| अपघटक | मृत जीवों व अपशिष्ट को सरल पदार्थों में तोड़ते हैं | बैक्टीरिया, फफूंद |
🔗 जोड़िए — मछलीघर में अपघटक व प्राकृतिक संतुलन बनाने वाले अन्य जीव बहुत कम होते हैं, इसलिए उसे बार-बार साफ़ करना पड़ता है; तालाब में पूरा पारितंत्र (उत्पादक से अपघटक तक) मौजूद होने से वह ख़ुद संतुलन बना लेता है।
शुरुआती सवाल का जवाब: बैक्टीरिया-फफूंद ग़ायब होने पर मृत पौधे-जंतु सड़ेंगे नहीं, पोषक तत्व मिट्टी में वापस नहीं मिलेंगे — धीरे-धीरे मिट्टी बंजर होती जाएगी और पूरा पारितंत्र प्रभावित होगा।
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स्तर 1 पारितंत्र के दो मुख्य घटक कौन-से हैं? — उत्तर: जैविक व अजैविक घटक।
स्तर 2 अपघटक क्या काम करते हैं? — उत्तर: मृत जीवों व अपशिष्ट को सरल पदार्थों में तोड़कर पोषक तत्व मिट्टी में वापस मिलाते हैं।
स्तर 3 एक्वेरियम को प्राकृतिक तालाब जितना आत्मनिर्भर बनाने के लिए क्या जोड़ना होगा? — उत्तर: अपघटक व एक संतुलित खाद्य श्रृंखला (उत्पादक-उपभोक्ता का सही अनुपात) — ताकि पोषक तत्वों का पुनर्चक्रण अपने-आप चलता रहे, बाहरी सफ़ाई पर निर्भर न रहना पड़े।
2. आहार श्रृंखला और आहार जाल
🔍 जिज्ञासा — अगर किसी जंगल से सारे शेर हटा दिए जाएँ, तो क्या होगा — सिर्फ़ हिरणों की संख्या बढ़ेगी, या पूरा जंगल बदल जाएगा?
चित्र 1 — घास → हिरण → शेर जैसी सरल श्रृंखला; असल प्रकृति में कई श्रृंखलाएँ आपस में जुड़कर आहार जाल बनाती हैं।
📖 समझिए — जीवों की वह श्रृंखला जिसमें एक जीव दूसरे को खाकर ऊर्जा व पोषक तत्व आगे बढ़ाता है, आहार श्रृंखला कहलाती है:
उत्पादक → प्राथमिक उपभोक्ता → द्वितीयक उपभोक्ता → तृतीयक उपभोक्ता
श्रृंखला के हर पड़ाव को पोषण स्तर (trophic level) कहते हैं। असल प्रकृति में जीव सिर्फ़ एक को नहीं खाते — कई आहार श्रृंखलाएँ आपस में जुड़कर एक जटिल आहार जाल (food web) बनाती हैं।
🔗 जोड़िए — यही वजह है कि किसी एक प्रजाति को हटाने का असर पूरे जाल में फैल जाता है — शेर हटाने पर सिर्फ़ हिरण नहीं बढ़ेंगे, बल्कि ज़्यादा चराई से घास कम होगी, और इस पर निर्भर बाक़ी शाकाहारी भी प्रभावित होंगे — पूरा संतुलन बिगड़ सकता है।
तालाब जैसे जलीय पारितंत्र में भी वही सिद्धांत — शैवाल (उत्पादक) → छोटी मछली (प्राथमिक उपभोक्ता) → बड़ी मछली (द्वितीयक उपभोक्ता) → मछली खाने वाला पक्षी जैसे बगुला (तृतीयक उपभोक्ता)। स्थलीय हो या जलीय, आहार श्रृंखला का बुनियादी ढाँचा एक जैसा रहता है — सिर्फ़ जीव बदल जाते हैं।
किसानों के लिए अपघटकों का महत्व सीधा है — खेत में डाली गई गोबर खाद व फ़सल के बचे अवशेष अपघटकों द्वारा ही तोड़े जाकर मिट्टी को उपजाऊ बनाते हैं; यही प्राकृतिक पोषक-चक्र रासायनिक खाद पर निर्भरता कम करने में मदद करता है।
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स्तर 1 आहार श्रृंखला के हर पड़ाव को क्या कहते हैं? — उत्तर: पोषण स्तर।
स्तर 2 आहार जाल, आहार श्रृंखला से किस तरह अलग है? — उत्तर: आहार श्रृंखला एक सीधी रेखा जैसी है; आहार जाल कई आपस में जुड़ी श्रृंखलाओं का जटिल नेटवर्क है, जो असल प्रकृति के ज़्यादा क़रीब है।
3. ऊर्जा प्रवाह — दस प्रतिशत नियम
🔍 जिज्ञासा — आहार श्रृंखला "घास → हिरण → शेर → बाज़" जैसे 4-5 पड़ावों के बाद लगभग हमेशा रुक क्यों जाती है — 20 पड़ावों वाली श्रृंखला प्रकृति में क्यों नहीं मिलती?
