RBSE 11th Political Science Syllabus 2026-27 | राजनीति विज्ञान

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अंतिम अपडेट: 29 अक्टूबर 2026 · आधार: राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, अजमेर का सत्र 2026–27 पाठ्यक्रम (PDF पृष्ठ 19–24)
यह लेख राजनीति विज्ञान (Political Science), विषय कोड-11 के लिए है। अन्य विषयों के लिए कक्षा 11 पन्ना देखें। इन्हें भी देखें: कक्षा 11 अर्थशास्त्र पाठ्यक्रम 2026-27; कक्षा 11 जीव विज्ञान पाठ्यक्रम 2026-27; कक्षा 11 English पाठ्यक्रम 2026-27; कक्षा 11 हिंदी अनिवार्य पाठ्यक्रम 2026-27।

RBSE कक्षा 11 राजनीति विज्ञान (Political Science, विषय कोड-11) का सत्र 2026–27 का पाठ्यक्रम राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, अजमेर ने जारी किया है। इसमें एक सैद्धांतिक प्रश्न पत्र है, जो 100 अंक का है और 3:15 घंटे का है। पाठ्यक्रम दो भागों में बँटा है: भाग अ — भारत का संविधान: सिद्धांत और व्यवहार (50 अंक, 10 अध्याय) और भाग ब — राजनीतिक सिद्धांत (50 अंक, 8 अध्याय)। बोर्ड ने हर अध्याय के अंक अलग-अलग दिए हैं।

इस लेख में सभी 18 अध्यायों के अंक और विषय-बिंदु, हर अध्याय की मुख्य अवधारणाएँ और तथ्य, तुलना-तालिकाएँ, उत्तर लिखने के ढाँचे, अभ्यास-प्रश्न (उत्तर सहित), 8 सप्ताह की योजना और FAQ हैं। जहाँ बोर्ड का PDF कोई जानकारी नहीं देता (जैसे प्रश्नों के प्रकार), वहाँ वह साफ़ लिखा है।

एक नज़र में
  • कुल अंक: 100 · समय: 3:15 घंटे · प्रश्न पत्र: एक (सैद्धांतिक); प्रायोगिक का उल्लेख PDF में नहीं है
  • भाग अ (संविधान): 50 अंक, अध्याय 1–10 · भाग ब (राजनीतिक सिद्धांत): 50 अंक, अध्याय 11–18
  • सबसे ज़्यादा अंक (7-7): अध्याय 11 (राजनीतिक सिद्धांत: एक परिचय) और अध्याय 18 (धर्मनिरपेक्षता)
  • 6 अंक के अध्याय: अध्याय 2 (भारतीय संविधान में अधिकार), 12, 13, 14, 15, 16 और 17
  • सबसे कम अंक: अध्याय 10 (संविधान का राजनीतिक दर्शन) के 4 अंक
  • पुस्तकें: भारत का संविधान: सिद्धांत और व्यवहार; राजनीतिक सिद्धांत (दोनों NCERT)

आधिकारिक 2026–27 पाठ्यक्रम PDF खोलें — राजनीति विज्ञान, पृष्ठ 19–24 ↗

राजनीति विज्ञान · कक्षा 11 · 2026–27
बोर्डमाध्यमिक शिक्षा बोर्ड, राजस्थान, अजमेर
सत्र2026–2027
विषय / कोडराजनीति विज्ञान (Political Science) / 11
प्रश्न पत्रएक · 3:15 घंटे · 100 अंक
भाग अभारत का संविधान: सिद्धांत और व्यवहार — 50 अंक
भाग बराजनीतिक सिद्धांत — 50 अंक
अध्याय18
निर्धारित पुस्तकेंभारत का संविधान: सिद्धांत और व्यवहार; राजनीतिक सिद्धांत (NCERT)

अध्यायवार अंक विभाजन

प्रश्न पत्रसमय (घंटे)प्रश्न पत्र के लिए अंकपूर्णांक
एक3:15100100

बोर्ड ने दोनों भागों के 18 अध्यायों के अंक इस प्रकार दिए हैं:

भाग अ: भारत का संविधान: सिद्धांत और व्यवहार (50 अंक)

अध्यायनामChapterअंक
1संविधान: क्यों और कैसेConstitution5
2भारतीय संविधान में अधिकारRights in the Indian Constitution6
3चुनाव और प्रतिनिधित्वElection and Representation5
4कार्यपालिकाExecutive5
5विधायिकाLegislature5
6न्यायपालिकाJudiciary5
7संघवादFederalism5
8स्थानीय शासनLocal Government5
9संविधान: एक जीवंत दस्तावेज़Constitution as a Living Document5
10संविधान का राजनीतिक दर्शनThe Philosophy of the Constitution4
जोड़50

भाग ब: राजनीतिक सिद्धांत (50 अंक)

अध्यायनामChapterअंक
11राजनीतिक सिद्धांत: एक परिचयPolitical Theory: An Introduction7
12स्वतंत्रताFreedom6
13समानताEquality6
14सामाजिक न्यायSocial Justice6
15अधिकारRights6
16नागरिकताCitizenship6
17राष्ट्रवादNationalism6
18धर्मनिरपेक्षताSecularism7
जोड़50
5
6
5
5
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5
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4
7
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6
6
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6
7
पट्टी के खाने अध्याय 1 से 18 के क्रम में हैं (शुरू के 10 नीले रंग के भाग अ और बाद के 8 अलग रंगों के भाग ब); संख्या = अंक (कुल 100)।

अंकों के क्रम से पढ़ें

अंकअध्यायजोड़
7अध्याय 11 (राजनीतिक सिद्धांत: एक परिचय) और अध्याय 18 (धर्मनिरपेक्षता)14
6अध्याय 2, 12, 13, 14, 15, 16, 1742
5अध्याय 1, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 940
4अध्याय 10 (संविधान का राजनीतिक दर्शन)4
कुल100
  • दोनों भाग बराबर (50-50) हैं। भाग अ में संस्थाओं (कार्यपालिका, विधायिका, न्यायपालिका आदि) की जानकारी और भाग ब में अवधारणाओं (स्वतंत्रता, समानता, न्याय) की समझ चाहिए।
  • कोई एक अध्याय 7 अंक से ज़्यादा का नहीं है, इसलिए सभी 18 अध्यायों की संतुलित तैयारी ज़रूरी है।
  • 6 अंक वाले सात अध्याय (भाग ब में छह और भाग अ में अध्याय 2) मिलकर 42 अंक के हैं।

समय-प्रबंधन

कुल 195 मिनट हैं, यानी लगभग 1.95 मिनट प्रति अंक। नीचे का बँटवारा सुझाव है:

भागअंकसुझाया समय (मिनट)
भाग अ (अध्याय 1–10)5095
भाग ब (अध्याय 11–18)5090
दोहराव और जाँच—10
कुल100195

PDF में प्रश्नों के प्रकार (objective, short, long) और उनके अंक नहीं दिए गए हैं, इसलिए प्रश्न-पत्र की संरचना के लिए विद्यालय में मिले नमूना पत्र देखें।

PDF की जाँच: जिन बातों की पुष्टि करें

PDF के हिंदी और अंग्रेज़ी भागों को साथ पढ़ने पर ये बातें दिखीं। इनका मतलब यह नहीं कि कुछ हटा या जुड़ा है; मतलब यह है कि अंतिम पुष्टि विद्यालय या बोर्ड के निर्देश से करनी चाहिए।

