अध्याय 4: जाति, धर्म और लैंगिक मसले
Gender, Religion and Caste | कक्षा 10 राजनीति विज्ञान
RBSE & CBSE Board Exam 2026
📋 इस अध्याय में
👫 लैंगिक विभाजन (Gender Division)
📖 लैंगिक विभाजन क्या है?
लैंगिक विभाजन (Gender Division) समाज में पुरुषों और महिलाओं के बीच का वह भेद है जो जैविक (Biological) नहीं, बल्कि सामाजिक (Social) है। समाज ने पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग भूमिकाएं तय कर दी हैं।
🔑 लैंगिक विभाजन की विशेषताएं:
- श्रम विभाजन: घर का काम = महिलाएं, बाहर का काम = पुरुष
- सार्वजनिक vs निजी: पुरुष = सार्वजनिक क्षेत्र, महिला = घरेलू क्षेत्र
- अवैतनिक श्रम: महिलाओं के घरेलू काम को "काम" नहीं माना जाता
- कम वेतन: समान काम के लिए महिलाओं को कम वेतन
📊 भारत में महिलाओं की स्थिति:
| क्षेत्र | महिलाएं | पुरुष |
|---|---|---|
| साक्षरता दर (2011) | 65% | 82% |
| लोकसभा में प्रतिनिधित्व | ~15% | ~85% |
| उच्च पदों पर | बहुत कम | अधिकांश |
📖 पितृसत्ता (Patriarchy) क्या है?
पितृसत्ता वह सामाजिक व्यवस्था है जिसमें पुरुषों का वर्चस्व होता है। परिवार में पुरुष मुखिया होता है, संपत्ति पुरुषों को मिलती है, और महिलाओं की भूमिका घर तक सीमित मानी जाती है।
✊ नारीवाद (Feminism)
📖 नारीवाद क्या है?
नारीवाद (Feminism) एक आंदोलन और विचारधारा है जो महिलाओं और पुरुषों की समानता की मांग करती है। यह पितृसत्ता का विरोध करता है और महिलाओं के समान अधिकारों की वकालत करता है।
✅ महिलाओं के लिए उठाए गए कदम:
- संवैधानिक समानता: अनुच्छेद 14, 15, 16 में समान अधिकार
- पंचायतों में आरक्षण: 33% सीटें (73वां संशोधन, 1992)
- महिला आरक्षण विधेयक 2023: लोकसभा/विधानसभा में 33% आरक्षण
- कानून: दहेज प्रतिषेध, घरेलू हिंसा अधिनियम
- शिक्षा: बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ
🎯 Board Exam Important:
पंचायतों में महिला आरक्षण = 33% (73वां संशोधन)
नारी सशक्तिकरण विधेयक 2023 = लोकसभा में 33%
🙏 धर्म और राजनीति
भारत एक बहुधार्मिक देश है। यहां हिंदू, मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध, जैन आदि धर्मों के लोग रहते हैं।
| धर्म | जनसंख्या % |
|---|---|
| हिंदू | 79.8% |
| मुस्लिम | 14.2% |
| ईसाई | 2.3% |
| सिख | 1.7% |
| बौद्ध | 0.7% |
| जैन | 0.4% |
| अन्य | 0.9% |
❓ क्या धर्म और राजनीति को अलग रखना चाहिए?
✅ धर्म का सकारात्मक पक्ष:
- नैतिक मूल्य सिखाता है
- समुदाय की भावना पैदा करता है
- लोगों को सहारा देता है
- गांधीजी ने धर्म के नैतिक मूल्यों को राजनीति में लाया
⚠️ धर्म का नकारात्मक पक्ष (जब राजनीति में गलत तरीके से आए):
- धार्मिक कट्टरता
- दूसरे धर्मों के प्रति घृणा
- सांप्रदायिक दंगे
- देश का विभाजन
⚔️ सांप्रदायिकता (Communalism)
📖 सांप्रदायिकता क्या है?
