RBSE Class 12 Hindi वितान भाग-2 Notes PDF 2025-26 | सभी पाठों के नोट्स

📅 Monday, 5 January 2026 📖 3-5 min read

📚 RBSE Class 12 Hindi वितान भाग-2

खंड-5: पूरक पुस्तक | सभी 4 पाठों के विस्तृत नोट्स

सत्र 2025-26 | Marwari Mission 100 | www.ncertclasses.com

📝 परीक्षा प्रारूप - वितान भाग-2 (11-15 अंक)

क्र. प्रश्न का प्रकार अंक प्रश्न संख्या
1 बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) 1 × 3 = 3 3 प्रश्न
2 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न (20-30 शब्द) 2 × 2 = 4 2 प्रश्न
3 लघूत्तरात्मक प्रश्न (50-60 शब्द) 3 × 1 = 3 1 प्रश्न
4 निबंधात्मक प्रश्न (100-120 शब्द) 5 × 1 = 5 1 प्रश्न (विकल्प सहित)
कुल अंक 11-15 अंक

पाठ 1: सिल्वर वैडिंग

लेखक: मनोहर श्याम जोशी | विधा: कहानी

✍️ लेखक परिचय - मनोहर श्याम जोशी

जन्म: 9 अगस्त 1933, अजमेर (राजस्थान)

निधन: 30 मार्च 2006, नई दिल्ली

मूल निवास: कुमाऊँ, उत्तराखंड

प्रमुख रचनाएँ: कुरु कुरु स्वाहा, कसप, हरिया हरक्यूलीज की हैरानी, क्याप, हमज़ाद

टीवी सीरियल: हम लोग, बुनियाद, मुंगेरी लाल के हसीन सपने

विशेषता: हिंदी के प्रथम टीवी सीरियल लेखक, मध्यवर्गीय जीवन के सशक्त चित्रकार

सम्मान: साहित्य अकादमी पुरस्कार (2005 - 'क्याप' के लिए)

📖 पाठ का सारांश

'सिल्वर वैडिंग' कहानी एक मध्यवर्गीय परिवार की कथा है जो शादी की 25वीं वर्षगाँठ मनाने की तैयारी कर रहा है। कहानी के केंद्र में यशोधर बाबू हैं जो एक सरकारी कर्मचारी हैं और पारंपरिक मूल्यों में विश्वास रखते हैं।

कथा का विकास:

  • यशोधर बाबू का जीवन पारंपरिक भारतीय मूल्यों पर आधारित है
  • उनके बच्चे (भूषण, किशन लाल) आधुनिक विचारधारा के हैं
  • पत्नी भी धीरे-धीरे बच्चों की ओर झुक जाती है
  • यशोधर बाबू अपने आप को अकेला महसूस करते हैं
  • सिल्वर वैडिंग पार्टी में वे असहज महसूस करते हैं
  • अंत में वे छत पर अकेले खड़े दूध पीते हैं

मूल संदेश: कहानी पीढ़ी अंतराल (Generation Gap), पारंपरिक और आधुनिक मूल्यों के टकराव, तथा मध्यवर्गीय परिवार की विडंबनाओं को उजागर करती है।

👥 प्रमुख पात्र

पात्र विशेषताएँ
यशोधर बाबू मुख्य पात्र, सरकारी कर्मचारी, पारंपरिक विचारधारा, कर्तव्यनिष्ठ, 'जो हुआ होगा' कहावट प्रयोग
यशोधर की पत्नी गृहिणी, धीरे-धीरे आधुनिकता को स्वीकारती हैं, बच्चों का साथ देती हैं
भूषण बड़ा बेटा, आधुनिक विचारधारा, अच्छी नौकरी, पिता से वैचारिक मतभेद
किशन लाल यशोधर बाबू के गुरु और आदर्श, पारंपरिक मूल्यों के प्रतीक

🔑 महत्वपूर्ण बिंदु

  • पीढ़ी अंतराल: यशोधर बाबू और उनके बच्चों के बीच वैचारिक मतभेद
  • मध्यवर्गीय जीवन: सरकारी नौकरी, किफायती जीवन, सामाजिक प्रतिष्ठा
  • पारंपरिक vs आधुनिक: दो पीढ़ियों के मूल्यों का टकराव
  • अकेलापन: परिवार में रहते हुए भी यशोधर बाबू का अकेलापन
  • 'जो हुआ होगा': यशोधर बाबू की कहावट - निष्क्रियता का प्रतीक
  • सिल्वर वैडिंग पार्टी: पश्चिमी संस्कृति का प्रभाव
  • दूध पीना: पारंपरिक आदतों से जुड़ाव का प्रतीक

📝 बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ)

प्रश्न 1. 'सिल्वर वैडिंग' कहानी के लेखक कौन हैं?