बातPDF में क्या दिखाक्या करें
प्रायोगिक/परियोजनाPDF में राजनीति विज्ञान के लिए केवल एक प्रश्न पत्र, 100 अंक का, दिया गया है; प्रायोगिक या परियोजना के अंक का उल्लेख नहीं हैविद्यालय से पूछें कि कोई परियोजना कार्य है या नहीं
अध्याय 3: चुनावविषय-बिंदु में "स्वतंत्र निर्वाचन आयोग — विशेष बहुमत" एक साथ लिखा है। विशेष बहुमत की परिभाषा अध्याय 9 (संशोधन) में आती हैदोनों को साथ जोड़कर समझें
अध्याय 6: न्यायपालिकाविषय-बिंदु में "विधिक सेवा दिवस 2018" का उल्लेख हैपुस्तक के संस्करण के अनुसार यह भाग पढ़ें; अपने विद्यालय से पक्का करें
अध्याय 5: विधायिकाविषय-बिंदु में "संसद की स्वयं पर नियंत्रण की विधि" हैपुस्तक में दिए अनुसार (जैसे पीठासीन अधिकारी और दल-बदल कानून) तैयार करें
अध्यायों की संख्याभाग अ में 1–10 और भाग ब में 11–18 क्रमांक दिए गए हैं, यानी कुल 18कोई अंतर नहीं मिला

भाग अ: भारत का संविधान: सिद्धांत और व्यवहार (50 अंक)

यह भाग NCERT की पुस्तक Indian Constitution at Work पर आधारित है। इसमें 10 अध्याय हैं। हर अध्याय में पहले PDF के अनुसार विषय-बिंदु हैं, फिर मुख्य तथ्य और अवधारणाएँ। अनुच्छेदों और संशोधनों की संख्याएँ परीक्षा में अपनी पुस्तक के अनुसार ही लिखें।

अध्याय 1: संविधान (5 अंक)

PDF के विषय: संविधान की आवश्यकता; संविधान की सत्ता; भारतीय संविधान का निर्माण; संविधान सभा का स्वरूप; संविधान सभा के कामकाज की शैली (विचार-विमर्श का सिद्धांत); कार्य विधि; राष्ट्रीय आंदोलन की विरासत; संस्थागत व्यवस्थाएँ; उद्देश्य प्रस्ताव; विभिन्न देशों के संविधानों से लिए गए प्रावधान।

  • संविधान की आवश्यकता: समाज में समन्वय और भरोसा बनाना, सरकार की शक्ति पर सीमा लगाना, सरकार के गठन के नियम तय करना और लोगों की आकांक्षाओं को दिशा देना।
  • संविधान सभा: पहली बैठक 9 दिसंबर 1946 को हुई। अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद थे और प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉ. भीमराव अंबेडकर। देश के विभाजन के बाद सदस्यों की संख्या 299 रह गई।
  • उद्देश्य प्रस्ताव: जवाहरलाल नेहरू ने 13 दिसंबर 1946 को रखा; यही आगे चलकर संविधान की प्रस्तावना का आधार बना।
  • कार्य-विधि: संविधान 26 नवंबर 1949 को स्वीकार किया गया और 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ। निर्माण में लगभग 2 वर्ष 11 माह 18 दिन लगे।
  • राष्ट्रीय आंदोलन की विरासत: स्वतंत्रता आंदोलन के मूल्य (समानता, स्वतंत्रता, सामाजिक न्याय, सार्वभौमिक मताधिकार) संविधान में आए।
संविधान का तत्त्वकिस देश/संविधान से प्रेरित
मौलिक अधिकारअमेरिका
संसदीय शासन प्रणाली और विधि का शासनब्रिटेन
राज्य के नीति निर्देशक तत्त्वआयरलैंड
शक्तिशाली केंद्र के साथ संघीय व्यवस्थाकनाडा
समवर्ती सूचीऑस्ट्रेलिया
संविधान संशोधन की प्रक्रियादक्षिण अफ्रीका
आपातकालीन प्रावधानजर्मनी (वाइमर संविधान)

यह सूची सामान्य रूप से पुस्तकों में दी जाती है। परीक्षा में अपनी पुस्तक के अनुसार लिखें; इसका अर्थ यह नहीं कि भारतीय संविधान केवल "उधार" का है, क्योंकि हर प्रावधान को भारतीय परिस्थितियों के अनुसार ढाला गया।

अध्याय 2: भारतीय संविधान में अधिकार (6 अंक)

PDF के विषय: अधिकारों का महत्त्व; भारतीय संविधान में मौलिक अधिकार; दक्षिण अफ्रीका के संविधान में अधिकारों का घोषणा-पत्र; राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग; राज्य के नीति निर्देशक तत्त्व; नीति निर्देशक तत्त्वों और मौलिक अधिकारों में संबंध; संपत्ति का अधिकार।

मौलिक अधिकारअनुच्छेदमुख्य बात
समता का अधिकार14–18कानून के समक्ष समानता; भेदभाव का निषेध; अस्पृश्यता का अंत
स्वतंत्रता का अधिकार19–22अभिव्यक्ति, संघ बनाने, आवागमन की स्वतंत्रता; जीवन और दैहिक स्वतंत्रता
शोषण के विरुद्ध अधिकार23–24बेगार और मानव-तस्करी का निषेध; बाल श्रम का निषेध
धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार25–28अंतःकरण और धर्म को मानने, आचरण और प्रचार की स्वतंत्रता
संस्कृति और शिक्षा संबंधी अधिकार29–30अल्पसंख्यकों की भाषा-संस्कृति का संरक्षण और शिक्षण संस्थाएँ
संवैधानिक उपचारों का अधिकार32अधिकार-हनन पर सीधे सर्वोच्च न्यायालय जाने का अधिकार
  • रिट: बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, प्रतिषेध, उत्प्रेषण और अधिकार-पृच्छा।
  • नीति निर्देशक तत्त्व संविधान के भाग IV (अनुच्छेद 36–51) में हैं। ये न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं हैं, पर शासन के आधारभूत सिद्धांत हैं। मौलिक अधिकार न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय होते हैं।
  • संपत्ति का अधिकार: पहले मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 31) था; 44वें संशोधन (1978) से इसे मौलिक अधिकारों की सूची से हटाकर अनुच्छेद 300-A में कानूनी अधिकार बनाया गया।
  • शिक्षा का अधिकार: 86वें संशोधन (2002) के बाद 6 से 14 वर्ष के बच्चों के लिए अनुच्छेद 21-A में।
  • राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC): मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के अंतर्गत स्थापित एक वैधानिक संस्था।
  • दक्षिण अफ्रीका का अधिकार-पत्र: इसमें नागरिक-राजनीतिक अधिकारों के साथ सामाजिक-आर्थिक अधिकार (जैसे आवास, स्वास्थ्य सेवा, भोजन, जल और सामाजिक सुरक्षा) भी शामिल हैं।
तुलनामौलिक अधिकारनीति निर्देशक तत्त्व
प्रकृतिन्यायालय द्वारा प्रवर्तनीयअप्रवर्तनीय
उद्देश्यव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा, राजनीतिक लोकतंत्रसामाजिक और आर्थिक न्याय, कल्याणकारी राज्य
किस पर रोकसरकार की शक्ति पर रोकसरकार को दिशा-निर्देश
संविधान में भागभाग IIIभाग IV

