राजनीति विज्ञान Class 10 Notes Hindi | Political Science All 7 Chapters RBSE 2026 | Marwari Mission 100

📅 Monday, 29 December 2025 📖 3-5 min read
🎯 MARWARI MISSION 100 | Wikipedia-Style Complete Notes

राजनीति विज्ञान - कक्षा 10
सम्पूर्ण अध्ययन सामग्री

Political Science | Democratic Politics-II | RBSE & CBSE Board 2026

📚 All 7 Chapters in Detail | 8000+ Words | Complete Exam Preparation

7अध्याय
20-25अंक
100+प्रश्न
50+परिभाषाएं

📖 राजनीति विज्ञान: परिचय एवं महत्व

राजनीति विज्ञान (Political Science) सामाजिक विज्ञान की वह महत्वपूर्ण शाखा है जो राज्य, सरकार, राजनीतिक व्यवहार, संविधान और नागरिकों के अधिकारों का व्यवस्थित अध्ययन करती है। महान दार्शनिक अरस्तू ने इसे 'Master Science' (प्रधान विज्ञान) कहा क्योंकि यह मानव जीवन के सबसे महत्वपूर्ण पहलू - शासन व्यवस्था - से संबंधित है।

RBSE और CBSE कक्षा 10 के पाठ्यक्रम में इस विषय को "लोकतांत्रिक राजनीति-II (Democratic Politics-II)" नाम से पढ़ाया जाता है। इसमें कुल 7 अध्याय हैं जो भारतीय लोकतंत्र के विभिन्न पहलुओं को गहराई से समझाते हैं।

📘 राजनीति विज्ञान की परिभाषा:

"राजनीति विज्ञान वह विज्ञान है जो राज्य के उद्भव, विकास, संगठन और कार्यों का अध्ययन करता है तथा नागरिकों के अधिकारों और कर्तव्यों का विश्लेषण करता है।" यह हमें बताता है कि सरकार कैसे बनती है, कानून कैसे बनते हैं, चुनाव कैसे होते हैं, और एक नागरिक के रूप में हमारे क्या अधिकार और कर्तव्य हैं।

🎯 यह विषय क्यों महत्वपूर्ण है?

  • जागरूक नागरिक बनना: लोकतंत्र में हर नागरिक को सरकार की कार्यप्रणाली, चुनाव प्रक्रिया और अपने अधिकारों की जानकारी होनी चाहिए।
  • मौलिक अधिकारों की समझ: संविधान ने हमें कौन-कौन से अधिकार दिए हैं, उनका प्रयोग कैसे करें - यह सब इस विषय में है।
  • प्रतियोगी परीक्षाओं में उपयोगी: UPSC, RPSC, SSC, Banking आदि सभी परीक्षाओं में इससे प्रश्न आते हैं।
  • Board में Scoring Subject: अच्छी तैयारी से 20-25 में से 20+ अंक आसानी से मिल सकते हैं।

💡 परीक्षा में सफलता का मंत्र:

तीन चीजें याद रखें: (1) परिभाषाएं - हर अध्याय की 5-6 परिभाषाएं समझें। (2) उदाहरण - बेल्जियम-श्रीलंका, भारत के राष्ट्रीय दल जैसे उदाहरण याद करें। (3) तुलनात्मक अध्ययन - संघ सूची vs राज्य सूची जैसी तुलनाएं।

📊 RBSE Board Exam Pattern 2026

बोर्ड परीक्षा में अच्छे अंक लाने के लिए परीक्षा पैटर्न को समझना जरूरी है। सामाजिक विज्ञान की परीक्षा 80 अंकों की होती है।

📋 विषयवार अंक विभाजन

विषयअध्यायअंक%
🏛️ इतिहास52025%
🌍 भूगोल72025%
⚖️ राजनीति विज्ञान72025%
💰 अर्थशास्त्र52025%
कुल2480100%

📝 अध्यायवार अंक (Expected)

Chअध्यायअंकमहत्व
1सत्ता की साझेदारी3-4⭐⭐⭐⭐
2संघवाद4-5⭐⭐⭐⭐⭐
3लोकतंत्र और विविधता2-3⭐⭐⭐
4जाति, धर्म, लैंगिक मसले4-5⭐⭐⭐⭐⭐
5राजनीतिक दल4-5⭐⭐⭐⭐⭐
6लोकतंत्र के परिणाम3-4⭐⭐⭐⭐
7लोकतंत्र की चुनौतियां2-3⭐⭐⭐

⚠️ Most Important Chapters:

अध्याय 2 (संघवाद), अध्याय 4 (जाति-धर्म-लिंग), और अध्याय 5 (राजनीतिक दल) से सबसे ज्यादा प्रश्न आते हैं। इन तीनों से मिलाकर 12-15 अंक expected हैं!

