भारतीय सभ्यता का प्रारंभ (हड़प्पा / सिंधु-सरस्वती सभ्यता) | Indian Civilization Beginnings NCERT Class 6 Notes

📅 Saturday, 18 April 2026 📖 पढ़ रहे हैं...
भारतीय सभ्यता का प्रारंभ – NCERT कक्षा 6 सामाजिक विज्ञान अध्याय 6 नोट्स | NcertClasses.com
🏛️ कक्षा 6 · सामाजिक विज्ञान · अध्याय 6

भारतीय सभ्यता का प्रारंभ

समाज का अध्ययन: भारत और उसके आगे – अतीत के चित्रपट
NCERT पाठ्यपुस्तक | पुनर्मुद्रण 2026-27
📖 सम्पूर्ण नोट्स 🎯 परीक्षा उपयोगी 📊 SVG चित्र सहित 🗺️ नगर-योजना ❓ प्रश्नोत्तर
🏛️ अध्याय परिचय
विषयसामाजिक विज्ञान
कक्षा6
अध्याय6
शीर्षकभारतीय सभ्यता का प्रारंभ
पुस्तकसमाज का अध्ययन: भारत और उसके आगे
NCERT PDFfhes106.pdf ↗
पुनर्मुद्रण2026-27
सभ्यता काल2600–1900 सा.सं.पू.
महत्त्वपूर्ण नगरहड़प्पा, मोहनजो-दड़ो, धौलावीरा, लोथल, राखीगढ़ी

1. अध्याय का उद्धरण व परिचय

"भारत की सबसे प्राचीन सभ्यता, जो हड़प्पा, सिंधु अथवा सिंधु-सरस्वती सभ्यता के नाम से जानी जाती है, वास्तव में कई मायनों में एक अनूठी सभ्यता थी... इसने दिखाया कि कैसे एक सम्यक रूप से संतुलित समुदाय रहता है — जहाँ धनवान और निर्धन के बीच बहुत अधिक अंतर नहीं है... संक्षेप में, हड़प्पा के सामाजिक परिदृश्य में शोषण नहीं, बल्कि आपसी सामंजस्य दिखाई देता है।"
— बी.बी. लाल, प्रसिद्ध पुरातत्ववेत्ता

भारतीय सभ्यता का प्रारंभ NCERT कक्षा 6 सामाजिक विज्ञान का अत्यंत महत्त्वपूर्ण अध्याय है। इस अध्याय में हम भारत की सबसे प्राचीन शहरी सभ्यता — हड़प्पा / सिंधु / सिंधु-सरस्वती सभ्यता — का अध्ययन करते हैं। यह सभ्यता केवल प्राचीनता के कारण महत्त्वपूर्ण नहीं है, बल्कि अपनी नगर-योजना, स्वच्छता व्यवस्था, जल प्रबंधन, व्यापारिक सक्रियता, शिल्प कौशल और सामाजिक संतुलन के कारण भी विशेष है।

इस अध्याय से यह समझ में आता है कि भारतीय उपमहाद्वीप में सभ्यता का विकास बहुत व्यवस्थित ढंग से हुआ। यहाँ नगर बने, व्यापार चला, मोहरें बनीं, विशाल स्नानागार बने, जलाशय बनाए गए और लोगों ने ऐसी जीवन-पद्धति विकसित की जो आज भी आश्चर्य पैदा करती है।

📌 मुख्य समझ
हड़प्पा सभ्यता भारत के इतिहास का केवल एक आरंभिक अध्याय नहीं है, बल्कि यह इस बात का प्रमाण भी है कि हजारों वर्ष पहले इस भूमि पर अत्यंत विकसित, योजनाबद्ध और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध समाज मौजूद था।

2. सभ्यता क्या है?

