अध्याय 1: सत्ता की साझेदारी
Power Sharing | कक्षा 10 राजनीति विज्ञान
RBSE & CBSE Board Exam 2026
📋 इस अध्याय में
🎯 परिचय - सत्ता की साझेदारी क्या है?
📖 परिभाषा:
सत्ता की साझेदारी (Power Sharing) का अर्थ है सरकार की शक्तियों को एक व्यक्ति या समूह में केंद्रित न रखकर, इसे विभिन्न अंगों, स्तरों और सामाजिक समूहों में बांटना।
लोकतंत्र में सत्ता किसी एक हाथ में नहीं होती। यह विभिन्न स्तरों पर बंटी होती है - केंद्र सरकार, राज्य सरकार, स्थानीय निकाय। साथ ही यह विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका में भी बंटी होती है।
🔑 मुख्य बिंदु:
- सत्ता का बंटवारा लोकतंत्र की आत्मा है
- एक व्यक्ति या समूह के हाथ में सारी सत्ता = तानाशाही
- सत्ता की साझेदारी = संघर्ष से बचाव + स्थिरता
- विभिन्न समूहों को निर्णय में भागीदारी मिलती है
इस अध्याय में हम दो देशों - बेल्जियम और श्रीलंका - के उदाहरणों से समझेंगे कि सत्ता की साझेदारी क्यों जरूरी है और इसके क्या-क्या रूप हो सकते हैं।
🇧🇪 बेल्जियम की कहानी
बेल्जियम यूरोप का एक छोटा सा देश है। यह नीदरलैंड्स, फ्रांस और जर्मनी की सीमाओं से लगा हुआ है। इसकी राजधानी ब्रसेल्स है जो यूरोपीय संघ (EU) का मुख्यालय भी है।
💡 क्या आप जानते हैं?
बेल्जियम की जनसंख्या केवल 1 करोड़ से थोड़ी ज्यादा है - यानी हरियाणा राज्य से भी कम! लेकिन यहां जातीय विविधता बहुत है।
📊 बेल्जियम की जनसंख्या संरचना:
| समुदाय | प्रतिशत | भाषा | क्षेत्र |
|---|---|---|---|
| डच भाषी (फ्लेमिश) | 59% | डच | उत्तरी क्षेत्र (फ्लैंडर्स) |
| फ्रेंच भाषी | 40% | फ्रेंच | दक्षिणी क्षेत्र (वालोनिया) |
| जर्मन भाषी | 1% | जर्मन | पूर्वी सीमा |
⚠️ समस्या क्या थी?
बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स में विशेष समस्या थी:
🔴 ब्रसेल्स की विशेष स्थिति:
ब्रसेल्स में 80% लोग फ्रेंच बोलते हैं जबकि 20% डच बोलते हैं। लेकिन पूरे देश में डच भाषी बहुसंख्यक (59%) हैं। इससे तनाव पैदा हुआ।
अल्पसंख्यक फ्रेंच भाषी लोग अपेक्षाकृत अमीर और ताकतवर थे। इससे डच भाषी समुदाय में नाराजगी थी। 1950-60 के दशक में दोनों समुदायों के बीच तनाव बढ़ने लगा।
✅ बेल्जियम का समाधान:
बेल्जियम ने 1970 से 1993 के बीच अपने संविधान में चार बार संशोधन किए। इससे एक नई और अनूठी शासन व्यवस्था बनी:
🏛️ बेल्जियम मॉडल की विशेषताएं:
- केंद्र सरकार में समानता: डच और फ्रेंच भाषी मंत्रियों की संख्या समान रखी गई
- विशेष बहुमत: कुछ कानूनों के लिए दोनों समुदायों का बहुमत जरूरी
- राज्य सरकारें: राज्य सरकारों को केंद्र के बराबर नहीं, बल्कि अधीन नहीं रखा
- ब्रसेल्स विशेष व्यवस्था: अलग सरकार जिसमें दोनों समुदायों को समान प्रतिनिधित्व
- सामुदायिक सरकार: भाषाई समुदायों की अपनी सरकार
🏛️ सामुदायिक सरकार (Community Government):
📖 परिभाषा:
सामुदायिक सरकार वह सरकार है जो किसी एक भाषाई समुदाय के सभी लोगों द्वारा चुनी जाती है, चाहे वे किसी भी क्षेत्र में रहते हों। यह सरकार संस्कृति, शिक्षा और भाषा संबंधी मामलों का फैसला करती है।
