RBSE Class 11 Chemistry Syllabus 2026-27 | रसायन विज्ञान

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अंतिम अपडेट: 28 अक्टूबर 2026 · आधार: राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, अजमेर का सत्र 2026–27 पाठ्यक्रम (PDF पृष्ठ 120–126)

RBSE कक्षा 11 रसायन विज्ञान (Chemistry, विषय कोड-41) का सत्र 2026–27 का पाठ्यक्रम राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, अजमेर ने जारी किया है। इसमें सैद्धांतिक परीक्षा 70 अंक की (3:15 घंटे) और प्रायोगिक परीक्षा 30 अंक की है, यानी कुल 100 अंक। सैद्धांतिक भाग में 9 इकाइयाँ हैं (यहाँ हर इकाई एक अध्याय है), और बोर्ड ने हर इकाई के अंक अलग-अलग दिए हैं।

इस लेख में नौ इकाइयों के अंक और विषय-बिंदु, हर इकाई के मुख्य सूत्र और हल किए हुए उदाहरण, प्रायोगिक परीक्षा का विवरण (अनुमापन, लवण-विश्लेषण, कार्बनिक पदार्थ में N, S और हैलोजन की जाँच, परियोजनाएँ), अभ्यास-प्रश्न (उत्तर सहित), 8 सप्ताह की योजना और FAQ हैं। साथ ही PDF में प्रायोगिक अंकों की दो अलग तालिकाएँ मिली हैं, जिन्हें नीचे साफ़ बताया गया है।

एक नज़र में
  • कुल अंक: 100 = सैद्धांतिक 70 (3:15 घंटे) + प्रायोगिक 30
  • इकाइयाँ: 9; बोर्ड ने इकाईवार अंक दिए हैं
  • सबसे ज़्यादा अंक (10-10): रासायनिक आबंधन तथा आणविक संरचना; कार्बनिक रसायन के आधारभूत सिद्धांत
  • 8 अंक की इकाइयाँ: ऊष्मागतिकी, साम्यावस्था, हाइड्रोकार्बन
  • सबसे कम (6-6): मूल अवधारणाएँ और अपचयोपचय अभिक्रियाएँ
  • पुस्तकें: रसायन विज्ञान कक्षा 11 (NCERT) और रसायन विज्ञान प्रयोगशाला मैनुअल कक्षा 11 (NCERT)

आधिकारिक 2026–27 पाठ्यक्रम PDF खोलें — रसायन विज्ञान, पृष्ठ 120–126 ↗

रसायन विज्ञान · कक्षा 11 · 2026–27
बोर्डमाध्यमिक शिक्षा बोर्ड, राजस्थान, अजमेर
सत्र2026–2027
विषय / कोडरसायन विज्ञान (Chemistry) / 41
सैद्धांतिक70 अंक · 3:15 घंटे
प्रायोगिक30 अंक · 4:00 घंटे (PDF की परीक्षा-योजना तालिका के अनुसार)
पूर्णांक100
इकाइयाँ9
निर्धारित पुस्तकेंरसायन विज्ञान कक्षा 11; रसायन विज्ञान प्रयोगशाला मैनुअल कक्षा 11 (NCERT)
विषय-सूची

इकाईवार अंक विभाजन (सैद्धांतिक 70 अंक)

परीक्षासमय (घंटे)प्रश्न पत्र के लिए अंक
सैद्धांतिक3:1570
प्रायोगिक4:0030
कुल100

बोर्ड ने 9 इकाइयाँ और उनके अंक इस प्रकार दिए हैं:

इकाईनामUnitअंक
1रसायन विज्ञान की कुछ मूल अवधारणाएँSome Basic Concepts of Chemistry6
2परमाणु की संरचनाStructure of the Atom7
3तत्वों का वर्गीकरण एवं गुणधर्मों में आवर्तिताClassification of Elements and Periodicity in Properties7
4रासायनिक आबंधन तथा आणविक संरचनाChemical Bonding and Molecular Structure10
5ऊष्मागतिकीThermodynamics8
6साम्यावस्थाEquilibrium8
7अपचयोपचय अभिक्रियाएँRedox Reactions6
8कार्बनिक रसायन: कुछ आधारभूत सिद्धांत तथा तकनीकेंOrganic Chemistry: Some Basic Principles and Techniques10
9हाइड्रोकार्बनHydrocarbons8
कुल70
6
7
7
10
8
8
6
10
8
पट्टी के खाने इकाई 1 से 9 के क्रम में हैं; संख्या = अंक (कुल 70)।

अंकों के क्रम से पढ़ें

अंकइकाइयाँजोड़
10रासायनिक आबंधन; कार्बनिक रसायन के आधारभूत सिद्धांत20
8ऊष्मागतिकी; साम्यावस्था; हाइड्रोकार्बन24
7परमाणु की संरचना; तत्वों का वर्गीकरण14
6मूल अवधारणाएँ; अपचयोपचय अभिक्रियाएँ12
कुल70

सबसे बड़ी दो इकाइयाँ मिलकर 20 अंक (70 का लगभग 29%) की हैं। फिर भी बाकी सात इकाइयाँ 50 अंक की हैं, इसलिए किसी इकाई को छोड़ना जोखिम भरा है।

शाखा के अनुसार अंक-भार

नीचे इकाइयों को रसायन की तीन शाखाओं में बाँटा गया है। यह वर्गीकरण तैयारी की सुविधा के लिए मेरा है, बोर्ड का नहीं, पर अंक बोर्ड की तालिका से जोड़े गए हैं।

शाखाइकाइयाँजोड़ (अंक)
भौतिक रसायन1 (6), 2 (7), 5 (8), 6 (8), 7 (6)35
अकार्बनिक रसायन3 (7), 4 (10)17
कार्बनिक रसायन8 (10), 9 (8)18
कुल70
  • 70 में से 35 अंक (आधे) भौतिक रसायन के हैं, और इसमें संख्यात्मक प्रश्न आते हैं। सूत्र और गणना का अभ्यास सबसे ज़्यादा काम आएगा।
  • अकार्बनिक (17) में अवधारणाएँ और प्रवृत्तियाँ (trends) याद रखनी होती हैं।
  • कार्बनिक (18) में नामकरण, अभिक्रिया-क्रियाविधि और अभिक्रियाओं का अभ्यास चाहिए।

समय-प्रबंधन

सैद्धांतिक प्रश्न पत्र के लिए 195 मिनट हैं। नीचे का बँटवारा सुझाव है:

शाखाअंकसुझाया समय (मिनट)
भौतिक रसायन35100
अकार्बनिक रसायन1745
कार्बनिक रसायन1840
दोहराव और जाँच—10
कुल70195

PDF में प्रश्नों के प्रकार (objective, short, long) और उनके अंक नहीं दिए गए हैं, इसलिए प्रश्न-पत्र की संरचना के लिए विद्यालय में मिले नमूना पत्र देखें।

PDF की जाँच: जिन बातों की पुष्टि करें

PDF को ध्यान से पढ़ने पर प्रायोगिक भाग की अंक-योजना दो अलग रूपों में मिली। दोनों का जोड़ 30 है, पर अलग-अलग घटकों के अंक एक जैसे नहीं हैं। इसका मतलब यह नहीं कि कोई गलत है; मतलब यह है कि अपने विद्यालय या परीक्षा-केंद्र से पक्का करना चाहिए कि किस वितरण से परीक्षा होगी।

घटकअंक-तालिका (पृष्ठ 123–124)विवरण-भाग (पृष्ठ 125–126)
A–E: परिचय, मूलभूत तकनीकें, शुद्धिकरण, रासायनिक साम्य, pH4 (एक साथ)4 (एक साथ)
F: अनुमापनमितीय विश्लेषण86
G: क्रमबद्ध गुणात्मक विश्लेषण66
H: कार्बनिक यौगिक में N, S, हैलोजन की जाँच23
I: परियोजनाएँ43
J: अभिलेख (Record)34
K: मौखिक परीक्षा (Viva)34
कुल3030
  • PDF की परीक्षा-योजना तालिका में प्रायोगिक का समय 4:00 घंटे लिखा है। सैद्धांतिक का समय 3:15 घंटे है।
  • परियोजनाएँ: हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों सूचियों में 8-8 हैं, यहाँ कोई अंतर नहीं मिला।
  • अंकों के अंतर के कारण नीचे प्रायोगिक भाग में दोनों वितरण साथ-साथ दिए गए हैं। तैयारी हर घटक की करें, ताकि किसी भी वितरण में अंक न छूटें।

