धातु एवं अधातु (Metals and Non-metals)
कक्षा 10 विज्ञान · अध्याय 3 · अवधारणा, अभिक्रियाएँ, चित्र और 25 अभ्यास-प्रश्न (उत्तर सहित)
धातु (Metals) और अधातु (Non-metals) हमारे दैनिक जीवन के आधार हैं: तार और बर्तन से लेकर पुल, सिक्के, गहने और बैटरी तक। तत्त्वों में अधिकांश धातुएँ हैं, जबकि अधातुएँ कम पर जीवन के लिए अनिवार्य हैं (ऑक्सीजन, कार्बन, नाइट्रोजन)।
इस लेख में NCERT के अनुसार भौतिक-रासायनिक गुण, क्रियाशीलता श्रेणी, आयनिक यौगिक, धातुकर्म, संक्षारण और मिश्रधातु, 6 एनिमेटेड चित्र और अंत में 25 MCQ उनके कारण सहित हैं। पूरा पाठ अध्याय 3 के पाठ-लेख में और टेस्ट Telegram टेस्ट-सीरीज़ पर उपलब्ध है।
| विषय | विज्ञान (रसायन) |
| कक्षा | 10 |
| अध्याय | 3 (NCERT आधारित) |
| प्रमुख पद | क्रियाशीलता श्रेणी, आयनिक बंध, धातुकर्म, संक्षारण, मिश्रधातु |
| अभ्यास | 25 MCQ + 5 FAQ |
मुख्य बिंदु
- धातुएँ चमकीली, आघातवर्धनीय, तन्य, ऊष्मा-विद्युत की सुचालक और ध्वानिक होती हैं; अधातुएँ प्रायः इसके विपरीत।
- अपवाद: पारा (द्रव धातु), ग्रेफाइट (सुचालक अधातु), हीरा (सबसे कठोर), आयोडीन (चमकीला अधातु)।
- धातु + O₂ → धातु ऑक्साइड (क्षारकीय); अधातु के ऑक्साइड अम्लीय; Al₂O₃ और ZnO उभयधर्मी।
- क्रियाशीलता श्रेणी: K > Na > Ca > Mg > Al > Zn > Fe > Pb > H > Cu > Hg > Ag > Au।
- आयनिक यौगिक: इलेक्ट्रॉन-स्थानांतरण से बनते हैं; उच्च गलनांक; पिघले या जलीय रूप में ही विद्युत-चालक।
- निष्कर्षण की विधि धातु की क्रियाशीलता से तय होती है; लोहे का संक्षारण रोकने के लिए गैल्वनीकरण उपयोगी है।
भौतिक गुण: धातु बनाम अधातु
| गुण | धातु | अधातु | प्रमुख अपवाद |
|---|---|---|---|
| चमक (Lustre) | धात्विक चमक | प्रायः चमकहीन | आयोडीन चमकीला अधातु है |
| कठोरता | प्रायः कठोर | प्रायः मृदु | Na, K, Li चाकू से कट जाते हैं; हीरा सबसे कठोर |
| आघातवर्धनीयता (पीटने पर चादर) | हाँ (Au, Ag सर्वाधिक) | भंगुर, टूट जाते हैं | — |
| तन्यता (तार खिंचना) | हाँ (Au, Ag, Cu) | नहीं | — |
| ऊष्मा/विद्युत चालकता | सुचालक (Ag सर्वोत्तम, फिर Cu) | कुचालक | ग्रेफाइट सुचालक; Pb, Hg कम सुचालक |
| गलनांक / क्वथनांक | प्रायः उच्च | प्रायः निम्न | Ga, Cs हथेली की गर्मी से पिघलते हैं; हीरा/ग्रेफाइट का गलनांक उच्च |
| सामान्य ताप पर अवस्था | ठोस | ठोस या गैस | पारा द्रव धातु; ब्रोमीन द्रव अधातु |
| ध्वानिकता (Sonorous) | टकराने पर ध्वनि | नहीं | — |
| घनत्व | प्रायः उच्च | प्रायः निम्न | Na, K जल से हल्के |
