| बोर्ड | माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, राजस्थान, अजमेर |
|---|---|
| कक्षा / सत्र | 10 / 2026-27 |
| विषय | हिंदी (कोड 01) |
| खंड | स: प्र. 23–30; निर्देश: उत्तर लगभग 50 शब्दों में |
| प्रश्न | प्र. 28: पद्यांश की सप्रसंग व्याख्या, 3 अंक (1+2=3), अथवा के साथ |
| पुस्तक | क्षितिज भाग-2, काव्य खंड (पाठ 1 से 6) |
| इस लेख में | 12 मॉडल उत्तर, 6 स्वयं-अभ्यास अंश, 5 जाँच-प्रश्न |
यह लेख पद्यांश की सप्रसंग व्याख्या (प्र. 28) के बारे में है। गद्यांश वाले प्र. 27 का अंक-विभाजन अलग है (3×1=3); उसके लिए हमारा गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या वाला लेख देखें। बोर्ड के नमूने में ‘उधो, तुम हौ अति बड़भागी’ पद पर आधारित प्र. 31 (अथवा) निबंधात्मक प्रश्न है, जिसका ढंग अलग है; वह इस लेख में शामिल नहीं है। पूरे प्रश्न-पत्र का ढाँचा हमारे कक्षा 10 हिंदी प्रश्न पत्र प्रारूप एवं ब्लू प्रिंट 2026-27 में है।
पद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कक्षा 10 हिंदी (RBSE 2026-27) के खंड स का 3 अंक का प्रश्न है। इसमें ‘क्षितिज भाग-2’ की पढ़ी हुई कविता से कुछ पंक्तियाँ दी जाती हैं और उनका प्रसंग तथा व्याख्या लिखनी होती है। बोर्ड के नमूना प्रश्न-पत्र में यह प्र. 28 है, जिसमें दो पद्यांश अथवा के साथ दिए गए हैं: एक तुलसीदास का और एक नागार्जुन का।
इस लेख में काव्य खंड की छहों कविताओं (पाठ 1 से 6) से दो-दो पद्यांश चुनकर, यानी कुल 12 पद्यांशों पर, लगभग 55 शब्द के मॉडल उत्तर दिए गए हैं। हर पद्यांश के साथ NCERT के 2026-27 पुनर्मुद्रण की पृष्ठ-संख्या है, ताकि आप पुस्तक में पंक्तियाँ खोलकर पहले खुद लिखें और फिर हमारे उत्तर से मिलाएँ।
अंतिम अद्यतन: 20 अक्टूबर 2026 · पढ़ने का समय: लगभग 25 मिनट
1. बोर्ड के पेपर में प्र. 28
पद्यांश की सप्रसंग व्याख्या के बारे में बोर्ड के अलग-अलग दस्तावेज़ों में यह लिखा है:
| दस्तावेज़ | इसमें क्या लिखा है |
|---|---|
| पाठ्यक्रम-पत्र (कोड 01) | क्षितिज (भाग-2) के 33 अंकों में: पद्यांश की विषय वस्तु से संबंधित सप्रसंग व्याख्या 03 अंक; गद्यांश की विषय वस्तु से संबंधित सप्रसंग व्याख्या 03 अंक। |
| नमूना प्रश्न-पत्र 2026-27 | प्र. 28: पठित पद्यांश पढ़कर उसकी सप्रसंग व्याख्या उत्तर-पुस्तिका में लिखना; अंक (1+2=3); दो पद्यांश अथवा के साथ। सामान्य निर्देश में प्र. 27 से 29 और 31 से 36 में आंतरिक विकल्प बताया गया है। |
| खंड ‘स’ का निर्देश | खंड ‘स’ के प्रश्नों के उत्तर लगभग 50 शब्दों में लिखिए। |
| उत्तर-कुंजी | प्र. 28 के लिए ‘व्याख्या लिखने पर अंक देय है’, कुल 03 अंक। भागों का अंक-विभाजन नहीं दिया गया है। |
| ब्लू प्रिंट | पद्यांश सप्रसंग व्याख्या का 3 अंक का प्रश्न क्रमांक 28 पर। नोट: मूल परीक्षा के प्रश्न-पत्र का ब्लू प्रिंट अलग हो सकता है। |
नमूना प्रश्न-पत्र के दोनों पद्यांश क्षितिज के काव्य खंड के हैं:
| विकल्प | कविता | NCERT पृष्ठ (2026-27) | पद्यांश की शुरुआत | हमारा मॉडल उत्तर |
|---|---|---|---|---|
| पहला | राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद (तुलसीदास) | 12 | “बहु धनुही तोरी लरिकाईं…” | पाठ 2, पद्यांश 1 |
| दूसरा (अथवा) | यह दंतुरित मुसकान (नागार्जुन) | 31 | “तुम्हारी यह दंतुरित मुसकान / धन्य तुम, माँ भी…” | पाठ 5, पद्यांश 1 |
गद्यांश वाले प्र. 27 में भी इसी तरह पुस्तक के पठित अंश दिए गए हैं, पर उसका विभाजन (3×1=3) अलग है।
