| बोर्ड | माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, राजस्थान, अजमेर |
|---|---|
| कक्षा / सत्र | 10 / 2026-27 |
| विषय | गणित (कोड 09) |
| पाठ्यपुस्तक | NCERT गणित कक्षा 10, अध्याय 13 और 14 |
| बोर्ड के प्रारूप में अंकभार | सांख्यिकी 13 + प्रायिकता 4 = 17 अंक |
| नमूना प्रश्न-पत्र में | प्र. 4, 5, 20 (1-1 अंक); 30, 34, 36 (3-3); 37 (5) |
यह लेख सांख्यिकी और प्रायिकता के प्रश्नों (प्र. 4, 5, 20, 30, 34, 36, 37) के बारे में है। पूरे प्रश्न-पत्र का ढाँचा हमारे कक्षा 10 गणित प्रश्न पत्र प्रारूप एवं ब्लू प्रिंट 2026-27 में है; और अभ्यास के लिए केस-आधारित प्रश्न तथा शब्द-समस्याओं के पृष्ठ देखें।
इन अध्यायों में छोटी गलती भी पूरा उत्तर बदल देती है। बोर्ड के नमूना प्रश्न-पत्र 2026-27 में इन दो अध्यायों के सात प्रश्न हैं, कुल 17 अंक के: तीन बहुविकल्पी, तीन तीन-तीन अंक के और एक पाँच अंक का, जिसमें एक विद्यार्थी का बताया उत्तर जाँचना होता है।
इस लेख में पहले इन प्रश्नों का स्वरूप और कुंजी की बातें हैं, फिर सूत्र और विधि, और अंत में 16 हल अभ्यास: 6 एक अंक के, 6 तीन अंक के और 4 पाँच अंक के।
अंतिम अद्यतन: 20 अक्टूबर 2026 · पढ़ने का समय: लगभग 35 मिनट
1. बोर्ड के पेपर में सांख्यिकी और प्रायिकता
बोर्ड के नमूना प्रश्न-पत्र (गणित, विषय कोड 09, समय 3 घंटे 15 मिनट, पूर्णांक 80) में इन अध्यायों के सात प्रश्न हैं। प्रश्नों का आशय हमारे शब्दों में, और उत्तर-कुंजी में अंक-विभाजन जहाँ छपा है वहाँ:
| प्र. | अध्याय | अंक | प्रश्न का आशय (हमारे शब्दों में) | उत्तर-कुंजी में |
|---|---|---|---|---|
| 4 | 14 प्रायिकता | 1 | एक विद्यार्थी का कथन है कि प्रायिकता का मान 1 से अधिक हो सकता है; सही खंडन चुनना | सही विकल्प |
| 5 | 13 सांख्यिकी | 1 | प्रेक्षणों के मान बड़े हों तो माध्य निकालने की उपयुक्त विधि चुनना | सही विकल्प |
| 20 | 13 सांख्यिकी | 1 | माध्य, माध्यक और बहुलक का संबंध पहचानना | सही विकल्प |
| 30 | 13 सांख्यिकी | 3 | दो खिलाड़ियों की पाँच-पाँच पारियों के रनों का माध्य निकालना | हर माध्य के 1½ अंक (1½+1½) |
| 34 | 14 प्रायिकता | 3 | थैले से एक गेंद निकालने पर लाल गेंद की प्रायिकता, अनुकूल और कुल परिणाम दिखाकर | अनुकूल, कुल और प्रायिकता के 1-1 अंक (1+1+1) |
| 36 | 13 सांख्यिकी | 3 (अथवा) | समूहित आँकड़ों का माध्य, उपयुक्त विधि चुनकर: पहला विकल्प समान वर्ग-माप (आम की पेटियाँ), ‘अथवा’ असमान वर्ग-माप (विकेट) | पहले विकल्प का (1+2=3) |
| 37 | 13 सांख्यिकी | 5 (अथवा) | विद्यार्थी के बताए माध्यक (पहला विकल्प) या बहुलक (‘अथवा’) की जाँच; गलत हो तो त्रुटि बताना | पहले विकल्प का (4+1=5) |
अंकों का मिलान: 1+1+1 + 3+3+3 + 5 = 17, जो प्रारूप की अध्यायवार सारणी (13 + 4) से बैठता है। प्र. 35 से 40 में आंतरिक विकल्प (‘अथवा’) है, यानी प्र. 36 और 37 में एक ही विकल्प हल करना है। बोर्ड की पाठ्यक्रम-सूची में समूहित आँकड़ों का माध्य, बहुलक और माध्यक तथा प्रायिकता का सैद्धांतिक दृष्टिकोण लिखा है; संचयी बारंबारता वक्र (ओजाइव) नहीं लिखा।
कुंजी से दो बातें (हमारी पढ़त):
- प्र. 36 के पहले विकल्प की सारणी NCERT अभ्यास 13.1 के प्रश्न 5 (आम की पेटियाँ) की सारणी जैसी ही है; हमने इसे NCERT की पुस्तक (पुनर्मुद्रण 2026-27) से मिलाया है। बोर्ड ने पाठ्यपुस्तक का प्रश्न सीधे उठाया है।
- कुंजी में ‘अथवा’ वाले विकल्प के आगे ‘उदाहरण 3, पृष्ठ 200’ छपा है। NCERT की हिंदी पुस्तक (पुनर्मुद्रण 2026-27) के पृष्ठ 200 पर उदाहरण 3 विकेटों वाला ही है। बोर्ड के प्रश्न में उसकी सारणी के पाँच वर्ग हैं, पुस्तक में छह; इसलिए संख्याएँ नहीं, उदाहरण की विधि पढ़िए।
