| बोर्ड | माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, राजस्थान, अजमेर |
|---|---|
| कक्षा / सत्र | 10 / 2026-27 |
| विषय | हिंदी (कोड 01) |
| पाठ्यक्रम में | अपठित बोध 12 अंक: अपठित गद्यांश 06 और अपठित काव्यांश 06 |
| नमूना प्रश्न-पत्र में | खंड स: प्र. 25 और 26, हर एक (3×1=3) |
| इस लेख में | बोर्ड के नमूने का विश्लेषण, 12 हल काव्यांश, 5 जाँच-प्रश्न |
यह लेख अपठित काव्यांश (प्र. 25–26) के बारे में है। अपठित गद्यांश (प्र. 23–24) के लिए हमारा अपठित गद्यांश: 20 हल अभ्यास देखें, और पाठ्यपुस्तक के पद्यांश की सप्रसंग व्याख्या (प्र. 28) के लिए पद्यांश की सप्रसंग व्याख्या वाला लेख। पूरे प्रश्न-पत्र का ढाँचा हमारे कक्षा 10 हिंदी प्रश्न पत्र प्रारूप एवं ब्लू प्रिंट 2026-27 में है।
अपठित काव्यांश में एक ऐसा काव्यांश दिया जाता है जो पाठ्यपुस्तक में पढ़ा हुआ नहीं होता। बोर्ड के नमूना प्रश्न-पत्र 2026-27 में दो काव्यांश हैं, प्र. 25 और 26; हर काव्यांश के तीन उपप्रश्न हैं और हर उपप्रश्न 1 अंक का है। पूरे प्रश्न-पत्र में यह 6 अंक का हिस्सा है।
इस लेख में पहले बोर्ड के नमूने के छह उपप्रश्नों को देखा गया है कि किस प्रकार के प्रश्न आए और बोर्ड की उत्तर-कुंजी ने कितने छोटे उत्तर माने। फिर पढ़ने और लिखने की विधि है, और अंत में 12 अभ्यास-काव्यांश हैं जिनके तीन-तीन उपप्रश्न हल सहित दिए गए हैं।
अंतिम अद्यतन: 20 अक्टूबर 2026 · पढ़ने का समय: लगभग 25 मिनट
1. बोर्ड के पेपर में प्र. 25–26
अपठित काव्यांश के बारे में बोर्ड के अलग-अलग दस्तावेज़ों में यह लिखा है:
| दस्तावेज़ | इसमें क्या लिखा है |
|---|---|
| पाठ्यक्रम-पत्र (कोड 01) | खंड (क) अपठित बोध, 12 अंक: अपठित गद्यांश 06 अंक और अपठित काव्यांश 06 अंक। |
| नमूना प्रश्न-पत्र 2026-27 | प्र. 25 और प्र. 26: निम्नलिखित अपठित पद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर उत्तर-पुस्तिका में लिखिए; हर एक पर (3×1=3) छपा है, और दोनों के तीन-तीन उपप्रश्न हैं। |
| आंतरिक विकल्प | सामान्य निर्देश के अनुसार आंतरिक विकल्प प्र. 27 से 29 और 31 से 36 में है। प्र. 25 और 26 में ‘अथवा’ नहीं है। |
| खंड ‘स’ का निर्देश | खंड ‘स’ के प्रश्नों के उत्तर लगभग 50 शब्दों में लिखिए। (प्र. 23 से 30 इसी खंड में हैं।) |
| उत्तर-कुंजी | प्र. 25 और 26 के हर उपप्रश्न (i), (ii), (iii) पर 1 अंक। उत्तर बहुत छोटे दिए गए हैं। |
| ब्लू प्रिंट | अपठित काव्यांश के दो प्रश्न, 25 (3) और 26 (3)। नोट: मूल परीक्षा के प्रश्न-पत्र का ब्लू प्रिंट अलग हो सकता है। |
नमूने के दोनों काव्यांश बिना कवि के नाम के छपे हैं। हम उन्हें यहाँ छाप नहीं रहे; केवल शुरुआत और लंबाई:
| प्रश्न | काव्यांश की शुरुआत | लंबाई |
|---|---|---|
| 25 | “हिमगिरि पर शाश्वत मौन, वन-उपवन से महक रहा देश।” | 8 पंक्तियाँ, मुक्त छंद की शैली में |