2. छह कविताएँ और प्रसंग की पहचान
प्रसंग में कवि, कविता और अंश का संदर्भ लिखा जाता है। नीचे की तालिका में कविता की भूमिका NCERT की पुस्तक के अनुसार है। पाठ-संख्या और पृष्ठ NCERT के 2026-27 पुनर्मुद्रण के हैं।
| पाठ | कवि | कविता | पृष्ठ | प्रसंग में किस बात की ओर संकेत करें |
|---|---|---|---|---|
| 1 | सूरदास | चार पद (‘ऊधौ, तुम हौ अति बड़भागी’ से ‘हरि हैं राजनीति पढ़ि आए’ तक) | पृ. 5–6 | उद्धव का योग-संदेश; गोपियों का उलाहना, व्यंग्य और एकनिष्ठ प्रेम |
| 2 | तुलसीदास | राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद (रामचरितमानस, बालकांड) | पृ. 12–13 | सीता-स्वयंवर में शिव-धनुष टूटने पर परशुराम का क्रोध, लक्ष्मण के व्यंग्य-वचन और राम की विनय |
| 3 | जयशंकर प्रसाद | आत्मकथ्य | पृ. 19 | 1932 में ‘हंस’ के आत्मकथा विशेषांक के लिए; मित्रों के आग्रह पर भी आत्मकथा न लिखने का तर्क; छायावादी शैली |
| 4 | सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ | उत्साह; अट नहीं रही है | पृ. 24–25 | ‘उत्साह’ बादल को संबोधित आह्वान-गीत; ‘अट नहीं रही है’ फागुन की मादकता और सर्वव्यापी सुंदरता |
| 5 | नागार्जुन | यह दंतुरित मुसकान; फसल | पृ. 30–32 | शिशु की मुसकान पर कवि के भाव; फसल के पीछे प्रकृति और मनुष्य का सहयोग |
| 6 | मंगलेश डबराल | संगतकार | पृ. 37–38 | मुख्य गायक का साथ देने वाले संगतकार की भूमिका और उसकी मनुष्यता |
3. लिखने की विधि
पद्यांश की सप्रसंग व्याख्या में दो भाग माँगे जाते हैं। उनके अंक बोर्ड ने नहीं बताए; नीचे के अंक हमारा अनुमान हैं (प्रश्न पर (1+2=3) छपा है)।
| भाग | क्या लिखें | आकार | अंक (अनुमान) |
|---|---|---|---|
| प्रसंग | कविता का नाम, कवि और अंश का संदर्भ: कौन, किससे, किस स्थिति में बोल रहा है | 1–2 वाक्य, 15 से 20 शब्द | 1 |
| व्याख्या | पंक्तियों का आशय अपने शब्दों में, उन्हीं के क्रम से; कठिन शब्द या उदाहरण का अर्थ; अंत में भाव का निष्कर्ष | 2–3 वाक्य, 33 से 38 शब्द | 2 |
| काव्य-सौंदर्य (वैकल्पिक, हमारी जोड़ी हुई) | भाषा, रस या भाव, शैली और बिंब का एक-दो बिंदु | 8 से 12 शब्द | बोर्ड ने नहीं माँगा |
- कविता पहचानें: भाषा और विषय से तय करें। ब्रजभाषा के पद सूर के हैं; अवधी की चौपाइयाँ तुलसी की हैं; खड़ी बोली में आत्मकथा की बात प्रसाद की, बादल या फागुन निराला की, शिशु या फसल नागार्जुन की और गायक-संगतकार डबराल की कविता है।
- दो बार पढ़ें: कठिन शब्द देखें और पहचानें कि बोलने वाला कौन है, किससे बोल रहा है और क्यों।
- अलग-अलग पंक्तियों में लिखें: पहले ‘प्रसंग’, फिर ‘व्याख्या’, फिर (जगह हो तो) ‘काव्य-सौंदर्य’, हर एक के शीर्षक के साथ।
- जाँचें: पंक्तियाँ उतारी तो नहीं, प्रसंग और व्याख्या मिलाकर शब्द 50 से 60 के आसपास हैं या नहीं।
व्याख्या: [पंक्तियों का आशय अपने शब्दों में, दो वाक्य]। [भाव का निष्कर्ष, एक वाक्य]।
काव्य-सौंदर्य: [भाषा, भाव या शैली के एक-दो बिंदु]।
समय: प्रश्न-पत्र 3 घंटे 15 मिनट (195 मिनट) का और 80 अंक का है, यानी औसतन लगभग 2.4 मिनट प्रति अंक। 3 अंक की व्याख्या के लिए लगभग 7 मिनट रखें, जिसमें पंक्तियाँ पढ़ना भी शामिल है।
आम गलतियाँ
- पंक्तियाँ ज्यों की त्यों उतार देना, या हर शब्द का अलग अर्थ लिखकर आशय छोड़ देना।
- प्रसंग में केवल कविता का नाम लिखना; कवि और बोलने वाले का नाम छोड़ देना।