समय: बोर्ड की प्रश्न-पत्र योजना में प्रश्न हल करने का संभावित समय 180 मिनट है (बहुविकल्पी 20, दो अंक 16, तीन अंक 28, पाँच अंक 116), और प्रश्न-पत्र पढ़ने के 15 मिनट अलग हैं; कुल 195। इससे औसत समय: 1 अंक का प्रश्न 1 मिनट, 3 अंक का 3.5 मिनट, 5 अंक का 29 मिनट। हमारे सात प्रश्नों का औसत 3 × 1 + 3 × 3.5 + 29 = 42.5 मिनट बैठता है। यह प्रकार-वार औसत है; 5 अंक के 29 मिनट में आकृति और ग्राफ़ वाले प्रश्न भी गिने हैं, इसलिए सारणी-गणना वाले प्र. 37 को कम लग सकता है (हमारा अनुमान)।
2. सांख्यिकी: सूत्र और विधि
सूत्र एक नज़र में
| माप | सूत्र | चिह्नों का अर्थ |
|---|---|---|
| माध्य, प्रत्यक्ष विधि | x = ΣfxΣf | x = वर्ग-चिह्न = (निचली सीमा + ऊपरी सीमा) ÷ 2; f = बारंबारता |
| माध्य, कल्पित माध्य विधि | x = a + ΣfdΣf | a = कल्पित माध्य (प्रायः बीच के वर्ग का चिह्न); d = x − a |
| माध्य, पग-विचलन विधि | x = a + h × ΣfuΣf | h = वर्ग-माप (या सभी d का कोई उभयनिष्ठ भाजक); u = (x − a) ÷ h |
| बहुलक | l + f1 − f02f1 − f0 − f2 × h | l = बहुलक वर्ग की निचली सीमा; f1 = बहुलक वर्ग की, f0 = उससे ठीक पहले वाले वर्ग की, f2 = ठीक बाद वाले वर्ग की बारंबारता; h = बहुलक वर्ग की चौड़ाई |
| माध्यक | l + n/2 − cff × h | l = माध्यक वर्ग की निचली सीमा; n = कुल बारंबारता; cf = माध्यक वर्ग से ठीक पिछले वर्ग की संचयी बारंबारता; f = माध्यक वर्ग की बारंबारता; h = माध्यक वर्ग की चौड़ाई |
| अनुभवजन्य संबंध | 3 माध्यक = बहुलक + 2 माध्य | NCERT इसे अनुभवजन्य (अनुमान देने वाला) संबंध कहती है, सटीक नियम नहीं |
NCERT के अनुसार बहुलक और माध्यक के सूत्र समान वर्ग-माप मानकर बने हैं, और इन्हें लगाने से पहले वर्ग-अंतराल सतत होने चाहिए। पग-विचलन में h वर्ग-माप ही लेना ज़रूरी नहीं: असमान वर्गों में सभी d का उपयुक्त भाजक भी चलता है (NCERT उदाहरण 3 में h = 20); बहुलक और माध्यक के सूत्रों में h उसी वर्ग की चौड़ाई है। बोर्ड की कुंजी में कुल बारंबारता के लिए N भी लिखा मिलता है; अर्थ वही है।
NCERT समूहित आँकड़ों में हर वर्ग की बारंबारता को उसके वर्ग-चिह्न पर केंद्रित मानती है, इसलिए इन सूत्रों से आए माध्य, माध्यक और बहुलक मूल प्रेक्षणों के माप के अनुमान हैं। उत्तर में सूत्र से आया मान ही लिखिए।
माध्य की विधि कैसे चुनें
NCERT की टिप्पणी है कि तीनों विधियों से माध्य एक ही आता है, इसलिए चुनाव x और f के मानों पर निर्भर है:
| स्थिति | विधि | कारण |
|---|---|---|
| x और f के मान छोटे हैं | प्रत्यक्ष | सीधा गुणा और योग; कोई अतिरिक्त चरण नहीं |
| मान बड़े हैं और सभी d में उभयनिष्ठ गुणनखंड है (प्रायः समान वर्ग-माप में) | पग-विचलन | u छोटे पूर्णांक बनते हैं (अभ्यास 3, 9) |
| मान बड़े हैं पर उभयनिष्ठ गुणनखंड नहीं है | कल्पित माध्य | d छोटे हो जाते हैं और गुणा आसान रहता है |
| वर्ग-माप असमान हैं और x बड़े हैं | कल्पित माध्य; या h = सभी d का उपयुक्त भाजक लेकर पग-विचलन | NCERT की टिप्पणी और उदाहरण 3 (अभ्यास 10) |
बोर्ड के प्रश्न ‘उपयुक्त विधि चुनकर’ कहते हैं, इसलिए उत्तर के आरंभ में विधि का नाम और कारण एक पंक्ति में लिखिए (हमारा सुझाव; इसके अंक बोर्ड ने अलग से नहीं बताए)।
माध्यक के चार कदम
- वर्ग सतत बनाइए (10–19 को 9.5–19.5) और संचयी बारंबारता (cf) का स्तंभ बनाइए।
- n/2 निकालिए और वह पहला वर्ग खोजिए जिसका cf n/2 से बड़ा हो। यही माध्यक वर्ग है।
- चार मान पहचानिए: l, cf (पिछले वर्ग का), f, h।
- सूत्र लगाइए और जाँचिए कि उत्तर माध्यक वर्ग के भीतर है।
