धातु एवं अधातु: 25 MCQ उत्तर | Class 10 Science Ch 3

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धातु एवं अधातु (Metals and Non-metals)

कक्षा 10 विज्ञान · अध्याय 3 · अवधारणा, अभिक्रियाएँ, चित्र और 25 अभ्यास-प्रश्न (उत्तर सहित)

कक्षा 10 विज्ञान · अध्याय 3 · Class 10 Science धातु एवं अधातु Metals and Non-metals 25 MCQ + कारणक्रियाशीलता श्रेणीमूल चित्र ++++++++++++++++ KNaCaMgAlZnFePbHCuHgAgAu अधिक क्रियाशील क्रियाशीलता श्रेणी: घटता क्रम → कम क्रियाशील ncertclasses.com

धातु (Metals) और अधातु (Non-metals) हमारे दैनिक जीवन के आधार हैं: तार और बर्तन से लेकर पुल, सिक्के, गहने और बैटरी तक। तत्त्वों में अधिकांश धातुएँ हैं, जबकि अधातुएँ कम पर जीवन के लिए अनिवार्य हैं (ऑक्सीजन, कार्बन, नाइट्रोजन)।

इस लेख में NCERT के अनुसार भौतिक-रासायनिक गुण, क्रियाशीलता श्रेणी, आयनिक यौगिक, धातुकर्म, संक्षारण और मिश्रधातु, 6 एनिमेटेड चित्र और अंत में 25 MCQ उनके कारण सहित हैं। पूरा पाठ अध्याय 3 के पाठ-लेख में और टेस्ट Telegram टेस्ट-सीरीज़ पर उपलब्ध है।

धातु एवं अधातु
विषयविज्ञान (रसायन)
कक्षा10
अध्याय3 (NCERT आधारित)
प्रमुख पदक्रियाशीलता श्रेणी, आयनिक बंध, धातुकर्म, संक्षारण, मिश्रधातु
अभ्यास25 MCQ + 5 FAQ

मुख्य बिंदु

  • धातुएँ चमकीली, आघातवर्धनीय, तन्य, ऊष्मा-विद्युत की सुचालक और ध्वानिक होती हैं; अधातुएँ प्रायः इसके विपरीत।
  • अपवाद: पारा (द्रव धातु), ग्रेफाइट (सुचालक अधातु), हीरा (सबसे कठोर), आयोडीन (चमकीला अधातु)।
  • धातु + O₂ → धातु ऑक्साइड (क्षारकीय); अधातु के ऑक्साइड अम्लीय; Al₂O₃ और ZnO उभयधर्मी।
  • क्रियाशीलता श्रेणी: K > Na > Ca > Mg > Al > Zn > Fe > Pb > H > Cu > Hg > Ag > Au।
  • आयनिक यौगिक: इलेक्ट्रॉन-स्थानांतरण से बनते हैं; उच्च गलनांक; पिघले या जलीय रूप में ही विद्युत-चालक।
  • निष्कर्षण की विधि धातु की क्रियाशीलता से तय होती है; लोहे का संक्षारण रोकने के लिए गैल्वनीकरण उपयोगी है।

भौतिक गुण: धातु बनाम अधातु

तालिका 1: भौतिक गुणों की तुलना
गुणधातुअधातुप्रमुख अपवाद
चमक (Lustre)धात्विक चमकप्रायः चमकहीनआयोडीन चमकीला अधातु है
कठोरताप्रायः कठोरप्रायः मृदुNa, K, Li चाकू से कट जाते हैं; हीरा सबसे कठोर
आघातवर्धनीयता (पीटने पर चादर)हाँ (Au, Ag सर्वाधिक)भंगुर, टूट जाते हैं—
तन्यता (तार खिंचना)हाँ (Au, Ag, Cu)नहीं—
ऊष्मा/विद्युत चालकतासुचालक (Ag सर्वोत्तम, फिर Cu)कुचालकग्रेफाइट सुचालक; Pb, Hg कम सुचालक
गलनांक / क्वथनांकप्रायः उच्चप्रायः निम्नGa, Cs हथेली की गर्मी से पिघलते हैं; हीरा/ग्रेफाइट का गलनांक उच्च
सामान्य ताप पर अवस्थाठोसठोस या गैसपारा द्रव धातु; ब्रोमीन द्रव अधातु
ध्वानिकता (Sonorous)टकराने पर ध्वनिनहीं—
घनत्वप्रायः उच्चप्रायः निम्नNa, K जल से हल्के
+++++++++++++++स्थिर धनायन (+) और गतिशील मुक्त इलेक्ट्रॉन (●): इसलिए धातु सुचालक हैं
चित्र 1: धातुओं की चालकता का कारण: मुक्त इलेक्ट्रॉन (मूल चित्रण, एनिमेटेड SVG)

