आधारभूत लोकतंत्र: शासन (NCERT कक्षा 6 सामाजिक विज्ञान अध्याय 10) | Basic Democracy: Governance Class 6 Notes

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आधारभूत लोकतंत्र: शासन – NCERT कक्षा 6 सामाजिक विज्ञान अध्याय 10 नोट्स | ncertclasses.com
🏛️ कक्षा 6 · सामाजिक विज्ञान · अध्याय 10

आधारभूत लोकतंत्र — भाग 1: शासन

NCERT कक्षा 6 सामाजिक विज्ञान | शासन, सरकार, कानून, लोकतंत्र, सरकार के अंग और स्तर | पुनर्मुद्रण 2026-27
📖 सम्पूर्ण नोट्स 🎯 परीक्षा उपयोगी 📊 SVG आरेख 🏛️ तीन अंग + तीन स्तर ❓ विस्तृत प्रश्नोत्तर
🏛️ अध्याय परिचय
विषयसामाजिक विज्ञान
कक्षा6
अध्याय10
शीर्षकआधारभूत लोकतंत्र: शासन
फोकसशासन और लोकतंत्र
NCERT PDFfhes110.pdf ↗
पुनर्मुद्रण2026-27
मुख्य अवधारणाएँशासन, सरकार, कानून, लोकतंत्र, विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका
महत्त्वपूर्ण प्रश्नसरकार क्यों चाहिए? सरकार के तीन अंग कौन-से हैं? लोकतंत्र क्या है?

1. परिचय – नियमों की आवश्यकता

“राजानां धर्मगोप्तारं धर्मो रक्षति रक्षितः”
शासक धर्म की रक्षा करता है और जो धर्म की रक्षा करते हैं, धर्म उनकी रक्षा करता है।
— महाभारत
“न्याय के बिना शांति नहीं; समानता के बिना न्याय नहीं; विकास के बिना समानता नहीं; संस्कृति और लोगों की पहचान और सम्मान के बिना लोकतंत्र नहीं।”
— रिगोबर्टा मेन्चु तुम

मनुष्य बहुत लंबे समय से समाज में रहता आया है। जब अनेक लोग एक साथ रहते हैं, तो उनके विचार, इच्छाएँ, आवश्यकताएँ और हित एक जैसे नहीं होते। यदि कोई नियम न हों, तो अव्यवस्था, विवाद, असमानता और टकराव पैदा हो सकते हैं। इसलिए समाज को व्यवस्थित ढंग से चलाने के लिए नियम आवश्यक होते हैं।

📌 नियम कहाँ-कहाँ होते हैं?
  • घर में – परिवार के व्यवहार, समय और जिम्मेदारियों से जुड़े नियम
  • विद्यालय में – अनुशासन, समयपालन, वर्दी, परीक्षा, आचरण
  • सड़क पर – यातायात नियम
  • कार्यालय/कार्यस्थल पर – कार्यप्रणाली और उत्तरदायित्व
  • समाज और राज्य में – कानून, नीतियाँ और प्रशासनिक व्यवस्थाएँ

अर्थात, जहाँ भी लोग एक साथ रहते हैं, वहाँ कुछ न कुछ नियम आवश्यक होते हैं। जब यह व्यवस्था बड़े स्तर पर लागू होती है, तब हम शासन और सरकार की बात करते हैं।

2. शासन, सरकार और कानून

📖 महत्त्वपूर्ण परिभाषाएँ
  • शासन (Governance) – समाज को नियमों, निर्णयों, संस्थाओं और प्रक्रियाओं के माध्यम से व्यवस्थित रूप से चलाने की प्रक्रिया।
  • सरकार (Government) – वह तंत्र या समूह जो नियम बनाता है, उन्हें लागू करता है और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखता है।
  • कानून (Law) – राज्य द्वारा मान्यता प्राप्त वे महत्वपूर्ण और बाध्यकारी नियम जिनका पालन सभी को करना होता है।

शासन केवल नियम बनाना नहीं है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना है कि वे नियम निष्पक्ष रूप से लागू हों, लोगों के अधिकार सुरक्षित रहें और समाज में शांति तथा व्यवस्था बनी रहे।

🔑 याद रखें
कानून और नियम अपरिवर्तनीय नहीं होते। समाज की आवश्यकताओं, समय, तकनीक, नई समस्याओं और नागरिकों की माँग के अनुसार उनमें परिवर्तन किए जा सकते हैं।