सामान्यतः सभ्यता शब्द का प्रयोग मानव समाज के उन्नत चरण के लिए किया जाता है। कोई भी समाज तभी सभ्यता कहलाता है जब उसमें केवल गाँव या कृषि ही न हो, बल्कि प्रशासन, शिल्प, व्यापार, लेखन और संगठित सामाजिक जीवन जैसे अनेक गुण विकसित हो चुके हों।

सभ्यता की 7 मुख्य विशेषताएँ सभ्यता (Civilization) 1. शासन और प्रशासन का रूप 2. नगरीकरण नगर योजना व जल प्रबंधन 3. विभिन्न प्रकार के शिल्प 4. व्यापार आंतरिक व बाह्य 5. लेखन का कोई रूप 6. सांस्कृतिक विचार और कला 7. कृषि उत्पादकता जो नगरों को भोजन दे सके NcertClasses.com

चित्र: सभ्यता की सात मुख्य विशेषताएँ

🏛️ शासन और प्रशासन
समाज के अनेक कार्यों को संगठित रूप से चलाने के लिए।
🏙️ नगरीकरण
योजनाबद्ध नगर, सड़कें, जल निकास और सार्वजनिक निर्माण।
🔨 शिल्प
धातु, पत्थर, मिट्टी, मनके, आभूषण और उपकरण निर्माण।
🤝 व्यापार
आंतरिक और बाहरी आदान-प्रदान की संगठित व्यवस्था।
✍️ लेखन
अभिलेख रखने और संचार के लिए किसी लिपि या संकेत प्रणाली की आवश्यकता।
🎨 संस्कृति
कला, स्थापत्य, प्रतीक, मूर्तियाँ, अनुष्ठान और सामाजिक मान्यताएँ।
🌾 कृषि उत्पादकता
गाँवों के साथ-साथ नगरों को भी भोजन उपलब्ध कराने की क्षमता।
📌 धातु विज्ञान
धातु विज्ञान में प्रकृति से धातुनिष्कर्षण, उन्हें शुद्ध करना, विभिन्न धातुओं को मिलाकर उपयोगी मिश्रधातु बनाना और उनके गुणों का अध्ययन शामिल होता है।

3. विश्व की सभ्यताएँ – समयरेखा

हड़प्पा सभ्यता को समझने के लिए यह देखना उपयोगी है कि विश्व की अन्य प्राचीन सभ्यताएँ कब विकसित हुईं। इससे स्पष्ट होता है कि भारतीय सभ्यता भी विश्व की आरंभिक महान सभ्यताओं में से एक थी।

विश्व की प्रमुख सभ्यताओं की समयरेखा 4000 सा.सं.पू. 3000 सा.सं.पू. 2000 सा.सं.पू. 1000 सा.सं.पू. मेसोपोटामिया मिस्र सिंधु-सरस्वती सभ्यता 2600–1900 सा.सं.पू. NcertClasses.com

चित्र: विश्व की प्रमुख सभ्यताओं की समयरेखा

📌 समयरेखा से सीख
  • मेसोपोटामिया — आधुनिक इराक और सीरिया क्षेत्र की प्राचीन सभ्यता।
  • मिस्र सभ्यता — नील नदी के किनारे विकसित महान सभ्यता।
  • सिंधु-सरस्वती सभ्यता — भारतीय उपमहाद्वीप की प्रारंभिक शहरी सभ्यता, जो लगभग 2600 से 1900 सा.सं.पू. तक विकसित रही।

4. गाँव से नगर

सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों ने उत्तर-पश्चिमी भारतीय उपमहाद्वीप के मैदानों को उपजाऊ बनाया। यही उपजाऊ भूमि कृषि के विकास का आधार बनी। कृषि उत्पादन बढ़ने से गाँवों का विस्तार हुआ और धीरे-धीरे नगरीकरण प्रारंभ हुआ।

🌊 सहायक नदी
वह नदी जो किसी बड़ी नदी या झील में मिलती है, सहायक नदी कहलाती है।
📌 विकास का क्रम
  • 3500 सा.सं.पू. के आसपास — गाँव विकसित होकर नगर बनने लगे।
  • 2600 सा.सं.पू. तक — बढ़ते व्यापार, शिल्प और प्रशासनिक व्यवस्था के कारण अनेक नगर महानगरों में बदल गए।
  • इस पूरी प्रक्रिया को भारत का प्रथम नगरीकरण कहा जाता है।