| 26 | “हम कौन थे, क्या हो गये हैं, और क्या…” | 6 पंक्तियाँ, तुकांत |
छह उपप्रश्न और बोर्ड की उत्तर-कुंजी के उत्तर:
| उपप्रश्न | क्या पूछा गया (हमारे शब्दों में) | प्रकार (हमारा वर्गीकरण) | कुंजी का उत्तर | शब्द |
|---|---|---|---|---|
| 25 (i) | ‘शाश्वत मौन’ किसे कहा गया है | प्रतीक पहचानना | हिमालय को | 2 |
| 25 (ii) | ‘एक हृदय का स्पंदन’ किस देश को कहा गया है | संकेत पहचानना | भारत देश को | 3 |
| 25 (iii) | पद्यांश का उचित शीर्षक | शीर्षक | मेरा देश महान, अनेकता में एकता | 6 |
| 26 (i) | कवि ने भारत को क्या कहा है | कथन खोजना | ऋषि भूमि | 2 |
| 26 (ii) | कवि सभी से मिलकर क्या विचारने को कह रहे हैं | कथन खोजना | हम कौन थे? क्या हो गए और क्या होंगे | 9 |
| 26 (iii) | ‘मनोहर गिरि हिमालय’ और गंगाजल किस देश में हैं | संकेत से स्थान पहचानना | भारत देश में | 3 |
हमारा विश्लेषण: छह में से चार उत्तर काव्यांश की पंक्तियों में सीधे मिल जाते हैं (25 (ii), 26 (i), (ii), (iii)); एक (25 (i)) में ‘हिमगिरि’ का अर्थ हिमालय जानना पड़ता है; और एक शीर्षक है, जो पूरे काव्यांश के भाव से बनता है। बोर्ड की कुंजी के उत्तर 2 से 9 शब्द के हैं। यह वर्गीकरण हमारा है; बोर्ड ने प्रश्न-प्रकारों की कोई सूची नहीं दी।
2. प्रश्न किस प्रकार के आते हैं
नमूने के छह उपप्रश्नों में तीन प्रकार दिखे। चौथा प्रकार (आशय या संदेश) नमूने में नहीं है; वह हमने अभ्यास के लिए जोड़ा है, क्योंकि अपठित पर ऐसे प्रश्न स्वाभाविक रूप से बनते हैं। मूल परीक्षा में कौन-सा प्रकार आएगा, यह बोर्ड ने नहीं बताया।
| प्रकार | क्या माँगा जाता है | नमूने में | उत्तर कैसे लिखें |
|---|---|---|---|
| तथ्य / कथन खोजना | काव्यांश में कही गई बात: किसे क्या कहा, कौन क्या करता है | 26 (i), (ii) | संबंधित पंक्ति खोजें और उसी का सार एक वाक्य में लिखें |
| प्रतीक / संकेत पहचानना | कोई शब्द या पंक्ति किसकी ओर संकेत करती है | 25 (i), (ii); 26 (iii) | संदर्भ देखकर संकेतित वस्तु या देश का नाम लिखें |
| शीर्षक | पूरे काव्यांश के भाव का नाम | 25 (iii) | केंद्रीय भाव से 3 से 6 शब्द का शीर्षक बनाएँ |
| आशय / संदेश (हमारे अभ्यास में) | किसी पंक्ति का भाव या कवि क्या सिखाना चाहता है | नमूने में नहीं | पंक्ति का भाव अपने शब्दों में, एक वाक्य में |
काव्यांशों में कुछ शब्द प्रतीक की तरह आते हैं। नीचे हमारा संकलन है; अर्थ सामान्य हिंदी काव्य में प्रचलित हैं, पर हर बार संदर्भ देखकर ही लें। जैसे नमूने के प्र. 25 में ‘शाश्वत मौन’ और ‘हिमगिरि’ का संबंध बताने के लिए संदर्भ ही काम आता है।
| शब्द या बिंब | संभावित संकेत |
|---|---|
| रात, अँधेरा | दुख, कठिन समय, अज्ञान |
| सुबह, उजाला, दीपक | आशा, सुख, ज्ञान |
| काँटे | बाधाएँ, कठिनाइयाँ |
| सागर | विशालता, गहराई |
| पर्वत, हिमालय | दृढ़ता, अडिगता, भारत की शान |