भौतिक रसायन (इकाई 1, 2, 5, 6, 7; 35 अंक)

हर इकाई में पहले PDF के अनुसार विषय-बिंदु हैं, फिर मुख्य सूत्र और हल किए हुए उदाहरण। उदाहरणों में N_A = 6.022 × 10²³ mol⁻¹ और R = 8.314 J/mol·K लिया गया है।

इकाई 1: रसायन विज्ञान की कुछ मूल अवधारणाएँ (6 अंक)

PDF के विषय: रसायन विज्ञान का विकास और महत्व; द्रव्य की प्रकृति (अवस्थाएँ और वर्गीकरण); द्रव्य के गुणधर्म और उनका मापन (SI पद्धति, द्रव्यमान, आयतन, घनत्व, ताप); मापन में अनिश्चितता (वैज्ञानिक संकेतन, गणितीय संक्रियाएँ, सार्थक अंक, विमीय विश्लेषण); रासायनिक संयोजन के नियम (द्रव्यमान संरक्षण, निश्चित अनुपात, गुणित अनुपात, गे-लुसाक का गैसीय आयतन नियम, आवोगाद्रो नियम); डाल्टन का परमाणु सिद्धांत; परमाणु और आणविक द्रव्यमान; मोल-संकल्पना और मोलर द्रव्यमान; प्रतिशत संघटन; मूलानुपाती और अणुसूत्र; रससमीकरणमिति और उससे गणनाएँ; रासायनिक अभिक्रियाएँ (W/W %, मोल अंश, मोलरता, मोललता)।

  • मोल: n = द्रव्यमान ÷ मोलर द्रव्यमान = कणों की संख्या ÷ N_A।
  • मोलरता (M) = विलेय के मोल ÷ विलयन का आयतन (L); मोललता (m) = विलेय के मोल ÷ विलायक का द्रव्यमान (kg); मोल अंश x_A = n_A ÷ (कुल मोल)। मोलरता ताप के साथ बदल सकती है, पर मोललता नहीं।
  • प्रतिशत संघटन = (तत्व का द्रव्यमान ÷ यौगिक का द्रव्यमान) × 100।
  • मूलानुपाती सूत्र: प्रतिशत → मोल → सबसे छोटे मान से भाग → सरल पूर्ण अनुपात। अणुसूत्र = मूलानुपाती सूत्र × n, जहाँ n = अणुभार ÷ मूलानुपाती सूत्र का भार।
  • नियम: द्रव्यमान संरक्षण (अभिक्रिया में कुल द्रव्यमान स्थिर), निश्चित अनुपात (एक यौगिक में तत्वों का द्रव्यमान-अनुपात निश्चित), गुणित अनुपात, गे-लुसाक का नियम और आवोगाद्रो नियम (समान ताप-दाब पर समान आयतन में समान अणु)।
हल किए हुए उदाहरण
मोल: 36 g जल (M = 18 g/mol) = 2 mol → अणुओं की संख्या = 2 × 6.022 × 10²³ = 1.204 × 10²⁴
मोलरता: 4 g NaOH (M = 40) को 500 mL विलयन में: n = 0.1 mol → M = 0.1 ÷ 0.5 = 0.2 mol/L
मोललता: वही 4 g NaOH 250 g जल में: m = 0.1 ÷ 0.25 = 0.4 mol/kg
मोल अंश: 36 g जल (2 mol) + 46 g एथेनॉल (1 mol): x(जल) = 2 ÷ 3 = 0.667
मूलानुपाती सूत्र: C = 40%, H = 6.67%, O = 53.33% → मोल: 3.33 : 6.67 : 3.33 → अनुपात 1 : 2 : 1 → CH₂O; अणुभार 180 हो तो n = 180 ÷ 30 = 6 → अणुसूत्र C₆H₁₂O₆
प्रतिशत संघटन (जल): H = 2 ÷ 18 × 100 = 11.11%, O = 16 ÷ 18 × 100 = 88.89%
रससमीकरणमिति: 2H₂ + O₂ → 2H₂O: 4 g H₂ (2 mol) को 1 mol O₂ (32 g) चाहिए और 2 mol (36 g) जल बनता है। 4 + 32 = 36, यानी द्रव्यमान संरक्षित है।

इकाई 2: परमाणु की संरचना (7 अंक)

PDF के विषय: अवपरमाणुक कणों की खोज (इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन, न्यूट्रॉन); परमाणु मॉडल और उनकी सीमाएँ (थॉमसन, रदरफ़ोर्ड, बोर); परमाणु संख्या और द्रव्यमान संख्या, समस्थानिक, समभारिक; परमाणवीय स्पेक्ट्रम; हाइड्रोजन परमाणु के लिए बोर मॉडल; हाइड्रोजन के रेखा स्पेक्ट्रम की व्याख्या; परमाणु के क्वांटम यांत्रिकीय मॉडल की ओर (विद्युत-चुंबकीय विकिरण का द्वैत व्यवहार, द्रव्य का द्वैत व्यवहार और हाइज़ेनबर्ग का अनिश्चितता सिद्धांत); कक्षक और क्वांटम संख्याएँ; कक्षकों की आकृतियाँ; कक्षकों में इलेक्ट्रॉन भरने के नियम (ऑफ़बाऊ, पाउली का अपवर्जन सिद्धांत, हुंड का अधिकतम बहुलता नियम); परमाणुओं का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास; अर्धपूरित और पूर्णपूरित उप-कोशों का स्थायित्व।

  • संख्याएँ: द्रव्यमान संख्या A = प्रोटॉन (Z) + न्यूट्रॉन; समस्थानिकों में Z समान और A अलग; समभारिकों में A समान और Z अलग।
  • प्लांक: E = hν; c = νλ।
  • बोर मॉडल (हाइड्रोजन): E_n = −13.6 ÷ n² eV (= −2.18 × 10⁻¹⁸ ÷ n² J); r_n = 52.9 n² ÷ Z pm।
  • रिडबर्ग सूत्र: 1/λ = R_H (1/n₁² − 1/n₂²), R_H = 1.097 × 10⁷ m⁻¹। n₁ = 1 लाइमन, 2 बामर, 3 पाशन श्रेणी।
  • डी ब्रॉग्ली: λ = h ÷ mv। हाइज़ेनबर्ग: Δx · Δp ≥ h ÷ 4π।
  • क्वांटम संख्याएँ: n = 1, 2, 3…; l = 0 से (n − 1) तक; m_l = −l से +l तक; m_s = +½ या −½। किसी उप-कोश में कक्षकों की संख्या = 2l + 1; कोश में अधिकतम इलेक्ट्रॉन = 2n²।
  • भरने के नियम: ऑफ़बाऊ (कम ऊर्जा के कक्षक पहले), पाउली (एक कक्षक में अधिकतम दो इलेक्ट्रॉन, विपरीत प्रचक्रण), हुंड (समान ऊर्जा के कक्षकों में पहले एक-एक इलेक्ट्रॉन)।
  • अपवाद: Cr = [Ar] 3d⁵ 4s¹ और Cu = [Ar] 3d¹⁰ 4s¹; अर्धपूरित और पूर्णपूरित उप-कोश अधिक स्थायी होते हैं।
हल किए हुए उदाहरण
बोर ऊर्जा: n = 2 में E = −13.6 ÷ 4 = −3.4 eV
लाइमन श्रेणी की पहली रेखा (2 → 1): 1/λ = 1.097 × 10⁷ × (1 − ¼) = 8.23 × 10⁶ m⁻¹ → λ ≈ 121.6 nm
बामर श्रेणी की पहली रेखा (3 → 2): 1/λ = 1.097 × 10⁷ × (¼ − 1/9) = 1.52 × 10⁶ m⁻¹ → λ ≈ 656 nm
क्वांटम संख्याएँ: n = 3 कोश में अधिकतम 2 × 9 = 18 इलेक्ट्रॉन; 3d (l = 2) में 2l + 1 = 5 कक्षक और 10 इलेक्ट्रॉन।
कणों की गिनती: ³⁵₁₇Cl में प्रोटॉन 17, न्यूट्रॉन 35 − 17 = 18।
डी ब्रॉग्ली: 10⁶ m/s वेग वाले इलेक्ट्रॉन (m = 9.109 × 10⁻³¹ kg) का λ = 6.626 × 10⁻³⁴ ÷ (9.109 × 10⁻³¹ × 10⁶) ≈ 7.27 × 10⁻¹⁰ m