📝 प्रश्नों के प्रकार

प्रश्न प्रकारअंकशब्दकैसे लिखें
MCQ1-सही विकल्प पर (✓)
अति लघु उत्तरीय115-201-2 वाक्य
लघु उत्तरीय-I240-504-5 वाक्य
लघु उत्तरीय-II360-806-8 वाक्य + उदाहरण
दीर्घ उत्तरीय5120-150परिचय + Points + निष्कर्ष

💡 महत्वपूर्ण तथ्य:

इन संशोधनों के बाद भारत में ~36 लाख निर्वाचित प्रतिनिधि स्थानीय निकायों में हैं। इनमें 10 लाख+ महिलाएं हैं। यह विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक प्रयोग है!

🗺️ भाषाई राज्यों का गठन

  • 1953: आंध्र प्रदेश - पहला भाषाई राज्य (तेलुगु)
  • 1956: राज्य पुनर्गठन आयोग - 14 राज्य + 6 केंद्र शासित
  • 1960: गुजरात और महाराष्ट्र अलग
  • 1966: पंजाब से हरियाणा अलग
  • 2000: झारखंड, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड
  • 2014: तेलंगाना (29वां राज्य)

🔍 भाषा नीति की सफलता:

हिंदी = राजभाषा, अंग्रेजी = सहयोगी भाषा, 22 भाषाएं = 8वीं अनुसूची में मान्यता। श्रीलंका जैसी स्थिति नहीं बनी क्योंकि किसी भाषा को थोपा नहीं गया।

🎯 परीक्षा के लिए याद रखें:

  • 73वां/74वां संशोधन = 1992
  • संघ सूची = 97 विषय (केंद्र)
  • राज्य सूची = 66 विषय (राज्य)
  • समवर्ती सूची = 47 विषय (दोनों)
  • महिला आरक्षण = 33% (पंचायत/नगरपालिका)
  • भारत = Holding Together संघ
  • पहला भाषाई राज्य = आंध्र प्रदेश (1953)
  • 22 भाषाएं = 8वीं अनुसूची
MCQ: समवर्ती सूची पर केंद्र और राज्य दोनों ने कानून बनाया, टकराव हो तो किसका मान्य?

(A) राज्य का

(B) केंद्र का

(C) दोनों का

(D) किसी का नहीं

उत्तर: (B) केंद्र का कानून

अध्याय 3: लोकतंत्र और विविधता

Democracy and Diversity | 1968 मेक्सिको ओलंपिक | सामाजिक विभाजन

📝 2-3 अंक

🔷 परिचय

यह अध्याय 1968 मेक्सिको ओलंपिक की ऐतिहासिक घटना से शुरू होता है। इसके माध्यम से सामाजिक विभाजन, पहचान की राजनीति और लोकतंत्र में विविधता को संभालने की चुनौती समझाई गई है।

🏅 1968 मेक्सिको ओलंपिक की घटना

16 अक्टूबर 1968 को 200 मीटर दौड़ के पदक समारोह में दो अश्वेत अमेरिकी एथलीट - टॉमी स्मिथ (स्वर्ण) और जॉन कार्लोस (कांस्य) - ने विरोध प्रदर्शन किया:

  • राष्ट्रगान पर सिर झुकाकर खड़े रहे
  • काला दस्ताना पहने मुट्ठी आसमान की ओर उठाई
  • जूते नहीं, सिर्फ काले मोजे पहने (अश्वेत गरीबी का प्रतीक)
  • यह "Black Power Salute" कहलाया

🔍 प्रतीकों का अर्थ:

काला दस्ताना + मुट्ठी: Black Power और एकता | काले मोजे: अश्वेत गरीबी | मनके का हार (कार्लोस): मारे गए अश्वेतों की याद | पीटर नॉर्मन (ऑस्ट्रेलिया, रजत): समर्थन में OPHR बैज पहना

दोनों एथलीटों को ओलंपिक टीम से निष्कासित किया गया, लेकिन उनका यह कदम नागरिक अधिकार आंदोलन का महत्वपूर्ण हिस्सा बना।

