RBSE कक्षा 11 जीव विज्ञान (Biology, विषय कोड-42) का सत्र 2026–27 का पाठ्यक्रम राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, अजमेर ने जारी किया है। इसमें सैद्धांतिक परीक्षा 70 अंक की (3:15 घंटे) और प्रायोगिक परीक्षा 30 अंक की (4 घंटे) है, यानी कुल 100 अंक। सैद्धांतिक भाग में 5 इकाइयाँ और 19 अध्याय हैं, और बोर्ड ने हर इकाई के अंक अलग-अलग दिए हैं।
इस लेख में पाँचों इकाइयों के अंक, सभी 19 अध्यायों के विषय-बिंदु, हर अध्याय के मुख्य तथ्य और तुलना-तालिकाएँ, प्रायोगिक परीक्षा की पूरी योजना (13 प्रयोग और 11 प्रदर्श/spotting मद), अभ्यास-प्रश्न (उत्तर सहित), 8 सप्ताह की योजना और FAQ हैं। जहाँ बोर्ड का PDF कोई जानकारी नहीं देता (जैसे अध्यायवार अंक या प्रश्नों के प्रकार), वहाँ यह साफ़ लिखा है।
- कुल अंक: 100 = सैद्धांतिक 70 (3:15 घंटे) + प्रायोगिक 30 (4 घंटे)
- इकाइयाँ: 5; अध्याय: 19; बोर्ड ने केवल इकाईवार अंक दिए हैं
- सबसे ज़्यादा अंक (18-18): इकाई 4 पादप कार्यिकी और इकाई 5 मानव शरीर विज्ञान
- इकाई 3 (कोशिका): 15 अंक · इकाई 2: 12 अंक · इकाई 1: 7 अंक
- प्रायोगिक (30): वनस्पति विज्ञान बृहद् 4 + जंतु विज्ञान बृहद् 4 + वनस्पति लघु 3 + जंतु लघु 3 + प्रदर्श 8 + अभिलेख 4 + मौखिक 4
- पुस्तकें: जीव विज्ञान कक्षा 11 और जीव विज्ञान प्रयोगशाला मैनुअल कक्षा 11 (NCERT)
आधिकारिक 2026–27 पाठ्यक्रम PDF खोलें — जीव विज्ञान, पृष्ठ 127–134 ↗
| बोर्ड | माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, राजस्थान, अजमेर |
|---|---|
| सत्र | 2026–2027 |
| विषय / कोड | जीव विज्ञान (Biology) / 42 |
| सैद्धांतिक | 70 अंक · 3:15 घंटे |
| प्रायोगिक | 30 अंक · 4 घंटे |
| पूर्णांक | 100 |
| इकाइयाँ / अध्याय | 5 / 19 |
| निर्धारित पुस्तकें | जीव विज्ञान कक्षा 11; जीव विज्ञान प्रयोगशाला मैनुअल कक्षा 11 (NCERT) |
इकाईवार अंक विभाजन (सैद्धांतिक 70 अंक)
| परीक्षा | समय (घंटे) | अंक |
|---|---|---|
| सैद्धांतिक | 3:15 | 70 |
| प्रायोगिक | 4:00 | 30 |
| कुल | 100 |
बोर्ड ने 5 इकाइयाँ और उनके अंक इस प्रकार दिए हैं:
| इकाई | नाम | Unit | अध्याय | अंक |
|---|---|---|---|---|
| 1 | जीव जगत में विविधता | Diversity in the Living World | 1–4 | 7 |
| 2 | पादप एवं प्राणियों में संरचनात्मक संगठन | Structural Organisation in Plants and Animals | 5–7 | 12 |
| 3 | कोशिका: संरचना एवं कार्य | Cell: Structure and Functions | 8–10 | 15 |
| 4 | पादप कार्यिकी (शरीर क्रियात्मकता) | Plant Physiology | 11–13 | 18 |
| 5 | मानव शरीर विज्ञान | Human Physiology | 14–19 | 18 |
| कुल | 19 अध्याय | 70 |
अंकों के क्रम से पढ़ें
| अंक | इकाई | जोड़ |
|---|---|---|
| 18 | इकाई 4 (पादप कार्यिकी) और इकाई 5 (मानव शरीर विज्ञान) | 36 |
| 15 | इकाई 3 (कोशिका: संरचना एवं कार्य) | 15 |
| 12 | इकाई 2 (संरचनात्मक संगठन) | 12 |
| 7 | इकाई 1 (जीव जगत में विविधता) | 7 |
| कुल | 70 |
- 70 में से 36 अंक (आधे से ज़्यादा) दो शरीर क्रिया वाली इकाइयों (पादप और मानव) के हैं। इनमें प्रक्रियाएँ, चित्र और तुलना सबसे ज़्यादा काम आती हैं।
- इकाई 3 (15 अंक) कोशिका और कोशिका-विभाजन की है; यह आगे की पूरी जीव विज्ञान की नींव है।
- इकाई 1 (7 अंक) में चार अध्याय हैं, पर अंक सबसे कम हैं। इसमें याद रखने वाली सूचियाँ और उदाहरण हैं, जो तालिका बनाकर जल्दी तैयार हो जाते हैं।
- PDF में हर इकाई के भीतर अध्यायवार अंक अलग से नहीं दिए गए हैं।
समय-प्रबंधन
सैद्धांतिक प्रश्न पत्र के लिए 195 मिनट हैं। नीचे का बँटवारा सुझाव है:
| इकाई | अंक | सुझाया समय (मिनट) |
|---|---|---|
| इकाई 1 | 7 | 15 |
| इकाई 2 | 12 | 30 |
| इकाई 3 | 15 | 40 |
| इकाई 4 | 18 | 45 |
| इकाई 5 | 18 | 55 |
| दोहराव और जाँच | — | 10 |
| कुल | 70 | 195 |
PDF में प्रश्नों के प्रकार (objective, short, long) और उनके अंक नहीं दिए गए हैं, इसलिए प्रश्न-पत्र की संरचना के लिए विद्यालय में मिले नमूना पत्र देखें। जीव विज्ञान में आरेख (diagram) वाले उत्तरों के लिए अतिरिक्त समय रखें।
PDF की जाँच: जिन बातों की पुष्टि करें
PDF के हिंदी और अंग्रेज़ी भागों को साथ पढ़ने पर ये बातें दिखीं। इनका मतलब यह नहीं कि कुछ हटा या जुड़ा है; मतलब यह है कि अंतिम पुष्टि अपने विद्यालय या बोर्ड के निर्देश से करनी चाहिए।
| बात | PDF में क्या दिखा | क्या करें |
|---|---|---|
| अध्यायवार अंक | बोर्ड ने केवल पाँच इकाइयों के अंक दिए हैं (7, 12, 15, 18, 18); 19 अध्यायों के अलग अंक नहीं हैं | तैयारी सभी अध्यायों की करें; अंक-भार इकाई स्तर पर ही देखें |
| अध्यायों की सूची | PDF में 19 अध्याय सूचीबद्ध हैं। जीव विज्ञान की कुछ किताबों में आने वाले पादपों में परिवहन, खनिज पोषण और पाचन एवं अवशोषण जैसे अध्याय इस सूची में अलग से नहीं हैं (पाचन तंत्र का उल्लेख केवल मेंढक के संदर्भ में, अध्याय 7 में है) | अपनी किताब का संस्करण और विद्यालय का निर्देश देखकर पुष्टि करें |
| अध्याय 4: प्राणि जगत | अंग्रेज़ी सूची में कुछ नाम वर्तनी की भूल के साथ छपे हैं (जैसे Ascheminthes, Arthoropoda, Cehalochordata)। इस लेख में सही वर्तनी (Aschelminthes, Arthropoda, Cephalochordata) प्रयोग की गई है | परीक्षा में पुस्तक की वर्तनी लिखें |
| प्रायोगिक परीक्षा | समय 4 घंटे और अधिकतम अंक 30 दिए हैं; घटकों का जोड़ भी 30 है (4 + 4 + 3 + 3 + 8 + 4 + 4) | कोई अंतर नहीं मिला |
| प्रायोगिक सूची | हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों सूचियों में प्रयोग और प्रदर्श (spotting) मद समान हैं | कोई अंतर नहीं मिला |
इकाई 1: जीव जगत में विविधता (7 अंक)
इस इकाई में चार अध्याय हैं: जीव जगत, जीव जगत का वर्गीकरण, वनस्पति जगत और प्राणि जगत। अंक कम हैं, पर विषय-वस्तु सूचियों और उदाहरणों की है, इसलिए तालिकाएँ बनाकर पढ़ना सबसे उपयोगी है।
अध्याय 1: जीव जगत
PDF के विषय: जीव जगत में विविधता; वर्गीकरण की आवश्यकता; वर्गिकी (Systematics); द्विपद नाम पद्धति; वर्गिकी संवर्ग — जाति, वंश, कुल, गण, वर्ग, संघ, जगत।
- द्विपद नाम पद्धति कैरोलस लिनियस ने दी। नाम के दो भाग होते हैं: पहला वंश (genus) और दूसरा जाति (species)। जैसे Mangifera indica (आम)।