- व्याख्या में पूरी कविता का सार लिखने लगना, जबकि प्रश्न केवल उन्हीं पंक्तियों का है।
- संवाद वाले अंश में यह न बताना कि कौन-सी पंक्ति किसकी है (जैसे तुलसी के अंश में लक्ष्मण और परशुराम की)।
- अथवा वाले प्रश्न में दोनों पद्यांश हल करना। एक ही चुनें; समय बचेगा।
- उत्तर शुरू करने से पहले प्रश्न-क्रमांक (28) लिखना भूल जाना; सामान्य निर्देश में यह अनिवार्य बताया गया है।
4. 12 अभ्यास-पद्यांश और मॉडल उत्तर
हर कविता से दो पद्यांश हैं। पहले पद्यांश को (या पुस्तक में दिए पृष्ठ पर अंश को) पढ़िए, अपनी उत्तर-पुस्तिका में प्रसंग और व्याख्या लिखिए, फिर ‘मॉडल उत्तर देखें’ दबाकर मिलाइए। जहाँ ‘बोर्ड का नमूना’ लिखा है, वह अंश बोर्ड के नमूना प्रश्न-पत्र के प्र. 28 में आया है।
पाठ 1: सूरदास के पद
कवि: सूरदास · कविता: चार पद (‘ऊधौ, तुम हौ अति बड़भागी’ से ‘हरि हैं राजनीति पढ़ि आए’ तक)
पद्यांश 1
पुरइनि पात रहत जल भीतर, ता रस देह न दागी।
ज्यौं जल माहँ तेल की गागरि, बूँद न ताकौं लागी।
प्रीति-नदी मैं पाउँ न बोरयौ, दृष्टि न रूप परागी॥
आशय: ‘बड़भागी’ में व्यंग्य है: प्रेम से अछूते उद्धव को गोपियाँ कमल-पत्र और तेल की गागर जैसा बताती हैं।
मॉडल उत्तर देखें (लगभग 54 शब्द)
प्रसंग: यह पद सूरदास के ‘भ्रमरगीत’ से है। कृष्ण का योग-संदेश लाए उद्धव पर गोपियाँ व्यंग्य करती हैं।
व्याख्या: गोपियाँ उद्धव को ‘बड़भागी’ कहकर ताना देती हैं कि वे प्रेम-बंधन से अछूते रहे। जैसे कमल-पत्र जल में भीगता नहीं और तेल की गागर पर बूँद नहीं टिकती, वैसे ही उद्धव ने प्रेम-नदी में पाँव नहीं डाला।
काव्य-सौंदर्य (वैकल्पिक): ‘बड़भागी’ में व्यंग्य; कमल-पत्र और तेल की गागर के उदाहरण; ब्रजभाषा।
शब्द-गिनती: प्रसंग 17 + व्याख्या 37 = 54; वैकल्पिक पंक्ति 11 शब्द अलग।
पद्यांश 2
ते क्यौं अनीति करैं आपुन, जे और अनीति छुड़ाए।
राज धरम तौ यहै ‘सूर’, जो प्रजा न जाहिं सताए॥
आशय: कृष्ण से मन लौटाने की माँग और राजधर्म की याद: जो दूसरों का अन्याय मिटाते हैं, वे स्वयं अन्याय क्यों करें?
मॉडल उत्तर देखें (लगभग 57 शब्द)
प्रसंग: यह पद सूरदास के ‘भ्रमरगीत’ से है। योग-संदेश सुनकर गोपियाँ कहती हैं कि कृष्ण अब राजनीति पढ़ आए हैं।
व्याख्या: गोपियाँ चाहती हैं कि कृष्ण जाते समय चुराया उनका मन लौटा दें। वे पूछती हैं कि दूसरों को अनीति से छुड़ाने वाले स्वयं अनीति क्यों करें। सूर के अनुसार राजा का धर्म है कि प्रजा न सताई जाए।
काव्य-सौंदर्य (वैकल्पिक): ताना और व्यंग्य; राजधर्म की सीख; ब्रजभाषा, गेय पद।
शब्द-गिनती: प्रसंग 19 + व्याख्या 38 = 57; वैकल्पिक पंक्ति 9 शब्द अलग।
इसी पाठ की विस्तृत व्याख्या: सूरदास के पद: विस्तृत व्याख्या
पाठ 2: राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद
कवि: तुलसीदास · कविता: राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद (रामचरितमानस, बालकांड)
पद्यांश 3 बोर्ड का नमूना
येहि धनु पर ममता केहि हेतू। सुनि रिसाइ कह भृगुकुलकेतू॥
रे नृपबालक कालबस बोलत तोहि न सँभार।
धनुही सम त्रिपुरारिधनु बिदित सकल संसार॥
आशय: बचपन की धनुहियों और शिव-धनुष के बहाने लक्ष्मण का व्यंग्य और परशुराम का क्रोध।
मॉडल उत्तर देखें (लगभग 54 शब्द)
प्रसंग: यह अंश तुलसीदास के ‘रामचरितमानस’ (बालकांड) से है। शिव-धनुष टूटने पर परशुराम और लक्ष्मण में तीखी बहस हो रही है।