चित्र 2 — हर पोषण स्तर पर सिर्फ़ लगभग 10% ऊर्जा ही अगले स्तर तक पहुँचती है; बाक़ी 90% ऊष्मा के रूप में नष्ट हो जाती है।
📖 समझिए — जब एक जीव दूसरे को खाता है, तो पूरी ऊर्जा आगे नहीं बढ़ती। वैज्ञानिक रेमंड लिंडमैन के दस प्रतिशत नियम के अनुसार, किसी पोषण स्तर की ऊर्जा का केवल लगभग 10% ही अगले स्तर तक पहुँचता है — बाक़ी 90% श्वसन, गति व अन्य जैविक क्रियाओं में ऊष्मा के रूप में नष्ट हो जाता है।
हल किया उदाहरण 1: यदि किसी घास के मैदान में उत्पादकों के पास कुल 100,000 J ऊर्जा हो, तो तीसरे पोषण स्तर (द्वितीयक उपभोक्ता) तक कितनी ऊर्जा पहुँचेगी?
हल: उत्पादक (स्तर 1) = 100,000 J। प्राथमिक उपभोक्ता (स्तर 2) = 100,000 का 10% = 10,000 J। द्वितीयक उपभोक्ता (स्तर 3) = 10,000 का 10% = 1,000 J। यानी शुरुआती ऊर्जा का सिर्फ़ 1%
🔗 जोड़िए — यही गणित बताता है कि आहार श्रृंखला 4-5 पड़ावों के बाद क्यों रुक जाती है — इतनी कम ऊर्जा बचती है कि एक और स्तर को सहारा देना व्यावहारिक ही नहीं रहता। यह यह भी बताता है कि शाकाहारी भोजन ऊर्जा की दृष्टि से ज़्यादा फ़ायदेमंद क्यों है — सीधे उत्पादक (पोषण स्तर 1) से भोजन लेने पर ऊर्जा-हानि कम होती है, मांसाहार में एक अतिरिक्त स्तर से गुज़रने पर ज़्यादा ऊर्जा पहले ही नष्ट हो चुकी होती है।
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स्तर 1 दस प्रतिशत नियम किसने प्रतिपादित किया? — उत्तर: रेमंड लिंडमैन।
स्तर 2 बाक़ी 90% ऊर्जा का क्या होता है? — उत्तर: श्वसन, गति व अन्य जैविक क्रियाओं में ऊष्मा के रूप में नष्ट हो जाती है।
स्तर 3 यदि उत्पादकों के पास 50,000 J ऊर्जा हो, तो चौथे पोषण स्तर (तृतीयक उपभोक्ता) तक कितनी ऊर्जा पहुँचेगी? — उत्तर: स्तर 1=50,000, स्तर 2=5,000, स्तर 3=500, स्तर 4=50 J — शुरुआती ऊर्जा का सिर्फ़ 0.1%।
4. जैविक आवर्धन
🔍 जिज्ञासा — किसान खेत में कीटनाशक छिड़कते हैं, कीड़ों को मारने के लिए — फिर वही रसायन दूर बैठे किसी बाज़ या इंसान के शरीर में सबसे ज़्यादा मात्रा में कैसे पहुँच जाता है?
