RBSE कक्षा 11 भूगोल (Geography, विषय कोड-14) का सत्र 2026–27 का पाठ्यक्रम राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, अजमेर ने जारी किया है। इसमें सैद्धांतिक परीक्षा 70 अंक की (3:15 घंटे) और प्रायोगिक परीक्षा 30 अंक की (4 घंटे) है, यानी कुल 100 अंक। सैद्धांतिक भाग भी दो बराबर खंडों में बँटा है: खंड अ — भौतिक भूगोल के मूल सिद्धांत (35 अंक) और खंड ब — भारत: भौतिक पर्यावरण (35 अंक)। बोर्ड ने हर इकाई के अंक दिए हैं।
इस लेख में दोनों खंडों की सभी इकाइयों के अंक और विषय-बिंदु, अध्याय-वार मुख्य तथ्य और तुलना-तालिकाएँ, नक्शा-कार्य की तैयारी, प्रायोगिक परीक्षा की पूरी योजना (मानचित्र, पैमाना, अक्षांश-देशांतर और समय, प्रक्षेप, स्थलाकृतिक मानचित्र, सुदूर संवेदन) और हल किए संख्यात्मक उदाहरण, अभ्यास-प्रश्न (उत्तर सहित), 8 सप्ताह की योजना और FAQ हैं। जहाँ बोर्ड का PDF कोई जानकारी नहीं देता, वहाँ यह साफ़ लिखा है।
- कुल अंक: 100 = सैद्धांतिक 70 (35 + 35, 3:15 घंटे) + प्रायोगिक 30 (4 घंटे)
- बोर्ड का नियम: विद्यार्थी को सैद्धांतिक और प्रायोगिक, दोनों परीक्षाओं में अलग-अलग उत्तीर्ण होना अनिवार्य है
- खंड अ (35): इकाइयाँ 3, 4, 8, 8, 4, 3 और मानचित्र-कार्य 5 · खंड ब (35): इकाइयाँ 2, 12, 11, 5 और मानचित्र-कार्य 5
- सबसे बड़ी इकाई: खंड ब की इकाई 2 (भू-आकृति विज्ञान, 12 अंक) और इकाई 3 (जलवायु और वनस्पति, 11 अंक)
- मानचित्र-कार्य: दोनों खंडों में 5-5 अंक (विश्व और भारत के रूपरेखा मानचित्र पर)
- पुस्तकें: भौतिक भूगोल के मूल सिद्धांत; भारत: भौतिक पर्यावरण; भूगोल में प्रायोगिक कार्य भाग-1 (सभी NCERT)
आधिकारिक 2026–27 पाठ्यक्रम PDF खोलें — भूगोल, पृष्ठ 31–35 ↗
| बोर्ड | माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, राजस्थान, अजमेर |
|---|---|
| सत्र | 2026–2027 |
| विषय / कोड | भूगोल (Geography) / 14 |
| सैद्धांतिक | 70 अंक (35 + 35) · 3:15 घंटे |
| प्रायोगिक | 30 अंक · 4 घंटे |
| पूर्णांक | 100 |
| साप्ताहिक समय | सैद्धांतिक के लिए 6 और प्रायोगिक के लिए 4 घंटे प्रति सप्ताह (PDF के अनुसार) |
| निर्धारित पुस्तकें | भौतिक भूगोल के मूल सिद्धांत; भारत: भौतिक पर्यावरण; भूगोल में प्रायोगिक कार्य भाग-1 (NCERT) |
इकाईवार अंक विभाजन
| परीक्षा | समय (घंटे) | प्रश्न पत्र के लिए अंक |
|---|---|---|
| सैद्धांतिक | 3:15 | 70 (35 + 35) |
| प्रायोगिक | 4:00 | 30 |
| कुल | 100 |
खंड अ: भौतिक भूगोल के मूल सिद्धांत (35 अंक)
| इकाई | नाम | Unit | अध्याय | अंक |
|---|---|---|---|---|
| 1 | भूगोल एक विषय के रूप में | Geography as a Discipline | 1 | 3 |
| 2 | पृथ्वी | The Earth | 2–4 | 4 |
| 3 | भू-आकृतियाँ | Landforms | 5–6 | 8 |
| 4 | जलवायु | Climate | 7–11 | 8 |
| 5 | जल (महासागर) | Water (Ocean) | 12–13 | 4 |
| 6 | पृथ्वी पर जीवन | Life on the Earth | 14 | 3 |
| 7 | मानचित्रण कार्य (विश्व) | Map Work (World) | — | 5 |
| जोड़ | 14 अध्याय | 35 |
खंड ब: भारत: भौतिक पर्यावरण (35 अंक)
| इकाई | नाम | Unit | अध्याय | अंक |
|---|---|---|---|---|
| 1 | प्रस्तावना (भारत की स्थिति) | Introduction (India — Location) | 1 | 2 |
| 2 | भू-आकृति विज्ञान | Physiography | 2–3 | 12 |
| 3 | जलवायु और वनस्पति | Climate and Vegetation | 4–5 | 11 |
| 4 | प्राकृतिक संकट तथा आपदाएँ | Natural Hazards and Disasters | 6 | 5 |
| 5 | मानचित्रण कार्य (भारत) | Map Work (India) | — | 5 |
| जोड़ | 6 अध्याय | 35 |
अंकों के क्रम से पढ़ें
| अंक | इकाई | जोड़ |
|---|---|---|
| 12 | खंड ब, इकाई 2: भू-आकृति विज्ञान | 12 |
| 11 | खंड ब, इकाई 3: जलवायु और वनस्पति | 11 |
| 8 | खंड अ, इकाई 3: भू-आकृतियाँ; खंड अ, इकाई 4: जलवायु | 16 |
| 5 | खंड ब, इकाई 4: प्राकृतिक संकट; दोनों मानचित्र-कार्य (खंड अ इकाई 7 और खंड ब इकाई 5) | 15 |
| 4 | खंड अ, इकाई 2: पृथ्वी; इकाई 5: जल (महासागर) | 8 |
| 3 | खंड अ, इकाई 1: भूगोल एक विषय; इकाई 6: पृथ्वी पर जीवन | 6 |
| 2 | खंड ब, इकाई 1: प्रस्तावना (भारत की स्थिति) | 2 |
| कुल | 70 |
- खंड ब की दो इकाइयाँ (भू-आकृति विज्ञान 12 और जलवायु-वनस्पति 11) मिलकर 23 अंक की हैं, यानी कुल सैद्धांतिक अंकों का लगभग एक-तिहाई।
- नक्शा-कार्य के 10 अंक (5 + 5) अभ्यास से लगभग पक्के होते हैं; इन्हें छोड़ना सबसे महँगा पड़ता है।
- खंड अ की इकाई 2 में तीन अध्याय (2, 3, 4) हैं, पर अंक केवल 4। इन्हें समझकर संक्षेप में तैयार करें, रटकर नहीं।
समय-प्रबंधन
सैद्धांतिक प्रश्न पत्र के लिए 195 मिनट हैं। नीचे का बँटवारा सुझाव है:
| हिस्सा | अंक | सुझाया समय (मिनट) |
|---|---|---|
| खंड अ (इकाई 1–6) | 30 | 75 |
| खंड अ मानचित्र-कार्य | 5 | 15 |
| खंड ब (इकाई 1–4) | 30 | 75 |
| खंड ब मानचित्र-कार्य | 5 | 15 |
| दोहराव और जाँच | — | 15 |
| कुल | 70 | 195 |
PDF में प्रश्नों के प्रकार (objective, short, long) और उनके अंक नहीं दिए गए हैं, इसलिए प्रश्न-पत्र की संरचना के लिए विद्यालय में मिले नमूना पत्र देखें।
PDF की जाँच: जिन बातों की पुष्टि करें
PDF को ध्यान से पढ़ने पर ये बातें दिखीं। इनका मतलब यह नहीं कि कुछ हटा या जुड़ा है; मतलब यह है कि अंतिम पुष्टि विद्यालय या बोर्ड के निर्देश से करनी चाहिए।
| बात | PDF में क्या दिखा | क्या करें |
|---|---|---|
| अलग-अलग उत्तीर्ण | PDF में लिखा है कि सैद्धांतिक और प्रायोगिक परीक्षा में विद्यार्थी को अलग-अलग उत्तीर्ण होना अनिवार्य है | प्रायोगिक परीक्षा को हल्के में न लें; उत्तीर्ण अंकों के नियम विद्यालय से पूछें |