| नदी की धारा | निरंतर गति, समय का बहाव |
3. पढ़ने और लिखने की विधि
- पहले तीनों उपप्रश्न पढ़ें। इससे पढ़ते समय पता रहता है कि क्या खोजना है। (यह हमारा सुझाव है; ‘उद्देश्य तय करके पढ़ना’ वाली सलाह के लिए नीचे ‘NCERT से आगे’ देखें।)
- काव्यांश दो बार पढ़ें। पहली बार पूरा भाव समझें; दूसरी बार जिन पंक्तियों में उत्तर मिल रहे हैं, उन्हें पेंसिल से चिह्नित करें।
- प्रतीक और कठिन शब्द देखें। किसी शब्द का शाब्दिक अर्थ और संदर्भ वाला अर्थ अलग हो तो संदर्भ वाला लें।
- उत्तर पंक्तियों के आधार पर, एक सटीक वाक्य में लिखें। पूरी पंक्तियाँ उतारना ज़रूरी नहीं।
- शीर्षक सबसे अंत में लिखें, जब पूरे काव्यांश का भाव साफ़ हो चुका हो।
- जाँचें: प्रश्न-क्रमांक लिखा है, उपप्रश्न (i), (ii), (iii) क्रम से हैं, और हर उत्तर प्रश्न का ही उत्तर देता है।
शीर्षक चुनने के चार सुझाव (हमारे हैं, बोर्ड के नहीं):
- शीर्षक पूरे काव्यांश के केंद्रीय भाव से बने, किसी एक पंक्ति से नहीं।
- छोटा रखें, 3 से 6 शब्द (बोर्ड की कुंजी के नमूना-शीर्षक में 6 शब्द हैं)।
- काव्यांश के किसी मुख्य शब्द या भाव का सहारा लें, जैसे ‘जल ही जीवन है’।
- ‘कविता’, ‘देश’, ‘प्रकृति’ जैसे बहुत सामान्य शब्द से बचें; भाव-विशेष वाला शीर्षक दें।
(i) [एक सटीक वाक्य या वाक्यांश]
(ii) [एक सटीक वाक्य या वाक्यांश]
(iii) [शीर्षक, 3 से 6 शब्द]
समय: प्रश्न-पत्र 3 घंटे 15 मिनट (195 मिनट) का और 80 अंक का है, यानी औसतन लगभग 2.4 मिनट प्रति अंक। 3 अंक के एक काव्यांश के लिए लगभग 7 मिनट रखें, जिसमें पढ़ना भी शामिल है।
आम गलतियाँ
- पूरी पंक्तियाँ उतारकर उत्तर लंबा कर देना, जबकि कुंजी के उत्तर कुछ ही शब्द के हैं।
- प्रतीक वाले प्रश्न में शब्द का शाब्दिक अर्थ लिख देना और संकेतित वस्तु को छोड़ देना।
- शीर्षक में कविता की एक पंक्ति ज्यों की त्यों रख देना, जो पूरे भाव को न बताती हो।
- उपप्रश्नों का क्रम बिगाड़ना या (i), (ii), (iii) लिखना भूल जाना।
- प्रश्न-क्रमांक (25 या 26) लिखना भूल जाना; सामान्य निर्देश में यह अनिवार्य बताया गया है।
4. 12 हल अभ्यास-काव्यांश
ये काव्यांश नमूना प्रश्न-पत्र की शैली में हमने अभ्यास के लिए लिखे हैं। पहले खुद तीनों उपप्रश्न हल कीजिए, फिर ‘उत्तर देखें’ दबाइए। उपप्रश्न के आगे का छोटा नाम (तथ्य, आशय, संदेश, शीर्षक) प्रश्न का प्रकार बताता है। जहाँ शीर्षक के दो रूप दिए हैं, कोई भी उचित शीर्षक चल सकता है; यह हमारी राय है, बोर्ड की कुंजी ने इसके बारे में कुछ नहीं कहा।
तुकांत काव्यांश (1–8)
काव्यांश 1 देशप्रेम
हर तूफ़ान से हँसकर आँख मिलाता है।
बर्फ़ीली चोटी हो या तपता रेगिस्तान,
उसके आगे झुक जाता है हर इम्तिहान।
हम सोते हैं चैन से, वह पहरा देता है,
देश की ख़ातिर तन-मन अपना देता है।
ऐसे वीर सपूत को मेरा बारंबार प्रणाम,
उसके बल से ही सुरक्षित है देश-ग्राम।
- तथ्य सैनिक किन कठिन स्थानों पर डटा रहता है?