सांप्रदायिकता वह सोच है जो यह मानती है कि:
• एक धर्म के लोगों के हित एक जैसे हैं
• अलग-अलग धर्मों के हित टकराते हैं
• एक धर्म दूसरे से श्रेष्ठ है
📊 सांप्रदायिकता के रूप:
⚠️ सांप्रदायिकता कैसे दिखती है:
- धार्मिक पूर्वाग्रह: दूसरे धर्म के बारे में गलत धारणाएं
- बहुसंख्यकवाद: बहुसंख्यक धर्म का वर्चस्व
- राजनीतिक उपयोग: वोट के लिए धर्म का इस्तेमाल
- सांप्रदायिक हिंसा: दंगे, आगजनी, हत्याएं
🎯 भारत में सांप्रदायिक घटनाएं:
• 1947 का विभाजन और दंगे
• 1984 सिख विरोधी दंगे
• 1992 बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद दंगे
• 2002 गुजरात दंगे
⚖️ धर्मनिरपेक्षता (Secularism)
📖 धर्मनिरपेक्षता क्या है?
धर्मनिरपेक्षता (Secularism) का अर्थ है कि राज्य का कोई आधिकारिक धर्म नहीं होगा। राज्य सभी धर्मों के साथ समान व्यवहार करेगा और किसी धर्म का पक्ष नहीं लेगा।
🇮🇳 भारतीय संविधान और धर्मनिरपेक्षता:
🔑 संवैधानिक प्रावधान:
- कोई राजधर्म नहीं: भारत का कोई आधिकारिक धर्म नहीं
- धार्मिक स्वतंत्रता: हर नागरिक को अपना धर्म मानने, पालन करने और प्रचार करने का अधिकार (अनुच्छेद 25-28)
- समानता: धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं (अनुच्छेद 15)
- अल्पसंख्यक अधिकार: अपनी शिक्षण संस्थाएं चलाने का अधिकार
💡 क्या आप जानते हैं?
"धर्मनिरपेक्ष" शब्द 1976 में 42वें संविधान संशोधन द्वारा प्रस्तावना में जोड़ा गया। लेकिन धर्मनिरपेक्षता की भावना शुरू से ही संविधान में थी।
🏛️ जाति और राजनीति
📖 जाति व्यवस्था क्या है?
जाति व्यवस्था भारतीय समाज में जन्म पर आधारित एक पदानुक्रमिक (Hierarchical) व्यवस्था है। इसमें लोगों को जन्म से ही एक जाति मिलती है जो उनका पेशा, सामाजिक स्थान और विवाह संबंध तय करती थी।
📊 जाति व्यवस्था की विशेषताएं:
⚠️ पारंपरिक व्यवस्था:
- जन्म से निर्धारित: जाति बदली नहीं जा सकती
- व्यवसाय बंधन: जाति के अनुसार काम
- अंतर्विवाह: अपनी जाति में ही विवाह
- छुआछूत: कुछ जातियों को "अछूत" माना जाता था
- ऊंच-नीच: ब्राह्मण सबसे ऊपर, दलित सबसे नीचे
🔄 जाति व्यवस्था में बदलाव:
✅ आधुनिक बदलाव:
- शहरीकरण: शहरों में जाति का महत्व कम
- शिक्षा: सभी जातियों को समान शिक्षा
- व्यवसाय: जाति-आधारित पेशे खत्म
- संवैधानिक प्रावधान: छुआछूत अपराध (अनुच्छेद 17)
- आरक्षण: SC/ST/OBC के लिए
- अंतर्जातीय विवाह: बढ़ रहे हैं
🗳️ जाति और राजनीति का संबंध:
| राजनीति में जाति | जाति में राजनीति |
|---|---|
| वोट बैंक के लिए जाति का उपयोग | राजनीतिक शक्ति से जाति की स्थिति बदलना |
| जातिगत समीकरण बनाना | आरक्षण की मांग |
| जाति के नाम पर वोट मांगना | जातिगत संगठन बनाना |
🎯 महत्वपूर्ण बात:
जाति का राजनीति में आना पूरी तरह बुरा नहीं है। इससे दबी हुई जातियों को आवाज मिली, आरक्षण मिला, और सामाजिक न्याय की दिशा में कदम बढ़े। लेकिन जातिवाद (जाति के आधार पर भेदभाव) बुरा है।
📝 बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
प्रश्न 1:
प्रश्न 2:
प्रश्न 3:
प्रश्न 4:
प्रश्न 5:
प्रश्न 6:
प्रश्न 7:
प्रश्न 8:
📋 महत्वपूर्ण प्रश्न
प्रश्न 1: पितृसत्ता क्या है? (2 अंक)
