RBSE कक्षा 11 राजनीति विज्ञान (Political Science, विषय कोड-11) का सत्र 2026–27 का पाठ्यक्रम राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, अजमेर ने जारी किया है। इसमें एक सैद्धांतिक प्रश्न पत्र है, जो 100 अंक का है और 3:15 घंटे का है। पाठ्यक्रम दो भागों में बँटा है: भाग अ — भारत का संविधान: सिद्धांत और व्यवहार (50 अंक, 10 अध्याय) और भाग ब — राजनीतिक सिद्धांत (50 अंक, 8 अध्याय)। बोर्ड ने हर अध्याय के अंक अलग-अलग दिए हैं।
इस लेख में सभी 18 अध्यायों के अंक और विषय-बिंदु, हर अध्याय की मुख्य अवधारणाएँ और तथ्य, तुलना-तालिकाएँ, उत्तर लिखने के ढाँचे, अभ्यास-प्रश्न (उत्तर सहित), 8 सप्ताह की योजना और FAQ हैं। जहाँ बोर्ड का PDF कोई जानकारी नहीं देता (जैसे प्रश्नों के प्रकार), वहाँ वह साफ़ लिखा है।
- कुल अंक: 100 · समय: 3:15 घंटे · प्रश्न पत्र: एक (सैद्धांतिक); प्रायोगिक का उल्लेख PDF में नहीं है
- भाग अ (संविधान): 50 अंक, अध्याय 1–10 · भाग ब (राजनीतिक सिद्धांत): 50 अंक, अध्याय 11–18
- सबसे ज़्यादा अंक (7-7): अध्याय 11 (राजनीतिक सिद्धांत: एक परिचय) और अध्याय 18 (धर्मनिरपेक्षता)
- 6 अंक के अध्याय: अध्याय 2 (भारतीय संविधान में अधिकार), 12, 13, 14, 15, 16 और 17
- सबसे कम अंक: अध्याय 10 (संविधान का राजनीतिक दर्शन) के 4 अंक
- पुस्तकें: भारत का संविधान: सिद्धांत और व्यवहार; राजनीतिक सिद्धांत (दोनों NCERT)
आधिकारिक 2026–27 पाठ्यक्रम PDF खोलें — राजनीति विज्ञान, पृष्ठ 19–24 ↗
| बोर्ड | माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, राजस्थान, अजमेर |
|---|---|
| सत्र | 2026–2027 |
| विषय / कोड | राजनीति विज्ञान (Political Science) / 11 |
| प्रश्न पत्र | एक · 3:15 घंटे · 100 अंक |
| भाग अ | भारत का संविधान: सिद्धांत और व्यवहार — 50 अंक |
| भाग ब | राजनीतिक सिद्धांत — 50 अंक |
| अध्याय | 18 |
| निर्धारित पुस्तकें | भारत का संविधान: सिद्धांत और व्यवहार; राजनीतिक सिद्धांत (NCERT) |
अध्यायवार अंक विभाजन
| प्रश्न पत्र | समय (घंटे) | प्रश्न पत्र के लिए अंक | पूर्णांक |
|---|---|---|---|
| एक | 3:15 | 100 | 100 |
बोर्ड ने दोनों भागों के 18 अध्यायों के अंक इस प्रकार दिए हैं:
भाग अ: भारत का संविधान: सिद्धांत और व्यवहार (50 अंक)
| अध्याय | नाम | Chapter | अंक |
|---|---|---|---|
| 1 | संविधान: क्यों और कैसे | Constitution | 5 |
| 2 | भारतीय संविधान में अधिकार | Rights in the Indian Constitution | 6 |
| 3 | चुनाव और प्रतिनिधित्व | Election and Representation | 5 |
| 4 | कार्यपालिका | Executive | 5 |
| 5 | विधायिका | Legislature | 5 |
| 6 | न्यायपालिका | Judiciary | 5 |
| 7 | संघवाद | Federalism | 5 |
| 8 | स्थानीय शासन | Local Government | 5 |
| 9 | संविधान: एक जीवंत दस्तावेज़ | Constitution as a Living Document | 5 |
| 10 | संविधान का राजनीतिक दर्शन | The Philosophy of the Constitution | 4 |
| जोड़ | 50 |
भाग ब: राजनीतिक सिद्धांत (50 अंक)
| अध्याय | नाम | Chapter | अंक |
|---|---|---|---|
| 11 | राजनीतिक सिद्धांत: एक परिचय | Political Theory: An Introduction | 7 |
| 12 | स्वतंत्रता | Freedom | 6 |
| 13 | समानता | Equality | 6 |
| 14 | सामाजिक न्याय | Social Justice | 6 |
| 15 | अधिकार | Rights | 6 |
| 16 | नागरिकता | Citizenship | 6 |
| 17 | राष्ट्रवाद | Nationalism | 6 |
| 18 | धर्मनिरपेक्षता | Secularism | 7 |
| जोड़ | 50 |
अंकों के क्रम से पढ़ें
| अंक | अध्याय | जोड़ |
|---|---|---|
| 7 | अध्याय 11 (राजनीतिक सिद्धांत: एक परिचय) और अध्याय 18 (धर्मनिरपेक्षता) | 14 |
| 6 | अध्याय 2, 12, 13, 14, 15, 16, 17 | 42 |
| 5 | अध्याय 1, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9 | 40 |
| 4 | अध्याय 10 (संविधान का राजनीतिक दर्शन) | 4 |
| कुल | 100 |
- दोनों भाग बराबर (50-50) हैं। भाग अ में संस्थाओं (कार्यपालिका, विधायिका, न्यायपालिका आदि) की जानकारी और भाग ब में अवधारणाओं (स्वतंत्रता, समानता, न्याय) की समझ चाहिए।
- कोई एक अध्याय 7 अंक से ज़्यादा का नहीं है, इसलिए सभी 18 अध्यायों की संतुलित तैयारी ज़रूरी है।
- 6 अंक वाले सात अध्याय (भाग ब में छह और भाग अ में अध्याय 2) मिलकर 42 अंक के हैं।
समय-प्रबंधन
कुल 195 मिनट हैं, यानी लगभग 1.95 मिनट प्रति अंक। नीचे का बँटवारा सुझाव है:
| भाग | अंक | सुझाया समय (मिनट) |
|---|---|---|
| भाग अ (अध्याय 1–10) | 50 | 95 |
| भाग ब (अध्याय 11–18) | 50 | 90 |
| दोहराव और जाँच | — | 10 |
| कुल | 100 | 195 |
PDF में प्रश्नों के प्रकार (objective, short, long) और उनके अंक नहीं दिए गए हैं, इसलिए प्रश्न-पत्र की संरचना के लिए विद्यालय में मिले नमूना पत्र देखें।
PDF की जाँच: जिन बातों की पुष्टि करें
PDF के हिंदी और अंग्रेज़ी भागों को साथ पढ़ने पर ये बातें दिखीं। इनका मतलब यह नहीं कि कुछ हटा या जुड़ा है; मतलब यह है कि अंतिम पुष्टि विद्यालय या बोर्ड के निर्देश से करनी चाहिए।