| अध्यायवार अंक | अंक केवल इकाइयों के दिए हैं। जैसे खंड अ की इकाई 2 (पृथ्वी) में अध्याय 2, 3, 4 हैं पर कुल 4 अंक | इकाई-स्तर पर ही अंक-भार देखें |
| अध्यायों की गिनती | खंड अ के अध्याय 1–14 और खंड ब के अध्याय 1–6 अलग-अलग गिने गए हैं (दो अलग किताबें) | अध्याय बताते समय "खंड अ/ब" साथ लिखें |
| अंग्रेज़ी सूची की वर्तनी | अंग्रेज़ी विषय-सूची में कुछ वर्तनी की भूलें छपी हैं (जैसे Temprature, Atmosphore, Jupes of Rainfall, Penisular, Creological)। इस लेख में सही वर्तनी (Temperature, Atmosphere, Types of Rainfall, Peninsular, Geological) प्रयोग की गई है | परीक्षा में पुस्तक की वर्तनी लिखें |
| मानचित्र-कार्य की सूची | PDF में दोनों खंडों के मानचित्र-कार्य को "ऊपर के विषय-वस्तु पर आधारित" कहा गया है, पर स्थानों की कोई सूची नहीं दी गई | अपनी पुस्तक और विद्यालय के नक्शा-अभ्यास के अनुसार तैयारी करें; नीचे का मार्गदर्शन सुझाव है |
| साप्ताहिक समय | सैद्धांतिक के लिए 6 और प्रायोगिक के लिए 4 घंटे प्रति सप्ताह निर्धारित हैं | स्व-अध्ययन की योजना में प्रायोगिक को भी बराबर महत्व दें |
खंड अ: भौतिक भूगोल के मूल सिद्धांत (35 अंक)
यह खंड NCERT की पुस्तक Fundamentals of Physical Geography पर आधारित है। इसमें 14 अध्याय हैं, जो 6 इकाइयों और मानचित्र-कार्य में बँटे हैं। हर अध्याय में पहले PDF के अनुसार विषय-बिंदु हैं, फिर मुख्य तथ्य और अवधारणाएँ। आँकड़े और नाम परीक्षा में अपनी पुस्तक के अनुसार ही लिखें।
इकाई 1: भूगोल एक विषय के रूप में (3 अंक)
अध्याय 1: भूगोल एक विषय के रूप में
PDF के विषय: भूगोल एक समाकलन विषय के रूप में; भूगोल की शाखाएँ; भूगोल के क्षेत्र; भौतिक भूगोल एवं इसका महत्त्व।
- समाकलन विषय: भूगोल प्राकृतिक और सामाजिक विज्ञानों को जोड़कर पृथ्वी को मानव के घर के रूप में समझता है।
- भौतिक भूगोल की शाखाएँ: भू-आकृति विज्ञान, जलवायु विज्ञान, जल विज्ञान और मृदा भूगोल। मानव भूगोल और जैव भूगोल अन्य प्रमुख क्षेत्र हैं।
- दो उपागम: क्रमबद्ध (व्यवस्थित) उपागम — हम्बोल्ट; प्रादेशिक उपागम — रिटर। "भूगोल" (geography) शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग यूनानी विद्वान इरेटोस्थनीज़ ने किया।
- भौतिक भूगोल का महत्त्व: प्राकृतिक संसाधनों, आपदाओं और मानव-पर्यावरण संबंध को समझने तथा संसाधन-प्रबंधन के लिए।
इकाई 2: पृथ्वी (4 अंक; अध्याय 2, 3, 4)
अध्याय 2: पृथ्वी की उत्पत्ति एवं विकास
PDF के विषय: आरंभिक सिद्धांत; आधुनिक सिद्धांत — ब्रह्मांड की उत्पत्ति, तारों का निर्माण, ग्रहों का निर्माण; पृथ्वी का विकास; स्थलमंडल, वायुमंडल और जलमंडल का विकास; जीवन की उत्पत्ति।
- आरंभिक सिद्धांत: कांट और लाप्लास का निहारिका परिकल्पना जैसे विचार, तथा जेम्स जीन्स और जेफ़्रीज़ का ज्वारीय सिद्धांत।
- महाविस्फोट (Big Bang) सिद्धांत: ब्रह्मांड एक अत्यंत सघन बिंदु से फैला; 1920 में एडविन हब्बल ने सिद्ध किया कि ब्रह्मांड फैल रहा है।
- ग्रहों का निर्माण: निहारिका से तारा बना, फिर ग्रहाणुओं के जुड़ने से ग्रह। पार्थिव (आंतरिक) ग्रह: बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल; बृहस्पति-सदृश (बाह्य) ग्रह: बृहस्पति, शनि, अरुण, वरुण।
- चंद्रमा: विशाल टक्कर (giant impact) परिकल्पना के अनुसार पृथ्वी से किसी विशाल पिंड की टक्कर से बना।
- पृथ्वी की आयु: लगभग 4.6 अरब वर्ष। भारी पदार्थ केंद्र में बैठे और हल्के ऊपर, इस प्रक्रिया से पृथ्वी परतदार बनी। वायुमंडल के विकास के तीन चरण: आदि वायुमंडल की क्षति, गैस-निष्कासन से नया वायुमंडल, और प्रकाश संश्लेषण से ऑक्सीजन की वृद्धि।
- जीवन की उत्पत्ति: रासायनिक विकास से जटिल कार्बनिक अणु बने और आगे चलकर सरल जीवन अस्तित्व में आया।
अध्याय 3: पृथ्वी की आंतरिक संरचना
PDF के विषय: भूगर्भ की जानकारी के साधन — प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष स्रोत; भूकंप — भूकंप तरंगें, प्रकार, माप, प्रभाव और आवृत्ति; पृथ्वी की संरचना; ज्वालामुखी और ज्वालामुखी निर्मित स्थलरूप।
- प्रत्यक्ष स्रोत: खनन, गहरी बोरिंग, ज्वालामुखी उद्गार। अप्रत्यक्ष स्रोत: तापमान, दाब और घनत्व में परिवर्तन, उल्का-पिंड, गुरुत्व, चुंबकीय क्षेत्र और भूकंपीय तरंगें।
- भूकंप: उद्गम केंद्र (focus) और अधिकेंद्र (epicentre)। तरंगें: P तरंगें (अनुदैर्ध्य; ठोस, द्रव और गैस तीनों से गुज़रती हैं), S तरंगें (अनुप्रस्थ; केवल ठोस से) और धरातलीय (L) तरंगें (सबसे विनाशकारी)।
- छाया क्षेत्र: S तरंगें बाह्य क्रोड (द्रव) से नहीं गुज़रतीं; इसी से क्रोड के द्रव होने का पता चला।
- माप: रिक्टर पैमाना भूकंप की तीव्रता (magnitude) मापता है और मर्केली पैमाना प्रभाव (intensity)।
- पृथ्वी की संरचना: भू-पर्पटी (महाद्वीपीय लगभग 30 km, महासागरीय लगभग 5 km), मैंटल (लगभग 2,900 km की गहराई तक) और क्रोड (बाह्य द्रव, आंतरिक ठोस)। भू-पर्पटी और मैंटल की सीमा मोहो असांतत्य है।
- ज्वालामुखी: शील्ड (जैसे हवाई), मिश्रित, कैल्डेरा, बेसाल्ट प्रवाह (दक्कन ट्रैप) और मध्य-महासागरीय कटक के ज्वालामुखी। आंतरिक आकृतियाँ: बैथोलिथ, लैकोलिथ, सिल और डाइक।
अध्याय 4: महासागरों और महाद्वीपों का वितरण
PDF के विषय: महाद्वीपीय प्रवाह; महासागरीय अधस्तल की बनावट; भूकंप और ज्वालामुखियों का वितरण; महाद्वीपीय विस्थापन के पक्ष में प्रमाण; प्रवाह संबंधी बल; समुद्री अधस्तल का विस्तार; प्लेट विवर्तनिकी; भारतीय प्लेट का संचलन।