इकाई 5: ऊष्मागतिकी (8 अंक)

PDF के विषय: ऊष्मागतिकी के तकनीकी शब्द; निकाय और परिवेश की अवधारणा; ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम और अनुप्रयोग (कार्य, एन्थैल्पी); विस्तारी और गहन गुण; ऊष्मा धारिता; आदर्श गैस के लिए Cp और Cv का संबंध; मापन (कैलोरीमिति); अभिक्रिया की एन्थैल्पी परिवर्तन; हेस का नियम; विभिन्न अभिक्रियाओं की एन्थैल्पी (दहन, परमाणुकरण, प्रावस्था परिवर्तन); आबंध एन्थैल्पी; विलयन और तनुकरण की एन्थैल्पी; जालक एन्थैल्पी; स्वतः प्रवर्तिता; एन्ट्रॉपी और स्वतः प्रवर्तिता; गिब्स ऊर्जा और स्वतः प्रवर्तिता; द्वितीय और तृतीय नियम; गिब्स ऊर्जा परिवर्तन और साम्य।

  • प्रथम नियम (IUPAC चिह्न): ΔU = q + w; निकाय पर किया गया कार्य धनात्मक, निकाय द्वारा किया गया कार्य ऋणात्मक। दाब-आयतन कार्य w = −p_ext ΔV।
  • एन्थैल्पी: H = U + pV; ΔH = ΔU + Δn_g RT (Δn_g = गैसीय उत्पादों के मोल − गैसीय अभिकारकों के मोल)।
  • ऊष्मा धारिता: q = mcΔT; आदर्श गैस के लिए C_p − C_v = R (प्रति मोल)।
  • हेस का नियम: अभिक्रिया की कुल एन्थैल्पी परिवर्तन केवल प्रारंभिक और अंतिम अवस्थाओं पर निर्भर है, मार्ग पर नहीं।
  • गिब्स ऊर्जा: ΔG = ΔH − TΔS; ΔG < 0 तो अभिक्रिया स्वतः प्रवर्तित; ΔG° = −2.303 RT log K।
  • द्वितीय नियम: स्वतः प्रक्रम में विश्व की एन्ट्रॉपी बढ़ती है। तृतीय नियम: परम शून्य ताप पर पूर्ण क्रिस्टल की एन्ट्रॉपी शून्य होती है।
हल किए हुए उदाहरण
प्रथम नियम: q = +100 J, w = −40 J (निकाय ने कार्य किया) → ΔU = 100 − 40 = 60 J
ΔH और ΔU: N₂ + 3H₂ → 2NH₃, Δn_g = 2 − 4 = −2; ΔU = −90 kJ (298 K) हो तो ΔH = −90 + (−2)(8.314 × 10⁻³)(298) = −90 − 4.96 = −94.96 kJ
हेस का नियम: C + O₂ → CO₂ (ΔH = −393.5 kJ) और CO + ½O₂ → CO₂ (ΔH = −283.0 kJ) → C + ½O₂ → CO: ΔH = −393.5 − (−283.0) = −110.5 kJ
गिब्स ऊर्जा: ΔH = −40 kJ, ΔS = −100 J/K, T = 300 K: ΔG = −40000 − 300(−100) = −10000 J → स्वतः प्रवर्तित
ΔH = +30 kJ और ΔS = +100 J/K हो तो ΔG = 0 पर T = 30000 ÷ 100 = 300 K; इससे ऊँचे ताप पर अभिक्रिया स्वतः प्रवर्तित होगी।
कैलोरीमिति: 100 g जल का ताप 10°C बढ़ाने में q = 100 × 4.18 × 10 = 4180 J

इकाई 6: साम्यावस्था (8 अंक)

PDF के विषय: भौतिक प्रक्रमों में साम्य; रासायनिक प्रक्रमों में साम्य — गतिक साम्य; रासायनिक साम्य का नियम और साम्य स्थिरांक; समांग और विषमांग साम्य; साम्य स्थिरांक के अनुप्रयोग; K, अभिक्रिया भागफल Q और गिब्स ऊर्जा G में संबंध; साम्य को प्रभावित करने वाले कारक; विलयन में आयनिक साम्य; अम्ल, क्षारक और लवण; अम्लों और क्षारकों का आयनन; बफ़र विलयन; अल्प विलेय लवणों की विलेयता साम्य।

  • साम्य स्थिरांक: aA + bB ⇌ cC + dD के लिए K_c = [C]^c [D]^d ÷ ([A]^a [B]^b); ठोस और शुद्ध द्रव को व्यंजक में नहीं लिखते।
  • K_p और K_c: K_p = K_c (RT)^Δn।
  • Q और K: Q < K तो अभिक्रिया अग्र दिशा में, Q > K तो पश्च दिशा में, Q = K तो साम्य।
  • ली-शातेलिए सिद्धांत: साम्य पर किसी कारक (सांद्रता, दाब, ताप) का परिवर्तन होने पर साम्य उस परिवर्तन के प्रभाव को घटाने की दिशा में खिसकता है। उत्प्रेरक साम्य की स्थिति नहीं बदलता, केवल साम्य जल्दी पहुँचाता है।
  • pH: pH = −log[H⁺]; 25°C पर K_w = [H⁺][OH⁻] = 10⁻¹⁴ और pH + pOH = 14।
  • दुर्बल अम्ल (α बहुत छोटा होने पर सन्निकट सूत्र): [H⁺] = √(K_a C), आयनन की मात्रा α = √(K_a ÷ C)।
  • बफ़र (हेंडरसन): pH = pK_a + log([लवण] ÷ [अम्ल])।
  • विलेयता गुणनफल: AB प्रकार के लवण के लिए K_sp = s²; AB₂ के लिए K_sp = 4s³। सम-आयन प्रभाव से विलेयता घटती है।
हल किए हुए उदाहरण
K_c: N₂ + 3H₂ ⇌ 2NH₃ में साम्य पर [N₂] = 0.5, [H₂] = 1.0, [NH₃] = 2.0 mol/L → K_c = 2² ÷ (0.5 × 1³) = 8। यदि किसी क्षण Q = 5 हो, तो Q < K, इसलिए अभिक्रिया अग्र दिशा में बढ़ेगी।
pH: 0.001 M HCl का pH = 3; 0.01 M NaOH का pOH = 2, इसलिए pH = 12
दुर्बल अम्ल: 0.1 M CH₃COOH (K_a = 1.8 × 10⁻⁵): [H⁺] = √(1.8 × 10⁻⁶) = 1.34 × 10⁻³ M → pH = 2.87; α = 1.34 × 10⁻³ ÷ 0.1 = 1.34%
बफ़र: pK_a = 4.74 और [लवण] = [अम्ल] हो तो pH = 4.74; अनुपात 10 : 1 हो तो pH = 5.74
K_sp: AgCl (K_sp = 1.8 × 10⁻¹⁰): s = √(1.8 × 10⁻¹⁰) = 1.34 × 10⁻⁵ mol/L

इकाई 7: अपचयोपचय अभिक्रियाएँ (6 अंक)

PDF के विषय: अपचयोपचय अभिक्रियाओं के परंपरागत विचार — उपचयन और अपचयन अभिक्रियाएँ; इलेक्ट्रॉन स्थानांतरण के रूप में अपचयोपचय अभिक्रियाएँ; उपचयन संख्या; अपचयोपचय अभिक्रियाएँ और इलेक्ट्रोड प्रक्रम।

