RBSE Class 12 Hindi Chapter 2 Patang (Alok Dhanwa) Summary & Bimb Vidhan | पतंग कविता

📅 Saturday, 10 January 2026 📖 3-5 min read
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Marwari Mission 100

पाठ-2: पतंग (Patang) - सप्रसंग व्याख्या, बिम्ब विधान और प्रश्नोत्तर

कवि: आलोक धन्वा | आरोह भाग-2 | बाल मनोविज्ञान का अद्भुत चित्रण

आलोक धन्वा
जन्म1948 (मुंगेर, बिहार)
प्रसिद्धिजनवादी कवि (People's Poet)
प्रमुख रचनादुनिया रोज बनती है
पाठ का स्रोत'दुनिया रोज बनती है' (संग्रह)
मुख्य विषयबाल सुलभ इच्छाएं और उमंग

पाठ परिचय: 'पतंग' आलोक धन्वा की एक लंबी कविता का अंश है। यह कविता बाल मनोविज्ञान (Child Psychology) और प्रकृति में आए परिवर्तन का अत्यंत सुंदर और गतिशील (Dynamic) चित्रण है। इसमें बच्चों की उमंग, खतरों से खेलने का साहस और 'शरद ऋतु' का मानवीकरण किया गया है।


1. प्रकृति का मानवीकरण (Nature's Personification)

"सबसे तेज बौछारें गयीं, भादो गया, सवेरा हुआ
खरगोश की आँखों जैसा लाल सवेरा।
शरद आया पुलों को पार करते हुए
अपनी नई चमकीली साइकिल तेज चलाते हुए
घंटी बजाते हुए जोर-जोर से..."

विश्लेषण (Deep Analysis):

कवि ने मौसम के बदलाव को एक फिल्म के दृश्य की तरह दिखाया है:

  • भादो की विदाई: 'सबसे तेज बौछारें गयीं' - इसका अर्थ है कि वर्षा ऋतु (भादो माह - अंधकार और बारिश का प्रतीक) समाप्त हो गई है।
  • शरद का आगमन: शरद ऋतु (Autumn) का आगमन एक उत्साही बालक के रूप में दिखाया गया है।
  • उपमा अलंकार: "खरगोश की आँखों जैसा लाल सवेरा" - सुबह का सूरज लाल और भूरा है, बिलकुल खरगोश की आँखों जैसा।
  • मानवीकरण (Personification): शरद ऋतु 'साइकिल' चलाता हुआ, 'पुलों को पार करता हुआ' और 'घंटी बजाता हुआ' आ रहा है। यहाँ 'पुल' का अर्थ है - विभिन्न मौसमों और कठिनाइयों को पार करके आना।
  • उद्देश्य: वह अपनी चमकीली धूप से बच्चों को पतंग उड़ाने के लिए बुला रहा है (इशारों से बुलाते हुए)।

2. पतंग और बाल मन (The Kite & Child's Mind)

"आकाश को इतना मुलायम बनाते हुए
कि पतंग ऊपर उठ सके—
दुनिया की सबसे हल्की और रंगीन चीज़ उड़ सके
दुनिया का सबसे पतला कागज़ उड़ सके
बाँस की सबसे पतली कमानी उड़ सके..."

व्याख्या:

कवि कहते हैं कि शरद ऋतु ने आकाश को 'मुलायम' (साफ और स्वच्छ) कर दिया है ताकि बच्चे अपनी पतंग उड़ा सकें। यहाँ पतंग के लिए तीन विशेषण (Adjectives) प्रयोग किए गए हैं जो इसकी नाजुकता (Delicacy) दर्शाते हैं:

  1. दुनिया की सबसे हल्की और रंगीन चीज़।
  2. दुनिया का सबसे पतला कागज़।
  3. बाँस की सबसे पतली कमानी (Stick)।

ध्वन्यात्मक बिम्ब (Auditory Image): जैसे ही पतंग उड़ती है, बच्चों की "सीटियों" और "किलकारियों" से वातावरण गूँज उठता है। तितलियों की नाजुक दुनिया भी इसमें शामिल हो जाती है।