5. सभ्यता के नाम

पुरातत्ववेत्ताओं और इतिहासकारों ने इस सभ्यता को अलग-अलग नाम दिए हैं। प्रत्येक नाम इसके किसी विशेष भौगोलिक या पुरातात्विक पक्ष को उजागर करता है।

नामकारण
सिंधु सभ्यतासिंधु नदी तंत्र के क्षेत्र में विकसित होने के कारण।
हड़प्पा सभ्यताहड़प्पा इस सभ्यता से संबंधित पहला प्रमुख उत्खनित नगर था।
सिंधु-सरस्वती सभ्यताइसके अनेक पुरास्थल सिंधु और सरस्वती (घग्गर-हाकरा) क्षेत्र में पाए गए।
सिंध घाटी सभ्यतायह पुराना नाम है, पर अब सीमित माना जाता है क्योंकि सभ्यता सिंधु क्षेत्र से बहुत आगे तक फैली थी।
🔑 हड़प्पावासी
इस सभ्यता के निवासियों को हड़प्पाई या हड़प्पावासी कहा जाता है। यह सभ्यता विश्व की प्राचीनतम और उन्नत शहरी सभ्यताओं में गिनी जाती है।

6. सरस्वती नदी

हड़प्पा सभ्यता को समझने में सरस्वती नदी का विशेष महत्त्व है। प्राचीन साहित्य और पुरातात्विक अध्ययनों में इस नदी के उल्लेख से सभ्यता के फैलाव का एक बड़ा आयाम स्पष्ट होता है।

🌊 सरस्वती नदी – मुख्य तथ्य
  • यह नदी हिमालय की तलहटी से निकलकर हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और गुजरात के कुछ क्षेत्रों से होकर बहती थी।
  • आज इसे भारत में घग्गर और पाकिस्तान में हाकरा कहा जाता है।
  • आज यह एक मौसमी नदी है जो मुख्यतः वर्षा ऋतु में बहती है।
  • इसका उल्लेख सबसे पहले ऋग्वेद में मिलता है।
  • बाद के ग्रंथों में इसके सूखने और लुप्त हो जाने का भी वर्णन मिलता है।

7. नगर-योजना

हड़प्पा सभ्यता की सबसे बड़ी विशेषता उसकी सुनियोजित नगर-योजना थी। यह स्पष्ट दिखाती है कि यहाँ केवल बस्तियाँ नहीं थीं, बल्कि सुव्यवस्थित नगर थे जिनका निर्माण पूर्व योजना के आधार पर हुआ था।

हड़प्पा और मोहनजो-दड़ो इस सभ्यता के सबसे पहले पहचाने गए नगरों में हैं। इनके बाद धौलावीरा, राखीगढ़ी, लोथल, कालीबंगा आदि अनेक स्थलों की खोज हुई।

हड़प्पाई नगरआधुनिक क्षेत्रविशेषता
हड़प्पापंजाब, पाकिस्तानपहले पहचाने गए प्रमुख नगरों में एक।
मोहनजो-दड़ोसिंध, पाकिस्तानमहास्नानागार, सैकड़ों कुएँ और उत्कृष्ट योजना।
धौलावीरागुजरातविशाल जलाशय, तीन खंडों वाला नगर।
राखीगढ़ीहरियाणामहान पुरास्थल, सरस्वती क्षेत्र से जुड़ा।
कालीबंगाराजस्थानयोजनाबद्ध सड़कें और कृषि के संकेत।
लोथलगुजरातबंदरगाह जैसी संरचना, समुद्री व्यापार का महत्त्वपूर्ण केंद्र।
हड़प्पाई नगर की सामान्य योजना किलेबंदी – सुरक्षात्मक दीवार ऊपरी नगर (अभिजात वर्ग) गोदाम भंडारगृह महास्नानागार निचला नगर (साधारण लोग) निजी घर (गुणवत्ता में समानता) चौड़ी सड़क जल-निकास नाली NcertClasses.com