व्याख्या: लक्ष्मण कहते हैं कि बचपन में हमने बहुत धनुहियाँ तोड़ीं, तब आप क्रुद्ध नहीं हुए; इस धनुष पर इतनी ममता क्यों? परशुराम बिगड़कर कहते हैं—अरे राजपुत्र! शिव-धनुष धनुही जैसा साधारण नहीं, संसार जानता है।
काव्य-सौंदर्य (वैकल्पिक): अवधी भाषा; चौपाई और दोहा छंद; लक्ष्मण की व्यंग्योक्ति, परशुराम का क्रोध।
शब्द-गिनती: प्रसंग 20 + व्याख्या 34 = 54; वैकल्पिक पंक्ति 12 शब्द अलग।
पद्यांश 4
पुनि पुनि मोहि देखाव कुठारु। चहत उड़ावन फूँकि पहारू॥
इहाँ कुम्हड़बतिया कोउ नाहीं। जे तरजनी देखि मरि जाहीं॥
देखि कुठारु सरासन बाना। मैं कछु कहा सहित अभिमाना॥
आशय: कुठार दिखाते परशुराम पर लक्ष्मण का हँसकर व्यंग्य: हम कोई कुम्हड़े की बतिया नहीं हैं।
मॉडल उत्तर देखें (लगभग 53 शब्द)
प्रसंग: यह अंश तुलसीदास के ‘रामचरितमानस’ (बालकांड) के परशुराम-लक्ष्मण संवाद से है। कुठार दिखाते परशुराम पर लक्ष्मण मुसकराकर व्यंग्य करते हैं।
व्याख्या: लक्ष्मण कहते हैं—हे महायोद्धा मुनि! आप बार-बार कुठार दिखाकर फूँक से पहाड़ उड़ाना चाहते हैं। यहाँ कोई कुम्हड़े की बतिया नहीं, जो उँगली देखकर मुरझा जाए; कुठार-धनुष देखकर ही मैंने अभिमान से कहा।
काव्य-सौंदर्य (वैकल्पिक): मृदु वाणी में तीखा व्यंग्य; मुहावरेदार अवधी; वीर रस की व्यंजना।
शब्द-गिनती: प्रसंग 20 + व्याख्या 33 = 53; वैकल्पिक पंक्ति 11 शब्द अलग।
इसी पाठ की विस्तृत व्याख्या: राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद: विस्तृत व्याख्या
पाठ 3: आत्मकथ्य
कवि: जयशंकर प्रसाद · कविता: आत्मकथ्य
पद्यांश 5
आलिंगन में आते-आते मुसक्या कर जो भाग गया॥
जिसके अरुण-कपोलों की मतवाली सुंदर छाया में।
अनुरागिनी उषा लेती थी निज सुहाग मधुमाया में॥
आशय: अधूरे प्रेम-सुख की स्मृति: स्वप्न में देखा सुख आलिंगन में आते-आते भाग गया।
मॉडल उत्तर देखें (लगभग 57 शब्द)
प्रसंग: यह अंश जयशंकर प्रसाद की ‘आत्मकथ्य’ कविता से है। आत्मकथा से बचते कवि अपने अधूरे सुख को याद करते हैं।
व्याख्या: कवि कहते हैं कि जिस सुख को उन्होंने स्वप्न में देखा, वह आलिंगन में आते-आते मुसकराकर भाग गया; वह उन्हें मिला ही कहाँ? उसके लाल गालों की मतवाली छाया से प्रेम-भरी उषा भी अपनी सुहाग-लालिमा पाती थी।
काव्य-सौंदर्य (वैकल्पिक): छायावादी शैली; उषा और कपोलों के सुंदर बिंब; खड़ी बोली।
शब्द-गिनती: प्रसंग 20 + व्याख्या 37 = 57; वैकल्पिक पंक्ति 10 शब्द अलग।
पद्यांश 6
सीवन को उधेड़ कर देखोगे क्यों मेरी कंथा की?
छोटे से जीवन की कैसे बड़ी कथाएँ आज कहूँ?
क्या यह अच्छा नहीं कि औरों की सुनता मैं मौन रहूँ?
आशय: कवि आत्मकथा क्यों नहीं कहते: जीवन छोटा है, स्मृति ही पाथेय है, मौन रहना ही अच्छा है।
मॉडल उत्तर देखें (लगभग 56 शब्द)
प्रसंग: यह अंश जयशंकर प्रसाद की ‘आत्मकथ्य’ कविता से है। आत्मकथा न लिखने के कारण कवि बता रहे हैं।
व्याख्या: उस प्रेम-सुख की स्मृति ही थके पथिक का पाथेय है। कवि कहते हैं कि उनकी गुदड़ी की सिलाई उधेड़कर, यानी अंतर्मन टटोलकर, क्या मिलेगा? छोटे जीवन में बड़ी कथा नहीं; दूसरों की सुनकर मौन रहना ही अच्छा है।
काव्य-सौंदर्य (वैकल्पिक): ‘पथिक’, ‘पाथेय’, ‘कंथा’ जैसे प्रतीक-बिंब; विनम्र आत्म-स्वीकृति।
शब्द-गिनती: प्रसंग 18 + व्याख्या 38 = 56; वैकल्पिक पंक्ति 7 शब्द अलग।
इसी पाठ की विस्तृत व्याख्या: आत्मकथ्य: विस्तृत व्याख्या
पाठ 4: उत्साह और अट नहीं रही है
कवि: सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ · कविता: उत्साह; अट नहीं रही है
पद्यांश 7
बाल कल्पना के-से पाले,
विद्युत-छबि उर में, कवि, नवजीवन वाले!