✊ अमेरिकी नागरिक अधिकार आंदोलन (1954-1968)

📘 नागरिक अधिकार आंदोलन (Civil Rights Movement):

अमेरिका में 1954-1968 तक अश्वेतों द्वारा समान अधिकारों की मांग का आंदोलन। नेता: मार्टिन लूथर किंग जूनियर (गांधी से प्रेरित, अहिंसात्मक)। प्रसिद्ध भाषण: "I Have a Dream" (1963)।

प्रमुख उपलब्धियां:

  • 1954: Brown vs Board of Education - स्कूलों में नस्लीय अलगाव असंवैधानिक
  • 1964: नागरिक अधिकार अधिनियम - सार्वजनिक स्थलों पर भेदभाव पर प्रतिबंध
  • 1965: मतदान अधिकार अधिनियम

📊 सामाजिक विभाजन के प्रकार

पहलूव्यापक विभाजन (Overlapping)आड़े-तिरछे (Cross-cutting)
परिभाषाएक विभाजन दूसरे को मजबूत करता हैएक विभाजन दूसरे को काटता है
प्रभाव❌ तनाव अधिक, संघर्ष की संभावना✅ तनाव कम, सौहार्द
उदाहरणउत्तरी आयरलैंड: कैथोलिक = गरीबनीदरलैंड: दोनों धर्मों में अमीर-गरीब

🗳️ विभाजन कब खतरनाक? तीन बातों पर निर्भर:

  1. पहचान कैसे देखते हैं: केवल एक पहचान = समस्या | कई पहचान = बेहतर
  2. नेता कैसे उभारते हैं: भड़काते हैं = खतरनाक | समन्वय = ठीक
  3. सरकार की प्रतिक्रिया: उचित मांग स्वीकारे = विभाजन कमजोर | दमन = मजबूत

🎯 परीक्षा के लिए याद रखें:

  • 1968 मेक्सिको = Black Power Salute
  • टॉमी स्मिथ + जॉन कार्लोस = अश्वेत एथलीट
  • मार्टिन लूथर किंग = "I Have a Dream"
  • 1954-1968 = नागरिक अधिकार आंदोलन
  • 1964 = Civil Rights Act
  • व्यापक विभाजन = तनाव अधिक
  • आड़े-तिरछे = तनाव कम

अध्याय 4: जाति, धर्म और लैंगिक मसले

Gender, Religion and Caste | पितृसत्ता | धर्मनिरपेक्षता | आरक्षण

📝 4-5 अंक

🔷 परिचय

यह अध्याय समाज में तीन प्रमुख विभाजनों - लिंग (Gender), धर्म (Religion), जाति (Caste) - और उनके राजनीति से संबंध को समझाता है। ये विभाजन सामाजिक असमानता पैदा करते हैं और लोकतंत्र में इन्हें दूर करने के प्रयास होते हैं।

👩‍👧‍👦 लैंगिक विभाजन (Gender Division)

📘 लैंगिक विभाजन (Gender Division):

समाज में महिलाओं और पुरुषों के बीच असमान व्यवहार और भूमिकाओं का बंटवारा। यह जैविक नहीं बल्कि सामाजिक है - समाज ने बनाया है, प्रकृति ने नहीं। इसे बदला जा सकता है।

📘 पितृसत्ता (Patriarchy):

वह व्यवस्था जिसमें पुरुषों का वर्चस्व होता है। परिवार और समाज में निर्णय लेने की शक्ति पुरुषों के हाथ में होती है। महिलाओं को गौण माना जाता है।

भारत में लैंगिक असमानता के प्रमाण:

क्षेत्रस्थिति
साक्षरता दरपुरुष: 82% | महिला: 65% (2011)
समान काम पर वेतनमहिलाओं को कम मिलता है
लोकसभा में प्रतिनिधित्व~15% (विश्व औसत से कम)
घरेलू कामअवैतनिक, महिलाओं पर बोझ
लिंगानुपात933 (1000 पुरुषों पर)

📘 नारीवाद (Feminism):

वह आंदोलन और विचारधारा जो महिला-पुरुष समानता की मांग करती है। नारीवादी मानते हैं कि लैंगिक असमानता गलत है और इसे समाप्त किया जाना चाहिए।

सुधार के प्रयास:

  • 73वां/74वां संशोधन (1992): पंचायत/नगरपालिका में 33% महिला आरक्षण
  • महिला आरक्षण विधेयक: संसद/विधानसभा में 33% सीटें (लंबित)
  • कानून: दहेज प्रतिषेध, घरेलू हिंसा अधिनियम, कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न कानून

🛕 धर्म और राजनीति

📘 सांप्रदायिकता (Communalism):

वह सोच जो धर्म को राजनीति का आधार बनाती है। सांप्रदायिक व्यक्ति मानता है कि एक धर्म के लोगों के हित एक हैं और वे दूसरे धर्म के विरोधी हैं। यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक है।

सांप्रदायिकता के रूप:

  • धार्मिक पूर्वाग्रह: अपने धर्म को श्रेष्ठ मानना
  • बहुसंख्यकवाद: बहुसंख्यक धर्म का वर्चस्व
  • राजनीतिक गोलबंदी: धर्म के नाम पर वोट मांगना
  • सांप्रदायिक हिंसा: दंगे और नरसंहार

📘 धर्मनिरपेक्षता (Secularism):

वह सिद्धांत जिसमें राज्य का कोई धर्म नहीं होता। राज्य सभी धर्मों को समान मानता है और किसी को प्राथमिकता नहीं देता। भारतीय संविधान धर्मनिरपेक्ष है।

🔍 भारतीय धर्मनिरपेक्षता की विशेषताएं:

42वां संशोधन (1976): प्रस्तावना में 'धर्मनिरपेक्ष' शब्द जोड़ा | अनुच्छेद 25-28: धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार | राज्य किसी धर्म को प्रोत्साहित नहीं करता | सरकारी स्कूलों में धार्मिक शिक्षा नहीं

🏛️ जाति और राजनीति

📘 जाति व्यवस्था (Caste System):

भारतीय समाज की प्राचीन सामाजिक व्यवस्था जो जन्म पर आधारित है। यद्यपि संविधान ने जाति-भेदभाव समाप्त किया, फिर भी जाति राजनीति में भूमिका निभाती है।

📘 छुआछूत (Untouchability):

कुछ जातियों को 'अछूत' मानकर भेदभाव करना। अनुच्छेद 17 ने इसे समाप्त किया और दंडनीय अपराध घोषित किया।

जाति और राजनीति का संबंध:

राजनीति में जातिजाति में राजनीति
चुनाव में जातिगत समीकरणजातिगत भेदभाव कम करने के प्रयास
जाति आधारित वोट बैंकआरक्षण नीति
उम्मीदवार चयन में जातिजाति-विरोधी आंदोलन
जातिगत गठबंधनसामाजिक न्याय की मांग

💡 महत्वपूर्ण:

जाति अकेले चुनाव परिणाम तय नहीं करती। कोई जाति किसी निर्वाचन क्षेत्र में बहुमत में नहीं होती। मतदाता जाति के साथ-साथ उम्मीदवार की योग्यता, पार्टी का कार्य और अन्य मुद्दे भी देखते हैं।

🎯 परीक्षा के लिए याद रखें:

  • पितृसत्ता = पुरुषों का वर्चस्व
  • नारीवाद = महिला-पुरुष समानता का आंदोलन
  • 33% आरक्षण = पंचायतों में महिलाओं के लिए
  • 42वां संशोधन (1976) = 'धर्मनिरपेक्ष' शब्द जोड़ा
  • अनुच्छेद 17 = छुआछूत का अंत
  • अनुच्छेद 25-28 = धार्मिक स्वतंत्रता
  • सांप्रदायिकता = धर्म के आधार पर राजनीति
MCQ: संविधान में 'धर्मनिरपेक्ष' शब्द किस संशोधन द्वारा जोड़ा गया?

(A) 42वां (1976)

(B) 44वां (1978)

(C) 73वां (1992)

(D) 86वां (2002)

उत्तर: (A) 42वां (1976)

अध्याय 5: राजनीतिक दल (Political Parties)

राष्ट्रीय दल | क्षेत्रीय दल | दलीय व्यवस्था | चुनौतियां और सुधार

📝 4-5 अंक

🔷 परिचय

राजनीतिक दल (Political Party) लोकतंत्र की रीढ़ हैं। बिना राजनीतिक दलों के आधुनिक लोकतंत्र की कल्पना करना कठिन है। ये दल जनता और सरकार के बीच की कड़ी का काम करते हैं।

📘 राजनीतिक दल (Political Party):