चित्र: हड़प्पाई नगर की सामान्य योजना – ऊपरी नगर, निचला नगर, किलेबंदी और जल निकास

📌 नगर-योजना की मुख्य विशेषताएँ
  • चौड़ी और प्रायः सीधी सड़कें।
  • चारों ओर किलेबंदी या सुरक्षात्मक दीवारें।
  • ऊपरी नगर और निचला नगर का विभाजन।
  • सड़कों के नीचे व्यवस्थित जल निकास प्रणाली।
  • ईंटों से बने घर और सार्वजनिक भवन।
  • बड़े-छोटे घरों की गुणवत्ता में उल्लेखनीय समानता।
🔑 किलेबंदी और अभिजात वर्ग
किलेबंदी किसी नगर या बस्ती के चारों ओर बनाई गई विशाल सुरक्षात्मक दीवार है। अभिजात वर्ग से आशय समाज के उच्च स्तर के लोगों से है, जैसे शासक, प्रशासक, अधिकारी और संभवतः पुरोहित।

8. महास्नानागार (मोहनजो-दड़ो)

मोहनजो-दड़ो का महास्नानागार इस सभ्यता की सर्वाधिक चर्चित सार्वजनिक संरचनाओं में से एक है। यह केवल एक भवन नहीं, बल्कि हड़प्पावासियों की वास्तु-कुशलता और स्वच्छता-चेतना का शानदार उदाहरण है।

🏊 महास्नानागार – मुख्य तथ्य
  • स्थान — मोहनजो-दड़ो
  • आकार — 12 × 7 मीटर
  • ईंटों पर जल-रोधक पदार्थ की परत
  • चारों ओर छोटे-छोटे कमरे
  • एक कमरे में कुआँ
  • पानी निकालने के लिए विशेष नाली

विद्वानों ने इसके उपयोग के संबंध में अनेक मत दिए हैं। संभव है कि यह किसी विशेष धार्मिक अनुष्ठान, विशिष्ट वर्ग या राजसी प्रयोजनों के लिए प्रयुक्त होता हो। यह विचार इसलिए भी महत्त्वपूर्ण है क्योंकि अधिकांश घरों में निजी स्नान की व्यवस्था पहले से मौजूद थी।

9. जल प्रबंधन

यदि हड़प्पा सभ्यता की किसी एक विशेषता को आधुनिक दृष्टि से सबसे अधिक प्रशंसनीय कहा जाए, तो वह है जल प्रबंधन और स्वच्छता व्यवस्था

💧 जल प्रबंधन – मुख्य तथ्य
  • अनेक घरों में अलग स्नानागार बने हुए थे।
  • नगर की नालियाँ सड़कों के नीचे जाती थीं।
  • मोहनजो-दड़ो में लगभग 700 कुओं के प्रमाण मिले हैं।
  • धौलावीरा में विशाल जलाशय मिले हैं, जिनमें एक लगभग 73 मीटर लंबा था।
  • पत्थरों और चट्टानों को काटकर जलाशय बनाए गए थे।
  • भूमिगत नालियाँ जल को संग्रहण स्थलों तक पहुँचाती थीं।
📌 जलाशय
विशाल प्राकृतिक या कृत्रिम स्थान जहाँ जल संग्रहित किया जाए, उसे जलाशय कहते हैं।

10. हड़प्पावासी क्या खाते थे?

पुरातात्विक प्रमाणों से पता चलता है कि हड़प्पावासी कृषि, पशुपालन और जल संसाधनों पर आधारित विविध आहार लेते थे। उनका भोजन संतुलित और क्षेत्रीय संसाधनों पर आधारित था।

खाद्य पदार्थविवरण
अनाजजौ, गेहूँ, कुछ मोटे अनाज, बाजरा और कभी-कभी धान।
दलहनमटर, दालें, सेम आदि।
सब्जियाँविभिन्न प्रकार की सब्जियों के संकेत मिले हैं।
दुग्ध उत्पादमिट्टी के पात्रों की वैज्ञानिक जाँच से इसके संकेत मिले हैं।
मछलियाँनदियों और समुद्री क्षेत्र से प्राप्त।
मसालेहल्दी, अदरक आदि के अवशेष मिलने के संकेत।
📌 कृषि और कपास
हड़प्पावासी कृषि उपकरणों का प्रयोग करते थे। वे यूरेशिया में कपास उगाने वालों में सबसे प्रारंभिक माने जाते हैं। कपास का उपयोग वस्त्र निर्माण में किया जाता था।

