कक्षा 10 विज्ञान शब्दकोश भाग 3 (विद्युत और चुंबकत्व): चित्र, हिन्दी-English शब्द और संकेत

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कक्षा 10 विज्ञान शब्दकोश भाग 3 (विद्युत और चुंबकत्व): चित्र, हिन्दी-English शब्द और संकेत

NCERTClasses टीम

चित्र, शब्द और अर्थ, एक ही पन्ने पर

अध्याय 11-12 · 26 शब्द · 6 चित्र

ओम का नियमचुंबकीय क्षेत्रघरेलू परिपथ

यह कक्षा 10 विज्ञान शब्दकोश का भाग 3 है। इसमें अध्याय 11 (विद्युत) और अध्याय 12 (विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव) के शब्द हिन्दी और English में एक ही पंक्ति में हैं। रसायन के शब्द भाग 1 में और प्रकाश-नेत्र के भाग 2 में हैं।

इसे ऐसे इस्तेमाल करें:
  • पहले चित्र देखें: हर अध्याय की शुरुआत में चित्र और "एक मिनट में समझें" है।
  • फिर शब्द-कार्ड: खोज बॉक्स में हिन्दी या English में शब्द लिखें।
  • याद-मोड: अर्थ धुंधला हो जाता है। पहले खुद बोलें, फिर कार्ड छूकर जाँचें।
शब्दों के बारे में: मुख्य शब्द NCERT की हिन्दी पाठ्यपुस्तक (2026-27) का है, दूसरा प्रचलित नाम कोष्ठक में। अर्थ और चित्र हमारे अपने बनाए हैं। आपकी पुस्तक में शब्द अलग हो तो परीक्षा में पुस्तक वाला लिखें।
अध्याय 11: विद्युतबोर्ड में 7 अंक
एक मिनट में समझें: तार में बहते आवेश की धारा I है। उसे बहाने वाला दबाव विभवांतर V है। बहाव में रुकावट प्रतिरोध R है। तीनों ओम के नियम V = IR से जुड़े हैं। आगे के सारे प्रश्न (श्रेणीक्रम, पार्श्वक्रम, ऊष्मा, शक्ति) इसी सूत्र के विस्तार हैं।
R1R2Iश्रेणीक्रमहर प्रतिरोधक में I समानR = R₁ + R₂R1R2पार्श्वक्रमहर प्रतिरोधक पर V समान1/R = 1/R₁ + 1/R₂
चित्र 1: श्रेणीक्रम और पार्श्वक्रम। श्रेणीक्रम में सभी प्रतिरोधों से एक ही धारा गुज़रती है और R = R₁ + R₂। पार्श्वक्रम में सबके सिरों पर विभवांतर समान रहता है और 1/R = 1/R₁ + 1/R₂, इसलिए कुल प्रतिरोध घटता है।
विभवांतर Vधारा Iसरल रेखा: V ∝ Iढाल = V/I = R
चित्र 2: V-I ग्राफ़। ओमीय चालक में सीधी रेखा मिलती है। रेखा की ढाल प्रतिरोध R है।
विद्युत धाराElectric current

आवेश के प्रवाह की दर: I = Q/t। SI मात्रक ऐम्पियर (A)।

💡 1 A = 1 C/s। परंपरागत धारा धन आवेश की दिशा में, यानी सेल के धन सिरे से ऋण सिरे की ओर मानी जाती है।

ऐमीटर और वोल्टमीटरAmmeter and voltmeter

ऐमीटर परिपथ की धारा मापता है और वोल्टमीटर दो बिंदुओं के बीच का विभवांतर।

💡 ऐमीटर श्रेणीक्रम में और वोल्टमीटर पार्श्वक्रम में जोड़ते हैं।

विभवांतरPotential difference

इकाई आवेश को एक बिंदु से दूसरे तक ले जाने में किया गया कार्य: V = W/Q।

💡 1 वोल्ट = 1 जूल/कूलॉम (1 V = 1 J C−1)।

ओम का नियमOhm's law

स्थिर ताप पर चालक में धारा उसके सिरों के विभवांतर के अनुक्रमानुपाती होती है: V = IR।

