कार्य का महत्व
NCERT पाठ्यपुस्तक | पुनर्मुद्रण 2026-27
| विषय | सामाजिक विज्ञान |
| कक्षा | 6 |
| अध्याय | 13 |
| शीर्षक | कार्य का महत्व |
| पुस्तक | समाज का अध्ययन: भारत और उसके आगे |
| NCERT PDF | fhes113.pdf ↗ |
| पुनर्मुद्रण | 2026-27 |
| उद्धरण | स्वामी विवेकानंद |
| मुख्य प्रश्न | आर्थिक व गैर-आर्थिक गतिविधियाँ, पारिश्रमिक, मूल्य संवर्धन |
1. परिचय – अनु और कबीर की कहानी
अध्याय की शुरुआत अनु और कबीर की बातचीत से होती है। वे अपने आस-पास के लोगों को देखते हैं और समझते हैं कि समाज में अलग-अलग लोग अलग-अलग प्रकार के कार्य करते हैं। कोई वेतन लेकर काम करता है, कोई सेवा-भाव से नि:शुल्क कार्य करता है, तो कोई एक ही समय में आर्थिक और गैर-आर्थिक दोनों प्रकार की गतिविधियों में भाग लेता है।
| पात्र | कार्य | प्रकार |
|---|---|---|
| गीता मौसी | भारतीय वायुसेना में पायलट; देश की सेवा करती हैं और वेतन प्राप्त करती हैं | आर्थिक |
| कबीर के दादाजी | सेवानिवृत्ति के बाद आस-पास के बच्चों को नि:शुल्क भूगोल पढ़ाते हैं, सब्जी उद्यान में काम करते हैं, घर के अन्य काम करते हैं | गैर-आर्थिक |
| अनु के माता-पिता | दुकान चलाते हैं जहाँ वेशभूषा और सिले वस्त्र बेचे जाते हैं | आर्थिक |
| अनु की माँ | दुकान में सहयोग करती हैं तथा एक स्वैच्छिक समूह में महिलाओं को बुनाई सिखाती हैं | दोनों |
| रोहन | सॉफ्टवेयर कंपनी में काम करता है और सप्ताहांत में युवाओं को स्वेच्छा से कंप्यूटर कौशल सिखाता है | दोनों |
2. आर्थिक गतिविधियाँ
आर्थिक गतिविधियाँ वे हैं जिनमें अर्थ (द्रव्य, मुद्रा) सम्मिलित होता है, अथवा जो अर्थोपार्जन के लिए की जाती हैं, अथवा जो सम्मिलित पक्षों के लिए वस्तु के नकद मूल्य से संबंधित होती हैं।
उदाहरण – व्यापारी बाजार में स्कूल बैग बेचते हैं, किसान अपनी उपज बेचते हैं, वकील अभियोजन का शुल्क लेते हैं, ट्रक चालक वस्तुएँ एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाते हैं, कारखाने के श्रमिक मशीनों पर काम करते हैं।
- बाजार – वह स्थान जहाँ व्यक्ति वस्तुओं और सेवाओं का लेन-देन करते हैं। कई बार वस्तुओं का वस्तुओं से लेन-देन भी संभव है, पर अधिकतर बाजारों में धनराशि का उपयोग किया जाता है।
- शुल्क – किसी व्यावसायिक परामर्श या सेवा के बदले दिया गया भुगतान; जैसे चिकित्सक या वकील को दिया गया शुल्क।
- वस्तु का नकद मूल्य – किसी वस्तु का वह मौद्रिक मूल्य जो व्यक्ति उस वस्तु से मिलने वाले लाभ के आधार पर निर्धारित करता है।
3. गैर-आर्थिक गतिविधियाँ
गैर-आर्थिक गतिविधियाँ वे हैं जिनमें आय अथवा संपत्ति अर्जित नहीं होती, बल्कि उन्हें कृतज्ञता, स्नेह, सेवा और आदर जैसी अनुभूतियों के साथ किया जाता है।
उदाहरण – अभिभावकों द्वारा परिवार के लिए भोजन बनाना, बच्चों को उनके विद्यालय कार्य में सहायता करना, युवाओं द्वारा दादा-दादी अथवा नाना-नानी की सेवा करना, परिवार के सदस्यों द्वारा घर के नवीनीकरण में सहयोग देना, स्वेच्छा से पढ़ाना आदि।