अध्याय 3: चुनाव और प्रतिनिधित्व (5 अंक)

PDF के विषय: चुनाव और लोकतंत्र; भारत में चुनाव व्यवस्था — चुनाव व्यवस्था के प्रकार, राज्यसभा में चुनाव प्रणाली; निर्वाचन क्षेत्रों का आरक्षण; स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव; स्वतंत्र निर्वाचन आयोग — विशेष बहुमत; चुनाव सुधार।

  • चुनाव व्यवस्था के प्रकार: सर्वाधिक वोट पाने वाला जीतता है (FPTP, जैसे लोकसभा चुनाव) और समानुपातिक प्रतिनिधित्व (PR)। भारत में लोकसभा और विधानसभा में FPTP है।
  • राज्यसभा: सदस्य राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों द्वारा एकल संक्रमणीय मत प्रणाली (समानुपातिक प्रतिनिधित्व) से चुने जाते हैं। राष्ट्रपति का चुनाव भी इसी प्रणाली से होता है।
  • निर्वाचन क्षेत्रों का आरक्षण: अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए लोकसभा और विधानसभाओं में सीटें आरक्षित हैं, ताकि वंचित वर्गों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो।
  • स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव: वयस्क मताधिकार (61वें संशोधन, 1988 द्वारा मतदान की आयु 21 से घटाकर 18 वर्ष की गई), गुप्त मतदान, स्वतंत्र निर्वाचन आयोग और आदर्श आचार संहिता।
  • निर्वाचन आयोग: अनुच्छेद 324 के अंतर्गत; मुख्य चुनाव आयुक्त को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की तरह ही हटाया जा सकता है, यानी संसद के विशेष बहुमत से।
  • चुनाव सुधार: इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM), VVPAT, उम्मीदवारों के शपथ-पत्र में जानकारी देना, NOTA (2013 से) आदि।

अध्याय 4: कार्यपालिका (5 अंक)

PDF के विषय: कार्यपालिका; कार्यपालिका के प्रकार; भारत में संसदीय कार्यपालिका — राष्ट्रपति की शक्ति और स्थिति, प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद; स्थायी कार्यपालिका — नौकरशाही।

  • कार्यपालिका: सरकार का वह अंग जो कानूनों को लागू करता है। इसके दो रूप: राजनीतिक कार्यपालिका (मंत्री) और स्थायी कार्यपालिका (नौकरशाही)।
  • संसदीय कार्यपालिका: राष्ट्रपति नाममात्र का प्रधान है; वास्तविक शक्ति प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद के पास है। मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी है।
  • राष्ट्रपति का चुनाव: एक निर्वाचक मंडल द्वारा, जिसमें संसद के दोनों सदनों और राज्य विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य शामिल होते हैं।
  • राष्ट्रपति की शक्तियाँ: कार्यपालिका (नियुक्तियाँ), विधायी (अध्यादेश, अनुच्छेद 123; विधेयकों पर स्वीकृति), आपातकालीन और न्यायिक (क्षमादान, अनुच्छेद 72) शक्तियाँ। व्यवहार में वह मंत्रिपरिषद की सलाह पर काम करता है।
  • प्रधानमंत्री: लोकसभा में बहुमत दल या गठबंधन का नेता; मंत्रिपरिषद का प्रधान।
  • नौकरशाही: स्थायी कार्यपालिका, जो नीतियों को लागू करती है और सरकारें बदलने पर भी बनी रहती है।

अध्याय 5: विधायिका (5 अंक)

PDF के विषय: संसद की आवश्यकता; द्विसदनात्मक संसद का महत्त्व; संसद के कार्य; राज्यसभा व लोकसभा की शक्तियाँ; कानून निर्माण की प्रक्रिया; संसद द्वारा कार्यपालिका पर नियंत्रण; संसदीय समितियों के कार्य; संसद की स्वयं पर नियंत्रण की विधि।

तुलनालोकसभाराज्यसभा
प्रकृतिनिम्न सदन, जनता द्वारा प्रत्यक्ष निर्वाचितउच्च सदन, राज्यों का प्रतिनिधि; अप्रत्यक्ष निर्वाचन
कार्यकाल5 वर्ष (विघटित हो सकती है)स्थायी सदन; एक-तिहाई सदस्य हर दो वर्ष में सेवानिवृत्त
धन विधेयककेवल यहीं प्रस्तुत; अंतिम शक्तिसिफ़ारिश कर सकती है; 14 दिन तक रोक सकती है
कार्यपालिका पर नियंत्रणमंत्रिपरिषद इसके प्रति उत्तरदायी; अविश्वास प्रस्तावप्रश्न और चर्चा द्वारा नियंत्रण, पर सरकार गिरा नहीं सकती
अधिकतम सदस्य संख्या550 (वर्तमान में 543 निर्वाचित)250 (238 निर्वाचित + 12 मनोनीत)
  • संसद = राष्ट्रपति + लोकसभा + राज्यसभा।
  • कानून बनाने की प्रक्रिया: विधेयक का प्रथम वाचन, द्वितीय वाचन (विस्तृत चर्चा और समिति चरण), तृतीय वाचन, फिर दूसरे सदन में यही प्रक्रिया और अंत में राष्ट्रपति की स्वीकृति।
  • कार्यपालिका पर नियंत्रण: प्रश्नकाल, शून्यकाल, ध्यानाकर्षण और अविश्वास प्रस्ताव, बजट की स्वीकृति और संसदीय समितियाँ।
  • संसदीय समितियाँ: जैसे लोक लेखा समिति और प्राक्कलन समिति; विधेयकों और नीतियों की बारीक जाँच करती हैं।
  • स्वयं पर नियंत्रण: पीठासीन अधिकारियों (अध्यक्ष और सभापति) द्वारा सदन की मर्यादा और दल-बदल कानून (52वाँ संशोधन, 1985)।

अध्याय 6: न्यायपालिका (5 अंक)

PDF के विषय: स्वतंत्र न्यायपालिका की आवश्यकता; न्यायाधीशों की नियुक्ति और पद से हटाना; न्यायपालिका की संरचना; सर्वोच्च न्यायालय का क्षेत्राधिकार; न्यायपालिका और अधिकार; न्यायपालिका और संसद; विधिक सेवा दिवस 2018।

  • स्वतंत्र न्यायपालिका विधि के शासन, अधिकारों की रक्षा और शक्तियों के संतुलन के लिए ज़रूरी है।
  • नियुक्ति: राष्ट्रपति द्वारा, सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की सलाह पर; व्यवहार में वरिष्ठता और न्यायिक व्यवस्था (कॉलेजियम) की भूमिका।
  • पद से हटाना: महाभियोग द्वारा, जिसमें संसद के प्रत्येक सदन में विशेष बहुमत चाहिए (उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई और सदन की कुल सदस्य संख्या का बहुमत)।
  • संरचना: सर्वोच्च न्यायालय → उच्च न्यायालय → अधीनस्थ (जिला और निचले) न्यायालय; एकीकृत न्याय-व्यवस्था।
  • सर्वोच्च न्यायालय का क्षेत्राधिकार: मूल (केंद्र-राज्य और राज्यों के बीच विवाद, अनुच्छेद 131), अपीलीय, परामर्शदात्री (अनुच्छेद 143) और रिट (अनुच्छेद 32)।
  • न्यायिक पुनरावलोकन: कानूनों को संविधान के अनुरूप न पाने पर अमान्य घोषित करने की शक्ति। जनहित याचिका (PIL) ने न्याय तक पहुँच बढ़ाई।
  • विधिक सेवा दिवस: हर वर्ष 9 नवंबर को मनाया जाता है और निःशुल्क विधिक सहायता के प्रति जागरूकता लाता है।