💡 V-I ग्राफ़ मूल बिंदु से गुज़रने वाली सरल रेखा होता है।

प्रतिरोधResistance

चालक का वह गुण जो विद्युत धारा के प्रवाह का विरोध करता है: R = V/I। मात्रक ओम (Ω)।

💡 R लंबाई के अनुक्रमानुपाती और अनुप्रस्थ-काट क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती होता है।

प्रतिरोधकताResistivity

R = ρl/A में स्थिरांक ρ, जो पदार्थ का अभिलाक्षणिक गुणधर्म है। SI मात्रक Ω m।

💡 धातुओं और मिश्रातुओं की प्रतिरोधकता बहुत कम और विद्युतरोधी पदार्थों की बहुत अधिक होती है।

श्रेणीक्रम संयोजनSeries combination

प्रतिरोधक एक के बाद एक जुड़े हों। सब में धारा समान और कुल विभवांतर उनमें बँट जाता है।

💡 R = R1 + R2 + R3। कुल प्रतिरोध सबसे बड़े से भी अधिक होता है।

पार्श्वक्रम संयोजनParallel combination

प्रतिरोधकों के सिरे दो उभयनिष्ठ बिंदुओं से जुड़े हों। हर प्रतिरोधक पर विभवांतर समान होता है।

💡 1/R = 1/R1 + 1/R2 + 1/R3। कुल प्रतिरोध सबसे छोटे से भी कम होता है।

जूल का तापन नियमJoule's law of heating

प्रतिरोधक में उत्पन्न ऊष्मा: H = I2Rt।

💡 उपयोग: हीटर, इस्त्री, बल्ब और फ्यूज़।

तापन अवयव और बल्ब का तंतुHeating element and bulb filament

हीटर के अवयव उच्च प्रतिरोधकता वाले मिश्रातु के बनते हैं। बल्ब का तंतु टंगस्टन का होता है।

💡 टंगस्टन का गलनांक 3380 °C है, इसलिए तंतु पिघलता नहीं।

विद्युत शक्तिElectric power

कार्य करने की दर: P = VI = I2R = V2/R। SI मात्रक वाट (W)।

💡 1 W = 1 V × 1 A।

किलोवाट-घंटाKilowatt hour (kWh)

विद्युत ऊर्जा का व्यावहारिक मात्रक, जिसे बोलचाल में 'यूनिट' कहते हैं।

💡 1 kWh = 3.6 × 106 जूल।

सारणी: मुख्य राशियाँ
राशिप्रतीकमात्रकसूत्र
विद्युत धाराIऐम्पियर (A)I = Q/t
विभवांतरVवोल्ट (V)V = W/Q
प्रतिरोधRओम (Ω)R = V/I
प्रतिरोधकताρओम-मीटर (Ω m)R = ρl/A
ऊष्माHजूल (J)H = I²Rt
शक्तिPवाट (W)P = VI
अध्याय 12: विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभावबोर्ड में 6 अंक
एक मिनट में समझें: धारा बहे तो चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र बनता है (ऑर्स्टेड)। उसकी दिशा दक्षिण-हस्त अंगुष्ठ नियम बताता है। और चुंबकीय क्षेत्र में रखे धारावाही तार पर बल लगता है, जिसकी दिशा फ्लेमिंग का वामहस्त नियम बताता है।
SNरेखाएँ N से निकलकर S में जाती हैं
चित्र 3: छड़ चुंबक की क्षेत्र रेखाएँ। बाहर रेखाएँ उत्तर ध्रुव से दक्षिण ध्रुव की ओर जाती हैं। ध्रुवों के पास रेखाएँ पास-पास हैं, यानी क्षेत्र प्रबल है। रेखाएँ कभी एक-दूसरे को नहीं काटतीं।
धारा Iचुंबकीय क्षेत्रअँगूठा = धारा की दिशामुड़ी उँगलियाँ = क्षेत्र की दिशा
चित्र 4: दक्षिण-हस्त अंगुष्ठ नियम। अंगूठा धारा की दिशा में हो तो मुड़ी उँगलियाँ क्षेत्र की दिशा बताती हैं।
तर्जनी: क्षेत्र Bमध्यमा: धारा Iअँगूठा: बल Fतीनों दिशाएँ परस्पर लंबवत हैं
चित्र 5: फ्लेमिंग का वामहस्त नियम। तर्जनी क्षेत्र, मध्यमा धारा और अंगूठा बल की दिशा है।
साधित्र(धात्विक आवरण)विद्युन्मय (लाल)फ्यूज़उदासीन (काला)भू-संपर्क (हरा)भूमिआपूर्ति: 220 V
चित्र 6: घरेलू परिपथ। विद्युन्मय (लाल), उदासीन (काला) और भू-संपर्क (हरा) तार। उपकरण का धात्विक खोल भू-तार से जुड़ा रहता है।
चुंबकीय क्षेत्रMagnetic field

