कक्षा 10 विज्ञान शब्दकोश भाग 3 (विद्युत और चुंबकत्व): चित्र, हिन्दी-English शब्द और संकेत
चित्र, शब्द और अर्थ, एक ही पन्ने पर
अध्याय 11-12 · 26 शब्द · 6 चित्र
यह कक्षा 10 विज्ञान शब्दकोश का भाग 3 है। इसमें अध्याय 11 (विद्युत) और अध्याय 12 (विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव) के शब्द हिन्दी और English में एक ही पंक्ति में हैं। रसायन के शब्द भाग 1 में और प्रकाश-नेत्र के भाग 2 में हैं।
- पहले चित्र देखें: हर अध्याय की शुरुआत में चित्र और "एक मिनट में समझें" है।
- फिर शब्द-कार्ड: खोज बॉक्स में हिन्दी या English में शब्द लिखें।
- याद-मोड: अर्थ धुंधला हो जाता है। पहले खुद बोलें, फिर कार्ड छूकर जाँचें।
आवेश के प्रवाह की दर: I = Q/t। SI मात्रक ऐम्पियर (A)।
💡 1 A = 1 C/s। परंपरागत धारा धन आवेश की दिशा में, यानी सेल के धन सिरे से ऋण सिरे की ओर मानी जाती है।
ऐमीटर परिपथ की धारा मापता है और वोल्टमीटर दो बिंदुओं के बीच का विभवांतर।
💡 ऐमीटर श्रेणीक्रम में और वोल्टमीटर पार्श्वक्रम में जोड़ते हैं।
इकाई आवेश को एक बिंदु से दूसरे तक ले जाने में किया गया कार्य: V = W/Q।
💡 1 वोल्ट = 1 जूल/कूलॉम (1 V = 1 J C−1)।
स्थिर ताप पर चालक में धारा उसके सिरों के विभवांतर के अनुक्रमानुपाती होती है: V = IR।
💡 V-I ग्राफ़ मूल बिंदु से गुज़रने वाली सरल रेखा होता है।
चालक का वह गुण जो विद्युत धारा के प्रवाह का विरोध करता है: R = V/I। मात्रक ओम (Ω)।
💡 R लंबाई के अनुक्रमानुपाती और अनुप्रस्थ-काट क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
R = ρl/A में स्थिरांक ρ, जो पदार्थ का अभिलाक्षणिक गुणधर्म है। SI मात्रक Ω m।
💡 धातुओं और मिश्रातुओं की प्रतिरोधकता बहुत कम और विद्युतरोधी पदार्थों की बहुत अधिक होती है।
प्रतिरोधक एक के बाद एक जुड़े हों। सब में धारा समान और कुल विभवांतर उनमें बँट जाता है।
💡 R = R1 + R2 + R3। कुल प्रतिरोध सबसे बड़े से भी अधिक होता है।
प्रतिरोधकों के सिरे दो उभयनिष्ठ बिंदुओं से जुड़े हों। हर प्रतिरोधक पर विभवांतर समान होता है।
💡 1/R = 1/R1 + 1/R2 + 1/R3। कुल प्रतिरोध सबसे छोटे से भी कम होता है।
प्रतिरोधक में उत्पन्न ऊष्मा: H = I2Rt।
💡 उपयोग: हीटर, इस्त्री, बल्ब और फ्यूज़।
हीटर के अवयव उच्च प्रतिरोधकता वाले मिश्रातु के बनते हैं। बल्ब का तंतु टंगस्टन का होता है।
💡 टंगस्टन का गलनांक 3380 °C है, इसलिए तंतु पिघलता नहीं।
कार्य करने की दर: P = VI = I2R = V2/R। SI मात्रक वाट (W)।
💡 1 W = 1 V × 1 A।
विद्युत ऊर्जा का व्यावहारिक मात्रक, जिसे बोलचाल में 'यूनिट' कहते हैं।
💡 1 kWh = 3.6 × 106 जूल।
| राशि | प्रतीक | मात्रक | सूत्र |
|---|---|---|---|
| विद्युत धारा | I | ऐम्पियर (A) | I = Q/t |
| विभवांतर | V | वोल्ट (V) | V = W/Q |
| प्रतिरोध | R | ओम (Ω) | R = V/I |
| प्रतिरोधकता | ρ | ओम-मीटर (Ω m) | R = ρl/A |
| ऊष्मा | H | जूल (J) | H = I²Rt |
| शक्ति | P | वाट (W) | P = VI |
चुंबक के चारों ओर वह क्षेत्र जिसमें उसका बल अनुभव होता है।
💡 छड़ चुंबक के पास लाने पर दिक्सूचक की सुई विक्षेपित हो जाती है।
वे वक्र जिनके अनुदिश लौह-चूर्ण संरेखित होता है और जो क्षेत्र की दिशा दिखाते हैं।
💡 बाहर उत्तर से दक्षिण ध्रुव की ओर, बंद वक्र, कभी एक-दूसरे को नहीं काटतीं। पास-पास हों तो क्षेत्र प्रबल।
धारावाही तार के पास दिक्सूचक की सुई का विक्षेपित होना।
💡 इससे सिद्ध हुआ कि विद्युत धारा चुंबकीय प्रभाव उत्पन्न करती है।
सीधे धारावाही तार को दाएँ हाथ में इस प्रकार पकड़ें कि अँगूठा धारा की दिशा में हो। मुड़ी उँगलियाँ क्षेत्र की दिशा बताती हैं।