- लिखने के नियम: वंश का पहला अक्षर बड़े (capital) और जाति का छोटे अक्षर में; छपे हुए पाठ में दोनों तिरछे (italic) और हाथ से लिखने पर अलग-अलग रेखांकित।
- वर्गिकी का क्रम (नीचे से ऊपर): जाति → वंश → कुल → गण → वर्ग → संघ (पादपों में division) → जगत।
- उदाहरण (मनुष्य): जाति sapiens, वंश Homo, कुल Hominidae, गण Primata, वर्ग Mammalia, संघ Chordata, जगत Animalia।
अध्याय 2: जीव जगत का वर्गीकरण
PDF के विषय: पाँच जगत वर्गीकरण; मुख्य विशेषताएँ और वर्गीकरण — मोनेरा जगत (आद्य बैक्टीरिया, यूबैक्टीरिया), प्रोटिस्टा जगत (क्राइसोफाइट, डाइनोफ्लैजेलेट, यूग्लीनॉइड, अवपंक कवक, प्रोटोजोआ), कवक जगत (फाइकोमाइसिटीज, एस्कोमाइसिटीज, बेसिडियोमाइसिटीज, ड्यूटेरोमाइसिटीज), पादप जगत, जंतु जगत; विषाणु, वाइरॉइड, प्रायॉन तथा लाइकेन।
| जगत | कोशिका प्रकार | कोशिका भित्ति | पोषण | उदाहरण |
|---|---|---|---|---|
| मोनेरा | प्रोकैरियोटिक | अधिकांश में पेप्टिडोग्लाइकन | स्वपोषी या परपोषी | जीवाणु, नील-हरित शैवाल, आद्य बैक्टीरिया |
| प्रोटिस्टा | यूकैरियोटिक (एककोशिकीय) | कुछ में उपस्थित | स्वपोषी या परपोषी | अमीबा, पैरामीशियम, यूग्लीना, डाइएटम |
| कवक | यूकैरियोटिक | काइटिन की बनी | परपोषी (मृतोपजीवी या परजीवी) | यीस्ट, मशरूम, राइज़ोपस |
| पादप | यूकैरियोटिक (बहुकोशिकीय) | सेल्युलोज़ की | स्वपोषी (प्रकाश संश्लेषण) | शैवाल से लेकर पुष्पी पादप तक |
| जंतु | यूकैरियोटिक (बहुकोशिकीय) | अनुपस्थित | परपोषी | स्पंज से लेकर मनुष्य तक |
- पाँच जगत वर्गीकरण आर.एच. व्हिटेकर ने 1969 में दिया।
- आद्य बैक्टीरिया अत्यंत कठोर परिस्थितियों में रहते हैं (जैसे अत्यधिक लवणीय स्थान, गर्म झरने और दलदल में मीथेन बनाने वाले)।
- विषाणु (virus): न्यूक्लिक अम्ल और प्रोटीन आवरण (कैप्सिड) से बने होते हैं और केवल जीवित कोशिका में गुणन करते हैं। वाइरॉइड: केवल मुक्त RNA (प्रोटीन आवरण नहीं)। प्रायॉन: असामान्य रूप से मुड़े संक्रामक प्रोटीन (जैसे पागल गाय रोग)।
- लाइकेन: शैवाल और कवक का सहजीवी संबंध; शैवाल भोजन बनाता है और कवक सुरक्षा व जल देता है। वायु-प्रदूषण (SO₂) के सूचक के रूप में भी जाने जाते हैं।
अध्याय 3: वनस्पति जगत
PDF के विषय: पादपों का प्रमुख समूहों में वर्गीकरण; प्रमुख विशेषताएँ और उदाहरण — शैवाल (क्लोरोफाइसी, फीयोफाइसी, रोडोफाइसी), ब्रायोफाइट (लिवरवर्ट, मॉस), टेरिडोफाइट, जिम्नोस्पर्म।
| समूह | मुख्य लक्षण | उदाहरण |
|---|---|---|
| हरे शैवाल (क्लोरोफाइसी) | क्लोरोफिल a, b; भोजन मंड (स्टार्च) के रूप में | क्लैमाइडोमोनास, वॉल्वॉक्स, स्पाइरोगायरा |
| भूरे शैवाल (फीयोफाइसी) | फ्यूकोज़ैंथिन वर्णक; भोजन लैमिनेरिन और मैनिटॉल | लैमिनेरिया, फ्यूकस |
| लाल शैवाल (रोडोफाइसी) | फाइकोएरिथ्रिन वर्णक; भोजन फ्लोरिडियन स्टार्च | पॉलीसाइफोनिया, पोरफाइरा |
| ब्रायोफाइट | जल और भूमि के बीच के पादप; संवहन ऊतक नहीं; मुख्य पादप गैमीटोफाइट | लिवरवर्ट: मार्केंशिया; मॉस: फ्यूनेरिया |
| टेरिडोफाइट | संवहन ऊतक हैं, पर बीज नहीं बनते | फर्न, सिलैजिनेला, इक्विसीटम |
| जिम्नोस्पर्म | नग्न बीज (अंडाशय नहीं); संवहन ऊतक उपस्थित | पाइनस, साइकस |
पादपों में पीढ़ी एकांतरण (haploid गैमीटोफाइट और diploid स्पोरोफाइट) मिलता है; ब्रायोफाइट में गैमीटोफाइट प्रमुख है और टेरिडोफाइट से आगे स्पोरोफाइट प्रमुख होता है।
अध्याय 4: प्राणि जगत
PDF के विषय: वर्गीकरण का आधार; प्राणियों का वर्गीकरण; प्रमुख विशेषताएँ और कुछ उदाहरण — अरज्जुकी: पोरिफेरा, सीलेंटेरेटा, टीनोफोर, प्लैटीहेल्मिंथीज, ऐस्केल्मिंथीज, एनेलिडा, आर्थ्रोपोडा, मोलस्का, एकाइनोडर्मेटा, हेमीकॉर्डेटा; रज्जुकी: यूरोकॉर्डेटा, सेफैलोकॉर्डेटा और वर्टीब्रेटा (साइक्लोस्टोमेटा, कॉन्ड्रिक्थीज, ऑस्टिक्थीज, उभयचर, सरीसृप, पक्षी, स्तनधारी)।
| संघ | पहचान | उदाहरण |
|---|---|---|
| पोरिफेरा | स्पंज; कोशिका स्तर का संगठन; नाल तंत्र | साइकॉन, स्पंजिला |
| सीलेंटेरेटा (नाइडेरिया) | दंश-कोशिकाएँ (cnidoblast); अरीय सममिति | हाइड्रा, ऑरेलिया |
| टीनोफोर | कंकत पट्टिकाएँ (comb plates); जैव-संदीप्ति | प्लूरोब्रैकिया |
| प्लैटीहेल्मिंथीज | चपटे कृमि; ज्वाला कोशिकाएँ | फैसिओला, टीनिया |
| ऐस्केल्मिंथीज | गोल कृमि; कूटगुहीय | ऐस्कैरिस |
| एनेलिडा | शरीर खंडित (metameric) | केंचुआ (पेरिटिमा), जोंक |
| आर्थ्रोपोडा | सबसे बड़ा संघ; संधियुक्त पाद | तिलचट्टा, मधुमक्खी, रेशम कीट |
| मोलस्का | कोमल शरीर, कैल्सियमी कवच | पाइला, ऑक्टोपस |
| एकाइनोडर्मेटा | काँटेदार त्वचा; जल संवहन तंत्र | तारा मछली (ऐस्टेरियास) |
| हेमीकॉर्डेटा | कृमिरूप, समुद्री | बैलैनोग्लॉसस |
- रज्जुकी (Chordata) के लक्षण: पृष्ठ-रज्जु (notochord), पृष्ठ खोखली तंत्रिका रज्जु और ग्रसनीय क्लोम दरारें।
- कशेरुकी के वर्ग: साइक्लोस्टोमेटा (जबड़ा-रहित, जैसे पेट्रोमाइज़ॉन), कॉन्ड्रिक्थीज़ (उपास्थिल मछली, जैसे शार्क/स्कॉलियोडॉन), ऑस्टिक्थीज़ (अस्थिल मछली, जैसे रोहू), उभयचर (मेंढक), सरीसृप (साँप, छिपकली), पक्षी (कबूतर) और स्तनधारी (दुग्ध ग्रंथियाँ; मनुष्य, खरगोश)।
इकाई 2: पादप एवं प्राणियों में संरचनात्मक संगठन (12 अंक)
इस इकाई में तीन अध्याय हैं: पुष्पी पादपों की आकारिकी, पुष्पी पादपों का शारीर (anatomy) और प्राणियों में संरचनात्मक संगठन (मेंढक)। आरेख और तुलना यहाँ सबसे ज़्यादा काम आते हैं।
अध्याय 5: पुष्पी पादपों की आकारिकी
PDF के विषय: मूल (मूल के क्षेत्र); तना; पत्ती (शिराविन्यास, पत्ती के प्रकार, पर्णविन्यास); पुष्पक्रम (असीमाक्षी, ससीमाक्षी); पुष्प — बाह्यदलपुंज (कैलिक्स), दलपुंज (कोरोला), पुमंग, जायांग; बीजांडन्यास; फल; बीज — द्विबीजपत्री और एकबीजपत्री बीज की संरचना; प्ररूपी पुष्पी पादप का अर्ध तकनीकी विवरण; कुछ महत्वपूर्ण कुलों का वर्णन — सोलेनेसी, लिलिएसी, फैबेसी।
- मूल के क्षेत्र: मूल गोप, विभज्योतक क्षेत्र, दीर्घन क्षेत्र और परिपक्वन क्षेत्र (मूल रोम यहीं होते हैं)।
- जड़ों के प्रकार: मूसला (द्विबीजपत्री), झकड़ा या गुच्छित (एकबीजपत्री) और अपस्थानिक (मूल के अलावा किसी भाग से निकली)।
- पर्णविन्यास: एकांतरित (प्रत्येक पर्व पर एक पत्ती, जैसे सरसों), सम्मुख (दो पत्तियाँ, जैसे अमरूद) और चक्रिक (दो से अधिक, जैसे एलस्टोनिया)।