वज्र छिपा, नूतन कविता
फिर भर दो—
बादल, गरजो!
आशय: बादल को कोमल और नवजीवन देने वाला कहकर आह्वान: वज्र-सी शक्ति वाली नई कविता भर दो।
मॉडल उत्तर देखें (लगभग 56 शब्द)
प्रसंग: यह अंश सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ के आह्वान-गीत ‘उत्साह’ से है। कवि बादल को संबोधित करके गरजने को कहते हैं।
व्याख्या: कवि बादल को सुंदर, काले घुँघराले और बाल-कल्पना जैसा कोमल कहते हैं। वह नवजीवन देने वाला कवि है, उसके हृदय में बिजली की चमक है। कवि उससे वज्र-सी शक्ति वाली नई कविता भर देने को कहते हैं।
काव्य-सौंदर्य (वैकल्पिक): आह्वान-गीत; ‘ललित ललित’ जैसे दोहराव से नाद-सौंदर्य; ओजपूर्ण संबोधन।
शब्द-गिनती: प्रसंग 19 + व्याख्या 37 = 56; वैकल्पिक पंक्ति 9 शब्द अलग।
पद्यांश 8
घर-घर भर देते हो,
उड़ने को नभ में तुम
पर-पर कर देते हो,
आँख हटाता हूँ तो
हट नहीं रही है।
आशय: फागुन की साँस से घर-घर उल्लास; कवि की आँख सौंदर्य से हट नहीं पाती।
मॉडल उत्तर देखें (लगभग 53 शब्द)
प्रसंग: यह अंश निराला की ‘अट नहीं रही है’ कविता से है। कवि फागुन की सर्वव्यापी सुंदरता से मुग्ध हैं।
व्याख्या: फागुन मानो साँस लेता है और घर-घर उल्लास तथा सौंदर्य से भर जाता है; प्राणियों के मन में उड़ने की उमंग जगती है। कवि आँख हटाना चाहें तो भी सौंदर्य से हटा नहीं पाते।
काव्य-सौंदर्य (वैकल्पिक): फागुन का मानवीकरण (संबोधन); छोटी पंक्तियाँ, सरल शब्द और लय।
शब्द-गिनती: प्रसंग 19 + व्याख्या 34 = 53; वैकल्पिक पंक्ति 10 शब्द अलग।
इसी पाठ की विस्तृत व्याख्या: उत्साह और अट नहीं रही है: विस्तृत व्याख्या
पाठ 5: यह दंतुरित मुसकान और फसल
कवि: नागार्जुन · कविता: यह दंतुरित मुसकान; फसल
पद्यांश 9 बोर्ड का नमूना
पृ. 31: “तुम्हारी यह दंतुरित मुसकान / धन्य तुम, माँ भी…” से नौ पंक्तियों का अंश
आशय: शिशु और माँ को धन्य कहना; चिर प्रवासी कवि का अतिथि-भाव; आँखें मिलने पर मुसकान का और सुंदर लगना।
मॉडल उत्तर देखें (लगभग 59 शब्द)
प्रसंग: यह अंश नागार्जुन की ‘यह दंतुरित मुसकान’ कविता से है। चिर प्रवासी कवि शिशु की मुसकान पर मुग्ध हैं।
व्याख्या: शिशु और उसकी माँ को धन्य कहकर कवि स्वयं को चिर प्रवासी, अनजान अतिथि मानते हैं, जिसका बच्चे से संपर्क न रहा। जब शिशु तिरछी नज़र से देखता है और आँखें मिलती हैं, तब मुसकान उन्हें और सुंदर लगती है।
काव्य-सौंदर्य (वैकल्पिक): वात्सल्य और विस्मय का भाव; मुहावरों से सजीव चित्र; सरल बोलचाल की भाषा।
शब्द-गिनती: प्रसंग 19 + व्याख्या 40 = 59; वैकल्पिक पंक्ति 13 शब्द अलग।
पद्यांश 10
पृ. 32: “फसल क्या है? और तो कुछ नहीं है वह…” (कविता का अंतिम खंड)
आशय: ‘फसल क्या है?’ प्रश्न का कविता का अपना निष्कर्ष-रूप उत्तर।
मॉडल उत्तर देखें (लगभग 55 शब्द)
प्रसंग: यह अंश नागार्जुन की कविता ‘फसल’ के अंत से है। कवि ‘फसल क्या है’ का निष्कर्ष-रूप उत्तर देते हैं।
व्याख्या: कवि के अनुसार फसल नदियों के पानी, अनगिनत हाथों के श्रम, मिट्टी के गुण, सूर्य की किरणों और हवा की थिरकन का सम्मिलित परिणाम है। अर्थात् प्रकृति और मनुष्य के सहयोग से ही सृजन संभव है।
काव्य-सौंदर्य (वैकल्पिक): प्रश्न-उत्तर शैली; बोलचाल की भाषा की गति और लय; मुक्त छंद।
शब्द-गिनती: प्रसंग 19 + व्याख्या 36 = 55; वैकल्पिक पंक्ति 11 शब्द अलग।