11. सक्रिय व्यापार

हड़प्पा सभ्यता केवल आत्मनिर्भर स्थानीय समाज नहीं थी, बल्कि वह व्यापक व्यापारिक संपर्कों से भी जुड़ी हुई थी। इस व्यापार ने इसकी समृद्धि, शिल्प-विकास और नगर-जीवन को गहराई से प्रभावित किया।

🚢 व्यापार – मुख्य तथ्य
  • आंतरिक और बाह्य दोनों प्रकार का व्यापार होता था।
  • आभूषण, लकड़ी, दैनिक उपयोग की वस्तुएँ, संभवतः कपास और खाद्य सामग्री का विनिमय होता था।
  • ताँबे जैसी कुछ धातुएँ बाहर से लाई जाती थीं।
  • व्यापार के लिए स्थल मार्ग, नदी मार्ग और समुद्री मार्ग तीनों का उपयोग होता था।
  • लोथल में बंदरगाह जैसी संरचना मिली है।
  • व्यापारिक पहचान हेतु मोहरों का प्रयोग होता था।
💎 कार्नेलियन के मोती
हड़प्पावासियों के प्रिय आभूषणों में कार्नेलियन के मोती विशेष रूप से उल्लेखनीय थे। यह गुजरात क्षेत्र में मिलने वाला लाल रंग का अर्ध-मूल्यवान पत्थर है। हड़प्पाई कारीगर इनमें सूक्ष्म छेद करने की अद्भुत तकनीक जानते थे। उन्होंने शंखों से सुंदर चूड़ियाँ भी बनाईं।
🔑 तांबा और कांस्य
तांबा अपेक्षाकृत मुलायम धातु है। जब उसमें टिन मिलाया जाता है, तो कांस्य बनता है, जो अधिक कठोर होता है। हड़प्पावासी कांस्य के उपकरणों और बर्तनों के निर्माण में कुशल थे।

12. प्राचीन जीवन

हड़प्पा सभ्यता केवल भवनों और सड़कों तक सीमित नहीं थी। वहाँ का दैनिक जीवन भी अत्यंत समृद्ध और सुसंस्कृत था। पुरातत्व से प्राप्त वस्तुओं के आधार पर उनके जीवन की विविध झलकियाँ सामने आती हैं।

वस्तु का प्रकारउदाहरण एवं अर्थ
दैनिक उपयोगदर्पण, मिट्टी के पात्र, भार तौलने के पत्थर, छैनी, उपयोगी औजार।
मनोरंजनखेल-पट्ट, मिट्टी की सीटी, खिलौने।
कलामूर्तियाँ, मोहरें, चित्रित पात्र, सजावटी वस्तुएँ।
प्रतिमाएँ'नर्तकी' जैसी प्रसिद्ध कांस्य प्रतिमा, अन्य टेराकोटा मूर्तियाँ।
प्रतीकस्वास्तिक, पशु आकृतियाँ, देवतुल्य चित्र और लेखन संकेत।

इन वस्तुओं से स्पष्ट होता है कि हड़प्पावासी केवल जीविका में व्यस्त लोग नहीं थे, बल्कि वे सौंदर्यबोध, शिल्पकला, मनोरंजन और सामाजिक-सांस्कृतिक प्रतीकों को भी महत्त्व देते थे।

13. अंत अथवा नई शुरुआत?