चुंबक के चारों ओर वह क्षेत्र जिसमें उसका बल अनुभव होता है।

💡 छड़ चुंबक के पास लाने पर दिक्सूचक की सुई विक्षेपित हो जाती है।

चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँMagnetic field lines

वे वक्र जिनके अनुदिश लौह-चूर्ण संरेखित होता है और जो क्षेत्र की दिशा दिखाते हैं।

💡 बाहर उत्तर से दक्षिण ध्रुव की ओर, बंद वक्र, कभी एक-दूसरे को नहीं काटतीं। पास-पास हों तो क्षेत्र प्रबल।

ऑर्स्टेड का प्रयोगOersted's experiment

धारावाही तार के पास दिक्सूचक की सुई का विक्षेपित होना।

💡 इससे सिद्ध हुआ कि विद्युत धारा चुंबकीय प्रभाव उत्पन्न करती है।

दक्षिण-हस्त अंगुष्ठ नियमRight-hand thumb rule

सीधे धारावाही तार को दाएँ हाथ में इस प्रकार पकड़ें कि अँगूठा धारा की दिशा में हो। मुड़ी उँगलियाँ क्षेत्र की दिशा बताती हैं।

💡 धारा बढ़ाने पर क्षेत्र प्रबल होता है और तार से दूर जाने पर क्षीण।

वृत्ताकार पाशCircular loop

धारावाही वृत्ताकार तार। इसके केंद्र पर क्षेत्र रेखाएँ सीधी रेखाएँ होती हैं।

💡 n फेरों की कुंडली में क्षेत्र एक फेरे की तुलना में n गुना होता है।

परिनालिकाSolenoid

पास-पास लिपटे विद्युतरोधी ताँबे के तार की बेलनाकार कुंडली।

💡 भीतर क्षेत्र एकसमान और बाहर छड़ चुंबक जैसा होता है।

विद्युत चुंबकElectromagnet

परिनालिका के भीतर नर्म लौह-क्रोड रखने पर बना चुंबक।

💡 इसमें विद्युत धारा बढ़ाने पर चुंबकीय क्षेत्र प्रबल होता है।

धारावाही चालक पर बलForce on a current-carrying conductor

चुंबकीय क्षेत्र में रखे धारावाही चालक पर बल लगता है।

💡 धारा और क्षेत्र परस्पर लंबवत हों तो बल दोनों के लंबवत। धारा उलटने पर बल की दिशा भी उलटती है।

फ्लेमिंग का वामहस्त नियमFleming's left-hand rule

बाएँ हाथ की तर्जनी, मध्यमा और अँगूठा परस्पर लंबवत फैलाएँ।

💡 तर्जनी = क्षेत्र, मध्यमा = धारा, अँगूठा = बल की दिशा।

घरेलू विद्युत परिपथDomestic electric circuit

आपूर्ति में तीन तार: विद्युन्मय (लाल आवरण), उदासीन (काला) और भू-संपर्क (हरा)।

💡 हमारे देश में विभवांतर 220 V और प्रत्यावर्ती धारा की आवृत्ति 50 Hz है।

भू-संपर्कणEarthing

धात्विक आवरण वाले साधित्र को भूमि में दबी धातु-प्लेट से जोड़ने वाला सुरक्षा उपाय।

