RBSE कक्षा 10 विज्ञान संपूर्ण शॉर्ट नोट्स 2026–27 (Class 10 Science Revision Notes) — सभी 13 अध्यायों की सरल व्याख्या, उदाहरण, सूत्र, वैज्ञानिक चित्र, परीक्षा-स्मरण और स्व-जाँच एक ही लेख में। यह त्वरित पुनरावृत्ति सामग्री है; मूल पाठ्यपुस्तक और शिक्षक के मार्गदर्शन का विकल्प नहीं।
1. रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण (6 अंक)
जब किसी पदार्थ से नए गुणों वाला दूसरा पदार्थ बनता है, तो उसे रासायनिक अभिक्रिया कहते हैं। लोहे पर जंग लगना, भोजन का पचना, दूध का खट्टा होना और मैग्नीशियम का जलना इसके उदाहरण हैं। अभिक्रिया की पहचान रंग बदलने, गैस निकलने, अवक्षेप बनने या ताप में परिवर्तन से हो सकती है। केवल अवस्था बदलना, जैसे बर्फ का पिघलना, सामान्यतः भौतिक परिवर्तन है क्योंकि नया पदार्थ नहीं बनता।
रासायनिक समीकरण और संतुलन
अभिकारक बाईं ओर और उत्पाद दाईं ओर लिखते हैं। उदाहरण के लिए मैग्नीशियम ऑक्सीजन में जलकर मैग्नीशियम ऑक्साइड बनाता है। असंतुलित समीकरण Mg + O₂ → MgO है; संतुलित समीकरण नीचे है। द्रव्यमान संरक्षण के कारण दोनों ओर प्रत्येक तत्व के परमाणुओं की संख्या बराबर होनी चाहिए। सूत्रों के नीचे लिखे अंकों को नहीं बदलते; केवल आगे गुणांक लगाते हैं।
अभिक्रियाओं के प्रमुख प्रकार
संयोजन: दो या अधिक पदार्थ मिलकर एक उत्पाद बनाते हैं, जैसे CaO + H₂O → Ca(OH)₂। इस अभिक्रिया में ऊष्मा निकलती है। वियोजन: एक पदार्थ टूटकर अनेक पदार्थ बनाता है; जैसे गर्म करने पर CaCO₃ → CaO + CO₂। विस्थापन: अधिक क्रियाशील तत्व कम क्रियाशील तत्व को उसके यौगिक से हटा देता है; Fe + CuSO₄ → FeSO₄ + Cu। द्विविस्थापन: आयनों का आदान-प्रदान होता है; Na₂SO₄ + BaCl₂ → BaSO₄↓ + 2NaCl। यहाँ अघुलनशील BaSO₄ श्वेत अवक्षेप है।
उपचयन का अर्थ इस स्तर पर ऑक्सीजन का जुड़ना या हाइड्रोजन का हटना है; अपचयन इसका विपरीत है। CuO + H₂ → Cu + H₂O में कॉपर ऑक्साइड का अपचयन और हाइड्रोजन का उपचयन साथ होता है, इसलिए यह रेडॉक्स अभिक्रिया है। ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया ऊर्जा छोड़ती है, जबकि ऊष्माशोषी अभिक्रिया ऊर्जा ग्रहण करती है।
लोहे का संक्षारण नमी और ऑक्सीजन के संपर्क में जंग बनने की प्रक्रिया है। पेंट, तेल और जस्ते की परत (यशदलेपन) से बचाव होता है। तेल-घी का वायुमंडलीय ऑक्सीकरण स्वाद और गंध बिगाड़ता है; इसे विकृतगंधिता कहते हैं। वायुरोधी पैकिंग तथा एंटीऑक्सीडेंट इसे धीमा कर सकते हैं।
परीक्षा में याद रखें: समीकरण संतुलित करने में परमाणु गिनें, अभिक्रिया का प्रकार पहचानें और जहाँ पूछा जाए वहाँ रंग, गैस या अवक्षेप जैसे प्रेक्षण भी लिखें।
- संतुलित समीकरण क्यों जरूरी है?
