हमारे आस-पास की आर्थिक गतिविधियाँ
NCERT पाठ्यपुस्तक | पुनर्मुद्रण 2026-27
| विषय | सामाजिक विज्ञान |
| कक्षा | 6 |
| अध्याय | 14 |
| शीर्षक | हमारे आस-पास की आर्थिक गतिविधियाँ |
| पुस्तक | समाज का अध्ययन: भारत और उसके आगे |
| NCERT PDF | fhes114.pdf ↗ |
| पुनर्मुद्रण | 2026-27 |
| उद्धरण | कौटिल्य |
| मुख्य प्रश्न | आर्थिक क्षेत्रक, परस्पर निर्भरता, अमूल |
1. परिचय
अध्याय 13 में हमने देखा कि कुछ गतिविधियाँ आर्थिक होती हैं और कुछ गैर-आर्थिक। आर्थिक गतिविधियाँ वे हैं जिनमें मौद्रिक मूल्य का अर्जन होता है या जिनमें धन, मजदूरी, वेतन, शुल्क अथवा वस्तु के बदले वस्तु का लेन-देन शामिल होता है।
अब प्रश्न यह है कि आर्थिक गतिविधियों की संख्या इतनी अधिक होने पर उन्हें समझा कैसे जाए। इसके लिए उन्हें समान प्रकृति के आधार पर अलग-अलग आर्थिक क्षेत्रकों में विभाजित किया जाता है। यही इस अध्याय का मुख्य विषय है।
- आर्थिक गतिविधियों का वर्गीकरण किन आधारों पर किया जाता है।
- प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्रक क्या हैं।
- ये तीनों क्षेत्रक एक-दूसरे पर कैसे निर्भर रहते हैं।
- अमूल जैसी सहकारी संस्था के माध्यम से तीनों क्षेत्रकों की भूमिका।
2. आर्थिक गतिविधियों का वर्गीकरण
कुछ आर्थिक गतिविधियों की विशेषताएँ एक-दूसरे से मिलती-जुलती हैं। इसलिए उन्हें व्यापक समूहों में रखा जाता है, जिन्हें आर्थिक क्षेत्रक कहते हैं।
आर्थिक गतिविधियों को सामान्यतः तीन प्रमुख क्षेत्रकों में बाँटा जाता है —
चित्र: आर्थिक क्षेत्रकों का वर्गीकरण
3. प्राथमिक क्षेत्रक
इस क्षेत्रक में मनुष्य का संबंध प्रकृति से सबसे प्रत्यक्ष होता है। भूमि, जल, वन, खनिज, सूर्यप्रकाश, पशु और नदियाँ आदि इसके मुख्य आधार हैं।
| प्राथमिक गतिविधि | प्रकृति से क्या मिलता है | उदाहरण |
|---|---|---|
| कृषि | भूमि, जल, सूर्यप्रकाश | गेहूँ, चावल, दालें, सब्जियाँ उगाना |
| खनन | खनिज, अयस्क, कोयला | कोयला, लोहा, बॉक्साइट निकालना |
| मत्स्य पालन | नदी, झील, समुद्र | मछलियाँ पकड़ना |
| पशुपालन | गाय, भैंस, बकरी, मुर्गी | दूध, अंडे, ऊन प्राप्त करना |
| वानिकी | वन, वृक्ष | लकड़ी, गोंद, औषधीय पदार्थ प्राप्त करना |
4. द्वितीयक क्षेत्रक
इस क्षेत्रक में मनुष्य अपनी कौशल, तकनीक, मशीनों और श्रम का उपयोग करके प्राकृतिक कच्चे माल को नई उपयोगी वस्तुओं में बदलता है।
| कच्चा माल | द्वितीयक प्रक्रिया | तैयार वस्तु |
|---|---|---|
| गेहूँ | मिल में पिसाई | आटा, मैदा |
| दूध | डेयरी प्रसंस्करण | घी, मक्खन, पनीर, दूध पाउडर |
| कपास | सूत्र और बुनाई | कपड़ा |
| लकड़ी | बढ़ईगीरी / कारखाना | फर्नीचर, कागज |
| लौह अयस्क | इस्पात संयंत्र | इस्पात, मशीनें, वाहन |
- कारखानों में वस्तुओं का निर्माण
- प्रसंस्करण उद्योग
- सड़क, पुल, भवन निर्माण
- जल-आपूर्ति, विद्युत उत्पादन, गैस आपूर्ति जैसी गतिविधियाँ
5. तृतीयक क्षेत्रक
यदि किसान अनाज उगाता है और कारखाना उससे आटा बनाता है, तो उसे बाजार तक कौन पहुँचाएगा, ग्राहक से पैसा कौन दिलाएगा, और लोगों को इसकी जानकारी कौन देगा? इसका उत्तर तृतीयक क्षेत्रक है।
| सेवा | भूमिका |
|---|---|
| परिवहन | कच्चा माल और तैयार वस्तु को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाना |
| व्यापार | वस्तुओं को बाजार और उपभोक्ता तक पहुँचाना |
| बैंकिंग | ऋण, जमा, भुगतान, वित्तीय सहायता देना |
| स्वास्थ्य | लोगों को स्वस्थ रखना ताकि वे काम कर सकें |
| शिक्षा | मानव संसाधन को ज्ञान और कौशल देना |
| संचार | सूचना, संपर्क, विपणन और समन्वय |
| मरम्मत सेवाएँ | मशीन, वाहन, मोबाइल, उपकरण आदि ठीक करना |
| गोदाम | वस्तुओं का सुरक्षित भंडारण |
6. तीनों क्षेत्रकों की परस्पर निर्भरता
प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्रक अलग-अलग अवश्य हैं, लेकिन वास्तव में ये एक-दूसरे पर निर्भर रहते हैं। एक क्षेत्रक के बिना दूसरा क्षेत्रक ठीक प्रकार से काम नहीं कर सकता।