  • उपचयन: इलेक्ट्रॉन का त्याग (उपचयन संख्या बढ़ना); अपचयन: इलेक्ट्रॉन का ग्रहण (उपचयन संख्या घटना)। (OIL RIG)।
  • उपचायक स्वयं अपचयित होता है और अपचायक स्वयं उपचयित।
  • उपचयन संख्या के नियम: मुक्त तत्व का 0; सरल आयन का उसका आवेश; यौगिक में कुल योग शून्य (आयन में आवेश के बराबर); H सामान्यतः +1, O सामान्यतः −2।
  • संतुलन: उपचयन-संख्या विधि या आयन-इलेक्ट्रॉन विधि; दोनों ओर परमाणु और आवेश बराबर होने चाहिए।
हल किए हुए उदाहरण
उपचयन संख्या: KMnO₄ में Mn = +7; K₂Cr₂O₇ में Cr = +6; H₂SO₄ में S = +6।
पहचान: Zn + Cu²⁺ → Zn²⁺ + Cu में Zn उपचयित (0 → +2) और अपचायक है; Cu²⁺ अपचयित (+2 → 0) और उपचायक है।
संतुलित अभिक्रिया: MnO₄⁻ + 5Fe²⁺ + 8H⁺ → Mn²⁺ + 5Fe³⁺ + 4H₂O। जाँच: आवेश बाईं ओर −1 + 10 + 8 = +17 और दाईं ओर +2 + 15 = +17; H और O भी बराबर।

अकार्बनिक रसायन (इकाई 3, 4; 17 अंक)

इकाई 3: तत्वों का वर्गीकरण एवं गुणधर्मों में आवर्तिता (7 अंक)

PDF के विषय: वर्गीकरण की आवश्यकता; आवर्त सारणी के विकास का संक्षिप्त इतिहास; आधुनिक आवर्त नियम और आवर्त सारणी का वर्तमान स्वरूप; 100 से अधिक परमाणु क्रमांक वाले तत्वों का नामकरण; तत्वों का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास और आवर्त सारणी; तत्वों के प्रकार — s-, p-, d-, f- ब्लॉक, धातुएँ, अधातुएँ और उपधातुएँ; भौतिक गुणधर्मों में आवर्तिता (परमाणु त्रिज्या, आयनिक त्रिज्या, आयनन एन्थैल्पी, इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी, विद्युत ऋणात्मकता); रासायनिक गुणधर्मों में आवर्तिता (संयोजकता, द्वितीय आवर्त के तत्वों के गुणों में असंगतता, रासायनिक अभिक्रियाशीलता)।

गुणधर्मआवर्त में बाएँ से दाएँवर्ग में ऊपर से नीचे
परमाणु त्रिज्याघटती है (नाभिकीय आवेश बढ़ता है)बढ़ती है (कोश बढ़ते हैं)
आयनन एन्थैल्पीसामान्यतः बढ़ती हैघटती है
इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पीसामान्यतः अधिक ऋणात्मकसामान्यतः कम ऋणात्मक
विद्युत ऋणात्मकताबढ़ती हैघटती है
धात्विक गुणघटता हैबढ़ता है
  • अपवाद: आयनन एन्थैल्पी में Be > B और N > O (पूर्णपूरित और अर्धपूरित उप-कोश के कारण)। इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी में Cl की मात्रा F से अधिक ऋणात्मक है।
  • आयनिक त्रिज्या: धनायन अपने परमाणु से छोटा और ऋणायन अपने परमाणु से बड़ा होता है।
  • द्वितीय आवर्त के असंगत गुण: इस आवर्त के पहले तत्व अपने वर्ग के बाकी तत्वों से कुछ भिन्न व्यवहार करते हैं (जैसे छोटा आकार, उच्च विद्युत ऋणात्मकता, d कक्षकों का अभाव)।
  • IUPAC नामकरण (Z > 100): अंकों के मूल: 0 = nil, 1 = un, 2 = bi, 3 = tri, 4 = quad, 5 = pent, 6 = hex, 7 = sept, 8 = oct, 9 = enn; अंत में 'ium'।
हल किए हुए उदाहरण
नामकरण: Z = 101 → un + nil + un + ium = Unnilunium (Unu); Z = 120 → un + bi + nil + ium = Unbinilium (Ubn)।
स्थान पहचानना: विन्यास [Ne] 3s² 3p⁵ → तीसरा आवर्त, वर्ग 17, p-ब्लॉक (क्लोरीन)।
तुलना: Na, Mg, Al में परमाणु त्रिज्या का क्रम Na > Mg > Al (एक ही आवर्त में नाभिकीय आवेश बढ़ने से)।

इकाई 4: रासायनिक आबंधन तथा आणविक संरचना (10 अंक)

PDF के विषय: रासायनिक आबंधन की कॉसेल-लूइस अवधारणा; अष्टक नियम और उसकी सीमाएँ; सहसंयोजी आबंध; आयनिक या वैद्युत संयोजी आबंध; औपचारिक आवेश; आबंध प्राचल (आबंध लंबाई, आबंध कोण, आबंध एन्थैल्पी, आबंध कोटि, अनुनाद संरचनाएँ, आबंधों की ध्रुवीयता, फ़ाजान्स नियम); संयोजकता कोश इलेक्ट्रॉन युग्म प्रतिकर्षण (VSEPR) सिद्धांत; संयोजकता आबंध सिद्धांत; संकरण; आणविक कक्षक सिद्धांत; कुछ समनाभिकीय द्विपरमाणुक अणुओं में आबंधन; हाइड्रोजन आबंधन।

  • औपचारिक आवेश = (संयोजक इलेक्ट्रॉन) − (अनाबंधी इलेक्ट्रॉन) − ½ (आबंधी इलेक्ट्रॉन)।
  • द्विध्रुव आघूर्ण: μ = q × d। सममित अणुओं (जैसे CO₂) में ध्रुवीय आबंध होने पर भी कुल द्विध्रुव आघूर्ण शून्य हो सकता है।
  • फ़ाजान्स नियम: छोटा धनायन, बड़ा ऋणायन और अधिक आवेश से सहसंयोजी लक्षण बढ़ता है।
  • आणविक कक्षक सिद्धांत: आबंध कोटि = ½ (N_b − N_a), जहाँ N_b आबंधी और N_a प्रतिआबंधी कक्षकों के इलेक्ट्रॉन हैं। आबंध कोटि जितनी अधिक, आबंध उतना मज़बूत और छोटा।
  • हाइड्रोजन आबंधन: अंतराआण्विक (जैसे जल, HF) और अंतःआण्विक (जैसे o-नाइट्रोफ़ीनॉल)।
इलेक्ट्रॉन युग्म (आबंधी + एकाकी)ज्यामितिसंकरणउदाहरण
2 + 0रैखिक (180°)spBeCl₂
3 + 0त्रिकोणीय समतलीय (120°)sp²BF₃
4 + 0चतुष्फलकीय (109.5°)sp³CH₄
3 + 1त्रिकोणीय पिरामिडीsp³NH₃
2 + 2कोणीय (V-आकार)sp³H₂O
5 + 0त्रिकोणीय द्विपिरामिडीsp³dPCl₅
6 + 0अष्टफलकीयsp³d²SF₆
हल किए हुए उदाहरण
औपचारिक आवेश: NH₄⁺ में N: 5 − 0 − ½(8) = +1।
आबंध कोटि: N₂ में 10 आबंधी और 4 प्रतिआबंधी इलेक्ट्रॉन → ½(10 − 4) = 3; O₂ में ½(10 − 6) = 2; N₂⁺ में ½(9 − 4) = 2.5 (सभी इलेक्ट्रॉन गिनकर, जैसा NCERT में किया गया है)।
आकृति: जल में 2 आबंधी युग्म और 2 एकाकी युग्म हैं, इसलिए आकृति कोणीय है और H–O–H कोण 109.5° से कम (लगभग 104.5°) है, क्योंकि एकाकी युग्म आबंधी युग्मों को अधिक प्रतिकर्षित करते हैं।

कार्बनिक रसायन (इकाई 8, 9; 18 अंक)

इकाई 8: कार्बनिक रसायन: कुछ आधारभूत सिद्धांत तथा तकनीकें (10 अंक)

