आधारभूत लोकतंत्र — भाग 2:
ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय सरकार
NCERT पाठ्यपुस्तक | पुनर्मुद्रण 2026-27
| विषय | सामाजिक विज्ञान |
| कक्षा | 6 |
| अध्याय | 11 |
| शीर्षक | ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय सरकार |
| पुस्तक | समाज का अध्ययन: भारत और उसके आगे |
| NCERT PDF | fhes111.pdf ↗ |
| पुनर्मुद्रण | 2026-27 |
| उद्धरण | महात्मा गाँधी |
| मुख्य प्रश्न | पंचायती राज, कार्य, महत्त्व |
1. परिचय – भारत के गाँव
- भारत में लगभग 6,00,000 गाँव, 8,000 कस्बे और 4,000 से अधिक नगर हैं।
- जनसंख्या 1.4 अरब से अधिक, जिसका दो-तिहाई भाग ग्रामीण क्षेत्रों में रहता है।
- इस विशाल देश में स्थानीय स्तर पर शासन के लिए पंचायती राज व्यवस्था कार्यरत है।
लक्ष्मणपुर गाँव का उदाहरण – हिमालय की तराई में बसा एक गाँव, 200 घर, जनसंख्या ~700। गाँव की जरूरतें – खेतों के लिए पानी, सड़क का रख-रखाव, विद्यालय का रख-रखाव। ऐसी हर समस्या के लिए राज्य/राष्ट्र की राजधानी नहीं जाया जा सकता। इसीलिए ग्राम पंचायत की आवश्यकता है।
2. पंचायती राज व्यवस्था
- पंचायत – एक ग्रामीण परिषद, जो स्थानीय शासन व्यवस्था है।
- पंचायती राज – स्व-शासन का एक रूप।
- पंचायत शासन को लोगों के समीप लाती है।
- निर्णय लेने की प्रक्रिया में ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी संभव बनाती है।
- यह त्रिस्तरीय प्रणाली है – ग्राम, खंड और जिला स्तर पर।
- इन संस्थाएँ कृषि, आवास, सड़क, जल, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण से जुड़े दायित्व निभाती हैं।
3. ग्राम पंचायत
- ग्राम पंचायत – ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के सबसे निकट स्थानीय शासन।
- सदस्य – ग्राम सभा द्वारा सीधे चुने जाते हैं।
- ग्राम सभा – मतदाता के रूप में नामांकित गाँव (या आस-पास के गाँवों) के वयस्कों का समूह। स्त्री एवं पुरुष दोनों सभी मामलों पर विचार-विमर्श करते हैं।
- प्रत्येक ग्राम पंचायत एक प्रमुख/अध्यक्ष का चयन करती है जिसे 'सरपंच' या 'प्रधान' कहते हैं।
- गत वर्षों में अधिक से अधिक महिलाएँ सरपंच बनी हैं।
- पंचायत सचिव – बैठकों के आयोजन और अभिलेखों के रख-रखाव जैसे प्रशासनिक कार्य।
- पटवारी – प्रशासनिक अधिकारी जो गाँव के भू-अभिलेखों का रख-रखाव करता है। कई जगह उसके पास पीढ़ियों पुराने मानचित्र भी रखे होते हैं।
चित्र 11.1 पर आधारित: पंचायती राज की त्रिस्तरीय व्यवस्था
4. आदर्श सरपंच
भील समुदाय के किन्नर दयानेश्वर कांबले छह अन्य उम्मीदवारों को हराकर सरपंच चुने गए।
आदर्श वाक्य – 'लोक सेवा, ग्राम सेवा'
पितृसत्तात्मक मान्यताओं के विरुद्ध जाकर गाँव की पहली महिला सरपंच बनीं। महिलाओं को सभा की बैठकों में प्रेरित किया, शिक्षा एवं स्वच्छता के मुद्दे उठाए।
सरपंच बनने के बाद अन्ना हजारे के जल-संचयन मॉडल को लागू किया। वर्षा जल-संचयन, तालाब, लाखों पेड़ – गाँव को हरा-भरा और समृद्ध बना दिया।
पुरस्कार – पद्मश्री 2020।
5. बाल हितैषी पंचायत की पहल
- पंचायतों को सभी ग्रामवासियों की बात सुननी होती है – बच्चे भी शामिल।
- बाल हितैषी पंचायत की पहल – बच्चों की भलाई से जुड़े मामलों पर स्वयं बच्चों को अपने विचार रखने का अवसर।
- अनेक राज्यों में नियमित रूप से बाल सभाएँ और बाल पंचायतें।
महाराष्ट्र – बाल पंचायत
महाराष्ट्र में कुछ बाल पंचायतों ने बाल-श्रम और बाल-विवाह को समाप्त करने पर कार्य किया है। बाल पंचायत के सदस्य अभिभावकों को समझाते हैं कि बच्चों को विद्यालय भेजें और पढ़ने की आयु में बालिकाओं का विवाह न करें।
सिक्किम – बाल हितैषी ग्राम पंचायत