(अ) धर्मवीर भारती    (ब) मनोहर श्याम जोशी    (स) फणीश्वर नाथ रेणु    (द) जैनेंद्र कुमार

✓ उत्तर: (ब) मनोहर श्याम जोशी

प्रश्न 2. यशोधर बाबू की प्रसिद्ध कहावट क्या है?

(अ) जो होना है होगा    (ब) जो हुआ होगा    (स) सब ठीक होगा    (द) चलता है

✓ उत्तर: (ब) जो हुआ होगा

प्रश्न 3. सिल्वर वैडिंग किसे कहते हैं?

(अ) 10वीं वर्षगाँठ    (ब) 20वीं वर्षगाँठ    (स) 25वीं वर्षगाँठ    (द) 50वीं वर्षगाँठ

✓ उत्तर: (स) 25वीं वर्षगाँठ

प्रश्न 4. यशोधर बाबू के गुरु का नाम क्या था?

(अ) किशन लाल    (ब) रामलाल    (स) श्यामलाल    (द) गोपाल

✓ उत्तर: (अ) किशन लाल

प्रश्न 5. कहानी का मुख्य विषय क्या है?

(अ) प्रेम कहानी    (ब) पीढ़ी अंतराल    (स) स्वतंत्रता संग्राम    (द) ग्रामीण जीवन

✓ उत्तर: (ब) पीढ़ी अंतराल

📝 लघु उत्तरीय प्रश्न (2-3 अंक)

प्रश्न 1. यशोधर बाबू का चरित्र-चित्रण कीजिए।

उत्तर: यशोधर बाबू एक मध्यवर्गीय सरकारी कर्मचारी हैं जो पारंपरिक भारतीय मूल्यों में विश्वास रखते हैं। उनकी प्रमुख विशेषताएँ हैं:

  • कर्तव्यनिष्ठ और ईमानदार
  • किफायती जीवन जीने वाले
  • परंपराओं के प्रति आस्थावान
  • 'जो हुआ होगा' उनकी प्रिय कहावट है जो उनकी निष्क्रियता दर्शाती है
  • परिवार में अकेलापन महसूस करते हैं

प्रश्न 2. 'जो हुआ होगा' कहावट का क्या महत्व है?

उत्तर: यह कहावट यशोधर बाबू के व्यक्तित्व का प्रतीक है। इसके द्वारा लेखक ने दर्शाया है:

  • यशोधर बाबू की निष्क्रियता और उदासीनता
  • परिस्थितियों को स्वीकार करने की प्रवृत्ति
  • बदलाव के प्रति अनिच्छा
  • पारंपरिक सोच जो भाग्यवादी है

प्रश्न 3. कहानी में पीढ़ी अंतराल कैसे दिखाया गया है?

उत्तर: कहानी में पीढ़ी अंतराल निम्न प्रकार से दिखाया गया है:

  • यशोधर बाबू पारंपरिक हैं, बच्चे आधुनिक
  • पिता किफायती, बच्चे खर्चीले
  • सिल्वर वैडिंग पार्टी में यशोधर बाबू असहज
  • पत्नी भी बच्चों की तरफ झुकती हैं
  • यशोधर बाबू छत पर अकेले दूध पीते हैं

📝 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (5 अंक)

प्रश्न: 'सिल्वर वैडिंग' कहानी का मूल संदेश स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: 'सिल्वर वैडिंग' कहानी मध्यवर्गीय परिवार की विडंबनाओं और पीढ़ी अंतराल को उजागर करती है।

मुख्य संदेश:

1. पीढ़ी अंतराल: दो पीढ़ियों के बीच वैचारिक मतभेद समाज की वास्तविकता है। यशोधर बाबू और उनके बच्चों के बीच का अंतर इसका प्रतीक है।