PDF के विषय: सामान्य प्रस्तावना; कार्बन की चतुःसंयोजकता — कार्बनिक यौगिकों की आकृतियाँ; कार्बनिक यौगिकों का संरचनात्मक निरूपण; कार्बनिक यौगिकों का वर्गीकरण; कार्बनिक यौगिकों की नाम पद्धति; समावयवता; कार्बनिक अभिक्रियाओं की क्रियाविधि में मूलभूत संकल्पनाएँ; कार्बनिक यौगिकों के शोधन की विधियाँ; कार्बनिक यौगिकों का गुणात्मक विश्लेषण; मात्रात्मक विश्लेषण।

  • संरचनात्मक निरूपण: पूर्ण, संघनित और आबंध-रेखा (bond-line) सूत्र।
  • IUPAC नामकरण: सबसे लंबी सतत शृंखला चुनें → प्रतिस्थापियों की स्थिति सबसे छोटी संख्या से दें → वर्णानुक्रम में नाम लिखें। जैसे CH₃CH₂CH(CH₃)CH₃ का नाम 2-मेथिलब्यूटेन है।
  • समावयवता: संरचनात्मक (शृंखला, स्थिति, प्रकार्यात्मक समूह, मध्यावयवता) और त्रिविम समावयवता (ज्यामितीय और प्रकाशिक)।
  • क्रियाविधि: सहसंयोजी आबंध का समांश विखंडन (मुक्त मूलक बनते हैं) और विषमांश विखंडन (कार्बधनायन या कार्बऋणायन)। नाभिकस्नेही इलेक्ट्रॉन-युग्म देते हैं और इलेक्ट्रॉनस्नेही इलेक्ट्रॉन-युग्म लेते हैं। प्रेरणिक, अनुनादी, इलेक्ट्रोमेरी प्रभाव और अतिसंयुग्मन; अभिक्रिया के प्रकार: प्रतिस्थापन, योग, विलोपन, पुनर्विन्यास।
  • शोधन: क्रिस्टलन, ऊर्ध्वपातन, आसवन (प्रभाजी, निर्वात, भाप), विभेदी निष्कर्षण, क्रोमैटोग्राफ़ी।
  • गुणात्मक विश्लेषण (लासे परीक्षण): N → प्रशियन नीला रंग (Fe₄[Fe(CN)₆]₃); S → लेड ऐसीटेट से काला PbS; हैलोजन → HNO₃ से अम्लीकृत करके AgNO₃ मिलाने पर अवक्षेप (AgCl श्वेत, AgBr हल्का पीला, AgI पीला)।
  • मात्रात्मक विश्लेषण: C और H की मात्रा (CO₂ और H₂O से), N की मात्रा — ड्यूमा और कजेल्डाल विधि, हैलोजन — कैरियस विधि।
हल किए हुए उदाहरण
समावयवी: C₄H₁₀ के 2 (ब्यूटेन और 2-मेथिलप्रोपेन) और C₅H₁₂ के 3 शृंखला समावयवी होते हैं।
ड्यूमा विधि: % N = 28 × V × 100 ÷ (22400 × m), जहाँ V = STP पर N₂ का आयतन (mL) और m = यौगिक का द्रव्यमान (g)। 0.3 g यौगिक से STP पर 31.7 mL N₂ मिले → % N = 28 × 31.7 × 100 ÷ (22400 × 0.3) = 13.2%
कजेल्डाल विधि: % N = 1.4 × N × V ÷ m, जहाँ N = अम्ल की नॉर्मलता, V = उदासीन हुए अम्ल का आयतन (mL) और m = यौगिक का द्रव्यमान (g)। 0.5 g यौगिक से बनी अमोनिया ने 0.5 N H₂SO₄ के 20 mL को उदासीन किया → % N = 1.4 × 0.5 × 20 ÷ 0.5 = 28%
कैरियस विधि: 0.15 g यौगिक से 0.287 g AgCl मिला → % Cl = (35.5 ÷ 143.5) × (0.287 ÷ 0.15) × 100 = 47.3%

इकाई 9: हाइड्रोकार्बन (8 अंक)

PDF के विषय: वर्गीकरण; ऐल्केन; ऐल्कीन; ऐल्काइन; ऐरोमैटिक हाइड्रोकार्बन; कैंसरजन्य गुण तथा विषाक्तता।

वर्गसामान्य सूत्रमुख्य अभिक्रियाएँ
ऐल्केनCₙH₂ₙ₊₂मुक्त मूलक हैलोजनीकरण, दहन, समावयवीकरण; सामान्यतः अभिक्रियाशीलता कम
ऐल्कीनCₙH₂ₙयोगात्मक अभिक्रियाएँ: H₂, X₂, HX (मार्कोनीकॉफ़ नियम), जल; ओज़ोनी अपघटन, बहुलकन
ऐल्काइनCₙH₂ₙ₋₂योगात्मक अभिक्रियाएँ; अंतस्थ ऐल्काइन अम्लीय होते हैं (Na या अमोनिया-युक्त AgNO₃ से अभिक्रिया)
बेंज़ीनC₆H₆इलेक्ट्रॉनस्नेही प्रतिस्थापन: नाइट्रोकरण, हैलोजनीकरण, सल्फ़ोनीकरण, फ्रीडेल-क्राफ़्ट्स
  • मार्कोनीकॉफ़ नियम: असममित ऐल्कीन में HX जुड़ने पर H उस कार्बन पर जाता है जिस पर पहले से अधिक H हो।
  • ऐरोमैटिकता (हकल नियम): समतलीय, चक्रीय, संयुग्मित और (4n + 2) π इलेक्ट्रॉनों वाला निकाय ऐरोमैटिक होता है (n = 0, 1, 2…)।
  • बेंज़ीन की संरचना: अनुनाद से सभी C–C आबंध समान लंबाई के होते हैं, और इसीलिए बेंज़ीन योगात्मक अभिक्रियाओं की जगह प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ देता है।
  • कैंसरजन्य गुण: कुछ बहुचक्रीय ऐरोमैटिक हाइड्रोकार्बन (जैसे बेंज़ोपाइरीन) विषाक्त और कैंसरजन्य होते हैं।
हल किए हुए उदाहरण
मार्कोनीकॉफ़: प्रोपीन + HBr → 2-ब्रोमोप्रोपेन (मुख्य उत्पाद)।
दहन: CH₄ + 2O₂ → CO₂ + 2H₂O; C₂H₄ + 3O₂ → 2CO₂ + 2H₂O (परमाणु दोनों ओर बराबर)।
नाइट्रोकरण: C₆H₆ + HNO₃ (सांद्र H₂SO₄ की उपस्थिति में) → नाइट्रोबेंज़ीन + H₂O।
हकल नियम: बेंज़ीन में 6 π इलेक्ट्रॉन हैं, यानी 4n + 2 में n = 1, इसलिए यह ऐरोमैटिक है।

प्रायोगिक परीक्षा (30 अंक)

रसायन विज्ञान में 30 अंक प्रायोगिक के हैं, यानी कुल 100 अंक का 30%। PDF की परीक्षा-योजना तालिका में प्रायोगिक का समय 4:00 घंटे दिया है। प्रायोगिक पाठ्यक्रम के ग्यारह भाग (A से K) हैं:

भागविषय (PDF के अनुसार)
Aपरिचय: प्रयोगशाला में अनुमत और निषिद्ध व्यवहार, विश्लेषण की विधियाँ, मूलभूत उपकरण और क्रियाविधियाँ, अभिकर्मक की बोतलों का प्रहस्तन, तापन युक्तियाँ
Bमूलभूत तकनीकें: काँच की छड़ और नली को काटना, नली को मोड़ना, जेट बनाना, कॉर्क में छेद करना, परखनली/बीकर/फ़्लास्क में विलयन को गर्म करना, निस्यंदन, द्रवों का आयतन मापना, तौलने की तकनीक, ऑक्सेलिक अम्ल का मानक विलयन बनाना
Cशुद्धिकरण और शुद्धता की कसौटी: अशुद्ध नमूने का क्रिस्टलन द्वारा शोधन, ठोस कार्बनिक यौगिक का गलनांक और द्रव कार्बनिक यौगिक का क्वथनांक निर्धारित करना
Dरासायनिक साम्य (विलयन में आयनिक साम्य): फ़ेरिक आयन और थायोसायनेट आयन की अभिक्रिया में साम्य का विस्थापन; [Co(H₂O)₆]²⁺ और Cl⁻ आयनों के बीच अभिक्रिया में साम्य का विस्थापन
EpH और जलीय विलयन में pH परिवर्तन: कुछ फलों के रस की pH; तनुकरण के साथ अम्ल/क्षार की pH में परिवर्तन; दुर्बल अम्ल और दुर्बल क्षारक के लिए सम-आयन प्रभाव; NaCl, FeCl₃ और Na₂CO₃ के विलयनों की pH
Fअनुमापनमितीय विश्लेषण: अंत्य बिंदु की पहचान; अनुमापन के लिए अभिक्रिया की आवश्यकताएँ; अम्लमिति और क्षारमिति; अम्ल-क्षारक अनुमापन में सूचक; ऑक्सेलिक अम्ल के मानक विलयन से NaOH की सांद्रता (सामर्थ्य) ज्ञात करना; सोडियम कार्बोनेट का मानक विलयन बनाना और उससे तनु HCl की सामर्थ्य ज्ञात करना
Gक्रमबद्ध गुणात्मक विश्लेषण: दिए गए लवण में एक धनायन और एक ऋणायन की पहचान; ऋणायनों और धनायनों का क्रमबद्ध विश्लेषण; धनायनों की पहचान के लिए शुष्क परीक्षण; समूह विश्लेषण (शून्य समूह से VI समूह तक)
Hकार्बनिक यौगिक में नाइट्रोजन, सल्फ़र और हैलोजन का परीक्षण
Iपरियोजनाएँ
J–Kअभिलेख (Record) और मौखिक परीक्षा (Viva-Voce)

PDF में अंकों की दो तालिकाएँ मिली हैं (ऊपर "PDF की जाँच" देखें)। यहाँ हर घटक की तैयारी इस तरह की जाए कि किसी भी वितरण में अंक सुरक्षित रहें:

घटकअंक (तालिका 1 / तालिका 2)तैयारी में क्या करें
A–E: परिचय से pH तक4 / 4सावधानियाँ, उपकरणों के नाम, मानक विलयन बनाना, pH की पहचान और साम्य के विस्थापन का रंग-परिवर्तन
F: अनुमापन8 / 6सूत्र N₁V₁ = N₂V₂, सूचक का चयन, अंत्य बिंदु का रंग और पाठ्यांकों की सारणी
G: लवण विश्लेषण6 / 6ऋणायन के परीक्षण और धनायन समूह-अभिकर्मक का क्रम; शुष्क और आर्द्र परीक्षण
H: कार्बनिक में N, S, हैलोजन2 / 3लासे निस्सारण बनाना और तीनों परीक्षणों के रंग
I: परियोजना4 / 3एक परियोजना का उद्देश्य, विधि, सारणी और निष्कर्ष
J: अभिलेख3 / 4हर प्रयोग का उद्देश्य, सिद्धांत, विधि, अवलोकन, परिणाम और सावधानियाँ
K: मौखिक परीक्षा3 / 4अपने किए हुए प्रयोगों के सिद्धांत और सावधानियाँ
कुल30 / 30

प्रयोगों का सार और सूत्र

अनुमापन (भाग F)

  • अनुमापन का सूत्र: N₁V₁ = N₂V₂ (नॉर्मलता × आयतन)। सामर्थ्य (g/L) = नॉर्मलता × तुल्यांकी द्रव्यमान।
  • NaOH बनाम ऑक्सेलिक अम्ल: सूचक फ़ीनॉल्फ़्थेलीन; अंत्य बिंदु पर रंगहीन से हल्का गुलाबी (या उल्टा, क्रम के अनुसार)। क्रिस्टलीय ऑक्सेलिक अम्ल (H₂C₂O₄·2H₂O, M = 126) का तुल्यांकी द्रव्यमान 63।
  • HCl बनाम Na₂CO₃: सूचक मेथिल ऑरेंज; अंत्य बिंदु पर पीले से हल्का नारंगी-गुलाबी। Na₂CO₃ (M = 106) का तुल्यांकी द्रव्यमान 53।
  • सावधानियाँ: ब्यूरेट को विलयन से धोएँ, नोक में वायु-बुलबुला न रहे, पाठ्यांक विलयन की निचली अर्धचंद्राकार सतह (meniscus) से लें, और कम-से-कम तीन संगत पाठ्यांक लें।
हल किए हुए उदाहरण
ऑक्सेलिक अम्ल का मानक विलयन: 250 mL N/10 के लिए 63 × 0.1 × 0.25 = 1.575 g।
Na₂CO₃ का मानक विलयन: 250 mL M/20 के लिए 106 ÷ 20 × 0.25 = 1.325 g; इसकी मोलरता 0.05 M और नॉर्मलता 0.1 N होती है।
NaOH की सामर्थ्य: 25 mL NaOH को 0.1 N ऑक्सेलिक अम्ल के 20 mL ने उदासीन किया → N = 0.1 × 20 ÷ 25 = 0.08 N → सामर्थ्य = 0.08 × 40 = 3.2 g/L।

गुणात्मक विश्लेषण (भाग G और H)

PDF में धनायनों के लिए समूह शून्य से VI तक का विश्लेषण सूचीबद्ध है। नीचे उसका सामान्य ढाँचा है; विशिष्ट धनायनों और ऋणायनों की सूची और परीक्षण अपनी प्रयोगशाला-पुस्तिका से मिलाएँ।

समूहसमूह अभिकर्मक (सामान्य)प्रतिनिधि धनायन
शून्यNaOH (गर्म करके) / नेस्लर अभिकर्मकNH₄⁺
Iतनु HClPb²⁺
IIतनु HCl की उपस्थिति में H₂SPb²⁺, Cu²⁺, As³⁺
IIINH₄Cl और NH₄OHFe³⁺, Al³⁺
IVNH₄OH की उपस्थिति में H₂SCo²⁺, Ni²⁺, Mn²⁺, Zn²⁺
V(NH₄)₂CO₃ (NH₄Cl और NH₄OH के साथ)Ba²⁺, Sr²⁺, Ca²⁺
VINH₄OH और Na₂HPO₄ (या कोई विशिष्ट परीक्षण)Mg²⁺
  • लासे निस्सारण: कार्बनिक यौगिक को सोडियम धातु के साथ गलाकर जल से निस्सारण लेने पर N, S और हैलोजन आयनिक रूप (CN⁻, S²⁻, X⁻) में आ जाते हैं।
  • नाइट्रोजन: FeSO₄ और फिर अम्लीकरण → प्रशियन नीला रंग। सल्फ़र: लेड ऐसीटेट से काला अवक्षेप। हैलोजन: HNO₃ से अम्लीकृत कर AgNO₃ → अवक्षेप (AgCl श्वेत, AgBr हल्का पीला, AgI पीला)।

साम्य, pH और शुद्धिकरण (भाग C, D, E)

प्रयोगमुख्य प्रेक्षण / सिद्धांत
Fe³⁺ + SCN⁻ ⇌ [Fe(SCN)]²⁺अभिक्रिया का गहरा लाल रंग; अभिकारक की सांद्रता बढ़ाने पर रंग गहरा (साम्य अग्र दिशा में); ली-शातेलिए सिद्धांत
[Co(H₂O)₆]²⁺ + 4Cl⁻ ⇌ [CoCl₄]²⁻ + 6H₂Oगुलाबी से नीला: सांद्र HCl मिलाने पर नीला रंग; जल मिलाने पर पुनः गुलाबी
pH मापनpH पत्र या सार्वत्रिक सूचक से फलों के रस की pH; तनुकरण पर अम्ल की pH बढ़ती और क्षार की घटती है
लवणों की pHNaCl उदासीन (pH ≈ 7), FeCl₃ अम्लीय (pH < 7), Na₂CO₃ क्षारीय (pH > 7) — लवण का जल-अपघटन
क्रिस्टलनअशुद्ध ठोस को गर्म विलायक में घोलकर छानना और ठंडा करके शुद्ध क्रिस्टल प्राप्त करना
गलनांक / क्वथनांकशुद्ध ठोस का गलनांक तीक्ष्ण होता है; अशुद्धि से गलनांक घटता है और परास चौड़ा हो जाता है। शुद्ध द्रव का क्वथनांक स्थिर होता है