सोना और चाँदी सबसे अधिक आघातवर्धनीय व तन्य धातुएँ हैं; 1 ग्राम सोने से लगभग 2 किमी लंबा तार खींचा जा सकता है। ऊष्मा के अच्छे सुचालक होने के कारण ही खाना पकाने के बर्तन तांबे, एल्युमिनियम या इस्पात के बनते हैं।

रासायनिक गुण और अभिक्रियाएँ

धातुएँ इलेक्ट्रॉन त्यागकर धनायन बनाती हैं; अधातुएँ इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके ऋणायन बनाती हैं। रासायनिक समीकरणों का संतुलन और अभिक्रिया-प्रकार अध्याय 1: रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण में हैं; अम्ल के साथ धातु की अभिक्रिया अध्याय 2: अम्ल, क्षारक एवं लवण से जुड़ती है।

तालिका 2: धातुओं की प्रमुख अभिक्रियाएँ
अभिक्रियाउदाहरण समीकरणविशेष
धातु + ऑक्सीजन2Mg + O₂ → 2MgO
2Cu + O₂ → 2CuO (काला)
4Al + 3O₂ → 2Al₂O₃
धातु ऑक्साइड बनते हैं; अधिकांश क्षारकीय
धातु + जल2Na + 2H₂O → 2NaOH + H₂↑
Ca + 2H₂O → Ca(OH)₂ + H₂↑
K, Na तीव्र; Ca मध्यम; Mg गर्म जल से
धातु + भाप3Fe + 4H₂O → Fe₃O₄ + 4H₂↑
2Al + 3H₂O → Al₂O₃ + 3H₂↑
Al, Zn, Fe केवल भाप से; ऑक्साइड + H₂
धातु + तनु अम्लZn + 2HCl → ZnCl₂ + H₂↑
Fe + 2HCl → FeCl₂ + H₂↑
H₂ से ऊपर की धातुएँ; Cu, Ag, Au नहीं
धातु + लवण विलयन (विस्थापन)Fe + CuSO₄ → FeSO₄ + Cu
Cu + 2AgNO₃ → Cu(NO₃)₂ + 2Ag
अधिक क्रियाशील धातु कम क्रियाशील को विस्थापित करती है
उभयधर्मी ऑक्साइडAl₂O₃ + 6HCl → 2AlCl₃ + 3H₂O
Al₂O₃ + 2NaOH → 2NaAlO₂ + H₂O
Al₂O₃, ZnO अम्ल व क्षार दोनों से अभिक्रिया करते हैं
Na का टुकड़ा जल पर दौड़ता है H₂ गैस ↑ 2Na + 2H₂O → 2NaOH + H₂↑ + ऊष्मा
चित्र 2: सोडियम और जल की अभिक्रिया (मूल चित्रण, एनिमेटेड SVG)
सावधानी: सोडियम और पोटैशियम वायु व नमी से तुरंत क्रिया करते हैं और आग पकड़ सकते हैं, इसलिए उन्हें मिट्टी के तेल में रखा जाता है। इनसे प्रयोग केवल शिक्षक की देखरेख में करें। फ़ॉस्फ़ोरस (अधातु) जल के अंदर रखा जाता है।
लोहे की कील Cu का भूरा जमाव नीला → हरा Fe + CuSO₄ → FeSO₄ + Cu
चित्र 3: लोहे और कॉपर सल्फेट की विस्थापन अभिक्रिया (मूल चित्रण, एनिमेटेड SVG)

अधातुओं के गुण: अधातुएँ जल या तनु अम्ल से H₂ नहीं देतीं; उनके ऑक्साइड अम्लीय या उदासीन होते हैं (जैसे CO₂, SO₂ अम्लीय; CO, H₂O उदासीन)। एक्वा रेजिया (सांद्र HCl : सांद्र HNO₃ = 3 : 1) सोने और प्लैटिनम को भी घोल देता है, इसीलिए उसे "शाही जल" कहते हैं।