सोना और चाँदी सबसे अधिक आघातवर्धनीय व तन्य धातुएँ हैं; 1 ग्राम सोने से लगभग 2 किमी लंबा तार खींचा जा सकता है। ऊष्मा के अच्छे सुचालक होने के कारण ही खाना पकाने के बर्तन तांबे, एल्युमिनियम या इस्पात के बनते हैं।
रासायनिक गुण और अभिक्रियाएँ
धातुएँ इलेक्ट्रॉन त्यागकर धनायन बनाती हैं; अधातुएँ इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके ऋणायन बनाती हैं। रासायनिक समीकरणों का संतुलन और अभिक्रिया-प्रकार अध्याय 1: रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण में हैं; अम्ल के साथ धातु की अभिक्रिया अध्याय 2: अम्ल, क्षारक एवं लवण से जुड़ती है।
| अभिक्रिया | उदाहरण समीकरण | विशेष |
|---|---|---|
| धातु + ऑक्सीजन | 2Mg + O₂ → 2MgO 2Cu + O₂ → 2CuO (काला) 4Al + 3O₂ → 2Al₂O₃ | धातु ऑक्साइड बनते हैं; अधिकांश क्षारकीय |
| धातु + जल | 2Na + 2H₂O → 2NaOH + H₂↑ Ca + 2H₂O → Ca(OH)₂ + H₂↑ | K, Na तीव्र; Ca मध्यम; Mg गर्म जल से |
| धातु + भाप | 3Fe + 4H₂O → Fe₃O₄ + 4H₂↑ 2Al + 3H₂O → Al₂O₃ + 3H₂↑ | Al, Zn, Fe केवल भाप से; ऑक्साइड + H₂ |
| धातु + तनु अम्ल | Zn + 2HCl → ZnCl₂ + H₂↑ Fe + 2HCl → FeCl₂ + H₂↑ | H₂ से ऊपर की धातुएँ; Cu, Ag, Au नहीं |
| धातु + लवण विलयन (विस्थापन) | Fe + CuSO₄ → FeSO₄ + Cu Cu + 2AgNO₃ → Cu(NO₃)₂ + 2Ag | अधिक क्रियाशील धातु कम क्रियाशील को विस्थापित करती है |
| उभयधर्मी ऑक्साइड | Al₂O₃ + 6HCl → 2AlCl₃ + 3H₂O Al₂O₃ + 2NaOH → 2NaAlO₂ + H₂O | Al₂O₃, ZnO अम्ल व क्षार दोनों से अभिक्रिया करते हैं |
अधातुओं के गुण: अधातुएँ जल या तनु अम्ल से H₂ नहीं देतीं; उनके ऑक्साइड अम्लीय या उदासीन होते हैं (जैसे CO₂, SO₂ अम्लीय; CO, H₂O उदासीन)। एक्वा रेजिया (सांद्र HCl : सांद्र HNO₃ = 3 : 1) सोने और प्लैटिनम को भी घोल देता है, इसीलिए उसे "शाही जल" कहते हैं।
क्रियाशीलता श्रेणी (Reactivity Series)
धातुओं को उनकी क्रियाशीलता के घटते क्रम में रखने पर क्रियाशीलता श्रेणी बनती है। इसमें हाइड्रोजन (H) धातु नहीं है, पर तुलना के लिए संदर्भ बिंदु के रूप में रखा गया है।
पोटैशियम
सोडियम
कैल्शियम
मैग्नीशियम
एल्युमिनियम
जिंक
लोहा
सीसा
हाइड्रोजन
तांबा
पारा
चाँदी
सोना
| धातुएँ | जल / भाप | तनु अम्ल | निष्कर्षण की विधि |
|---|---|---|---|
| K, Na, Ca | ठंडे जल से तीव्र | अत्यंत तीव्र | पिघले यौगिक का विद्युत अपघटन |
| Mg | गर्म जल से | तीव्र | विद्युत अपघटन |
| Al, Zn, Fe | केवल भाप से | अभिक्रिया करते हैं | Al: विद्युत अपघटन; Zn, Fe: कार्बन से अपचयन |