4. आर्थिक vs गैर-आर्थिक गतिविधियाँ – तुलना
- मौद्रिक मूल्य सम्मिलित
- अर्थोपार्जन का उद्देश्य
- बाजार या रोजगार से जुड़ी
- वेतन, शुल्क, मजदूरी या बिक्री मूल्य प्राप्त
- उदाहरण – व्यापारी, किसान, पायलट, सॉफ्टवेयर इंजीनियर
- कोई मौद्रिक मूल्य नहीं
- स्नेह, सेवा, कर्तव्य, आदर का भाव
- परिवार और समाज में अधिक दिखाई देती हैं
- संतोष, कृतज्ञता, संबंध और सामाजिक सहयोग पैदा करती हैं
- उदाहरण – नि:शुल्क पढ़ाना, भोजन बनाना, सेवा कार्य
| गतिविधि/व्यवसाय | प्रकार | भुगतान/लाभ का रूप |
|---|---|---|
| बेकर | आर्थिक | रोटी/बेकरी वस्तुएँ बेचकर आय |
| दर्जी | आर्थिक | कपड़े सिलने का शुल्क |
| किसान द्वारा ट्रैक्टर की मरम्मत | आर्थिक | सेवा का मूल्य या मजदूरी |
| चिकित्सक | आर्थिक | परामर्श शुल्क |
| परिवार के लिए भोजन बनाने वाले अभिभावक | गैर-आर्थिक | स्नेह, देखभाल, पारिवारिक सहयोग |
| वैज्ञानिक | आर्थिक | वेतन |
| बीमार दादा-दादी की देखभाल | गैर-आर्थिक | आदर, सेवा, कर्तव्य |
| स्वयंसेवक का कार्य | गैर-आर्थिक | संतोष और सामाजिक योगदान |
5. आर्थिक गतिविधियों के प्रकार
काव्या अपनी चाची के घर गाँव जाती है। रास्ते में वह देखती है कि गाँव के पास एक राजमार्ग बनाया जा रहा है। वहाँ तकनीशियन बड़ी मशीनें चला रहे हैं। काव्या के चाचा निर्माण कंपनी में तकनीशियन हैं और उन्हें अपनी सेवाओं के बदले प्रतिमाह वेतन मिलता है।
काव्या की चाची गाँव के डाकघर में कार्य करती हैं और उन्हें भी प्रतिमाह वेतन मिलता है। कार्यालय के बाद वह शाम को ऑनलाइन कक्षाएँ लेती हैं, जिनके लिए वह विद्यार्थियों से साप्ताहिक शुल्क प्राप्त करती हैं।
बाद में काव्या आम के बगीचे में साहिल नामक एक श्रमिक को खेत में काम करते देखती है। उसे अपने कार्य के लिए कुछ धनराशि दैनिक मजदूरी के रूप में मिलती है और शेष भुगतान आमों के रूप में दिया जाता है।
- हर आर्थिक गतिविधि का भुगतान एक जैसा नहीं होता।
- किसी को वेतन मिलता है, किसी को शुल्क, किसी को मजदूरी।
- कुछ परिस्थितियों में भुगतान वस्तु के रूप में भी किया जाता है।
- एक ही व्यक्ति एक से अधिक आर्थिक गतिविधियों में भाग ले सकता है।
6. भुगतान के प्रकार
- वेतन – एक नियोक्ता द्वारा कर्मचारी को नियमित रूप से, सामान्यतः प्रतिमाह किया जाने वाला नियत भुगतान।
उदाहरण: गीता मौसी, रोहन, काव्या की चाची, निर्माण कंपनी के तकनीशियन। - शुल्क – किसी व्यावसायिक परामर्श, शिक्षा या सेवा के बदले दिया गया भुगतान।
उदाहरण: वकील, चिकित्सक, काव्या की चाची द्वारा ली जाने वाली ऑनलाइन कक्षा का साप्ताहिक शुल्क। - मजदूरी – किसी विशिष्ट समय अवधि या कार्य-अवधि के लिए किया गया भुगतान।
उदाहरण: खेत या निर्माण स्थल पर काम करने वाले श्रमिक। - वस्तु के रूप में भुगतान – कार्य के बदले गैर-मौद्रिक वस्तु प्राप्त होना।