परियोजनाएँ

PDF में परियोजनाओं की सूची हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों रूपों में है, और दोनों में 8 विषय हैं:

  1. जल में सल्फ़ाइड आयन की सांद्रता ज्ञात करके जीवाणु द्वारा जल-प्रदूषण का परीक्षण करना और प्रदूषण का कारण जानना
  2. जल शुद्धिकरण की विधियों का अध्ययन
  3. विभिन्न स्थानों के पेयजल में कठोरता, आयरन, फ़्लुओराइड, क्लोराइड आदि की उपस्थिति की जाँच और अनुमत मात्रा से अधिक होने का कारण
  4. विभिन्न साबुनों की झाग बनाने की क्षमता और उस पर सोडियम कार्बोनेट मिलाने का प्रभाव
  5. चाय की पत्तियों के विभिन्न नमूनों की अम्लीयता और चाय के रंग में अंतर के कारण
  6. विभिन्न द्रवों के वाष्पन की दर का अध्ययन
  7. रेशों की तनन क्षमता पर अम्लों और क्षारों का प्रभाव
  8. सब्ज़ियों और फलों में उपस्थित अम्लों और खनिजों का अध्ययन
परियोजना और अभिलेख में अंक सुरक्षित करें
  • एक परियोजना चुनकर उद्देश्य, सामग्री, विधि, अवलोकन-सारणी और निष्कर्ष तैयार रखें; अवलोकन अपने हाथ से करें।
  • अभिलेख में हर प्रयोग: उद्देश्य → सिद्धांत → उपकरण/अभिकर्मक → विधि → अवलोकन → गणना → परिणाम → सावधानियाँ।
  • मौखिक परीक्षा में अपने किए प्रयोगों से ही प्रश्न आते हैं; इसलिए हर प्रयोग का सिद्धांत और रंग-परिवर्तन समझकर याद रखें।

अभ्यास-प्रश्न (उत्तर सहित)

ये मौलिक अभ्यास-प्रश्न हैं, आधिकारिक प्रश्न नहीं। सभी संख्यात्मक उत्तर दोबारा जाँचे गए हैं।

संख्यात्मक और अभिक्रिया-आधारित प्रश्न

1. 11 g CO₂ (M = 44 g/mol) में कितने मोल हैं?
उत्तर: 11 ÷ 44 = 0.25 mol
2. 9.8 g H₂SO₄ (M = 98) को 500 mL विलयन में घोलने पर मोलरता बताइए।
उत्तर: (9.8 ÷ 98) ÷ 0.5 = 0.2 M
3. किसी हाइड्रोकार्बन में 85.7% C और 14.3% H है। मूलानुपाती सूत्र बताइए।
उत्तर: मोल: C = 7.14, H = 14.3 → अनुपात 1 : 2 → CH₂
4. 3.011 × 10²³ अणु जल का द्रव्यमान निकालिए।
उत्तर: (3.011 × 10²³) ÷ (6.022 × 10²³) = 0.5 mol → 0.5 × 18 = 9 g
5. हाइड्रोजन के n = 3 कोश में इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा बताइए।
उत्तर: −13.6 ÷ 9 = −1.51 eV
6. n = 4 कोश में अधिकतम कितने इलेक्ट्रॉन हो सकते हैं?
उत्तर: 2n² = 2 × 16 = 32
7. 4p कक्षक के लिए n और l के मान बताइए।
उत्तर: n = 4, l = 1
8. Fe (Z = 26) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए।
उत्तर: [Ar] 3d⁶ 4s²
9. O₂⁻ (सुपरऑक्साइड) की आबंध कोटि निकालिए।
उत्तर: N_b = 10, N_a = 7 → ½(10 − 7) = 1.5
10. N₂O₄(g) → 2NO₂(g) में ΔU = 55 kJ (298 K) है। ΔH निकालिए।
उत्तर: Δn_g = 1 → ΔH = 55 + (8.314 × 10⁻³ × 298) = 57.48 kJ
11. ΔH = −100 kJ, ΔS = −200 J/K और T = 500 K हो तो ΔG क्या होगा?
उत्तर: ΔG = −100000 − 500(−200) = 0 → साम्य की स्थिति
12. PCl₅ ⇌ PCl₃ + Cl₂ में साम्य पर [PCl₅] = 0.5, [PCl₃] = [Cl₂] = 0.1 mol/L हो तो K_c निकालिए।
उत्तर: K_c = (0.1 × 0.1) ÷ 0.5 = 0.02
13. 0.05 M H₂SO₄ (पूर्ण आयनन मानकर) का pH बताइए।
उत्तर: [H⁺] = 0.1 M → pH = 1
14. [अम्ल] = 0.2 M, [लवण] = 0.4 M, pK_a = 4.74 वाले बफ़र का pH निकालिए।
उत्तर: pH = 4.74 + log 2 = 5.04
15. Cr₂O₇²⁻ में Cr और HNO₃ में N की उपचयन संख्या बताइए।
उत्तर: Cr = +6; N = +5
16. CH₃–CH₂–CH₂–CH(CH₃)–CH₃ का IUPAC नाम लिखिए।
उत्तर: 2-मेथिलपेन्टेन
17. C₅H₁₂ के कितने संरचनात्मक समावयवी होते हैं?
उत्तर: 3 (पेन्टेन, 2-मेथिलब्यूटेन, 2,2-डाइमेथिलप्रोपेन)
18. 0.4 g यौगिक से STP पर 56 mL N₂ मिली। % N निकालिए।
उत्तर: 28 × 56 × 100 ÷ (22400 × 0.4) = 17.5%
19. 4 कार्बन वाले ऐल्काइन का अणुसूत्र बताइए और एथीन + Br₂ का उत्पाद लिखिए।
उत्तर: C₄H₆; एथीन + Br₂ → 1,2-डाइब्रोमोएथेन
20. 25 mL NaOH को 0.1 N ऑक्सेलिक अम्ल के 20 mL ने उदासीन किया। NaOH की सामर्थ्य निकालिए।
उत्तर: N = 0.1 × 20 ÷ 25 = 0.08 N; सामर्थ्य = 0.08 × 40 = 3.2 g/L
21. 100 mL N/10 ऑक्सेलिक अम्ल (क्रिस्टलीय, तुल्यांकी द्रव्यमान 63) के लिए कितना अम्ल तौलना होगा?
उत्तर: 63 × 0.1 × 0.1 = 0.63 g
22. 250 mL M/20 Na₂CO₃ विलयन के लिए कितना Na₂CO₃ चाहिए?
उत्तर: 106 ÷ 20 × 0.25 = 1.325 g

वैचारिक प्रश्न

23. Be की प्रथम आयनन एन्थैल्पी B से अधिक क्यों होती है?
उत्तर: Be में पूर्णपूरित 2s उप-कोश अधिक स्थायी है, जबकि B में 2p का एक इलेक्ट्रॉन निकालना अपेक्षाकृत आसान है।
24. जल में H–O–H कोण 109.5° से कम क्यों है?
उत्तर: दो एकाकी इलेक्ट्रॉन-युग्म आबंधी युग्मों को अधिक प्रतिकर्षित करते हैं, इसलिए कोण लगभग 104.5° रह जाता है।
25. N₂ + 3H₂ ⇌ 2NH₃ में दाब बढ़ाने पर साम्य किधर खिसकेगा?
उत्तर: अग्र दिशा में, क्योंकि अभिकारकों में गैसीय मोल 4 हैं और उत्पाद में केवल 2। दाब बढ़ने पर साम्य गैसीय मोल घटाने की दिशा में खिसकता है।
26. नाभिकस्नेही और इलेक्ट्रॉनस्नेही में अंतर बताइए।
उत्तर: नाभिकस्नेही इलेक्ट्रॉन-युग्म देता है (जैसे OH⁻), इलेक्ट्रॉनस्नेही इलेक्ट्रॉन-युग्म ग्रहण करता है (जैसे H⁺, NO₂⁺)।
27. बेंज़ीन योगात्मक की जगह प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ क्यों देती है?
उत्तर: अनुनाद से बने स्थायी ऐरोमैटिक π निकाय को बनाए रखने के लिए।
28. अशुद्ध ठोस का गलनांक शुद्ध से कम क्यों मिलता है?
उत्तर: अशुद्धि क्रिस्टल-जालक को कमज़ोर करती है, इसलिए पदार्थ कम ताप पर और चौड़े ताप-परास में गलता है।