- महाद्वीपीय प्रवाह सिद्धांत (अल्फ़्रेड वेगनर, 1912): सभी महाद्वीप कभी एक विशाल भूखंड पैंजिया के रूप में जुड़े थे, जो पैंथालासा महासागर से घिरा था; बाद में यह लौरेशिया और गोंडवानालैंड में बँटा।
- प्रमाण: महाद्वीपों के तटों का आपस में बैठना (जिग-सॉ फ़िट), समान आयु की चट्टानें, टिलाइट (हिमनदीय निक्षेप) और प्लेसर निक्षेप (घाना तट का सोना) और एक जैसे जीवाश्म (जैसे मेसोसॉरस)।
- बल: ध्रुवीय पलायन बल और ज्वारीय बल। बाद में होम्स ने संवहन धाराओं का विचार दिया।
- समुद्री अधस्तल का विस्तार (हैरी हेस, 1961): मध्य-महासागरीय कटक पर नया लावा निकलकर नई पर्पटी बनाता है और पुरानी पर्पटी दोनों ओर खिसकती है।
- प्लेट विवर्तनिकी: पृथ्वी की पर्पटी कई प्लेटों में बँटी है। प्रमुख प्लेटें: प्रशांत, उत्तर अमेरिकी, दक्षिण अमेरिकी, यूरेशियाई, अफ़्रीकी, इंडो-ऑस्ट्रेलियाई और अंटार्कटिक। प्लेट सीमाएँ: अपसारी, अभिसारी और रूपांतरण।
- भारतीय प्लेट: गोंडवानालैंड से अलग होकर उत्तर की ओर खिसकी और यूरेशियाई प्लेट से टकराई, जिससे हिमालय का निर्माण हुआ। इसी दौरान दक्कन ट्रैप का विशाल लावा-प्रवाह लगभग 6 करोड़ वर्ष पहले हुआ।
इकाई 3: भू-आकृतियाँ (8 अंक; अध्याय 5, 6)
अध्याय 5: भू-आकृतिक प्रक्रियाएँ
PDF के विषय: भू-आकृतिक प्रक्रियाएँ; अंतर्जनित और बहिर्जनित प्रक्रियाएँ; वृहत संचलन — भूस्खलन; अपरदन और निक्षेपण; मृदा निर्माण — मृदा निर्माण की प्रक्रियाएँ और कारक।
| तुलना | अंतर्जनित प्रक्रियाएँ | बहिर्जनित प्रक्रियाएँ |
|---|---|---|
| ऊर्जा का स्रोत | पृथ्वी के भीतर की ऊष्मा | सूर्य की ऊर्जा और वायुमंडलीय क्रियाएँ |
| परिणाम | धरातल पर असमानता (पर्वत, पठार) | धरातल को समतल करना (अनाच्छादन) |
| उदाहरण | पटल-विरूपण (पर्वतनी और महाद्वीप-जनन), ज्वालामुखीयता, भूकंप | अपक्षय, वृहत संचलन, अपरदन, निक्षेपण |
- अपक्षय: चट्टानों का अपने स्थान पर ही टूटना। भौतिक (तापीय प्रसार, पाले की क्रिया, अपशल्कन), रासायनिक (विलयन, कार्बोनेशन, जलयोजन, ऑक्सीकरण) और जैविक अपक्षय।
- वृहत संचलन: गुरुत्व के कारण ढाल पर चट्टानों/मलबे का खिसकना; धीमे (मृदा-सर्पण) और तेज़ (भूस्खलन, कीचड़ प्रवाह)।
- मृदा निर्माण के कारक: मूल पदार्थ, उच्चावच (स्थलाकृति), जलवायु, जैविक क्रियाएँ और समय।
अध्याय 6: भू-आकृतियाँ और उनका विकास
PDF के विषय: प्रवाहित जल — अवस्थाएँ, अपरदित और निक्षेपित स्थलरूप; भौम जल; हिमनद; तरंगें और धाराएँ; पवनें — अपरदित और निक्षेपित स्थलरूप।
| कारक | अपरदित स्थलरूप | निक्षेपित स्थलरूप |
|---|---|---|
| प्रवाहित जल (नदी) | V-आकार घाटी, गॉर्ज, कैन्यन, जलप्रपात, विसर्प | जलोढ़ पंख, डेल्टा, बाढ़ का मैदान, प्राकृतिक तटबंध |
| भौम जल (चूना पत्थर क्षेत्र, कार्स्ट) | घोलरंध्र, लैपीज़, गुफाएँ | स्टैलेक्टाइट, स्टैलेग्माइट, स्तंभ |
| हिमनद | सर्क, अरेत, गिरिशृंग (हॉर्न), U-आकार घाटी, फ़ियोर्ड | हिमोढ़, एस्कर, ड्रमलिन, हिमोढ़-मैदान |
| सागरीय तरंगें और धाराएँ | समुद्री भृगु, गुफाएँ, मेहराब, स्टैक, तरंग-घर्षित चबूतरा | पुलिन (बीच), रोधिका, स्पिट, लैगून |
| पवनें (शुष्क प्रदेश) | अपवाहन गर्त, छत्रक शिला, ज़्यूगन, यारडांग, इन्सेलबर्ग | बालू-टिब्बे (जैसे बारखान), लोएस |
राजस्थान से जोड़कर: थार मरुस्थल में पवन द्वारा बने बालू-टिब्बे और बारखान पवन के निक्षेपण का स्थानीय उदाहरण हैं।
इकाई 4: जलवायु (8 अंक; अध्याय 7–11)
अध्याय 7: वायुमंडल का संघटन तथा संरचना
PDF के विषय: वायुमंडल का संघटन; मौसम और जलवायु के तत्त्व।
- संघटन: नाइट्रोजन लगभग 78.08%, ऑक्सीजन लगभग 20.95%, आर्गन लगभग 0.93% और कार्बन डाइऑक्साइड लगभग 0.036% (तथा अन्य गैसें, जलवाष्प और धूल-कण)।
- संरचना: क्षोभमंडल (मौसम की सभी घटनाएँ, औसत ऊँचाई लगभग 13 km; ध्रुवों पर लगभग 8 km और विषुवत वृत्त पर लगभग 18 km), समतापमंडल (ओज़ोन परत), मध्यमंडल, तापमंडल (आयनमंडल) और बाह्यमंडल।
- मौसम और जलवायु के तत्त्व: तापमान, दाब, पवन, आर्द्रता, बादल और वर्षण।
अध्याय 8: सौर विकिरण, ऊष्मा संतुलन और तापमान
PDF के विषय: सौर विकिरण; पृथ्वी की सतह पर सूर्यातप में भिन्नता; वायुमंडल का तापन और शीतलन; पृथ्वी का ऊष्मा बजट; तापमान — वितरण को नियंत्रित करने वाले कारक; तापमान का वितरण; तापमान का व्युत्क्रमण।
- सूर्यातप में भिन्नता: अक्षांश, दिन की अवधि, वायुमंडल की पारदर्शिता और किरणों का आपतन कोण।
- तापन की विधियाँ: चालन, संवहन और अभिवहन (क्षैतिज)। पार्थिव विकिरण से वायुमंडल गर्म होता है।
- ऊष्मा बजट (100 इकाई सूर्यातप): लगभग 35 इकाई परावर्तित (पृथ्वी की एल्बिडो), 14 इकाई वायुमंडल द्वारा अवशोषित और 51 इकाई पृथ्वी की सतह द्वारा अवशोषित। विकिरण के रूप में वापसी: 17 इकाई सीधे अंतरिक्ष में और 48 इकाई वायुमंडल से, यानी 35 + 17 + 48 = 100।
- तापमान वितरण के कारक: अक्षांश, ऊँचाई, समुद्र से दूरी, महासागरीय धाराएँ, वायु-राशियाँ और स्थानीय कारक।
- तापमान का व्युत्क्रमण: सामान्यतः ऊँचाई के साथ तापमान घटता है (सामान्य ह्रास दर लगभग 6.5°C प्रति km); व्युत्क्रमण में ऊँचाई के साथ तापमान बढ़ता है। इसके अनुकूल दशाएँ: लंबी सर्द रातें, साफ़ आकाश और शांत वायु। इससे कोहरा बनता है।
अध्याय 9: वायुमंडलीय परिसंचरण तथा मौसम प्रणालियाँ
PDF के विषय: वायुमंडलीय दाब; पवनों की दिशा और वेग को प्रभावित करने वाले बल; वायुदाब और पवनें; वायुमंडल का सामान्य परिसंचरण।
- दाब पेटियाँ: विषुवतीय निम्न दाब, उपोष्ण उच्च दाब, उपध्रुवीय निम्न दाब और ध्रुवीय उच्च दाब।
- पवनों को प्रभावित करने वाले बल: दाब प्रवणता बल, घर्षण बल और कोरिओलिस बल (उत्तरी गोलार्ध में दाईं ओर, दक्षिणी में बाईं ओर विक्षेपण)।