1900 सा.सं.पू. के आसपास इस महान सभ्यता का शहरी स्वरूप क्षीण होने लगा। नगर धीरे-धीरे खाली होते गए और महानगरों का महत्व घटता गया।

⚠️ पतन के प्रमुख कारण
  1. जलवायु परिवर्तन — वर्षा में कमी और बढ़ती शुष्कता ने कृषि को प्रभावित किया।
  2. सरस्वती नदी का सूखना — कई नगरों का आधार कमजोर हो गया।

महत्त्वपूर्ण: युद्ध या बड़े आक्रमण के स्पष्ट प्रमाण नहीं मिलते। इसीलिए हड़प्पा सभ्यता को अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण सभ्यता माना जाता है।

🌱 अंत नहीं, परिवर्तन
नगरों का पतन होने के बावजूद हड़प्पा सभ्यता की अनेक तकनीकें, सांस्कृतिक परंपराएँ और सामाजिक अनुभव आगे की भारतीय सभ्यता में समाहित हो गए। इस दृष्टि से इसे पूर्ण अंत नहीं, बल्कि नई ऐतिहासिक शुरुआत भी कहा जा सकता है।

14. अध्याय सारांश

  • सभ्यता के लिए शासन, नगरीकरण, शिल्प, व्यापार, लेखन, संस्कृति और कृषि उत्पादकता आवश्यक हैं।
  • हड़प्पा / सिंधु / सिंधु-सरस्वती सभ्यता भारत की सबसे प्राचीन शहरी सभ्यताओं में से एक है।
  • इसका उत्कर्ष काल लगभग 2600–1900 सा.सं.पू. माना जाता है।
  • यह भारत के प्रथम नगरीकरण का उदाहरण है।
  • हड़प्पाई नगर सुनियोजित थे — चौड़ी सड़कें, किलेबंदी, ऊपरी-निचला नगर, नालियाँ।
  • मोहनजो-दड़ो का महास्नानागार और धौलावीरा के जलाशय विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं।
  • हड़प्पावासी कृषि, पशुपालन, शिल्प और व्यापार में उन्नत थे।
  • लोथल समुद्री व्यापार का महत्वपूर्ण केंद्र रहा।
  • सभ्यता का पतन मुख्यतः जलवायु परिवर्तन और नदी-तंत्र में बदलाव से जुड़ा माना जाता है।
  • हड़प्पा सभ्यता की सांस्कृतिक विरासत आगे की भारतीय सभ्यता में जीवित रही।

15. परीक्षा उपयोगी प्रश्नोत्तर

सभ्यता की प्रमुख विशेषताओं में शासन और प्रशासन, नगरीकरण, व्यापार, लेखन, शिल्प, सांस्कृतिक विचार और कृषि उत्पादकता शामिल हैं। इनमें से कोई भी चार लिखे जा सकते हैं।
इसे अलग-अलग कारणों से अलग नाम दिए गए। सिंधु नदी क्षेत्र के कारण इसे सिंधु सभ्यता, पहले प्रमुख उत्खनित नगर के कारण हड़प्पा सभ्यता, और सरस्वती क्षेत्र में विस्तृत पुरास्थलों के कारण सिंधु-सरस्वती सभ्यता कहा गया।
यह 12 × 7 मीटर का विशाल स्नानागार था जिसकी ईंटों पर जलरोधक पदार्थ की परत थी। इसके चारों ओर कमरे, एक कुआँ और जल निकास की व्यवस्था थी। इसका उपयोग संभवतः धार्मिक या विशिष्ट अवसरों के लिए होता था।
धौलावीरा में तीन अलग-अलग क्षेत्र, विशाल जलाशय, पत्थर से निर्मित संरचनाएँ और अत्यंत उन्नत जल प्रबंधन प्रणाली मिली है। यहाँ लगभग 73 मीटर लंबा जलाशय विशेष रूप से उल्लेखनीय है।
वे जौ, गेहूँ, बाजरा, कुछ मोटे अनाज, दलहन, सब्जियाँ आदि खाते थे। वे पशुपालन करते थे, दुग्ध उत्पादों का उपयोग करते थे और जल स्रोतों से मछलियाँ प्राप्त करते थे।
इसके पतन के प्रमुख कारणों में जलवायु परिवर्तन, वर्षा में कमी, शुष्कता और सरस्वती नदी का सूखना प्रमुख माने जाते हैं। बड़े युद्ध या आक्रमण के स्पष्ट प्रमाण नहीं मिलते।
सुनियोजित सड़कें, सार्वजनिक नालियाँ, स्वच्छता व्यवस्था, अनेक कुएँ, जलाशयों का निर्माण और घरों की गुणवत्ता में समानता यह दिखाती है कि हड़प्पावासियों में नागरिक जीवन के प्रति उच्च जिम्मेदारी और संगठन था।
लोथल में बंदरगाह जैसी संरचना मिली है, जिससे यह समुद्री व्यापार का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। यह भारत की प्रारंभिक समुद्री गतिविधियों का प्रमाण भी है।