| बात | PDF में क्या दिखा | क्या करें |
|---|---|---|
| प्रायोगिक/परियोजना | PDF में राजनीति विज्ञान के लिए केवल एक प्रश्न पत्र, 100 अंक का, दिया गया है; प्रायोगिक या परियोजना के अंक का उल्लेख नहीं है | विद्यालय से पूछें कि कोई परियोजना कार्य है या नहीं |
| अध्याय 3: चुनाव | विषय-बिंदु में "स्वतंत्र निर्वाचन आयोग — विशेष बहुमत" एक साथ लिखा है। विशेष बहुमत की परिभाषा अध्याय 9 (संशोधन) में आती है | दोनों को साथ जोड़कर समझें |
| अध्याय 6: न्यायपालिका | विषय-बिंदु में "विधिक सेवा दिवस 2018" का उल्लेख है | पुस्तक के संस्करण के अनुसार यह भाग पढ़ें; अपने विद्यालय से पक्का करें |
| अध्याय 5: विधायिका | विषय-बिंदु में "संसद की स्वयं पर नियंत्रण की विधि" है | पुस्तक में दिए अनुसार (जैसे पीठासीन अधिकारी और दल-बदल कानून) तैयार करें |
| अध्यायों की संख्या | भाग अ में 1–10 और भाग ब में 11–18 क्रमांक दिए गए हैं, यानी कुल 18 | कोई अंतर नहीं मिला |
भाग अ: भारत का संविधान: सिद्धांत और व्यवहार (50 अंक)
यह भाग NCERT की पुस्तक Indian Constitution at Work पर आधारित है। इसमें 10 अध्याय हैं। हर अध्याय में पहले PDF के अनुसार विषय-बिंदु हैं, फिर मुख्य तथ्य और अवधारणाएँ। अनुच्छेदों और संशोधनों की संख्याएँ परीक्षा में अपनी पुस्तक के अनुसार ही लिखें।
अध्याय 1: संविधान (5 अंक)
PDF के विषय: संविधान की आवश्यकता; संविधान की सत्ता; भारतीय संविधान का निर्माण; संविधान सभा का स्वरूप; संविधान सभा के कामकाज की शैली (विचार-विमर्श का सिद्धांत); कार्य विधि; राष्ट्रीय आंदोलन की विरासत; संस्थागत व्यवस्थाएँ; उद्देश्य प्रस्ताव; विभिन्न देशों के संविधानों से लिए गए प्रावधान।
- संविधान की आवश्यकता: समाज में समन्वय और भरोसा बनाना, सरकार की शक्ति पर सीमा लगाना, सरकार के गठन के नियम तय करना और लोगों की आकांक्षाओं को दिशा देना।
- संविधान सभा: पहली बैठक 9 दिसंबर 1946 को हुई। अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद थे और प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉ. भीमराव अंबेडकर। देश के विभाजन के बाद सदस्यों की संख्या 299 रह गई।
- उद्देश्य प्रस्ताव: जवाहरलाल नेहरू ने 13 दिसंबर 1946 को रखा; यही आगे चलकर संविधान की प्रस्तावना का आधार बना।
- कार्य-विधि: संविधान 26 नवंबर 1949 को स्वीकार किया गया और 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ। निर्माण में लगभग 2 वर्ष 11 माह 18 दिन लगे।
- राष्ट्रीय आंदोलन की विरासत: स्वतंत्रता आंदोलन के मूल्य (समानता, स्वतंत्रता, सामाजिक न्याय, सार्वभौमिक मताधिकार) संविधान में आए।
| संविधान का तत्त्व | किस देश/संविधान से प्रेरित |
|---|---|
| मौलिक अधिकार | अमेरिका |
| संसदीय शासन प्रणाली और विधि का शासन | ब्रिटेन |
| राज्य के नीति निर्देशक तत्त्व | आयरलैंड |
| शक्तिशाली केंद्र के साथ संघीय व्यवस्था | कनाडा |
| समवर्ती सूची | ऑस्ट्रेलिया |
| संविधान संशोधन की प्रक्रिया | दक्षिण अफ्रीका |
| आपातकालीन प्रावधान | जर्मनी (वाइमर संविधान) |
यह सूची सामान्य रूप से पुस्तकों में दी जाती है। परीक्षा में अपनी पुस्तक के अनुसार लिखें; इसका अर्थ यह नहीं कि भारतीय संविधान केवल "उधार" का है, क्योंकि हर प्रावधान को भारतीय परिस्थितियों के अनुसार ढाला गया।
अध्याय 2: भारतीय संविधान में अधिकार (6 अंक)
PDF के विषय: अधिकारों का महत्त्व; भारतीय संविधान में मौलिक अधिकार; दक्षिण अफ्रीका के संविधान में अधिकारों का घोषणा-पत्र; राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग; राज्य के नीति निर्देशक तत्त्व; नीति निर्देशक तत्त्वों और मौलिक अधिकारों में संबंध; संपत्ति का अधिकार।
| मौलिक अधिकार | अनुच्छेद | मुख्य बात |
|---|---|---|
| समता का अधिकार | 14–18 | कानून के समक्ष समानता; भेदभाव का निषेध; अस्पृश्यता का अंत |
| स्वतंत्रता का अधिकार | 19–22 | अभिव्यक्ति, संघ बनाने, आवागमन की स्वतंत्रता; जीवन और दैहिक स्वतंत्रता |
| शोषण के विरुद्ध अधिकार | 23–24 | बेगार और मानव-तस्करी का निषेध; बाल श्रम का निषेध |
| धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार | 25–28 | अंतःकरण और धर्म को मानने, आचरण और प्रचार की स्वतंत्रता |
| संस्कृति और शिक्षा संबंधी अधिकार | 29–30 | अल्पसंख्यकों की भाषा-संस्कृति का संरक्षण और शिक्षण संस्थाएँ |
| संवैधानिक उपचारों का अधिकार | 32 | अधिकार-हनन पर सीधे सर्वोच्च न्यायालय जाने का अधिकार |
- रिट: बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, प्रतिषेध, उत्प्रेषण और अधिकार-पृच्छा।
- नीति निर्देशक तत्त्व संविधान के भाग IV (अनुच्छेद 36–51) में हैं। ये न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं हैं, पर शासन के आधारभूत सिद्धांत हैं। मौलिक अधिकार न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय होते हैं।