- स्थायी पवनें: व्यापारिक पवनें (उपोष्ण उच्च दाब से विषुवत की ओर), पछुआ पवनें (30° से 60° अक्षांश के बीच) और ध्रुवीय पूर्वी पवनें।
- सामान्य परिसंचरण: तीन कोशिकाएँ — हैडली, फ़ेरल और ध्रुवीय।
अध्याय 10: वायुमंडल में जल
PDF के विषय: वाष्पीकरण और संघनन; ओस, तुषार, कोहरा और कुहासा; बादल; वर्षण — वर्षा के प्रकार; संसार में वर्षा का वितरण।
- संघनन के रूप: ओस, पाला/तुषार, कोहरा और कुहासा; बादल: पक्षाभ, कपासी, स्तरी और वर्षा बादल।
- वर्षण: वर्षा, हिमपात, मिश्रित हिम-वर्षा (sleet) और ओलावृष्टि।
- वर्षा के तीन प्रकार: संवहनीय (विषुवतीय क्षेत्र), पर्वतीय/उच्चावच (पर्वत की पवनाभिमुख ढाल) और चक्रवाती/वाताग्री।
- विश्व वितरण: विषुवतीय क्षेत्रों में सबसे अधिक; अधिकांश उपोष्ण मरुस्थलों में कम।
अध्याय 11: विश्व की जलवायु और जलवायु परिवर्तन
PDF के विषय: कोपेन की जलवायु वर्गीकरण की पद्धति; जलवायु परिवर्तन; हाल के भूतकाल में जलवायु; जलवायु परिवर्तन के कारण।
| कोपेन का वर्ग | अक्षर | मुख्य विशेषता |
|---|---|---|
| उष्णकटिबंधीय आर्द्र | A | सबसे ठंडे महीने का तापमान भी अधिक; भारी वर्षा |
| शुष्क | B | वर्षा कम, वाष्पीकरण अधिक (मरुस्थल और स्टेपी) |
| गर्म शीतोष्ण (मध्य अक्षांश) | C | मृदु जलवायु; अलग-अलग ऋतुएँ |
| शीत हिम वन | D | कठोर सर्दी और छोटी गर्मी |
| शीत (ध्रुवीय) | E | अत्यंत ठंडी; सालभर कम तापमान |
| उच्च भूमि | H | ऊँचाई के साथ बदलती जलवायु |
- जलवायु परिवर्तन के कारण: खगोलीय (पृथ्वी की कक्षा और झुकाव में परिवर्तन), सौर-विकिरण में परिवर्तन, ज्वालामुखी उद्गार और मानव-जनित (हरित गृह गैसों की वृद्धि)।
- हाल के भूतकाल में जलवायु: हिमयुग और अंतरा-हिमयुग का क्रम; वर्तमान में भूमंडलीय तापन एक प्रमुख चिंता है।
इकाई 5: जल (महासागर) (4 अंक; अध्याय 12, 13)
अध्याय 12: महासागरीय जल
PDF के विषय: जलीय चक्र; महासागरीय अधस्तल का उच्चावच और विभाजन; महासागरीय जल का तापमान; महासागरीय जल की लवणता।
- जलीय चक्र: वाष्पीकरण → संघनन → वर्षण → अपवाह और भौम जल के रूप में पुनः सागर तक।
- अधस्तल के विभाजन: महाद्वीपीय मग्नतट, महाद्वीपीय ढाल, गहरे सागरीय मैदान और महासागरीय गर्त (सबसे गहरा: मेरियाना गर्त, लगभग 11 km)।
- तापमान: भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर घटता है और गहराई के साथ भी घटता है।
- लवणता: प्रति हज़ार ग्राम जल में घुले नमक की मात्रा; सागरों की औसत लवणता लगभग 35 ग्राम प्रति हज़ार (35‰)। यह वाष्पीकरण (बढ़ने से बढ़ती है), वर्षा, नदियों के जल-प्रवाह और धाराओं से प्रभावित होती है।
अध्याय 13: महासागरीय जल संचलन
PDF के विषय: तरंगें; ज्वार-भाटा — अर्थ, प्रकार और महत्त्व; महासागरीय धाराएँ — अर्थ, प्रकार और प्रभाव।
- ज्वार-भाटा: चंद्रमा और सूर्य के गुरुत्वाकर्षण से समुद्र-तल का उठना (ज्वार) और गिरना (भाटा)।
- दीर्घ (वृहत्) ज्वार: अमावस्या और पूर्णिमा को, जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीध में हों। लघु ज्वार: प्रथम और अंतिम चतुर्थांश (अष्टमी के आसपास)।
- ज्वार के प्रकार: अर्ध-दैनिक, दैनिक और मिश्रित। महत्त्व: नौसंचालन, मछली-पकड़ना और ज्वारीय ऊर्जा।
- धाराएँ: गर्म धाराएँ (जैसे गल्फ़ स्ट्रीम, कुरोशियो) और ठंडी धाराएँ (जैसे लैब्राडोर, पेरू या हम्बोल्ट, बेंगुएला)। गर्म धाराएँ तटीय तापमान और वर्षा बढ़ाती हैं; ठंडी धाराएँ मरुस्थल बनाने में सहायक हो सकती हैं (जैसे अटाकामा)। गर्म और ठंडी धाराओं के मिलन-क्षेत्र मछली-पकड़ने के लिए उत्तम होते हैं।
इकाई 6: पृथ्वी पर जीवन (3 अंक; अध्याय 14)
अध्याय 14: जैव-विविधता एवं संरक्षण
PDF के विषय: जैव-विविधता के स्तर — आनुवंशिक, प्रजातीय और परितंत्रीय विविधता; जैव-विविधता का महत्त्व, ह्रास और संरक्षण।
- तीन स्तर: आनुवंशिक (एक प्रजाति में जीनों की विविधता), प्रजातीय (प्रजातियों की विविधता) और परितंत्रीय (पारितंत्रों की विविधता)।
- महत्त्व: खाद्य, औषधि, पर्यावरण-संतुलन, सौंदर्य और आर्थिक महत्त्व।
- ह्रास के कारण: आवास का विनाश, अत्यधिक शिकार और दोहन, प्रदूषण, विदेशी प्रजातियों का प्रवेश और जलवायु परिवर्तन।
- संरक्षण: स्वस्थाने (in-situ: राष्ट्रीय उद्यान, अभयारण्य, जैवमंडल निचय) और परस्थाने (ex-situ: चिड़ियाघर, वनस्पति उद्यान, जीन बैंक)।
- जैव-विविधता हॉटस्पॉट: वे क्षेत्र जहाँ प्रजातियों की समृद्धि अधिक है पर खतरा भी बड़ा है। भारत में पश्चिमी घाट, हिमालय और इंडो-बर्मा जैसे क्षेत्र इनमें गिने जाते हैं।
खंड ब: भारत: भौतिक पर्यावरण (35 अंक)
यह खंड NCERT की पुस्तक India: Physical Environment पर आधारित है। इसमें 6 अध्याय हैं, जो 4 इकाइयों और मानचित्र-कार्य में बँटे हैं। इसकी दो इकाइयाँ (भू-आकृति विज्ञान और जलवायु-वनस्पति) मिलकर 23 अंक की हैं, इसलिए इसे विशेष समय दें।
इकाई 1: प्रस्तावना — भारत की स्थिति (2 अंक)
अध्याय 1: भारत — स्थिति
PDF के विषय: भारत की स्थिति; पड़ोसी देशों के साथ संबंध।
- अक्षांश और देशांतर: मुख्य भूमि 8°4′ उत्तर से 37°6′ उत्तर अक्षांश और 68°7′ पूर्व से 97°25′ पूर्व देशांतर के बीच। कर्क रेखा (23½° उ.) देश को लगभग दो बराबर भागों में बाँटती है।
- विस्तार: NCERT के अनुसार उत्तर-दक्षिण लगभग 3,214 km और पूर्व-पश्चिम लगभग 2,933 km; कुल क्षेत्रफल लगभग 32.8 लाख वर्ग km (विश्व का लगभग 2.4%)।
- मानक याम्योत्तर: 82°30′ पूर्व (मिर्ज़ापुर के निकट); भारतीय मानक समय (IST) ग्रीनविच समय से 5 घंटे 30 मिनट आगे। देशांतर के कारण गुजरात और अरुणाचल प्रदेश के बीच लगभग 2 घंटे का अंतर है।
