कार्य का महत्व – NCERT कक्षा 6 सामाजिक विज्ञान अध्याय 13 नोट्स | Importance of Work Class 6 Notes in Hindi

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कार्य का महत्व – NCERT कक्षा 6 सामाजिक विज्ञान अध्याय 13 नोट्स | ncertclasses.com
💼 कक्षा 6 · सामाजिक विज्ञान · अध्याय 13

कार्य का महत्व

समाज का अध्ययन: भारत और उसके आगे – हमारे आस-पास का आर्थिक जीवन
NCERT पाठ्यपुस्तक | पुनर्मुद्रण 2026-27
📖 सम्पूर्ण नोट्स 🎯 परीक्षा उपयोगी 📊 SVG मूल्य संवर्धन 💰 भुगतान के प्रकार ❓ प्रश्नोत्तर
💼 अध्याय परिचय
विषयसामाजिक विज्ञान
कक्षा6
अध्याय13
शीर्षककार्य का महत्व
पुस्तकसमाज का अध्ययन: भारत और उसके आगे
NCERT PDFfhes113.pdf ↗
पुनर्मुद्रण2026-27
उद्धरणस्वामी विवेकानंद
मुख्य प्रश्नआर्थिक व गैर-आर्थिक गतिविधियाँ, पारिश्रमिक, मूल्य संवर्धन

1. परिचय – अनु और कबीर की कहानी

"जब आप कोई काम कर रहे हों, उससे बाहर कुछ न सोचें। उसे पूजा की तरह करें, सबसे बड़ी पूजा की तरह और उस समय अपना पूरा जीवन उसे समर्पित कर दें।"
— स्वामी विवेकानंद

अध्याय की शुरुआत अनु और कबीर की बातचीत से होती है। वे अपने आस-पास के लोगों को देखते हैं और समझते हैं कि समाज में अलग-अलग लोग अलग-अलग प्रकार के कार्य करते हैं। कोई वेतन लेकर काम करता है, कोई सेवा-भाव से नि:शुल्क कार्य करता है, तो कोई एक ही समय में आर्थिक और गैर-आर्थिक दोनों प्रकार की गतिविधियों में भाग लेता है।

📖 अनु और कबीर की कहानी के प्रमुख पात्र
पात्रकार्यप्रकार
गीता मौसीभारतीय वायुसेना में पायलट; देश की सेवा करती हैं और वेतन प्राप्त करती हैंआर्थिक
कबीर के दादाजीसेवानिवृत्ति के बाद आस-पास के बच्चों को नि:शुल्क भूगोल पढ़ाते हैं, सब्जी उद्यान में काम करते हैं, घर के अन्य काम करते हैंगैर-आर्थिक
अनु के माता-पितादुकान चलाते हैं जहाँ वेशभूषा और सिले वस्त्र बेचे जाते हैंआर्थिक
अनु की माँदुकान में सहयोग करती हैं तथा एक स्वैच्छिक समूह में महिलाओं को बुनाई सिखाती हैंदोनों
रोहनसॉफ्टवेयर कंपनी में काम करता है और सप्ताहांत में युवाओं को स्वेच्छा से कंप्यूटर कौशल सिखाता हैदोनों
📌 अध्याय का मूल विचार
एक ही समाज में किए जाने वाले सभी कार्य एक जैसे नहीं होते। कुछ कार्यों में धनराशि सम्मिलित होती है, जबकि कुछ कार्य प्रेम, सेवा, आदर, कर्तव्य और सामाजिक जिम्मेदारी से किए जाते हैं। दोनों ही प्रकार के कार्य जीवन के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण हैं।

2. आर्थिक गतिविधियाँ

💰 आर्थिक गतिविधियाँ – परिभाषा

आर्थिक गतिविधियाँ वे हैं जिनमें अर्थ (द्रव्य, मुद्रा) सम्मिलित होता है, अथवा जो अर्थोपार्जन के लिए की जाती हैं, अथवा जो सम्मिलित पक्षों के लिए वस्तु के नकद मूल्य से संबंधित होती हैं।