उदाहरण: साहिल को मजदूरी के साथ कुछ भुगतान आमों के रूप में मिलना।
7. मूल्य संवर्धन – राजेश बढ़ई का उदाहरण
चित्र: मूल्य संवर्धन का उदाहरण – राजेश बढ़ई (लकड़ी → कुर्सी)
आर्थिक गतिविधियों में किसी वस्तु को एक रूप से दूसरे रूप में बदलने के हर चरण पर उसके मूल्य में वृद्धि हो सकती है। इस वृद्धि को मूल्य संवर्धन कहा जाता है।
राजेश बढ़ई का उदाहरण – राजेश ₹600 की लकड़ी खरीदते हैं। वे अपने कौशल, समय और उपकरणों की सहायता से उससे कुर्सी बनाते हैं और उसे ₹1000 में बेचते हैं। इस प्रकार ₹400 का अंतर उनके श्रम, कौशल और प्रयास का मूल्य है।
8. सेवा और सामुदायिक सहभागिता
गैर-आर्थिक गतिविधियों में धनराशि सम्मिलित नहीं होती, फिर भी इनसे उत्पन्न मूल्य हमारे जीवन में बहुत महत्त्व रखते हैं। ये गतिविधियाँ निजी संतोष, सामाजिक सहयोग, मानवीय संवेदना और सामुदायिक एकता को मजबूत करती हैं।
सेवा
हमें मंदिरों, गुरुद्वारों, मस्जिदों और गिरजाघरों जैसे अनेक स्थानों पर सेवा कार्य देखने को मिलते हैं। उदाहरण के लिए, गुरुद्वारे में आने वाले सभी श्रद्धालुओं को लंगर में नि:शुल्क भोजन कराया जाता है। मंदिरों में प्रसाद वितरण भी सेवा का एक रूप है। ऐसे कार्यों से संतुष्टि, कृतज्ञता और नि:स्वार्थ भाव की अनुभूति होती है।
सामुदायिक सहभागिता का महत्त्व
- स्वच्छ भारत अभियान – घर, गली, सड़क, पार्क और सार्वजनिक स्थानों को स्वच्छ रखने के लिए सामूहिक प्रयास।
- वन महोत्सव – वृक्षों के महत्त्व और वन संरक्षण के प्रति जागरूकता लाने हेतु आयोजित अभियान, जिसमें समुदाय के लोग मिलकर वृक्षारोपण करते हैं।
- त्योहारों पर सामूहिक कार्य – लोग मिलकर स्थान सजाते हैं, व्यंजन बनाते हैं, सेवा करते हैं; ये सब जीवन-मूल्यों से भरी गैर-आर्थिक गतिविधियाँ हैं।
9. SVG: आर्थिक और गैर-आर्थिक गतिविधियाँ
चित्र: आर्थिक और गैर-आर्थिक गतिविधियों का वर्गीकरण
10. अध्याय सारांश
- कार्य दो प्रमुख प्रकार के हो सकते हैं – आर्थिक और गैर-आर्थिक।
- आर्थिक गतिविधियाँ वे हैं जिनमें धनराशि, वस्तु का मूल्य, वेतन, शुल्क, मजदूरी या बिक्री सम्मिलित होती है।
- गैर-आर्थिक गतिविधियाँ स्नेह, सेवा, कृतज्ञता और आदर के भाव से की जाती हैं।
- भुगतान के प्रमुख रूप – वेतन, शुल्क, मजदूरी और वस्तु के रूप में भुगतान।
- एक ही व्यक्ति आर्थिक और गैर-आर्थिक दोनों गतिविधियों में भाग ले सकता है।
- मूल्य संवर्धन का अर्थ है – वस्तु के रूपांतरण के साथ उसके मूल्य में वृद्धि।
- राजेश बढ़ई का उदाहरण – ₹600 की लकड़ी से ₹1000 की कुर्सी; ₹400 मूल्य संवर्धन।
- गैर-आर्थिक गतिविधियाँ सामाजिक और निजी कल्याण दोनों के लिए महत्त्वपूर्ण हैं।
- लंगर, प्रसाद वितरण, स्वच्छ भारत अभियान और वन महोत्सव सामुदायिक सहभागिता के उत्कृष्ट उदाहरण हैं।
11. परीक्षा उपयोगी प्रश्नोत्तर
12. अभ्यास प्रश्नों के उत्तर
प्रश्न 1: आर्थिक गतिविधियाँ किस प्रकार गैर-आर्थिक गतिविधियों से भिन्न होती हैं?