क्रियाशीलता श्रेणी (Reactivity Series)

धातुओं को उनकी क्रियाशीलता के घटते क्रम में रखने पर क्रियाशीलता श्रेणी बनती है। इसमें हाइड्रोजन (H) धातु नहीं है, पर तुलना के लिए संदर्भ बिंदु के रूप में रखा गया है।

K
पोटैशियम
Na
सोडियम
Ca
कैल्शियम
Mg
मैग्नीशियम
Al
एल्युमिनियम
Zn
जिंक
Fe
लोहा
Pb
सीसा
H
हाइड्रोजन
Cu
तांबा
Hg
पारा
Ag
चाँदी
Au
सोना
अधिक क्रियाशीलकम क्रियाशील
तालिका 3: क्रियाशीलता के अनुसार व्यवहार और निष्कर्षण
धातुएँजल / भापतनु अम्लनिष्कर्षण की विधि
K, Na, Caठंडे जल से तीव्रअत्यंत तीव्रपिघले यौगिक का विद्युत अपघटन
Mgगर्म जल सेतीव्रविद्युत अपघटन
Al, Zn, Feकेवल भाप सेअभिक्रिया करते हैंAl: विद्युत अपघटन; Zn, Fe: कार्बन से अपचयन
Pbजल से नहींबहुत मंदकार्बन से अपचयन
Cu, Hgजल/भाप से नहींनहींभर्जन और ऊष्मा/अपचयन
Ag, Auनहींनहींप्रायः मुक्त अवस्था में मिलते हैं

आयनिक यौगिक (Ionic Compounds)

जब कोई धातु अपने संयोजी इलेक्ट्रॉन किसी अधातु को दे देती है, तो बने धनायन और ऋणायन के बीच प्रबल वैद्युतस्थैतिक आकर्षण से आयनिक बंध बनता है। सोडियम (2,8,1) एक इलेक्ट्रॉन खोकर Na⁺ (2,8) और क्लोरीन (2,8,7) एक इलेक्ट्रॉन पाकर Cl⁻ (2,8,8) बनता है; दोनों का बाहरी कोश पूर्ण हो जाता है। मैग्नीशियम (2,8,2) दो इलेक्ट्रॉन देकर Mg²⁺ बनाता है, इसलिए MgCl₂ में 1 Mg²⁺ पर 2 Cl⁻ होते हैं।

Na Cl Na (2,8,1) Cl (2,8,7) Na⁺ Cl⁻ Na → Na⁺ + e⁻ · Cl + e⁻ → Cl⁻ · विपरीत आवेशों का आकर्षण = आयनिक बंध
चित्र 4: NaCl में इलेक्ट्रॉन-स्थानांतरण (मूल चित्रण, एनिमेटेड SVG)
तालिका 4: आयनिक यौगिकों के गुण
गुणकारण / स्थिति
कठोर, ठोस और भंगुरआयनों के बीच प्रबल आकर्षण; बल लगाने पर समान आवेश आमने-सामने आकर टूट जाते हैं
उच्च गलनांक व क्वथनांकआकर्षण तोड़ने के लिए अधिक ऊर्जा चाहिए (NaCl का गलनांक लगभग 1074 K)
जल में विलेयजल के अणु आयनों को अलग कर देते हैं; कैरोसिन/पेट्रोल में प्रायः अविलेय
विद्युत चालकताठोस में नहीं; पिघली या जलीय अवस्था में हाँ, क्योंकि आयन गतिशील हो जाते हैं

धातुकर्म: अयस्क से धातु तक

प्रकृति में धातु किसी भी रूप में मिलने वाला पदार्थ खनिज (Mineral) है; जिस खनिज से धातु लाभदायक ढंग से निकाली जा सके, उसे अयस्क (Ore) कहते हैं। अयस्क में मिली मिट्टी-रेत जैसी अशुद्धियाँ गैंग (Gangue) हैं। अयस्क से शुद्ध धातु प्राप्त करने की पूरी प्रक्रिया धातुकर्म (Metallurgy) है।