इसी पाठ की विस्तृत व्याख्या: यह दंतुरित मुसकान और फसल: विस्तृत व्याख्या
पाठ 6: संगतकार
कवि: मंगलेश डबराल · कविता: संगतकार
पद्यांश 11
पृ. 37: “तारसप्तक में जब बैठने लगता है उसका गला…” से पृष्ठ के अंत तक (आठ पंक्तियाँ)
आशय: तारसप्तक पर मुख्य गायक का गला बैठने लगे तो संगतकार का स्वर उसे सँभालता है।
मॉडल उत्तर देखें (लगभग 56 शब्द)
प्रसंग: यह अंश मंगलेश डबराल की कविता ‘संगतकार’ से है। कवि मुख्य गायक के साथ गाने वाले संगतकार की भूमिका बताते हैं।
व्याख्या: तारसप्तक की ऊँचाई पर मुख्य गायक का गला बैठने और उत्साह बुझने लगे, तब संगतकार का स्वर उसे ढाँढ़स बँधाता है। वह जताता है कि गायक अकेला नहीं और राग फिर गाया जा सकता है।
काव्य-सौंदर्य (वैकल्पिक): संगीत के शब्दों का प्रयोग; बुझते उत्साह का ‘राख’ वाला बिंब; दृश्यात्मकता।
शब्द-गिनती: प्रसंग 21 + व्याख्या 35 = 56; वैकल्पिक पंक्ति 12 शब्द अलग।
पद्यांश 12
पृ. 38: “और उसकी आवाज़ में जो एक हिचक…” (कविता की अंतिम चार पंक्तियाँ)
आशय: संगतकार की झिझक और स्वर न उठाने की कोशिश को विफलता नहीं, मनुष्यता मानना चाहिए।
मॉडल उत्तर देखें (लगभग 52 शब्द)
प्रसंग: यह अंश मंगलेश डबराल की कविता ‘संगतकार’ के अंत से है। कवि संगतकार की झिझक का अर्थ समझा रहे हैं।
व्याख्या: संगतकार की आवाज़ में सुनाई देती झिझक, या अपना स्वर ऊँचा न उठाने की कोशिश, उसकी विफलता नहीं; यह उसकी मानवीयता और विनम्रता है, क्योंकि वह मुख्य गायक को आगे रखता है।
काव्य-सौंदर्य (वैकल्पिक): सहयोगी के प्रति संवेदना; सरल भाषा; भावपूर्ण, तर्कसंगत समापन।
शब्द-गिनती: प्रसंग 20 + व्याख्या 32 = 52; वैकल्पिक पंक्ति 9 शब्द अलग।
इसी पाठ की विस्तृत व्याख्या: संगतकार: विस्तृत व्याख्या
स्वयं करने के छह अंश
इन अंशों के उत्तर हमने नहीं दिए। पुस्तक में पृष्ठ खोलकर साँचे के अनुसार लिखिए। संकेत उतने ही हैं जितने सही दिशा के लिए चाहिए।
| कविता | पृष्ठ | अंश की शुरुआत | लिखते समय ध्यान रखें |
|---|---|---|---|
| 1. सूरदास | पृ. 6, पद 3 | “हमारैं हरि हारिल की लकरी…” | ‘हारिल की लकरी’ की उपमा और योग को ‘करुई ककरी’ कहने का भाव; एकनिष्ठ प्रेम पर टिकें। |
| 2. तुलसीदास | पृ. 13 | “बाल ब्रह्मचारी अति कोही…” | यहाँ परशुराम स्वयं का परिचय देते हैं; प्रसंग में बोलने वाले का नाम और क्रोध का कारण लिखें। |
| 3. प्रसाद | पृ. 19 | “तुम सुनकर सुख पाओगे, देखोगे—यह गागर रीती…” | ‘गागर रीती’ और ‘अपनी भरने वाले’ का संकेत; कवि का संकोच और विनम्रता। |
| 4. निराला | पृ. 24, ‘उत्साह’ का दूसरा खंड | “विकल विकल, उन्मन थे उन्मन…” | तपी धरती और व्याकुल लोग; बादल का एक रूप राहत देने वाला है। यह भाव व्याख्या में आए। |
| 5. नागार्जुन | पृ. 31 | “छू गया तुमसे कि झरने लग पड़े शेफालिका के फूल…” | शिशु के स्पर्श से कठोर मन के भी कोमल हो जाने का भाव; पंक्तियाँ उतारें नहीं। |
| 6. डबराल | पृ. 37 | “मुख्य गायक के चट्टान जैसे भारी स्वर का…” | संगतकार की आवाज़ की विशेषताएँ और मुख्य गायक के साथ उसकी भूमिका; प्रसंग में कवि और कविता का नाम दें। |
5. जाँचें
पहले खुद सोचिए, फिर ‘उत्तर देखें’ दबाइए। अपठित काव्यांश या गद्यांश का अभ्यास करना हो तो हमारे अपठित गद्यांश: 20 हल अभ्यास देखें।
- बोर्ड के नमूना प्रश्न-पत्र 2026-27 में प्र. 28 (पद्यांश की सप्रसंग व्याख्या) पर कौन-सा अंक-विभाजन छपा है?