चित्र 3 — DDT जैसे हानिकारक रसायन की सांद्रता हर पोषण स्तर पर बढ़ती जाती है — सबसे ऊपरी परभक्षी में सबसे ज़्यादा।
📖 समझिए — कीटनाशक जैसे कुछ हानिकारक रसायन शरीर से आसानी से बाहर नहीं निकलते — वे वसा ऊतकों में जमा होते रहते हैं। जब कोई जीव ऐसे कई छोटे जीवों को खाता है, तो उन सबका जमा रसायन उसके अपने शरीर में इकट्ठा हो जाता है। यही प्रक्रिया हर पोषण स्तर पर दोहरती है — जिससे सांद्रता बढ़ती चली जाती है। इसे जैविक आवर्धन (biological magnification) कहते हैं।
एक वास्तविक उदाहरण — किसी तालाब में DDT छिड़कने के बाद मापी गई सांद्रता:
| पोषण स्तर | जीव | DDT सांद्रता (लगभग) |
|---|---|---|
| उत्पादक (प्लवक) | शैवाल | 0.04 ppm |
| प्राथमिक उपभोक्ता | छोटी मछलियाँ, सीप | 0.23 ppm |
| द्वितीयक उपभोक्ता | सी-गल (पक्षी) | और भी अधिक |
| तृतीयक उपभोक्ता (शीर्ष) | बाज़ जैसे परभक्षी | सबसे अधिक |
🔗 जोड़िए — यह ठीक वही आहार श्रृंखला है जो ऊपर पढ़ी, पर ऊर्जा घटने की जगह यहाँ रसायन की सांद्रता बढ़ती जाती है — इसी वजह से मनुष्य, जो अक्सर श्रृंखला के सबसे ऊपरी छोर पर भोजन करता है, इन हानिकारक रसायनों के जोखिम में सबसे ज़्यादा रहता है।
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स्तर 1 जैविक आवर्धन में सांद्रता किस दिशा में बढ़ती है? — उत्तर: निचले पोषण स्तर से ऊपरी स्तर की ओर।
स्तर 2 यह रसायन शरीर में जमा क्यों होते जाते हैं? — उत्तर: क्योंकि वे शरीर से आसानी से बाहर नहीं निकलते, वसा ऊतकों में जमा रहते हैं।
स्तर 3 इंसान इस समस्या से सबसे ज़्यादा प्रभावित क्यों होते हैं? — उत्तर: क्योंकि मनुष्य अक्सर आहार श्रृंखला के सबसे ऊपरी पोषण स्तर पर भोजन करते हैं (जैसे बड़ी मछली, माँस खाना) — जहाँ जैविक आवर्धन के कारण हानिकारक रसायनों की सांद्रता पहले से ही सबसे अधिक जमा हो चुकी होती है।
5. ओज़ोन परत क्षरण
📖 समझिए — वायुमंडल की ऊपरी परत में मौजूद ओज़ोन (O₃) गैस, सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी (UV) किरणों को सोख लेती है, जिससे पृथ्वी पर जीवन सुरक्षित रहता है। क्लोरोफ़्लोरोकार्बन (CFC) जैसे रसायन — जो पहले रेफ़्रिजरेटर, एयर कंडीशनर व स्प्रे में व्यापक रूप से उपयोग होते थे — वायुमंडल में पहुँचकर ओज़ोन के अणुओं को तोड़ देते हैं, जिससे यह सुरक्षा-परत पतली होती जाती है।
असर: ओज़ोन परत कमज़ोर होने से ज़्यादा पराबैंगनी किरणें धरती तक पहुँचती हैं — जिससे त्वचा कैंसर, मोतियाबिंद जैसी समस्याओं का ख़तरा बढ़ता है। पराबैंगनी किरणें फ़सलों की पैदावार व समुद्री प्लवक (जो कई जलीय आहार श्रृंखलाओं के आधार हैं) को भी नुक़सान पहुँचा सकती हैं — यानी असर सिर्फ़ मनुष्यों तक सीमित नहीं, पूरे पारितंत्र तक फैलता है।
🔗 जोड़िए — इसी चिंता के चलते 1987 में मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल नामक अंतरराष्ट्रीय समझौता हुआ, जिसमें दुनिया भर के देशों ने CFC जैसे रसायनों के उपयोग को चरणबद्ध तरीक़े से घटाने का वादा किया।
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स्तर 1 ओज़ोन परत हमें किससे बचाती है? — उत्तर: सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणों से।
स्तर 2 ओज़ोन क्षरण का मुख्य कारण कौन-सा रसायन समूह है? — उत्तर: क्लोरोफ़्लोरोकार्बन (CFC)।
6. अपशिष्ट प्रबंधन
🧪 करके देखिए — घर के कूड़ेदान में आज जो भी फेंका, उसकी एक सूची बनाइए। अब सोचिए — इनमें से कौन-सा सड़-गल जाएगा, और कौन-सा वर्षों तक वैसा ही पड़ा रहेगा?