समान विचारधारा, नीतियों और कार्यक्रमों वाले लोगों का एक संगठित समूह जो चुनाव लड़कर सत्ता प्राप्त करना चाहता है। यह जनता की समस्याओं को सरकार तक और सरकार की नीतियों को जनता तक पहुंचाता है।

🧩 राजनीतिक दल के तीन घटक

  1. नेता (Leaders): दल का मार्गदर्शन करने वाले शीर्ष नेता
  2. सक्रिय सदस्य (Active Members): पार्टी कार्यकर्ता जो दैनिक कार्य करते हैं
  3. समर्थक/अनुयायी (Followers): आम जनता जो दल को वोट देती है

📊 दलीय व्यवस्था के प्रकार

प्रकारविशेषताउदाहरणलाभ/हानि
एकदलीयएक दल को सत्ता की अनुमतिचीन, उत्तर कोरिया❌ लोकतांत्रिक नहीं
द्विदलीयदो प्रमुख दल बारी-बारी सत्ता मेंUSA, ब्रिटेन✅ स्थिर सरकार
बहुदलीयकई दल, गठबंधन सरकारेंभारत, फ्रांस✅ विविधता का प्रतिनिधित्व

🇮🇳 भारत के 6 राष्ट्रीय दल

📘 राष्ट्रीय दल की मान्यता:

कोई दल राष्ट्रीय तब माना जाता है जब वह 4+ राज्यों में लोकसभा/विधानसभा चुनाव में कुल वैध मतों का कम से कम 6% प्राप्त करे और कम से कम 4 लोकसभा सीटें जीते।

दलस्थापनाचिह्नविचारधारासंस्थापक
BJP1980🪷 कमलहिंदुत्व, सांस्कृतिक राष्ट्रवादश्यामा प्रसाद मुखर्जी (जनसंघ)
INC1885✋ हाथधर्मनिरपेक्षता, समाजवादए.ओ. ह्यूम (सबसे पुराना)
BSP1984🐘 हाथीबहुजन हित, सामाजिक न्यायकांशीराम
CPI1925हंसिया-हथौड़ा-तारामार्क्सवाद, समाजवादएम.एन. रॉय
CPI(M)1964हंसिया-हथौड़ा-तारामार्क्सवाद-लेनिनवादCPI से अलग
NCP1999⏰ घड़ीधर्मनिरपेक्षता, संघवादशरद पवार

⚠️ राजनीतिक दलों की चुनौतियां

  • आंतरिक लोकतंत्र का अभाव: निर्णय कुछ नेताओं के हाथ में
  • वंशवाद: नेताओं के परिवार को वरीयता
  • धनबल और बाहुबल: पैसे और ताकत का प्रयोग
  • अपराधीकरण: अपराधी पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवार
  • सार्थक विकल्प का अभाव: सभी दलों की नीतियां समान

✅ सुधार के प्रयास

सुधारविवरण
दलबदल विरोधी कानून (1985)52वां संशोधन - दल बदलने पर सदस्यता समाप्त
चुनाव खर्च सीमालोकसभा: ₹95 लाख, विधानसभा: ₹40 लाख (2022)
शपथ पत्रसंपत्ति, शिक्षा, आपराधिक मामलों की घोषणा अनिवार्य
चुनाव आयोग के आदेशसंगठनात्मक चुनाव, आय-व्यय का ब्यौरा अनिवार्य

🎯 परीक्षा के लिए याद रखें:

  • भारत = बहुदलीय व्यवस्था
  • 6 राष्ट्रीय दल = BJP, INC, BSP, CPI, CPI(M), NCP
  • INC (1885) = सबसे पुराना दल
  • BJP (1980) = कमल चिह्न
  • 52वां संशोधन (1985) = दलबदल विरोधी कानून
  • राष्ट्रीय दल = 4+ राज्यों में 6%+ वोट + 4 सीटें
MCQ: भारत का सबसे पुराना राजनीतिक दल कौन सा है?

(A) BJP

(B) INC (कांग्रेस)

(C) CPI

(D) BSP

उत्तर: (B) INC - 1885 में स्थापित

अध्याय 6: लोकतंत्र के परिणाम

Outcomes of Democracy | जवाबदेही | आर्थिक विकास | नागरिक गरिमा

📝 3-4 अंक

🔷 परिचय

यह अध्याय एक महत्वपूर्ण प्रश्न उठाता है - क्या लोकतंत्र सफल है? लोकतंत्र का मूल्यांकन तानाशाही से तुलना करके किया जाना चाहिए, न कि किसी आदर्श स्थिति से।

📋 लोकतंत्र का मूल्यांकन कैसे करें?