आर्थिक गतिविधियों में धनराशि या मौद्रिक मूल्य सम्मिलित होता है और वे सामान्यतः अर्थोपार्जन के लिए की जाती हैं। गैर-आर्थिक गतिविधियों में धनराशि सम्मिलित नहीं होती, बल्कि उन्हें स्नेह, सेवा, कर्तव्य, कृतज्ञता और आदर की भावना से किया जाता है। उदाहरण: चिकित्सक का परामर्श देना आर्थिक है, जबकि घर में बीमार दादा-दादी की सेवा करना गैर-आर्थिक गतिविधि है।
प्रश्न 2: लोग किस प्रकार की आर्थिक गतिविधियों में सम्मिलित होते हैं? उदाहरण सहित समझाइए।
लोग अनेक प्रकार की आर्थिक गतिविधियों में सम्मिलित होते हैं –
(1) उत्पादन – किसान खेती करता है, बढ़ई फर्नीचर बनाता है।
(2) व्यापार – व्यापारी वस्तुएँ बेचता है।
(3) सेवा – वकील, चिकित्सक, अध्यापक, पायलट, सॉफ्टवेयर इंजीनियर।
(4) निर्माण और परिवहन – श्रमिक, तकनीशियन, ट्रक चालक।
(5) सरकारी/नौकरी आधारित कार्य – डाकघर कर्मचारी, वायुसेना पायलट।
प्रश्न 3: सामुदायिक सेवा गतिविधियों में लगे लोग अत्यधिक सम्माननीय हैं। इस कथन पर टिप्पणी कीजिए।
यह कथन सही है क्योंकि सामुदायिक सेवा करने वाले लोग अपने समय, श्रम और ऊर्जा को समाज की भलाई के लिए लगाते हैं। वे किसी आर्थिक लाभ की अपेक्षा नहीं रखते। वे सेवा, करुणा और जिम्मेदारी की भावना को जीवित रखते हैं। गुरुद्वारे में लंगर, स्वच्छ भारत अभियान, वन महोत्सव, नि:शुल्क शिक्षा और सार्वजनिक सेवा कार्य ऐसे उदाहरण हैं जो समाज को बेहतर बनाते हैं।
प्रश्न 4: विभिन्न आर्थिक गतिविधियों के लिए लोगों को किस-किस प्रकार से पारिश्रमिक दिया जाता है? उदाहरण दीजिए।
लोगों को आर्थिक गतिविधियों के लिए अनेक प्रकार से पारिश्रमिक दिया जाता है –
वेतन – गीता मौसी, रोहन, डाकघर कर्मचारी, तकनीशियन।
शुल्क – चिकित्सक, वकील, ऑनलाइन कक्षाएँ लेने वाली चाची।
मजदूरी – खेत और निर्माण कार्य करने वाले श्रमिक।
वस्तु के रूप में भुगतान – साहिल को आमों के रूप में मिला भुगतान।
मूल्य संवर्धन से आय – राजेश बढ़ई द्वारा लकड़ी को फर्नीचर में बदलकर अधिक मूल्य प्राप्त करना।


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