- संपत्ति का अधिकार: पहले मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 31) था; 44वें संशोधन (1978) से इसे मौलिक अधिकारों की सूची से हटाकर अनुच्छेद 300-A में कानूनी अधिकार बनाया गया।
- शिक्षा का अधिकार: 86वें संशोधन (2002) के बाद 6 से 14 वर्ष के बच्चों के लिए अनुच्छेद 21-A में।
- राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC): मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के अंतर्गत स्थापित एक वैधानिक संस्था।
- दक्षिण अफ्रीका का अधिकार-पत्र: इसमें नागरिक-राजनीतिक अधिकारों के साथ सामाजिक-आर्थिक अधिकार (जैसे आवास, स्वास्थ्य सेवा, भोजन, जल और सामाजिक सुरक्षा) भी शामिल हैं।
| तुलना | मौलिक अधिकार | नीति निर्देशक तत्त्व |
|---|---|---|
| प्रकृति | न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय | अप्रवर्तनीय |
| उद्देश्य | व्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा, राजनीतिक लोकतंत्र | सामाजिक और आर्थिक न्याय, कल्याणकारी राज्य |
| किस पर रोक | सरकार की शक्ति पर रोक | सरकार को दिशा-निर्देश |
| संविधान में भाग | भाग III | भाग IV |
अध्याय 3: चुनाव और प्रतिनिधित्व (5 अंक)
PDF के विषय: चुनाव और लोकतंत्र; भारत में चुनाव व्यवस्था — चुनाव व्यवस्था के प्रकार, राज्यसभा में चुनाव प्रणाली; निर्वाचन क्षेत्रों का आरक्षण; स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव; स्वतंत्र निर्वाचन आयोग — विशेष बहुमत; चुनाव सुधार।
- चुनाव व्यवस्था के प्रकार: सर्वाधिक वोट पाने वाला जीतता है (FPTP, जैसे लोकसभा चुनाव) और समानुपातिक प्रतिनिधित्व (PR)। भारत में लोकसभा और विधानसभा में FPTP है।
- राज्यसभा: सदस्य राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों द्वारा एकल संक्रमणीय मत प्रणाली (समानुपातिक प्रतिनिधित्व) से चुने जाते हैं। राष्ट्रपति का चुनाव भी इसी प्रणाली से होता है।
- निर्वाचन क्षेत्रों का आरक्षण: अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए लोकसभा और विधानसभाओं में सीटें आरक्षित हैं, ताकि वंचित वर्गों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो।
- स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव: वयस्क मताधिकार (61वें संशोधन, 1988 द्वारा मतदान की आयु 21 से घटाकर 18 वर्ष की गई), गुप्त मतदान, स्वतंत्र निर्वाचन आयोग और आदर्श आचार संहिता।
- निर्वाचन आयोग: अनुच्छेद 324 के अंतर्गत; मुख्य चुनाव आयुक्त को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की तरह ही हटाया जा सकता है, यानी संसद के विशेष बहुमत से।
- चुनाव सुधार: इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM), VVPAT, उम्मीदवारों के शपथ-पत्र में जानकारी देना, NOTA (2013 से) आदि।
अध्याय 4: कार्यपालिका (5 अंक)
PDF के विषय: कार्यपालिका; कार्यपालिका के प्रकार; भारत में संसदीय कार्यपालिका — राष्ट्रपति की शक्ति और स्थिति, प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद; स्थायी कार्यपालिका — नौकरशाही।
- कार्यपालिका: सरकार का वह अंग जो कानूनों को लागू करता है। इसके दो रूप: राजनीतिक कार्यपालिका (मंत्री) और स्थायी कार्यपालिका (नौकरशाही)।
- संसदीय कार्यपालिका: राष्ट्रपति नाममात्र का प्रधान है; वास्तविक शक्ति प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद के पास है। मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी है।
- राष्ट्रपति का चुनाव: एक निर्वाचक मंडल द्वारा, जिसमें संसद के दोनों सदनों और राज्य विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य शामिल होते हैं।
- राष्ट्रपति की शक्तियाँ: कार्यपालिका (नियुक्तियाँ), विधायी (अध्यादेश, अनुच्छेद 123; विधेयकों पर स्वीकृति), आपातकालीन और न्यायिक (क्षमादान, अनुच्छेद 72) शक्तियाँ। व्यवहार में वह मंत्रिपरिषद की सलाह पर काम करता है।
- प्रधानमंत्री: लोकसभा में बहुमत दल या गठबंधन का नेता; मंत्रिपरिषद का प्रधान।
- नौकरशाही: स्थायी कार्यपालिका, जो नीतियों को लागू करती है और सरकारें बदलने पर भी बनी रहती है।
अध्याय 5: विधायिका (5 अंक)
PDF के विषय: संसद की आवश्यकता; द्विसदनात्मक संसद का महत्त्व; संसद के कार्य; राज्यसभा व लोकसभा की शक्तियाँ; कानून निर्माण की प्रक्रिया; संसद द्वारा कार्यपालिका पर नियंत्रण; संसदीय समितियों के कार्य; संसद की स्वयं पर नियंत्रण की विधि।
| तुलना | लोकसभा | राज्यसभा |
|---|---|---|
| प्रकृति | निम्न सदन, जनता द्वारा प्रत्यक्ष निर्वाचित | उच्च सदन, राज्यों का प्रतिनिधि; अप्रत्यक्ष निर्वाचन |
| कार्यकाल | 5 वर्ष (विघटित हो सकती है) | स्थायी सदन; एक-तिहाई सदस्य हर दो वर्ष में सेवानिवृत्त |
| धन विधेयक | केवल यहीं प्रस्तुत; अंतिम शक्ति | सिफ़ारिश कर सकती है; 14 दिन तक रोक सकती है |
| कार्यपालिका पर नियंत्रण | मंत्रिपरिषद इसके प्रति उत्तरदायी; अविश्वास प्रस्ताव | प्रश्न और चर्चा द्वारा नियंत्रण, पर सरकार गिरा नहीं सकती |