उत्तर
द्रव्यमान संरक्षण के अनुसार दोनों ओर प्रत्येक तत्व के परमाणुओं की संख्या समान होनी चाहिए। - इस अध्याय का एक महत्त्वपूर्ण वैज्ञानिक शब्द लिखकर अर्थ बताएँ।
संकेत उत्तर
ऊपर दिए पाठ से किसी एक प्रमुख शब्द की सही परिभाषा लिखें; जैसे अध्याय शीर्षक की अवधारणा। - अध्याय के चित्र/समीकरण/सूत्र से एक निष्कर्ष बताएँ।
संकेत उत्तर
चित्र या सूत्र का एक सत्यापित वैज्ञानिक संबंध लिखें; केवल नाम लिखना पर्याप्त नहीं।
एक आम गलती: केवल परिभाषा याद करना और उसके प्रयोग, चित्र, इकाई या शर्त को छोड़ देना।
2. अम्ल, क्षारक एवं लवण (7 अंक)
नींबू में साइट्रिक अम्ल, सिरके में एथेनॉइक अम्ल और पेट के जठर रस में हाइड्रोक्लोरिक अम्ल पाया जाता है। अम्ल जलीय विलयन में H⁺ (व्यवहार में H₃O⁺) आयनों की उपलब्धता बढ़ाते हैं। क्षारक जलीय विलयन में OH⁻ आयन देते हैं। सभी क्षारक पानी में घुलनशील नहीं होते; पानी में घुलने वाले क्षारक क्षार कहलाते हैं। उदाहरण NaOH एक क्षार है। पदार्थों को स्वाद से पहचानना असुरक्षित है; प्रयोगशाला में सूचक प्रयोग किए जाते हैं। नीला लिटमस अम्ल में लाल तथा लाल लिटमस क्षारक में नीला होता है।
pH और दैनिक जीवन
pH पैमाना जलीय विलयन की अम्लीय या क्षारीय प्रकृति बताता है। सामान्य विद्यालयी संदर्भ में 25°C पर pH 7 उदासीन, 7 से कम अम्लीय और 7 से अधिक क्षारीय होता है। pH में एक इकाई का अंतर हाइड्रोजन आयन सक्रियता में लगभग दस गुना अंतर दर्शाता है। दाँतों के इनेमल को लगभग pH 5.5 से नीचे क्षति का खतरा बढ़ता है। पेट में अत्यधिक अम्लीयता से राहत के लिए चिकित्सकीय सलाह के अनुसार ऐन्टैसिड उपयोग होते हैं।
महत्त्वपूर्ण रासायनिक अभिक्रियाएँ
उदासीनीकरण: HCl + NaOH → NaCl + H₂O। जस्ता और तनु अम्ल: Zn + 2HCl → ZnCl₂ + H₂↑। कार्बोनेट और अम्ल: Na₂CO₃ + 2HCl → 2NaCl + H₂O + CO₂↑। निकली CO₂ गैस चूने के पानी को दूधिया बनाती है: Ca(OH)₂ + CO₂ → CaCO₃↓ + H₂O। ध्यान दें कि प्रत्येक धातु और प्रत्येक अम्ल का व्यवहार एक जैसा नहीं होता।
अम्ल या क्षारक को जल में घोलते समय ऊष्मा निकल सकती है। सान्द्र अम्ल का तनुकरण करते समय अम्ल को धीरे-धीरे पानी में मिलाया जाता है, उल्टा नहीं। यह कार्य केवल प्रशिक्षित शिक्षक की देखरेख और उचित सुरक्षा साधनों से करें।
साधारण नमक से प्राप्त उपयोगी रसायन और उनके सूत्र
सोडियम क्लोराइड से क्लोर-क्षार प्रक्रिया में NaOH, क्लोरीन और हाइड्रोजन प्राप्त होते हैं। बेकिंग सोडा NaHCO₃ भोजन बनाने में तथा कुछ अग्निशामकों में काम आता है। धावन सोडा Na₂CO₃·10H₂O जल की स्थायी कठोरता कम करने और सफाई में उपयोगी है। विरंजक चूर्ण सामान्यतः CaOCl₂ के रूप में दर्शाया जाता है और विरंजन तथा कीटाणुशोधन में काम आता है। प्लास्टर ऑफ पेरिस CaSO₄·½H₂O जल मिलने पर जमकर जिप्सम बनाता है।
क्रिस्टलन जल किसी क्रिस्टलीय लवण की संरचना में निश्चित अनुपात में उपस्थित जल है। नीला कॉपर सल्फेट CuSO₄·5H₂O गर्म करने पर क्रिस्टलन जल खोकर सफेद हो सकता है। इसी कारण कुछ लवणों का रंग और स्वरूप जल की उपस्थिति पर निर्भर करता है।
परीक्षा में याद रखें: pH, लिटमस, उदासीनीकरण, कार्बोनेट से CO₂ की पहचान और साधारण नमक से प्राप्त उपयोगी रसायन और उनके सूत्रों के सूत्र तथा उपयोग।
- 25°C पर उदासीन विलयन का pH कितना है?