💡 आवरण में धारा का क्षरण हो तो उपयोगकर्ता को गंभीर झटका नहीं लगता।

लघुपथन और अतिभारणShort circuit and overloading

लघुपथन: विद्युन्मय और उदासीन तार सीधे संपर्क में आने से धारा अचानक बहुत बढ़ जाना। अतिभारण: एक ही सॉकेट से बहुत से साधित्र जोड़ने या आपूर्ति-वोल्टता अचानक बढ़ने से धारा अधिक हो जाना।

💡 फ्यूज़ दोनों स्थितियों में परिपथ की रक्षा करता है।

फ्यूज़Fuse

परिपथ में श्रेणीक्रम में लगा सुरक्षा-तार, जो अधिक धारा बहने पर पिघलकर परिपथ तोड़ देता है।

💡 यह जूल-तापन के सिद्धांत पर काम करता है।

दिक्सूचकCompass

एक छोटी चुंबकीय सुई, जो स्वतंत्र घूमकर लगभग उत्तर-दक्षिण दिशा में ठहरती है।

💡 उत्तर की ओर रुकने वाला सिरा उत्तरोमुखी ध्रुव (उत्तर ध्रुव) कहलाता है।

इस नाम का शब्द नहीं मिला। दूसरा रूप या English में लिखकर देखें।

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भ्रम की जोड़ियाँ: अंतर एक नज़र में

जोड़ीअंतर
श्रेणीक्रम / पार्श्वक्रमश्रेणी में धारा समान, विभव बँटता है। पार्श्व में विभव समान, धारा बँटती है।
प्रतिरोध / प्रतिरोधकताप्रतिरोध तार की लंबाई-मोटाई पर निर्भर है। प्रतिरोधकता केवल पदार्थ का गुण है।
ऐमीटर / वोल्टमीटरऐमीटर धारा मापता है, श्रेणी में जुड़ता है। वोल्टमीटर विभवांतर मापता है, पार्श्व में।
उदासीन / भू-संपर्क तारउदासीन तार परिपथ पूरा करता है। भू-तार केवल सुरक्षा के लिए है।
लघुपथन / अतिभारणलघुपथन: विद्युन्मय व उदासीन तार सीधे मिल जाना। अतिभारण: सीमा से अधिक धारा खींचना।

शब्द पहचानो: 5 त्वरित प्रश्न

पहले खुद सोचिए, फिर प्रश्न पर छूकर उत्तर देखिए।

दो 4 Ω प्रतिरोध श्रेणी में जोड़ें तो कुल प्रतिरोध?

R = 4 + 4 = 8 Ω। पार्श्व में जोड़ते तो 2 Ω।

1 kWh कितने जूल के बराबर है?

3.6 × 10⁶ J।

फ्यूज़ तार किस पदार्थ का और क्यों?

कम गलनांक वाली मिश्रधातु का, ताकि अधिक धारा पर गलकर परिपथ तोड़ दे।

धारावाही चालक पर बल सबसे अधिक कब लगता है?

जब धारा चुंबकीय क्षेत्र के लंबवत हो।

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पाठ्यपुस्तक के अध्याय (NCERT हिन्दी PDF)

सीमा: यह शब्दकोश पढ़ने और दोहराने की सहायता है, पाठ्यपुस्तक का विकल्प नहीं। परिभाषाएँ और उत्तर लिखने का रूप अपनी पाठ्यपुस्तक और शिक्षक के निर्देश से मिलाएँ। अंकभार बोर्ड के 2026-27 ब्लू प्रिंट के अनुसार है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस भाग में कौन-से अध्याय हैं?

अध्याय 11 (विद्युत) और अध्याय 12 (विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव)। प्रकाश और नेत्र के शब्द भाग 2 में हैं।

अध्याय 12 में विद्युत-चुंबकीय प्रेरण क्यों नहीं है?

NCERT की 2026-27 की पुस्तक के इस अध्याय में प्रेरण, मोटर और जनित्र नहीं हैं। इसलिए यहाँ भी नहीं दिए गए।

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