📖 समझिए — अपशिष्ट (कचरा) दो तरह का होता है:
| प्रकार | पहचान | उदाहरण |
|---|---|---|
| अपघटनीय (Biodegradable) | सूक्ष्मजीवों द्वारा प्राकृतिक रूप से विघटित हो जाता है | सब्ज़ी-फल के छिलके, काग़ज़, गोबर |
| अनअपघटनीय (Non-biodegradable) | सूक्ष्मजीव इसे तोड़ नहीं पाते, वर्षों-दशकों तक बना रहता है | प्लास्टिक, धातु, काँच |
तीन उपाय (3R) — इन्हीं के ज़रिए अपशिष्ट कम किया जा सकता है:
- घटाएँ (Reduce) — शुरू से ही कम अपशिष्ट पैदा करें, जैसे अनावश्यक पैकेजिंग से बचना
- दोबारा उपयोग करें (Reuse) — किसी वस्तु को एक से ज़्यादा बार उपयोग में लाना (जैसे काँच की बोतल दोबारा भरना)
- पुनर्चक्रित करें (Recycle) — पुराने पदार्थ (काग़ज़, प्लास्टिक, धातु) को संसाधित करके नई वस्तु बनाना
🔗 जोड़िए — प्रारंभिक सवाल का जवाब यहीं है — केले के छिलके में मौजूद पदार्थों को सूक्ष्मजीव आसानी से तोड़ सकते हैं (अपघटनीय), जबकि प्लास्टिक की रासायनिक संरचना ऐसी है कि सामान्य सूक्ष्मजीव इसे तोड़ ही नहीं पाते (अनअपघटनीय) — इसीलिए यह दशकों तक पर्यावरण में बना रहता है।
ई-कचरा (e-waste) — पुराने मोबाइल, कंप्यूटर व अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण एक नई तरह की अनअपघटनीय समस्या हैं। इनमें कुछ क़ीमती धातुएँ (जैसे सोना, ताँबा) भी होती हैं और कुछ हानिकारक पदार्थ (जैसे सीसा) भी — इसीलिए इन्हें सामान्य कूड़े में न फेंककर विशेष ई-कचरा पुनर्चक्रण केंद्रों तक पहुँचाना ज़रूरी है।
✅ जाँचिए
स्तर 1 प्लास्टिक अपघटनीय है या अनअपघटनीय? — उत्तर: अनअपघटनीय।
स्तर 2 3R का पूरा नाम बताइए। — उत्तर: Reduce (घटाएँ), Reuse (दोबारा उपयोग करें), Recycle (पुनर्चक्रित करें)।
चित्र 4 — सामान्य ओज़ोन परत पराबैंगनी किरणों को रोकती है; CFC रसायनों से परत पतली होने पर ज़्यादा किरणें धरती तक पहुँचती हैं।
आपकी सीढ़ी
| स्तर | कुल | इतने सही होने पर | आप हैं |
|---|---|---|---|
| स्तर 1 | 11 | 9+ | परिचित |
| स्तर 2 | 11 | 8+ | दक्ष — बोर्ड परीक्षा के लिए तैयार |
| स्तर 3 | 5 | 3+ | कुशल |
अंकन योजना
(एक विशिष्ट परीक्षक के दृष्टिकोण का उदाहरण — यह आधिकारिक योजना नहीं है।)
प्रश्न (5 अंक): दस प्रतिशत नियम क्या है? इसके आधार पर बताइए कि आहार श्रृंखला में पोषण स्तर सीमित क्यों होते हैं। एक उदाहरण सहित गणना कीजिए।
नियम की परिभाषा। 1 अंक
90% ऊर्जा कहाँ जाती है, यह स्पष्टीकरण। 1 अंक
पोषण स्तर सीमित होने का तार्किक कारण। 1 अंक
संख्यात्मक उदाहरण सही गणना सहित। 2 अंक
सामान्य ग़लतियाँ
| सामान्य ग़लती | सही तथ्य |
|---|---|
| "दस प्रतिशत नियम में 10% ऊर्जा नष्ट होती है" | उल्टा — केवल 10% आगे बढ़ती है, 90% नष्ट होती है। |
| "जैविक आवर्धन में ऊर्जा बढ़ती है" | ऊर्जा नहीं, हानिकारक रसायन की सांद्रता बढ़ती है — ऊर्जा तो हर स्तर पर घटती ही है। |