2. मूल्यों का टकराव: पारंपरिक और आधुनिक मूल्यों का संघर्ष हर परिवार में देखा जा सकता है। कहानी में यह टकराव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।

3. अकेलापन: बदलते समय में व्यक्ति अपने ही परिवार में अजनबी बन जाता है। यशोधर बाबू का छत पर अकेले दूध पीना इसका प्रतीक है।

4. मध्यवर्गीय जीवन: मध्यवर्ग की विडंबनाएँ - आर्थिक सीमाएँ, सामाजिक दबाव और पारिवारिक जिम्मेदारियाँ।

5. समन्वय की आवश्यकता: कहानी यह संदेश देती है कि दोनों पीढ़ियों को एक-दूसरे को समझना चाहिए।

निष्कर्ष: कहानी हमें यह सिखाती है कि परिवर्तन अनिवार्य है, लेकिन मूल मानवीय मूल्यों को बनाए रखना भी जरूरी है।

पाठ 2: जूझ

लेखक: आनंद यादव | विधा: आत्मकथा

✍️ लेखक परिचय - आनंद यादव

जन्म: 1935, सतारा जिला, महाराष्ट्र

शिक्षा: मराठी साहित्य में एम.ए., पी.एच.डी.

व्यवसाय: प्राध्यापक, पुणे विश्वविद्यालय

प्रमुख रचनाएँ: जूझ (आत्मकथा), गोतावळा, झोंबी

भाषा: मूल रचना मराठी में, हिंदी अनुवाद

विशेषता: दलित साहित्य के प्रमुख लेखक, ग्रामीण जीवन का यथार्थ चित्रण

📖 पाठ का सारांश

'जूझ' लेखक आनंद यादव की आत्मकथा का एक अंश है जिसमें उन्होंने अपने बचपन में शिक्षा प्राप्त करने के संघर्ष का वर्णन किया है।

कथा का विकास:

  • लेखक के पिता दादा (दत्ता जी राव) शराबी और क्रूर स्वभाव के थे
  • पिता लेखक को पढ़ने नहीं देना चाहते थे, खेतों में काम कराना चाहते थे
  • माँ शिक्षा की समर्थक थीं पर पिता से डरती थीं
  • लेखक ने स्कूल जाने की जिद की और मास्टर सौंदलगेकर से मिले
  • मास्टर ने पिता को समझाया और लेखक का स्कूल में दाखिला हुआ
  • लेखक ने कविता पाठ में विशेष रुचि दिखाई
  • अंततः लेखक ने शिक्षा प्राप्त की और बड़े प्रोफेसर बने

मूल संदेश: शिक्षा के लिए संघर्ष, दृढ़ संकल्प की शक्ति, और सामाजिक बाधाओं पर विजय।

👥 प्रमुख पात्र

पात्र विशेषताएँ
आनंद (लेखक) मुख्य पात्र, शिक्षा के प्रति समर्पित, जिज्ञासु, दृढ़ संकल्पी
दादा (पिता) शराबी, क्रूर स्वभाव, शिक्षा का विरोधी, बच्चे से खेतों में काम कराना चाहते थे
माँ शिक्षा की समर्थक, पति से डरती थीं, बेटे को पढ़ाना चाहती थीं
मास्टर सौंदलगेकर स्कूल के शिक्षक, लेखक के प्रेरणास्रोत, कविता पाठ सिखाया

🔑 महत्वपूर्ण बिंदु

  • शिक्षा का महत्व: शिक्षा ही व्यक्ति को ऊपर उठा सकती है
  • पारिवारिक विरोध: पिता का शिक्षा के प्रति नकारात्मक रवैया
  • माँ का सहयोग: चुपचाप बेटे का साथ देना
  • गुरु का महत्व: मास्टर सौंदलगेकर की भूमिका
  • दृढ़ संकल्प: बाधाओं के बावजूद पढ़ने की इच्छा
  • कविता पाठ: लेखक की विशेष रुचि और प्रतिभा
  • सामाजिक यथार्थ: ग्रामीण समाज में शिक्षा की स्थिति

📝 बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ)

प्रश्न 1. 'जूझ' किस विधा की रचना है?