- आशय ‘हम सोते हैं चैन से, वह पहरा देता है’ से कवि क्या कहना चाहता है?
- शीर्षक इस काव्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।
उत्तर देखें
(i) बर्फ़ीली चोटी और तपते रेगिस्तान पर।
(ii) सैनिक के पहरे के कारण ही हम निश्चिंत होकर सोते हैं।
(iii) वीर सैनिक को प्रणाम (या सीमा का प्रहरी)।
उत्तर-शब्द: 6, 11, 8
काव्यांश 2 परिश्रम
वही रेत से भी हरियाली खींच लाता है।
हाथ पर हाथ धरे जो बैठा रहे दिन-रात,
उसके हिस्से कभी नहीं आती सौग़ात।
कर्म की चाबी से खुलते हैं भाग्य के ताले,
मेहनत करने वाले के पग चूमें उजाले।
- तथ्य रेत से भी हरियाली कौन खींच लाता है?
- आशय ‘कर्म की चाबी से खुलते हैं भाग्य के ताले’ का क्या आशय है?
- शीर्षक काव्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।
उत्तर देखें
(i) जो पसीने से धरती को सींचता है, यानी परिश्रमी व्यक्ति।
(ii) परिश्रम करने से ही भाग्य बनता है और सफलता मिलती है।
(iii) परिश्रम का फल (या कर्म की महिमा)।
उत्तर-शब्द: 10, 11, 7
काव्यांश 3 वर्षा
नाच उठा मन का मयूर चंचल।
सूखी धरती ने प्यास बुझाई,
हर पत्ते पर मुसकान छाई।
नदियाँ गातीं, झरने बहते,
खेत-खेत में कृषक चहकते।
बूँदों की यह रिमझिम धार,
लाई जीवन में नव बहार।
- आशय ‘नाच उठा मन का मयूर चंचल’ से क्या संकेत मिलता है?
- तथ्य वर्षा होने पर सूखी धरती ने क्या किया?
- शीर्षक काव्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।
उत्तर देखें
(i) वर्षा की ख़ुशी में कवि का मन मोर की तरह प्रसन्नता से नाच उठा।
(ii) उसने अपनी प्यास बुझाई।
(iii) वर्षा की बहार (या रिमझिम की सौग़ात)।
उत्तर-शब्द: 14, 4, 7
काव्यांश 4 पर्यावरण
साँसों में प्राणवायु भरकर, रोग हमारे हर जाते हैं।
इन्हें काटकर बस्ती बसती, पर कितना कुछ हम खोते हैं,
सूखी नदियाँ, तपती धरती, तब पछताकर रोते हैं।
आओ मिलकर पेड़ लगाएँ, धरती को हरियाली दें,
आने वाली पीढ़ी को हम जीवन की खुशहाली दें।
- तथ्य वृक्ष हमें क्या-क्या देते हैं?
- तथ्य पेड़ काटने का क्या परिणाम बताया गया है?
- संदेश कवि हमसे क्या करने को कहता है?
उत्तर देखें
(i) छाया, फल, फूल और साँसों के लिए प्राणवायु।
(ii) नदियाँ सूखती हैं, धरती तपती है और बाद में पछताना पड़ता है।
(iii) मिलकर पेड़ लगाने को, ताकि धरती हरी-भरी रहे।
उत्तर-शब्द: 8, 12, 8
काव्यांश 5 समय
जो पल को पहचान न पाए, वह जीवन-भर झुकता है।
आज का काम न कल पर टालो, कल का भरोसा कौन करे,
जो हर क्षण का मोल समझता, वही जगत में नाम करे।
घड़ी की टिक-टिक कहती हमसे, उठो, चलो, आगे बढ़ो,
हर बीते पल की सीख लिए, नव सपनों की सीढ़ी चढ़ो।
- तथ्य समय की तुलना किससे की गई है?
- संदेश आज के काम के बारे में कवि क्या सलाह देता है?