उदाहरण – व्यापारी बाजार में स्कूल बैग बेचते हैं, किसान अपनी उपज बेचते हैं, वकील अभियोजन का शुल्क लेते हैं, ट्रक चालक वस्तुएँ एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाते हैं, कारखाने के श्रमिक मशीनों पर काम करते हैं।

📌 महत्वपूर्ण शब्दावली
  • बाजार – वह स्थान जहाँ व्यक्ति वस्तुओं और सेवाओं का लेन-देन करते हैं। कई बार वस्तुओं का वस्तुओं से लेन-देन भी संभव है, पर अधिकतर बाजारों में धनराशि का उपयोग किया जाता है।
  • शुल्क – किसी व्यावसायिक परामर्श या सेवा के बदले दिया गया भुगतान; जैसे चिकित्सक या वकील को दिया गया शुल्क।
  • वस्तु का नकद मूल्य – किसी वस्तु का वह मौद्रिक मूल्य जो व्यक्ति उस वस्तु से मिलने वाले लाभ के आधार पर निर्धारित करता है।

3. गैर-आर्थिक गतिविधियाँ

💜 गैर-आर्थिक गतिविधियाँ – परिभाषा

गैर-आर्थिक गतिविधियाँ वे हैं जिनमें आय अथवा संपत्ति अर्जित नहीं होती, बल्कि उन्हें कृतज्ञता, स्नेह, सेवा और आदर जैसी अनुभूतियों के साथ किया जाता है।

उदाहरण – अभिभावकों द्वारा परिवार के लिए भोजन बनाना, बच्चों को उनके विद्यालय कार्य में सहायता करना, युवाओं द्वारा दादा-दादी अथवा नाना-नानी की सेवा करना, परिवार के सदस्यों द्वारा घर के नवीनीकरण में सहयोग देना, स्वेच्छा से पढ़ाना आदि।

🙏 एक महत्त्वपूर्ण समझ
किसी गतिविधि का प्रकार परिस्थिति के अनुसार बदल सकता है। उदाहरण के लिए – विद्यालय का शिक्षक वेतन लेकर पढ़ाता है, इसलिए उसका कार्य आर्थिक गतिविधि है; लेकिन कोई व्यक्ति बच्चों को नि:शुल्क पढ़ाता है, तो वही कार्य गैर-आर्थिक गतिविधि बन जाता है।

4. आर्थिक vs गैर-आर्थिक गतिविधियाँ – तुलना

💰 आर्थिक गतिविधियाँ
  • मौद्रिक मूल्य सम्मिलित
  • अर्थोपार्जन का उद्देश्य
  • बाजार या रोजगार से जुड़ी
  • वेतन, शुल्क, मजदूरी या बिक्री मूल्य प्राप्त
  • उदाहरण – व्यापारी, किसान, पायलट, सॉफ्टवेयर इंजीनियर
💜 गैर-आर्थिक गतिविधियाँ
  • कोई मौद्रिक मूल्य नहीं
  • स्नेह, सेवा, कर्तव्य, आदर का भाव
  • परिवार और समाज में अधिक दिखाई देती हैं
  • संतोष, कृतज्ञता, संबंध और सामाजिक सहयोग पैदा करती हैं
  • उदाहरण – नि:शुल्क पढ़ाना, भोजन बनाना, सेवा कार्य
गतिविधि/व्यवसायप्रकारभुगतान/लाभ का रूप
बेकरआर्थिकरोटी/बेकरी वस्तुएँ बेचकर आय
दर्जीआर्थिककपड़े सिलने का शुल्क
किसान द्वारा ट्रैक्टर की मरम्मतआर्थिकसेवा का मूल्य या मजदूरी
चिकित्सकआर्थिकपरामर्श शुल्क
परिवार के लिए भोजन बनाने वाले अभिभावकगैर-आर्थिकस्नेह, देखभाल, पारिवारिक सहयोग
वैज्ञानिकआर्थिकवेतन
बीमार दादा-दादी की देखभालगैर-आर्थिकआदर, सेवा, कर्तव्य
स्वयंसेवक का कार्यगैर-आर्थिकसंतोष और सामाजिक योगदान