8 सप्ताह की तैयारी योजना

यह योजना सैद्धांतिक और प्रायोगिक को साथ चलाने के लिए एक सुझाव है। हर सप्ताह अभिलेख में प्रयोग पूरे करते चलें।

सप्ताहसैद्धांतिक इकाइयाँअंकप्रायोगिक काम
1इकाई 1: मूल अवधारणाएँ6भाग A–B: उपकरण, काँच की नली, निस्यंदन, तौलना
2इकाई 2: परमाणु की संरचना7भाग B: मानक ऑक्सेलिक अम्ल विलयन बनाना
3इकाई 3: आवर्तिता; इकाई 4 की शुरुआत7 (+ इकाई 4 शुरू)भाग C: क्रिस्टलन, गलनांक, क्वथनांक
4इकाई 4 पूरी; इकाई 5: ऊष्मागतिकी10 + 8भाग D: साम्य के प्रयोग
5इकाई 6: साम्यावस्था8भाग E: pH के प्रयोग
6इकाई 7: अपचयोपचय; इकाई 8: कार्बनिक के सिद्धांत6 + 10भाग F: अनुमापन (दोनों)
7इकाई 9: हाइड्रोकार्बन8भाग G–H: लवण विश्लेषण और N, S, हैलोजन; परियोजना
8पूरा नमूना पेपर (3:15 घंटे) और गलतियों का सुधार70अभिलेख पूरा; मौखिक परीक्षा का अभ्यास

आम गलतियाँ और सुधार

हिस्साआम गलतीसुधार
मोल अवधारणामोलरता और मोललता को एक मान लेनामोलरता: विलयन के लीटर में; मोललता: विलायक के किलोग्राम में
परमाणु संरचनाक्वांटम संख्या की सीमाएँ भूलनाl = 0 से (n − 1); m_l = −l से +l
आवर्तिताआयनन एन्थैल्पी के अपवाद छोड़नाBe > B और N > O याद रखें
आबंधनद्विध्रुव आघूर्ण को केवल आबंध-ध्रुवता से जोड़नाअणु की आकृति भी देखें (CO₂ में शून्य)
ऊष्मागतिकीw का चिह्न उलटा लेनाIUPAC: निकाय पर कार्य धनात्मक, निकाय द्वारा कार्य ऋणात्मक
साम्यावस्थाठोस और शुद्ध द्रव को K_c में लिखनाइन्हें व्यंजक में नहीं लिखते
साम्यावस्थाpH निकालते समय [H⁺] की जगह [OH⁻] लगानापहले pOH निकालकर pH = 14 − pOH
रेडॉक्ससंतुलन में आवेश की जाँच भूलनादोनों ओर परमाणु और आवेश दोनों बराबर हों
कार्बनिकनामकरण में गलत शृंखला चुननासबसे लंबी सतत शृंखला पहले चुनें
प्रायोगिकअवलोकन-सारणी में इकाई या पाठ्यांकों के तीन संगत मान न लिखनातीन संगत पाठ्यांक और इकाई लिखें

सामान्य प्रश्न

रसायन विज्ञान में कुल कितने अंक हैं?
100 अंक: सैद्धांतिक 70 (3:15 घंटे) और प्रायोगिक 30 (PDF की परीक्षा-योजना तालिका में 4:00 घंटे)।
सैद्धांतिक भाग में कितनी इकाइयाँ हैं?
9 इकाइयाँ, जिनमें से हर एक का अंक बोर्ड ने दिया है।
किन इकाइयों के सबसे ज़्यादा अंक हैं?
रासायनिक आबंधन तथा आणविक संरचना (इकाई 4) और कार्बनिक रसायन के आधारभूत सिद्धांत (इकाई 8), दोनों के 10-10 अंक।
सबसे कम अंक किन इकाइयों के हैं?
इकाई 1 (मूल अवधारणाएँ) और इकाई 7 (अपचयोपचय), दोनों के 6-6 अंक।
प्रायोगिक के 30 अंक कैसे बँटे हैं?
PDF में दो तालिकाएँ हैं: (1) A–E 4, अनुमापन 8, लवण-विश्लेषण 6, कार्बनिक परीक्षण 2, परियोजना 4, अभिलेख 3, मौखिक 3; (2) A–E 4, अनुमापन 6, लवण-विश्लेषण 6, कार्बनिक परीक्षण 3, परियोजना 3, अभिलेख 4, मौखिक 4। दोनों का जोड़ 30 है; विद्यालय से पक्का करें।
परियोजनाएँ कितनी हैं?
हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों सूचियों में 8 परियोजनाएँ हैं।
क्या सैद्धांतिक में सभी इकाइयाँ पढ़नी होंगी?
हाँ। PDF में हर इकाई के अंक दिए गए हैं और किसी इकाई को हटाने का उल्लेख नहीं है। पाठों के बदलाव के लिए विभागीय निर्देश देखें।
क्या प्रश्नों के प्रकार PDF में दिए हैं?
नहीं। PDF में इकाईवार अंक हैं, पर objective, short या long प्रश्नों का विभाजन नहीं है। विद्यालय के नमूना पत्र देखें।
किस शाखा पर सबसे ज़्यादा अंक हैं?
भौतिक रसायन पर 35, कार्बनिक पर 18 और अकार्बनिक पर 17 अंक (यह वर्गीकरण लेख में सुविधा के लिए किया गया है)।
क्या NCERT के अलावा कोई पुस्तक पढ़नी होगी?
बोर्ड ने निर्धारित पुस्तकें रसायन विज्ञान कक्षा 11 और रसायन विज्ञान प्रयोगशाला मैनुअल कक्षा 11 (NCERT) बताई हैं।
क्या यह पाठ्यक्रम अर्धवार्षिक परीक्षा के लिए भी है?
यह पूरे सत्र का पाठ्यक्रम है। अर्धवार्षिक परीक्षा में कितना भाग आएगा, यह विभागीय निर्देश और विद्यालय से पूछकर पक्का करें।

संदर्भ और पद्धति

  1. माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, राजस्थान, अजमेर: परीक्षा सत्र 2026–2027, विषय: रसायन विज्ञान (Chemistry), विषय कोड-41, कक्षा 11, पृष्ठ 120–126। आधिकारिक PDF ↗

यह लेख कैसे तैयार किया गया

  • बोर्ड के PDF से सीधे लिया गया: परीक्षा योजना (70 + 30), 9 इकाइयों के अंक और विषय-बिंदु, प्रायोगिक पाठ्यक्रम के भाग A–K, दोनों अंक-तालिकाएँ, परियोजनाओं की सूची और निर्धारित पुस्तकें। इकाईवार अंक और प्रायोगिक तालिकाएँ पृष्ठों की तस्वीर में देखकर पक्की की गई हैं।
  • लेखक द्वारा जोड़ा गया (शैक्षिक सामग्री): सूत्र, हल किए हुए उदाहरण, प्रयोगों का सार, अभ्यास-प्रश्न, शाखा-वार वर्गीकरण, समय-प्रबंधन और 8 सप्ताह की योजना। सभी संख्यात्मक उत्तर कोड से दोबारा जाँचे गए हैं।
  • जो नहीं बताया गया: PDF में जो जानकारी नहीं है (प्रश्नों के प्रकार, हटाए गए अंश, विशिष्ट ऋणायन और धनायनों की सूची), उसे तथ्य की तरह नहीं लिखा गया। जहाँ PDF में दो अलग अंक-वितरण मिले, उन्हें साथ-साथ दिया गया है।
सूचना
परीक्षा योजना, इकाईवार अंक और प्रायोगिक पाठ्यक्रम बोर्ड के PDF से लिए गए हैं। सूत्र, उदाहरण, अभ्यास और योजनाएँ शैक्षिक सुझाव हैं। बाद में जारी संशोधन या परीक्षा-निर्देश मिलने पर उनका पालन करें। NCERT Classes एक स्वतंत्र निजी शैक्षिक मंच है और NCERT, CBSE, RBSE या किसी सरकारी संस्था से संबद्ध नहीं है।
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