चित्र: प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्रकों की परस्पर निर्भरता
7. अमूल – डेयरी सहकारिता की केस स्टडी
गुजरात के आणंद में स्थापित आणंद मिल्क यूनियन लिमिटेड (AMUL) तीनों क्षेत्रकों की परस्पर निर्भरता का अत्यंत प्रसिद्ध उदाहरण है।
किसानों ने इस समस्या के समाधान के लिए एक सहकारी संगठन बनाया। सरदार वल्लभभाई पटेल के परामर्श से 1946 में अमूल की स्थापना हुई। इसमें त्रिभुवनदास पटेल और बाद में डॉ. वर्गीज कुरियन ने प्रमुख भूमिका निभाई।
| अमूल में क्षेत्रक | क्या होता है? |
|---|---|
| प्राथमिक क्षेत्रक | किसान गाय-भैंस पालते हैं और दूध प्राप्त करते हैं। |
| द्वितीयक क्षेत्रक | डेयरी कारखानों में दूध का पाश्चुरीकरण और प्रसंस्करण करके घी, मक्खन, पनीर, दूध पाउडर बनाया जाता है। |
| तृतीयक क्षेत्रक | दूध और दुग्ध उत्पादों का परिवहन, भंडारण, विपणन और खुदरा बिक्री की जाती है। |
चित्र: अमूल में तीनों क्षेत्रकों की भूमिका
भारत के अन्य राज्यों में भी इसी प्रकार की डेयरी सहकारी संस्थाएँ हैं, जैसे — नंदिनी (कर्नाटक), सुधा (बिहार), आविन (तमिलनाडु), वरका (पंजाब), मदर डेयरी (दिल्ली-NCR) आदि।
8. पाठ्यपुस्तक निर्माण – तीनों क्षेत्रकों का एक और उदाहरण
एक पाठ्यपुस्तक हमारे हाथ तक कैसे पहुँचती है, यह समझने से भी तीनों क्षेत्रकों की भूमिका स्पष्ट होती है।
| कार्य | क्षेत्रक |
|---|---|
| वन से पेड़ काटना और लकड़ी प्राप्त करना | प्राथमिक |
| लकड़ी से लुगदी बनाकर कागज तैयार करना | द्वितीयक |
| कागज पर पाठ्यपुस्तक की छपाई | द्वितीयक |
| ट्रक द्वारा कारखाने और गोदाम तक पहुँचाना | तृतीयक |
| गोदाम में भंडारण | तृतीयक |
| खुदरा पुस्तक दुकान पर बिक्री | तृतीयक |
- कागज का पुनर्चक्रण पेड़ों की कटाई कम करता है।
- ऊर्जा और पानी की बचत होती है।
- पर्यावरण संरक्षण में सहायता मिलती है।
9. अध्याय सारांश
- आर्थिक गतिविधियों को प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्रकों में बाँटा जाता है।
- प्राथमिक क्षेत्रक में प्रकृति से सीधे कच्चा माल प्राप्त किया जाता है।
- द्वितीयक क्षेत्रक में कच्चे माल को उपयोगी वस्तुओं में बदला जाता है।
- तृतीयक क्षेत्रक अन्य दोनों क्षेत्रकों को सेवाएँ प्रदान करता है।
- तीनों क्षेत्रक परस्पर निर्भर हैं।
- अमूल तीनों क्षेत्रकों की संयुक्त कार्यप्रणाली का उत्कृष्ट उदाहरण है।
- सहकारी संगठन किसानों और उत्पादकों को बिचौलियों से मुक्त कर सकते हैं।
- पाठ्यपुस्तक निर्माण जैसे सामान्य कार्यों में भी तीनों क्षेत्रकों की भूमिका होती है।
10. परीक्षा उपयोगी प्रश्नोत्तर
11. अभ्यास प्रश्नों के उत्तर
प्रश्न 1: प्राथमिक क्षेत्रक क्या है? यह द्वितीयक क्षेत्रक से किस प्रकार भिन्न है?
प्राथमिक क्षेत्रक वह है जिसमें लोग सीधे प्रकृति से कच्चा माल प्राप्त करते हैं, जैसे — कृषि, खनन, मत्स्य पालन। इसके विपरीत द्वितीयक क्षेत्रक में इसी कच्चे माल को प्रसंस्करण करके उपयोगी वस्तुओं में बदला जाता है, जैसे — कपास से वस्त्र, दूध से पनीर, गेहूँ से आटा।
प्रश्न 2: द्वितीयक क्षेत्रक तृतीयक क्षेत्रक पर किस प्रकार निर्भर है?
द्वितीयक क्षेत्रक का उत्पादन तभी सफल होता है जब तृतीयक क्षेत्रक की सेवाएँ उपलब्ध हों। उदाहरण के लिए — कारखानों को कच्चा माल पहुँचाने के लिए परिवहन चाहिए, धन के लिए बैंक चाहिए, वस्तु बेचने के लिए व्यापार और विपणन चाहिए। इस प्रकार द्वितीयक क्षेत्रक तृतीयक क्षेत्रक पर निर्भर है।
प्रश्न 3: तीनों क्षेत्रकों की परस्पर निर्भरता को उदाहरण सहित समझाइए।
अमूल उदाहरण — किसान दूध उत्पादन करते हैं (प्राथमिक), डेयरी में उससे मक्खन, घी, पनीर बनता है (द्वितीयक), फिर ट्रकों, दुकानों और विपणन द्वारा वह उपभोक्ता तक पहुँचता है (तृतीयक)। इससे स्पष्ट है कि तीनों क्षेत्रक एक-दूसरे पर निर्भर हैं।


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