उत्तर
7। - इस अध्याय का एक महत्त्वपूर्ण वैज्ञानिक शब्द लिखकर अर्थ बताएँ।
संकेत उत्तर
ऊपर दिए पाठ से किसी एक प्रमुख शब्द की सही परिभाषा लिखें; जैसे अध्याय शीर्षक की अवधारणा। - अध्याय के चित्र/समीकरण/सूत्र से एक निष्कर्ष बताएँ।
संकेत उत्तर
चित्र या सूत्र का एक सत्यापित वैज्ञानिक संबंध लिखें; केवल नाम लिखना पर्याप्त नहीं।
एक आम गलती: केवल परिभाषा याद करना और उसके प्रयोग, चित्र, इकाई या शर्त को छोड़ देना।
3. धातु एवं अधातु (5 अंक)
धातुएँ सामान्यतः चमकदार, ऊष्मा एवं विद्युत की सुचालक, आघातवर्ध्य (पीटकर चादर बन सकने वाली) और तन्य (खींचकर तार बन सकने वाली) होती हैं। ताँबे का तार, लोहे की चादर और एल्युमिनियम के बर्तन इसके परिचित उदाहरण हैं। अधातुओं में सामान्यतः ये गुण नहीं मिलते। लेकिन अपवाद महत्त्वपूर्ण हैं: पारा कमरे के ताप पर द्रव धातु है, ब्रोमीन द्रव अधातु है और ग्रेफाइट अधातु होते हुए भी विद्युत का सुचालक है।
धातुओं की रासायनिक सक्रियता
अनेक धातुएँ ऑक्सीजन से अभिक्रिया करके धात्विक ऑक्साइड बनाती हैं। उदाहरण 2Mg + O₂ → 2MgO। अधिकांश धात्विक ऑक्साइड क्षारीय होते हैं, जबकि Al₂O₃ और ZnO जैसे उभयधर्मी ऑक्साइड अम्ल और क्षारक दोनों से अभिक्रिया कर सकते हैं। सोडियम ठंडे जल से तीव्र अभिक्रिया करता है; लोहा सामान्यतः भाप से अभिक्रिया करता है; ताँबा जल से आसानी से अभिक्रिया नहीं करता। इसलिए सक्रियता श्रेणी अभिक्रियाओं की भविष्यवाणी में उपयोगी है।
इस क्रम में ऊपर की धातु नीचे की धातु को उसके लवण-विलयन से विस्थापित कर सकती है, यदि उपयुक्त अभिक्रिया संभव हो। उदाहरण Fe + CuSO₄ → FeSO₄ + Cu। कॉपर सल्फेट का नीला विलयन हल्का हरा हो जाता है और लोहे पर ताँबे की लाल-भूरी परत जमती है। इसके उलट ताँबा आयरन सल्फेट से लोहे को विस्थापित नहीं करता।
आयनिक यौगिक कैसे बनते हैं?