- तटरेखा: द्वीपों सहित लगभग 7,516.6 km; स्थल-सीमा लगभग 15,200 km।
- पड़ोसी देश: पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान, चीन, नेपाल, भूटान, म्यांमार और बांग्लादेश; श्रीलंका और मालदीव द्वीपीय पड़ोसी।
- दक्षिणतम बिंदु: इंदिरा पॉइंट (ग्रेट निकोबार); मुख्य भूमि का दक्षिणतम बिंदु कन्याकुमारी।
इकाई 2: भू-आकृति विज्ञान (12 अंक; अध्याय 2, 3)
अध्याय 2: भारत की संरचना तथा भू-आकृति विज्ञान
PDF के विषय: भूगर्भिक संरचना; भू-आकृतिक विभाग — उत्तरी पर्वतीय क्षेत्र, उत्तरी मैदान, प्रायद्वीपीय पठार, भारतीय मरुस्थल, तटीय मैदान और द्वीप।
| भौतिक विभाग | मुख्य उप-भाग | विशेषता |
|---|---|---|
| उत्तरी पर्वत (हिमालय) | ट्रांस-हिमालय, महान हिमालय (हिमाद्रि), लघु हिमालय (हिमाचल), शिवालिक, पूर्वांचल | नवीन वलित पर्वत; कंचनजंगा भारत की सबसे ऊँची चोटी |
| उत्तरी मैदान | पंजाब का मैदान, गंगा का मैदान, ब्रह्मपुत्र का मैदान | जलोढ़ मिट्टी; भाबर, तराई, बांगर और खादर |
| प्रायद्वीपीय पठार | मध्य उच्चभूमि और दक्कन का पठार; पश्चिमी और पूर्वी घाट | प्राचीनतम भू-खंड; पश्चिमी घाट की सबसे ऊँची चोटी अनाईमुडी |
| भारतीय मरुस्थल | थार मरुस्थल (मुख्यतः राजस्थान) | कम वर्षा, बालू-टिब्बे, लूनी नदी |
| तटीय मैदान | पश्चिमी: कोंकण, कन्नड़, मालाबार; पूर्वी: उत्तरी सरकार, कोरोमंडल | पश्चिमी तट संकरा, पूर्वी तट चौड़ा और डेल्टा-युक्त |
| द्वीप | लक्षद्वीप (प्रवाल), अंडमान और निकोबार (ज्वालामुखीय-पर्वतीय) | अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में |
- भूगर्भिक संरचना के तीन खंड: प्रायद्वीपीय खंड (गोंडवानालैंड का भाग, सबसे प्राचीन), हिमालय और अन्य अतिरिक्त-प्रायद्वीपीय पर्वतमालाएँ तथा सिंधु-गंगा-ब्रह्मपुत्र का मैदान।
- हिमालय: लगभग 2,400 km लंबी चाप-आकृति पर्वतमाला।
- उत्तरी मैदान के उप-भाग: भाबर (पर्वतपदीय कंकड़ वाली पट्टी), तराई (दलदली क्षेत्र), बांगर (पुराना जलोढ़) और खादर (नया जलोढ़)।
- राजस्थान के संदर्भ में: अरावली विश्व की प्राचीनतम वलित पर्वतमालाओं में गिनी जाती है; माउंट आबू का गुरुशिखर इसकी सबसे ऊँची चोटी है। थार मरुस्थल का बड़ा भाग राजस्थान में है।
अध्याय 3: अपवाह तंत्र
PDF के विषय: अपवाह तंत्र; भारत के अपवाह तंत्र — हिमालयी नदियाँ और प्रायद्वीपीय नदियाँ; नदियों का उपयोग।
| तुलना | हिमालयी नदियाँ | प्रायद्वीपीय नदियाँ |
|---|---|---|
| जल का स्रोत | हिमनद और वर्षा, इसलिए सालभर प्रवाह | मुख्यतः वर्षा, इसलिए मौसमी |
| मार्ग | गहरी घाटियाँ, विसर्प, डेल्टा | अपेक्षाकृत कम गहराई, स्थिर मार्ग |
| प्रमुख नदियाँ | सिंधु, गंगा, ब्रह्मपुत्र | गोदावरी, कृष्णा, कावेरी, महानदी; पश्चिम की ओर नर्मदा और तापी |
| अपवाह | सिंधु अरब सागर में; गंगा और ब्रह्मपुत्र बंगाल की खाड़ी में | अधिकांश बंगाल की खाड़ी में; नर्मदा और तापी अरब सागर में |
- गंगा: गंगोत्री से भागीरथी के रूप में निकलकर देवप्रयाग में अलकनंदा से मिलने के बाद गंगा कहलाती है; सहायक नदियाँ — यमुना, घाघरा, गंडक और कोसी।
- सिंधु तंत्र: सिंधु तिब्बत (मानसरोवर के निकट) से निकलती है; भारत में झेलम, चेनाब, रावी, ब्यास और सतलुज इसकी सहायक नदियाँ हैं।
- ब्रह्मपुत्र: तिब्बत में सांगपो नाम से बहती है।
- नर्मदा और तापी भ्रंश घाटियों में बहकर अरब सागर में ज्वारनदमुख (एस्चुअरी) बनाती हैं, डेल्टा नहीं।
- नदियों का उपयोग: सिंचाई, जलविद्युत, नौचालन और घरेलू आपूर्ति। समस्याएँ: प्रदूषण, मौसमी प्रवाह, नदी-जल विवाद और अत्यधिक दोहन।
इकाई 3: जलवायु और वनस्पति (11 अंक; अध्याय 4, 5)
अध्याय 4: जलवायु
PDF के विषय: भारत की जलवायु को प्रभावित करने वाले कारक; मानसून की एकता और विविधता; ऋतुएँ; वर्षा का वितरण; मानसून और आर्थिक जीवन; भूमंडलीय तापन।
- जलवायु को प्रभावित करने वाले कारक: अक्षांश, ऊँचाई, वायुदाब और पवन तंत्र, समुद्र से दूरी, महासागरीय धाराएँ और उच्चावच।
- मानसून की क्रियाविधि: स्थल और जल के असमान तापन से दाब-अंतर, ITCZ का उत्तर की ओर खिसकना और पवनों की दिशा का उलटना। मानसून का सामान्य आगमन केरल में लगभग 1 जून को होता है।
- मानसून की एकता और विविधता: पूरे देश में मौसमी लय एक-सी रहती है, पर वर्षा, तापमान और सर्दी-गर्मी में क्षेत्रीय अंतर बहुत हैं।
- स्थानीय पवनें: गर्मी की लू, आम्र वर्षा (दक्षिण में) और काल बैसाखी/नॉर्वेस्टर (पूर्वोत्तर)।
- मानसून का "विराम" (break): वर्षा ऋतु में कई दिन सूखे के अंतराल।
| ऋतु | लगभग अवधि | मुख्य विशेषता |
|---|---|---|
| शीत ऋतु | दिसंबर से फ़रवरी | ठंडी, शुष्क; उत्तर-पश्चिम में पश्चिमी विक्षोभ से हल्की वर्षा |
| ग्रीष्म ऋतु | मार्च से मई | बढ़ता तापमान; लू और आँधी |
| अग्रसर (वर्षा) मानसून ऋतु | जून से सितंबर | दक्षिण-पश्चिम मानसून की भारी वर्षा |
| निवर्तन (लौटता) मानसून ऋतु | अक्तूबर-नवंबर | मानसून की वापसी; पूर्वी तट (तमिलनाडु) पर वर्षा, तथा "अक्तूबर की गर्मी" |
- पारंपरिक छह ऋतुएँ: वसंत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, हेमंत और शिशिर।
- मानसून और आर्थिक जीवन: कृषि, जल-संसाधन और जलविद्युत सीधे मानसून पर निर्भर हैं; कम या अधिक वर्षा से सूखा या बाढ़ आती है।
- भूमंडलीय तापन: हरित गृह गैसों की वृद्धि से तापमान बढ़ना, जिसका असर मानसून, हिमनदों और समुद्र-तल पर पड़ने की चिंता है।
अध्याय 5: प्राकृतिक वनस्पति
PDF के विषय: वनों के प्रकार — उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन, उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वन, उष्णकटिबंधीय काँटेदार वन, पर्वतीय वन और मैंग्रोव; वन संरक्षण; वन्य जीवन।