यदि किसी वर्ग का cf ठीक n/2 आए: मान लीजिए वर्ग 0–10, 10–20, 20–30, 30–40 की बारंबारता 10-10 है। तब n = 40, n/2 = 20 और cf = 10, 20, 30, 40। cf 20 के बराबर है, ‘बड़ा’ पहला cf 30 है, इसलिए माध्यक वर्ग 20–30 है: l = 20, cf = 20, f = 10, माध्यक = 20 + (20 − 20) ÷ 10 × 10 = 20, यानी दोनों वर्गों की साझा सीमा। cf 20 वाले वर्ग से लेने पर भी 10 + (20 − 10) ÷ 10 × 10 = 20 ही आता है।
बहुलक के तीन कदम
- बहुलक वर्ग: सबसे अधिक बारंबारता वाला वर्ग।
- f1, f0, f2 पहचानिए: बहुलक वर्ग की, उससे ठीक पहले वाले की और ठीक बाद वाले की बारंबारता; क्रम न बदलें।
- सूत्र लगाइए और जाँचिए कि उत्तर बहुलक वर्ग के भीतर है।
आम गलतियाँ
- माध्यक में माध्यक वर्ग का अपना cf ले लेना, जबकि पिछले वर्ग का cf चाहिए।
- 10–19 जैसे वर्ग सतत किए बिना माध्यक या बहुलक निकालना (अभ्यास 13)।
- f0 और f2 आपस में बदल देना (अभ्यास 14)।
- पग-विचलन में अंत में h से गुणा करना भूल जाना।
- माध्य में Σf की जगह वर्गों की संख्या से भाग देना (अभ्यास 6)।
- कुल बारंबारता को प्रश्न में दी संख्या से न मिलाना।
3. प्रायिकता: सूत्र और विधि
अध्याय 14 में केवल सैद्धांतिक प्रायिकता है, जो परिणामों के समान रूप से संभावित होने की मान्यता पर टिकी है। NCERT के सार के बिंदु ये हैं:
| बात | नियम | कहाँ काम आता है |
|---|---|---|
| परिभाषा | P(E) = E के अनुकूल परिणामों की संख्यासभी संभावित परिणामों की संख्या | अभ्यास 2, 11, 12 |
| सीमा | 0 ≤ P(E) ≤ 1; निश्चित घटना की प्रायिकता 1 और असंभव घटना की 0 | प्र. 4 जैसे कथन (अभ्यास 1) |
| पूरक घटना | P(E नहीं) = 1 − P(E) | अभ्यास 1, 11 |
| प्रारंभिक घटनाएँ | एक प्रयोग की सभी प्रारंभिक घटनाओं की प्रायिकताओं का योग 1 होता है | जाँच के लिए |
NCERT के उदाहरणों में ‘बिना देखे’ या ‘यादृच्छिक’ का अर्थ है कि हर गेंद (या कंचा) निकलने में समान रूप से संभावित है। रंग समान संभावित नहीं होते: 4 लाल और 1 नीली गेंद में लाल की प्रायिकता अधिक है। इसलिए रंग नहीं, गेंदें गिनिए। उत्तर लिखते समय तीन चीज़ें लिखिए: अनुकूल परिणाम, कुल परिणाम और प्रायिकता। बोर्ड की कुंजी में प्र. 34 के आगे इन्हीं का (1+1+1=3) छपा है। दो निष्पक्ष पासों में कुल परिणाम 6 × 6 = 36 हैं, और (3,4) तथा (4,3) अलग-अलग परिणाम हैं।
4. विद्यार्थी का कथन जाँचने की विधि
प्र. 4 और प्र. 37 में बोर्ड ने पाठ्यपुस्तक की विधि को विद्यार्थी के कथन की जाँच के रूप में पूछा है; यहाँ गणना के आधार पर निष्कर्ष माँगा जाता है। हमारा सुझाव है:
- कथन पढ़िए और तय कीजिए कि क्या सिद्ध या खंडित करना है (मान, विधि या नियम)।
- पहले स्वयं गणना कीजिए, विद्यार्थी के मान को देखे बिना।
- मिलाइए और साफ़ लिखिए: “कथन सही है” या “कथन गलत है”।
- त्रुटि लिखिए: गणना किया मान − विद्यार्थी का मान, चिह्न सहित (बोर्ड की कुंजी इसी तरह लिखती है); चिह्न हटाने पर अंतर का परिमाण मिलता है।
- चाहें तो कारण लिखिए (जैसे “वर्ग सतत नहीं किए”)। यह बोर्ड की माँग नहीं है; हमारा अतिरिक्त सुझाव है।
कथन सही भी निकल सकता है; अभ्यास 14 में ऐसा ही है।
5. 16 हल अभ्यास
पहले खुद हल कीजिए, फिर ‘हल देखें’ दबाइए। ‘प्र. 30 जैसा’ का अर्थ है कि अभ्यास उसी ढंग का है, बोर्ड का प्रश्न नहीं। हर हल के नीचे की टिप्पणी बताती है कि अंक-विभाजन बोर्ड की कुंजी से है या हमारा अनुमान।
एक अंक के (अभ्यास 1–6)
अभ्यास 1 1 अंक · प्र. 4 जैसा · NCERT 14.1
- (a) कथन सही है।
- (b) कथन गलत है, क्योंकि P(E) + P(E नहीं) = 1 होना चाहिए, जबकि यहाँ योग 1.1 है।
- (c) कथन गलत है, क्योंकि प्रायिकता 0.5 नहीं हो सकती।
- (d) कथन केवल सिक्के वाले प्रयोग में सही है।