📌 उदाहरण:
बेल्जियम में डच, फ्रेंच और जर्मन भाषी - तीनों समुदायों की अपनी-अपनी सामुदायिक सरकारें हैं। ये सरकारें अपने समुदाय की शिक्षा, संस्कृति और भाषा नीतियां तय करती हैं।
💡 परिणाम:
बेल्जियम मॉडल से देश में शांति और स्थिरता आई। जातीय संघर्ष टल गया और सभी समुदाय संतुष्ट हुए। यही कारण है कि यूरोपीय संघ ने अपना मुख्यालय ब्रसेल्स में रखा।
🇱🇰 श्रीलंका की कहानी
श्रीलंका भारत के दक्षिण में स्थित एक द्वीप देश है। यह 1948 में स्वतंत्र हुआ। इसकी जनसंख्या लगभग 2 करोड़ है।
📊 श्रीलंका की जनसंख्या संरचना:
| समुदाय | प्रतिशत | धर्म | भाषा |
|---|---|---|---|
| सिंहली | 74% | बौद्ध | सिंहली |
| श्रीलंकाई तमिल | 13% | हिंदू | तमिल |
| भारतीय तमिल | 5% | हिंदू | तमिल |
| अन्य (मुस्लिम, ईसाई) | 8% | विभिन्न | विभिन्न |
⚠️ बहुसंख्यकवाद (Majoritarianism):
📖 परिभाषा:
बहुसंख्यकवाद (Majoritarianism) वह विश्वास या नीति है जिसमें बहुसंख्यक समुदाय अपनी इच्छानुसार देश पर शासन कर सकता है और अल्पसंख्यकों की इच्छाओं और जरूरतों को नजरअंदाज कर सकता है।
1948 में आजादी के बाद श्रीलंका में सिंहली समुदाय के नेताओं ने बहुसंख्यकवाद की नीति अपनाई:
🔴 श्रीलंका में बहुसंख्यकवादी नीतियां:
- 1956 का अधिनियम: सिंहली को एकमात्र राजभाषा घोषित किया गया
- विश्वविद्यालय नीति: सिंहलियों को प्राथमिकता दी गई
- सरकारी नौकरियां: सिंहलियों को वरीयता
- बौद्ध धर्म: राज्य द्वारा बौद्ध धर्म को संरक्षण और बढ़ावा
😢 परिणाम:
इन नीतियों से श्रीलंकाई तमिलों को लगा कि संविधान और सरकार की नीतियां उनके खिलाफ हैं:
❌ दुष्परिणाम:
- राजनीतिक संघर्ष: तमिलों और सिंहलियों के बीच तनाव
- 1983 में गृहयुद्ध: तमिल संगठनों ने अलग देश की मांग की
- हजारों की मौत: लाखों लोग शरणार्थी बने
- आर्थिक नुकसान: देश का विकास रुक गया
- 2009 में युद्ध समाप्त: लेकिन घाव अभी भी भरे नहीं
💡 सबक:
श्रीलंका की कहानी बताती है कि बहुसंख्यकवाद देश को तोड़ सकता है। जब बहुसंख्यक समुदाय अल्पसंख्यकों को नजरअंदाज करता है, तो संघर्ष अवश्यंभावी है।
⚖️ बेल्जियम vs श्रीलंका: तुलना
| पहलू | 🇧🇪 बेल्जियम | 🇱🇰 श्रीलंका |
|---|---|---|
| दृष्टिकोण | सत्ता की साझेदारी | बहुसंख्यकवाद |
| अल्पसंख्यकों के साथ व्यवहार | समान अधिकार और प्रतिनिधित्व | भेदभाव और उपेक्षा |
| भाषा नीति | तीन भाषाएं मान्य | केवल सिंहली राजभाषा |
| सरकार में हिस्सेदारी | सभी समुदायों को | सिंहलियों को वरीयता |
| परिणाम | ✅ शांति और स्थिरता | ❌ गृहयुद्ध (26 वर्ष) |
| आज की स्थिति | EU का मुख्यालय | अभी भी तनाव |
🎯 मुख्य सीख:
बेल्जियम ने सत्ता की साझेदारी अपनाई और देश को बचाया। श्रीलंका ने बहुसंख्यकवाद अपनाया और 26 साल का गृहयुद्ध झेला। यह तुलना बताती है कि सत्ता की साझेदारी ही सही रास्ता है।
❓ सत्ता की साझेदारी क्यों जरूरी है?