16. अभ्यास प्रश्न उत्तर

प्रश्न 1: इस सभ्यता के अनेक नाम क्यों हैं?

उत्तर: इस सभ्यता के अनेक नाम इसलिए हैं क्योंकि इसे अलग-अलग आधारों पर पहचाना गया। सिंधु नदी क्षेत्र के कारण इसे सिंधु सभ्यता, पहले उत्खनित नगर हड़प्पा के कारण हड़प्पा सभ्यता, और सरस्वती क्षेत्र में अनेक पुरास्थल मिलने के कारण सिंधु-सरस्वती सभ्यता कहा गया। प्रत्येक नाम सभ्यता के किसी एक पक्ष को स्पष्ट करता है।

प्रश्न 2: सिंधु-सरस्वती सभ्यता की प्रमुख उपलब्धियाँ लिखिए।

उत्तर: इस सभ्यता की प्रमुख उपलब्धियों में सुनियोजित नगर-योजना, चौड़ी सड़कें, किलेबंदी, ऊपरी और निचले नगर का विभाजन, उत्कृष्ट जल-निकास व्यवस्था, मोहनजो-दड़ो का महास्नानागार, धौलावीरा के विशाल जलाशय, कृषि की उन्नत अवस्था, कपास की खेती, कांस्य और मनकों का शिल्प, मोहरों का उपयोग, आंतरिक और बाह्य व्यापार, तथा सामाजिक संतुलन शामिल हैं। यह वास्तव में अत्यंत विकसित और व्यवस्थित सभ्यता थी।

प्रश्न 3: हड़प्पाई नगर आधुनिक महानगरों से किस प्रकार अलग थे?

उत्तर: हड़प्पाई नगरों की सबसे बड़ी विशेषता उनकी योजनाबद्ध संरचना और स्वच्छता पर जोर था। सड़कों के नीचे नालियाँ, घरों में स्नानागार, कुओं की व्यवस्था और नगर का संगठित विभाजन आधुनिक नगरों को भी प्रेरित करने योग्य है। कई बार आज के महानगरों में जो अव्यवस्था दिखती है, वह हड़प्पा नगरों में नहीं मिलती।

प्रश्न 4: हड़प्पावासियों में नागरिकता का उच्च भाव स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: सार्वजनिक जल-निकास व्यवस्था, कुओं का रख-रखाव, जलाशयों की सफाई, योजनाबद्ध सड़कें, सामूहिक भवन और घरों की गुणवत्ता में समानता — ये सभी इस बात के प्रमाण हैं कि हड़प्पावासी संगठित नागरिक जीवन जीते थे। उनमें केवल व्यक्तिगत जीवन नहीं, बल्कि पूरे नगर की व्यवस्था के प्रति जिम्मेदारी थी।


संबंधित अध्ययन सामग्री

📥 NCERT अधिकृत PDF
⚠️ अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख NCERT की पाठ्यपुस्तक ‘समाज का अध्ययन: भारत और उसके आगे – अतीत के चित्रपट’, कक्षा 6 (पुनर्मुद्रण 2026-27) के अध्याय 6 पर आधारित विद्यार्थियों की शैक्षिक सहायता हेतु तैयार किया गया है। यह NCERT की अधिकृत सामग्री नहीं है। मूल पाठ्यपुस्तक के लिए आधिकारिक PDF अवश्य देखें — fhes106.pdf

📤 शेयर करें:

💼

सरकारी नौकरी की तैयारी करें!

SSC, Railway, Bank, UPSC के लिए

Visit Now →

💬 टिप्पणियाँ

No comments:

Post a Comment