| वन का प्रकार | वर्षा/क्षेत्र | मुख्य बात |
|---|---|---|
| उष्णकटिबंधीय सदाबहार | अधिक वर्षा वाले क्षेत्र (पश्चिमी घाट, पूर्वोत्तर) | पेड़ों का पत्ता-झड़ना अलग-अलग समय; घने, ऊँचे वृक्ष |
| उष्णकटिबंधीय पर्णपाती (मानसूनी) | मध्यम वर्षा | शुष्क ऋतु में पत्ते झड़ते हैं; सागौन और साल |
| उष्णकटिबंधीय काँटेदार वन | कम वर्षा (राजस्थान, गुजरात, पंजाब का कुछ भाग) | बबूल, कैक्टस; काँटेदार झाड़ियाँ और छोटे पेड़ |
| पर्वतीय वन | हिमालय और अन्य पर्वत | ऊँचाई के साथ वनस्पति में परिवर्तन |
| मैंग्रोव (ज्वारीय) वन | डेल्टा और तटीय दलदल | सुंदरवन; श्वसन मूल |
- वन संरक्षण: सामाजिक वानिकी, कृषि वानिकी और वनों की कटाई पर रोक।
- वन्य जीवन संरक्षण: राष्ट्रीय उद्यान, अभयारण्य और जैवमंडल निचय। परियोजनाएँ: प्रोजेक्ट टाइगर (1973) और प्रोजेक्ट एलिफ़ेंट (1992)।
- राजस्थान के उदाहरण: रणथंभौर (बाघ अभयारण्य), केवलादेव (भरतपुर) राष्ट्रीय उद्यान और डेज़र्ट नेशनल पार्क (थार)।
इकाई 4: प्राकृतिक संकट तथा आपदाएँ (5 अंक; अध्याय 6)
अध्याय 6: प्राकृतिक संकट तथा आपदाएँ
PDF के विषय: प्राकृतिक संकट और आपदाएँ — प्राकृतिक आपदाओं के प्रकार; भूकंप; सुनामी; उष्णकटिबंधीय चक्रवात; बाढ़; सूखा; भूस्खलन; आपदा प्रबंधन।
- संकट बनाम आपदा: संकट (hazard) खतरे की संभावना है; आपदा (disaster) वह घटना है जिससे जान-माल की भारी हानि होती है।
- भूकंप: हिमालयी क्षेत्र और भारत के कुछ अन्य भाग (जैसे कच्छ) अधिक संवेदनशील हैं।
- सुनामी: समुद्र-तल के नीचे भूकंप या भूस्खलन से उठने वाली विशाल लहरें; हिंद महासागर में दिसंबर 2004 की सुनामी भारत के लिए एक बड़ी आपदा थी।
- चक्रवात: भारत के पूर्वी तट पर अधिक, खासकर मानसून से पहले और बाद के महीनों में। बाढ़: ब्रह्मपुत्र और गंगा बेसिन में सबसे अधिक। सूखा: राजस्थान और मध्य भारत के कई भागों में बार-बार।
- भूस्खलन: हिमालय और पश्चिमी घाट के ढालों पर, खासकर भारी वर्षा में।
- आपदा प्रबंधन: आपदा-पूर्व तैयारी, शमन (प्रभाव घटाना), आपदा के समय प्रतिक्रिया (राहत-बचाव) और पुनर्वास। आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 से राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) बना।
मानचित्र-कार्य (5 + 5 अंक)
PDF में दोनों खंडों (विश्व और भारत) के लिए 5-5 अंक का मानचित्र-कार्य है, जो "ऊपर के विषय पर आधारित" रूपरेखा मानचित्र पर होता है। PDF यह नहीं बताता कि कौन-से स्थान पूछे जाएँगे, इसलिए नीचे की तैयारी-सूची सुझाव है:
| खंड | क्या पहचानने का अभ्यास करें |
|---|---|
| खंड अ — विश्व का रूपरेखा मानचित्र | महाद्वीप और महासागर; प्रमुख प्लेटें और उनकी सीमाएँ; प्रशांत महासागर का "अग्नि वलय" (ज्वालामुखी-भूकंप पेटी); पैंजिया के टूटे हुए भाग; प्रमुख गर्म और ठंडी धाराएँ; कोपेन के जलवायु क्षेत्र; प्रमुख महासागरीय गर्त |
| खंड ब — भारत का रूपरेखा मानचित्र | हिमालय की श्रेणियाँ, अरावली, पश्चिमी और पूर्वी घाट, थार, उत्तरी मैदान; प्रमुख नदियाँ और उनके उद्गम; तटीय मैदान (कोंकण, मालाबार, कोरोमंडल आदि); वन के प्रकार; मानसून की दिशाएँ; द्वीप समूह |
- तरीका: हर शीर्षक का एक रूपरेखा मानचित्र बनाकर बार-बार नाम भरने का अभ्यास करें; अटलस से स्थान मिलाएँ।
- नियम: नाम साफ़ और छोटे अक्षरों में लिखें, रेखाएँ और संकेत सटीक रखें और अनावश्यक रंग न भरें।
- समय: प्रत्येक मानचित्र-कार्य के लिए परीक्षा में लगभग 15 मिनट रखें।
प्रायोगिक परीक्षा (30 अंक)
भूगोल में 30 अंक प्रायोगिक के हैं, और PDF के अनुसार इसका समय 4 घंटे है। मूल्यांकन दो भागों में है:
| भाग | अंक | विवरण |
|---|---|---|
| प्रायोगिक प्रश्न पत्र | 20 | कुल 5 प्रश्न, हर प्रश्न 4 अंक का |
| प्रायोगिक अभिलेख और मौखिक परीक्षा | 10 | अभिलेख (record) 8 अंक और मौखिक परीक्षा (viva) 2 अंक |
| कुल | 30 |
PDF के अनुसार विद्यार्थी को सत्र के अंत तक प्रायोगिक कार्य का अभिलेख (फ़ाइल) तैयार करके रखना है, और भूगोल में सैद्धांतिक तथा प्रायोगिक, दोनों में अलग-अलग उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। प्रायोगिक पाठ्यक्रम इस प्रकार है:
| क्र. | विषय (PDF के अनुसार) | अंक-भार |
|---|---|---|
| 1 | मानचित्रों का परिचय (Introduction to Map) | 2 + 1 = 3 |
| 2 | मानचित्र, पैमाना (Map, Scale) | 4 |
| 3 | अक्षांश, देशांतर और समय (Latitude, Longitude and Time) | 4 |
| 4 | मानचित्र प्रक्षेप (Map Projection) | 4 |
| 5 | स्थलाकृतिक मानचित्र (Topographic Maps) | 2 + 1 = 3 |
| 6 | सुदूर संवेदन का परिचय (Introduction to Remote Sensing) | 1 + 1 = 2 |
| 7 | प्रायोगिक अभिलेख और मौखिक परीक्षा | 10 (8 + 2) |
| कुल (विषय 1 से 6 = 20, विषय 7 = 10) | 30 |
ऊपर के विषय 1 से 6 का कुल भार 3 + 4 + 4 + 4 + 3 + 2 = 20 है, जो प्रायोगिक प्रश्न पत्र के 20 अंक के बराबर है।
1. मानचित्रों का परिचय (3 अंक)
- मानचित्र: पृथ्वी या उसके किसी भाग का पैमाने के अनुसार समतल सतह पर निरूपण।
- मानचित्र के घटक: दूरी (पैमाना), दिशा और प्रतीक/संकेत।
- प्रकार: उद्देश्य के अनुसार भौतिक (उच्चावच) मानचित्र, सांस्कृतिक (राजनीतिक) मानचित्र और विषयगत (थीमैटिक) मानचित्र; पैमाने के अनुसार बड़े पैमाने के (जैसे भू-अभिलेख और स्थलाकृतिक) और छोटे पैमाने के (जैसे दीवार मानचित्र और एटलस)।
2. मानचित्र और पैमाना (4 अंक)
- पैमाने के तीन रूप: कथन पैमाना ("1 सेमी = 2 किमी"), प्रतिनिधि भिन्न (RF, जैसे 1 : 50,000) और रेखीय/ग्राफ़ीय पैमाना।