उत्तर देखें
सही उत्तर: (b)
NCERT: P(E) + P(E नहीं) = 1, इसलिए P(E नहीं) = 1 − 0.6 = 0.4। विद्यार्थी ने 0.5 लिखा है; योग 0.6 + 0.5 = 1.1 है, जो 1 से अधिक है। कथन गलत है।
अभ्यास 2 1 अंक · प्र. 4 जैसा · NCERT 14.1
- (a) कथन सही है, क्योंकि अनुकूल परिणाम 2, 3, 5 हैं और कुल परिणाम 6 हैं।
- (b) कथन गलत है, क्योंकि 1 भी अभाज्य है, इसलिए प्रायिकता 4/6 है।
- (c) कथन गलत है, क्योंकि केवल 2 अभाज्य है, इसलिए प्रायिकता 1/6 है।
- (d) कथन गलत है, क्योंकि कुल परिणाम 12 हैं।
उत्तर देखें
सही उत्तर: (a)
1 से 6 में अभाज्य संख्याएँ 2, 3, 5 हैं (1 अभाज्य नहीं है)। अनुकूल 3, कुल 6, इसलिए P = 3/6 = 1/2। कथन सही है; “सही” होना भी निष्कर्ष है, जिसे गणना से सिद्ध करना होता है।
अभ्यास 3 1 अंक · प्र. 5 जैसा · NCERT 13.2
- (a) प्रत्यक्ष विधि
- (b) कल्पित माध्य विधि
- (c) पग-विचलन विधि
- (d) तीनों में गणना बराबर लगेगी, इसलिए कोई अंतर नहीं
उत्तर देखें
सही उत्तर: (c)
a = 550 लें तो d = x − a के मान −100, −50, 0, 50, 100 आते हैं; सबमें उभयनिष्ठ गुणनखंड 50 (= h) है। NCERT के अनुसार तब पग-विचलन सुविधाजनक है: u = (x − a) ÷ h के मान −2, −1, 0, 1, 2 हो जाते हैं। माध्य तीनों विधियों से एक ही आता है, पर गणना का भार अलग है।
अभ्यास 4 1 अंक · प्र. 20 जैसा · NCERT 13.4
- (a) 18
- (b) 20
- (c) 28
- (d) 114
उत्तर देखें
सही उत्तर: (a)
बहुलक = 3 माध्यक − 2 माध्य = 3 × 22 − 2 × 24 = 66 − 48 = 18। माध्य और माध्यक की जगह उलटने पर 3 × 24 − 2 × 22 = 28 (विकल्प c) आता है; 3 × 22 + 2 × 24 = 114 (विकल्प d) चिह्न की गलती से।
अभ्यास 5 1 अंक · अवधारणा · NCERT 13.4
- (a) उस वर्ग में 37 प्रेक्षण हैं।
- (b) उस वर्ग तक (उसे मिलाकर) कुल 37 प्रेक्षण हैं।
- (c) उस वर्ग के बाद 37 प्रेक्षण बचे हैं।
- (d) कुल प्रेक्षणों की संख्या 37 है।
उत्तर देखें
सही उत्तर: (b)
संचयी बारंबारता उस वर्ग तक की सभी बारंबारताओं का योग है, उसे मिलाकर। सावधान: माध्यक के सूत्र का cf माध्यक वर्ग से ठीक पिछले वर्ग का होता है, उसका अपना नहीं।
अभ्यास 6 1 अंक · प्र. 5 / प्र. 7 का ढंग · NCERT 13.2
- (a) A का सूत्र सही है; B का सूत्र सभी fi बराबर होने पर सही मान देता है, सामान्यतः नहीं।
- (b) B का सूत्र सही है; A का सूत्र गलत है।
- (c) दोनों सूत्र सदा एक ही मान देते हैं।
- (d) दोनों सूत्र गलत हैं।
उत्तर देखें
सही उत्तर: (a)
माध्य में हर वर्ग-चिह्न को उसकी बारंबारता से तौला जाता है, इसलिए A का सूत्र सही है। जाँच: x = 10, 20, 30 और f = 1, 2, 7 पर A का मान (10 + 40 + 210) ÷ 10 = 26 और B का 60 ÷ 3 = 20 आता है। सभी f बराबर हों (जैसे 2, 2, 2) तो दोनों का मान समान आता है; सामान्य स्थिति में B का मान गलत है।
तीन अंक के (अभ्यास 7–12)
अभ्यास 7 3 अंक · प्र. 30 जैसा · NCERT 13.2
हल देखें
A का माध्य = 34 + 56 + 41 + 62 + 525 = 2455 = 49
B का माध्य = 45 + 38 + 60 + 47 + 405 = 2305 = 46
निष्कर्ष: A का औसत 49 रन और B का 46 रन है; A का औसत 3 रन अधिक है।
उत्तर: A: 49 रन, B: 46 रन; A का औसत 3 रन अधिक
अंक-विभाजन: प्रत्येक माध्य के 1½ अंक (बोर्ड की कुंजी में प्र. 30 का यही विभाजन है); तुलना का वाक्य हमारा है।
अभ्यास 8 3 अंक · प्र. 30 का विस्तार · NCERT 13.2
हल देखें
A का माध्य = 2005 = 40; B का माध्य = 2005 = 40। माध्य बराबर हैं।
अब देखें कि अंक कैसे फैले हैं। A के सबसे बड़े और सबसे छोटे अंक 70 और 15 हैं (अंतर 55); B के 42 और 38 हैं (अंतर 4)।
निष्कर्ष: माध्य बराबर हैं, पर इससे “प्रदर्शन एक-सा” सिद्ध नहीं होता: A के अंक बहुत ऊपर-नीचे हुए, B के लगभग एक-से रहे। रमेश का निष्कर्ष गणना से सिद्ध नहीं होता।