- शीर्षक काव्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।
उत्तर देखें
(i) नदी की धार से।
(ii) आज का काम कल पर नहीं टालना चाहिए।
(iii) समय का महत्त्व (या समय की क़ीमत)।
उत्तर-शब्द: 4, 8, 7
काव्यांश 6 शिक्षा
हर घर, हर आँगन में फिर उजियारा खिलता है।
शिक्षा भी ऐसा ही दीपक, जो मन का अँधेरा हरती है,
अज्ञान मिटाकर जीवन में नया सवेरा भरती है।
जो इसे बाँटता चलता है, उसका ज्ञान बढ़ता जाता है,
धन तो बाँटे घटता है, पर यह बाँटे बढ़ता जाता है।
- तथ्य शिक्षा को किसके समान बताया गया है?
- आशय ‘धन तो बाँटे घटता है, पर यह बाँटे बढ़ता जाता है’ में कवि क्या अंतर बताता है?
- शीर्षक काव्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।
उत्तर देखें
(i) दीपक के समान।
(ii) धन बाँटने से घटता है, जबकि शिक्षा या ज्ञान बाँटने से बढ़ता है।
(iii) शिक्षा का दीप (या ज्ञान का प्रकाश)।
उत्तर-शब्द: 3, 13, 7
काव्यांश 7 जल-संरक्षण
पर जो पानी व्यर्थ बहाए, खाली होगी गागर।
नल खुला रख भूल गए जो, कल उनको पछताना है,
आज बचाया हुआ जल ही कल का सबसे बड़ा खज़ाना है।
नदी-ताल को स्वच्छ रखें हम, यह संकल्प उठाना है,
जल ही जीवन है, यह सबको मिलकर समझाना है।
- आशय ‘खाली होगी गागर’ से क्या संकेत मिलता है?
- तथ्य कवि के अनुसार कल का सबसे बड़ा खज़ाना क्या है?
- शीर्षक काव्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।
उत्तर देखें
(i) पानी व्यर्थ बहाने वालों के पास कल पीने को पानी नहीं बचेगा।
(ii) आज बचाया हुआ जल।
(iii) जल ही जीवन है (या जल बचाओ)।
उत्तर-शब्द: 12, 4, 7
काव्यांश 8 माँ
उसके आगे छोटा लगता, दुनिया का हर प्यार।
भूखी रहकर भी वह पहले हमें खिलाती है,
अपना दुख छिपाकर हमको हँसाती है।
धूप में छाया, ठंड में कंबल, ऐसा है उसका दुलार,
माँ के चरणों में बसता है ईश्वर का दरबार।
- तथ्य माँ की ममता की तुलना किससे की गई है?
- तथ्य माँ अपने बच्चों के लिए क्या त्याग करती है?
- आशय ‘माँ के चरणों में बसता है ईश्वर का दरबार’ का क्या आशय है?
उत्तर देखें
(i) सागर से, जो गहरा और अपार है।
(ii) भूखी रहकर पहले बच्चों को खिलाती है और अपना दुख छिपाकर उन्हें हँसाती है।
(iii) माँ की सेवा ईश्वर की पूजा के समान है; माँ ईश्वर-तुल्य है।
उत्तर-शब्द: 7, 14, 12
मुक्त छंद काव्यांश (9–12)
बोर्ड के नमूने का प्र. 25 इसी शैली का है: छोटी पंक्तियाँ, बिना तुक के।
काव्यांश 9 किसान
बैलों की घंटियों के संग
खेत की ओर चल पड़ता है।
धूप उसकी पीठ पर पसीना बनकर टपकती है,
मिट्टी उसके पाँवों से बातें करती है।
वह दाने बोता है,
और हम सबके लिए रोटी उगाता है।
देश के अन्नदाता, तुझे नमन।
- तथ्य किसान अपने दिन की शुरुआत कैसे करता है?
- तथ्य कवि ने किसान को क्या कहा है?