- (3×1=3)
- (1+2=3)
- (2+1=3)
- (1+1+1=3)
उत्तर देखें
सही उत्तर: (1+2=3)। प्र. 28 पर (1+2=3) छपा है; गद्यांश वाले प्र. 27 पर (3×1=3)। उत्तर-कुंजी में केवल ‘व्याख्या लिखने पर अंक देय है, 03’ है, इसलिए प्रसंग को 1 और व्याख्या को 2 अंक मानना हमारा अनुमान है।
- नमूना प्रश्न-पत्र के प्र. 28 का पहला पद्यांश किस कवि का है?
- सूरदास
- तुलसीदास
- जयशंकर प्रसाद
- मंगलेश डबराल
उत्तर देखें
सही उत्तर: तुलसीदास। पहला पद्यांश तुलसीदास के ‘राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद’ (NCERT पृ. 12) से है। ‘अथवा’ वाला पद्यांश नागार्जुन की ‘यह दंतुरित मुसकान’ (पृ. 31) से है।
- नमूना प्रश्न-पत्र के प्र. 28 का ‘अथवा’ वाला पद्यांश किस कविता का है?
- संगतकार
- फसल
- आत्मकथ्य
- यह दंतुरित मुसकान
उत्तर देखें
सही उत्तर: यह दंतुरित मुसकान। ‘अथवा’ वाला नौ पंक्तियों का अंश नागार्जुन की ‘यह दंतुरित मुसकान’ से है, जो NCERT की पुस्तक में पृ. 31 पर है।
- ‘आत्मकथ्य’ कविता NCERT की भूमिका के अनुसार किस पत्रिका के आत्मकथा विशेषांक के लिए लिखी गई थी?
- हंस
- सरस्वती
- प्रतिपक्ष
- आसपास
उत्तर देखें
सही उत्तर: हंस। पाठ की भूमिका के अनुसार प्रेमचंद के संपादन में ‘हंस’ का आत्मकथा विशेषांक निकलना तय हुआ था; कविता 1932 में उसी में छपी।
- इनमें से कौन-सी रचना 2026-27 की ‘क्षितिज भाग-2’ के काव्य खंड में नहीं है?
- अट नहीं रही है
- फसल
- सवैया और कवित्त (देव)
- संगतकार
उत्तर देखें
सही उत्तर: सवैया और कवित्त (देव)। इस वर्ष के काव्य खंड में छह पाठ हैं: सूरदास, तुलसीदास, जयशंकर प्रसाद, निराला, नागार्जुन और मंगलेश डबराल। जनवरी 2026 के हमारे कुछ पुराने लेख पुराने पाठ-क्रम पर हैं, इसलिए पाठ मिलाकर पढ़ें।
6. सामान्य प्रश्न
पद्यांश की सप्रसंग व्याख्या का प्रश्न कितने अंक का है और किस पुस्तक से आता है?
बोर्ड के पाठ्यक्रम-पत्र में क्षितिज (भाग-2) के पद्यांश की सप्रसंग व्याख्या के 03 अंक हैं। नमूना प्रश्न-पत्र 2026-27 में यह प्र. 28 है, अंक (1+2=3) छपे हैं और दो पद्यांश अथवा के साथ दिए गए हैं। पद्यांश क्षितिज के काव्य खंड की छह कविताओं (पाठ 1 से 6) में से आता है।
अंक (1+2=3) कैसे बँटे हैं?
बोर्ड की उत्तर-कुंजी में प्र. 28 के लिए केवल ‘व्याख्या लिखने पर अंक देय है’ और कुल 03 अंक लिखा है; विभाजन नहीं बताया गया। हमारा अनुमान है कि प्रसंग के 1 और व्याख्या के 2 अंक हैं। इसीलिए हमारे मॉडल उत्तर में प्रसंग और व्याख्या हैं, और अंत में एक छोटी वैकल्पिक ‘काव्य-सौंदर्य’ पंक्ति, जो बोर्ड ने माँगी नहीं है। अनुमान गलत निकले तो भी यह पंक्ति नुकसान नहीं करेगी।
उत्तर कितने शब्दों में लिखें?
नमूना प्रश्न-पत्र में खंड ‘स’ का निर्देश है कि उत्तर लगभग 50 शब्दों में लिखें; प्र. 28 के लिए अलग शब्द-सीमा नहीं छपी। इसलिए प्रसंग 15 से 20 और व्याख्या 33 से 38 शब्द रखें। इस लेख के मॉडल उत्तरों में प्रसंग और व्याख्या मिलाकर 52 से 59 शब्द हैं। वैकल्पिक काव्य-सौंदर्य पंक्ति इससे अलग है; शब्द या समय कम पड़ें तो उसे छोड़ दें।
क्या व्याख्या में पूरा पद्यांश उतारना ज़रूरी है?