अध्याय 7: संघवाद (5 अंक)

PDF के विषय: संघवाद; भारतीय संविधान में संघवाद; सशक्त केंद्रीय सरकार और संघवाद; भारतीय संघीय व्यवस्था में तनाव; विशिष्ट प्रावधान।

  • संघवाद: सत्ता का केंद्र और इकाइयों (राज्यों) के बीच बँटवारा। भारत में सातवीं अनुसूची में तीन सूचियाँ हैं: संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची। अवशिष्ट शक्तियाँ केंद्र के पास हैं।
  • सशक्त केंद्र: संविधान का झुकाव मज़बूत केंद्र की ओर है (जैसे राष्ट्रपति शासन (अनुच्छेद 356) और आपातकालीन प्रावधान)। इसलिए भारत को प्रायः "अर्ध-संघीय" या सहकारी संघवाद का उदाहरण कहा जाता है।
  • तनाव के क्षेत्र: राज्यपाल की भूमिका, अनुच्छेद 356 का उपयोग, राज्यों के पुनर्गठन की माँगें, अंतर-राज्यीय जल-विवाद, भाषा संबंधी माँगें और अधिक स्वायत्तता की माँग।
  • विशिष्ट प्रावधान: कुछ राज्यों के लिए संविधान में विशेष व्यवस्थाएँ हैं (जैसे अनुच्छेद 371 के अंतर्गत)। अपनी पुस्तक के संस्करण के अनुसार वर्तमान प्रावधान पढ़ें।

अध्याय 8: स्थानीय शासन (5 अंक)

PDF के विषय: स्थानीय सरकार का महत्त्व; भारत में स्थानीय शासन का विकास; संविधान का 73वाँ और 74वाँ संशोधन; राज्य चुनाव आयुक्त; राज्य वित्त आयोग; 73वें और 74वें संशोधन का क्रियान्वयन।

  • महत्त्व: लोकतंत्र को जनता के पास ले जाना, स्थानीय समस्याओं का स्थानीय समाधान और जवाबदेही।
  • 73वाँ संशोधन (1992): पंचायती राज संस्थाओं (ग्राम स्तर पर ग्राम पंचायत, खंड स्तर पर पंचायत समिति और ज़िला स्तर पर ज़िला परिषद) को संवैधानिक दर्जा; 1993 से लागू। 74वाँ संशोधन (1992): शहरी स्थानीय निकाय (नगरपालिकाएँ)।
  • मुख्य प्रावधान: हर पाँच वर्ष में नियमित चुनाव, अनुसूचित जाति/जनजाति और महिलाओं के लिए कम-से-कम एक-तिहाई सीटों का आरक्षण, राज्य चुनाव आयुक्त द्वारा चुनाव और राज्य वित्त आयोग द्वारा हर पाँच वर्ष में वित्तीय स्थिति की समीक्षा।
  • ग्राम सभा: गाँव के सभी मतदाताओं की सभा, जो ग्राम पंचायत के काम पर नज़र रखती है।
  • क्रियान्वयन की चुनौतियाँ: धन, कार्य और कर्मचारियों का वास्तविक हस्तांतरण अक्सर कमज़ोर रहता है।

अध्याय 9: संविधान: एक जीवंत दस्तावेज़ (5 अंक)

PDF के विषय: संविधान में संशोधन; संशोधन की प्रक्रिया; संशोधनों की अधिकता के कारण; संशोधनों की विषय-वस्तु; संविधान की मूल संरचना और उसका विकास; संविधान: एक जीवंत दस्तावेज़; न्यायपालिका का योगदान।

संशोधन का प्रकारआवश्यक बहुमतउदाहरण-क्षेत्र
साधारण बहुमतसंसद के साधारण बहुमत से (अनुच्छेद 368 से बाहर)नए राज्यों का गठन, नागरिकता संबंधी कुछ प्रावधान
विशेष बहुमतप्रत्येक सदन में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई तथा कुल सदस्य संख्या का बहुमतमौलिक अधिकार, नीति निर्देशक तत्त्व और अधिकांश अन्य प्रावधान
विशेष बहुमत + राज्यों की स्वीकृतिविशेष बहुमत और कम-से-कम आधे राज्यों के विधानमंडलों की स्वीकृतिसंघीय ढाँचे से जुड़े प्रावधान
  • संशोधन की प्रक्रिया अनुच्छेद 368 में दी गई है।
  • संशोधनों की अधिकता के कारण: संविधान का विस्तृत होना, बदलती सामाजिक-आर्थिक ज़रूरतें और राजनीतिक सहमति की आवश्यकता।
  • मूल संरचना सिद्धांत: केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य (1973) में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि संसद संविधान की मूल संरचना को संशोधन से नष्ट नहीं कर सकती।
  • जीवंत दस्तावेज़: संविधान समय के साथ व्याख्या, संशोधन और परंपराओं के सहारे बदलता और विकसित होता रहता है; इसमें न्यायपालिका की व्याख्याओं का बड़ा योगदान है।

अध्याय 10: संविधान का राजनीतिक दर्शन (4 अंक)

PDF के विषय: संविधान का दर्शन; संविधान — लोकतांत्रिक बदलाव का साधन; संविधान सभा की ओर लौटने की आवश्यकता; हमारे संविधान का राजनीतिक दर्शन; प्रक्रियागत उपलब्धियाँ; आलोचनाएँ।

  • संविधान का दर्शन: स्वतंत्रता, समानता, सामाजिक न्याय, बंधुत्व, अल्पसंख्यकों और विविधता के प्रति सम्मान, धर्मनिरपेक्षता, सार्वभौमिक मताधिकार और संघवाद जैसे मूल्य।
  • लोकतांत्रिक बदलाव का साधन: यह संविधान समाज में सामाजिक और आर्थिक बदलाव लाने (जैसे अस्पृश्यता-उन्मूलन, भूमि सुधार) का भी साधन बना।
  • प्रक्रियागत उपलब्धियाँ: सार्वभौमिक मताधिकार, समझौते और विचार-विमर्श पर आधारित निर्माण-प्रक्रिया।
  • आलोचनाएँ (सामान्य तर्क): बहुत विस्तृत और केंद्रीकृत होना, उधार का दस्तावेज़ कहा जाना। इनके उत्तर में यह कहा जाता है कि प्रावधान भारतीय संदर्भ के अनुसार ढाले गए।

भाग ब: राजनीतिक सिद्धांत (50 अंक)

यह भाग NCERT की पुस्तक Political Theory पर आधारित है। इसमें 8 अध्याय हैं और ये ज़्यादातर अवधारणाओं की परिभाषा, प्रकार, तर्क और उदाहरणों पर टिके हैं।

अध्याय 11: राजनीतिक सिद्धांत: एक परिचय (7 अंक)