- शीर्षक काव्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।
उत्तर देखें
(i) भोर से पहले उठकर बैलों के साथ खेत की ओर चल पड़ता है।
(ii) देश का अन्नदाता।
(iii) अन्नदाता किसान।
उत्तर-शब्द: 13, 3, 2
काव्यांश 10 एकता
पर जब धागे मिलकर बुनते हैं रस्सी,
तो हाथी भी बँध जाता है।
एक बूँद कुछ नहीं कर पाती,
पर बूँदें मिल जाएँ तो
नदी बन जाती हैं।
हम सब भी अकेले कमज़ोर हैं,
साथ चलें तो पहाड़ भी राह दे देते हैं।
- तथ्य कवि ने एकता समझाने के लिए कौन-से दो उदाहरण दिए हैं?
- आशय ‘साथ चलें तो पहाड़ भी राह दे देते हैं’ का क्या आशय है?
- शीर्षक काव्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।
उत्तर देखें
(i) धागों से बनी रस्सी और बूँदों से बनी नदी।
(ii) मिलकर काम करने से बड़ी कठिनाइयाँ भी दूर हो जाती हैं।
(iii) एकता में शक्ति।
उत्तर-शब्द: 9, 11, 3
काव्यांश 11 आशा
सुबह को आना ही होता है।
काँटों से घिरा हो रास्ता तो क्या,
फूल भी वहीं खिलते हैं।
गिरकर उठना ही चलना सीखना है,
हार तो बस एक पड़ाव है, मंज़िल नहीं।
इसलिए, ओ मन!
थककर बैठ मत,
फिर से एक क़दम बढ़ा।
- आशय ‘रात कितनी भी लंबी हो, सुबह को आना ही होता है’ से क्या संकेत मिलता है?
- तथ्य कविता में हार को क्या कहा गया है?
- संदेश कवि मन को क्या प्रेरणा देता है?
उत्तर देखें
(i) कठिन समय कितना भी लंबा हो, उसके बाद अच्छा समय अवश्य आता है।
(ii) एक पड़ाव, मंज़िल नहीं।
(iii) थककर न बैठने और फिर से एक क़दम आगे बढ़ाने की।
उत्तर-शब्द: 13, 4, 11
काव्यांश 12 गुरु
जो कच्ची कलियों को
फूल बनाना जानता है।
वह डाँटता भी है तो
जैसे कुम्हार घड़े पर थपकी देता है,
भीतर हाथ का सहारा रखकर।
उसके सिखाए रास्ते पर
अँधेरे भी रोशनी हो जाते हैं।
- तथ्य कविता में गुरु को क्या कहा गया है?
- आशय गुरु की डाँट की तुलना किससे की गई है और क्यों?
- शीर्षक काव्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।
उत्तर देखें
(i) माली।
(ii) कुम्हार की थपकी से; वह घड़े को आकार देती है, तोड़ती नहीं, क्योंकि भीतर सहारा रहता है।
(iii) गुरु की महिमा (या गुरु: जीवन के माली)।
उत्तर-शब्द: 1, 17, 8
बोर्ड का नमूना स्वयं हल करें
सबसे ज़रूरी अभ्यास बोर्ड का अपना नमूना है। बोर्ड के Download Center से हिंदी (कोड 01) का नमूना प्रश्न-पत्र (PDF) खोलिए, प्र. 25 और 26 अलग कागज़ पर हल कीजिए, और फिर उसी PDF की उत्तर-कुंजी से मिलाइए। मिलान में देखें कि आपका उत्तर कुंजी के उत्तर जितना सटीक और छोटा है या नहीं।
5. जाँचें
पहले खुद सोचिए, फिर ‘उत्तर देखें’ दबाइए।
- पाठ्यक्रम-पत्र के अनुसार अपठित काव्यांश के कुल कितने अंक हैं?
- 3
- 6
- 9
- 12
उत्तर देखें
सही उत्तर: 6। पाठ्यक्रम-पत्र में अपठित बोध के 12 अंक हैं: अपठित गद्यांश 06 और अपठित काव्यांश 06। नमूना प्रश्न-पत्र में काव्यांश के दो प्रश्न (प्र. 25 और 26) हैं, हर एक (3×1=3) का।
- नमूना प्रश्न-पत्र के प्र. 25 में ‘एक हृदय का स्पंदन’ किस देश को कहा गया है? (बोर्ड की उत्तर-कुंजी के अनुसार)
- भारत देश को
- नेपाल को
- संसार को
- हिमालय को
उत्तर देखें
सही उत्तर: भारत देश को। बोर्ड की उत्तर-कुंजी में इसका उत्तर ‘भारत देश को’ है। ‘शाश्वत मौन’ का उत्तर हिमालय है, जो इसी प्रश्न का पहला उपप्रश्न है।
- बोर्ड की उत्तर-कुंजी में प्र. 25 और 26 के हर उपप्रश्न पर कितना अंक लिखा है?