- बच्चों की आवश्यकताओं और अधिकारों को बहुत अधिक महत्त्व दिया।
- विद्यालयों के परिसर की दीवारें बनवाईं।
- विद्यालयों में रसोईघर बनवाए – मध्याह्न भोजन (Mid-Day Meal) की व्यवस्था।
- इन प्रयासों के कारण बाल हितैषी ग्राम पंचायत घोषित।
राजस्थान – बाल संसद
- कुछ दशक पूर्व बंकर रॉय द्वारा आरंभ 'बेयरफुट कॉलेज' की शाखा 'बाल संसद'।
- राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों के वंचित वर्ग के बच्चों को शिक्षा और लोकतांत्रिक भागीदारी के माध्यम से सशक्त बनाया।
- 8–14 वर्ष की आयु के बच्चे – रात्रि विद्यालय और संसद जैसे चुनावों के माध्यम से शासन, लोकतंत्र सीखते हैं।
- उनकी 'संसद' मतदाता पहचान-पत्र सहित सभी औपचारिक प्रक्रियाओं का पालन करती है।
- निर्वाचित प्रतिनिधि 'मंत्रिमंडल' का गठन करते हैं।
- पुरस्कार – वर्ष 2001 में वर्ल्ड चिल्ड्रन ऑनरेरी अवार्ड सहित कई पुरस्कार।
6. पंचायत समिति और जिला परिषद
| स्तर | संस्था का नाम | मुख्य कार्य |
|---|---|---|
| ग्राम स्तर | ग्राम परिषद / ग्राम पंचायत | गाँव की स्थानीय समस्याएँ, सड़क, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा |
| खंड स्तर | खंड पंचायत / पंचायत समिति / मंडल परिषद | ग्राम पंचायत और जिला परिषद के बीच की कड़ी; विकास योजनाएँ जिला/राज्य तक पहुँचाना; PM ग्राम सड़क योजना जैसी योजनाओं के लिए धनराशि आवंटन |
| जिला स्तर | जिला पंचायत / जिला परिषद | जिले स्तर पर विकास कार्य, ग्रामीण इलाकों में बारहमासी सड़कें |
- सभी तीनों स्तरों पर SC/ST जैसे वंचित वर्गों के लिए विशेष नियम।
- इन संस्थाओं में एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित।
- पंचायती राज संस्थाएँ राज्यों के अधिकार क्षेत्र में हैं – इसीलिए हर राज्य में गठन और कार्यों में विविधताएँ हो सकती हैं।
7. कौटिल्य का अर्थशास्त्र
शासन पर 'अर्थशास्त्र' एक प्राचीन ग्रंथ है जिसे लगभग 2300 वर्ष पहले 'कौटिल्य' (जिन्हें बाद में 'चाणक्य' नाम से जाना गया) ने लिखा था।
इसमें राज्य का गठन, संचालन, अर्थव्यवस्था, शासक के कर्तव्य और युद्ध विधि बताई गई है।
कौटिल्य ने एक प्रशासनिक ढाँचे का वर्णन किया –
"राजा प्रत्येक 10 गाँवों पर 'संग्रहण' (उप-जिला मुख्यालय); प्रत्येक 100 गाँवों पर 'करवाटिका' (जिला मुख्यालय); प्रत्येक 400 गाँवों पर 'द्रोणमुख' और प्रत्येक 800 गाँवों पर 'स्थानीय' (प्रांतीय मुख्यालय) स्थापित करे।"
| कौटिल्य का प्रावधान | आधुनिक समकक्ष |
|---|---|
| संग्रहण (10 गाँवों पर) | ग्राम पंचायत / ग्राम क्लस्टर |
| करवाटिका (100 गाँवों पर) | खंड स्तर / पंचायत समिति |
| द्रोणमुख (400 गाँवों पर) | उप-जिला / तालुका स्तर |
| स्थानीय (800 गाँवों पर) | जिला परिषद / जिला स्तर |
8. अध्याय सारांश
- भारत में 6 लाख गाँव; जनसंख्या का दो-तिहाई ग्रामीण क्षेत्रों में।
- पंचायती राज – स्व-शासन का एक रूप; स्थानीय शासन को जनता के करीब लाता है।
- त्रिस्तरीय प्रणाली – ग्राम (ग्राम पंचायत) → खंड (पंचायत समिति) → जिला (जिला परिषद)।
- ग्राम सभा – गाँव के वयस्क मतदाताओं का समूह; सीधे सदस्य चुनती है।
- सरपंच/प्रधान – ग्राम पंचायत का प्रमुख। पटवारी – भू-अभिलेख रख-रखाव।
- 1/3 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित; SC/ST के लिए विशेष नियम।
- आदर्श सरपंच – दयानेश्वर कांबले (तरंगफल), वंदना बहादुर मैदा (खानखांडवी), पोपटराव पवार (हिवरे बाजार, पद्मश्री 2020)।
- बाल हितैषी पंचायत – बाल-श्रम, बाल-विवाह उन्मूलन; सांगखू राधू खांडू (सिक्किम)।
- बाल संसद – बेयरफुट कॉलेज (बंकर रॉय), राजस्थान; 2001 में वर्ल्ड चिल्ड्रन ऑनरेरी अवार्ड।