PDF के विषय: राजनीति की अवधारणा; राजनीतिक सिद्धांत की विषय-वस्तु; राजनीतिक सिद्धांत को व्यवहार में उतारना; राजनीतिक सिद्धांतों के अध्ययन की आवश्यकता।

  • राजनीति: केवल चुनाव और दल नहीं, बल्कि समाज में सामूहिक निर्णय, सत्ता और संसाधनों के बँटवारे की प्रक्रिया।
  • राजनीतिक सिद्धांत: स्वतंत्रता, समानता, न्याय, अधिकार, नागरिकता जैसी अवधारणाओं के अर्थ और उनके आधार की जाँच; नीतियों और संस्थाओं का मूल्यांकन।
  • व्यवहार में उतारना: अवधारणाओं के अर्थ को तर्क, संवाद और असहमति की स्वीकृति से परखना, ताकि सार्वजनिक बहस ठोस आधार पर हो।
  • अध्ययन की आवश्यकता: नागरिकों को स्पष्ट सोचने, तर्क करने और नीति पर विवेकपूर्ण राय बनाने के लिए।

अध्याय 12: स्वतंत्रता (6 अंक)

PDF के विषय: स्वतंत्रता का आदर्श; स्वतंत्रता; प्रतिबंधों की आवश्यकता; हानि सिद्धांत; सकारात्मक और नकारात्मक स्वतंत्रता; अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता।

  • स्वतंत्रता के दो आयाम: बाहरी बंधनों का अभाव और अपनी इच्छा के अनुसार कार्य करने के अवसर।
  • प्रतिबंधों की आवश्यकता: एक की स्वतंत्रता दूसरे की स्वतंत्रता को नुकसान न पहुँचाए; इसके लिए उचित प्रतिबंध ज़रूरी हैं।
  • हानि सिद्धांत (जे.एस. मिल): किसी की स्वतंत्रता पर तभी रोक लगनी चाहिए जब उसके कार्य से दूसरों को हानि पहुँचे।
  • अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता: विचारों और असहमति के खुले आदान-प्रदान के लिए ज़रूरी, पर उस पर उचित प्रतिबंध संभव हैं।
तुलनानकारात्मक स्वतंत्रतासकारात्मक स्वतंत्रता
अर्थबाहरी रोक-टोक का अभावव्यक्ति को अपनी क्षमताओं के विकास के अवसर
राज्य की भूमिकाराज्य का हस्तक्षेप कम से कमराज्य शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी परिस्थितियाँ उपलब्ध कराए
मुख्य प्रश्न"मुझे कितना क्षेत्र बिना दखल के मिला है?""मैं अपनी क्षमता कितना विकसित कर सकता हूँ?"

अध्याय 13: समानता (6 अंक)

PDF के विषय: समानता का महत्त्व; समानता की अवधारणा; प्राकृतिक और सामाजिक असमानताएँ; समानता के तीन आयाम — राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक; समानता को बढ़ावा देना; नारीवाद; विभेदक बर्ताव द्वारा समानता; सकारात्मक कार्रवाई।

  • प्राकृतिक असमानताएँ जन्म से मिली क्षमताओं और विशेषताओं की भिन्नताएँ हैं; सामाजिक असमानताएँ समाज द्वारा बनाई गई हैं (जैसे जाति, लिंग, संपत्ति के आधार पर)। सामाजिक असमानताओं को न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता।
  • समानता के तीन आयाम: राजनीतिक (समान नागरिकता, मताधिकार और अधिकार), सामाजिक (अवसरों और प्रतिष्ठा में समानता) और आर्थिक (संसाधनों और आय में असमानता घटाना)।
  • समानता को बढ़ावा: औपचारिक समानता (कानून के सामने समान) और अवसर की समानता; वंचित वर्गों के लिए सकारात्मक कार्रवाई (जैसे आरक्षण) जैसे उपाय।
  • नारीवाद: यह मत कि स्त्री-पुरुष असमानता प्राकृतिक नहीं, सामाजिक है और उसे बदला जा सकता है।
  • विभेदक बर्ताव द्वारा समानता: कभी-कभी समान परिणाम पाने के लिए अलग बर्ताव करना ज़रूरी होता है (जैसे दिव्यांगजन के लिए विशेष सुविधाएँ)।

अध्याय 14: सामाजिक न्याय (6 अंक)

PDF के विषय: न्याय — समान लोगों के प्रति समान बर्ताव; समानुपातिक न्याय; विशेष ज़रूरतों के प्रति विशेष ध्यान; न्यायपूर्ण बँटवारा; जॉन रॉल्स का न्याय सिद्धांत; सामाजिक न्याय का अनुसरण।

न्याय का सिद्धांतमूल विचारउदाहरण
समान लोगों के प्रति समान बर्तावसमान स्थिति वालों के साथ समान व्यवहारसमान कार्य के लिए समान वेतन
समानुपातिक न्यायप्रयास और योग्यता के अनुपात में पुरस्कारअधिक मेहनत या कौशल पर अधिक पारिश्रमिक
विशेष ज़रूरतों पर विशेष ध्यानज़रूरत वाले लोगों को अतिरिक्त सहायतादिव्यांगजन के लिए सुविधाएँ
न्यायपूर्ण बँटवारासंसाधनों का निष्पक्ष वितरणसबके लिए बुनियादी शिक्षा-स्वास्थ्य
  • जॉन रॉल्स का सिद्धांत: निष्पक्ष समाज के नियम तय करने के लिए हमें "अज्ञानता के आवरण" (veil of ignorance) के पीछे से सोचना चाहिए, यानी यह जाने बिना कि हम समाज में किस स्थिति में होंगे। तब हम ऐसे नियम चुनेंगे जो सबके लिए निष्पक्ष हों।
  • सामाजिक न्याय का अनुसरण: सबको जीवन की बुनियादी ज़रूरतें (भोजन, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य) और समान अवसर दिलाना। इसमें बाज़ार और राज्य, दोनों की भूमिका पर बहस रहती है।

अध्याय 15: अधिकार (6 अंक)

PDF के विषय: अधिकार; अधिकारों का उदगम; कानूनी अधिकार और राज्य सत्ता; अधिकारों के प्रकार; अधिकार और ज़िम्मेदारियाँ; मानव अधिकारों की विश्वव्यापी घोषणा की प्रस्तावना।

  • अधिकार: किसी व्यक्ति के वे दावे जो समाज और राज्य द्वारा मान्य हों और जो उसकी गरिमा और विकास के लिए ज़रूरी हों।
  • उदगम: प्राकृतिक अधिकारों का विचार (जीवन, स्वतंत्रता, संपत्ति) और उसके बाद कानूनी मान्यता।
  • अधिकारों के प्रकार: राजनीतिक (मताधिकार, चुनाव लड़ना), नागरिक (जीवन, स्वतंत्रता, समानता), आर्थिक और सामाजिक-सांस्कृतिक (काम, शिक्षा, स्वास्थ्य)।
  • अधिकार और ज़िम्मेदारियाँ: एक का अधिकार दूसरे की ज़िम्मेदारी है; अधिकारों के उपयोग में दूसरों के अधिकारों का सम्मान ज़रूरी है।
  • मानव अधिकारों की विश्वव्यापी घोषणा: संयुक्त राष्ट्र द्वारा 10 दिसंबर 1948 को अपनाई गई; इसी तिथि को मानव अधिकार दिवस मनाया जाता है।