(अ) कहानी    (ब) उपन्यास    (स) आत्मकथा    (द) जीवनी

✓ उत्तर: (स) आत्मकथा

प्रश्न 2. लेखक के पिता को किस नाम से संबोधित किया गया है?

(अ) बाबा    (ब) दादा    (स) पापा    (द) पिताजी

✓ उत्तर: (ब) दादा

प्रश्न 3. लेखक के शिक्षक का नाम क्या था?

(अ) गोपाल मास्टर    (ब) शर्मा मास्टर    (स) सौंदलगेकर    (द) पाटील मास्टर

✓ उत्तर: (स) सौंदलगेकर

प्रश्न 4. लेखक की मूल भाषा क्या थी?

(अ) हिंदी    (ब) मराठी    (स) गुजराती    (द) बंगाली

✓ उत्तर: (ब) मराठी

प्रश्न 5. 'जूझ' शब्द का अर्थ क्या है?

(अ) खेलना    (ब) पढ़ना    (स) संघर्ष करना    (द) भागना

✓ उत्तर: (स) संघर्ष करना

📝 लघु उत्तरीय प्रश्न (2-3 अंक)

प्रश्न 1. लेखक के पिता शिक्षा के विरोधी क्यों थे?

उत्तर: लेखक के पिता (दादा) शिक्षा के विरोधी निम्न कारणों से थे:

  • वे अशिक्षित थे और शिक्षा का महत्व नहीं समझते थे
  • उन्हें खेतों में काम करने के लिए मजदूर चाहिए था
  • वे चाहते थे कि बेटा भी खेती करे
  • शराब की लत के कारण सही निर्णय नहीं ले पाते थे
  • गरीबी के कारण स्कूल फीस देना मुश्किल था

प्रश्न 2. मास्टर सौंदलगेकर की भूमिका स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: मास्टर सौंदलगेकर लेखक के जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं:

  • उन्होंने लेखक की प्रतिभा को पहचाना
  • पिता को समझाकर स्कूल में दाखिला दिलवाया
  • कविता पाठ में विशेष प्रशिक्षण दिया
  • लेखक को प्रोत्साहित किया और आत्मविश्वास दिया
  • एक आदर्श गुरु की भूमिका निभाई

📝 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (5 अंक)

प्रश्न: 'जूझ' पाठ के आधार पर शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डालिए।

उत्तर: 'जूझ' पाठ शिक्षा के महत्व को बहुत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है:

1. शिक्षा जीवन बदलती है: लेखक का जीवन शिक्षा के कारण पूरी तरह बदल गया। एक गरीब किसान का बेटा प्रोफेसर बन गया।

2. संघर्ष की आवश्यकता: शिक्षा पाने के लिए संघर्ष करना पड़ता है। लेखक ने पिता के विरोध, गरीबी और सामाजिक बाधाओं के बावजूद शिक्षा प्राप्त की।

3. गुरु का महत्व: मास्टर सौंदलगेकर जैसे शिक्षक विद्यार्थियों का जीवन बदल सकते हैं।

4. सामाजिक उत्थान: शिक्षा ही समाज के वंचित वर्गों को ऊपर उठा सकती है।

5. दृढ़ संकल्प: शिक्षा के लिए दृढ़ संकल्प होना जरूरी है।

निष्कर्ष: यह पाठ हमें सिखाता है कि शिक्षा ही सच्ची मुक्ति का मार्ग है।

पाठ 3: अतीत में दबे पाँव

लेखक: ओम थानवी | विधा: यात्रा वृत्तांत

✍️ लेखक परिचय - ओम थानवी

जन्म: 1957, बीकानेर (राजस्थान)

शिक्षा: हिंदी साहित्य में स्नातकोत्तर

व्यवसाय: पत्रकार, संपादक (जनसत्ता)

प्रमुख रचनाएँ: अतीत में दबे पाँव, मुअनजोदड़ो

विशेषता: यात्रा वृत्तांत और पुरातात्विक लेखन में विशेष रुचि

📖 पाठ का सारांश

'अतीत में दबे पाँव' मुअनजोदड़ो (पाकिस्तान) की यात्रा का वृत्तांत है। लेखक ने 5000 वर्ष पुरानी सिंधु घाटी सभ्यता के अवशेषों का सजीव वर्णन किया है।