- RF = मानचित्र पर दूरी ÷ धरातल पर वास्तविक दूरी (दोनों एक ही इकाई में)।
- रूपांतरण: 1 किमी = 1,00,000 सेमी।
2. कथन पैमाना "1 सेमी = 2 किमी" → 2 किमी = 2,00,000 सेमी → RF = 1 : 2,00,000।
3. 1 : 50,000 के मानचित्र पर दो स्थानों की दूरी 7.5 सेमी है → वास्तविक दूरी = 7.5 × 0.5 = 3.75 किमी।
4. 5 किमी को 1 : 50,000 पर दर्शाने के लिए रेखा की लंबाई = 5,00,000 ÷ 50,000 = 10 सेमी।
3. अक्षांश, देशांतर और समय (4 अंक)
- अक्षांश: भूमध्य रेखा (0°) से उत्तर या दक्षिण की कोणीय दूरी; मुख्य अक्षांश रेखाएँ — भूमध्य रेखा, कर्क (23½° उ.) और मकर (23½° द.) रेखाएँ, आर्कटिक और अंटार्कटिक वृत्त (66½°)।
- देशांतर: प्रधान याम्योत्तर (ग्रीनविच, 0°) से पूर्व या पश्चिम की कोणीय दूरी। 180° देशांतर के निकट अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा है।
- समय का संबंध: पृथ्वी 24 घंटे में 360° घूमती है, इसलिए 15° = 1 घंटा और 1° = 4 मिनट। पूर्व की ओर स्थानीय समय आगे चलता है और पश्चिम की ओर पीछे।
- भारतीय मानक समय: 82°30′ पूर्व देशांतर का स्थानीय समय; यह ग्रीनविच से 5 घंटे 30 मिनट आगे है।
- दूरी: 1° अक्षांश ≈ 111 किमी। देशांतर के 1° की लंबाई विषुवत रेखा पर लगभग 111 किमी और ध्रुवों की ओर घटते हुए शून्य हो जाती है (लंबाई ≈ 111 × cos अक्षांश)।
2. ग्रीनविच में दोपहर 12 बजे हो तो 75° पश्चिम पर: 75 ÷ 15 = 5 घंटे पीछे → सुबह 7:00 बजे।
3. उसी समय 60° पूर्व पर: 60 ÷ 15 = 4 घंटे आगे → शाम 4:00 बजे।
4. 82°30′ पूर्व और 97°30′ पूर्व के स्थानीय समय का अंतर: 15° ÷ 15 = 1 घंटा (पूर्वी स्थान 1 घंटा आगे)।
5. 60° उत्तर अक्षांश पर 1° देशांतर की लंबाई ≈ 111 × cos 60° = 55.5 किमी।
4. मानचित्र प्रक्षेप (4 अंक)
- प्रक्षेप: गोलीय पृथ्वी के अक्षांश-देशांतर जाल (ग्रैटिक्यूल) को समतल सतह पर बनाने की पद्धति।
- रचना के आधार पर तीन प्रकार: बेलनाकार (जैसे मर्केटर), शंक्वाकार (जैसे लैम्बर्ट) और दिशिक/शिरोबिंदु (zenithal)।
- गुणों के आधार पर: समक्षेत्र (क्षेत्रफल सही), यथाकृतिक/ऑर्थोमॉर्फिक (आकृति सही) और समदूरस्थ (दूरी सही)। कोई भी प्रक्षेप सभी गुण एक साथ नहीं रख सकता।
- मर्केटर प्रक्षेप: दिशा-रेखाएँ सीधी होने से नौसंचालन में उपयोगी; ध्रुवों की ओर क्षेत्रफल बहुत बढ़ा-चढ़ा दिखता है।
5. स्थलाकृतिक मानचित्र (3 अंक)
- स्थलाकृतिक मानचित्र भारतीय सर्वेक्षण विभाग (Survey of India) द्वारा बनाए जाते हैं और उनमें प्राकृतिक व सांस्कृतिक लक्षण दिखते हैं।
- शीट का आकार (मानक): 1 : 50,000 की शीट लगभग 15′ × 15′ क्षेत्र को और 1 : 25,000 की शीट लगभग 7′30″ × 7′30″ क्षेत्र को दर्शाती है।
- रंग-संकेत (सामान्य): समोच्च रेखाएँ भूरी, जल नीला, वनस्पति हरी, तथा बस्तियाँ, सड़कें और नाम काले/लाल रंग में। अपनी पुस्तक की सारणी से संकेत याद करें।
- समोच्च रेखाओं का पाठ: पास-पास रेखाएँ तीव्र ढाल और दूर-दूर रेखाएँ मंद ढाल दिखाती हैं। ऊँचाई की ओर मुड़ा V-आकार घाटी और नीचाई की ओर मुड़ा V-आकार उभार/स्पर दिखाता है।
6. सुदूर संवेदन का परिचय (2 अंक)
- अर्थ: किसी वस्तु या क्षेत्र से बिना भौतिक संपर्क के, उसके विद्युत-चुंबकीय विकिरण को दर्ज करके जानकारी प्राप्त करना।
- मंच (प्लेटफ़ॉर्म): भू-आधारित, वायुयान (हवाई फ़ोटो) और उपग्रह; संवेदक: कैमरा और स्कैनर।
- दो प्रमुख रूप: हवाई चित्र और उपग्रह चित्र। उपयोग: भूमि-उपयोग, वन, कृषि, आपदा (बाढ़, सूखा) की निगरानी और मौसम की भविष्यवाणी।
7. प्रायोगिक अभिलेख और मौखिक परीक्षा (10 अंक)
- अभिलेख (8 अंक): हर अभ्यास अलग पृष्ठ पर, शीर्षक, तिथि, चित्र और संक्षिप्त विवरण के साथ। सभी छह विषयों के अभ्यास शामिल हों।
- मौखिक परीक्षा (2 अंक): अपने बनाए पैमाने, रेखाचित्र और समय की गणना की व्याख्या के लिए तैयार रहें।
अभ्यास-प्रश्न (उत्तर सहित)
ये मौलिक अभ्यास-प्रश्न हैं, आधिकारिक प्रश्न नहीं।
खंड अ: भौतिक भूगोल के मूल सिद्धांत
उत्तर: यूनानी विद्वान इरेटोस्थनीज़ ने।
उत्तर: लगभग 4.6 अरब वर्ष।
उत्तर: P तरंगें अनुदैर्ध्य हैं और ठोस, द्रव, गैस, तीनों से गुज़रती हैं; S तरंगें अनुप्रस्थ हैं और केवल ठोस से गुज़रती हैं।
उत्तर: भूकंप की तीव्रता (magnitude)।
उत्तर: भू-पर्पटी और मैंटल की सीमा पर।
उत्तर: सभी महाद्वीपों का मिला हुआ आदि विशाल भूखंड; सिद्धांत 1912 में।
उत्तर: अपक्षय में चट्टान अपने स्थान पर टूटती है; अपरदन में टूटी सामग्री को जल, पवन, हिमनद आदि हटाकर ले जाते हैं।
उत्तर: स्टैलेक्टाइट और स्टैलेग्माइट।
उत्तर: क्षोभमंडल में।
उत्तर: आपतित सूर्यातप का परावर्तित अंश; पृथ्वी का लगभग 35%।
उत्तर: लंबी सर्द रातें, साफ़ आकाश और शांत वायु।
उत्तर: संवहनीय, पर्वतीय (उच्चावच) और चक्रवाती/वाताग्री।
उत्तर: अमावस्या और पूर्णिमा को, जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीध में हों।
उत्तर: गर्म: गल्फ़ स्ट्रीम; ठंडी: पेरू (हम्बोल्ट) धारा।
उत्तर: आनुवंशिक, प्रजातीय और परितंत्रीय।
उत्तर: स्वस्थाने (राष्ट्रीय उद्यान, अभयारण्य) और परस्थाने (चिड़ियाघर, जीन बैंक)।
खंड ब: भारत: भौतिक पर्यावरण
उत्तर: 82°30′ पूर्व; 5 घंटे 30 मिनट आगे।
उत्तर: महान हिमालय (हिमाद्रि), लघु हिमालय (हिमाचल) और शिवालिक।
उत्तर: भाबर पर्वतपदीय कंकड़-पत्थर वाली पट्टी है जहाँ नदियाँ लुप्त हो जाती हैं; तराई उसके नीचे का दलदली क्षेत्र है जहाँ नदियाँ फिर प्रकट होती हैं।
उत्तर: राजस्थान में।
उत्तर: हिमालयी नदियाँ हिमनद और वर्षा से सालभर बहती हैं, प्रायद्वीपीय नदियाँ मुख्यतः मौसमी हैं; हिमालयी नदियाँ गहरी घाटियाँ और बड़े डेल्टा बनाती हैं।