1. अयस्क का खनन
2. सांद्रण (गैंग हटाना)
3. भर्जन/निस्तापन या अपचयन या विद्युत अपघटन
4. शोधन (परिष्कृत धातु)
तालिका 5: क्रियाशीलता के अनुसार निष्कर्षण
वर्गविधिउदाहरण अभिक्रिया
K, Na, Ca, Mg, Al (अत्यधिक क्रियाशील)पिघले यौगिक का विद्युत अपघटन (कार्बन अपचयन संभव नहीं)2NaCl (पिघला) → 2Na (कैथोड) + Cl₂ (एनोड)
Al: पिघले Al₂O₃ का विद्युत अपचयन
Zn, Fe, Pb (मध्यम क्रियाशील)सल्फाइड का भर्जन / कार्बोनेट का निस्तापन, फिर कार्बन से अपचयन2ZnS + 3O₂ → 2ZnO + 2SO₂ (भर्जन)
ZnCO₃ → ZnO + CO₂ (निस्तापन)
ZnO + C → Zn + CO
Cu, Hg (कम क्रियाशील)भर्जन, फिर ऊष्मा/स्वयं-अपचयन2HgS + 3O₂ → 2HgO + 2SO₂; 2HgO → 2Hg + O₂
2Cu₂S + 3O₂ → 2Cu₂O + 2SO₂; 2Cu₂O + Cu₂S → 6Cu + SO₂
Ag, Auप्रायः मुक्त अवस्था मेंअपचयन की आवश्यकता नहीं; केवल शोधन से शुद्ध किए जाते हैं

थर्माइट अभिक्रिया

Fe₂O₃ + 2Al → Al₂O₃ + 2Fe + ऊष्मा
एल्युमिनियम, आयरन(III) ऑक्साइड को अपचयित करता है और अपार ऊष्मा से लोहा पिघली अवस्था में मिलता है। इसका उपयोग रेल की पटरियों और टूटी मशीनी दरारों की वेल्डिंग में होता है।

धातुओं का शोधन

सबसे प्रचलित विधि विद्युत-अपघटनी शोधन है। तांबे के लिए अशुद्ध तांबे की मोटी छड़ एनोड, शुद्ध तांबे की पतली पट्टी कैथोड और अम्लीकृत CuSO₄ विद्युत-अपघट्य होता है। एनोड से Cu²⁺ घुलकर कैथोड पर शुद्ध Cu बनकर जमता है; अशुद्धियाँ तली में एनोड पंक बनकर बैठती हैं।

संक्षारण (जंग) और बचाव

वायु, नमी या अम्ल जैसे वातावरणीय कारकों से धातु की सतह का धीरे-धीरे नष्ट होना संक्षारण (Corrosion) है। लोहे का संक्षारण जंग (Rusting) कहलाता है और उसके लिए ऑक्सीजन तथा जल दोनों चाहिए। संक्षारण और इसके प्रकार का प्रारंभिक परिचय अध्याय 1 में भी है।

O₂O₂O₂ Fe + O₂ + H₂O → Fe₂O₃·xH₂O (जंग) नमी (जल) भूरी जंग परत
चित्र 5: जंग लगने की प्रक्रिया (मूल चित्रण, एनिमेटेड SVG)
तालिका 6: संक्षारण के उदाहरण और बचाव
धातुसंक्षारण का रूपबचाव
लोहाभूरी जंग Fe₂O₃·xH₂Oपेंट, तेल-ग्रीस, गैल्वनीकरण, मिश्रधातु (स्टेनलेस स्टील)
चाँदीकाली परत (Ag₂S)सूखा, हवाबंद रखना
तांबाहरी परत (क्षारकीय कॉपर कार्बोनेट)वार्निश, पॉलिश
एल्युमिनियमपतली सुरक्षात्मक Al₂O₃ परत बनती है और आगे क्षरण रुकता हैएनोडीकरण से परत और मोटी की जाती है

गैल्वनीकरण (Galvanisation): लोहे या इस्पात पर जिंक की परत चढ़ाना। परत क्षतिग्रस्त हो जाए तब भी जिंक अधिक क्रियाशील होने से पहले स्वयं ऑक्सीकृत होकर लोहे की रक्षा करता है। अन्य उपाय: विद्युत-लेपन (टिन, क्रोमियम), पेंट और मिश्रधातु बनाना।

मिश्रधातु (Alloys)