मापदंडलोकतंत्र मेंतानाशाही में
जवाबदेही✅ सरकार जनता को जवाब देती है❌ कोई जवाबदेही नहीं
निर्णय प्रक्रिया✅ बहस और सहमति से❌ एकतरफा निर्णय
विविधता✅ सभी समूहों को प्रतिनिधित्व❌ केवल शासक वर्ग का हित
नागरिक गरिमा✅ समान अधिकार❌ अधिकारों का हनन

🔑 जवाबदेह, उत्तरदायी और वैध शासन

📘 जवाबदेही (Accountability):

लोकतंत्र में सरकार जनता के प्रति जवाबदेह होती है। चुनाव के माध्यम से जनता सरकार बदल सकती है। RTI (2005) जैसे कानून पारदर्शिता सुनिश्चित करते हैं।

🔍 RTI - सूचना का अधिकार (2005):

इसके तहत कोई भी नागरिक सरकारी विभागों से जानकारी मांग सकता है। यह भ्रष्टाचार रोकने और पारदर्शिता लाने का महत्वपूर्ण हथियार है।

लोकतांत्रिक निर्णय प्रक्रिया:

लोकतंत्र में निर्णय लेने में समय लगता है क्योंकि बहस, चर्चा होती है। लेकिन यही इसकी ताकत है:

  • सभी पक्षों की सुनवाई होती है
  • गलत निर्णय की संभावना कम
  • निर्णय अधिक स्वीकार्य और वैध होते हैं

💰 आर्थिक विकास और असमानता

तथ्यविश्लेषण
तानाशाही देशों में तेज विकासचीन जैसे कुछ देशों में
लोकतंत्र में औसत विकासलेकिन अधिक समान वितरण
असमानता दोनों मेंलोकतंत्र में कम करने के प्रयास

⚠️ महत्वपूर्ण:

लोकतंत्र का मूल्यांकन केवल आर्थिक विकास से नहीं। नागरिक स्वतंत्रता, मानवाधिकार, और गरिमा भी महत्वपूर्ण हैं।

👑 नागरिकों की गरिमा और स्वतंत्रता

लोकतंत्र की सबसे बड़ी उपलब्धि = नागरिकों की गरिमा:

  • समान मौलिक अधिकार: जाति, धर्म, लिंग से परे
  • राजनीतिक समानता: एक व्यक्ति = एक वोट = एक मूल्य
  • नागरिक, प्रजा नहीं: हर व्यक्ति राज्य का नागरिक है
  • विरोध का अधिकार: सरकार की आलोचना की स्वतंत्रता

💡 मुख्य सीख:

लोकतंत्र परिपूर्ण नहीं है, लेकिन यह सुधार की संभावना देता है। तानाशाही में गलतियां छुपाई जाती हैं, लोकतंत्र में सुधार होता है। यही लोकतंत्र की ताकत है।

🎯 परीक्षा के लिए याद रखें:

  • RTI = 2005 (सूचना का अधिकार)
  • जवाबदेही = लोकतंत्र की मुख्य विशेषता
  • गरिमा = सबसे बड़ी उपलब्धि
  • निर्णय धीमे लेकिन वैध
  • लोकतंत्र परिपूर्ण नहीं, सुधार संभव

अध्याय 7: लोकतंत्र की चुनौतियां

Challenges to Democracy | तीन चुनौतियां | सुधार के उपाय

📝 2-3 अंक

🔷 परिचय

यह अंतिम अध्याय लोकतंत्र की चुनौतियों की चर्चा करता है। हर देश को अलग-अलग चुनौतियां हैं। इन्हें तीन श्रेणियों में बांटा जा सकता है।

📊 लोकतंत्र की तीन चुनौतियां

चुनौतीक्या है?किन देशों में?उदाहरण
1. आधारभूत (Foundational)लोकतंत्र स्थापित करनागैर-लोकतांत्रिक देशम्यांमार, चीन, उत्तर कोरिया
2. विस्तार (Expansion)लोकतांत्रिक सिद्धांतों का विस्तारअधिकांश लोकतंत्रभारत, अमेरिका
3. गहनता (Deepening)लोकतंत्र को मजबूत बनानापुराने लोकतंत्रभारत, ब्रिटेन

🏗️ 1. आधारभूत चुनौती (Foundational)