5. आर्थिक गतिविधियों के प्रकार

📖 काव्या, उसकी चाची और गाँव की आर्थिक गतिविधियाँ

काव्या अपनी चाची के घर गाँव जाती है। रास्ते में वह देखती है कि गाँव के पास एक राजमार्ग बनाया जा रहा है। वहाँ तकनीशियन बड़ी मशीनें चला रहे हैं। काव्या के चाचा निर्माण कंपनी में तकनीशियन हैं और उन्हें अपनी सेवाओं के बदले प्रतिमाह वेतन मिलता है।

काव्या की चाची गाँव के डाकघर में कार्य करती हैं और उन्हें भी प्रतिमाह वेतन मिलता है। कार्यालय के बाद वह शाम को ऑनलाइन कक्षाएँ लेती हैं, जिनके लिए वह विद्यार्थियों से साप्ताहिक शुल्क प्राप्त करती हैं।

बाद में काव्या आम के बगीचे में साहिल नामक एक श्रमिक को खेत में काम करते देखती है। उसे अपने कार्य के लिए कुछ धनराशि दैनिक मजदूरी के रूप में मिलती है और शेष भुगतान आमों के रूप में दिया जाता है।

📌 इस कथा से क्या समझ आता है?
  • हर आर्थिक गतिविधि का भुगतान एक जैसा नहीं होता।
  • किसी को वेतन मिलता है, किसी को शुल्क, किसी को मजदूरी
  • कुछ परिस्थितियों में भुगतान वस्तु के रूप में भी किया जाता है।
  • एक ही व्यक्ति एक से अधिक आर्थिक गतिविधियों में भाग ले सकता है।

6. भुगतान के प्रकार

💵 आर्थिक गतिविधियों में भुगतान के प्रमुख तरीके
  • वेतन – एक नियोक्‍ता द्वारा कर्मचारी को नियमित रूप से, सामान्यतः प्रतिमाह किया जाने वाला नियत भुगतान।
    उदाहरण: गीता मौसी, रोहन, काव्या की चाची, निर्माण कंपनी के तकनीशियन।
  • शुल्क – किसी व्यावसायिक परामर्श, शिक्षा या सेवा के बदले दिया गया भुगतान।
    उदाहरण: वकील, चिकित्सक, काव्या की चाची द्वारा ली जाने वाली ऑनलाइन कक्षा का साप्ताहिक शुल्क।
  • मजदूरी – किसी विशिष्ट समय अवधि या कार्य-अवधि के लिए किया गया भुगतान।
    उदाहरण: खेत या निर्माण स्थल पर काम करने वाले श्रमिक।
  • वस्तु के रूप में भुगतान – कार्य के बदले गैर-मौद्रिक वस्तु प्राप्त होना।
    उदाहरण: साहिल को मजदूरी के साथ कुछ भुगतान आमों के रूप में मिलना।

7. मूल्य संवर्धन – राजेश बढ़ई का उदाहरण

मूल्य संवर्धन (Value Addition) – राजेश बढ़ई का उदाहरण 🪵 लकड़ी बाजार से खरीदी ₹600 कौशल + समय 🪑 कुर्सी राजेश ने लकड़ी से फर्नीचर बनाया मूल्य संवर्धन! 🛒 बिक्री बाजार में ₹1000 मूल्य संवर्धन ₹400 (₹1000 – ₹600) मूल्य संवर्धन = बिक्री मूल्य − कच्चे माल की लागत = ₹1000 − ₹600 = ₹400 यह ₹400 राजेश के कौशल, समय और प्रयास का मौद्रिक मूल्य है। ncertclasses.com

चित्र: मूल्य संवर्धन का उदाहरण – राजेश बढ़ई (लकड़ी → कुर्सी)

📌 मूल्य संवर्धन क्या है?