धातु इलेक्ट्रॉन खोकर धनायन और अधातु इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके ऋणायन बनाती है। सोडियम एक इलेक्ट्रॉन खोकर Na⁺ तथा क्लोरीन एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके Cl⁻ बनाता है। विपरीत आवेश वाले आयनों के बीच विद्युतस्थैतिक आकर्षण से NaCl जैसे आयनिक यौगिक बनते हैं। इनके गलनांक प्रायः ऊँचे होते हैं; ठोस अवस्था में आयन स्थिर रहने से विद्युत नहीं चलती, जबकि गलित या जलीय अवस्था में गतिशील आयन विद्युत का चालन करते हैं।
अयस्क, निष्कर्षण और संक्षारण
जिन प्राकृतिक खनिजों से धातु लाभकारी ढंग से निकाली जा सके, वे अयस्क कहलाते हैं। पहले अयस्क का समृद्धीकरण, फिर उपयुक्त विधि से धातु का निष्कर्षण और अंत में परिष्करण होता है। अत्यधिक सक्रिय धातुएँ सामान्यतः विद्युत अपघटन से प्राप्त की जाती हैं; मध्यम सक्रिय धातुओं के लिए भर्जन या निस्तापन के बाद अपचयन उपयोगी हो सकता है। अशुद्ध ताँबे को विद्युत-अपघटनी परिष्करण से शुद्ध किया जा सकता है।
नमी और ऑक्सीजन की उपस्थिति में लोहे पर जंग लगना संक्षारण का सामान्य उदाहरण है। लोहे को पेंट करना, तेल लगाना, मिश्रधातु बनाना या जस्ते की परत चढ़ाना बचाव के उपाय हैं। मिश्रधातु दो या अधिक तत्वों का ऐसा मिश्रण है जिसमें कम-से-कम एक धातु होती है; जैसे पीतल में ताँबा और जस्ता।
परीक्षा में याद रखें: धातु-अधातु के अपवाद, सक्रियता श्रेणी, विस्थापन प्रयोग, NaCl में आयनिक बंध और निष्कर्षण की सामान्य विधियाँ।
मिश्रधातु की परिभाषा
मिश्रधातु सामान्यतः दो या अधिक धातुओं अथवा धातु और अधातु का समांगी मिश्रण है; जैसे पीतल में ताँबा और जस्ता।
- मिश्रधातु क्या है?
उत्तर
धातु-धातु या धातु-अधातु का सामान्यतः समांगी मिश्रण। - इस अध्याय का एक महत्त्वपूर्ण वैज्ञानिक शब्द लिखकर अर्थ बताएँ।
संकेत उत्तर
ऊपर दिए पाठ से किसी एक प्रमुख शब्द की सही परिभाषा लिखें; जैसे अध्याय शीर्षक की अवधारणा। - अध्याय के चित्र/समीकरण/सूत्र से एक निष्कर्ष बताएँ।
संकेत उत्तर
चित्र या सूत्र का एक सत्यापित वैज्ञानिक संबंध लिखें; केवल नाम लिखना पर्याप्त नहीं।
एक आम गलती: केवल परिभाषा याद करना और उसके प्रयोग, चित्र, इकाई या शर्त को छोड़ देना।
4. कार्बन एवं उसके यौगिक (7 अंक)
कार्बन हमारे भोजन, ईंधन, कपड़ों, औषधियों और जीवित कोशिकाओं का प्रमुख घटक है। इसके इतने अधिक यौगिक बनने के दो कारण हैं: चतुःसंयोजकता और श्रृंखलन। कार्बन की संयोजकता चार होती है, इसलिए वह चार सहसंयोजी बंध बना सकता है। वह दूसरे कार्बन परमाणुओं से जुड़कर लंबी, शाखित या वलयाकार संरचनाएँ भी बनाता है। सहसंयोजी बंध इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी से बनता है। मेथेन CH₄ में कार्बन चार हाइड्रोजन परमाणुओं के साथ चार एकल बंध बनाता है।
संतृप्त और असंतृप्त हाइड्रोकार्बन
कार्बन-कार्बन के बीच केवल एकल बंध वाले हाइड्रोकार्बन संतृप्त कहलाते हैं; जैसे एथेन C₂H₆। द्विबंध या त्रिबंध वाले असंतृप्त होते हैं; जैसे एथीन C₂H₄ और एथाइन C₂H₂। समजातीय श्रेणी के क्रमागत सदस्यों में सामान्यतः –CH₂– का अंतर होता है, जिसका द्रव्यमान 14 u है। समान अणुसूत्र लेकिन अलग संरचना वाले पदार्थ संरचनात्मक समावयवी कहलाते हैं; ब्यूटेन C₄H₁₀ के दो संरचनात्मक समावयवी होते हैं।