📘 परिभाषा:

उन देशों की चुनौती जहां लोकतंत्र नहीं है। तानाशाही/सैन्य शासन से लोकतंत्र की ओर जाना। लोकतांत्रिक संविधान बनाना, स्वतंत्र चुनाव कराना। उदाहरण: म्यांमार, चीन, सऊदी अरब।

📐 2. विस्तार की चुनौती (Expansion)

📘 परिभाषा:

लोकतंत्र है लेकिन सभी क्षेत्रों में नहीं पहुंचा। लोकतांत्रिक सिद्धांतों को हर क्षेत्र, समूह और संस्था तक पहुंचाना।

इसमें शामिल: स्थानीय सरकारों को शक्ति, महिलाओं/दलितों को भागीदारी, संघीय सिद्धांतों का विस्तार।

🌊 3. गहनता की चुनौती (Deepening)

📘 परिभाषा:

लोकतंत्र को और मजबूत और प्रभावी बनाना। संस्थाओं को सशक्त करना ताकि जनता की अपेक्षाओं पर खरी उतरें।

इसमें शामिल: संस्थाओं को मजबूत करना, भ्रष्टाचार कम करना, दलों में सुधार, नागरिक भागीदारी बढ़ाना।

🇮🇳 भारत के सामने चुनौतियां:

भारत को विस्तार और गहनता दोनों चुनौतियां हैं। लोकतंत्र का विस्तार (पंचायतों को मजबूत करना) और गहनता (भ्रष्टाचार कम करना, संस्थाओं को मजबूत करना) दोनों जरूरी हैं।

✅ सुधार कैसे हों?

कानूनी सुधारजन भागीदारी
चुनाव सुधार कानूनमतदान में भागीदारी बढ़ाना
RTI (सूचना का अधिकार)जनआंदोलन और जनसंगठन
लोकपाल और लोकायुक्तमीडिया की सक्रिय भूमिका
राजनीतिक दलों के नियमनागरिक समाज की सक्रियता

💡 मुख्य सीख:

सिर्फ कानून से सुधार नहीं होता। जनता की जागरूकता और भागीदारी जरूरी है। लोकतंत्र में सुधार लोगों की भागीदारी से ही संभव है।

🎯 परीक्षा के लिए याद रखें:

  • तीन चुनौतियां = आधारभूत + विस्तार + गहनता
  • आधारभूत = लोकतंत्र स्थापित करना (म्यांमार, चीन)
  • विस्तार = सभी क्षेत्रों में पहुंचाना
  • गहनता = संस्थाओं को मजबूत करना
  • भारत = विस्तार + गहनता दोनों
  • सुधार = कानून + जनभागीदारी
MCQ: भारत के सामने लोकतंत्र की कौन सी चुनौतियां हैं?

(A) केवल आधारभूत

(B) केवल विस्तार

(C) केवल गहनता

(D) विस्तार और गहनता दोनों

उत्तर: (D) विस्तार और गहनता दोनों

⚡ Quick Revision - सम्पूर्ण सारांश

Ch 1 सत्ता की साझेदारी: बेल्जियम = सफल साझेदारी ✅ | श्रीलंका = गृहयुद्ध ❌ | 4 रूप = क्षैतिज, ऊर्ध्वाधर, सामाजिक, राजनीतिक | 1956 = सिंहली राजभाषा | 1970-93 = बेल्जियम में 4 संशोधन
Ch 2 संघवाद: 3 सूचियां (97+66+47) | 73वां/74वां = 1992 | 33% महिला आरक्षण | भारत = Holding Together | पहला भाषाई राज्य = आंध्र (1953) | 22 भाषाएं = 8वीं अनुसूची
Ch 3 विविधता: 1968 मेक्सिको = Black Power | मार्टिन लूथर किंग = "I Have a Dream" | 1964 = Civil Rights Act | व्यापक विभाजन = तनाव ⬆️ | आड़े-तिरछे = तनाव ⬇️
Ch 4 जाति-धर्म-लिंग: पितृसत्ता = पुरुष वर्चस्व | नारीवाद = समानता | 42वां (1976) = धर्मनिरपेक्ष जोड़ा | अनुच्छेद 17 = छुआछूत समाप्त | 25-28 = धार्मिक स्वतंत्रता
Ch 5 राजनीतिक दल: भारत = बहुदलीय | 6 राष्ट्रीय = BJP, INC, BSP, CPI, CPI(M), NCP | INC (1885) = सबसे पुराना | 52वां (1985) = दलबदल विरोधी
Ch 6 लोकतंत्र के परिणाम: जवाबदेही = मुख्य विशेषता | RTI = 2005 | गरिमा = सबसे बड़ी उपलब्धि | निर्णय = धीमे लेकिन वैध | परिपूर्ण नहीं, सुधार संभव
Ch 7 चुनौतियां: 3 प्रकार = आधारभूत + विस्तार + गहनता | भारत = विस्तार + गहनता दोनों | सुधार = कानून + जनभागीदारी