उत्तर: वे भ्रंश घाटियों में बहकर अरब सागर में ज्वारनदमुख (एस्चुअरी) बनाती हैं।
उत्तर: लगभग 1 जून को।
उत्तर: शीत, ग्रीष्म, अग्रसर (वर्षा) मानसून और निवर्तन (लौटता) मानसून ऋतु।
उत्तर: कम वर्षा वाले क्षेत्रों (राजस्थान, गुजरात आदि) में; बबूल और कैक्टस।
उत्तर: 1973 में।
उत्तर: आपदा-पूर्व तैयारी, शमन, राहत और बचाव, तथा पुनर्वास।
उत्तर: समुद्र-तल के नीचे भूकंप या भूस्खलन से उठने वाली विशाल समुद्री लहरें।
प्रायोगिक: संख्यात्मक प्रश्न
उत्तर: 1 सेमी = 50,000 सेमी = 0.5 किमी।
उत्तर: 1 : 2,00,000
उत्तर: 7.5 × 0.5 = 3.75 किमी
उत्तर: 5,00,000 ÷ 50,000 = 10 सेमी
उत्तर: 75 ÷ 15 = 5 घंटे पीछे → सुबह 7:00 बजे।
उत्तर: 60 ÷ 15 = 4 घंटे आगे → शाम 4:00 बजे।
उत्तर: 15° ÷ 15 = 1 घंटा; पूर्वी स्थान आगे।
उत्तर: 111 × cos 60° = 55.5 किमी
उत्तर: बेलनाकार, शंक्वाकार और दिशिक (zenithal)।
8 सप्ताह की तैयारी योजना
यह योजना सैद्धांतिक और प्रायोगिक को साथ चलाने के लिए एक सुझाव है। हर सप्ताह मानचित्र बनाने का अभ्यास और अभिलेख में एक-दो पृष्ठ अवश्य जोड़ें।
| सप्ताह | सैद्धांतिक | अंक | प्रायोगिक काम |
|---|---|---|---|
| 1 | खंड अ: अध्याय 1–4 (भूगोल, पृथ्वी की उत्पत्ति, आंतरिक संरचना, प्लेट विवर्तनिकी) | 3 + 4 | मानचित्रों का परिचय; विश्व मानचित्र पर महाद्वीप और प्लेटें |
| 2 | खंड अ: अध्याय 5–6 (भू-आकृतिक प्रक्रियाएँ और भू-आकृतियाँ) | 8 | पैमाना: कथन, RF और रेखीय पैमाना के अभ्यास |
| 3 | खंड अ: अध्याय 7–11 (वायुमंडल से कोपेन तक) | 8 | अक्षांश और देशांतर; समय की गणना के 10 प्रश्न |
| 4 | खंड अ: अध्याय 12–14 (महासागर, जैव-विविधता) और विश्व मानचित्र-कार्य | 4 + 3 + 5 | मानचित्र प्रक्षेप की रचना |
| 5 | खंड ब: अध्याय 1–2 (भारत की स्थिति, भू-आकृति विज्ञान) | 2 + 12 (शुरुआत) | स्थलाकृतिक मानचित्र: संकेत और समोच्च रेखाएँ |
| 6 | खंड ब: अध्याय 2–3 (भू-आकृति विज्ञान पूरा, अपवाह तंत्र) | 12 (पूरी इकाई) | सुदूर संवेदन; अभिलेख के पृष्ठ |
| 7 | खंड ब: अध्याय 4–5 (जलवायु, वनस्पति) और भारत का मानचित्र-कार्य | 11 + 5 | स्थलाकृतिक मानचित्र का पूरा अभ्यास |
| 8 | खंड ब: अध्याय 6 (आपदाएँ); पूरा नमूना पेपर (3:15 घंटे) | 5 + 70 | अभिलेख पूरा; मौखिक परीक्षा का अभ्यास |
आम गलतियाँ और सुधार
| हिस्सा | आम गलती | सुधार |
|---|---|---|
| प्लेट विवर्तनिकी | वेगनर और हेस के सिद्धांत मिलाना | वेगनर (1912): महाद्वीपीय प्रवाह; हेस (1961): समुद्री अधस्तल का विस्तार |
| भूकंप | रिक्टर और मर्केली पैमाने को एक मानना | रिक्टर: तीव्रता (magnitude); मर्केली: प्रभाव (intensity) |
| तापमान | तापमान व्युत्क्रमण को केवल "तापमान बढ़ना" लिखना | ऊँचाई के साथ तापमान बढ़ना और उसके अनुकूल दशाएँ भी लिखें |
| वर्षा | वर्षा के प्रकारों को पर्वतीय और संवहनीय में मिलाना | तालिका बनाकर प्रत्येक की दशा लिखें |
| भारत की स्थिति | अक्षांश और देशांतर के आँकड़े उलटना | अक्षांश: 8°4′ उ. से 37°6′ उ.; देशांतर: 68°7′ पू. से 97°25′ पू. |
| नदी तंत्र | नर्मदा और तापी को पूर्व की ओर बहने वाली लिखना | दोनों पश्चिम की ओर अरब सागर में गिरती हैं |
| मानचित्र-कार्य | बिना अटलस के अभ्यास से स्थान गलत लगाना | पहले अटलस से स्थान मिलाएँ, फिर बिना देखे अभ्यास करें |
| पैमाना | इकाई (सेमी और किमी) बदलना भूल जाना | पहले दोनों दूरी एक ही इकाई में लाएँ |
| समय की गणना | पूर्व या पश्चिम में आगे/पीछे उलटना | पूर्व की ओर समय आगे और पश्चिम की ओर पीछे |
| अभिलेख | देर से लिखना और सबसे अंत में एक साथ भरना | हर सप्ताह के पृष्ठ पूरे करें |
सामान्य प्रश्न
यह भी देखें
- कक्षा 11 राजनीति विज्ञान पाठ्यक्रम 2026-27 — 18 अध्यायों के अंक
- कक्षा 11 जीव विज्ञान पाठ्यक्रम 2026-27 — सैद्धांतिक 70 और प्रायोगिक 30
- कक्षा 11 अर्थशास्त्र पाठ्यक्रम 2026-27 — अर्थशास्त्र की इकाईवार अंक योजना
- कक्षा 11 English पाठ्यक्रम 2026-27 — English का खंडवार अंक विभाजन
- कक्षा 11 हिंदी अनिवार्य पाठ्यक्रम 2026-27 — हिंदी अनिवार्य का अंक विभाजन
- कक्षा 11 — कक्षा 11 के सभी लेख · कक्षा 12 · कक्षा 10
- RBSE — राजस्थान बोर्ड केंद्रित सामग्री
- मॉडल पेपर · ऑनलाइन टेस्ट
- NCERT Classes — कक्षा 6 से 12 की निःशुल्क अध्ययन सामग्री · Sarkari Service Prep — सरकारी भर्ती परीक्षाओं की तैयारी (भारत का भूगोल, मानचित्र और आपदा प्रबंधन RAS, पटवारी, शिक्षक भर्ती जैसी परीक्षाओं के नियमित विषय हैं)
संदर्भ और पद्धति
- माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, राजस्थान, अजमेर: पाठ्यक्रम सत्र 2026–2027, विषय: भूगोल (Geography), विषय कोड-14, कक्षा 11, पृष्ठ 31–35। आधिकारिक PDF ↗
यह लेख कैसे तैयार किया गया
- बोर्ड के PDF से सीधे लिया गया: परीक्षा योजना (70 + 30), दोनों खंडों की सभी इकाइयों के अंक और विषय-बिंदु, प्रायोगिक पाठ्यक्रम और अंक-भार, मूल्यांकन योजना और निर्धारित पुस्तकें। इकाईवार अंक और प्रायोगिक तालिका पृष्ठों की तस्वीर और पाठ में दोबारा मिलाई गई हैं।
- लेखक द्वारा जोड़ा गया (शैक्षिक सामग्री): अध्यायों के मुख्य तथ्य और तुलना-तालिकाएँ, मानचित्र-तैयारी का मार्गदर्शन, हल किए संख्यात्मक उदाहरण, अभ्यास-प्रश्न, समय-प्रबंधन और 8 सप्ताह की योजना। तथ्य NCERT स्तर के हैं; परीक्षा में अपनी पुस्तक के अनुसार ही लिखें।
- जो नहीं बताया गया: PDF में जो जानकारी नहीं है (प्रश्नों के प्रकार, मानचित्र-कार्य के स्थानों की सूची), उसे तथ्य की तरह नहीं लिखा गया।

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