3. नियम, कानून और संविधान में अंतर

आधार नियम कानून संविधान
अर्थ व्यवहार को व्यवस्थित करने के सामान्य निर्देश राज्य द्वारा मान्य और लागू बाध्यकारी नियम देश का सर्वोच्च विधिक दस्तावेज
कहाँ लागू घर, स्कूल, संस्था, समूह पूरे राज्य/देश में पूरे देश की शासन-व्यवस्था पर
कौन बनाता है परिवार, संस्था, संगठन विधायिका संविधान सभा / संवैधानिक प्रक्रिया
महत्व छोटी इकाइयों में व्यवस्था अधिकार, दायित्व, दंड और सुरक्षा सरकार की पूरी संरचना, अधिकार और मर्यादा तय करता है
📌 सरल उदाहरण
घर में समय पर पढ़ना एक नियम हो सकता है। सड़क के बाएँ चलना या हेलमेट पहनना कानून हो सकता है। नागरिकों के अधिकार, चुनाव, संसद, न्यायालय और सरकार के ढाँचे का आधार संविधान है।

4. सरकार के तीन अंग

किसी भी आधुनिक लोकतांत्रिक शासन-व्यवस्था में सरकार एक ही इकाई नहीं होती, बल्कि उसके अलग-अलग अंग होते हैं जिनकी अलग-अलग जिम्मेदारियाँ होती हैं। भारत में सरकार के तीन प्रमुख अंग हैं।

📜 1. विधायिका

यह वह अंग है जो कानून बनाता है। आवश्यकता पड़ने पर पुराने कानूनों में संशोधन करता है या उन्हें समाप्त भी कर सकता है।

राष्ट्रीय स्तर: लोकसभा और राज्यसभा

राज्य स्तर: विधान सभा (कुछ राज्यों में विधान परिषद भी)

⚙️ 2. कार्यपालिका

यह वह अंग है जो कानूनों को लागू करता है, योजनाएँ चलाता है, प्रशासन संभालता है और व्यवस्था बनाए रखता है।

केंद्र में: राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मंत्रिपरिषद, प्रशासनिक विभाग और एजेंसियाँ

राज्य में: राज्यपाल, मुख्यमंत्री, मंत्रिपरिषद और प्रशासन

⚖️ 3. न्यायपालिका

यह न्यायालयों की प्रणाली है जो तय करती है कि कानून का पालन हुआ है या नहीं, विवादों का समाधान करती है और न्याय देती है।

राष्ट्रीय स्तर: सर्वोच्च न्यायालय

राज्य स्तर: उच्च न्यायालय

अन्य: जिला एवं निम्न न्यायालय

📌 तीनों अंग साथ मिलकर कैसे काम करते हैं?
  • विधायिका कानून बनाती है।
  • कार्यपालिका उन कानूनों को जमीन पर लागू करती है।
  • न्यायपालिका देखती है कि कानून और सरकारी कार्यवाही न्यायपूर्ण तथा संवैधानिक हैं या नहीं।

5. शक्तियों का पृथक्करण

📌 शक्तियों का पृथक्करण (Separation of Powers)
  • किसी अच्छे शासन-तंत्र में सरकार के तीनों अंगों की भूमिकाएँ अलग-अलग रखी जाती हैं।
  • इसका उद्देश्य यह है कि कोई एक अंग बहुत अधिक शक्तिशाली न हो जाए
  • तीनों अंग अलग होते हुए भी एक-दूसरे से जुड़े रहते हैं।
  • वे एक-दूसरे पर निगरानी और संतुलन बनाए रखते हैं।
  • इससे शासन में जवाबदेही, न्याय और संतुलन बना रहता है।

उदाहरण के लिए, यदि विधायिका कोई कानून पारित करती है, तो न्यायपालिका यह जाँच सकती है कि वह संविधान के अनुरूप है या नहीं। इसी प्रकार कार्यपालिका कानून लागू करते समय अपने अधिकारों की सीमा से बाहर नहीं जा सकती।

6. सरकार के तीन स्तर

भारत एक विशाल देश है। यहाँ समस्याएँ और आवश्यकताएँ हर स्थान पर एक जैसी नहीं हैं। इसलिए शासन को प्रभावी बनाने के लिए भारत में सरकार तीन स्तरों पर काम करती है।