| "सभी अपघटनीय पदार्थ तुरंत ग़ायब हो जाते हैं" | नहीं — अपघटन में भी समय लगता है (दिन-सप्ताह), बस यह होता ज़रूर है, प्लास्टिक जैसे पदार्थों के विपरीत। |
| "ओज़ोन परत क्षरण और ग्लोबल वार्मिंग एक ही समस्या है" | अलग समस्याएँ — ओज़ोन क्षरण पराबैंगनी किरणों से जुड़ा है, ग्लोबल वार्मिंग ग्रीनहाउस गैसों व तापमान वृद्धि से। |
| "आहार जाल और आहार श्रृंखला एक ही चीज़ हैं" | आहार श्रृंखला एक सीधी कड़ी है; आहार जाल कई श्रृंखलाओं का जुड़ा हुआ नेटवर्क है। |
अंतिम परीक्षण — मिश्रित
9+ सही = अध्याय में महारत।
- पारितंत्र के दो मुख्य घटक कौन-से हैं?
- अपघटक क्या काम करते हैं?
- आहार श्रृंखला के हर पड़ाव को क्या कहते हैं?
- दस प्रतिशत नियम किसने प्रतिपादित किया?
- बाक़ी 90% ऊर्जा का क्या होता है?
- जैविक आवर्धन में सांद्रता किस दिशा में बढ़ती है?
- ओज़ोन क्षरण का मुख्य कारण कौन-सा रसायन है?
- प्लास्टिक अपघटनीय है या अनअपघटनीय?
- 3R का पूरा नाम बताइए।
- (अध्याय 12) फ्लेमिंग वाम हस्त नियम किस उपकरण का सिद्धांत है?
- (अध्याय 11) ओम के नियम का सूत्र क्या है?
उत्तर — 1. जैविक व अजैविक घटक | 2. मृत जीवों को सरल पदार्थों में तोड़ना | 3. पोषण स्तर | 4. रेमंड लिंडमैन | 5. ऊष्मा के रूप में नष्ट | 6. निचले से ऊपरी स्तर की ओर | 7. क्लोरोफ़्लोरोकार्बन (CFC) | 8. अनअपघटनीय | 9. Reduce, Reuse, Recycle | 10. विद्युत मोटर | 11. V=IR
शब्दावली
| हिंदी | English | हिंदी | English |
|---|---|---|---|
| पारितंत्र | Ecosystem | दस प्रतिशत नियम | 10% Law |
| जैविक घटक | Biotic components | जैविक आवर्धन | Biological magnification |
| अजैविक घटक | Abiotic components | ओज़ोन क्षरण | Ozone depletion |
| अपघटक | Decomposers | अपघटनीय | Biodegradable |
| आहार श्रृंखला | Food chain | अनअपघटनीय | Non-biodegradable |
| पोषण स्तर | Trophic level | आहार जाल | Food web |
अभिभावक व शिक्षक के लिए
5 मिनट जाँच: दस प्रतिशत नियम समझाकर एक संख्यात्मक उदाहरण हल करवाएँ। जैविक आवर्धन व ऊर्जा-हानि में फ़र्क़ पूछें। घर के कूड़े में से अपघटनीय-अनअपघटनीय अलग करवाएँ।
घर पर करने योग्य: एक हफ़्ते तक घर के कूड़े को अपघटनीय व अनअपघटनीय में अलग-अलग रखकर देखना — व्यावहारिक व सुरक्षित गतिविधि।
NCERT से आगे — जिज्ञासु पाठकों के लिए
यह भाग RBSE/NCERT कक्षा 10 पाठ्यक्रम से आगे का है और बोर्ड परीक्षा के लिए ज़रूरी नहीं है, केवल सरकारी और अंतरराष्ट्रीय स्तर के विश्वविद्यालय स्रोतों पर आधारित है।
रेचल कार्सन की किताब जिसने दुनिया को हिला दिया