- PM ग्राम सड़क योजना – ग्रामीण इलाकों में बारहमासी सड़कें।
- कौटिल्य/चाणक्य ने 2300 वर्ष पहले 'अर्थशास्त्र' में समान स्थानीय प्रशासन ढाँचे का उल्लेख किया था।
9. परीक्षा उपयोगी प्रश्नोत्तर
तीन स्तर:
(1) ग्राम स्तर – ग्राम पंचायत
(2) खंड स्तर – पंचायत समिति
(3) जिला स्तर – जिला परिषद
मुख्य कार्य – कृषि, आवास, सड़क, जल, शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक कल्याण और सांस्कृतिक गतिविधियाँ।
ग्राम पंचायत – ग्राम सभा द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों की संस्था जो गाँव के विकास और समस्याओं पर निर्णय लेती है।
सरपंच/प्रधान – ग्राम पंचायत का प्रमुख।
उदाहरण:
• महाराष्ट्र – बाल-श्रम और बाल-विवाह उन्मूलन।
• सांगखू राधू खांडू (सिक्किम) – विद्यालय दीवारें, मिड-डे मील रसोईघर; बाल हितैषी ग्राम पंचायत घोषित।
• बाल संसद, राजस्थान (बेयरफुट कॉलेज) – 8-14 वर्ष बच्चों को लोकतंत्र सिखाना; 2001 में वर्ल्ड चिल्ड्रन ऑनरेरी अवार्ड।
कार्य –
• सभी ग्राम पंचायतों की विकास योजनाएँ एकत्रित करके जिला/राज्य स्तर पर प्रस्तुत करना।
• PM ग्राम सड़क योजना जैसी सरकारी योजनाओं के लिए धनराशि का आवंटन में मदद।
• स्थानीय जनता की भागीदारी मजबूत करना।
10 गाँवों पर संग्रहण → 100 पर करवाटिका → 400 पर द्रोणमुख → 800 पर स्थानीय।
यह आज की त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था से मिलता-जुलता है। यह दर्शाता है कि स्थानीय शासन की कल्पना हमारी भारतीय परंपरा में बहुत पुरानी है।
• अन्ना हजारे के वर्षा जल-संचयन मॉडल को लागू किया।
• जल-संरक्षण, तालाब और लाखों पेड़ लगाए।
• गाँव को हरा-भरा और समृद्ध बना दिया।
• पद्मश्री 2020 से सम्मानित।
- पंचायती राज संस्थाओं में एक-तिहाई (1/3) सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित।
- गत वर्षों में अधिक से अधिक महिलाएँ सरपंच बन रही हैं।
- उदाहरण – वंदना बहादुर मैदा (पहली महिला सरपंच, खानखांडवी MP)।
- महिला सरपंच शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वच्छता जैसे मुद्दे उठा रही हैं।
10. अभ्यास प्रश्नों के उत्तर
प्रश्न 1: पंचायती राज के तीन स्तर और उनके कार्य
(1) ग्राम स्तर – ग्राम पंचायत – गाँव की सड़क, पानी, स्वास्थ्य, विद्यालय, कृषि आदि की देखभाल।
(2) खंड स्तर – पंचायत समिति – ग्राम पंचायत और जिला परिषद के बीच कड़ी; विकास योजनाओं को उच्च स्तर तक पहुँचाना।
(3) जिला स्तर – जिला परिषद – जिले स्तर के विकास कार्य, बारहमासी सड़कें।
प्रश्न 2: सरपंच को पत्र (गाँव की सड़क पर प्लास्टिक)
सेवा में,
श्रीमान सरपंच महोदय,
ग्राम पंचायत [गाँव का नाम]
विषय: गाँव की सड़क के किनारे पड़ी प्लास्टिक थैलियों की समस्या।
महोदय,
मेरा ध्यान इस ओर आकृष्ट होता है कि हमारे गाँव की मुख्य सड़क के किनारे बड़ी मात्रा में प्लास्टिक थैलियाँ पड़ी हैं जो पर्यावरण के लिए हानिकारक हैं और पशुओं को भी नुकसान पहुँचाती हैं। कृपया इसके लिए कचरा निपटान की उचित व्यवस्था करें एवं ग्रामवासियों को जागरूक करें।
आपका आभारी,
[नाम]
प्रश्न 4: स्कूल में सड़क पार करने की समस्या – समाधान
समाधान के विकल्प – (1) सड़क पर जेब्रा क्रॉसिंग और संकेत लगाना। (2) स्पीड ब्रेकर बनाना। (3) स्कूल के समय ट्रैफिक पुलिस तैनात करना। (4) अंडरपास/फुट ओवरब्रिज बनवाना।
पंचायती राज की भूमिका – ग्राम पंचायत सरपंच के माध्यम से मामला उठाए; पंचायत समिति राज्य/जिला स्तर तक मामला पहुँचाए।
विद्यार्थी – ग्राम सभा में मुद्दा उठाएँ; सरपंच को पत्र लिखें; समुदाय को जागरूक करें।


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