आर्थिक गतिविधियों में किसी वस्तु को एक रूप से दूसरे रूप में बदलने के हर चरण पर उसके मूल्य में वृद्धि हो सकती है। इस वृद्धि को मूल्य संवर्धन कहा जाता है।

राजेश बढ़ई का उदाहरण – राजेश ₹600 की लकड़ी खरीदते हैं। वे अपने कौशल, समय और उपकरणों की सहायता से उससे कुर्सी बनाते हैं और उसे ₹1000 में बेचते हैं। इस प्रकार ₹400 का अंतर उनके श्रम, कौशल और प्रयास का मूल्य है।

🔑 निष्कर्ष
लकड़ी खरीदने से लेकर कुर्सी बेचने तक की पूरी प्रक्रिया आर्थिक गतिविधियों का भाग है, क्योंकि इसमें भुगतान, वस्तु, बाजार, श्रम और मूल्य वृद्धि – सब सम्मिलित हैं।

8. सेवा और सामुदायिक सहभागिता

🙏 गैर-आर्थिक गतिविधियों का महत्त्व

गैर-आर्थिक गतिविधियों में धनराशि सम्मिलित नहीं होती, फिर भी इनसे उत्पन्न मूल्य हमारे जीवन में बहुत महत्त्व रखते हैं। ये गतिविधियाँ निजी संतोष, सामाजिक सहयोग, मानवीय संवेदना और सामुदायिक एकता को मजबूत करती हैं।

सेवा

🌍 सेवा की भारतीय परंपरा

हमें मंदिरों, गुरुद्वारों, मस्जिदों और गिरजाघरों जैसे अनेक स्थानों पर सेवा कार्य देखने को मिलते हैं। उदाहरण के लिए, गुरुद्वारे में आने वाले सभी श्रद्धालुओं को लंगर में नि:शुल्क भोजन कराया जाता है। मंदिरों में प्रसाद वितरण भी सेवा का एक रूप है। ऐसे कार्यों से संतुष्टि, कृतज्ञता और नि:स्वार्थ भाव की अनुभूति होती है।

सामुदायिक सहभागिता का महत्त्व

🤝 सामूहिक प्रयासों की शक्ति
  • स्वच्छ भारत अभियान – घर, गली, सड़क, पार्क और सार्वजनिक स्थानों को स्वच्छ रखने के लिए सामूहिक प्रयास।
  • वन महोत्सव – वृक्षों के महत्त्व और वन संरक्षण के प्रति जागरूकता लाने हेतु आयोजित अभियान, जिसमें समुदाय के लोग मिलकर वृक्षारोपण करते हैं।
  • त्योहारों पर सामूहिक कार्य – लोग मिलकर स्थान सजाते हैं, व्यंजन बनाते हैं, सेवा करते हैं; ये सब जीवन-मूल्यों से भरी गैर-आर्थिक गतिविधियाँ हैं।

9. SVG: आर्थिक और गैर-आर्थिक गतिविधियाँ

गतिविधियों का वर्गीकरण 💰 आर्थिक गतिविधियाँ (मौद्रिक मूल्य सम्मिलित) • किसान उपज बेचना • दर्जी कपड़े सिलना (शुल्क) • तकनीशियन – वेतन • वकील – शुल्क • पायलट गीता – वेतन • साहिल – मजदूरी + आम • राजेश बढ़ई – मूल्य संवर्धन 💜 गैर-आर्थिक गतिविधियाँ (स्नेह, सेवा, आदर) • परिवार के लिए भोजन बनाना • बच्चों की पढ़ाई में सहायता • दादा-दादी की सेवा • गुरुद्वारे में लंगर सेवा • स्वच्छ भारत अभियान • वन महोत्सव – पेड़ लगाना • दादाजी – नि:शुल्क पढ़ाना ncertclasses.com | NCERT कक्षा 6 अध्याय 13