1962 में अमेरिकी वैज्ञानिक रेचल कार्सन ने "साइलेंट स्प्रिंग" (Silent Spring) नामक किताब लिखी, जिसमें उन्होंने DDT जैसे कीटनाशकों के जैविक आवर्धन से पक्षियों व पारितंत्र को हो रहे नुक़सान को विस्तार से उजागर किया। इतिहासकारों के अनुसार इस किताब ने आधुनिक पर्यावरण-जागरूकता आंदोलन की नींव रखने में बड़ी भूमिका निभाई, और आगे चलकर कई देशों में DDT के कृषि-उपयोग पर प्रतिबंध लगाने में मदद की।
अंटार्कटिका का ओज़ोन छिद्र
1985 में वैज्ञानिकों ने अंटार्कटिका के ऊपर ओज़ोन परत में एक बड़ा "छिद्र" (जहाँ ओज़ोन बेहद पतली हो चुकी थी) खोजा — यही खोज मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल जैसे अंतरराष्ट्रीय समझौते का सीधा कारण बनी। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम की रिपोर्टों के अनुसार, CFC के उपयोग में कमी के बाद यह छिद्र धीरे-धीरे सिकुड़ रहा है — यह दिखाता है कि वैश्विक सहयोग से पर्यावरणीय क्षति को पलटा भी जा सकता है।
भारत का स्वच्छ भारत मिशन और प्लास्टिक प्रतिबंध
भारत सरकार का स्वच्छ भारत मिशन कचरा प्रबंधन व स्वच्छता को बढ़ावा देने का एक बड़ा राष्ट्रीय अभियान है। इसके साथ ही, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने कुछ एकल-उपयोग प्लास्टिक वस्तुओं पर प्रतिबंध लगाया है — ठीक इसी अध्याय में पढ़े गए "अनअपघटनीय अपशिष्ट" की समस्या से निपटने के लिए एक ठोस नीतिगत क़दम।
पारा (मरकरी) का जैविक आवर्धन — एक और वास्तविक उदाहरण
DDT के अलावा, पारा (mercury) भी समुद्री आहार श्रृंखलाओं में जैविक आवर्धन का एक प्रसिद्ध उदाहरण है — छोटी मछलियों से बड़ी शिकारी मछलियों (जैसे टूना, शार्क) तक जाते-जाते इसकी सांद्रता कई गुना बढ़ जाती है, जिस वजह से स्वास्थ्य एजेंसियाँ अक्सर गर्भवती महिलाओं को कुछ बड़ी समुद्री मछलियाँ सीमित मात्रा में ही खाने की सामान्य सलाह देती हैं।
स्रोत
- ncert.nic.in — NCERT, भारत सरकार
- ePathshala — शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार
- moef.gov.in — पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार
नोट: इन स्रोतों से कोई भी अंश सीधे नहीं लिया गया है; ऊपर के सभी कथन लेखक के अपने शब्दों में सामान्य शैक्षिक समझ के लिए लिखे गए हैं।
आगे पढ़ें
← पिछला: अध्याय 12 — विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव (6 अंक)
→ यह कक्षा 10 विज्ञान पाठ्यक्रम 2026-27 का अंतिम अध्याय है।
संबंधित सामग्री
- अध्याय 12 — विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव
- अध्याय 11 — विद्युत
- कक्षा 10 विज्ञान मेगा टेस्ट — 200 MCQs
माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, राजस्थान, अजमेर के कक्षा 10 विज्ञान (कोड 07) पाठ्यक्रम 2026–2027 पर आधारित — अध्याय 13, अंक भार 5। पाठ्यपुस्तक: विज्ञान, NCERT। सभी आरेख मौलिक हैं।

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