स्तर सरकार मुख्य उदाहरण मुख्य कार्य
राष्ट्रीय स्तर केंद्र सरकार / संघ सरकार राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, संसद रक्षा, विदेश नीति, राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था, संचार, मुद्रा, राष्ट्रीय नीतियाँ
राज्य स्तर राज्य सरकार राज्यपाल, मुख्यमंत्री, विधान सभा पुलिस, स्वास्थ्य, कृषि, राज्य शिक्षा, कानून-व्यवस्था, सिंचाई आदि
स्थानीय स्तर स्थानीय सरकार ग्राम पंचायत, पंचायत समिति, जिला परिषद, नगर पालिका, नगर परिषद, नगर निगम सफाई, पानी, नालियाँ, स्थानीय सड़कें, स्ट्रीट लाइट, स्थानीय विकास कार्य
🏛️ औपचारिक और वास्तविक प्रमुख

केंद्र में राष्ट्रपति संवैधानिक/औपचारिक प्रमुख होते हैं, जबकि प्रधानमंत्री सरकार के वास्तविक प्रमुख होते हैं।

राज्य में राज्यपाल संवैधानिक/औपचारिक प्रमुख होते हैं, जबकि मुख्यमंत्री राज्य सरकार के वास्तविक प्रमुख होते हैं।

💡 सरल उदाहरण – बाढ़ की स्थिति
  • छोटी स्थानीय समस्या – स्थानीय निकाय या प्रशासन संभाल सकता है।
  • राज्य-स्तर की गंभीर समस्या – राज्य सरकार राहत और बचाव कार्य चलाती है।
  • बहुत बड़े स्तर की आपदा – केंद्र सरकार भी सहायता, संसाधन और विशेष दल भेज सकती है।
  • कई बार तीनों स्तर एक साथ भी काम करते हैं।

7. SVG: सरकार के 3 अंग और 3 स्तर

भारत की शासन व्यवस्था – तीन अंग और तीन स्तर सरकार के तीन अंग 📜 विधायिका कानून बनाती है लोकसभा + राज्यसभा राज्य: विधान सभा ⚙️ कार्यपालिका कानून लागू करती है PM + मंत्री + विभाग राज्य: CM + मंत्री ⚖️ न्यायपालिका न्याय और व्याख्या सर्वोच्च न्यायालय राज्य: उच्च न्यायालय शक्तियों का पृथक्करण = संतुलन + जवाबदेही + नियंत्रण सरकार के तीन स्तर केंद्र सरकार राष्ट्रीय स्तर राज्य सरकार राज्य स्तर स्थानीय सरकार ncertclasses.com | NCERT Class 6 Social Science Chapter 10

चित्र: सरकार के तीन अंग और सरकार के तीन स्तर – NCERT अवधारणा पर आधारित सरल प्रस्तुति

8. राष्ट्रीय आदर्श वाक्य

संस्था आदर्श वाक्य अर्थ
भारत सरकार सत्यमेव जयते सत्य की ही विजय होती है।
सर्वोच्च न्यायालय यतो धर्मस्ततो जयः जहाँ धर्म है, वहाँ विजय है।
📌 अतिरिक्त उपयोगी जानकारी
हमारे अनेक राष्ट्रीय संस्थानों के आदर्श वाक्य भारतीय ज्ञान-परंपरा और प्राचीन ग्रंथों से प्रेरित हैं। इससे यह समझ आता है कि आधुनिक शासन व्यवस्था का नैतिक आधार भी महत्वपूर्ण है।

9. डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम

👨‍🚀 डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम – प्रेरक परिचय
  • जन्म – 1931, रामेश्वरम (तमिलनाडु) के एक सामान्य परिवार में।
  • विशेष पहचान – भारत के अंतरिक्ष और मिसाइल कार्यक्रमों में महत्वपूर्ण योगदान के कारण उन्हें “मिसाइल मैन” भी कहा गया।
  • राष्ट्रपति – वे भारत के 11वें राष्ट्रपति रहे।
  • वे युवाओं, शिक्षा, विज्ञान और राष्ट्रनिर्माण के प्रबल प्रेरक थे।
  • उनका जीवन यह सिखाता है कि एक संवैधानिक पद पर बैठा व्यक्ति केवल औपचारिक नहीं, बल्कि प्रेरक सार्वजनिक नेतृत्व का माध्यम भी बन सकता है।
“आकाश की ओर देखिए। हम अकेले नहीं हैं। संपूर्ण ब्रह्मांड हमारा मित्र है।”
“स्वप्न वे नहीं जो हम सोते समय देखते हैं; स्वप्न वे हैं जो हमें सोने नहीं देते।”
“यदि बड़ा लक्ष्य, ज्ञान, कठिन परिश्रम और सतत प्रयास हो, तो सफलता संभव है।”