| अधिकतम सदस्य संख्या | 550 (वर्तमान में 543 निर्वाचित) | 250 (238 निर्वाचित + 12 मनोनीत) |
- संसद = राष्ट्रपति + लोकसभा + राज्यसभा।
- कानून बनाने की प्रक्रिया: विधेयक का प्रथम वाचन, द्वितीय वाचन (विस्तृत चर्चा और समिति चरण), तृतीय वाचन, फिर दूसरे सदन में यही प्रक्रिया और अंत में राष्ट्रपति की स्वीकृति।
- कार्यपालिका पर नियंत्रण: प्रश्नकाल, शून्यकाल, ध्यानाकर्षण और अविश्वास प्रस्ताव, बजट की स्वीकृति और संसदीय समितियाँ।
- संसदीय समितियाँ: जैसे लोक लेखा समिति और प्राक्कलन समिति; विधेयकों और नीतियों की बारीक जाँच करती हैं।
- स्वयं पर नियंत्रण: पीठासीन अधिकारियों (अध्यक्ष और सभापति) द्वारा सदन की मर्यादा और दल-बदल कानून (52वाँ संशोधन, 1985)।
अध्याय 6: न्यायपालिका (5 अंक)
PDF के विषय: स्वतंत्र न्यायपालिका की आवश्यकता; न्यायाधीशों की नियुक्ति और पद से हटाना; न्यायपालिका की संरचना; सर्वोच्च न्यायालय का क्षेत्राधिकार; न्यायपालिका और अधिकार; न्यायपालिका और संसद; विधिक सेवा दिवस 2018।
- स्वतंत्र न्यायपालिका विधि के शासन, अधिकारों की रक्षा और शक्तियों के संतुलन के लिए ज़रूरी है।
- नियुक्ति: राष्ट्रपति द्वारा, सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की सलाह पर; व्यवहार में वरिष्ठता और न्यायिक व्यवस्था (कॉलेजियम) की भूमिका।
- पद से हटाना: महाभियोग द्वारा, जिसमें संसद के प्रत्येक सदन में विशेष बहुमत चाहिए (उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई और सदन की कुल सदस्य संख्या का बहुमत)।
- संरचना: सर्वोच्च न्यायालय → उच्च न्यायालय → अधीनस्थ (जिला और निचले) न्यायालय; एकीकृत न्याय-व्यवस्था।
- सर्वोच्च न्यायालय का क्षेत्राधिकार: मूल (केंद्र-राज्य और राज्यों के बीच विवाद, अनुच्छेद 131), अपीलीय, परामर्शदात्री (अनुच्छेद 143) और रिट (अनुच्छेद 32)।
- न्यायिक पुनरावलोकन: कानूनों को संविधान के अनुरूप न पाने पर अमान्य घोषित करने की शक्ति। जनहित याचिका (PIL) ने न्याय तक पहुँच बढ़ाई।
- विधिक सेवा दिवस: हर वर्ष 9 नवंबर को मनाया जाता है और निःशुल्क विधिक सहायता के प्रति जागरूकता लाता है।
अध्याय 7: संघवाद (5 अंक)
PDF के विषय: संघवाद; भारतीय संविधान में संघवाद; सशक्त केंद्रीय सरकार और संघवाद; भारतीय संघीय व्यवस्था में तनाव; विशिष्ट प्रावधान।
- संघवाद: सत्ता का केंद्र और इकाइयों (राज्यों) के बीच बँटवारा। भारत में सातवीं अनुसूची में तीन सूचियाँ हैं: संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची। अवशिष्ट शक्तियाँ केंद्र के पास हैं।
- सशक्त केंद्र: संविधान का झुकाव मज़बूत केंद्र की ओर है (जैसे राष्ट्रपति शासन (अनुच्छेद 356) और आपातकालीन प्रावधान)। इसलिए भारत को प्रायः "अर्ध-संघीय" या सहकारी संघवाद का उदाहरण कहा जाता है।
- तनाव के क्षेत्र: राज्यपाल की भूमिका, अनुच्छेद 356 का उपयोग, राज्यों के पुनर्गठन की माँगें, अंतर-राज्यीय जल-विवाद, भाषा संबंधी माँगें और अधिक स्वायत्तता की माँग।
- विशिष्ट प्रावधान: कुछ राज्यों के लिए संविधान में विशेष व्यवस्थाएँ हैं (जैसे अनुच्छेद 371 के अंतर्गत)। अपनी पुस्तक के संस्करण के अनुसार वर्तमान प्रावधान पढ़ें।
अध्याय 8: स्थानीय शासन (5 अंक)
PDF के विषय: स्थानीय सरकार का महत्त्व; भारत में स्थानीय शासन का विकास; संविधान का 73वाँ और 74वाँ संशोधन; राज्य चुनाव आयुक्त; राज्य वित्त आयोग; 73वें और 74वें संशोधन का क्रियान्वयन।
- महत्त्व: लोकतंत्र को जनता के पास ले जाना, स्थानीय समस्याओं का स्थानीय समाधान और जवाबदेही।
- 73वाँ संशोधन (1992): पंचायती राज संस्थाओं (ग्राम स्तर पर ग्राम पंचायत, खंड स्तर पर पंचायत समिति और ज़िला स्तर पर ज़िला परिषद) को संवैधानिक दर्जा; 1993 से लागू। 74वाँ संशोधन (1992): शहरी स्थानीय निकाय (नगरपालिकाएँ)।
- मुख्य प्रावधान: हर पाँच वर्ष में नियमित चुनाव, अनुसूचित जाति/जनजाति और महिलाओं के लिए कम-से-कम एक-तिहाई सीटों का आरक्षण, राज्य चुनाव आयुक्त द्वारा चुनाव और राज्य वित्त आयोग द्वारा हर पाँच वर्ष में वित्तीय स्थिति की समीक्षा।
- ग्राम सभा: गाँव के सभी मतदाताओं की सभा, जो ग्राम पंचायत के काम पर नज़र रखती है।
- क्रियान्वयन की चुनौतियाँ: धन, कार्य और कर्मचारियों का वास्तविक हस्तांतरण अक्सर कमज़ोर रहता है।
अध्याय 9: संविधान: एक जीवंत दस्तावेज़ (5 अंक)
PDF के विषय: संविधान में संशोधन; संशोधन की प्रक्रिया; संशोधनों की अधिकता के कारण; संशोधनों की विषय-वस्तु; संविधान की मूल संरचना और उसका विकास; संविधान: एक जीवंत दस्तावेज़; न्यायपालिका का योगदान।
| संशोधन का प्रकार | आवश्यक बहुमत | उदाहरण-क्षेत्र |
|---|---|---|
| साधारण बहुमत | संसद के साधारण बहुमत से (अनुच्छेद 368 से बाहर) | नए राज्यों का गठन, नागरिकता संबंधी कुछ प्रावधान |
| विशेष बहुमत | प्रत्येक सदन में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई तथा कुल सदस्य संख्या का बहुमत | मौलिक अधिकार, नीति निर्देशक तत्त्व और अधिकांश अन्य प्रावधान |