दो या अधिक धातुओं (या धातु + अधातु) के समांगी मिश्रण को मिश्रधातु कहते हैं, जो धातु को पिघलाकर दूसरे घटक को घोलने से बनता है। मिश्रधातु अक्सर मूल धातु से अधिक कठोर, संक्षारण-रोधी होती है और उसकी विद्युत-चालकता कम हो जाती है।

तालिका 7: महत्वपूर्ण मिश्रधातुएँ
मिश्रधातुसंघटकउपयोग / विशेषता
पीतल (Brass)तांबा + जस्ताबर्तन, उपकरण, सजावटी वस्तुएँ
काँसा (Bronze)तांबा + टिनमूर्तियाँ, पदक, घंटियाँ
सोल्डर (Solder)सीसा + टिननिम्न गलनांक; तार/धातु के टुकड़े जोड़ने (सोल्डरिंग) के लिए
स्टेनलेस स्टीललोहा + निकेल + क्रोमियमजंग-रोधी, कठोर, चमकदार; बर्तन, उपकरण
इस्पात (Steel)लोहा + कार्बन (अल्प मात्रा)निर्माण, मशीनें; शुद्ध लोहे से अधिक कठोर
अमलगम (Amalgam)पारा + कोई धातुदंत-भराव आदि; पारे की मिश्रधातु

सोने की शुद्धता: 24 कैरेट शुद्ध सोना है, पर बहुत मुलायम होता है। गहनों के लिए 22 कैरेट में इसे तांबा या चाँदी मिलाकर कठोर बनाया जाता है (22 भाग सोना, 2 भाग अन्य धातु)।

सामान्य भ्रांतियाँ

  • "सभी धातुएँ कठोर ठोस हैं": गलत। Na, K मुलायम हैं और पारा द्रव है।
  • "सभी अधातुएँ कुचालक हैं": गलत। ग्रेफाइट विद्युत का सुचालक है।
  • "हर धातु अम्ल से H₂ देती है": गलत। Cu, Ag, Au हाइड्रोजन से नीचे हैं और नहीं देतीं।
  • "आयनिक ठोस भी विद्युत चालन करते हैं": गलत। ठोस में आयन बँधे रहते हैं; पिघलने/घुलने पर ही चालन।
  • "जंग के लिए केवल जल चाहिए": गलत। ऑक्सीजन और जल दोनों आवश्यक हैं।
  • "क्रियाशील धातु का संक्षारण अधिक होता है": हमेशा नहीं। Al अधिक क्रियाशील है पर सुरक्षात्मक ऑक्साइड परत के कारण लोहे जैसा नहीं गलता।
  • "हाइड्रोजन एक धातु है": गलत। वह अधातु है; श्रेणी में केवल संदर्भ के लिए रखा गया है।