उत्तर: दोनों का माध्य 40; पर अंकों का फैलाव अलग (55 बनाम 4)
अंक-विभाजन हमारा अनुमान: माध्य 1+1, निष्कर्ष 1। सबसे बड़े-छोटे अंक का अंतर हमारी अतिरिक्त टिप्पणी है; बिखराव की माप इस पाठ्यक्रम में नहीं है।
अभ्यास 9 3 अंक · प्र. 36 (पहला विकल्प) जैसा · NCERT 13.2
हल देखें
विधि का चुनाव: वर्ग-चिह्न 33, 38, 43, 48, 53 हैं; वर्ग-माप समान (5) है। a = 43 लेने पर सभी विचलन 5 के गुणज हैं, इसलिए पग-विचलन विधि सुविधाजनक है।
| वर्ग | f | वर्ग-चिह्न x | u = (x − 43) ÷ 5 | f × u |
|---|---|---|---|---|
| 31–35 | 8 | 33 | −2 | −16 |
| 36–40 | 22 | 38 | −1 | −22 |
| 41–45 | 40 | 43 | 0 | 0 |
| 46–50 | 24 | 48 | 1 | 24 |
| 51–55 | 6 | 53 | 2 | 12 |
| योग | Σf = 100 | Σfu = −2 |
x = a + h × ΣfuΣf = 43 + 5 × −2100 = 43 − 0.1 = 42.9
उत्तर: प्रति पेटी औसतन 42.9 नींबू।
जाँच: वर्ग सतत करने पर (30.5–35.5 आदि) वर्ग-चिह्न वही 33, 38, 43, 48, 53 रहते हैं, इसलिए माध्य नहीं बदलता। सतत रूप माध्यक और बहुलक में ज़रूरी है, माध्य में नहीं।
उत्तर: 42.9
अंक-विभाजन: सारणी 1, गणना 2 (बोर्ड की कुंजी में प्र. 36 के पहले विकल्प का यही 1+2=3 है)।
अभ्यास 10 3 अंक · प्र. 36 (अथवा) जैसा · NCERT 13.2, उदाहरण 3
हल देखें
विधि का चुनाव: वर्ग-माप असमान हैं (20, 20, 50, 100, 100) और वर्ग-चिह्न 20, 40, 75, 150, 250 हैं। बीच के वर्ग का चिह्न a = 75 लेकर कल्पित माध्य विधि अपनाई।
| वर्ग (रन) | f | वर्ग-चिह्न x | d = x − 75 | f × d |
|---|---|---|---|---|
| 10–30 | 5 | 20 | −55 | −275 |
| 30–50 | 9 | 40 | −35 | −315 |
| 50–100 | 14 | 75 | 0 | 0 |
| 100–200 | 8 | 150 | 75 | 600 |
| 200–300 | 4 | 250 | 175 | 700 |
| योग | Σf = 40 | Σfd = 710 |
x = a + ΣfdΣf = 75 + 71040 = 75 + 17.75 = 92.75
उत्तर: बल्लेबाज़ों का माध्य रन 92.75 है।
जाँच (प्रत्यक्ष विधि): Σfx = 100 + 360 + 1050 + 1200 + 1000 = 3710, और 3710 ÷ 40 = 92.75। दोनों विधियों का उत्तर समान है।
NCERT के उदाहरण 3 में भी वर्ग-माप असमान हैं और वहाँ a = 200, h = 20 से पग-विचलन चलाई गई है। यहाँ सभी d, 5 के गुणज हैं, इसलिए h = 5 से भी वही 92.75 मिलता है, पर u के मान (−11, −7, 0, 15, 35) छोटे नहीं बनते, इसलिए कल्पित माध्य अधिक सीधी रही।
उत्तर: 92.75
अंक-विभाजन हमारा अनुमान: सारणी 1, गणना 2। हल हमारा है।
अभ्यास 11 3 अंक · प्र. 34 जैसा · NCERT 14.1
हल देखें
कुल परिणाम = 6 + 5 + 4 = 15। हर कंचे के निकलने की संभावना बराबर मानी गई है, इसलिए किसी रंग की प्रायिकता उस रंग के कंचों की संख्या पर निर्भर है।
| घटना | अनुकूल परिणाम | कुल परिणाम | प्रायिकता |
|---|---|---|---|
| (क) नीला कंचा | 5 | 15 | 515 = 13 |
| (ख) नीला नहीं | 6 + 4 = 10 | 15 | 1015 = 23 |
| (ग) पीला या सफ़ेद | 6 + 4 = 10 | 15 | 1015 = 23 |
जाँच: P(नीला नहीं) = 1 − P(नीला) = 1 − 13 = 23। यही मान (ख) में आया है।
(ख) और (ग) का उत्तर एक ही है, क्योंकि “नीला नहीं” और “पीला या सफ़ेद” एक ही घटना है।
उत्तर: (क) 1/3, (ख) 2/3, (ग) 2/3
अंक-विभाजन हमारा अनुमान: हर भाग 1 अंक। बोर्ड की कुंजी में प्र. 34 के एक प्रश्न के अनुकूल, कुल और प्रायिकता को 1+1+1 अंक हैं; यहाँ भी हर भाग में ये तीन बातें लिखिए।
अभ्यास 12 3 अंक · प्र. 34 का विस्तार · NCERT 14.1
हल देखें
कुल परिणाम = 6 × 6 = 36। योग के अनुसार परिणामों की संख्या:
| योग | 2 | 3 | 4 | 5 | 6 | 7 | 8 | 9 | 10 | 11 | 12 |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| परिणाम | 1 | 2 | 3 | 4 | 5 | 6 | 5 | 4 | 3 | 2 | 1 |