| विशेष बहुमत + राज्यों की स्वीकृति | विशेष बहुमत और कम-से-कम आधे राज्यों के विधानमंडलों की स्वीकृति | संघीय ढाँचे से जुड़े प्रावधान |
- संशोधन की प्रक्रिया अनुच्छेद 368 में दी गई है।
- संशोधनों की अधिकता के कारण: संविधान का विस्तृत होना, बदलती सामाजिक-आर्थिक ज़रूरतें और राजनीतिक सहमति की आवश्यकता।
- मूल संरचना सिद्धांत: केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य (1973) में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि संसद संविधान की मूल संरचना को संशोधन से नष्ट नहीं कर सकती।
- जीवंत दस्तावेज़: संविधान समय के साथ व्याख्या, संशोधन और परंपराओं के सहारे बदलता और विकसित होता रहता है; इसमें न्यायपालिका की व्याख्याओं का बड़ा योगदान है।
अध्याय 10: संविधान का राजनीतिक दर्शन (4 अंक)
PDF के विषय: संविधान का दर्शन; संविधान — लोकतांत्रिक बदलाव का साधन; संविधान सभा की ओर लौटने की आवश्यकता; हमारे संविधान का राजनीतिक दर्शन; प्रक्रियागत उपलब्धियाँ; आलोचनाएँ।
- संविधान का दर्शन: स्वतंत्रता, समानता, सामाजिक न्याय, बंधुत्व, अल्पसंख्यकों और विविधता के प्रति सम्मान, धर्मनिरपेक्षता, सार्वभौमिक मताधिकार और संघवाद जैसे मूल्य।
- लोकतांत्रिक बदलाव का साधन: यह संविधान समाज में सामाजिक और आर्थिक बदलाव लाने (जैसे अस्पृश्यता-उन्मूलन, भूमि सुधार) का भी साधन बना।
- प्रक्रियागत उपलब्धियाँ: सार्वभौमिक मताधिकार, समझौते और विचार-विमर्श पर आधारित निर्माण-प्रक्रिया।
- आलोचनाएँ (सामान्य तर्क): बहुत विस्तृत और केंद्रीकृत होना, उधार का दस्तावेज़ कहा जाना। इनके उत्तर में यह कहा जाता है कि प्रावधान भारतीय संदर्भ के अनुसार ढाले गए।
भाग ब: राजनीतिक सिद्धांत (50 अंक)
यह भाग NCERT की पुस्तक Political Theory पर आधारित है। इसमें 8 अध्याय हैं और ये ज़्यादातर अवधारणाओं की परिभाषा, प्रकार, तर्क और उदाहरणों पर टिके हैं।
अध्याय 11: राजनीतिक सिद्धांत: एक परिचय (7 अंक)
PDF के विषय: राजनीति की अवधारणा; राजनीतिक सिद्धांत की विषय-वस्तु; राजनीतिक सिद्धांत को व्यवहार में उतारना; राजनीतिक सिद्धांतों के अध्ययन की आवश्यकता।
- राजनीति: केवल चुनाव और दल नहीं, बल्कि समाज में सामूहिक निर्णय, सत्ता और संसाधनों के बँटवारे की प्रक्रिया।
- राजनीतिक सिद्धांत: स्वतंत्रता, समानता, न्याय, अधिकार, नागरिकता जैसी अवधारणाओं के अर्थ और उनके आधार की जाँच; नीतियों और संस्थाओं का मूल्यांकन।
- व्यवहार में उतारना: अवधारणाओं के अर्थ को तर्क, संवाद और असहमति की स्वीकृति से परखना, ताकि सार्वजनिक बहस ठोस आधार पर हो।
- अध्ययन की आवश्यकता: नागरिकों को स्पष्ट सोचने, तर्क करने और नीति पर विवेकपूर्ण राय बनाने के लिए।
अध्याय 12: स्वतंत्रता (6 अंक)
PDF के विषय: स्वतंत्रता का आदर्श; स्वतंत्रता; प्रतिबंधों की आवश्यकता; हानि सिद्धांत; सकारात्मक और नकारात्मक स्वतंत्रता; अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता।
- स्वतंत्रता के दो आयाम: बाहरी बंधनों का अभाव और अपनी इच्छा के अनुसार कार्य करने के अवसर।
- प्रतिबंधों की आवश्यकता: एक की स्वतंत्रता दूसरे की स्वतंत्रता को नुकसान न पहुँचाए; इसके लिए उचित प्रतिबंध ज़रूरी हैं।
- हानि सिद्धांत (जे.एस. मिल): किसी की स्वतंत्रता पर तभी रोक लगनी चाहिए जब उसके कार्य से दूसरों को हानि पहुँचे।
- अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता: विचारों और असहमति के खुले आदान-प्रदान के लिए ज़रूरी, पर उस पर उचित प्रतिबंध संभव हैं।
| तुलना | नकारात्मक स्वतंत्रता | सकारात्मक स्वतंत्रता |
|---|---|---|
| अर्थ | बाहरी रोक-टोक का अभाव | व्यक्ति को अपनी क्षमताओं के विकास के अवसर |
| राज्य की भूमिका | राज्य का हस्तक्षेप कम से कम | राज्य शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी परिस्थितियाँ उपलब्ध कराए |
| मुख्य प्रश्न | "मुझे कितना क्षेत्र बिना दखल के मिला है?" | "मैं अपनी क्षमता कितना विकसित कर सकता हूँ?" |
अध्याय 13: समानता (6 अंक)
PDF के विषय: समानता का महत्त्व; समानता की अवधारणा; प्राकृतिक और सामाजिक असमानताएँ; समानता के तीन आयाम — राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक; समानता को बढ़ावा देना; नारीवाद; विभेदक बर्ताव द्वारा समानता; सकारात्मक कार्रवाई।
- प्राकृतिक असमानताएँ जन्म से मिली क्षमताओं और विशेषताओं की भिन्नताएँ हैं; सामाजिक असमानताएँ समाज द्वारा बनाई गई हैं (जैसे जाति, लिंग, संपत्ति के आधार पर)। सामाजिक असमानताओं को न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता।
- समानता के तीन आयाम: राजनीतिक (समान नागरिकता, मताधिकार और अधिकार), सामाजिक (अवसरों और प्रतिष्ठा में समानता) और आर्थिक (संसाधनों और आय में असमानता घटाना)।
- समानता को बढ़ावा: औपचारिक समानता (कानून के सामने समान) और अवसर की समानता; वंचित वर्गों के लिए सकारात्मक कार्रवाई (जैसे आरक्षण) जैसे उपाय।