📊 महत्वपूर्ण संख्याएं और वर्ष

वर्ष/संख्याघटना/तथ्य
1885INC (कांग्रेस) की स्थापना - सबसे पुराना दल
1925CPI की स्थापना
1953आंध्र प्रदेश - पहला भाषाई राज्य
1956श्रीलंका में सिंहली राजभाषा
1964CPI(M) का गठन, अमेरिका में Civil Rights Act
1968मेक्सिको ओलंपिक - Black Power Salute
197642वां संशोधन - 'धर्मनिरपेक्ष' और 'समाजवादी' जोड़ा
1980BJP की स्थापना
1984BSP की स्थापना (कांशीराम)
198552वां संशोधन - दलबदल विरोधी कानून
199273वां/74वां संशोधन - पंचायती राज
1999NCP की स्थापना (शरद पवार)
2005RTI (सूचना का अधिकार) कानून
33%पंचायतों/नगरपालिकाओं में महिला आरक्षण
97 + 66 + 47संघ + राज्य + समवर्ती सूची के विषय
6भारत में राष्ट्रीय दलों की संख्या
228वीं अनुसूची में मान्यता प्राप्त भाषाएं

❓ FAQ - अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: राजनीति विज्ञान में कितने अध्याय हैं और कितने अंक आते हैं?
RBSE/CBSE कक्षा 10 राजनीति विज्ञान में कुल 7 अध्याय हैं। सामाजिक विज्ञान की 80 अंक की परीक्षा में राजनीति विज्ञान से लगभग 20-25 अंक के प्रश्न आते हैं।
प्रश्न 2: सबसे महत्वपूर्ण अध्याय कौन से हैं?
संघवाद (Ch 2), जाति-धर्म-लैंगिक मसले (Ch 4), और राजनीतिक दल (Ch 5) सबसे महत्वपूर्ण हैं। इनसे 4-5 अंक के प्रश्न आते हैं।
प्रश्न 3: बेल्जियम और श्रीलंका में क्या अंतर है?
बेल्जियम ने सत्ता की साझेदारी करके शांति और एकता बनाई। श्रीलंका ने बहुसंख्यकवाद अपनाया जिससे 1983-2009 तक गृहयुद्ध हुआ।
प्रश्न 4: भारत में कितने राष्ट्रीय दल हैं?
वर्तमान में 6 राष्ट्रीय दल: BJP, INC, BSP, CPI, CPI(M), NCP। राष्ट्रीय दल बनने के लिए 4+ राज्यों में 6%+ वोट और 4 लोकसभा सीटें जरूरी।
प्रश्न 5: 73वां और 74वां संविधान संशोधन क्या है?
1992 में ये संशोधन हुए। 73वां = पंचायती राज (ग्रामीण), 74वां = नगरपालिका (शहरी)। दोनों में 33% महिला आरक्षण अनिवार्य।
प्रश्न 6: धर्मनिरपेक्ष शब्द संविधान में कब जोड़ा गया?
1976 में 42वें संशोधन द्वारा 'धर्मनिरपेक्ष' (Secular) और 'समाजवादी' (Socialist) शब्द प्रस्तावना में जोड़े गए।
प्रश्न 7: लोकतंत्र की तीन चुनौतियां कौन सी हैं?
1. आधारभूत: लोकतंत्र स्थापित करना। 2. विस्तार: सभी क्षेत्रों में पहुंचाना। 3. गहनता: संस्थाओं को मजबूत करना। भारत के सामने विस्तार और गहनता दोनों।
प्रश्न 8: RTI कानून कब बना और क्या है?
2005 में सूचना का अधिकार कानून बना। इसके तहत कोई भी नागरिक सरकारी विभागों से जानकारी मांग सकता है। यह पारदर्शिता और भ्रष्टाचार रोकने का महत्वपूर्ण हथियार है।

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