चित्र: आर्थिक और गैर-आर्थिक गतिविधियों का वर्गीकरण

10. अध्याय सारांश

  • कार्य दो प्रमुख प्रकार के हो सकते हैं – आर्थिक और गैर-आर्थिक
  • आर्थिक गतिविधियाँ वे हैं जिनमें धनराशि, वस्तु का मूल्य, वेतन, शुल्क, मजदूरी या बिक्री सम्मिलित होती है।
  • गैर-आर्थिक गतिविधियाँ स्नेह, सेवा, कृतज्ञता और आदर के भाव से की जाती हैं।
  • भुगतान के प्रमुख रूप – वेतन, शुल्क, मजदूरी और वस्तु के रूप में भुगतान
  • एक ही व्यक्ति आर्थिक और गैर-आर्थिक दोनों गतिविधियों में भाग ले सकता है।
  • मूल्य संवर्धन का अर्थ है – वस्तु के रूपांतरण के साथ उसके मूल्य में वृद्धि।
  • राजेश बढ़ई का उदाहरण – ₹600 की लकड़ी से ₹1000 की कुर्सी; ₹400 मूल्य संवर्धन।
  • गैर-आर्थिक गतिविधियाँ सामाजिक और निजी कल्याण दोनों के लिए महत्त्वपूर्ण हैं।
  • लंगर, प्रसाद वितरण, स्वच्छ भारत अभियान और वन महोत्सव सामुदायिक सहभागिता के उत्कृष्ट उदाहरण हैं।

11. परीक्षा उपयोगी प्रश्नोत्तर

आर्थिक गतिविधियाँ वे हैं जिनमें मौद्रिक मूल्य सम्मिलित होता है या जो अर्थोपार्जन के लिए की जाती हैं। गैर-आर्थिक गतिविधियाँ वे हैं जिनमें आय या संपत्ति अर्जित नहीं होती, बल्कि उन्हें स्नेह, सेवा, कृतज्ञता और आदर की भावना से किया जाता है। उदाहरण के लिए वेतन लेकर पढ़ाना आर्थिक है, जबकि नि:शुल्क पढ़ाना गैर-आर्थिक है।
लोग उत्पादन, व्यापार, सेवा, परिवहन, तकनीकी कार्य, सरकारी सेवा, कृषि, निर्माण और मरम्मत जैसी अनेक आर्थिक गतिविधियों में सम्मिलित होते हैं। किसान उपज बेचता है, पायलट वेतन पाती है, वकील शुल्क लेता है, श्रमिक मजदूरी प्राप्त करता है, बढ़ई मूल्य संवर्धन करता है।
जब किसी वस्तु को एक रूप से दूसरे रूप में बदला जाता है और उसके मूल्य में वृद्धि होती है, तो उसे मूल्य संवर्धन कहते हैं। उदाहरण – राजेश बढ़ई ₹600 की लकड़ी खरीदते हैं, उससे कुर्सी बनाते हैं और उसे ₹1000 में बेचते हैं। यहाँ ₹400 मूल्य संवर्धन है।
भुगतान के चार प्रमुख प्रकार हैं – (1) वेतन, (2) शुल्क, (3) मजदूरी, (4) वस्तु के रूप में भुगतान। वेतन नियमित मासिक भुगतान है, शुल्क सेवा या परामर्श के लिए दिया जाता है, मजदूरी समय या श्रम-आधारित भुगतान है, और वस्तु के रूप में भुगतान में धन के स्थान पर कोई वस्तु दी जाती है।
गैर-आर्थिक गतिविधियाँ महत्त्वपूर्ण हैं क्योंकि वे सामाजिक सहयोग, प्रेम, कर्तव्य-बोध, सेवा भावना और निजी संतोष को बढ़ाती हैं। ये परिवारों को जोड़ती हैं, समाज को मजबूत करती हैं और जीवन की समग्र गुणवत्ता को बेहतर बनाती हैं।
सामुदायिक सेवा में लगे लोग बिना किसी निजी लाभ के समाज की भलाई के लिए काम करते हैं। वे नि:स्वार्थ सेवा, सहयोग, संवेदना और सामुदायिक एकता के आदर्श प्रस्तुत करते हैं। गुरुद्वारे का लंगर, स्वच्छ भारत अभियान और वन महोत्सव ऐसे कार्यों के उदाहरण हैं।

12. अभ्यास प्रश्नों के उत्तर

प्रश्न 1: आर्थिक गतिविधियाँ किस प्रकार गैर-आर्थिक गतिविधियों से भिन्न होती हैं?