- नारीवाद: यह मत कि स्त्री-पुरुष असमानता प्राकृतिक नहीं, सामाजिक है और उसे बदला जा सकता है।
- विभेदक बर्ताव द्वारा समानता: कभी-कभी समान परिणाम पाने के लिए अलग बर्ताव करना ज़रूरी होता है (जैसे दिव्यांगजन के लिए विशेष सुविधाएँ)।
अध्याय 14: सामाजिक न्याय (6 अंक)
PDF के विषय: न्याय — समान लोगों के प्रति समान बर्ताव; समानुपातिक न्याय; विशेष ज़रूरतों के प्रति विशेष ध्यान; न्यायपूर्ण बँटवारा; जॉन रॉल्स का न्याय सिद्धांत; सामाजिक न्याय का अनुसरण।
| न्याय का सिद्धांत | मूल विचार | उदाहरण |
|---|---|---|
| समान लोगों के प्रति समान बर्ताव | समान स्थिति वालों के साथ समान व्यवहार | समान कार्य के लिए समान वेतन |
| समानुपातिक न्याय | प्रयास और योग्यता के अनुपात में पुरस्कार | अधिक मेहनत या कौशल पर अधिक पारिश्रमिक |
| विशेष ज़रूरतों पर विशेष ध्यान | ज़रूरत वाले लोगों को अतिरिक्त सहायता | दिव्यांगजन के लिए सुविधाएँ |
| न्यायपूर्ण बँटवारा | संसाधनों का निष्पक्ष वितरण | सबके लिए बुनियादी शिक्षा-स्वास्थ्य |
- जॉन रॉल्स का सिद्धांत: निष्पक्ष समाज के नियम तय करने के लिए हमें "अज्ञानता के आवरण" (veil of ignorance) के पीछे से सोचना चाहिए, यानी यह जाने बिना कि हम समाज में किस स्थिति में होंगे। तब हम ऐसे नियम चुनेंगे जो सबके लिए निष्पक्ष हों।
- सामाजिक न्याय का अनुसरण: सबको जीवन की बुनियादी ज़रूरतें (भोजन, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य) और समान अवसर दिलाना। इसमें बाज़ार और राज्य, दोनों की भूमिका पर बहस रहती है।
अध्याय 15: अधिकार (6 अंक)
PDF के विषय: अधिकार; अधिकारों का उदगम; कानूनी अधिकार और राज्य सत्ता; अधिकारों के प्रकार; अधिकार और ज़िम्मेदारियाँ; मानव अधिकारों की विश्वव्यापी घोषणा की प्रस्तावना।
- अधिकार: किसी व्यक्ति के वे दावे जो समाज और राज्य द्वारा मान्य हों और जो उसकी गरिमा और विकास के लिए ज़रूरी हों।
- उदगम: प्राकृतिक अधिकारों का विचार (जीवन, स्वतंत्रता, संपत्ति) और उसके बाद कानूनी मान्यता।
- अधिकारों के प्रकार: राजनीतिक (मताधिकार, चुनाव लड़ना), नागरिक (जीवन, स्वतंत्रता, समानता), आर्थिक और सामाजिक-सांस्कृतिक (काम, शिक्षा, स्वास्थ्य)।
- अधिकार और ज़िम्मेदारियाँ: एक का अधिकार दूसरे की ज़िम्मेदारी है; अधिकारों के उपयोग में दूसरों के अधिकारों का सम्मान ज़रूरी है।
- मानव अधिकारों की विश्वव्यापी घोषणा: संयुक्त राष्ट्र द्वारा 10 दिसंबर 1948 को अपनाई गई; इसी तिथि को मानव अधिकार दिवस मनाया जाता है।
अध्याय 16: नागरिकता (6 अंक)
PDF के विषय: नागरिकता — एक परिचय; संपूर्ण और समान सदस्यता; समान अधिकार; नागरिक और राष्ट्र; सार्वभौमिक नागरिकता; विश्व नागरिकता।
- नागरिकता: राजनीतिक समुदाय की पूर्ण और समान सदस्यता, जिससे अधिकार और कर्तव्य दोनों जुड़े हैं।
- समान अधिकार: सभी नागरिकों को कानून के सामने समानता और बुनियादी अधिकार; इसके साथ सामाजिक और आर्थिक अधिकारों के बिना समान नागरिकता अधूरी रहती है।
- नागरिक और राष्ट्र: राष्ट्र-राज्य और नागरिकता का संबंध; शरणार्थियों और प्रवासियों की नागरिकता पर बहस।
- सार्वभौमिक और विश्व नागरिकता: यह विचार कि मानवाधिकार राष्ट्रों की सीमाओं से परे हैं और वैश्विक समस्याओं (जैसे जलवायु परिवर्तन) के लिए साझा नागरिकता-बोध ज़रूरी है।
अध्याय 17: राष्ट्रवाद (6 अंक)
PDF के विषय: राष्ट्रवाद का परिचय — राष्ट्र और राष्ट्रवाद; साझे विश्वास; इतिहास; भू-क्षेत्र; साझे राजनीतिक आदर्श; साझी राजनीतिक पहचान; राष्ट्रीय आत्म-निर्णय; राष्ट्रवाद और बहुलवाद।
- राष्ट्र एक "कल्पित समुदाय" (बेनेडिक्ट एंडरसन का वाक्यांश) है, जो साझे विश्वास, साझे इतिहास, भू-क्षेत्र, साझे राजनीतिक आदर्शों और साझी राजनीतिक पहचान के आधार पर बनता है।
- राष्ट्रीय आत्म-निर्णय: एक राष्ट्र को अपनी राजनीतिक स्थिति और शासन खुद तय करने का अधिकार; इसी ने औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध आंदोलनों को बल दिया।
- राष्ट्रवाद और बहुलवाद: एक राष्ट्र में अनेक संस्कृतियाँ, भाषाएँ और धर्म हो सकते हैं। लोकतांत्रिक राष्ट्रवाद सभी समूहों को बराबरी की जगह देता है, जबकि संकीर्ण राष्ट्रवाद अल्पसंख्यकों के प्रति असहिष्णु हो सकता है।
अध्याय 18: धर्मनिरपेक्षता (7 अंक)
PDF के विषय: धर्मनिरपेक्षता — धर्मों के बीच वर्चस्ववाद; धर्म के अंदर वर्चस्व; धर्मनिरपेक्ष राज्य; धर्मनिरपेक्षता का यूरोपीय मॉडल; धर्मनिरपेक्षता का भारतीय मॉडल; भारतीय धर्मनिरपेक्षता की आलोचनाएँ।
| तुलना | पश्चिमी (यूरोपीय) मॉडल | भारतीय मॉडल |
|---|---|---|
| धर्म और राज्य का संबंध | पूर्ण पृथक्करण; राज्य धर्म में और धर्म राज्य में दखल नहीं देता | सैद्धांतिक दूरी; राज्य सभी धर्मों से समान दूरी रखता है और ज़रूरत पड़ने पर सुधार के लिए हस्तक्षेप भी कर सकता है |
| धर्म का सार्वजनिक क्षेत्र | धर्म निजी मामला | समुदायों के अधिकार भी मान्य (जैसे शिक्षण संस्थाएँ) |