प्रमुख विषय:

  • मुअनजोदड़ो का परिचय: सिंध प्रांत (पाकिस्तान) में स्थित, 'मृतकों का टीला' अर्थ
  • खोज: 1922 में राखालदास बनर्जी द्वारा खोजा गया
  • नगर योजना: सुव्यवस्थित सड़कें, जल निकासी, स्नानागार
  • वास्तुकला: पक्की ईंटों से बने भवन, कुएँ, गोदाम
  • महान स्नानागार: विश्व का प्राचीनतम सार्वजनिक स्नानागार
  • कलात्मक वस्तुएँ: नर्तकी की मूर्ति, मुहरें, आभूषण

मूल संदेश: भारतीय सभ्यता की प्राचीनता और समृद्धि, पुरातात्विक विरासत का महत्व।

🏛️ मुअनजोदड़ो की विशेषताएँ

विशेषता विवरण
स्थान सिंध प्रांत, पाकिस्तान (सिंधु नदी के तट पर)
काल लगभग 2600-1900 ई.पू. (5000 वर्ष पुराना)
खोजकर्ता राखालदास बनर्जी (1922)
अर्थ मुअनजोदड़ो = मृतकों का टीला (सिंधी भाषा)
नगर योजना ग्रिड पैटर्न, चौड़ी सड़कें (9 मीटर), गलियाँ
जल निकासी ढकी हुई नालियाँ, मैनहोल, उन्नत व्यवस्था
महान स्नानागार 39 फीट लंबा, 23 फीट चौड़ा, 8 फीट गहरा
प्रसिद्ध कलाकृति कांस्य नर्तकी की मूर्ति (11 सेमी)

📝 बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ)

प्रश्न 1. 'अतीत में दबे पाँव' किस विधा की रचना है?

(अ) कहानी    (ब) यात्रा वृत्तांत    (स) निबंध    (द) आत्मकथा

✓ उत्तर: (ब) यात्रा वृत्तांत

प्रश्न 2. मुअनजोदड़ो का अर्थ क्या है?

(अ) प्राचीन नगर    (ब) मृतकों का टीला    (स) सुंदर शहर    (द) नदी का किनारा

✓ उत्तर: (ब) मृतकों का टीला

प्रश्न 3. मुअनजोदड़ो की खोज किसने की?

(अ) जॉन मार्शल    (ब) राखालदास बनर्जी    (स) दयाराम साहनी    (द) मार्टिमर व्हीलर

✓ उत्तर: (ब) राखालदास बनर्जी

प्रश्न 4. मुअनजोदड़ो की खोज कब हुई?

(अ) 1920    (ब) 1921    (स) 1922    (द) 1925

✓ उत्तर: (स) 1922

प्रश्न 5. मुअनजोदड़ो की प्रसिद्ध कलाकृति कौन सी है?

(अ) पत्थर की मूर्ति    (ब) कांस्य नर्तकी    (स) स्वर्ण मुकुट    (द) चाँदी का बर्तन

✓ उत्तर: (ब) कांस्य नर्तकी

📝 लघु उत्तरीय प्रश्न (2-3 अंक)

प्रश्न 1. मुअनजोदड़ो की नगर योजना की विशेषताएँ बताइए।

उत्तर: मुअनजोदड़ो की नगर योजना अत्यंत उन्नत थी:

  • ग्रिड पैटर्न: सड़कें एक-दूसरे को समकोण पर काटती थीं
  • चौड़ी सड़कें: मुख्य सड़कें 9 मीटर तक चौड़ी
  • जल निकासी: ढकी हुई नालियाँ, मैनहोल
  • दो भाग: गढ़ी (ऊपरी) और निचला नगर
  • पक्की ईंटें: सभी भवन पक्की ईंटों से बने

प्रश्न 2. महान स्नानागार का वर्णन कीजिए।

उत्तर: महान स्नानागार मुअनजोदड़ो की सबसे महत्वपूर्ण संरचना है:

  • आकार: 39 फीट लंबा, 23 फीट चौड़ा, 8 फीट गहरा
  • निर्माण: पक्की ईंटों से, बिटुमेन से जलरोधी
  • सीढ़ियाँ: उतरने के लिए दोनों ओर सीढ़ियाँ
  • जल आपूर्ति: कुएँ से पानी आता था
  • उपयोग: संभवतः धार्मिक स्नान के लिए