- पुष्पक्रम: असीमाक्षी में मुख्य अक्ष की वृद्धि अनिश्चित और पुष्प अग्रभिसारी क्रम में लगते हैं; ससीमाक्षी में मुख्य अक्ष पुष्प में समाप्त होकर वृद्धि रुक जाती है।
- बीजांडन्यास के प्रकार: सीमांत, स्तंभीय, भित्तीय, मुक्त स्तंभीय और आधारी।
- बीज: द्विबीजपत्री बीज (जैसे चना) में दो बीजपत्र और एकबीजपत्री बीज (जैसे मक्का) में एक बीजपत्र (स्क्यूटेलम) और भ्रूणपोष होता है।
| कुल | उदाहरण | पुष्प-सूत्र (NCERT के अनुसार) | विशेष |
|---|---|---|---|
| सोलेनेसी | आलू, टमाटर, बैंगन, धतूरा | ⊕ ⚥ K₍₅₎ C₍₅₎ A₅ G₍₂₎ | स्तंभीय बीजांडन्यास; पुष्प अरीय सममित, उभयलिंगी |
| लिलिएसी | लिली, प्याज़, लहसुन, एलो | Br ⊕ ⚥ P₍₃₊₃₎ A₃₊₃ G₍₃₎ | परिदलपुंज (बाह्यदल-दल समान), त्रितयी पुष्प |
| फैबेसी (लेग्यूमिनोसी) | मटर, चना, सेम | % ⚥ K₍₅₎ C₁₊₂₊₍₂₎ A₍₉₎₊₁ G₁ | सीमांत बीजांडन्यास; पापिलियोनेसियस दलपुंज; फल फली |
अध्याय 6: पुष्पी पादपों का शारीर
PDF के विषय: ऊतक तंत्र — बाह्य त्वचीय ऊतक तंत्र, भरण ऊतक तंत्र, संवहन ऊतक तंत्र; द्विबीजपत्री और एकबीजपत्री पादपों की आंतरिक संरचना — मूल, तना और पत्ती।
| भाग | द्विबीजपत्री | एकबीजपत्री |
|---|---|---|
| मूल | जाइलम 2–6 समूह (द्वयादिक से षट्कादिक); मज्जा छोटी या अनुपस्थित | जाइलम 6 से अधिक समूह (बहुसमूही); मज्जा बड़ी |
| तना | संवहन बंडल वलय में; खुले (एधा उपस्थित); भरण ऊतक वल्कुट और मज्जा में बँटा | संवहन बंडल बिखरे हुए; बंद (एधा अनुपस्थित); भरण ऊतक अविभेदित |
| पत्ती | पृष्ठाधारी (dorsiventral); पर्णमध्योतक खंभ और स्पंजी में बँटा | समद्विपार्श्वीय (isobilateral); पर्णमध्योतक एक-सा; आवर्ती (bulliform) कोशिकाएँ |
- ऊतक तंत्र: बाह्य त्वचीय (त्वचा, रंध्र, रोम), भरण (वल्कुट, मज्जा, अंतःत्वचा आदि) और संवहन (जाइलम, फ्लोएम, एधा)।
- जाइलम जल और खनिज का और फ्लोएम भोजन का संवहन करता है।
अध्याय 7: प्राणियों में संरचनात्मक संगठन
PDF के विषय: अंग और अंग तंत्र; मेंढक — बाह्य आकारिकी, आंतरिक आकारिकी (पाचन तंत्र, श्वसन तंत्र, परिसंचरण तंत्र, उत्सर्जन तंत्र, तंत्रिका तंत्र, नर एवं मादा जनन तंत्र)।
- मेंढक (Rana tigrina) अनियततापी (poikilotherm) है और ठंड व गर्मी में क्रमशः शीतनिष्क्रियता और ग्रीष्मनिष्क्रियता में रहता है।
- त्वचा: नम और श्लेष्मा-युक्त; इससे श्वसन भी होता है। श्वसन: जल में त्वचा से, स्थल पर त्वचा और फेफड़ों से।
- परिसंचरण: हृदय तीन कक्षों का (दो आलिंद और एक निलय); रुधिर में लाल रुधिर कणिकाएँ केंद्रक-युक्त होती हैं।
- जनन: नर में वृषण, वास अपवाहिका और अवस्कर; मादा में अंडाशय और अंडवाहिनी। निषेचन बाह्य होता है।
इकाई 3: कोशिका: संरचना एवं कार्य (15 अंक)
अध्याय 8: कोशिका: जीवन की इकाई
PDF के विषय: कोशिका का परिचय; कोशिका सिद्धांत; कोशिका का समग्र अध्ययन; प्रोकैरियोटिक कोशिकाएँ — कोशिका आवरण और उसके रूपांतरण, राइबोसोम व अंतर्विष्ट पिंड; यूकैरियोटिक कोशिकाएँ (पादप और जंतु) — कोशिका झिल्ली, कोशिका भित्ति, अंतःझिल्लीतंत्र, अंतर्द्रव्यी जालिका, गॉल्जी उपकरण, लयनकाय, रिक्तिका, माइटोकॉन्ड्रिया, लवक, राइबोसोम, कोशिकाकंकाल, पक्ष्माभ व कशाभिका, तारककाय व तारक केंद्र, केंद्रक (गुणसूत्र), सूक्ष्मकाय।
- कोशिका सिद्धांत: श्लाइडेन और श्वान ने सभी जीवों के कोशिका से बने होने का सिद्धांत दिया (1838–39); रुडोल्फ़ वर्चो ने 1855 में जोड़ा कि नई कोशिका पहले से मौजूद कोशिका से ही बनती है।
- प्रोकैरियोटिक और यूकैरियोटिक: प्रोकैरियोटिक में सुसंगठित केंद्रक और झिल्ली-युक्त कोशिकांग नहीं होते और राइबोसोम 70S के होते हैं; यूकैरियोटिक में दोनों होते हैं और साइटोप्लाज़्म के राइबोसोम 80S के होते हैं।
- कोशिका झिल्ली: फ्लूइड मोज़ेक मॉडल (सिंगर और निकोलसन, 1972), जिसमें लिपिड की द्विस्तरीय परत में प्रोटीन धँसे या जुड़े होते हैं।
| कोशिकांग | मुख्य कार्य | विशेष बात |
|---|---|---|
| अंतर्द्रव्यी जालिका (ER) | प्रोटीन (खुरदरी ER) और लिपिड (चिकनी ER) का संश्लेषण | खुरदरी ER पर राइबोसोम लगे होते हैं |
| गॉल्जी उपकरण | पदार्थों का संशोधन, पैकेजिंग और परिवहन | स्रावी कोशिकाओं में अधिक विकसित |
| लयनकाय (Lysosome) | अपचयन, यानी जल-अपघटनी एंजाइमों से पाचन | आत्महत्या की थैली भी कहा जाता है |
| माइटोकॉन्ड्रिया | ऑक्सीश्वसन और ATP का निर्माण | दोहरी झिल्ली; अपना DNA और 70S राइबोसोम |
| लवक (Plastid) | हरितलवक में प्रकाश संश्लेषण; अन्य लवक रंग या भोजन का संचय करते हैं | हरितलवक में भी DNA और 70S राइबोसोम; केवल पादपों में |
| राइबोसोम | प्रोटीन संश्लेषण | झिल्ली-रहित; rRNA और प्रोटीन से बने |
| रिक्तिका | संचय, परासरण नियमन | पादप कोशिका में बड़ी और केंद्रीय |
| तारककाय/तारक केंद्र | कोशिका विभाजन में तर्कु बनाने में सहायक | जंतु कोशिका में; 9 त्रिक सूक्ष्मनलिकाएँ (9+0) |
| पक्ष्माभ और कशाभिका | गति | अंदर 9+2 व्यवस्था की सूक्ष्मनलिकाएँ |
| केंद्रक | आनुवंशिक पदार्थ (गुणसूत्र) का संचय और नियंत्रण | केंद्रक झिल्ली, केंद्रिका और क्रोमैटिन |
अध्याय 9: जैव अणु
PDF के विषय: रासायनिक संघटन का विश्लेषण; प्राथमिक और द्वितीयक उपापचयज; जैव वृहत अणु; प्रोटीन, पॉलीसैकेराइड, न्यूक्लिक अम्ल; प्रोटीन की संरचना; एंजाइम — रासायनिक अभिक्रियाएँ, एंजाइम द्वारा होने वाले रासायनिक रूपांतरण, एंजाइम क्रिया को प्रभावित करने वाले कारक, एंजाइम का नामकरण व वर्गीकरण, सहकारक।
- प्राथमिक उपापचयज (शर्करा, अमीनो अम्ल, न्यूक्लियोटाइड) जीव की सामान्य वृद्धि में काम आते हैं; द्वितीयक उपापचयज (क्षाराभ, वर्णक, रबर, औषधियाँ) सीधे वृद्धि में नहीं, पर पारिस्थितिक भूमिका निभाते हैं।
- पॉलीसैकेराइड: स्टार्च और ग्लाइकोजन (भोजन संचय), सेल्युलोज़ (पादप कोशिका भित्ति) और काइटिन (कवक और संधिपाद का बाह्य कंकाल)।
- प्रोटीन की संरचना: प्राथमिक (अमीनो अम्लों का क्रम), द्वितीयक (α-कुंडली, β-प्लेटेड शीट), तृतीयक (त्रिविम आकृति) और चतुर्थक (एक से अधिक पॉलीपेप्टाइड का संयोजन)।
- एंजाइम जैव उत्प्रेरक हैं जो सक्रियण ऊर्जा घटाते हैं। क्रिया को प्रभावित करने वाले कारक: ताप, pH, क्रियाधार की सांद्रता और संदमक (inhibitor)।
- एंजाइमों के छह वर्ग: ऑक्सीडोरिडक्टेज़, ट्रांसफ़रेज़, हाइड्रोलेज़, लायेज़, आइसोमरेज़ और लाइगेज़।