| Pb | जल से नहीं | बहुत मंद | कार्बन से अपचयन |
| Cu, Hg | जल/भाप से नहीं | नहीं | भर्जन और ऊष्मा/अपचयन |
| Ag, Au | नहीं | नहीं | प्रायः मुक्त अवस्था में मिलते हैं |
आयनिक यौगिक (Ionic Compounds)
जब कोई धातु अपने संयोजी इलेक्ट्रॉन किसी अधातु को दे देती है, तो बने धनायन और ऋणायन के बीच प्रबल वैद्युतस्थैतिक आकर्षण से आयनिक बंध बनता है। सोडियम (2,8,1) एक इलेक्ट्रॉन खोकर Na⁺ (2,8) और क्लोरीन (2,8,7) एक इलेक्ट्रॉन पाकर Cl⁻ (2,8,8) बनता है; दोनों का बाहरी कोश पूर्ण हो जाता है। मैग्नीशियम (2,8,2) दो इलेक्ट्रॉन देकर Mg²⁺ बनाता है, इसलिए MgCl₂ में 1 Mg²⁺ पर 2 Cl⁻ होते हैं।
| गुण | कारण / स्थिति |
|---|---|
| कठोर, ठोस और भंगुर | आयनों के बीच प्रबल आकर्षण; बल लगाने पर समान आवेश आमने-सामने आकर टूट जाते हैं |
| उच्च गलनांक व क्वथनांक | आकर्षण तोड़ने के लिए अधिक ऊर्जा चाहिए (NaCl का गलनांक लगभग 1074 K) |
| जल में विलेय | जल के अणु आयनों को अलग कर देते हैं; कैरोसिन/पेट्रोल में प्रायः अविलेय |
| विद्युत चालकता | ठोस में नहीं; पिघली या जलीय अवस्था में हाँ, क्योंकि आयन गतिशील हो जाते हैं |
धातुकर्म: अयस्क से धातु तक
प्रकृति में धातु किसी भी रूप में मिलने वाला पदार्थ खनिज (Mineral) है; जिस खनिज से धातु लाभदायक ढंग से निकाली जा सके, उसे अयस्क (Ore) कहते हैं। अयस्क में मिली मिट्टी-रेत जैसी अशुद्धियाँ गैंग (Gangue) हैं। अयस्क से शुद्ध धातु प्राप्त करने की पूरी प्रक्रिया धातुकर्म (Metallurgy) है।
| वर्ग | विधि | उदाहरण अभिक्रिया |
|---|---|---|
| K, Na, Ca, Mg, Al (अत्यधिक क्रियाशील) | पिघले यौगिक का विद्युत अपघटन (कार्बन अपचयन संभव नहीं) | 2NaCl (पिघला) → 2Na (कैथोड) + Cl₂ (एनोड) Al: पिघले Al₂O₃ का विद्युत अपचयन |
| Zn, Fe, Pb (मध्यम क्रियाशील) | सल्फाइड का भर्जन / कार्बोनेट का निस्तापन, फिर कार्बन से अपचयन | 2ZnS + 3O₂ → 2ZnO + 2SO₂ (भर्जन) ZnCO₃ → ZnO + CO₂ (निस्तापन) ZnO + C → Zn + CO |
| Cu, Hg (कम क्रियाशील) | भर्जन, फिर ऊष्मा/स्वयं-अपचयन | 2HgS + 3O₂ → 2HgO + 2SO₂; 2HgO → 2Hg + O₂ 2Cu₂S + 3O₂ → 2Cu₂O + 2SO₂; 2Cu₂O + Cu₂S → 6Cu + SO₂ |
| Ag, Au | प्रायः मुक्त अवस्था में | अपचयन की आवश्यकता नहीं; केवल शोधन से शुद्ध किए जाते हैं |
थर्माइट अभिक्रिया
एल्युमिनियम, आयरन(III) ऑक्साइड को अपचयित करता है और अपार ऊष्मा से लोहा पिघली अवस्था में मिलता है। इसका उपयोग रेल की पटरियों और टूटी मशीनी दरारों की वेल्डिंग में होता है।