| वर्चस्व पर चिंता | मुख्यतः राज्य और धर्म के बीच | अंतर-धार्मिक वर्चस्व और अंतः-धार्मिक वर्चस्व, दोनों पर |
- अंतर-धार्मिक वर्चस्व: एक धर्म द्वारा दूसरे पर प्रभुत्व। अंतः-धार्मिक वर्चस्व: एक ही धर्म के भीतर कुछ वर्गों (जैसे जाति या लिंग के आधार पर) का दूसरों पर प्रभुत्व।
- धर्मनिरपेक्ष राज्य: जो किसी धर्म को राज्य-धर्म न माने और सभी धर्मों के साथ समान व्यवहार करे।
- भारतीय धर्मनिरपेक्षता की आलोचनाएँ (सामान्य तर्क): इसे पश्चिम से आयातित, अल्पसंख्यकों के प्रति पक्षपाती या अत्यधिक हस्तक्षेपकारी बताया जाता है। समर्थक इन तर्कों के उत्तर में इसकी स्वदेशी जड़ों और समानता-आधारित दृष्टि की बात करते हैं।
उत्तर लिखने के ढाँचे
PDF में प्रश्नों के प्रकार नहीं दिए गए हैं, इसलिए नीचे के ढाँचे सामान्य अभ्यास के लिए सुझाव हैं। प्रश्न में दिए गए अंक के अनुसार उत्तर की लंबाई तय करें।
| प्रश्न का प्रकार | उत्तर कैसे लिखें | उदाहरण |
|---|---|---|
| परिभाषित करें / क्या है? | एक-दो वाक्य में स्पष्ट परिभाषा + एक उदाहरण | "न्यायिक पुनरावलोकन" की परिभाषा और एक उदाहरण |
| अंतर बताइए | दो स्तंभों की तुलना-तालिका (3–4 बिंदु) | मौलिक अधिकार बनाम नीति निर्देशक तत्त्व |
| समझाइए / चर्चा कीजिए | भूमिका (1–2 वाक्य) → 3–4 मुख्य बिंदु (हर बिंदु के साथ तर्क/उदाहरण) → निष्कर्ष | भारतीय संघवाद की विशेषताएँ |
| मूल्यांकन / आलोचना करें | पक्ष और विपक्ष, दोनों के तर्क + अपना संतुलित निष्कर्ष | भारतीय धर्मनिरपेक्षता की आलोचनाएँ और उनके उत्तर |
| संक्षिप्त टिप्पणी | 3–4 वाक्य: क्या है, क्यों महत्त्वपूर्ण है, एक तथ्य/उदाहरण | राज्य वित्त आयोग |
बिंदु 1: नियुक्ति में न्यायिक व्यवस्था की भूमिका (कार्यपालिका का सीमित प्रभाव)।
बिंदु 2: पद से हटाने की कठिन प्रक्रिया (महाभियोग, संसद का विशेष बहुमत)।
बिंदु 3: न्यायिक पुनरावलोकन और जनहित याचिका द्वारा अधिकारों की रक्षा।
निष्कर्ष: स्वतंत्रता के साथ जवाबदेही भी ज़रूरी है, ताकि जनता का विश्वास बना रहे।
अभ्यास-प्रश्न (उत्तर सहित)
ये मौलिक अभ्यास-प्रश्न हैं, आधिकारिक प्रश्न नहीं।
भाग अ: संविधान
उत्तर: अध्यक्ष: डॉ. राजेंद्र प्रसाद; प्रारूप समिति के अध्यक्ष: डॉ. भीमराव अंबेडकर।
उत्तर: 26 नवंबर 1949 को स्वीकार और 26 जनवरी 1950 को लागू।
उत्तर: जवाहरलाल नेहरू ने 13 दिसंबर 1946 को।
उत्तर: समता, स्वतंत्रता, शोषण के विरुद्ध, धार्मिक स्वतंत्रता, संस्कृति और शिक्षा संबंधी तथा संवैधानिक उपचारों का अधिकार।
उत्तर: 44वें संशोधन (1978) के बाद यह मौलिक अधिकार नहीं रहा; अनुच्छेद 300-A में कानूनी अधिकार है।
उत्तर: मौलिक अधिकार न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय हैं, जबकि नीति निर्देशक तत्त्व प्रवर्तनीय नहीं हैं।
उत्तर: मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 से।
उत्तर: सर्वाधिक वोट पाने वाला जीतता है (FPTP) प्रणाली।
उत्तर: राज्य विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों द्वारा एकल संक्रमणीय मत (समानुपातिक प्रतिनिधित्व) प्रणाली से।
उत्तर: निर्वाचक मंडल, जिसमें संसद और राज्य विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य होते हैं।
उत्तर: प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद; वे सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी हैं।
उत्तर: केवल लोकसभा में।
उत्तर: 250 (238 निर्वाचित और 12 मनोनीत)।
उत्तर: लोक लेखा समिति (या प्राक्कलन समिति)।
उत्तर: संसद के प्रत्येक सदन में विशेष बहुमत से महाभियोग प्रस्ताव पारित कर राष्ट्रपति से हटाने का अनुरोध किया जाता है।
उत्तर: कानूनों और कार्यों को संविधान के अनुरूप न पाने पर अमान्य घोषित करने की न्यायालय की शक्ति।
उत्तर: संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची।
उत्तर: पंचायती राज संस्थाओं (ग्रामीण स्थानीय शासन) को संवैधानिक दर्जा देने से।
उत्तर: हर पाँच वर्ष में पंचायतों और नगरपालिकाओं की वित्तीय स्थिति की समीक्षा और राज्य सरकार को सिफ़ारिशें देना।
उत्तर: साधारण बहुमत; विशेष बहुमत; विशेष बहुमत और कम-से-कम आधे राज्यों की स्वीकृति।
उत्तर: केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य (1973)।
भाग ब: राजनीतिक सिद्धांत
उत्तर: जे.एस. मिल ने; किसी की स्वतंत्रता पर तभी रोक लगे जब उसके कार्य से दूसरों को हानि पहुँचे।
उत्तर: नकारात्मक स्वतंत्रता बाहरी रोक-टोक का अभाव है; सकारात्मक स्वतंत्रता व्यक्ति को अपनी क्षमता विकसित करने के अवसर देने से जुड़ी है।
उत्तर: राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक समानता।
उत्तर: वंचित वर्गों को समान अवसर दिलाने के लिए विशेष उपाय (जैसे आरक्षण)।
उत्तर: प्राकृतिक असमानता जन्मजात क्षमताओं की भिन्नता है; सामाजिक असमानता समाज द्वारा बनाई गई है (जाति, लिंग आदि के आधार पर)।
उत्तर: न्याय के नियम चुनते समय यह न जानना कि हम समाज में किस स्थिति में होंगे, ताकि नियम निष्पक्ष बनें।