- सहकारक: प्रोस्थेटिक समूह (प्रोटीन से मज़बूती से जुड़े), सहएंजाइम (अस्थायी रूप से जुड़े, जैसे NAD, NADP) और धातु आयन।
अध्याय 10: कोशिका चक्र और कोशिका विभाजन
PDF के विषय: कोशिका चक्र और उसकी प्रावस्थाएँ; सूत्री विभाजन — प्रोफेज, मेटाफेज, एनाफेज, टीलोफेज, कोशिकाद्रव्य विभाजन; सूत्री विभाजन का महत्व; अर्धसूत्री विभाजन — अर्धसूत्री I, अर्धसूत्री II; अर्धसूत्री विभाजन का महत्व।
- कोशिका चक्र: अंतरावस्था (G₁, S, G₂) और M प्रावस्था (विभाजन)। S प्रावस्था में DNA का द्विगुणन होता है।
- समसूत्री विभाजन: प्रोफेज (गुणसूत्र संघनित होते हैं), मेटाफेज (गुणसूत्र मध्य रेखा पर), एनाफेज (सेंट्रोमियर बँटकर अर्धगुणसूत्र ध्रुवों की ओर) और टीलोफेज (दो नए केंद्रक बनते हैं), फिर कोशिकाद्रव्य विभाजन।
- अर्धसूत्री I के प्रोफेज की उप-अवस्थाएँ: लेप्टोटीन, जाइगोटीन (सूत्र-युग्मन), पैकीटीन (जीन-विनिमय, यानी क्रॉसिंग ओवर), डिप्लोटीन और डायकाइनेसिस।
- महत्व: समसूत्री विभाजन वृद्धि और मरम्मत में काम आता है और गुणसूत्र संख्या वही रखता है; अर्धसूत्री विभाजन गुणसूत्र संख्या आधी करता है और जीन-विनिमय से आनुवंशिक विविधता लाता है।
| तुलना | समसूत्री | अर्धसूत्री |
|---|---|---|
| कहाँ | कायिक कोशिकाओं में | जनन कोशिकाओं में (युग्मक बनने में) |
| विभाजनों की संख्या | एक | दो (अर्धसूत्री I और II) |
| पुत्री कोशिकाएँ | 2, जनक के समान | 4, गुणसूत्र संख्या आधी |
| जीन-विनिमय | नहीं | हाँ (प्रोफेज I में) |
| उदाहरण (मनुष्य, 2n = 46) | 46 गुणसूत्र वाली 2 कोशिकाएँ | 23 गुणसूत्र वाली 4 कोशिकाएँ |
इकाई 4: पादप कार्यिकी (18 अंक)
इस इकाई में तीन अध्याय हैं: उच्च पादपों में प्रकाश संश्लेषण, पादपों में श्वसन और पादप वृद्धि एवं परिवर्धन। यहाँ प्रक्रियाओं का क्रम, स्थान और उत्पाद याद रखना सबसे ज़रूरी है।
अध्याय 11: उच्च पादपों में प्रकाश संश्लेषण
PDF के विषय: प्रकाश संश्लेषण के बारे में हमारी जानकारी; प्रारंभिक प्रयोग; प्रकाश संश्लेषण का स्थान; प्रकाश संश्लेषण में भाग लेने वाले वर्णक; प्रकाश अभिक्रिया; इलेक्ट्रॉन परिवहन — जल का विघटन, चक्रीय और अचक्रीय फोटोफॉस्फोरिलेशन, रसोपरासरणी परिकल्पना; ATP और NADPH का उपयोग — CO₂ का प्राथमिक ग्राही, केल्विन चक्र, C₄ पथ; प्रकाश श्वसन; प्रकाश संश्लेषण को प्रभावित करने वाले कारक।
- समीकरण: 6CO₂ + 12H₂O → C₆H₁₂O₆ + 6O₂ + 6H₂O (प्रकाश और क्लोरोफिल की उपस्थिति में)।
- प्रारंभिक प्रयोग: प्रीस्टले (1770) ने पादप द्वारा वायु को शुद्ध करने का प्रयोग किया; इंगेनहाउस ने दिखाया कि यह केवल धूप में हरे भागों में होता है; सैक्स ने स्टार्च बनना दिखाया; एंजेलमैन ने क्रिया-स्पेक्ट्रम दिखाया; वैन नील ने बताया कि O₂ जल से निकलती है; और केल्विन ने रेडियोधर्मी ¹⁴C से CO₂ के स्थिरीकरण का पथ खोजा।
- स्थान: हरितलवक। प्रकाश अभिक्रिया ग्रैना की थाइलेकॉइड झिल्ली में और जैव-संश्लेषणी (केल्विन) अभिक्रिया स्ट्रोमा में होती है।
- वर्णक: क्लोरोफिल a (मुख्य वर्णक), क्लोरोफिल b, ज़ैंथोफिल और कैरोटीन।
- प्रकाश तंत्र: PS I (P700) और PS II (P680)। अचक्रीय फोटोफॉस्फोरिलेशन में ATP, NADPH और O₂ बनते हैं; चक्रीय में केवल PS I काम करता है और केवल ATP बनता है।
- रसोपरासरणी परिकल्पना: झिल्ली के आर-पार प्रोटॉन-प्रवणता ATP सिंथेज़ से ATP बनाती है।
- केल्विन चक्र: कार्बोक्सिलीकरण (CO₂ + RuBP → 3-PGA, एंजाइम RuBisCO), अपचयन और RuBP का पुनर्जनन। एक ग्लूकोज़ के लिए 6 चक्र चाहिए, जिनमें 18 ATP और 12 NADPH लगते हैं (प्रति CO₂ 3 ATP और 2 NADPH)।
- प्रकाश श्वसन: उच्च O₂ और कम CO₂ पर RuBisCO ऑक्सीजनेज़ की तरह काम करता है; इसमें न ATP बनता है, न NADPH, इसलिए यह हानिकारक है। C₄ पादपों में यह नहीं होता।
- सीमाकारी कारक (ब्लैकमैन का नियम): प्रकाश, CO₂, ताप और जल जैसे कारकों में जो कम मात्रा में हो, वही दर को सीमित करता है।
| तुलना | C₃ पादप | C₄ पादप |
|---|---|---|
| पहला स्थायी उत्पाद | 3-कार्बन अम्ल (3-PGA) | 4-कार्बन अम्ल (OAA) |
| CO₂ का प्राथमिक ग्राही | RuBP | PEP (PEP कार्बोक्सिलेज़ द्वारा) |
| पत्ती की शारीर | कोई विशेष संरचना नहीं | क्रांज़ शारीर (बंडल आच्छद कोशिकाएँ) |
| प्रकाश श्वसन | होता है | नगण्य |
| उदाहरण | गेहूँ, चावल | मक्का, गन्ना |
अध्याय 12: पादपों में श्वसन
PDF के विषय: पादपों में श्वसन क्रिया; ग्लाइकोलिसिस; किण्वन; ऑक्सीश्वसन — ट्राइकार्बोक्सिलिक अम्ल चक्र, इलेक्ट्रॉन परिवहन तंत्र या ऑक्सीकारी फॉस्फोरिलीकरण; श्वसनी संतुलन चार्ट; एम्फीबॉलिक पथ; श्वसन गुणांक।
- ग्लाइकोलिसिस कोशिकाद्रव्य में होता है: ग्लूकोज़ → 2 पाइरूवेट; शुद्ध लाभ 2 ATP और 2 NADH।
- किण्वन (अवायवीय): पाइरूवेट से एथेनॉल और CO₂ (यीस्ट) या लैक्टिक अम्ल (पेशियों में) बनता है।
- ऑक्सीश्वसन: पाइरूवेट माइटोकॉन्ड्रिया में जाता है; TCA (क्रेब्स) चक्र आधात्री (matrix) में और इलेक्ट्रॉन परिवहन तंत्र भीतरी झिल्ली में होता है; अंतिम इलेक्ट्रॉन ग्राही O₂ है।
- श्वसनी संतुलन चार्ट: NCERT के अनुसार एक ग्लूकोज़ के पूर्ण ऑक्सीकरण से सैद्धांतिक रूप से 38 ATP बनते हैं (वास्तविक मान कम हो सकता है)।
- एम्फीबॉलिक पथ: श्वसन-पथ अपचयी (विघटन) और उपचयी (संश्लेषण) दोनों काम करता है, क्योंकि वसा और प्रोटीन भी बीच के पदार्थों के रूप में इसमें शामिल होते हैं।
- श्वसन गुणांक (RQ) = उत्सर्जित CO₂ का आयतन ÷ ली गई O₂ का आयतन। कार्बोहाइड्रेट के लिए 1, वसा के लिए 1 से कम (लगभग 0.7) और प्रोटीन के लिए लगभग 0.9।
ट्रिपैल्मिटिन: 2C₅₁H₉₈O₆ + 145O₂ → 102CO₂ + 98H₂O → RQ = 102 ÷ 145 = 0.7 (वसा के लिए 1 से कम)
अध्याय 13: पादप वृद्धि एवं परिवर्धन
PDF के विषय: वृद्धि — अपरिमित और मापन योग्य; वृद्धि की प्रावस्थाएँ; वृद्धि दर; वृद्धि के लिए दशाएँ; विभेदन, निर्विभेदन और पुनर्विभेदन; परिवर्धन; पादप वृद्धि नियामक — विशिष्टताएँ, खोज, कार्यिकीय प्रभाव (ऑक्सिन, जिबरेलिन, साइटोकाइनिन, एथिलीन, एब्सिसिक अम्ल)।
- वृद्धि अपरिमित होती है, क्योंकि पादपों में विभज्योतक जीवन भर विभाजित होते रहते हैं।
- वृद्धि वक्र (सिग्माभ): तीन प्रावस्थाएँ — पश्चता (lag), लघुगणकीय (log या घातीय) और स्थिर (stationary)।
- वृद्धि दर: अंकगणितीय (समान दर) या ज्यामितीय (घातीय) वृद्धि; पूर्ण और सापेक्ष वृद्धि दर।