कार्बनिक यौगिकों की पहचान में प्रकार्यात्मक समूह उपयोगी हैं। –OH ऐल्कोहॉल, –CHO ऐल्डिहाइड, >C=O कीटोन और –COOH कार्बोक्सिलिक अम्ल का समूह है। उदाहरण एथेनॉल C₂H₅OH एक ऐल्कोहॉल और एथेनॉइक अम्ल CH₃COOH एक कार्बोक्सिलिक अम्ल है। कार्बन यौगिकों की अभिक्रियाओं में दहन, ऑक्सीकरण, संकलन और प्रतिस्थापन प्रमुख हैं। असंतृप्त तेलों का निकेल उत्प्रेरक की उपस्थिति में हाइड्रोजनीकरण संकलन का उदाहरण है।
एथेनॉल, एथेनॉइक अम्ल और साबुन
एथेनॉल का उपयोग विभिन्न औद्योगिक उत्पादों में होता है, लेकिन इसका सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। एथेनॉइक अम्ल सिरके का प्रमुख अम्लीय घटक है। एथेनॉइक अम्ल और एथेनॉल की अभिक्रिया से एस्टर बनता है; इसे एस्टरीकरण कहते हैं। एस्टर की क्षारीय जल-अपघटन अभिक्रिया साबुनीकरण से संबंधित है।
साबुन का अणु दो प्रकृति वाले भाग रखता है: एक जलरागी सिरा और दूसरी जलविरागी हाइड्रोकार्बन पूँछ। पानी में साबुन के अणु तेल-मैल को भीतर घेरे हुए मिसेल बना सकते हैं; बाहरी जलरागी सिरों के कारण मैल पानी के साथ हटने लगता है। कठोर जल में कैल्शियम और मैग्नीशियम आयन साबुन के साथ अघुलनशील मैल (अपमल) बना सकते हैं। कई संश्लेषित अपमार्जक कठोर जल में भी प्रभावी रहते हैं।
परीक्षा में याद रखें: कार्बन की चतुःसंयोजकता, सहसंयोजी बंध, संतृप्त-असंतृप्त यौगिक, समजातीय श्रेणी, एस्टरीकरण और मिसेल का चित्र।
स्रोत: RBSE कक्षा 10 विज्ञान पाठ्यक्रम 2026–27; NCERT विज्ञान पाठ्यपुस्तक के अध्यायों के आधार पर स्वतंत्र संक्षेपण। सभी SVG इस लेख के लिए तैयार मौलिक योजनात्मक चित्र हैं। यह स्वतंत्र शैक्षिक सामग्री है, बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट नहीं।
नामकरण, इलेक्ट्रॉन-बिंदु संरचना और अभिक्रियाएँ
कार्बन यौगिक का नाम रखते समय मुख्य कार्बन शृंखला चुनें, एकल/द्वि/त्रि बंध के अनुसार -एन/-ईन/-आइन तथा क्रियात्मक समूह के अनुसार प्रत्यय लगाएँ। उदाहरण: CH₃–CH₂–OH = एथेनॉल; CH₃–COOH = एथेनॉइक अम्ल। मीथेन की इलेक्ट्रॉन-बिंदु संरचना में कार्बन चार हाइड्रोजन परमाणुओं के साथ चार साझा इलेक्ट्रॉन युग्म बनाता है। प्रमुख अभिक्रियाएँ: CH₄ + 2O₂ → CO₂ + 2H₂O; CH₂=CH₂ + H₂ → CH₃–CH₃ (Ni उत्प्रेरक); CH₃COOH + NaOH → CH₃COONa + H₂O।
- एथेनॉल का सूत्र लिखें।
उत्तर
C₂H₅OH। - इस अध्याय का एक महत्त्वपूर्ण वैज्ञानिक शब्द लिखकर अर्थ बताएँ।
संकेत उत्तर
ऊपर दिए पाठ से किसी एक प्रमुख शब्द की सही परिभाषा लिखें; जैसे अध्याय शीर्षक की अवधारणा। - अध्याय के चित्र/समीकरण/सूत्र से एक निष्कर्ष बताएँ।
संकेत उत्तर
चित्र या सूत्र का एक सत्यापित वैज्ञानिक संबंध लिखें; केवल नाम लिखना पर्याप्त नहीं।
एक आम गलती: केवल परिभाषा याद करना और उसके प्रयोग, चित्र, इकाई या शर्त को छोड़ देना।
5. जैव प्रक्रम (8 अंक)
जैव प्रक्रम वे आवश्यक क्रियाएँ हैं जिनसे जीव अपना जीवन बनाए रखते हैं। पोषण, श्वसन, पदार्थों का परिवहन और उत्सर्जन इसके चार प्रमुख पक्ष हैं। एककोशिकीय जीव अनेक कार्य कोशिका की सतह से कर सकते हैं, पर बहुकोशिकीय जीवों में विशेष अंग-तंत्र विकसित होते हैं।
पोषण: भोजन कैसे मिलता और उपयोग होता है?