अध्याय 16: नागरिकता (6 अंक)

PDF के विषय: नागरिकता — एक परिचय; संपूर्ण और समान सदस्यता; समान अधिकार; नागरिक और राष्ट्र; सार्वभौमिक नागरिकता; विश्व नागरिकता।

  • नागरिकता: राजनीतिक समुदाय की पूर्ण और समान सदस्यता, जिससे अधिकार और कर्तव्य दोनों जुड़े हैं।
  • समान अधिकार: सभी नागरिकों को कानून के सामने समानता और बुनियादी अधिकार; इसके साथ सामाजिक और आर्थिक अधिकारों के बिना समान नागरिकता अधूरी रहती है।
  • नागरिक और राष्ट्र: राष्ट्र-राज्य और नागरिकता का संबंध; शरणार्थियों और प्रवासियों की नागरिकता पर बहस।
  • सार्वभौमिक और विश्व नागरिकता: यह विचार कि मानवाधिकार राष्ट्रों की सीमाओं से परे हैं और वैश्विक समस्याओं (जैसे जलवायु परिवर्तन) के लिए साझा नागरिकता-बोध ज़रूरी है।

अध्याय 17: राष्ट्रवाद (6 अंक)

PDF के विषय: राष्ट्रवाद का परिचय — राष्ट्र और राष्ट्रवाद; साझे विश्वास; इतिहास; भू-क्षेत्र; साझे राजनीतिक आदर्श; साझी राजनीतिक पहचान; राष्ट्रीय आत्म-निर्णय; राष्ट्रवाद और बहुलवाद।

  • राष्ट्र एक "कल्पित समुदाय" (बेनेडिक्ट एंडरसन का वाक्यांश) है, जो साझे विश्वास, साझे इतिहास, भू-क्षेत्र, साझे राजनीतिक आदर्शों और साझी राजनीतिक पहचान के आधार पर बनता है।
  • राष्ट्रीय आत्म-निर्णय: एक राष्ट्र को अपनी राजनीतिक स्थिति और शासन खुद तय करने का अधिकार; इसी ने औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध आंदोलनों को बल दिया।
  • राष्ट्रवाद और बहुलवाद: एक राष्ट्र में अनेक संस्कृतियाँ, भाषाएँ और धर्म हो सकते हैं। लोकतांत्रिक राष्ट्रवाद सभी समूहों को बराबरी की जगह देता है, जबकि संकीर्ण राष्ट्रवाद अल्पसंख्यकों के प्रति असहिष्णु हो सकता है।

अध्याय 18: धर्मनिरपेक्षता (7 अंक)

PDF के विषय: धर्मनिरपेक्षता — धर्मों के बीच वर्चस्ववाद; धर्म के अंदर वर्चस्व; धर्मनिरपेक्ष राज्य; धर्मनिरपेक्षता का यूरोपीय मॉडल; धर्मनिरपेक्षता का भारतीय मॉडल; भारतीय धर्मनिरपेक्षता की आलोचनाएँ।

तुलनापश्चिमी (यूरोपीय) मॉडलभारतीय मॉडल
धर्म और राज्य का संबंधपूर्ण पृथक्करण; राज्य धर्म में और धर्म राज्य में दखल नहीं देतासैद्धांतिक दूरी; राज्य सभी धर्मों से समान दूरी रखता है और ज़रूरत पड़ने पर सुधार के लिए हस्तक्षेप भी कर सकता है
धर्म का सार्वजनिक क्षेत्रधर्म निजी मामलासमुदायों के अधिकार भी मान्य (जैसे शिक्षण संस्थाएँ)
वर्चस्व पर चिंतामुख्यतः राज्य और धर्म के बीचअंतर-धार्मिक वर्चस्व और अंतः-धार्मिक वर्चस्व, दोनों पर
  • अंतर-धार्मिक वर्चस्व: एक धर्म द्वारा दूसरे पर प्रभुत्व। अंतः-धार्मिक वर्चस्व: एक ही धर्म के भीतर कुछ वर्गों (जैसे जाति या लिंग के आधार पर) का दूसरों पर प्रभुत्व।
  • धर्मनिरपेक्ष राज्य: जो किसी धर्म को राज्य-धर्म न माने और सभी धर्मों के साथ समान व्यवहार करे।
  • भारतीय धर्मनिरपेक्षता की आलोचनाएँ (सामान्य तर्क): इसे पश्चिम से आयातित, अल्पसंख्यकों के प्रति पक्षपाती या अत्यधिक हस्तक्षेपकारी बताया जाता है। समर्थक इन तर्कों के उत्तर में इसकी स्वदेशी जड़ों और समानता-आधारित दृष्टि की बात करते हैं।

उत्तर लिखने के ढाँचे

PDF में प्रश्नों के प्रकार नहीं दिए गए हैं, इसलिए नीचे के ढाँचे सामान्य अभ्यास के लिए सुझाव हैं। प्रश्न में दिए गए अंक के अनुसार उत्तर की लंबाई तय करें।

प्रश्न का प्रकारउत्तर कैसे लिखेंउदाहरण
परिभाषित करें / क्या है?एक-दो वाक्य में स्पष्ट परिभाषा + एक उदाहरण"न्यायिक पुनरावलोकन" की परिभाषा और एक उदाहरण
अंतर बताइएदो स्तंभों की तुलना-तालिका (3–4 बिंदु)मौलिक अधिकार बनाम नीति निर्देशक तत्त्व
समझाइए / चर्चा कीजिएभूमिका (1–2 वाक्य) → 3–4 मुख्य बिंदु (हर बिंदु के साथ तर्क/उदाहरण) → निष्कर्षभारतीय संघवाद की विशेषताएँ
मूल्यांकन / आलोचना करेंपक्ष और विपक्ष, दोनों के तर्क + अपना संतुलित निष्कर्षभारतीय धर्मनिरपेक्षता की आलोचनाएँ और उनके उत्तर
संक्षिप्त टिप्पणी3–4 वाक्य: क्या है, क्यों महत्त्वपूर्ण है, एक तथ्य/उदाहरणराज्य वित्त आयोग
नमूना ढाँचा: 'न्यायपालिका की स्वतंत्रता' पर विस्तृत उत्तर
भूमिका: विधि के शासन और अधिकारों की रक्षा के लिए स्वतंत्र न्यायपालिका आवश्यक है।
बिंदु 1: नियुक्ति में न्यायिक व्यवस्था की भूमिका (कार्यपालिका का सीमित प्रभाव)।
बिंदु 2: पद से हटाने की कठिन प्रक्रिया (महाभियोग, संसद का विशेष बहुमत)।
बिंदु 3: न्यायिक पुनरावलोकन और जनहित याचिका द्वारा अधिकारों की रक्षा।
निष्कर्ष: स्वतंत्रता के साथ जवाबदेही भी ज़रूरी है, ताकि जनता का विश्वास बना रहे।

अभ्यास-प्रश्न (उत्तर सहित)