उत्तर: पितृसत्ता वह सामाजिक व्यवस्था है जिसमें पुरुषों का वर्चस्व होता है। इसमें परिवार और समाज में पुरुष प्रमुख निर्णयकर्ता होता है, संपत्ति पुरुषों को मिलती है, और महिलाओं की भूमिका घर तक सीमित मानी जाती है।
प्रश्न 2: सांप्रदायिकता क्या है? (2 अंक)
उत्तर: सांप्रदायिकता वह सोच है जो मानती है कि एक धर्म के लोगों के हित एक जैसे हैं और अलग-अलग धर्मों के हित आपस में टकराते हैं। यह धर्म के आधार पर समाज को बांटती है और सांप्रदायिक हिंसा का कारण बनती है।
प्रश्न 3: धर्मनिरपेक्षता का क्या अर्थ है? (2 अंक)
उत्तर: धर्मनिरपेक्षता का अर्थ है कि राज्य का कोई आधिकारिक धर्म नहीं होगा। राज्य सभी धर्मों के साथ समान व्यवहार करेगा, किसी धर्म का पक्ष नहीं लेगा, और नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता देगा।
प्रश्न 4: भारत में लैंगिक विभाजन पर प्रकाश डालिए। महिलाओं की स्थिति सुधारने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं? (5 अंक)
उत्तर:
लैंगिक विभाजन: भारतीय समाज में पुरुष और महिलाओं के बीच गहरा विभाजन है। महिलाओं को घरेलू काम तक सीमित माना जाता है। साक्षरता, रोजगार और राजनीतिक प्रतिनिधित्व में महिलाएं पीछे हैं।
सुधार के कदम:
1. संवैधानिक समानता: अनुच्छेद 14, 15, 16 में समान अधिकार
2. पंचायतों में आरक्षण: 33% सीटें महिलाओं के लिए (73वां संशोधन)
3. महिला आरक्षण विधेयक 2023: संसद में 33% आरक्षण
4. कानून: दहेज प्रतिषेध, घरेलू हिंसा अधिनियम, यौन उत्पीड़न कानून
5. शिक्षा: बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, कस्तूरबा गांधी विद्यालय
प्रश्न 5: जाति और राजनीति के संबंध की व्याख्या कीजिए। (5 अंक)
उत्तर: जाति और राजनीति का गहरा संबंध है जो दो तरह से दिखता है:
1. राजनीति में जाति:
• राजनीतिक दल जातिगत समीकरण बनाते हैं
• उम्मीदवार चुनते समय जाति देखी जाती है
• वोट बैंक के रूप में जाति का उपयोग
2. जाति में राजनीति:
• दबी हुई जातियों ने राजनीतिक शक्ति से अपनी स्थिति सुधारी
• आरक्षण की मांग और प्राप्ति
• जातिगत संगठनों का निर्माण
निष्कर्ष: जाति का राजनीति में आना पूरी तरह बुरा नहीं है क्योंकि इससे सामाजिक न्याय की दिशा में कदम बढ़े हैं। लेकिन जातिवाद (भेदभाव) बुरा है।
📋 सारांश (Quick Revision)
- लैंगिक विभाजन = पुरुष-महिला में सामाजिक भेद
- पितृसत्ता = पुरुषों का वर्चस्व वाली व्यवस्था
- नारीवाद = महिला-पुरुष समानता का आंदोलन
- पंचायत में महिला आरक्षण = 33% (73वां संशोधन)
- सांप्रदायिकता = धर्म के आधार पर राजनीति
- धर्मनिरपेक्षता = राज्य का कोई धर्म नहीं, सबके साथ समान व्यवहार
- 42वां संशोधन (1976) = "धर्मनिरपेक्ष" शब्द जोड़ा
- छुआछूत अपराध = अनुच्छेद 17
- जाति और राजनीति = राजनीति में जाति + जाति में राजनीति
🟦 Class 10 Political Science (RBSE/NCERT) – हिंदी माध्यम नोट्स
- अध्याय 1 — सत्ता की साझेदारी (Power Sharing)
- अध्याय 2 — संघवाद (Federalism)
- अध्याय 3 — लोकतंत्र और विविधता (Democracy & Diversity)
- अध्याय 4 — जाति, धर्म और लैंगिक मसले (Gender, Religion & Caste)
- अध्याय 5 — राजनीतिक दल (Political Parties)
- अध्याय 6 — लोकतंत्र के परिणाम (Outcomes of Democracy)
- अध्याय 7 — लोकतंत्र की चुनौतियाँ (Challenges to Democracy)


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