(क) योग ≥ 9 के परिणाम: (3,6), (4,5), (4,6), (5,4), (5,5), (5,6), (6,3), (6,4), (6,5), (6,6)। अनुकूल 10, इसलिए P = 1036 = 518।
(ख) गुणनफल 12 के परिणाम: (2,6), (3,4), (4,3), (6,2)। अनुकूल 4, इसलिए P = 436 = 19।
(ग) अभाज्य योग 2, 3, 5, 7, 11 हैं, जिनके परिणाम 1 + 2 + 4 + 6 + 2 = 15 हैं। P = 1536 = 512।
ध्यान दें: (3,4) और (4,3) अलग परिणाम हैं, इसलिए गुणनफल 12 के चार परिणाम हैं।
उत्तर: (क) 5/18, (ख) 1/9, (ग) 5/12
अंक-विभाजन हमारा अनुमान: हर भाग 1 अंक। यह बोर्ड के नमूने से कुछ कठिन अभ्यास है।
पाँच अंक के (अभ्यास 13–16)
अभ्यास 13 5 अंक · प्र. 37 (पहला विकल्प) जैसा · NCERT 13.4
हल देखें
चरण 1: वर्ग सतत बनाइए (निचली सीमा में से 0.5 घटाइए, ऊपरी में 0.5 जोड़िए)।
| दिया वर्ग | सतत वर्ग | f | cf |
|---|---|---|---|
| 10–19 | 9.5–19.5 | 6 | 6 |
| 20–29 | 19.5–29.5 | 10 | 16 |
| 30–39 | 29.5–39.5 | 18 | 34 |
| 40–49 | 39.5–49.5 | 9 | 43 |
| 50–59 | 49.5–59.5 | 7 | 50 |
| योग | n = 50 |
चरण 2: माध्यक वर्ग। n = 50, इसलिए n/2 = 25। cf 34 पहला मान है जो 25 से बड़ा है, इसलिए माध्यक वर्ग 29.5–39.5 है। l = 29.5, cf (पिछले वर्ग का) = 16, f = 18, h = 10।
चरण 3: सूत्र। माध्यक = l + n/2 − cff × h = 29.5 + 25 − 1618 × 10 = 29.5 + 9018 = 29.5 + 5 = 34.5
चरण 4: निष्कर्ष। सही माध्यक 34.5 है और विद्यार्थी ने 35 बताया है, इसलिए उसका उत्तर गलत है। त्रुटि = 34.5 − 35 = −0.5 (अंतर का परिमाण 0.5)।
संभावित कारण (हमारा अनुमान): वर्ग सतत किए बिना l = 30 लें तो 30 + 5 = 35 आता है, ठीक विद्यार्थी का उत्तर।
उत्तर: 34.5; कथन (35) गलत; त्रुटि −0.5 (परिमाण 0.5)
अंक-विभाजन: बोर्ड की कुंजी में प्र. 37 के पहले विकल्प का (4+1=5) है: गणना 4, निष्कर्ष और त्रुटि 1। कारण लिखना हमारा अतिरिक्त अभ्यास है।
अभ्यास 14 5 अंक · प्र. 37 (अथवा) जैसा · NCERT 13.3
हल देखें
| ऊँचाई (सेमी) | पौधे |
|---|---|
| 40–45 | 4 |
| 45–50 | 10 |
| 50–55 | 25 |
| 55–60 | 15 |
| 60–65 | 9 |
| 65–70 | 7 |
| योग | 70 |
चरण 1: बहुलक वर्ग। सबसे अधिक बारंबारता 25 है, इसलिए बहुलक वर्ग 50–55 है। l = 50, h = 5, f1 = 25, f0 (पिछले वर्ग की) = 10, f2 (अगले वर्ग की) = 15।
चरण 2: सूत्र। बहुलक = l + f1 − f02f1 − f0 − f2 × h = 50 + 25 − 1050 − 10 − 15 × 5 = 50 + 1525 × 5 = 50 + 3 = 53
चरण 3: निष्कर्ष। गणना से बहुलक 53 सेमी आया, जो विद्यार्थी के कथन के बराबर है। इसलिए कथन सही है और त्रुटि = 53 − 53 = 0।
चेतावनी: f0 और f2 बदल देने (f0 = 15, f2 = 10) पर 50 + 10 ÷ 25 × 5 = 52 आता है।
उत्तर: 53; कथन सही; त्रुटि 0
अंक-विभाजन हमारा अनुमान: गणना 4, निष्कर्ष 1 (जैसा बोर्ड ने प्र. 37 के पहले विकल्प में रखा है)। हमने कथन जानबूझकर सही रखा है।
अभ्यास 15 5 अंक · प्र. 20 और प्र. 37 का मेल · NCERT 13.2 से 13.4
हल देखें
| अंक | f | cf | वर्ग-चिह्न x | u = (x − 35) ÷ 10 | f × u |
|---|---|---|---|---|---|
| 0–10 | 10 | 10 | 5 | −3 | −30 |
| 10–20 | 11 | 21 | 15 | −2 | −22 |
| 20–30 | 18 | 39 | 25 | −1 | −18 |
| 30–40 | 20 | 59 | 35 | 0 | 0 |
| 40–50 | 12 | 71 | 45 | 1 | 12 |
| 50–60 | 9 | 80 | 55 | 2 | 18 |
| योग | n = 80 | Σfu = −40 |
(क) माध्य (पग-विचलन, a = 35, h = 10): x = 35 + 10 × −4080 = 35 − 5 = 30
माध्यक: n/2 = 40। cf 59 पहला मान है जो 40 से बड़ा है, इसलिए माध्यक वर्ग 30–40 है। l = 30, cf (पिछले वर्ग का) = 39, f = 20, h = 10। माध्यक = 30 + 40 − 3920 × 10 = 30 + 0.5 = 30.5