सत्ता की साझेदारी के पक्ष में दो तरह के तर्क दिए जाते हैं:
1️⃣ व्यावहारिक तर्क (Prudential Reasons):
🔑 व्यावहारिक कारण:
- संघर्ष से बचाव: विभिन्न समूहों के बीच टकराव कम होता है
- राजनीतिक स्थिरता: सरकार अधिक स्थायी और मजबूत रहती है
- देश की एकता: सभी समूह देश से जुड़ाव महसूस करते हैं
- गृहयुद्ध से बचाव: श्रीलंका जैसी स्थिति नहीं आती
📌 उदाहरण:
अगर बेल्जियम ने सत्ता की साझेदारी नहीं अपनाई होती, तो वहां भी श्रीलंका जैसा गृहयुद्ध हो सकता था। यह व्यावहारिक तर्क है - टकराव से बचने के लिए साझेदारी जरूरी है।
2️⃣ नैतिक तर्क (Moral Reasons):
🔑 नैतिक कारण:
- लोकतंत्र की भावना: सत्ता जनता की है, इसलिए सबको हिस्सा मिलना चाहिए
- सहमति से शासन: नागरिकों की सहमति से ही सरकार चले
- सबकी आवाज: हर समूह को निर्णय में भागीदारी मिले
- वैध सरकार: सबकी भागीदारी से सरकार वैध बनती है
📖 सार:
व्यावहारिक तर्क = सत्ता की साझेदारी से अच्छे परिणाम मिलते हैं।
नैतिक तर्क = सत्ता की साझेदारी अपने आप में सही है, यह लोकतंत्र का मूल सिद्धांत है।
📊 सत्ता की साझेदारी के रूप (4 प्रकार)
आधुनिक लोकतंत्रों में सत्ता की साझेदारी के चार मुख्य रूप होते हैं:
1️⃣ क्षैतिज वितरण (Horizontal Distribution):
📖 परिभाषा:
क्षैतिज वितरण में सत्ता को सरकार के विभिन्न अंगों - विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका - में बांटा जाता है। ये तीनों अंग एक ही स्तर पर होते हैं और एक-दूसरे पर नियंत्रण रखते हैं।
🔑 विशेषताएं:
- विधायिका: कानून बनाती है (संसद)
- कार्यपालिका: कानून लागू करती है (सरकार/मंत्रिमंडल)
- न्यायपालिका: कानून की व्याख्या करती है (अदालतें)
- नियंत्रण और संतुलन: कोई भी एक अंग सर्वशक्तिमान नहीं
📌 उदाहरण:
भारत में संसद कानून बनाती है, मंत्रिमंडल उसे लागू करता है, और सर्वोच्च न्यायालय जांचता है कि कानून संविधान के अनुसार है या नहीं। अगर नहीं है, तो न्यायालय उसे रद्द कर सकता है।
2️⃣ ऊर्ध्वाधर वितरण (Vertical Distribution):
📖 परिभाषा:
ऊर्ध्वाधर वितरण में सत्ता को विभिन्न स्तरों की सरकारों में बांटा जाता है - केंद्र सरकार, राज्य सरकार और स्थानीय सरकार।
🔑 भारत में तीन स्तर:
- केंद्र सरकार: पूरे देश के मामले (रक्षा, विदेश नीति)
- राज्य सरकार: राज्य के मामले (पुलिस, स्वास्थ्य)
- स्थानीय सरकार: पंचायत और नगरपालिका (स्थानीय मामले)
🎯 महत्वपूर्ण:
इसे संघवाद (Federalism) कहते हैं। केंद्र और राज्य सरकारों के अधिकार संविधान में लिखे होते हैं। इस विषय पर अध्याय 2 में विस्तार से पढ़ेंगे।
3️⃣ सामाजिक समूहों में वितरण:
📖 परिभाषा:
सत्ता को विभिन्न सामाजिक समूहों - धार्मिक, भाषाई, जातीय - में बांटा जाता है ताकि सभी समूहों को प्रतिनिधित्व मिले।
📌 उदाहरण:
- बेल्जियम: सामुदायिक सरकार (भाषाई समूहों के लिए)
- भारत: अनुसूचित जाति/जनजाति के लिए आरक्षण
- भारत: अल्पसंख्यकों के लिए विशेष प्रावधान
4️⃣ राजनीतिक दलों और दबाव समूहों में वितरण:
📖 परिभाषा:
लोकतंत्र में विभिन्न राजनीतिक दल, दबाव समूह, आंदोलन सत्ता में हिस्सेदारी करते हैं। ये सरकार की नीतियों को प्रभावित करते हैं।
🔑 उदाहरण:
- राजनीतिक दल: चुनाव में प्रतिस्पर्धा, सत्ता में बारी-बारी
- गठबंधन सरकार: कई दल मिलकर सरकार बनाते हैं
- दबाव समूह: व्यापारी संघ, किसान संगठन, मजदूर संघ
- मीडिया: जनमत बनाने में भूमिका
| रूप | क्या बांटा जाता है | उदाहरण |
|---|---|---|
| क्षैतिज | सरकार के अंगों में | विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका |
| ऊर्ध्वाधर | सरकार के स्तरों में | केंद्र, राज्य, स्थानीय |
| सामाजिक | सामाजिक समूहों में | धार्मिक, भाषाई, जातीय समूह |
| राजनीतिक | दलों/समूहों में | राजनीतिक दल, दबाव समूह |
📝 बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
प्रश्न 1:
प्रश्न 2:
प्रश्न 3:
प्रश्न 4:
प्रश्न 5:
प्रश्न 6:
प्रश्न 7:
प्रश्न 8:
प्रश्न 9:
प्रश्न 10:
📋 लघु उत्तरीय प्रश्न (2-3 अंक)
प्रश्न 1: सत्ता की साझेदारी क्या है?
उत्तर: सत्ता की साझेदारी का अर्थ है सरकार की शक्तियों को एक व्यक्ति या समूह में केंद्रित न रखकर, इसे विभिन्न अंगों, स्तरों और सामाजिक समूहों में बांटना। यह लोकतंत्र का मूल सिद्धांत है।
प्रश्न 2: बहुसंख्यकवाद क्या है?
उत्तर: बहुसंख्यकवाद वह विश्वास या नीति है जिसमें बहुसंख्यक समुदाय अपनी इच्छानुसार देश पर शासन करता है और अल्पसंख्यकों की जरूरतों को नजरअंदाज करता है। श्रीलंका में सिंहली समुदाय ने यह नीति अपनाई थी।
प्रश्न 3: सामुदायिक सरकार क्या है?
उत्तर: सामुदायिक सरकार वह सरकार है जो किसी एक भाषाई समुदाय के सभी लोगों द्वारा चुनी जाती है, चाहे वे किसी भी क्षेत्र में रहते हों। यह संस्कृति, शिक्षा और भाषा संबंधी मामलों का फैसला करती है। बेल्जियम में यह व्यवस्था है।
प्रश्न 4: क्षैतिज सत्ता वितरण क्या है?
उत्तर: क्षैतिज सत्ता वितरण में सत्ता को सरकार के विभिन्न अंगों - विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका - में बांटा जाता है। ये तीनों अंग एक ही स्तर पर होते हैं और एक-दूसरे पर नियंत्रण रखते हैं।
प्रश्न 5: ऊर्ध्वाधर सत्ता वितरण क्या है?
उत्तर: ऊर्ध्वाधर सत्ता वितरण में सत्ता को विभिन्न स्तरों की सरकारों में बांटा जाता है - केंद्र सरकार, राज्य सरकार और स्थानीय सरकार। इसे संघवाद कहते हैं।
📝 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (4-5 अंक)
प्रश्न 1: बेल्जियम और श्रीलंका की तुलना करते हुए बताइए कि सत्ता की साझेदारी क्यों जरूरी है?