ये मौलिक अभ्यास-प्रश्न हैं, आधिकारिक प्रश्न नहीं।

भाग अ: संविधान

1. संविधान सभा के अध्यक्ष और प्रारूप समिति के अध्यक्ष कौन थे?
उत्तर: अध्यक्ष: डॉ. राजेंद्र प्रसाद; प्रारूप समिति के अध्यक्ष: डॉ. भीमराव अंबेडकर।
2. भारतीय संविधान कब स्वीकार किया गया और कब लागू हुआ?
उत्तर: 26 नवंबर 1949 को स्वीकार और 26 जनवरी 1950 को लागू।
3. उद्देश्य प्रस्ताव किसने और कब रखा?
उत्तर: जवाहरलाल नेहरू ने 13 दिसंबर 1946 को।
4. छह मौलिक अधिकार लिखिए।
उत्तर: समता, स्वतंत्रता, शोषण के विरुद्ध, धार्मिक स्वतंत्रता, संस्कृति और शिक्षा संबंधी तथा संवैधानिक उपचारों का अधिकार।
5. संपत्ति का अधिकार अब किस रूप में है?
उत्तर: 44वें संशोधन (1978) के बाद यह मौलिक अधिकार नहीं रहा; अनुच्छेद 300-A में कानूनी अधिकार है।
6. मौलिक अधिकार और नीति निर्देशक तत्त्व में एक मुख्य अंतर बताइए।
उत्तर: मौलिक अधिकार न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय हैं, जबकि नीति निर्देशक तत्त्व प्रवर्तनीय नहीं हैं।
7. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग किस अधिनियम से बना?
उत्तर: मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 से।
8. लोकसभा चुनाव में कौन-सी चुनाव प्रणाली अपनाई जाती है?
उत्तर: सर्वाधिक वोट पाने वाला जीतता है (FPTP) प्रणाली।
9. राज्यसभा के सदस्य कैसे चुने जाते हैं?
उत्तर: राज्य विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों द्वारा एकल संक्रमणीय मत (समानुपातिक प्रतिनिधित्व) प्रणाली से।
10. राष्ट्रपति का चुनाव कौन करता है?
उत्तर: निर्वाचक मंडल, जिसमें संसद और राज्य विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य होते हैं।
11. संसदीय व्यवस्था में वास्तविक कार्यपालिका कौन है और वह किसके प्रति उत्तरदायी है?
उत्तर: प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद; वे सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी हैं।
12. धन विधेयक किस सदन में प्रस्तुत किया जाता है?
उत्तर: केवल लोकसभा में।
13. राज्यसभा की अधिकतम सदस्य संख्या कितनी है?
उत्तर: 250 (238 निर्वाचित और 12 मनोनीत)।
14. संसदीय समिति का एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर: लोक लेखा समिति (या प्राक्कलन समिति)।
15. सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने की प्रक्रिया लिखिए।
उत्तर: संसद के प्रत्येक सदन में विशेष बहुमत से महाभियोग प्रस्ताव पारित कर राष्ट्रपति से हटाने का अनुरोध किया जाता है।
16. न्यायिक पुनरावलोकन क्या है?
उत्तर: कानूनों और कार्यों को संविधान के अनुरूप न पाने पर अमान्य घोषित करने की न्यायालय की शक्ति।
17. संविधान की सातवीं अनुसूची में कौन-सी तीन सूचियाँ हैं?
उत्तर: संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची।
18. 73वाँ संशोधन किससे संबंधित है?
उत्तर: पंचायती राज संस्थाओं (ग्रामीण स्थानीय शासन) को संवैधानिक दर्जा देने से।
19. राज्य वित्त आयोग का कार्य बताइए।
उत्तर: हर पाँच वर्ष में पंचायतों और नगरपालिकाओं की वित्तीय स्थिति की समीक्षा और राज्य सरकार को सिफ़ारिशें देना।
20. संविधान संशोधन के तीन तरीके लिखिए।
उत्तर: साधारण बहुमत; विशेष बहुमत; विशेष बहुमत और कम-से-कम आधे राज्यों की स्वीकृति।
21. मूल संरचना सिद्धांत किस मामले में आया?
उत्तर: केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य (1973)।

भाग ब: राजनीतिक सिद्धांत

22. हानि सिद्धांत किसने दिया और उसका अर्थ क्या है?
उत्तर: जे.एस. मिल ने; किसी की स्वतंत्रता पर तभी रोक लगे जब उसके कार्य से दूसरों को हानि पहुँचे।
23. नकारात्मक और सकारात्मक स्वतंत्रता में अंतर बताइए।
उत्तर: नकारात्मक स्वतंत्रता बाहरी रोक-टोक का अभाव है; सकारात्मक स्वतंत्रता व्यक्ति को अपनी क्षमता विकसित करने के अवसर देने से जुड़ी है।
24. समानता के तीन आयाम कौन-से हैं?
उत्तर: राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक समानता।
25. सकारात्मक कार्रवाई (affirmative action) क्या है?
उत्तर: वंचित वर्गों को समान अवसर दिलाने के लिए विशेष उपाय (जैसे आरक्षण)।
26. प्राकृतिक और सामाजिक असमानता में अंतर बताइए।
उत्तर: प्राकृतिक असमानता जन्मजात क्षमताओं की भिन्नता है; सामाजिक असमानता समाज द्वारा बनाई गई है (जाति, लिंग आदि के आधार पर)।
27. रॉल्स के 'अज्ञानता के आवरण' का क्या अर्थ है?
उत्तर: न्याय के नियम चुनते समय यह न जानना कि हम समाज में किस स्थिति में होंगे, ताकि नियम निष्पक्ष बनें।
28. अधिकार और ज़िम्मेदारी का संबंध लिखिए।
उत्तर: एक व्यक्ति का अधिकार दूसरों की ज़िम्मेदारी है; अधिकार का उपयोग करते समय दूसरों के अधिकारों का सम्मान आवश्यक है।
29. मानव अधिकारों की विश्वव्यापी घोषणा कब अपनाई गई?
उत्तर: 10 दिसंबर 1948 को (संयुक्त राष्ट्र द्वारा)।
30. सार्वभौमिक नागरिकता से क्या अभिप्राय है?
उत्तर: यह विचार कि मनुष्य होने के नाते सभी को बुनियादी अधिकार मिलने चाहिए, राष्ट्रों की सीमाओं से परे।
31. राष्ट्रीय आत्म-निर्णय का अर्थ बताइए।
उत्तर: किसी राष्ट्र का अपनी राजनीतिक स्थिति और शासन स्वयं तय करने का अधिकार।
32. अंतर-धार्मिक और अंतः-धार्मिक वर्चस्व में अंतर लिखिए।
उत्तर: पहले में एक धर्म दूसरे पर हावी होता है; दूसरे में एक ही धर्म के भीतर कुछ वर्ग दूसरों पर हावी होते हैं।
33. भारतीय और पश्चिमी धर्मनिरपेक्षता में एक अंतर बताइए।
उत्तर: पश्चिमी मॉडल में धर्म और राज्य का पूर्ण पृथक्करण है; भारतीय मॉडल में राज्य सभी धर्मों से 'सैद्धांतिक दूरी' रखता है और ज़रूरत पड़ने पर सुधार के लिए हस्तक्षेप कर सकता है।

8 सप्ताह की तैयारी योजना

यह योजना सुझाव है। हर अध्याय के अंत में उसकी तुलना-तालिका और 3–4 मुख्य शब्द अपनी कॉपी में लिखें।