- 1
- 2
- 3
- आधा
उत्तर देखें
सही उत्तर: 1। दोनों प्रश्नों के तीनों उपप्रश्नों पर 1-1 अंक लिखा है, जो (3×1=3) से मेल खाता है। इसलिए तीनों उत्तर बराबर महत्त्व के हैं, शीर्षक भी।
- नमूना प्रश्न-पत्र के सामान्य निर्देश के अनुसार आंतरिक विकल्प किन प्रश्नों में है?
- प्र. 23 से 26
- प्र. 27 से 29 और 31 से 36
- सभी प्रश्नों में
- किसी में नहीं
उत्तर देखें
सही उत्तर: प्र. 27 से 29 और 31 से 36। आंतरिक विकल्प प्र. 27 से 29 और 31 से 36 में बताया गया है। इसलिए प्र. 25 और 26 में ‘अथवा’ नहीं है; दोनों हल करने हैं।
- इस लेख की सलाह के अनुसार काव्यांश का शीर्षक चुनते समय सबसे पहले क्या देखना चाहिए?
- कवि का नाम
- किसी एक पंक्ति की तुक
- पूरे काव्यांश का केंद्रीय भाव
- पंक्तियों की गिनती
उत्तर देखें
सही उत्तर: पूरे काव्यांश का केंद्रीय भाव। शीर्षक किसी एक पंक्ति से नहीं, पूरे काव्यांश के केंद्रीय भाव से बनता है; बोर्ड के नमूने में भी शीर्षक पूरे पद्यांश के भाव पर है। यह सुझाव हमारा है।
6. सामान्य प्रश्न
अपठित काव्यांश के कितने प्रश्न आते हैं और कितने अंक के?
बोर्ड के पाठ्यक्रम-पत्र में अपठित काव्यांश के 06 अंक हैं। नमूना प्रश्न-पत्र 2026-27 में दो काव्यांश हैं, प्र. 25 और 26, और हर एक पर (3×1=3) छपा है, यानी हर काव्यांश के तीन उपप्रश्न। बोर्ड की उत्तर-कुंजी में हर उपप्रश्न पर 1 अंक है। नमूना प्रश्न-पत्र के ब्लू प्रिंट के नीचे बोर्ड ने लिखा है कि मूल परीक्षा का ब्लू प्रिंट अलग हो सकता है।
उत्तर कितने शब्दों में लिखें?
खंड ‘स’ का निर्देश है कि उत्तर लगभग 50 शब्दों में लिखिए, पर इन प्रश्नों का हर उपप्रश्न 1 अंक का है। बोर्ड की उत्तर-कुंजी में नमूने के छहों उत्तर 2 से 9 शब्द के हैं। इसलिए हमारा सुझाव है कि हर उत्तर एक सटीक वाक्य या वाक्यांश रखें; इस लेख के हल उत्तर भी इसी आकार के हैं (अधिकतम 17 शब्द)।
काव्यांश का शीर्षक कैसे चुनें?
शीर्षक पूरे काव्यांश के केंद्रीय भाव से बनाएँ, किसी एक पंक्ति से नहीं; वह छोटा हो और काव्यांश के विषय को साफ़ बताए, जैसे ‘परिश्रम का फल’ या ‘जल ही जीवन है’। ‘कविता’ या ‘देश’ जैसा बहुत सामान्य शब्द न रखें। बोर्ड की कुंजी में नमूने का शीर्षक 6 शब्द का है, इसलिए हमारा सुझाव है कि 3 से 6 शब्द के भीतर रहें। यह सुझाव हमारा है; बोर्ड ने शीर्षक के नियम नहीं बताए।
क्या काव्यांश के साथ कवि का नाम दिया जाता है?