उत्तर:
बेल्जियम: बेल्जियम में डच (59%), फ्रेंच (40%) और जर्मन (1%) भाषी लोग रहते हैं। यहां संभावित जातीय संघर्ष को टालने के लिए सत्ता की साझेदारी अपनाई गई। केंद्र सरकार में डच और फ्रेंच मंत्रियों की संख्या समान रखी गई। सामुदायिक सरकारें बनाई गईं। परिणाम: देश में शांति और स्थिरता आई।
श्रीलंका: श्रीलंका में सिंहली (74%) और तमिल (18%) प्रमुख समुदाय हैं। यहां बहुसंख्यकवाद अपनाया गया - 1956 में सिंहली को एकमात्र राजभाषा बनाया, सिंहलियों को नौकरियों में वरीयता दी। परिणाम: 1983 में गृहयुद्ध शुरू हुआ जो 2009 तक चला।
निष्कर्ष: यह तुलना बताती है कि सत्ता की साझेदारी से देश में एकता और शांति रहती है, जबकि बहुसंख्यकवाद से संघर्ष होता है।
प्रश्न 2: सत्ता की साझेदारी के विभिन्न रूपों का वर्णन कीजिए।
उत्तर: सत्ता की साझेदारी के चार मुख्य रूप हैं:
1. क्षैतिज वितरण: सत्ता को विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका में बांटा जाता है। ये तीनों एक-दूसरे पर नियंत्रण रखते हैं।
2. ऊर्ध्वाधर वितरण: सत्ता को केंद्र, राज्य और स्थानीय सरकारों में बांटा जाता है। इसे संघवाद कहते हैं।
3. सामाजिक समूहों में वितरण: विभिन्न धार्मिक, भाषाई और जातीय समूहों को सत्ता में हिस्सेदारी दी जाती है। जैसे: भारत में आरक्षण।
4. राजनीतिक दलों में वितरण: विभिन्न राजनीतिक दल और दबाव समूह सत्ता में हिस्सेदारी करते हैं। गठबंधन सरकारें इसका उदाहरण हैं।
प्रश्न 3: सत्ता की साझेदारी के पक्ष में व्यावहारिक और नैतिक तर्क दीजिए।
उत्तर:
व्यावहारिक तर्क:
- विभिन्न समूहों के बीच संघर्ष कम होता है
- राजनीतिक स्थिरता बनी रहती है
- देश की एकता मजबूत होती है
- गृहयुद्ध जैसी स्थिति से बचाव होता है
नैतिक तर्क:
- लोकतंत्र में सत्ता जनता की होती है
- सभी नागरिकों को निर्णय में भागीदारी का अधिकार है
- नागरिकों की सहमति से ही सरकार वैध होती है
- यह लोकतंत्र का मूल सिद्धांत है
📋 सारांश (Quick Revision)
- सत्ता की साझेदारी = सत्ता को विभिन्न अंगों और समूहों में बांटना
- बेल्जियम = सत्ता की साझेदारी → शांति और स्थिरता
- श्रीलंका = बहुसंख्यकवाद → गृहयुद्ध (1983-2009)
- सामुदायिक सरकार = भाषाई समुदाय की अपनी सरकार (बेल्जियम)
- व्यावहारिक तर्क = संघर्ष से बचाव, स्थिरता
- नैतिक तर्क = लोकतंत्र की भावना
- 4 रूप = क्षैतिज, ऊर्ध्वाधर, सामाजिक, राजनीतिक
- क्षैतिज = विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका
- ऊर्ध्वाधर = केंद्र, राज्य, स्थानीय (संघवाद)
🟦 Class 10 Political Science (RBSE/NCERT) – हिंदी माध्यम नोट्स
- अध्याय 1 — सत्ता की साझेदारी (Power Sharing)
- अध्याय 2 — संघवाद (Federalism)
- अध्याय 3 — लोकतंत्र और विविधता (Democracy & Diversity)
- अध्याय 4 — जाति, धर्म और लैंगिक मसले (Gender, Religion & Caste)
- अध्याय 5 — राजनीतिक दल (Political Parties)
- अध्याय 6 — लोकतंत्र के परिणाम (Outcomes of Democracy)
- अध्याय 7 — लोकतंत्र की चुनौतियाँ (Challenges to Democracy)


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