पाठ 4: डायरी के पन्ने

लेखिका: ऐन फ्रैंक | विधा: डायरी

✍️ लेखिका परिचय - ऐन फ्रैंक

जन्म: 12 जून 1929, फ्रैंकफर्ट, जर्मनी

निधन: फरवरी-मार्च 1945, बर्गन-बेल्सन यातना शिविर

राष्ट्रीयता: जर्मन-यहूदी (बाद में डच)

प्रसिद्ध रचना: द डायरी ऑफ ए यंग गर्ल (Het Achterhuis)

डायरी काल: 12 जून 1942 - 1 अगस्त 1944

प्रकाशन: 1947 में पिता ओट्टो फ्रैंक द्वारा

महत्व: विश्व की सबसे प्रसिद्ध डायरियों में से एक

📖 पाठ का सारांश

'डायरी के पन्ने' ऐन फ्रैंक की प्रसिद्ध डायरी के कुछ अंश हैं जो द्वितीय विश्व युद्ध के समय एम्सटर्डम में छिपकर रहने के अनुभवों पर आधारित हैं।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि:

  • 1940 में जर्मनी ने नीदरलैंड पर कब्जा किया
  • यहूदियों पर अनेक प्रतिबंध लगाए गए
  • 1942 में फ्रैंक परिवार एक गुप्त अनेक्स में छिप गया
  • 2 वर्षों तक 8 लोग एक छोटी जगह में रहे
  • 4 अगस्त 1944 को गिरफ्तार किए गए

डायरी की विशेषताएँ:

  • ऐन ने डायरी को 'किट्टी' नाम दिया
  • एक किशोरी के मनोभाव का चित्रण
  • युद्ध की विभीषिका का वर्णन
  • आशा और जीजीविषा का संदेश

👥 प्रमुख पात्र

पात्र विवरण
ऐन फ्रैंक मुख्य पात्र और लेखिका, 13-15 वर्षीय यहूदी लड़की, संवेदनशील, लेखन में रुचि
ओट्टो फ्रैंक पिता, व्यापारी, परिवार का एकमात्र जीवित बचा सदस्य
एडिथ फ्रैंक माँ, ऐन से संबंध तनावपूर्ण
मार्गोट फ्रैंक बड़ी बहन, शांत स्वभाव, पढ़ाई में तेज
किट्टी डायरी का काल्पनिक नाम, ऐन की सहेली

🔑 महत्वपूर्ण बिंदु

  • गुप्त अनेक्स: प्रिंसेंग्राख्त 263, एम्सटर्डम में छिपने की जगह
  • यहूदी उत्पीड़न: नाज़ी जर्मनी द्वारा यहूदियों पर अत्याचार
  • किशोर मनोविज्ञान: एक किशोरी के मन की बातें
  • आशावादिता: कठिन परिस्थितियों में भी आशा बनाए रखना
  • होलोकॉस्ट: 60 लाख यहूदियों की हत्या

📝 बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ)

प्रश्न 1. ऐन फ्रैंक की डायरी का नाम क्या था?

(अ) मैरी    (ब) किट्टी    (स) सारा    (द) लिज़ा

✓ उत्तर: (ब) किट्टी

प्रश्न 2. फ्रैंक परिवार कितने वर्षों तक छिपकर रहा?

(अ) 1 वर्ष    (ब) 2 वर्ष    (स) 3 वर्ष    (द) 4 वर्ष

✓ उत्तर: (ब) 2 वर्ष (जुलाई 1942 - अगस्त 1944)

प्रश्न 3. ऐन फ्रैंक का जन्म कब हुआ था?

(अ) 12 जून 1929    (ब) 12 जून 1930    (स) 12 जुलाई 1929    (द) 12 जुलाई 1930

✓ उत्तर: (अ) 12 जून 1929

प्रश्न 4. डायरी किस युद्ध की पृष्ठभूमि पर आधारित है?