सप्ताहअध्यायअंककाम
1अध्याय 1–2: संविधान; अधिकार5 + 6तिथियाँ, अनुच्छेद, FR बनाम DPSP की तालिका
2अध्याय 3–4: चुनाव; कार्यपालिका5 + 5चुनाव प्रणालियों की तुलना; राष्ट्रपति बनाम प्रधानमंत्री
3अध्याय 5–6: विधायिका; न्यायपालिका5 + 5लोकसभा बनाम राज्यसभा; सर्वोच्च न्यायालय के क्षेत्राधिकार
4अध्याय 7–10: संघवाद, स्थानीय शासन, संशोधन, दर्शन5 + 5 + 5 + 4सूचियाँ, 73वाँ-74वाँ संशोधन, संशोधन के प्रकार
5अध्याय 11–13: राजनीतिक सिद्धांत, स्वतंत्रता, समानता7 + 6 + 6परिभाषाएँ, तुलना-तालिकाएँ, उदाहरण
6अध्याय 14–16: सामाजिक न्याय, अधिकार, नागरिकता6 + 6 + 6रॉल्स का सिद्धांत, अधिकारों के प्रकार
7अध्याय 17–18: राष्ट्रवाद, धर्मनिरपेक्षता6 + 7पश्चिमी बनाम भारतीय मॉडल; आलोचनाएँ और उत्तर
8पूरा नमूना पेपर (3:15 घंटे) और गलतियों का सुधार1003 दीर्घ उत्तर समयबद्ध लिखें

आम गलतियाँ और सुधार

हिस्साआम गलतीसुधार
संविधान-निर्माणतिथियाँ और नाम मिला देना9 दिसंबर 1946 (पहली बैठक), 26 नवंबर 1949 (स्वीकृति), 26 जनवरी 1950 (लागू) अलग-अलग लिखकर याद रखें
अधिकारFR और DPSP को एक जैसा माननाप्रवर्तनीय बनाम अप्रवर्तनीय का अंतर पहले वाक्य में लिखें
चुनावलोकसभा और राज्यसभा की चुनाव प्रणाली मिलानालोकसभा: प्रत्यक्ष (FPTP); राज्यसभा: अप्रत्यक्ष (एकल संक्रमणीय मत)
विधायिकाराज्यसभा को धन विधेयक पर पूर्ण शक्ति देनाधन विधेयक केवल लोकसभा में; राज्यसभा केवल सिफ़ारिश कर सकती है
संशोधनबहुमतों के प्रकार गड़बड़ानातीन प्रकार की तालिका बनाकर रखें
राजनीतिक सिद्धांतअवधारणा का अर्थ बिना उदाहरण के लिखनाहर परिभाषा के साथ एक वास्तविक उदाहरण जोड़ें
धर्मनिरपेक्षताभारतीय मॉडल को "धर्म से दूरी" लिख देना"सैद्धांतिक दूरी" (principled distance) लिखें; वह तटस्थ नहीं, सुधार-सक्षम है
उत्तर-लेखननिष्कर्ष न लिखनाहर विस्तृत उत्तर के अंत में 1–2 वाक्य का निष्कर्ष रखें

सामान्य प्रश्न

राजनीति विज्ञान में कुल कितने अंक का प्रश्न पत्र है?
एक प्रश्न पत्र, 100 अंक का, समय 3:15 घंटे।
पाठ्यक्रम में कितने अध्याय हैं?
18: भाग अ (भारत का संविधान) में 10 और भाग ब (राजनीतिक सिद्धांत) में 8।
किन अध्यायों के सबसे ज़्यादा अंक हैं?
अध्याय 11 (राजनीतिक सिद्धांत: एक परिचय) और अध्याय 18 (धर्मनिरपेक्षता), दोनों के 7-7 अंक।
सबसे कम अंक किस अध्याय के हैं?
अध्याय 10 (संविधान का राजनीतिक दर्शन) के 4 अंक।
दोनों भागों के कितने-कितने अंक हैं?
भाग अ और भाग ब, दोनों के 50-50 अंक।
क्या राजनीति विज्ञान में प्रायोगिक या परियोजना है?
PDF में राजनीति विज्ञान के लिए केवल 100 अंक का एक प्रश्न पत्र बताया गया है; परियोजना के बारे में विद्यालय से पूछें।
क्या प्रश्नों के प्रकार PDF में दिए हैं?
नहीं। PDF में अध्यायवार अंक हैं, पर objective, short या long प्रश्नों का विभाजन नहीं है। विद्यालय के नमूना पत्र देखें।
कौन-सी पुस्तकें पढ़नी हैं?
भारत का संविधान: सिद्धांत और व्यवहार तथा राजनीतिक सिद्धांत (दोनों NCERT, प्रतिलिप्यधिकार के अंतर्गत)।
क्या संवैधानिक संशोधनों की संख्या याद करनी होगी?
पुस्तक में दिए प्रमुख संशोधन (जैसे 42वाँ, 44वाँ, 73वाँ, 74वाँ) अर्थ के साथ याद रखें; पूरी सूची रटना ज़रूरी नहीं।
क्या यह पाठ्यक्रम अर्धवार्षिक परीक्षा के लिए भी है?
यह पूरे सत्र का पाठ्यक्रम है। अर्धवार्षिक परीक्षा में कितना भाग आएगा, यह विभागीय निर्देश और विद्यालय से पूछकर पक्का करें।

संदर्भ और पद्धति

  1. माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, राजस्थान, अजमेर: पाठ्यक्रम सत्र 2026–2027, विषय: राजनीति विज्ञान (Political Science), विषय कोड-11, कक्षा 11, पृष्ठ 19–24। आधिकारिक PDF ↗

यह लेख कैसे तैयार किया गया

  • बोर्ड के PDF से सीधे लिया गया: परीक्षा योजना, दोनों भाग, सभी 18 अध्यायों के अंक (जोड़ 100) और विषय-बिंदु तथा निर्धारित पुस्तकें। हिंदी और अंग्रेज़ी सूचियों का मिलान किया गया।
  • लेखक द्वारा जोड़ा गया (शैक्षिक सामग्री): अध्यायों के मुख्य तथ्य और तुलना-तालिकाएँ, उत्तर लिखने के ढाँचे, अभ्यास-प्रश्न, समय-प्रबंधन और 8 सप्ताह की योजना। तथ्य NCERT स्तर के हैं; परीक्षा में अपनी पुस्तक के अनुसार ही लिखें।
  • जो नहीं बताया गया: PDF में जो जानकारी नहीं है (प्रश्नों के प्रकार, परियोजना), उसे तथ्य की तरह नहीं लिखा गया। संवैधानिक प्रावधान और संख्याएँ बदल सकती हैं, इसलिए पुस्तक के नवीनतम संस्करण और विद्यालय के निर्देश से मिलान करें।
सूचना
परीक्षा योजना और अध्यायवार अंक बोर्ड के PDF से लिए गए हैं। तथ्य-सारांश, तालिकाएँ, उत्तर-ढाँचे, अभ्यास और योजनाएँ शैक्षिक सुझाव हैं। बाद में जारी संशोधन या परीक्षा-निर्देश मिलने पर उनका पालन करें। NCERT Classes एक स्वतंत्र निजी शैक्षिक मंच है और NCERT, CBSE, RBSE या किसी सरकारी संस्था से संबद्ध नहीं है।
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