उत्तर: एक व्यक्ति का अधिकार दूसरों की ज़िम्मेदारी है; अधिकार का उपयोग करते समय दूसरों के अधिकारों का सम्मान आवश्यक है।
उत्तर: 10 दिसंबर 1948 को (संयुक्त राष्ट्र द्वारा)।
उत्तर: यह विचार कि मनुष्य होने के नाते सभी को बुनियादी अधिकार मिलने चाहिए, राष्ट्रों की सीमाओं से परे।
उत्तर: किसी राष्ट्र का अपनी राजनीतिक स्थिति और शासन स्वयं तय करने का अधिकार।
उत्तर: पहले में एक धर्म दूसरे पर हावी होता है; दूसरे में एक ही धर्म के भीतर कुछ वर्ग दूसरों पर हावी होते हैं।
उत्तर: पश्चिमी मॉडल में धर्म और राज्य का पूर्ण पृथक्करण है; भारतीय मॉडल में राज्य सभी धर्मों से 'सैद्धांतिक दूरी' रखता है और ज़रूरत पड़ने पर सुधार के लिए हस्तक्षेप कर सकता है।
8 सप्ताह की तैयारी योजना
यह योजना सुझाव है। हर अध्याय के अंत में उसकी तुलना-तालिका और 3–4 मुख्य शब्द अपनी कॉपी में लिखें।
| सप्ताह | अध्याय | अंक | काम |
|---|---|---|---|
| 1 | अध्याय 1–2: संविधान; अधिकार | 5 + 6 | तिथियाँ, अनुच्छेद, FR बनाम DPSP की तालिका |
| 2 | अध्याय 3–4: चुनाव; कार्यपालिका | 5 + 5 | चुनाव प्रणालियों की तुलना; राष्ट्रपति बनाम प्रधानमंत्री |
| 3 | अध्याय 5–6: विधायिका; न्यायपालिका | 5 + 5 | लोकसभा बनाम राज्यसभा; सर्वोच्च न्यायालय के क्षेत्राधिकार |
| 4 | अध्याय 7–10: संघवाद, स्थानीय शासन, संशोधन, दर्शन | 5 + 5 + 5 + 4 | सूचियाँ, 73वाँ-74वाँ संशोधन, संशोधन के प्रकार |
| 5 | अध्याय 11–13: राजनीतिक सिद्धांत, स्वतंत्रता, समानता | 7 + 6 + 6 | परिभाषाएँ, तुलना-तालिकाएँ, उदाहरण |
| 6 | अध्याय 14–16: सामाजिक न्याय, अधिकार, नागरिकता | 6 + 6 + 6 | रॉल्स का सिद्धांत, अधिकारों के प्रकार |
| 7 | अध्याय 17–18: राष्ट्रवाद, धर्मनिरपेक्षता | 6 + 7 | पश्चिमी बनाम भारतीय मॉडल; आलोचनाएँ और उत्तर |
| 8 | पूरा नमूना पेपर (3:15 घंटे) और गलतियों का सुधार | 100 | 3 दीर्घ उत्तर समयबद्ध लिखें |
आम गलतियाँ और सुधार
| हिस्सा | आम गलती | सुधार |
|---|---|---|
| संविधान-निर्माण | तिथियाँ और नाम मिला देना | 9 दिसंबर 1946 (पहली बैठक), 26 नवंबर 1949 (स्वीकृति), 26 जनवरी 1950 (लागू) अलग-अलग लिखकर याद रखें |
| अधिकार | FR और DPSP को एक जैसा मानना | प्रवर्तनीय बनाम अप्रवर्तनीय का अंतर पहले वाक्य में लिखें |
| चुनाव | लोकसभा और राज्यसभा की चुनाव प्रणाली मिलाना | लोकसभा: प्रत्यक्ष (FPTP); राज्यसभा: अप्रत्यक्ष (एकल संक्रमणीय मत) |
| विधायिका | राज्यसभा को धन विधेयक पर पूर्ण शक्ति देना | धन विधेयक केवल लोकसभा में; राज्यसभा केवल सिफ़ारिश कर सकती है |
| संशोधन | बहुमतों के प्रकार गड़बड़ाना | तीन प्रकार की तालिका बनाकर रखें |
| राजनीतिक सिद्धांत | अवधारणा का अर्थ बिना उदाहरण के लिखना | हर परिभाषा के साथ एक वास्तविक उदाहरण जोड़ें |
| धर्मनिरपेक्षता | भारतीय मॉडल को "धर्म से दूरी" लिख देना | "सैद्धांतिक दूरी" (principled distance) लिखें; वह तटस्थ नहीं, सुधार-सक्षम है |
| उत्तर-लेखन | निष्कर्ष न लिखना | हर विस्तृत उत्तर के अंत में 1–2 वाक्य का निष्कर्ष रखें |
सामान्य प्रश्न
यह भी देखें
- कक्षा 11 अर्थशास्त्र पाठ्यक्रम 2026-27 — अर्थशास्त्र की इकाईवार अंक योजना
- कक्षा 11 जीव विज्ञान पाठ्यक्रम 2026-27 — जीव विज्ञान के 70 + 30 अंक
- कक्षा 11 English पाठ्यक्रम 2026-27 — English का खंडवार अंक विभाजन
- कक्षा 11 हिंदी अनिवार्य पाठ्यक्रम 2026-27 — हिंदी अनिवार्य का अंक विभाजन
- कक्षा 11 — कक्षा 11 के सभी लेख · कक्षा 12 · कक्षा 10
- RBSE — राजस्थान बोर्ड केंद्रित सामग्री
- मॉडल पेपर · ऑनलाइन टेस्ट
- NCERT Classes — कक्षा 6 से 12 की निःशुल्क अध्ययन सामग्री · Sarkari Service Prep — सरकारी भर्ती परीक्षाओं की तैयारी (भारतीय संविधान और राजनीतिक सिद्धांत RAS, पटवारी, शिक्षक भर्ती जैसी परीक्षाओं में बार-बार पूछे जाने वाले विषय हैं)
संदर्भ और पद्धति
- माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, राजस्थान, अजमेर: पाठ्यक्रम सत्र 2026–2027, विषय: राजनीति विज्ञान (Political Science), विषय कोड-11, कक्षा 11, पृष्ठ 19–24। आधिकारिक PDF ↗
यह लेख कैसे तैयार किया गया
- बोर्ड के PDF से सीधे लिया गया: परीक्षा योजना, दोनों भाग, सभी 18 अध्यायों के अंक (जोड़ 100) और विषय-बिंदु तथा निर्धारित पुस्तकें। हिंदी और अंग्रेज़ी सूचियों का मिलान किया गया।
- लेखक द्वारा जोड़ा गया (शैक्षिक सामग्री): अध्यायों के मुख्य तथ्य और तुलना-तालिकाएँ, उत्तर लिखने के ढाँचे, अभ्यास-प्रश्न, समय-प्रबंधन और 8 सप्ताह की योजना। तथ्य NCERT स्तर के हैं; परीक्षा में अपनी पुस्तक के अनुसार ही लिखें।
- जो नहीं बताया गया: PDF में जो जानकारी नहीं है (प्रश्नों के प्रकार, परियोजना), उसे तथ्य की तरह नहीं लिखा गया। संवैधानिक प्रावधान और संख्याएँ बदल सकती हैं, इसलिए पुस्तक के नवीनतम संस्करण और विद्यालय के निर्देश से मिलान करें।

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