(अ) प्रथम विश्व युद्ध    (ब) द्वितीय विश्व युद्ध    (स) वियतनाम युद्ध    (द) खाड़ी युद्ध

✓ उत्तर: (ब) द्वितीय विश्व युद्ध

प्रश्न 5. ऐन फ्रैंक की मृत्यु कहाँ हुई?

(अ) एम्सटर्डम    (ब) बर्लिन    (स) बर्गन-बेल्सन    (द) पेरिस

✓ उत्तर: (स) बर्गन-बेल्सन यातना शिविर

📝 लघु उत्तरीय प्रश्न (2-3 अंक)

प्रश्न 1. ऐन ने डायरी को 'किट्टी' क्यों कहा?

उत्तर: ऐन ने डायरी को 'किट्टी' नाम दिया क्योंकि:

  • उसे अपनी डायरी को एक सच्ची सहेली मानती थी
  • छिपने की जगह में कोई करीबी दोस्त नहीं था
  • किट्टी से वह अपने मन की हर बात कह सकती थी
  • यह उसके अकेलेपन का साथी था

प्रश्न 2. ऐन फ्रैंक का चरित्र-चित्रण कीजिए।

उत्तर: ऐन फ्रैंक एक असाधारण किशोरी थी:

  • संवेदनशील: भावनाओं को गहराई से महसूस करती थी
  • बुद्धिमान: उम्र से अधिक समझदार
  • लेखन प्रतिभा: उत्कृष्ट लेखन क्षमता
  • आशावादी: कठिन समय में भी आशा बनाए रखी
  • साहसी: विपरीत परिस्थितियों में भी हिम्मत नहीं हारी

🎯 परीक्षा हेतु अति महत्वपूर्ण प्रश्न

तथ्य उत्तर
सिल्वर वैडिंग के लेखक मनोहर श्याम जोशी
यशोधर बाबू की कहावट जो हुआ होगा
जूझ की विधा आत्मकथा
जूझ के लेखक आनंद यादव
मुअनजोदड़ो का अर्थ मृतकों का टीला
मुअनजोदड़ो की खोज 1922, राखालदास बनर्जी
ऐन फ्रैंक का जन्म 12 जून 1929
डायरी का नाम किट्टी
छिपने का समय 2 वर्ष (1942-1944)
ऐन की मृत्यु स्थान बर्गन-बेल्सन यातना शिविर

💡 परीक्षा टिप्स - वितान भाग-2

  • लेखक परिचय: सभी चार लेखकों का नाम, जन्म, प्रमुख रचनाएँ याद रखें
  • विधा पहचान: कहानी, आत्मकथा, यात्रा वृत्तांत, डायरी - विधा अवश्य याद करें
  • मुख्य पात्र: हर पाठ के 2-3 मुख्य पात्रों की विशेषताएँ याद रखें
  • MCQ Practice: तथ्यात्मक प्रश्नों का अभ्यास करें (नाम, तिथि, स्थान)
  • शब्द सीमा: अतिलघु (20-30 शब्द), लघु (50-60 शब्द), दीर्घ (100-120 शब्द)
  • उद्धरण: महत्वपूर्ण पंक्तियों को याद रखें (जो हुआ होगा, किट्टी आदि)
  • समय प्रबंधन: वितान भाग-2 के लिए 20-25 मिनट आवंटित करें

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खंड-5: वितान भाग-2 की सम्पूर्ण PDF (21+ पृष्ठ)

सभी 4 पाठ | MCQ | लघु उत्तरीय | दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

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📢 महत्वपूर्ण सूचना - Official अंक विभाजन 2025-26

माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, राजस्थान, अजमेर के Official Syllabus के अनुसार

खंड विषय अंक
खंड-1 अपठित बोध 12
खंड-2 रचनात्मक लेखन (अभिव्यक्ति एवं माध्यम सहित) 18
- व्यावहारिक व्याकरण 08
खंड-3 आरोह भाग-2 (पाठ्यपुस्तक) 31
खंड-4 वितान भाग-2 (पूरक पुस्तक) 11
प्रश्न-पत्र कुल अंक: 80
सत्रांक (Internal): 20
पूर्णांक: 100

⏱️ परीक्षा समय: 3 घंटे 15 मिनट | 📚 निर्धारित पुस्तकें: आरोह भाग-2, वितान भाग-2, अभिव्यक्ति एवं माध्यम (NCERT)

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