💡 धारा बढ़ाने पर क्षेत्र प्रबल होता है और तार से दूर जाने पर क्षीण।
धारावाही वृत्ताकार तार। इसके केंद्र पर क्षेत्र रेखाएँ सीधी रेखाएँ होती हैं।
💡 n फेरों की कुंडली में क्षेत्र एक फेरे की तुलना में n गुना होता है।
पास-पास लिपटे विद्युतरोधी ताँबे के तार की बेलनाकार कुंडली।
💡 भीतर क्षेत्र एकसमान और बाहर छड़ चुंबक जैसा होता है।
परिनालिका के भीतर नर्म लौह-क्रोड रखने पर बना चुंबक।
💡 इसमें विद्युत धारा बढ़ाने पर चुंबकीय क्षेत्र प्रबल होता है।
चुंबकीय क्षेत्र में रखे धारावाही चालक पर बल लगता है।
💡 धारा और क्षेत्र परस्पर लंबवत हों तो बल दोनों के लंबवत। धारा उलटने पर बल की दिशा भी उलटती है।
बाएँ हाथ की तर्जनी, मध्यमा और अँगूठा परस्पर लंबवत फैलाएँ।
💡 तर्जनी = क्षेत्र, मध्यमा = धारा, अँगूठा = बल की दिशा।
आपूर्ति में तीन तार: विद्युन्मय (लाल आवरण), उदासीन (काला) और भू-संपर्क (हरा)।
💡 हमारे देश में विभवांतर 220 V और प्रत्यावर्ती धारा की आवृत्ति 50 Hz है।
धात्विक आवरण वाले साधित्र को भूमि में दबी धातु-प्लेट से जोड़ने वाला सुरक्षा उपाय।
💡 आवरण में धारा का क्षरण हो तो उपयोगकर्ता को गंभीर झटका नहीं लगता।
लघुपथन: विद्युन्मय और उदासीन तार सीधे संपर्क में आने से धारा अचानक बहुत बढ़ जाना। अतिभारण: एक ही सॉकेट से बहुत से साधित्र जोड़ने या आपूर्ति-वोल्टता अचानक बढ़ने से धारा अधिक हो जाना।
💡 फ्यूज़ दोनों स्थितियों में परिपथ की रक्षा करता है।
परिपथ में श्रेणीक्रम में लगा सुरक्षा-तार, जो अधिक धारा बहने पर पिघलकर परिपथ तोड़ देता है।
💡 यह जूल-तापन के सिद्धांत पर काम करता है।
एक छोटी चुंबकीय सुई, जो स्वतंत्र घूमकर लगभग उत्तर-दक्षिण दिशा में ठहरती है।
💡 उत्तर की ओर रुकने वाला सिरा उत्तरोमुखी ध्रुव (उत्तर ध्रुव) कहलाता है।
इस नाम का शब्द नहीं मिला। दूसरा रूप या English में लिखकर देखें।
भ्रम की जोड़ियाँ: अंतर एक नज़र में
| जोड़ी | अंतर |
|---|---|
| श्रेणीक्रम / पार्श्वक्रम | श्रेणी में धारा समान, विभव बँटता है। पार्श्व में विभव समान, धारा बँटती है। |
| प्रतिरोध / प्रतिरोधकता | प्रतिरोध तार की लंबाई-मोटाई पर निर्भर है। प्रतिरोधकता केवल पदार्थ का गुण है। |
| ऐमीटर / वोल्टमीटर | ऐमीटर धारा मापता है, श्रेणी में जुड़ता है। वोल्टमीटर विभवांतर मापता है, पार्श्व में। |
| उदासीन / भू-संपर्क तार | उदासीन तार परिपथ पूरा करता है। भू-तार केवल सुरक्षा के लिए है। |
| लघुपथन / अतिभारण | लघुपथन: विद्युन्मय व उदासीन तार सीधे मिल जाना। अतिभारण: सीमा से अधिक धारा खींचना। |
शब्द पहचानो: 5 त्वरित प्रश्न
पहले खुद सोचिए, फिर प्रश्न पर छूकर उत्तर देखिए।
दो 4 Ω प्रतिरोध श्रेणी में जोड़ें तो कुल प्रतिरोध?
R = 4 + 4 = 8 Ω। पार्श्व में जोड़ते तो 2 Ω।
1 kWh कितने जूल के बराबर है?
3.6 × 10⁶ J।
फ्यूज़ तार किस पदार्थ का और क्यों?
कम गलनांक वाली मिश्रधातु का, ताकि अधिक धारा पर गलकर परिपथ तोड़ दे।
धारावाही चालक पर बल सबसे अधिक कब लगता है?
जब धारा चुंबकीय क्षेत्र के लंबवत हो।
इसी विषय के और पन्ने
पाठ्यपुस्तक के अध्याय (NCERT हिन्दी PDF)
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस भाग में कौन-से अध्याय हैं?
अध्याय 11 (विद्युत) और अध्याय 12 (विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव)। प्रकाश और नेत्र के शब्द भाग 2 में हैं।
अध्याय 12 में विद्युत-चुंबकीय प्रेरण क्यों नहीं है?
NCERT की 2026-27 की पुस्तक के इस अध्याय में प्रेरण, मोटर और जनित्र नहीं हैं। इसलिए यहाँ भी नहीं दिए गए।
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