बहुलक: सबसे अधिक बारंबारता 20, इसलिए बहुलक वर्ग भी 30–40 है। f1 = 20, f0 = 18, f2 = 12। बहुलक = 30 + 20 − 1840 − 18 − 12 × 10 = 30 + 210 × 10 = 30 + 2 = 32
(ख) संबंध की जाँच: 3 × माध्यक = 3 × 30.5 = 91.5, और बहुलक + 2 × माध्य = 32 + 2 × 30 = 92। अंतर केवल 0.5 है, इसलिए संबंध लगभग सही बैठता है।
उलटकर: बहुलक का अनुमान 3 × 30.5 − 2 × 30 = 31.5, जबकि सूत्र से 32 आया; संबंध अनुमान देता है, इसीलिए “अनुभवजन्य” है।
उत्तर: माध्य 30, माध्यक 30.5, बहुलक 32; 91.5 ≈ 92
यह बोर्ड के प्र. 37 से लंबा अभ्यास है; अंक-विभाजन हमने नहीं बताया।
अभ्यास 16 5 अंक · NCERT प्रकार (माध्यक दिया है) · NCERT 13.4
| अंक | f |
|---|---|
| 0–10 | 6 |
| 10–20 | x |
| 20–30 | 14 |
| 30–40 | 22 |
| 40–50 | y |
| 50–60 | 8 |
| योग | 80 |
हल देखें
चरण 1: योग से। 6 + x + 14 + 22 + y + 8 = 80, इसलिए 50 + x + y = 80 और x + y = 30। ...(1)
चरण 2: माध्यक वर्ग। माध्यक 35 है, जो 30–40 में पड़ता है। इसलिए l = 30, h = 10, f = 22, n/2 = 40, और पिछले वर्गों का cf = 6 + x + 14 = 20 + x।
चरण 3: सूत्र लगाइए। 35 = 30 + 40 − (20 + x)22 × 10, यानी 5 = (20 − x) × 1022। इससे 20 − x = 5 × 2210 = 11, इसलिए x = 9।
चरण 4: y। (1) से y = 30 − 9 = 21।
जाँच: x = 9, y = 21 रखने पर cf = 6, 15, 29, 51, 72, 80 बनते हैं। n/2 = 40 के लिए माध्यक वर्ग 30–40 है और माध्यक = 30 + 40 − 2922 × 10 = 30 + 5 = 35। दिया हुआ माध्यक मिल गया।
उत्तर: x = 9, y = 21
अंक-विभाजन हमारा अनुमान: समीकरण (1) 1, माध्यक वर्ग और सूत्र 2, x का मान 1, y और जाँच 1। यह NCERT प्रकार का अभ्यास है, बोर्ड के नमूने में नहीं।
6. जाँचें
पहले खुद सोचिए, फिर ‘उत्तर देखें’ दबाइए।
- बोर्ड के प्रारूप में अध्याय 13 (सांख्यिकी) और अध्याय 14 (प्रायिकता) का अंकभार कितना-कितना है?
- 13 और 4
- 9 और 8
- 11 और 6
- 10 और 7
उत्तर देखें
सही उत्तर: 13 और 4। बोर्ड के प्रारूप में सांख्यिकी के 13 और प्रायिकता के 4 अंक हैं, कुल 17। नमूने के सात प्रश्न 1+1+1+3+3+3+5 = 17 अंक के हैं।
- प्र. 37 के पहले विकल्प की उत्तर-कुंजी में अंक-विभाजन क्या छपा है?
- 2+3=5
- 4+1=5
- 3+2=5
- 1+4=5
उत्तर देखें
सही उत्तर: 4+1=5। कुंजी में माध्यक की गणना और त्रुटि के बाद (4+1=5) छपा है। प्र. 30 में 1½+1½ और प्र. 34 में 1+1+1 छपा है।
- माध्यक या बहुलक के सूत्र लगाने से पहले NCERT के अनुसार क्या सुनिश्चित करना चाहिए?
- वर्ग-अंतराल सतत हों
- बारंबारताएँ सम संख्याएँ हों
- वर्ग-माप 10 हो
- कुल बारंबारता 100 हो
उत्तर देखें
सही उत्तर: वर्ग-अंतराल सतत हों। NCERT के अध्याय 13 के अंत के ‘पाठक के लिए नोट’ में यही लिखा है। 10–19, 20–29 को पहले 9.5–19.5, 19.5–29.5 बनाइए।
- NCERT के अनुसार पग-विचलन विधि कब सुविधाजनक है?
- जब सभी विचलन d में उभयनिष्ठ गुणनखंड हो
- जब कुल बारंबारता विषम हो
- जब वर्गों की संख्या पाँच हो
- जब माध्य पूर्णांक न आता हो
उत्तर देखें
सही उत्तर: जब सभी विचलन d में उभयनिष्ठ गुणनखंड हो। NCERT 13.2 में लिखा है कि सभी d में उभयनिष्ठ गुणनखंड हो तब यह विधि सुविधाजनक है; तब u = (x − a) ÷ h छोटे पूर्णांक बनते हैं।
- विद्यार्थी के बताए माध्यक की जाँच में सबसे पहले क्या करना चाहिए?
- कथन को सही मानकर आगे बढ़ना
- स्वयं माध्यक निकालना और फिर कथन से मिलाना
- केवल माध्यक वर्ग देख लेना
- माध्य निकालकर उससे तुलना करना
उत्तर देखें
सही उत्तर: स्वयं माध्यक निकालना और फिर कथन से मिलाना। बोर्ड की कुंजी भी पहले माध्यक की गणना करती है, फिर विद्यार्थी के मान से मिलाकर निष्कर्ष और त्रुटि लिखती है।
7. सामान्य प्रश्न
सांख्यिकी और प्रायिकता से कितने अंक आते हैं?