- वृद्धि के लिए दशाएँ: जल, ऑक्सीजन, पोषक तत्त्व, उपयुक्त ताप।
- विभेदन: कोशिकाओं का विशिष्ट कार्य के लिए रूपांतरण; निर्विभेदन में पुनः विभाजन की क्षमता वापस आती है; पुनर्विभेदन में वे फिर विशिष्ट रूप लेती हैं।
| वृद्धि नियामक | मुख्य कार्य | अन्य जानकारी |
|---|---|---|
| ऑक्सिन (जैसे IAA) | तने की लंबाई बढ़ाना, शीर्षस्थ प्रभाविता, जड़ें निकलना, खरपतवार नाशक (2,4-D) | वेंट ने 1928 में खोज की |
| जिबरेलिन | तने का दीर्घन (बोल्टिंग), बीजरहित अंगूर के गुच्छे का विस्तार, माल्टिंग | बकानाए (मूढ़ पौध) रोग से कुरोसावा ने खोजा |
| साइटोकाइनिन | कोशिकाद्रव्य विभाजन, पर्णजीर्णता में देरी | काइनेटिन की खोज स्कूग और मिलर ने की |
| एथिलीन | फल पकाना, पर्णपात, श्वसन बढ़ाना | गैसीय नियामक |
| एब्सिसिक अम्ल (ABA) | रंध्र बंद करना (तनाव में), बीज प्रसुप्ति | तनाव हॉर्मोन कहलाता है |
इकाई 5: मानव शरीर विज्ञान (18 अंक)
इस इकाई में छह अध्याय हैं: श्वसन, परिसंचरण, उत्सर्जन, गति, तंत्रिका नियंत्रण और रासायनिक समन्वय। यह इकाई (इकाई 4 के साथ) सबसे ज़्यादा अंक (18) की है और इसमें सबसे ज़्यादा अध्याय (6) हैं, इसलिए इसे सबसे अधिक समय दें।
अध्याय 14: श्वसन और गैसों का विनिमय
PDF के विषय: श्वसन अंग — मानव श्वसन तंत्र; श्वसन की क्रियाविधि — श्वसन संबंधी आयतन और क्षमताएँ; गैसों का विनिमय; गैसों का परिवहन — O₂ और CO₂ का परिवहन; श्वसन का नियमन; श्वसन तंत्र के विकार।
- मार्ग: नासाछिद्र → ग्रसनी → स्वरयंत्र → श्वासनली → श्वसनी → श्वसनिकाएँ → वायुकोष्ठ (फेफड़ों में गैस-विनिमय का स्थान)।
- अंतःश्वसन: डायाफ्राम और बाह्य अंतरापर्शुक पेशियों के संकुचन से वक्षगुहा का आयतन बढ़ता है और वायु अंदर आती है।
- गैसों का परिवहन: O₂ का लगभग 97% भाग हीमोग्लोबिन से ऑक्सीहीमोग्लोबिन के रूप में जाता है; CO₂ का लगभग 70% बाइकार्बोनेट के रूप में, 20–25% हीमोग्लोबिन से (कार्बामिनो) और लगभग 7% जल में घुलकर।
- नियमन: मस्तिष्क के मेडुला में श्वसन लयबद्धता केंद्र, पॉन्स में न्यूमोटैक्सिक केंद्र और रसोसंवेदी क्षेत्र।
- विकार: दमा, वातस्फीति और व्यावसायिक श्वसन विकार (जैसे सिलिकोसिस, एस्बेस्टोसिस)।
| श्वसन आयतन/क्षमता | लगभग मान (NCERT के अनुसार) |
|---|---|
| ज्वारीय आयतन (TV) | 500 mL |
| अंतःश्वसन आरक्षित आयतन (IRV) | 2500–3000 mL |
| उच्छ्वसन आरक्षित आयतन (ERV) | 1000–1100 mL |
| अवशिष्ट आयतन (RV) | 1100–1200 mL |
| जैव क्षमता (VC) = ERV + TV + IRV | 3500–4500 mL |
| फेफड़ों की कुल क्षमता (TLC) = VC + RV | 5000–6000 mL |
अध्याय 15: शरीर द्रव तथा परिसंचरण
PDF के विषय: रुधिर — प्लाज़्मा, संगठित पदार्थ, रक्त समूह (ABO, Rh), रक्त स्कंदन; लसीका (ऊतक द्रव); परिसंचरण पथ — मानव परिसंचरण तंत्र, हृदय चक्र, विद्युत हृदय लेख (ECG), द्विसंचरण, हृदय क्रिया का नियमन; परिसंचरण तंत्र के विकार।
- रुधिर: प्लाज़्मा (लगभग 55%) और संगठित पदार्थ — RBC (लगभग 5 से 5.5 मिलियन प्रति mm³), WBC (6000–8000 प्रति mm³) और बिंबाणु (1.5–3.5 लाख प्रति mm³)।
- रक्त स्कंदन: थ्रॉम्बोप्लास्टिन (Ca²⁺ की उपस्थिति में) से प्रोथ्रॉम्बिन थ्रॉम्बिन में बदलता है और थ्रॉम्बिन फाइब्रिनोजन को फाइब्रिन के जाल में बदलता है।
- ABO समूह: समूह A में प्रतिजन A और प्रतिरक्षी anti-B; समूह B में प्रतिजन B और anti-A; AB में दोनों प्रतिजन, कोई प्रतिरक्षी नहीं (सर्वग्राही); O में कोई प्रतिजन नहीं, दोनों प्रतिरक्षी (सर्वदाता)।
- Rh कारक: Rh⁻ माता और Rh⁺ गर्भस्थ शिशु की स्थिति में एरिथ्रोब्लास्टोसिस फीटैलिस का खतरा रहता है।
- हृदय चक्र: लगभग 0.8 सेकंड का; सामान्य हृदय गति लगभग 72 धड़कन प्रति मिनट। हृद-निकास = स्ट्रोक आयतन × हृदय गति।
- ECG: P तरंग (आलिंद का विध्रुवण), QRS (निलय का विध्रुवण) और T तरंग (निलय का पुनःध्रुवण)।
- नियमन: हृदय की गति SAN (साइनो-एट्रियल नोड, पेसमेकर) से शुरू होती है। द्विसंचरण: मनुष्य में रुधिर हृदय से दो बार गुज़रता है (फुफ्फुसीय और दैहिक)।
- विकार: उच्च रक्तदाब (सामान्य 120/80 mm Hg), कोरोनरी धमनी रोग, हृदयशूल और हृदय गति रुकना।
अध्याय 16: उत्सर्जी उत्पाद एवं उनका निष्कासन
PDF के विषय: मानव उत्सर्जन तंत्र; मूत्र निर्माण; वृक्क नलिका के विभिन्न भागों के कार्य; निस्यंद के सांद्रण की क्रियाविधि; वृक्क कार्यों का नियमन; मूत्रण; उत्सर्जन में अन्य अंगों की भूमिका; उत्सर्जन तंत्र के विकार।
- नेफ्रॉन (वृक्काणु): मैल्पीजियन काय (ग्लोमेरुलस + बोमैन संपुट), समीपस्थ संवलित नलिका (PCT), हेनले का लूप, दूरस्थ संवलित नलिका (DCT) और संग्राहक नलिका।
- मूत्र निर्माण के चरण: (1) परानिस्यंदन (ग्लोमेरुलस में), (2) चयनात्मक पुनरावशोषण और (3) नलिकीय स्राव।
- ग्लोमेरुलर निस्यंदन दर (GFR): लगभग 125 mL/मिनट, यानी लगभग 180 लीटर प्रतिदिन; पर मूत्र केवल लगभग 1.5 लीटर बनता है, क्योंकि अधिकांश निस्यंद पुनः अवशोषित हो जाता है।
- सांद्रण की क्रियाविधि: हेनले के लूप और वासा रेक्टा की प्रतिधारा क्रियाविधि।
- नियमन: ADH (जल का पुनरावशोषण बढ़ाता है), JGA से रेनिन–एंजियोटेंसिन–एल्डोस्टेरोन तंत्र और ANF।
- अन्य अंग: फेफड़े (CO₂), यकृत (पित्त वर्णक), त्वचा (स्वेद और सीबम)।
- विकार: यूरेमिया, वृक्क पथरी और ग्लोमेरुलोनेफ्राइटिस। गंभीर स्थिति में हीमोडायलिसिस (कृत्रिम वृक्क) की मदद ली जाती है।
अध्याय 17: गमन एवं संचलन
PDF के विषय: गति के प्रकार; पेशी — संकुचनशील प्रोटीन की संरचना, पेशी संकुचन की क्रियाविधि; कंकाल तंत्र; संधियाँ; पेशीय और कंकाल तंत्र के विकार।
- गति के प्रकार: अमीबीय, पक्ष्माभी और पेशीय।
- पेशी के प्रकार: कंकालीय (रेखित, ऐच्छिक), अरेखित या आंतरांग (अनैच्छिक) और हृदय पेशी (रेखित, अनैच्छिक)।
- संकुचनशील प्रोटीन: एक्टिन (पतले तंतु) और मायोसिन (मोटे तंतु)। सरकती तंतु सिद्धांत: Ca²⁺ और ATP की उपस्थिति में एक्टिन तंतु मायोसिन के सहारे सरककर सार्कोमियर को छोटा करते हैं।
- लाल पेशी तंतु में मायोग्लोबिन अधिक और माइटोकॉन्ड्रिया अधिक (धीरज वाले कार्य); श्वेत तंतु में कम (तेज़, पर जल्दी थकने वाले कार्य)।
- कंकाल: वयस्क मनुष्य में 206 अस्थियाँ: अक्षीय कंकाल 80 और उपांगीय 126।