नहीं। प्रश्न व्याख्या माँगता है, इसलिए पंक्तियाँ उतारने में शब्द और समय जाते हैं। पंक्तियों का आशय अपने शब्दों में, उन्हीं के क्रम से लिखें; शब्द-दर-शब्द अर्थ लिखने के बजाय पूरी बात का भाव दें।
पद्यांश में बोलने वाला कौन है, यह प्रसंग में क्यों लिखें?
पद्यांश अक्सर किसी पात्र का कथन होता है: सूर के पदों में गोपियाँ उद्धव से, तुलसी के अंश में लक्ष्मण और परशुराम एक-दूसरे से बोलते हैं। प्रसंग में यह लिखने से पता चलता है कि आपको अंश का संदर्भ मालूम है। यह हमारा सुझाव है; बोर्ड ने प्रसंग की कोई अलग विधि नहीं बताई।
इस लेख में कुछ कविताओं की पंक्तियाँ दी हैं और कुछ की नहीं, ऐसा क्यों?
सूरदास, तुलसीदास, जयशंकर प्रसाद (निधन 1937) और निराला (निधन 1961) की रचनाओं की कॉपीराइट अवधि भारत के कानून के अनुसार समाप्त हो चुकी है, इसलिए उनकी पंक्तियाँ दी हैं। नागार्जुन (निधन 1998) और मंगलेश डबराल (निधन 2020) की रचनाएँ अभी कॉपीराइट में हैं, इसलिए उनके अंशों में केवल NCERT की पृष्ठ-संख्या और शुरुआती कुछ शब्द दिए हैं। सभी मॉडल उत्तर हमारे अपने शब्दों में हैं।
7. NCERT से आगे
यह भाग बोर्ड के पाठ्यक्रम या NCERT की पुस्तक का हिस्सा नहीं है। नॉर्थ कैरोलाइना विश्वविद्यालय, चैपल हिल के राइटिंग सेंटर की मार्गदर्शिका Poetry Explications कविता की व्याख्या के जो चरण बताती है, उनमें कविता को पहले चुपचाप और फिर ज़ोर से पढ़ना, खटकने वाले शब्द या ध्वनि-प्रयोग चिह्नित करना, यह देखना कि बोलने वाला कौन है और किससे बोल रहा है तथा उसका उद्देश्य क्या है, और फिर शब्द-चयन तथा दोहराव पर ध्यान देना शामिल है। यह मार्गदर्शिका विश्वविद्यालय स्तर पर अंग्रेज़ी कविताओं के विश्लेषण के लिए है; कक्षा 10 की सप्रसंग व्याख्या पर इसे लागू करना हमारा सुझाव है। ऊपर की विधि में ‘प्रसंग’ इसी ‘कौन किससे बोल रहा है’ वाले प्रश्न का उत्तर है (सूर में गोपियाँ उद्धव से, तुलसी में लक्ष्मण परशुराम से), और वैकल्पिक ‘काव्य-सौंदर्य’ पंक्ति शब्द-चयन और ध्वनि पर ध्यान देने से बनती है।
8. संदर्भ
- माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, राजस्थान, अजमेर: पाठ्यक्रम सत्र 2026-27, विषय हिंदी (कोड 01), कक्षा 10 (पृष्ठ 1–2): क्षितिज और कृतिका के अंक-विभाजन, सप्रसंग व्याख्या के 03 अंक।
- बोर्ड: Download Center, Model Question Papers 2027 और Secondary Model Question Paper (PDF): हिंदी (कोड 01) का नमूना प्रश्न-पत्र, ब्लू प्रिंट और उत्तर-कुंजी। प्र. 28, खंड ‘स’ का निर्देश, आंतरिक विकल्प का निर्देश और उत्तर-कुंजी की पंक्ति इसी से ली गई है।
- एनसीईआरटी, नई दिल्ली: क्षितिज, भाग-2, कक्षा 10 (पुनर्मुद्रण 2026-27), पाठ 1 से 6: पाठ 1, पाठ 2, पाठ 3, पाठ 4, पाठ 5, पाठ 6। पृष्ठ-संख्या, कविता की भूमिका और पंक्तियों के पाठ इसी से मिलाए गए हैं; मॉडल उत्तर हमारे अपने शब्दों में हैं।
- NCERTClasses: गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या, कक्षा 10 हिंदी (RBSE 2026-27), प्र. 27।
- NCERTClasses: कक्षा 10 हिंदी प्रश्न पत्र प्रारूप एवं ब्लू प्रिंट 2026-27।
- NCERTClasses: अपठित गद्यांश, 20 हल अभ्यास।
- The Writing Center, University of North Carolina at Chapel Hill: Poetry Explications।
NCERTClasses टीम · प्रकाशित: 20 अक्टूबर 2026 · अंतिम अद्यतन: 20 अक्टूबर 2026

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