10. लोकतंत्र – अर्थ, प्रकार और महत्व

📖 लोकतंत्र क्या है?
  • लोकतंत्र का अंग्रेजी शब्द Democracy है।
  • यह दो ग्रीक शब्दों से मिलकर बना है –
    Demos = लोग
    Kratos = शक्ति / शासन
  • इस प्रकार लोकतंत्र का अर्थ है – लोगों का शासन
  • लोकतंत्र में जनता सीधे या अपने चुने हुए प्रतिनिधियों के माध्यम से शासन में भाग लेती है।
  • भारत विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देशों में से एक है।
  • भारत में 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के नागरिकों को मतदान का अधिकार प्राप्त है।

लोकतंत्र के प्रकार

प्रकार अर्थ उदाहरण
प्रत्यक्ष लोकतंत्र जहाँ लोग सीधे निर्णय प्रक्रिया में भाग लेते हैं। कक्षा में सभी विद्यार्थियों का मतदान कर पिकनिक स्थल चुनना।
प्रतिनिधि लोकतंत्र जहाँ जनता अपने प्रतिनिधियों को चुनती है और वे प्रतिनिधि जनता की ओर से निर्णय लेते हैं। विधायक, सांसद, पंचायत प्रतिनिधि, नगर निकाय प्रतिनिधि।
📌 भारत में कौन-सा लोकतंत्र है?
भारत जैसे विशाल देश में हर निर्णय पर सभी लोगों की सीधी भागीदारी practically संभव नहीं है। इसलिए भारत में मुख्यतः प्रतिनिधि लोकतंत्र की व्यवस्था अपनाई गई है।
📌 लोकतंत्र और गणतंत्र में अंतर

लोकतंत्र का संबंध इस बात से है कि शासन में जनता की भागीदारी कैसे होती है।

गणतंत्र का संबंध इस बात से है कि राज्य का प्रमुख वंशानुगत नहीं होता, बल्कि संवैधानिक व्यवस्था के तहत निर्धारित होता है।

भारत लोकतांत्रिक भी है और गणतांत्रिक भी।

📌 जन-प्रतिनिधि
  • विधायक (MLA) – राज्य विधान सभा का सदस्य
  • सांसद (MP) – लोकसभा या राज्यसभा का सदस्य
  • पंचायत/नगर प्रतिनिधि – स्थानीय स्तर पर चुने गए प्रतिनिधि

11. लोकतंत्र में नागरिक की भूमिका

🧑‍🤝‍🧑 लोकतंत्र केवल वोट देने तक सीमित नहीं है

लोकतंत्र में नागरिक की भूमिका बहुत व्यापक होती है। एक जागरूक नागरिक लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाता है।

  • मतदान करना – सही प्रतिनिधियों का चुनाव करना
  • कानून का पालन करना – लोकतांत्रिक व्यवस्था का सम्मान
  • प्रश्न पूछना – शासन से जवाबदेही मांगना
  • दूसरों के अधिकारों का सम्मान करना – लोकतंत्र परस्पर सम्मान पर आधारित है
  • सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना – सड़क, स्कूल, पार्क, जल-संसाधन आदि
  • सामुदायिक भागीदारी – स्वच्छता, शिक्षा, राहत, स्थानीय बैठकों और जन-हित कार्यों में भाग लेना

12. शब्दावली

📚 त्वरित शब्दार्थ
शब्द सरल अर्थ
शासनसमाज को व्यवस्थित ढंग से चलाने की प्रक्रिया
सरकारनियम बनाने और लागू करने वाला तंत्र
कानूनराज्य द्वारा मान्य और बाध्यकारी नियम
विधायिकाकानून बनाने वाला अंग
कार्यपालिकाकानून लागू करने वाला अंग
न्यायपालिकान्याय देने और कानून की व्याख्या करने वाला अंग
लोकतंत्रलोगों का शासन
प्रतिनिधि लोकतंत्रजनता द्वारा चुने प्रतिनिधियों के माध्यम से शासन
विधायकविधान सभा का चुना गया सदस्य
सांसदसंसद का चुना गया सदस्य