- संधियाँ: तंतुमय (अचल), उपास्थिमय (अल्प चल) और साइनोवियल (चल): गेंद-खाँचा (कंधा, कूल्हा), कब्ज़ा (घुटना), धुरीय (एटलस-एक्सिस), विसर्पी और पर्याण (saddle)।
- विकार: मायस्थीनिया ग्रेविस, पेशीय अपविकास (muscular dystrophy), टिटनी, गठिया (arthritis), अस्थि-सुषिरता (osteoporosis) और गाउट।
अध्याय 18: तंत्रिकीय नियंत्रण एवं समन्वय
PDF के विषय: तंत्रिका तंत्र; मानव तंत्रिका तंत्र; तंत्रिका कोशिका — तंत्रिका तंत्र की संरचनात्मक और क्रियात्मक इकाई; तंत्रिका आवेगों की उत्पत्ति व संचरण; आवेगों का संचरण; केंद्रीय तंत्रिका तंत्र — मानव मस्तिष्क (अग्र, मध्य, पश्च)।
- न्यूरॉन: कोशिका काय, द्रुमिकाएँ (dendrites) और तंत्रिकाक्ष (axon)।
- विश्राम झिल्ली विभव: लगभग −70 mV; Na⁺–K⁺ पंप 3 Na⁺ बाहर और 2 K⁺ अंदर भेजता है। उद्दीपन पर क्रिया विभव बनता है और आवेग के रूप में आगे बढ़ता है।
- सिनैप्स: विद्युतीय (कम) और रासायनिक (अधिकांश) — रासायनिक सिनैप्स में न्यूरोट्रांसमीटर (जैसे ऐसीटिलकोलीन) संचरण करते हैं।
- मानव मस्तिष्क: अग्र मस्तिष्क (प्रमस्तिष्क, थैलेमस, हाइपोथैलेमस), मध्य मस्तिष्क और पश्च मस्तिष्क (पॉन्स, अनुमस्तिष्क, मेडुला)।
| मस्तिष्क का भाग | मुख्य कार्य |
|---|---|
| प्रमस्तिष्क (Cerebrum) | बुद्धि, स्मृति, चेतना, ऐच्छिक क्रियाओं का नियंत्रण |
| थैलेमस | संवेदी और प्रेरक संकेतों का केंद्र |
| हाइपोथैलेमस | ताप, भूख-प्यास का नियमन; कई हॉर्मोन बनाना |
| अनुमस्तिष्क (Cerebellum) | शरीर का संतुलन और गतियों का समन्वय |
| मेडुला | श्वसन, हृदय गति और रक्तचाप का नियंत्रण |
अध्याय 19: रासायनिक समन्वय तथा एकीकरण
PDF के विषय: अंतःस्रावी ग्रंथियाँ और हॉर्मोन; मानव अंतःस्रावी तंत्र — हाइपोथैलेमस, पीयूष ग्रंथि, पीनियल ग्रंथि, थायरॉइड, पैराथायरॉइड, थाइमस, अधिवृक्क, अग्न्याशय, वृषण, अंडाशय; हृदय, वृक्क और जठरांत्र पथ के हॉर्मोन; हॉर्मोन क्रिया की क्रियाविधि।
| ग्रंथि | मुख्य हॉर्मोन | मुख्य कार्य |
|---|---|---|
| हाइपोथैलेमस | मोचक और संदमक हॉर्मोन | पीयूष ग्रंथि का नियमन |
| पीयूष (अग्र) | वृद्धि हॉर्मोन (GH), प्रोलैक्टिन, TSH, ACTH, LH, FSH | वृद्धि, दुग्ध-स्राव, अन्य ग्रंथियों का नियमन |
| पीयूष (पश्च) | ऑक्सीटोसिन, वैसोप्रेसिन (ADH) | गर्भाशय संकुचन और दुग्ध-निष्कासन; जल का पुनरावशोषण |
| पीनियल | मेलाटोनिन | निद्रा-जागरण चक्र |
| थायरॉइड | थायरॉक्सिन (T₄), ट्राइआयोडोथायरोनीन (T₃), थायरोकैल्सिटोनिन | उपापचय दर; कैल्सियम स्तर घटाना |
| पैराथायरॉइड | पैराथॉर्मोन (PTH) | रुधिर में कैल्सियम बढ़ाना |
| थाइमस | थाइमोसिन | T-लसीकाणुओं का विभेदन; प्रतिरक्षा |
| अधिवृक्क | कॉर्टिसोल, एल्डोस्टेरोन; एड्रीनलीन और नॉरएड्रीनलीन | तनाव, लवण-जल संतुलन; आपातकालीन स्थिति |
| अग्न्याशय | इंसुलिन (β-कोशिकाएँ), ग्लूकागॉन (α-कोशिकाएँ) | रुधिर शर्करा का नियमन |
| वृषण / अंडाशय | एंड्रोजन (टेस्टोस्टेरोन) / एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन | द्वितीयक लैंगिक लक्षण और जनन क्रियाएँ |
- अन्य अंगों के हॉर्मोन: हृदय — आलिंदी नैट्रियूरेटिक कारक (ANF); वृक्क — एरिथ्रोपॉइटिन; जठरांत्र पथ — गैस्ट्रिन, सीक्रेटिन, CCK और GIP।
- हॉर्मोन क्रिया की क्रियाविधि: हॉर्मोन अपने ग्राही से जुड़ता है। प्रोटीन/पेप्टाइड हॉर्मोन झिल्ली के ग्राही से जुड़कर द्वितीयक संदेशवाहक (जैसे cAMP) बनाते हैं और स्टेरॉयड हॉर्मोन कोशिका के भीतर के ग्राही से जुड़ते हैं।
- इंसुलिन की कमी से मधुमेह (डायबिटीज़ मेलिटस) होता है, जिसमें रुधिर शर्करा बढ़ जाती है।
प्रायोगिक परीक्षा (30 अंक)
जीव विज्ञान में 30 अंक प्रायोगिक के हैं, यानी कुल 100 अंक का 30%। PDF के अनुसार प्रायोगिक परीक्षा का समय 4 घंटे है और अधिकतम अंक 30। मूल्यांकन योजना इस प्रकार है:
| घटक | अंक | तैयारी में क्या करें |
|---|---|---|
| वनस्पति विज्ञान बृहद् प्रयोग (Botany Major) | 4 | सूची में 4 प्रयोग: कुलों का अध्ययन, शारीर (T.S.), जीवद्रव्यकुंचन और श्वसन दर |
| जंतु विज्ञान बृहद् प्रयोग (Zoology Major) | 4 | सूची में 2 प्रयोग: लार ऐमाइलेज़ और मूत्र में यूरिया/पित्त लवण |
| वनस्पति विज्ञान लघु प्रयोग (Botany Minor) | 3 | सूची में 5 प्रयोग: रंध्र, परासरण, वर्णक-पृथक्करण, वाष्पोत्सर्जन और अंतःशोषण |
| जंतु विज्ञान लघु प्रयोग (Zoology Minor) | 3 | सूची में 2 प्रयोग: पदार्थों के रासायनिक परीक्षण और मूत्र में शर्करा/ऐल्ब्यूमिन |
| प्रदर्श (Spots) | 8 | 11 मदों की पहचान: सूक्ष्मदर्शी, नमूने, स्लाइड, प्रायोगिक व्यवस्थाएँ, कंकाल आदि |
| प्रायोगिक अभिलेख (Practical Record) | 4 | साफ़ और पूरा रिकॉर्ड, चित्रों सहित |
| मौखिक प्रश्न (Viva voce) | 4 | अपने किए प्रयोगों के सिद्धांत, सावधानियाँ और पहचान |
| कुल | 30 |
PDF में यह नहीं बताया गया कि परीक्षा में हर घटक में कितने प्रयोगों में से चयन होगा या कितने प्रयोग अभिलेख में अनिवार्य हैं। इसके लिए विद्यालय के निर्देश देखें। सुरक्षित तरीका है कि सूची के सभी 13 प्रयोग और 11 प्रदर्श-मदें तैयार रखें।
13 प्रयोग: विधि का सार
नीचे हर प्रयोग का मुख्य सिद्धांत और पहचान संक्षेप में दी है। यह सारांश है; पूरी विधि, सारणी और चित्र अपनी प्रयोगशाला-पुस्तिका से तैयार करें।
| क्र. | प्रयोग (PDF के अनुसार) | सिद्धांत / प्रेक्षण | ध्यान रखें |
|---|---|---|---|
| बृ-1 | लेग्यूमिनोसी (फैबेसी), सोलेनेसी और लिलिएसी कुलों के एक-एक स्थानीय पुष्पी पादप का अध्ययन और वर्णन | आदत, मूल, तना, पत्ती, पुष्पक्रम, पुष्प, पुष्प-सूत्र और पुष्प-आरेख, फल; कुल की पहचान पुष्प-लक्षणों से | पुष्प-सूत्र और आरेख बनाना सीखें |
| बृ-2 | द्विबीजपत्री और एकबीजपत्री मूल व तनों की आंतरिक संरचना (अनुप्रस्थ काट) का स्लाइड बनाकर अध्ययन | पतली काट, सैफ्रानिन से अभिरंजन; पहचान: जाइलम के समूह, संवहन बंडल की व्यवस्था और खुले/बंद बंडल | काट बहुत पतली और बिना मुड़ी हो |
| बृ-3 | बाह्य त्वचा के छिलके (रोहियो की पत्तियाँ) द्वारा जीवद्रव्यकुंचन (plasmolysis) का अध्ययन | अतिपरासरी विलयन में कोशिका से जल बाहर निकलता है और जीवद्रव्य कोशिका भित्ति से अलग हो जाता है; जल में रखने पर पुनः सामान्य (deplasmolysis) | विलयन की सांद्रता सही रखें |