आर्थिक गतिविधियों में धनराशि या मौद्रिक मूल्य सम्मिलित होता है और वे सामान्यतः अर्थोपार्जन के लिए की जाती हैं। गैर-आर्थिक गतिविधियों में धनराशि सम्मिलित नहीं होती, बल्कि उन्हें स्नेह, सेवा, कर्तव्य, कृतज्ञता और आदर की भावना से किया जाता है। उदाहरण: चिकित्सक का परामर्श देना आर्थिक है, जबकि घर में बीमार दादा-दादी की सेवा करना गैर-आर्थिक गतिविधि है।

प्रश्न 2: लोग किस प्रकार की आर्थिक गतिविधियों में सम्मिलित होते हैं? उदाहरण सहित समझाइए।

लोग अनेक प्रकार की आर्थिक गतिविधियों में सम्मिलित होते हैं –
(1) उत्पादन – किसान खेती करता है, बढ़ई फर्नीचर बनाता है।
(2) व्यापार – व्यापारी वस्तुएँ बेचता है।
(3) सेवा – वकील, चिकित्सक, अध्यापक, पायलट, सॉफ्टवेयर इंजीनियर।
(4) निर्माण और परिवहन – श्रमिक, तकनीशियन, ट्रक चालक।
(5) सरकारी/नौकरी आधारित कार्य – डाकघर कर्मचारी, वायुसेना पायलट।

प्रश्न 3: सामुदायिक सेवा गतिविधियों में लगे लोग अत्यधिक सम्माननीय हैं। इस कथन पर टिप्पणी कीजिए।

यह कथन सही है क्योंकि सामुदायिक सेवा करने वाले लोग अपने समय, श्रम और ऊर्जा को समाज की भलाई के लिए लगाते हैं। वे किसी आर्थिक लाभ की अपेक्षा नहीं रखते। वे सेवा, करुणा और जिम्मेदारी की भावना को जीवित रखते हैं। गुरुद्वारे में लंगर, स्वच्छ भारत अभियान, वन महोत्सव, नि:शुल्क शिक्षा और सार्वजनिक सेवा कार्य ऐसे उदाहरण हैं जो समाज को बेहतर बनाते हैं।

प्रश्न 4: विभिन्न आर्थिक गतिविधियों के लिए लोगों को किस-किस प्रकार से पारिश्रमिक दिया जाता है? उदाहरण दीजिए।

लोगों को आर्थिक गतिविधियों के लिए अनेक प्रकार से पारिश्रमिक दिया जाता है –
वेतन – गीता मौसी, रोहन, डाकघर कर्मचारी, तकनीशियन।
शुल्क – चिकित्सक, वकील, ऑनलाइन कक्षाएँ लेने वाली चाची।
मजदूरी – खेत और निर्माण कार्य करने वाले श्रमिक।
वस्तु के रूप में भुगतान – साहिल को आमों के रूप में मिला भुगतान।
मूल्य संवर्धन से आय – राजेश बढ़ई द्वारा लकड़ी को फर्नीचर में बदलकर अधिक मूल्य प्राप्त करना।


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⚠️ अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख NCERT की पाठ्यपुस्तक 'समाज का अध्ययन: भारत और उसके आगे – हमारे आस-पास का आर्थिक जीवन', कक्षा 6 (पुनर्मुद्रण 2026-27) के अध्याय 13 पर आधारित विद्यार्थियों की सहायतार्थ तैयार किया गया है। यह NCERT की अधिकृत सामग्री नहीं है। NCERT की मूल पाठ्यपुस्तक के लिए देखें – https://ncert.nic.in/textbook/pdf/fhes113.pdf | सभी सामग्री केवल शैक्षिक उद्देश्य के लिए। © ncertclasses.com

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