धातुओं का शोधन
सबसे प्रचलित विधि विद्युत-अपघटनी शोधन है। तांबे के लिए अशुद्ध तांबे की मोटी छड़ एनोड, शुद्ध तांबे की पतली पट्टी कैथोड और अम्लीकृत CuSO₄ विद्युत-अपघट्य होता है। एनोड से Cu²⁺ घुलकर कैथोड पर शुद्ध Cu बनकर जमता है; अशुद्धियाँ तली में एनोड पंक बनकर बैठती हैं।
संक्षारण (जंग) और बचाव
वायु, नमी या अम्ल जैसे वातावरणीय कारकों से धातु की सतह का धीरे-धीरे नष्ट होना संक्षारण (Corrosion) है। लोहे का संक्षारण जंग (Rusting) कहलाता है और उसके लिए ऑक्सीजन तथा जल दोनों चाहिए। संक्षारण और इसके प्रकार का प्रारंभिक परिचय अध्याय 1 में भी है।
| धातु | संक्षारण का रूप | बचाव |
|---|---|---|
| लोहा | भूरी जंग Fe₂O₃·xH₂O | पेंट, तेल-ग्रीस, गैल्वनीकरण, मिश्रधातु (स्टेनलेस स्टील) |
| चाँदी | काली परत (Ag₂S) | सूखा, हवाबंद रखना |
| तांबा | हरी परत (क्षारकीय कॉपर कार्बोनेट) | वार्निश, पॉलिश |
| एल्युमिनियम | पतली सुरक्षात्मक Al₂O₃ परत बनती है और आगे क्षरण रुकता है | एनोडीकरण से परत और मोटी की जाती है |
गैल्वनीकरण (Galvanisation): लोहे या इस्पात पर जिंक की परत चढ़ाना। परत क्षतिग्रस्त हो जाए तब भी जिंक अधिक क्रियाशील होने से पहले स्वयं ऑक्सीकृत होकर लोहे की रक्षा करता है। अन्य उपाय: विद्युत-लेपन (टिन, क्रोमियम), पेंट और मिश्रधातु बनाना।
मिश्रधातु (Alloys)
दो या अधिक धातुओं (या धातु + अधातु) के समांगी मिश्रण को मिश्रधातु कहते हैं, जो धातु को पिघलाकर दूसरे घटक को घोलने से बनता है। मिश्रधातु अक्सर मूल धातु से अधिक कठोर, संक्षारण-रोधी होती है और उसकी विद्युत-चालकता कम हो जाती है।
| मिश्रधातु | संघटक | उपयोग / विशेषता |
|---|---|---|
| पीतल (Brass) | तांबा + जस्ता | बर्तन, उपकरण, सजावटी वस्तुएँ |
| काँसा (Bronze) | तांबा + टिन | मूर्तियाँ, पदक, घंटियाँ |
| सोल्डर (Solder) | सीसा + टिन | निम्न गलनांक; तार/धातु के टुकड़े जोड़ने (सोल्डरिंग) के लिए |
| स्टेनलेस स्टील | लोहा + निकेल + क्रोमियम | जंग-रोधी, कठोर, चमकदार; बर्तन, उपकरण |
| इस्पात (Steel) | लोहा + कार्बन (अल्प मात्रा) | निर्माण, मशीनें; शुद्ध लोहे से अधिक कठोर |
| अमलगम (Amalgam) | पारा + कोई धातु | दंत-भराव आदि; पारे की मिश्रधातु |
सोने की शुद्धता: 24 कैरेट शुद्ध सोना है, पर बहुत मुलायम होता है। गहनों के लिए 22 कैरेट में इसे तांबा या चाँदी मिलाकर कठोर बनाया जाता है (22 भाग सोना, 2 भाग अन्य धातु)।
सामान्य भ्रांतियाँ
- "सभी धातुएँ कठोर ठोस हैं": गलत। Na, K मुलायम हैं और पारा द्रव है।