25 MCQ: उत्तर व कारण

पहले Telegram पर टेस्ट हल करें, फिर नीचे के खंड खोलकर अपने उत्तर मिलाएँ।

प्रश्न 1 से 8: उत्तर देखें
क्र.उत्तरकारण
1B) पारा / MercuryHg एकमात्र धातु है जो सामान्य ताप पर द्रव है (ब्रोमीन द्रव अधातु है)।
2B) आघातवर्धनीयतापीटकर चादर बनने का गुण; तार खिंचने का गुण तन्यता है।
3C) ग्रेफाइटकार्बन का अपररूप; इसमें मुक्त इलेक्ट्रॉन होते हैं।
4C) धातु ऑक्साइडधातु + O₂ → धातु ऑक्साइड (जैसे 2Mg + O₂ → 2MgO)।
5A) सोडियमK और Na ठंडे जल से तीव्र क्रिया करते हैं; Cu, Ag, Au नहीं।
6B) वायु और जल से बचाने के लिएNa वायु/नमी से तुरंत क्रिया कर आग पकड़ सकता है।
7C) हाइड्रोजनधातु + तनु अम्ल → लवण + H₂।
8D) तांबाCu क्रियाशीलता श्रेणी में H से नीचे है, उसे विस्थापित नहीं करता।
प्रश्न 9 से 16: उत्तर देखें
क्र.उत्तरकारण
9A) नीला से हराFe + CuSO₄ → FeSO₄ + Cu; FeSO₄ के कारण हरा रंग, कील पर Cu जमता है।
10C) पोटैशियमविकल्पों में K श्रेणी में सबसे ऊपर है।
11B) हाइड्रोजनH से ऊपर की धातुएँ अम्ल से H₂ विस्थापित कर देती हैं।
12B) इलेक्ट्रॉनों का स्थानांतरणधातु इलेक्ट्रॉन देती है, अधातु लेती है; विपरीत आवेशों का आकर्षण बंध है।
13A) 1Na (2,8,1) → Na⁺ (2,8): एक इलेक्ट्रॉन का त्याग।
14B) बहुत अधिकआयनों के बीच प्रबल आकर्षण तोड़ने के लिए अधिक ऊर्जा चाहिए।
15C) पिघली या जलीय अवस्थाइन्हीं अवस्थाओं में आयन गतिशील होते हैं।
16B) धातुकर्मअयस्क से धातु निकालने की पूरी प्रक्रिया धातुकर्म है।
प्रश्न 17 से 25: उत्तर देखें
क्र.उत्तरकारण
17B) विद्युत अपघटनअत्यधिक क्रियाशील धातुओं का कार्बन से अपचयन संभव नहीं।
18A) सोडियमपिघले NaCl के विद्युत अपघटन से Na कैथोड पर मिलता है।
19C) ऑक्सीजन और जलजंग के लिए दोनों चाहिए; केवल एक से नहीं लगती।
20B) गैल्वनीकरणलोहे पर जिंक की परत चढ़ाना।
21A) तांबा और जस्तापीतल = Cu + Zn (काँसा = Cu + Sn)।
22B) तांबा और टिनकाँसा = Cu + Sn।
23C) Al₂O₃अम्ल और क्षार दोनों से क्रिया करता है, इसलिए उभयधर्मी।
24C) लोहाFe₂O₃ + 2Al → Al₂O₃ + 2Fe + ऊष्मा (थर्माइट अभिक्रिया)।
25A) सोनाAu कम क्रियाशील है, इसलिए मुक्त अवस्था में मिल सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

धातु और अधातु में मुख्य अंतर क्या हैं?

धातुएँ चमकीली, आघातवर्धनीय, तन्य और ऊष्मा-विद्युत की सुचालक होती हैं तथा इलेक्ट्रॉन त्यागकर धनायन बनाती हैं। अधातुएँ प्रायः चमकहीन, भंगुर और कुचालक होती हैं तथा इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर ऋणायन बना सकती हैं। पारा (द्रव धातु) और ग्रेफाइट (सुचालक अधातु) प्रमुख अपवाद हैं।

क्रियाशीलता श्रेणी क्या है और क्यों उपयोगी है?

यह धातुओं की रासायनिक क्रियाशीलता का घटता क्रम है: K > Na > Ca > Mg > Al > Zn > Fe > Pb > H > Cu > Hg > Ag > Au। इससे पता चलता है कि कौन-सी धातु जल/अम्ल से H₂ देगी, कौन किसे लवण-विलयन से विस्थापित करेगी और उसका निष्कर्षण किस विधि से होगा।

लोहे को जंग से कैसे बचाएँ?

लोहे को हवा और नमी से अलग रखें: पेंट, तेल-ग्रीस, जिंक की परत (गैल्वनीकरण), विद्युत-लेपन या स्टेनलेस स्टील जैसी मिश्रधातु का उपयोग करें।

आयनिक यौगिकों के गलनांक इतने उच्च क्यों होते हैं?

धनायनों और ऋणायनों के बीच प्रबल वैद्युतस्थैतिक आकर्षण होता है। इसे तोड़कर आयनों को गतिशील बनाने के लिए बहुत अधिक ऊष्मा-ऊर्जा चाहिए।

थर्माइट अभिक्रिया क्या है?

एल्युमिनियम और आयरन(III) ऑक्साइड की अभिक्रिया Fe₂O₃ + 2Al → Al₂O₃ + 2Fe + ऊष्मा। इसमें उत्पन्न ऊष्मा से लोहा पिघल जाता है, जिसका उपयोग रेल की पटरियाँ जोड़ने में होता है।

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स्रोत एवं संदर्भ: NCERT विज्ञान, कक्षा 10, अध्याय 3 (धातु एवं अधातु)। सभी चित्र इस लेख के लिए बनाए गए मूल SVG चित्र हैं।

यह सामग्री शैक्षिक उद्देश्य से तैयार की गई है। प्रयोग करते समय शिक्षक की देखरेख और सुरक्षा-नियमों का पालन अनिवार्य है।

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