13. अध्याय सारांश

  • जब लोग समाज में साथ रहते हैं, तो व्यवस्था बनाए रखने के लिए नियम आवश्यक होते हैं।
  • शासन समाज को नियमों, संस्थाओं और निर्णयों के माध्यम से चलाने की प्रक्रिया है।
  • सरकार वह तंत्र है जो नियम बनाता है और उनका पालन सुनिश्चित करता है।
  • कानून महत्वपूर्ण और बाध्यकारी नियम होते हैं।
  • सरकार के तीन अंग हैं – विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका।
  • विधायिका कानून बनाती है, कार्यपालिका उन्हें लागू करती है और न्यायपालिका न्याय देती है।
  • शक्तियों का पृथक्करण शासन में संतुलन और जवाबदेही बनाए रखता है।
  • भारत में सरकार के तीन स्तर हैं – केंद्र, राज्य और स्थानीय सरकार।
  • लोकतंत्र का अर्थ है लोगों का शासन।
  • भारत में मुख्यतः प्रतिनिधि लोकतंत्र की व्यवस्था है।
  • एक अच्छे लोकतंत्र में नागरिक की भूमिका मतदान, नियम-पालन, प्रश्न पूछने और दूसरों के अधिकारों के सम्मान तक फैली होती है।
  • डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का जीवन बताता है कि सार्वजनिक पद प्रेरक राष्ट्रीय नेतृत्व का माध्यम बन सकते हैं।

14. परीक्षा उपयोगी प्रश्नोत्तर

शासन समाज को नियमों, निर्णयों और संस्थाओं के माध्यम से व्यवस्थित रूप से चलाने की प्रक्रिया है। हमें सरकार की आवश्यकता इसलिए होती है क्योंकि समाज में बहुत से लोग साथ रहते हैं और उनकी आवश्यकताएँ तथा विचार अलग-अलग होते हैं। यदि नियम और उन्हें लागू करने वाली कोई व्यवस्था न हो, तो अव्यवस्था फैल सकती है। सरकार कानून बनाकर, उन्हें लागू करके और विवादों का समाधान सुनिश्चित करके समाज में व्यवस्था बनाए रखती है।
सरकार के तीन अंग हैं –

(1) विधायिका – कानून बनाती है, पुराने कानूनों में संशोधन करती है और आवश्यक होने पर उन्हें समाप्त भी कर सकती है।
(2) कार्यपालिका – कानूनों को लागू करती है, प्रशासन चलाती है और सरकारी योजनाओं को जमीन पर उतारती है।
(3) न्यायपालिका – यह तय करती है कि कानून का पालन हुआ है या नहीं, विवादों का समाधान करती है और न्याय देती है।
सरकार के तीनों अंगों – विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका – की शक्तियों और कार्यों को अलग-अलग रखना शक्तियों का पृथक्करण कहलाता है। इसका उद्देश्य यह है कि कोई एक अंग अत्यधिक शक्तिशाली न हो जाए। इससे शासन में संतुलन, जवाबदेही और न्याय बना रहता है।
भारत में सरकार के तीन स्तर हैं –
केंद्र सरकार – राष्ट्रीय स्तर की समस्याओं और नीतियों के लिए
राज्य सरकार – राज्य स्तर के प्रशासन और विकास के लिए
स्थानीय सरकार – गाँव, कस्बे और नगर की स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए।
लोकतंत्र का अर्थ है – लोगों का शासन।

प्रत्यक्ष लोकतंत्र में लोग स्वयं निर्णय प्रक्रिया में सीधे भाग लेते हैं।
प्रतिनिधि लोकतंत्र में लोग अपने प्रतिनिधियों को चुनते हैं और वे प्रतिनिधि जनता की ओर से निर्णय लेते हैं।

भारत में मुख्यतः प्रतिनिधि लोकतंत्र है।
लोकतंत्र का संबंध जनता की भागीदारी, चुनाव और प्रतिनिधित्व से है।
गणतंत्र का संबंध इस बात से है कि राज्य का प्रमुख वंशानुगत नहीं होता, बल्कि संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार निर्धारित होता है।

भारत एक लोकतांत्रिक गणराज्य है।
डॉ. कलाम का जीवन हमें सिखाता है कि सामान्य पृष्ठभूमि से आने वाला व्यक्ति भी कठोर परिश्रम, ज्ञान, अनुशासन और बड़े सपनों के बल पर राष्ट्र के सर्वोच्च पद तक पहुँच सकता है। उन्होंने विज्ञान, शिक्षा और युवाओं को प्रेरणा दी। उनसे यह भी सीख मिलती है कि सार्वजनिक पद केवल औपचारिक नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने का माध्यम भी हो सकते हैं।
एक अच्छा नागरिक मतदान करता है, कानून का पालन करता है, सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करता है, दूसरों के अधिकारों का सम्मान करता है, शासन से प्रश्न पूछता है और समाजहित के कार्यों में भाग लेता है। लोकतंत्र तभी मजबूत होता है जब नागरिक जागरूक और जिम्मेदार हों।

15. अभ्यास प्रश्नों के उत्तर

प्रश्न 1: शासन का क्या अर्थ है? सरकार की आवश्यकता क्यों होती है?