| बृ-4 | पुष्प कलिकाओं और अंकुरित बीजों में श्वसन दर का अध्ययन | अंकुरित बीज O₂ लेते और CO₂ छोड़ते हैं; KOH से CO₂ अवशोषित होने पर गैस के आयतन में कमी से O₂ का उपभोग मापा जाता है | उपकरण वायुरोधी हो; नियंत्रण भी रखें |
| जं-1 | स्टार्च पर लार ऐमाइलेज़ के प्रभाव का अध्ययन | लार में एंजाइम स्टार्च को शर्करा में बदलता है; आयोडीन परीक्षण में नीला-काला रंग समय के साथ गायब होता है; लगभग 37°C ताप पर सबसे अच्छा | उबली हुई लार से नियंत्रण प्रयोग करें |
| जं-2 | मूत्र में यूरिया और पित्त लवण की उपस्थिति का परीक्षण | विधि प्रयोगशाला मैनुअल के अनुसार; पित्त लवण के परीक्षण में सामान्यतः मूत्र की सतह पर डाला गया सल्फ़र चूर्ण पृष्ठ तनाव घटने से डूब जाता है | मैनुअल की विधि का क्रम न बदलें |
| लघु बॉ-1 | पत्तियों की ऊपरी और निचली सतह पर रंध्रों के वितरण का अध्ययन | द्विबीजपत्री (पृष्ठाधारी) पत्ती में आमतौर पर निचली सतह पर रंध्र अधिक होते हैं | रंध्रों की गिनती कई क्षेत्रों में करें |
| लघु बॉ-2 | आलू परासरणमापी द्वारा परासरण का अध्ययन | आलू के गड्ढे में शर्करा विलयन रखकर आलू को जल में रखने पर अंतःपरासरण से स्तर बढ़ता है; उबले आलू में नहीं (झिल्ली नष्ट) | आलू की भित्ति पतली और बराबर रखें |
| लघु बॉ-3 | पेपर क्रोमैटोग्राफ़ी से पादप वर्णकों का पृथक्करण | वर्णक अलग दूरी तक चलते हैं: कैरोटीन सबसे ऊपर, फिर ज़ैंथोफिल, क्लोरोफिल a और क्लोरोफिल b | वर्णक का बिंदु विलायक-स्तर से ऊपर रखें |
| लघु बॉ-4 | पत्तियों की ऊपरी और निचली सतह पर वाष्पोत्सर्जन दर का तुलनात्मक अध्ययन | कोबाल्ट क्लोराइड पत्र का नीले से गुलाबी होना; निचली सतह पर रंग जल्दी बदलता है (रंध्र अधिक) | पत्र सूखे रखें, जल्दी काम करें |
| लघु बॉ-5 | बीजों/किशमिश में अंतःशोषण का अध्ययन | सूखे बीज/किशमिश जल सोखकर फूलते हैं; आयतन और द्रव्यमान बढ़ता है (जलस्नेही कोलॉइड) | पहले और बाद का द्रव्यमान नापें |
| लघु जं-1 | पादप और जंतु पदार्थों में शर्करा, स्टार्च, प्रोटीन और वसा की उपस्थिति के परीक्षण | शर्करा: बेनेडिक्ट (लाल/नारंगी अवक्षेप); स्टार्च: आयोडीन (नीला-काला); प्रोटीन: बाइयूरेट (बैंगनी); वसा: कागज़ पर पारभासी धब्बा या सूडान III | परीक्षण-नलिका साफ़ रखें |
| लघु जं-2 | मूत्र में शर्करा और ऐल्ब्यूमिन की उपस्थिति का परीक्षण | शर्करा: बेनेडिक्ट अभिकर्मक; ऐल्ब्यूमिन: गर्म करने या नाइट्रिक अम्ल से सफ़ेद अवक्षेप/स्कंदन | सावधानी से गर्म करें |
प्रदर्श / spotting (8 अंक)
खंड ब में 11 मदों का अध्ययन/अवलोकन सूचीबद्ध है। हर नमूने के लिए सही नाम, संघ/वर्ग और दो पहचान-लक्षण लिखने का अभ्यास करें।
| क्र. | मद (PDF के अनुसार) | पहचान के संकेत |
|---|---|---|
| 1 | संयुक्त सूक्ष्मदर्शी के विभिन्न भाग | नेत्रिका, नलिका, नोज़पीस, अभिदृश्यक लेंस, मंच, दर्पण, डायाफ्राम, स्थूल और सूक्ष्म समायोजन; आवर्धन = नेत्रिका × अभिदृश्यक (जैसे 10 × 40 = 400 गुना) |
| 2 | पादप नमूने: जीवाणु, ऑसिलेटोरिया, स्पाइरोगायरा, राइज़ोपस, मशरूम, यीस्ट, लिवरवर्ट, मॉस, फर्न, पाइन, एकबीजपत्री और द्विबीजपत्री पौधे, लाइकेन | स्पाइरोगायरा में सर्पिल हरितलवक; राइज़ोपस में बीजाणुधानी-धारक; मशरूम में छत्रक; यीस्ट में मुकुलन; लिवरवर्ट पटलरूपी (थैलस); मॉस पत्तीदार गैमीटोफाइट और बीजाणुधानी; फर्न की पत्ती पर सोरस; पाइन में सुई-जैसी पत्तियाँ; लाइकेन शैवाल + कवक |
| 3 | जंतु नमूने: अमीबा, हाइड्रा, यकृत कृमि, ऐस्कैरिस, जोंक, केंचुआ, प्रॉन, रेशम कीट, मधुमक्खी, घोंघा, तारा मछली, शार्क, रोहू, मेंढक, छिपकली, कबूतर और खरगोश | अमीबा में पादाभ; हाइड्रा में स्पर्शक; यकृत कृमि में अग्र और अधर चूषक; ऐस्कैरिस गोल कृमि; जोंक में दोनों सिरों पर चूषक; केंचुए में क्लाइटेलम; तारा मछली में पाँच भुजाएँ; शार्क में उपास्थिल कंकाल और खुली क्लोम दरारें; रोहू में क्लोम आवरण (ऑपरकुलम); कबूतर में पंख; खरगोश में दुग्ध ग्रंथियाँ |
| 4 | अस्थायी/स्थायी स्लाइड: पैलिसेड कोशिकाएँ, रक्षक कोशिकाएँ, मृदूतक, स्थूलकोण ऊतक, दृढ़ोतक, जाइलम, फ्लोएम, शल्की उपकला, पेशी तंतु और स्तनधारी रुधिर आलेप | रक्षक कोशिका सेम के आकार की; स्थूलकोण ऊतक के कोनों पर मोटाई; दृढ़ोतक की भित्ति मोटी, काष्ठीय और गुहा सँकरी; शल्की उपकला चपटी बहुभुजी कोशिकाएँ; स्तनधारी RBC उभयावतल और केंद्रक-रहित |
| 5 | प्याज़ की मूलाग्र और जंतु कोशिकाओं (टिड्डा) की स्थायी स्लाइड में समसूत्री विभाजन की अवस्थाएँ | प्रोफेज, मेटाफेज, एनाफेज और टीलोफेज की पहचान गुणसूत्रों की स्थिति से |
| 6 | जड़, स्तंभ और पत्तियों के विभिन्न रूपांतरण | जड़: गाजर (भंडारण), स्तंभ-मूल; तना: आलू (कंद), अदरक (प्रकंद), काँटे; पत्ती: ऐंठन (tendril), काँटे |
| 7 | विभिन्न प्रकार के पुष्पक्रमों का अध्ययन और पहचान | असीमाक्षी (जैसे राइसीम, स्पाइक, कैपिटुलम) और ससीमाक्षी (साइम) |
| 8 | जड़ (मूसला/अपस्थानिक), स्तंभ (शाकीय/काष्ठीय) और पत्ती (व्यवस्था, आकार, शिराविन्यास, सरल/संयुक्त) के प्रकार | जाली शिराविन्यास (द्विबीजपत्री) और समानांतर (एकबीजपत्री) |
| 9 | प्रायोगिक व्यवस्थाओं पर प्रेक्षण और टिप्पणी: (अ) अवायवीय श्वसन, (ब) प्रकाशानुवर्तन, (स) शीर्षस्थ कलिका के अपनयन का प्रभाव, (द) वाष्पोत्सर्जन के कारण खिंचाव | प्रकाशानुवर्तन में तना प्रकाश की ओर मुड़ता है; शीर्षस्थ कलिका हटाने पर पार्श्व कलिकाएँ बढ़ती हैं (शीर्षस्थ प्रभाविता का अंत); वाष्पोत्सर्जन से जल ऊपर खिंचता है |
| 10 | मानव कंकाल और विभिन्न प्रकार की संधियों का अध्ययन | खोपड़ी, कशेरुक दंड, पसलियाँ, उरोस्थि, मेखलाएँ, अंग अस्थियाँ; संधियाँ: गेंद-खाँचा, कब्ज़ा, धुरीय, विसर्पी |
| 11 | मॉडल/परिरक्षित नमूनों से मेंढक की बाह्य आकारिकी का अध्ययन | नम त्वचा, जालयुक्त पश्च पाद, निमेषक पटल, कर्णपटह, अवस्कर; नर में स्वर-कोष और अग्रपाद के पहले अंगुल पर मैथुन-गद्दी |
अभ्यास-प्रश्न (उत्तर सहित)
ये मौलिक अभ्यास-प्रश्न हैं, आधिकारिक प्रश्न नहीं।
उत्तर: कैरोलस लिनियस ने।
उत्तर: आर.एच. व्हिटेकर ने 1969 में।
उत्तर: काइटिन की।
उत्तर: विषाणु में न्यूक्लिक अम्ल के साथ प्रोटीन आवरण (कैप्सिड) होता है; वाइरॉइड में केवल मुक्त RNA होता है।
उत्तर: जिम्नोस्पर्म में बीज नग्न होते हैं (फल नहीं बनता); एंजियोस्पर्म में बीज फल के अंदर होते हैं।
उत्तर: पृष्ठ-रज्जु, पृष्ठ खोखली तंत्रिका रज्जु और ग्रसनीय क्लोम दरारें।