- "सभी अधातुएँ कुचालक हैं": गलत। ग्रेफाइट विद्युत का सुचालक है।
- "हर धातु अम्ल से H₂ देती है": गलत। Cu, Ag, Au हाइड्रोजन से नीचे हैं और नहीं देतीं।
- "आयनिक ठोस भी विद्युत चालन करते हैं": गलत। ठोस में आयन बँधे रहते हैं; पिघलने/घुलने पर ही चालन।
- "जंग के लिए केवल जल चाहिए": गलत। ऑक्सीजन और जल दोनों आवश्यक हैं।
- "क्रियाशील धातु का संक्षारण अधिक होता है": हमेशा नहीं। Al अधिक क्रियाशील है पर सुरक्षात्मक ऑक्साइड परत के कारण लोहे जैसा नहीं गलता।
- "हाइड्रोजन एक धातु है": गलत। वह अधातु है; श्रेणी में केवल संदर्भ के लिए रखा गया है।
25 MCQ: उत्तर व कारण
पहले Telegram पर टेस्ट हल करें, फिर नीचे के खंड खोलकर अपने उत्तर मिलाएँ।
प्रश्न 1 से 8: उत्तर देखें
| क्र. | उत्तर | कारण |
|---|---|---|
| 1 | B) पारा / Mercury | Hg एकमात्र धातु है जो सामान्य ताप पर द्रव है (ब्रोमीन द्रव अधातु है)। |
| 2 | B) आघातवर्धनीयता | पीटकर चादर बनने का गुण; तार खिंचने का गुण तन्यता है। |
| 3 | C) ग्रेफाइट | कार्बन का अपररूप; इसमें मुक्त इलेक्ट्रॉन होते हैं। |
| 4 | C) धातु ऑक्साइड | धातु + O₂ → धातु ऑक्साइड (जैसे 2Mg + O₂ → 2MgO)। |
| 5 | A) सोडियम | K और Na ठंडे जल से तीव्र क्रिया करते हैं; Cu, Ag, Au नहीं। |
| 6 | B) वायु और जल से बचाने के लिए | Na वायु/नमी से तुरंत क्रिया कर आग पकड़ सकता है। |
| 7 | C) हाइड्रोजन | धातु + तनु अम्ल → लवण + H₂। |
| 8 | D) तांबा | Cu क्रियाशीलता श्रेणी में H से नीचे है, उसे विस्थापित नहीं करता। |
प्रश्न 9 से 16: उत्तर देखें
| क्र. | उत्तर | कारण |
|---|---|---|
| 9 | A) नीला से हरा | Fe + CuSO₄ → FeSO₄ + Cu; FeSO₄ के कारण हरा रंग, कील पर Cu जमता है। |
| 10 | C) पोटैशियम | विकल्पों में K श्रेणी में सबसे ऊपर है। |
| 11 | B) हाइड्रोजन | H से ऊपर की धातुएँ अम्ल से H₂ विस्थापित कर देती हैं। |
| 12 | B) इलेक्ट्रॉनों का स्थानांतरण | धातु इलेक्ट्रॉन देती है, अधातु लेती है; विपरीत आवेशों का आकर्षण बंध है। |
| 13 | A) 1 | Na (2,8,1) → Na⁺ (2,8): एक इलेक्ट्रॉन का त्याग। |
| 14 | B) बहुत अधिक | आयनों के बीच प्रबल आकर्षण तोड़ने के लिए अधिक ऊर्जा चाहिए। |
| 15 | C) पिघली या जलीय अवस्था | इन्हीं अवस्थाओं में आयन गतिशील होते हैं। |
| 16 | B) धातुकर्म | अयस्क से धातु निकालने की पूरी प्रक्रिया धातुकर्म है। |
प्रश्न 17 से 25: उत्तर देखें
| क्र. | उत्तर | कारण |
|---|---|---|