3. कपास और कोमलता (Cotton & Resilience)

"जन्म से ही वे अपने साथ लाते हैं कपास
पृथ्वी घूमती हुई आती है उनके बेचैन पैरों के पास..."
🧠 Exam Master Key: कपास (Cotton) का क्या अर्थ है?
यहाँ कपास के तीन प्रतीकात्मक अर्थ हैं:
  • कोमलता (Softness): बच्चों का शरीर कपास जैसा नरम होता है।
  • लोच (Flexibility): गिरने पर उन्हें चोट कम लगती है।
  • सफेदी/पवित्रता: उनका मन कपास जैसा स्वच्छ होता है।

अतिशयोक्ति अलंकार: बच्चे पतंग के पीछे इतना तेज भागते हैं कि ऐसा लगता है पृथ्वी खुद उनके 'बेचैन पैरों' (Restless feet) के पास घूमने चली आ रही है।

4. छतों के खतरनाक किनारे (Danger vs Thrill)

इस कविता में रोमांच और डर का द्वंद्व (Conflict) है। इसे नीचे दी गई सारणी से समझें:

खतरा (Danger) विजय/रोमांच (Victory)
"छतों के खतरनाक किनारे" "गिरकर बच जाने के बाद"
गिरने का भय (Fear of falling) "और भी निडर हो जाना" (Becoming fearless)
शरीर का संतुलन बिगड़ना "रोमांचित शरीर का संगीत" (Rhythm of thrill)
दिशाओं का घूमना "मृदंग" की तरह बजना (Drum beat)

स्वर्ण सूर्य (Golden Sun): जब बच्चे गिरकर बच जाते हैं, तो वे और निडर होकर "सुनहले सूरज" (तेजस्वी भविष्य) के सामने सीना तानकर आते हैं।

5. बिम्ब-विधान (Imagery Analysis)

यह कविता अपने बिम्बों (Images) के लिए साहित्य जगत में प्रसिद्ध है।

  • 👁️ दृश्य बिम्ब (Visual): लाल सवेरा, चमकीली साइकिल, तितलियों की नाजुक दुनिया।
  • 👂 श्रव्य बिम्ब (Auditory): घंटी बजाते हुए, सीटियों-किलकारियों का शोर, मृदंग की तरह बजती दिशाएं।
  • ✋ स्पर्श बिम्ब (Tactile): आकाश को मुलायम बनाते हुए, कपास जैसा शरीर।
  • 🏃 गतिशील बिम्ब (Dynamic): साइकिल तेज चलाते हुए, पृथ्वी का घूमते हुए आना।

🎯 बोर्ड परीक्षा प्रश्न (Question Bank)

प्र.1: "सबसे तेज बौछारें गयीं, भादो गया" के बाद प्रकृति में क्या परिवर्तन आया?
उत्तर: भादो (अंधकार) के जाने के बाद शरद ऋतु (प्रकाश) का आगमन हुआ। सवेरा खरगोश की आँखों जैसा लाल हो गया। मौसम साफ, चमकीला और मुलायम हो गया।

प्र.2: "दिशाओं को मृदंग की तरह बजाते हुए" का क्या तात्पर्य है?
उत्तर: जब बच्चे छतों पर दौड़ते हैं, तो उनके पैरों की धमक से ऐसा लगता है मानो चारों दिशाओं में मृदंग (ढोलक जैसा वाद्य) बज रहा हो। यह उनके उत्साह का संगीत है।

प्र.3: 'पतंग' कविता का प्रतिपाद्य (Central Idea) क्या है?
उत्तर: इस कविता में बाल-सुलभ इच्छाओं, उमंग और प्रकृति के साथ उनके रागात्मक संबंध का चित्रण है। यह 'डर पर विजय' पाने का संदेश भी देती है।

📥 Download Encyclopedia Notes

यह लेख आलोक धन्वा की 'पतंग' का सबसे विस्तृत विश्लेषण है। प्रिंट करें और "Marwari Mission 100" फाइल में सुरक्षित रखें।



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