उत्तर: असीमाक्षी में मुख्य अक्ष की वृद्धि अनिश्चित रहती है; ससीमाक्षी में मुख्य अक्ष पुष्प में समाप्त होकर वृद्धि रुक जाती है।
उत्तर: वलय में व्यवस्थित, संयुक्त और खुले (एधा उपस्थित)।
उत्तर: तीन: दो आलिंद और एक निलय।
उत्तर: प्रोकैरियोटिक में 70S और यूकैरियोटिक (कोशिकाद्रव्य में) में 80S।
उत्तर: इसमें जल-अपघटनी एंजाइम होते हैं, जो फटने पर कोशिका को स्वयं पचा सकते हैं।
उत्तर: DNA का द्विगुणन।
उत्तर: समसूत्री: 46; अर्धसूत्री: 23।
उत्तर: पैकीटीन में।
उत्तर: प्रकाश अभिक्रिया ग्रैना की थाइलेकॉइड झिल्ली में; केल्विन चक्र स्ट्रोमा में।
उत्तर: 3-फॉस्फोग्लिसरिक अम्ल (3-PGA)।
उत्तर: 18 ATP और 12 NADPH।
उत्तर: कोशिकाद्रव्य में; शुद्ध 2 ATP।
उत्तर: लगभग 0.7 (1 से कम)।
उत्तर: एथिलीन।
उत्तर: सूखे जैसे तनाव में यह रंध्र बंद करवाकर जल की हानि घटाता है।
उत्तर: डायाफ्राम और बाह्य अंतरापर्शुक पेशियाँ।
उत्तर: उसमें कोई प्रतिरक्षी (anti-A या anti-B) नहीं होता।
उत्तर: हृदय की धड़कन की शुरुआत वहीं से होती है।
उत्तर: 70 × 72 = 5040 mL/मिनट ≈ 5 लीटर/मिनट
उत्तर: 125 mL/मिनट; प्रतिदिन लगभग 180 लीटर।
उत्तर: Ca²⁺ और ATP की उपस्थिति में एक्टिन तंतु मायोसिन के सहारे सरककर सार्कोमियर को छोटा करते हैं, जिससे पेशी संकुचन होता है।
उत्तर: 3 Na⁺ बाहर और 2 K⁺ अंदर।
उत्तर: अग्न्याशय की β-कोशिकाएँ; रुधिर में शर्करा घटाना।
उत्तर: रुधिर में कैल्सियम का स्तर बढ़ाना।
उत्तर: 10 × 40 = 400 गुना।
8 सप्ताह की तैयारी योजना
यह योजना सैद्धांतिक और प्रायोगिक को साथ चलाने के लिए एक सुझाव है। हर सप्ताह चित्र बनाने और अभिलेख लिखने का समय अलग से रखें।
| सप्ताह | सैद्धांतिक अध्याय | इकाई (अंक) | प्रायोगिक काम |
|---|---|---|---|
| 1 | अध्याय 1–2: जीव जगत; जीव जगत का वर्गीकरण | इकाई 1 (7) | सूक्ष्मदर्शी के भाग; पादप नमूने (प्रदर्श 1–2) |
| 2 | अध्याय 3–4: वनस्पति जगत; प्राणि जगत | इकाई 1 (7) | जंतु नमूने (प्रदर्श 3); रूपांतरण (प्रदर्श 6) |
| 3 | अध्याय 5–7: आकारिकी, शारीर, मेंढक | इकाई 2 (12) | बृ-1, बृ-2; पुष्पक्रम और जड़/तने/पत्ती के प्रकार (प्रदर्श 7–8, 11) |
| 4 | अध्याय 8–10: कोशिका, जैव अणु, कोशिका चक्र | इकाई 3 (15) | स्लाइड (प्रदर्श 4–5); बृ-3, लघु जं-1 |
| 5 | अध्याय 11–13: प्रकाश संश्लेषण, श्वसन, वृद्धि | इकाई 4 (18) | बृ-4, लघु बॉ-1, बॉ-2, बॉ-3; प्रायोगिक व्यवस्थाएँ (प्रदर्श 9) |
| 6 | अध्याय 14–16: श्वसन, परिसंचरण, उत्सर्जन | इकाई 5 (18) | जं-1, जं-2, लघु जं-2; लघु बॉ-4, बॉ-5 |
| 7 | अध्याय 17–19: गमन, तंत्रिका, रासायनिक समन्वय | इकाई 5 (18) | मानव कंकाल और संधियाँ (प्रदर्श 10); अभिलेख पूरा |
| 8 | पूरा नमूना पेपर (3:15 घंटे) और आरेखों का दोहराव | 70 | viva का अभ्यास; spotting की सभी मदों की पुनरावृत्ति |
आम गलतियाँ और सुधार
| हिस्सा | आम गलती | सुधार |
|---|---|---|
| वर्गीकरण | द्विपद नाम को सामान्य अक्षरों में लिखना | वंश बड़े अक्षर से, जाति छोटे अक्षर से; छपे में तिरछे, हाथ से रेखांकित |
| पादप शारीर | द्विबीजपत्री और एकबीजपत्री के लक्षण उलटे लिख देना | तुलना-तालिका बनाकर रखें |
| कोशिका | 70S और 80S राइबोसोम में भ्रम | प्रोकैरियोटिक 70S, यूकैरियोटिक 80S; माइटोकॉन्ड्रिया/हरितलवक में 70S |
| कोशिका विभाजन | समसूत्री और अर्धसूत्री में गुणसूत्र संख्या मिलाना | समसूत्री: संख्या वही; अर्धसूत्री: आधी |
| प्रकाश संश्लेषण | प्रकाश और जैव-संश्लेषणी अभिक्रिया का स्थान उलटना | ग्रैना में प्रकाश अभिक्रिया, स्ट्रोमा में केल्विन चक्र |
| श्वसन | ग्लाइकोलिसिस का स्थान माइटोकॉन्ड्रिया बताना | ग्लाइकोलिसिस कोशिकाद्रव्य में |
| मानव शरीर | आरेख में नाम या तीर न लगाना | हर आरेख में भागों के नाम और शीर्षक लिखें |
| रक्त समूह | सर्वग्राही और सर्वदाता का भ्रम | AB सर्वग्राही (कोई प्रतिरक्षी नहीं), O सर्वदाता (कोई प्रतिजन नहीं) |
| प्रायोगिक | नियंत्रण प्रयोग और सावधानियाँ भूलना | हर प्रयोग में नियंत्रण और सावधानियाँ लिखें |
| प्रायोगिक | spotting में केवल सामान्य नाम लिखना | संघ/वर्ग और दो पहचान-लक्षण भी लिखें |
सामान्य प्रश्न
यह भी देखें
- कक्षा 11 रसायन विज्ञान पाठ्यक्रम 2026-27 — सैद्धांतिक 70 और प्रायोगिक 30 का विवरण
- कक्षा 11 भौतिक विज्ञान पाठ्यक्रम 2026-27 — 14 अध्यायों के अंक और 17 प्रयोग
- कक्षा 11 गणित पाठ्यक्रम 2026-27 — गणित के 14 अध्यायों के अंक
- कक्षा 11 अर्थशास्त्र पाठ्यक्रम 2026-27 — अर्थशास्त्र की इकाईवार अंक योजना
- कक्षा 11 English पाठ्यक्रम 2026-27 — English का खंडवार अंक विभाजन
- कक्षा 11 हिंदी अनिवार्य पाठ्यक्रम 2026-27 — हिंदी अनिवार्य का अंक विभाजन
- कक्षा 11 — कक्षा 11 के सभी लेख · कक्षा 12 · कक्षा 10
- RBSE — राजस्थान बोर्ड केंद्रित सामग्री
- मॉडल पेपर · ऑनलाइन टेस्ट
- NCERT Classes — कक्षा 6 से 12 की निःशुल्क अध्ययन सामग्री · Sarkari Service Prep — सरकारी भर्ती परीक्षाओं की तैयारी (जीव विज्ञान के बुनियादी सिद्धांत विज्ञान आधारित परीक्षाओं में उपयोगी)
संदर्भ और पद्धति
- माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, राजस्थान, अजमेर: पाठ्यक्रम सत्र 2026–2027, विषय: जीव विज्ञान (Biology), विषय कोड-42, कक्षा 11, पृष्ठ 127–134। आधिकारिक PDF ↗
यह लेख कैसे तैयार किया गया
- बोर्ड के PDF से सीधे लिया गया: परीक्षा योजना (70 + 30), पाँच इकाइयों के अंक, 19 अध्यायों के विषय-बिंदु, प्रायोगिक मूल्यांकन योजना, 13 प्रयोग, 11 प्रदर्श-मदें और निर्धारित पुस्तकें। हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों सूचियों का मिलान किया गया और इकाईवार अंक पृष्ठ की तस्वीर में देखे गए।
- लेखक द्वारा जोड़ा गया (शैक्षिक सामग्री): अध्याय-वार मुख्य तथ्य और तुलना-तालिकाएँ, प्रयोगों का सार, पहचान के संकेत, अभ्यास-प्रश्न, समय-प्रबंधन और 8 सप्ताह की योजना। जीव विज्ञान के तथ्य NCERT स्तर के हैं; परीक्षा में अपनी पुस्तक के अनुसार ही लिखें।
- जो नहीं बताया गया: PDF में जो जानकारी नहीं है (अध्यायवार अंक, प्रश्नों के प्रकार, अभिलेख के लिए प्रयोगों की न्यूनतम संख्या), उसे तथ्य की तरह नहीं लिखा गया।

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