उत्तर: शासन का अर्थ है समाज को नियमों, संस्थाओं और निर्णयों के माध्यम से व्यवस्थित रूप से चलाना। सरकार की आवश्यकता इसलिए होती है क्योंकि समाज में लोग अलग-अलग विचारों, आवश्यकताओं और हितों के साथ रहते हैं। यदि कोई नियम न हों और उन्हें लागू करने वाली व्यवस्था न हो, तो अव्यवस्था फैल सकती है। सरकार कानून बनाती है, उन्हें लागू करती है और विवाद होने पर न्याय सुनिश्चित करती है।

प्रश्न 2: सरकार के तीन अंगों का वर्णन कीजिए।

उत्तर: सरकार के तीन अंग हैं – विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका। विधायिका कानून बनाती है। कार्यपालिका उन कानूनों को लागू करती है तथा प्रशासनिक कामकाज संभालती है। न्यायपालिका विवादों का समाधान करती है, कानून की व्याख्या करती है और न्याय देती है। तीनों अंग मिलकर शासन व्यवस्था को संतुलित और प्रभावी बनाते हैं।

प्रश्न 3: भारत में त्रिस्तरीय सरकार की आवश्यकता क्यों है?

उत्तर: भारत एक विशाल और विविधतापूर्ण देश है। यहाँ राष्ट्रीय, राज्य और स्थानीय स्तर की समस्याएँ अलग-अलग प्रकार की होती हैं। इसलिए शासन को प्रभावी बनाने के लिए त्रिस्तरीय सरकार आवश्यक है। केंद्र सरकार राष्ट्रीय विषयों को संभालती है, राज्य सरकार राज्य-स्तरीय मामलों को, और स्थानीय सरकार गाँव व नगर की स्थानीय समस्याओं का समाधान करती है। इससे प्रशासन जनता के अधिक निकट पहुँचता है।

प्रश्न 4: लोकतंत्र और प्रतिनिधि लोकतंत्र पर टिप्पणी लिखिए।

उत्तर: लोकतंत्र लोगों का शासन है। इसमें जनता शासन प्रक्रिया में भाग लेती है। छोटे समूहों में प्रत्यक्ष लोकतंत्र संभव हो सकता है, जहाँ लोग सीधे निर्णय लें। लेकिन बड़े देशों में यह कठिन होता है। इसलिए प्रतिनिधि लोकतंत्र अपनाया जाता है, जिसमें जनता अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करती है। वही प्रतिनिधि जनता की ओर से विधान सभाओं और संसद में निर्णय लेते हैं। भारत में प्रतिनिधि लोकतंत्र की व्यवस्था है।

प्रश्न 5: किसी समकालीन उदाहरण के माध्यम से बताइए कि सरकार के तीन स्तर कैसे साथ काम कर सकते हैं।

उत्तर: मान लीजिए किसी क्षेत्र में गंभीर बाढ़ आ जाती है। स्थानीय सरकार तुरंत स्थानीय राहत, सफाई और प्राथमिक सहायता का काम शुरू कर सकती है। राज्य सरकार बचाव दल, चिकित्सा सहायता और शिविरों की व्यवस्था कर सकती है। यदि स्थिति बहुत गंभीर हो, तो केंद्र सरकार अतिरिक्त संसाधन, वित्तीय सहायता या विशेष बल भेज सकती है। इस प्रकार तीनों स्तर मिलकर समस्या का समाधान करते हैं।


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⚠️ अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख NCERT कक्षा 6 सामाजिक विज्ञान के अध्याय 10 “आधारभूत लोकतंत्र: शासन” पर आधारित विद्यार्थियों की अध्ययन-सहायता हेतु तैयार किया गया है। यह NCERT की आधिकारिक प्रतिलिपि नहीं है। मूल अध्याय एवं अधिकृत PDF के लिए कृपया NCERT की वेबसाइट देखें – https://ncert.nic.in/textbook/pdf/fhes110.pdf । यह सामग्री केवल शैक्षिक उद्देश्य के लिए है। © ncertclasses.com

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