बोर्ड के नमूना प्रश्न-पत्र में दोनों काव्यांश (प्र. 25 और 26) बिना कवि के नाम के छपे हैं, इसलिए नमूने के आधार पर कवि के नाम से जुड़े प्रश्न की अपेक्षा नहीं बनती। अपठित का मतलब ही है कि अंश पाठ्यपुस्तक से बाहर का है। मूल परीक्षा का प्रारूप बोर्ड की सूचना से मिलाएँ।
अपठित गद्यांश (प्र. 23–24) की तैयारी कहाँ करें?
नमूना प्रश्न-पत्र में अपठित गद्यांश प्र. 23 और 24 हैं, हर एक (3×1=3) का, जिनकी तैयारी के लिए हमारा ‘अपठित गद्यांश: 20 हल अभ्यास’ वाला लेख है। पाठ्यपुस्तक के पद्यांश की सप्रसंग व्याख्या (प्र. 28) अलग प्रश्न है, उसका अलग लेख है। अपठित काव्यांश और सप्रसंग व्याख्या में अंतर यह है कि अपठित में काव्यांश पहली बार देखा जाता है, जबकि सप्रसंग व्याख्या का पद्यांश पढ़ी हुई कविता से आता है।
इस लेख के अभ्यास-काव्यांश और उत्तर किसने लिखे हैं?
12 अभ्यास-काव्यांश हमने अभ्यास के लिए स्वयं लिखे हैं; वे किसी प्रकाशित कवि, NCERT की पुस्तक या बोर्ड के प्रश्न-पत्र से नहीं लिए गए। उनके उत्तर भी हमारे हैं, बोर्ड की उत्तर-कुंजी नहीं। बोर्ड के नमूने के दोनों काव्यांश यहाँ छापे नहीं गए हैं; उन्हें बोर्ड की साइट से लेकर स्वयं हल कीजिए।
7. NCERT से आगे
यह भाग बोर्ड के पाठ्यक्रम या NCERT की पुस्तक का हिस्सा नहीं है। नॉर्थ कैरोलाइना विश्वविद्यालय, चैपल हिल के लर्निंग सेंटर की मार्गदर्शिका Reading Comprehension Tips पढ़ने से पहले अपना उद्देश्य तय करने, पढ़ते समय अनजान शब्दों और मुख्य बातों को चिह्नित करने, छोटे हिस्सों का सार अपने शब्दों में लिखने (मुख्य बात और दो-तीन ब्योरे), और पढ़ने के बाद पाठ पर लौटकर अपनी समझ जाँचने की सलाह देती है। यह सलाह विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के सामान्य पठन के लिए है, कविता या कक्षा 10 की परीक्षा के लिए नहीं; इसे यहाँ लागू करना हमारा सुझाव है। ऊपर की विधि इसी से मेल खाती है: पहले उपप्रश्न पढ़ना ‘उद्देश्य तय करना’ है, पंक्तियाँ चिह्नित करना ‘मुख्य बातें चिह्नित करना’ है, और अंत में उत्तरों को पंक्तियों से मिलाना ‘पाठ पर लौटकर जाँचना’ है।
8. संदर्भ
- माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, राजस्थान, अजमेर: पाठ्यक्रम सत्र 2026-27, विषय हिंदी (कोड 01), कक्षा 10 (पृष्ठ 1): अपठित बोध के 12 अंक, अपठित गद्यांश 06 और अपठित काव्यांश 06।
- बोर्ड: Download Center, Model Question Papers 2027 और Secondary Model Question Paper (PDF): हिंदी (कोड 01) का नमूना प्रश्न-पत्र, ब्लू प्रिंट और उत्तर-कुंजी। प्र. 25 और 26, खंड ‘स’ का निर्देश, आंतरिक विकल्प का निर्देश और कुंजी के उत्तर इसी से लिए गए हैं।
- NCERTClasses: अपठित गद्यांश, 20 हल अभ्यास।
- NCERTClasses: पद्यांश की सप्रसंग व्याख्या, कक्षा 10 हिंदी (RBSE 2026-27), प्र. 28।
- NCERTClasses: कक्षा 10 हिंदी प्रश्न पत्र प्रारूप एवं ब्लू प्रिंट 2026-27।
- The Learning Center, University of North Carolina at Chapel Hill: Reading Comprehension Tips।
NCERTClasses टीम · प्रकाशित: 20 अक्टूबर 2026 · अंतिम अद्यतन: 20 अक्टूबर 2026

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