| 17 | B) विद्युत अपघटन | अत्यधिक क्रियाशील धातुओं का कार्बन से अपचयन संभव नहीं। |
| 18 | A) सोडियम | पिघले NaCl के विद्युत अपघटन से Na कैथोड पर मिलता है। |
| 19 | C) ऑक्सीजन और जल | जंग के लिए दोनों चाहिए; केवल एक से नहीं लगती। |
| 20 | B) गैल्वनीकरण | लोहे पर जिंक की परत चढ़ाना। |
| 21 | A) तांबा और जस्ता | पीतल = Cu + Zn (काँसा = Cu + Sn)। |
| 22 | B) तांबा और टिन | काँसा = Cu + Sn। |
| 23 | C) Al₂O₃ | अम्ल और क्षार दोनों से क्रिया करता है, इसलिए उभयधर्मी। |
| 24 | C) लोहा | Fe₂O₃ + 2Al → Al₂O₃ + 2Fe + ऊष्मा (थर्माइट अभिक्रिया)। |
| 25 | A) सोना | Au कम क्रियाशील है, इसलिए मुक्त अवस्था में मिल सकता है। |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
धातु और अधातु में मुख्य अंतर क्या हैं?
धातुएँ चमकीली, आघातवर्धनीय, तन्य और ऊष्मा-विद्युत की सुचालक होती हैं तथा इलेक्ट्रॉन त्यागकर धनायन बनाती हैं। अधातुएँ प्रायः चमकहीन, भंगुर और कुचालक होती हैं तथा इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर ऋणायन बना सकती हैं। पारा (द्रव धातु) और ग्रेफाइट (सुचालक अधातु) प्रमुख अपवाद हैं।
क्रियाशीलता श्रेणी क्या है और क्यों उपयोगी है?
यह धातुओं की रासायनिक क्रियाशीलता का घटता क्रम है: K > Na > Ca > Mg > Al > Zn > Fe > Pb > H > Cu > Hg > Ag > Au। इससे पता चलता है कि कौन-सी धातु जल/अम्ल से H₂ देगी, कौन किसे लवण-विलयन से विस्थापित करेगी और उसका निष्कर्षण किस विधि से होगा।
लोहे को जंग से कैसे बचाएँ?
लोहे को हवा और नमी से अलग रखें: पेंट, तेल-ग्रीस, जिंक की परत (गैल्वनीकरण), विद्युत-लेपन या स्टेनलेस स्टील जैसी मिश्रधातु का उपयोग करें।
आयनिक यौगिकों के गलनांक इतने उच्च क्यों होते हैं?
धनायनों और ऋणायनों के बीच प्रबल वैद्युतस्थैतिक आकर्षण होता है। इसे तोड़कर आयनों को गतिशील बनाने के लिए बहुत अधिक ऊष्मा-ऊर्जा चाहिए।
थर्माइट अभिक्रिया क्या है?
एल्युमिनियम और आयरन(III) ऑक्साइड की अभिक्रिया Fe₂O₃ + 2Al → Al₂O₃ + 2Fe + ऊष्मा। इसमें उत्पन्न ऊष्मा से लोहा पिघल जाता है, जिसका उपयोग रेल की पटरियाँ जोड़ने में होता है।
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स्रोत एवं संदर्भ: NCERT विज्ञान, कक्षा 10, अध्याय 3 (धातु एवं अधातु)। सभी चित्र इस लेख के लिए बनाए गए मूल SVG चित्र हैं।
यह सामग्री शैक्षिक उद्देश्य से तैयार की गई है। प्रयोग करते समय शिक्षक की देखरेख और सुरक्षा-नियमों का पालन अनिवार्य है।

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