बोर्ड के प्रारूप में सांख्यिकी के 13 और प्रायिकता के 4 अंक हैं, कुल 17। नमूना प्रश्न-पत्र में इनके सात प्रश्न हैं: प्र. 4, 5, 20 (1-1 अंक), प्र. 30, 34, 36 (3-3 अंक) और प्र. 37 (5 अंक)। नमूना केवल नमूना है; मूल परीक्षा में क्रमांक या रूप बदल सकते हैं, यह हमारी सावधानी है।
प्र. 37 में ‘संभावित त्रुटि’ का क्या अर्थ है?
बोर्ड की कुंजी में गणना किए मान और विद्यार्थी के मान का अंतर त्रुटि के रूप में लिखा गया है। ‘किस गलती से यह उत्तर आया’ यह कुंजी में नहीं है। हमारे अभ्यास 13 में अंतर और संभावित कारण दोनों हैं; कारण हमारा अनुमान है, बोर्ड की माँग नहीं।
क्या वर्ग-अंतराल सतत बनाना ज़रूरी है?
माध्यक और बहुलक के लिए हाँ: NCERT के अध्याय 13 के अंतिम नोट में यही लिखा है। 10–19, 20–29 तब 9.5–19.5, 19.5–29.5 बनते हैं। माध्य के लिए ज़रूरी नहीं, क्योंकि वर्ग-चिह्न वही रहते हैं (अभ्यास 9)। बोर्ड की कुंजी ने प्र. 36 के पहले विकल्प में फिर भी वर्ग सतत किए हैं, इसलिए लिख दें तो हानि नहीं; यह हमारा सुझाव है।
माध्य की कौन-सी विधि चुनें?
NCERT की टिप्पणी के अनुसार तीनों विधियों से माध्य एक ही आता है। मान छोटे हों तो प्रत्यक्ष विधि, बड़े हों तो कल्पित माध्य या पग-विचलन। वर्ग-माप असमान और x बड़े हों, तब भी h को सभी d का उपयुक्त भाजक लेकर पग-विचलन चल सकती है। उत्तर के आरंभ में विधि का नाम और कारण एक पंक्ति में लिखिए; यह हमारा सुझाव है।
इस लेख के प्रश्न और उत्तर किसने लिखे हैं?
16 प्रश्न और उनके हल हमने स्वयं लिखे हैं; वे बोर्ड या किसी प्रकाशक से नहीं लिए गए। हर गणना कोड में सटीक भिन्नों से दोबारा जाँची गई है; पर समूहित आँकड़ों से निकले माप मूल प्रेक्षणों के अनुमान होते हैं। बोर्ड के सात प्रश्नों का केवल आशय दिया गया है; मूल प्रश्न-पत्र बोर्ड की साइट से देखिए।
8. NCERT से आगे
यह भाग बोर्ड के पाठ्यक्रम या NCERT की पुस्तक का हिस्सा नहीं है। Penn State University के STAT 200 पाठ्यक्रम का Measures of Central Tendency पन्ना बताता है कि माध्यक क्रमबद्ध आँकड़ों का बीच का मान है (सम संख्या में दो बीच के मानों का औसत) और बहुलक सबसे अधिक बार आने वाला मान, जो एक से अधिक हो सकता है या एक भी नहीं। उसी के अनुसार सममित बंटन में तीनों माप बराबर होते हैं (हमारी टिप्पणी: यह एक शिखर वाले बंटन के लिए पक्का है; दो शिखर वाले सममित बंटन में बहुलक अलग निकल सकते हैं), और अलग-थलग मानों या झुके बंटन में प्रायः माध्यक चुना जाता है, क्योंकि माध्य लंबी पूँछ की ओर खिंच जाता है।
Rice University की परियोजना OpenStax की पुस्तक Statistics का Skewness and the Mean, Median, and Mode खंड बताता है कि दाईं ओर झुके बंटन में बहुलक प्रायः माध्यक से और माध्यक माध्य से छोटा होता है, बाईं ओर झुके में क्रम उलटा। इसलिए ‘3 माध्यक = बहुलक + 2 माध्य’ अनुमान ही है: अभ्यास 15 में 91.5 और 92 आए, पर दूसरे आँकड़ों में अंतर बड़ा भी हो सकता है (यह निष्कर्ष हमारा है)। ये दोनों स्रोत विश्वविद्यालय स्तर के हैं, कक्षा 10 की परीक्षा के लिए नहीं।
9. संदर्भ
- माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, राजस्थान, अजमेर: Download Center, Model Question Papers 2027 और Secondary Model Question Paper (PDF): गणित (कोड 09) का नमूना प्रश्न-पत्र, प्रश्न-पत्र की योजना, अध्यायवार अंकभार और उत्तर-कुंजी।
- माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, राजस्थान: कक्षा 10 पाठ्यक्रम 2026-27 (PDF): गणित का पाठ्यक्रम।
- NCERT, गणित कक्षा 10, पुनर्मुद्रण 2026-27: अध्याय 13 सांख्यिकी (हिंदी, English) और अध्याय 14 प्रायिकता (हिंदी, English)।
- NCERTClasses: कक्षा 10 गणित प्रश्न पत्र प्रारूप एवं ब्लू प्रिंट 2026-27; केस-आधारित प्रश्न; शब्द-समस्याएँ: 50 हल प्रश्न; 80/80 कैसे पाएँ: टॉपर कॉपी विश्लेषण।
- Penn State University: STAT 200, Measures of Central Tendency।
- OpenStax (Rice University): Statistics, Skewness and the Mean, Median, and Mode।
NCERTClasses टीम · प्रकाशित: 20 अक्टूबर 2026 · अंतिम अद्यतन: 20 अक्टूबर 2026

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