स्वपोषी पोषण में हरे पौधे सूर्य के प्रकाश, क्लोरोफिल, कार्बन डाइऑक्साइड और जल की सहायता से प्रकाश संश्लेषण द्वारा कार्बोहाइड्रेट बनाते हैं तथा ऑक्सीजन छोड़ते हैं। पत्तियों के रंध्र गैसों का आदान-प्रदान करते हैं। जड़ों से आया जल जाइलम के माध्यम से पत्तियों तक पहुँचता है।
परपोषी पोषण में जीव भोजन के लिए दूसरे जीवों पर निर्भर होते हैं। मनुष्य में मुख में चबाने और लार की एमाइलेज क्रिया से स्टार्च का पाचन आरंभ होता है। आमाशय में HCl अम्लीय माध्यम बनाता है और पेप्सिन प्रोटीन पाचन में सहायता करता है। छोटी आँत में पित्त वसा का इमल्सीकरण करता है; अग्न्याशयी और आंत्रीय एंजाइम पाचन पूरा करते हैं। छोटी आँत के दीर्घरोम (villi) पोषक पदार्थों के अवशोषण का क्षेत्रफल बढ़ाते हैं। बड़ी आँत मुख्यतः जल व कुछ लवणों का अवशोषण करती है।
श्वसन और ऊर्जा
श्वसन में भोजन से ऊर्जा मुक्त होती है और उसका एक भाग ATP के रूप में उपलब्ध होता है। ग्लूकोज़ का प्रारंभिक विखंडन कोशिकाद्रव्य में होता है। पर्याप्त ऑक्सीजन पर आगे की प्रक्रिया माइटोकॉन्ड्रिया में चलती है तथा CO₂ और जल बनते हैं। ऑक्सीजन की कमी में मानव पेशियों में लैक्टिक अम्ल बन सकता है; यीस्ट में एथेनॉल और CO₂ बनते हैं। श्वसन कोशिकीय ऊर्जा-प्रक्रिया है, जबकि श्वास लेना-छोड़ना वायु के आवागमन की भौतिक क्रिया है।
परिवहन: रक्त और पौधों के संवहनी ऊतक
मनुष्य के हृदय में चार कक्ष—दो आलिंद और दो निलय—होते हैं। शरीर से आया अपेक्षाकृत ऑक्सीजन-रहित रक्त दाएँ आलिंद और दाएँ निलय से फेफड़ों तक जाता है। फेफड़ों से ऑक्सीजन-युक्त रक्त बाएँ आलिंद और बाएँ निलय से पूरे शरीर में भेजा जाता है। इसे द्वि-परिसंचरण कहते हैं। वाल्व रक्त के उल्टे प्रवाह को रोकते हैं। धमनियाँ रक्त को हृदय से दूर और शिराएँ हृदय की ओर ले जाती हैं; फुफ्फुसीय धमनी और शिरा ऑक्सीजन-संबंधी सामान्य धारणा के अपवाद हैं।
पौधों में जाइलम जल व खनिजों का परिवहन मुख्यतः जड़ों से ऊपर करता है; वाष्पोत्सर्जन खिंचाव महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। फ्लोएम प्रकाश संश्लेषण से बने घुलनशील खाद्य पदार्थों का स्रोत से आवश्यकता वाले भागों तक परिवहन करता है; यह दिशा परिस्थिति के अनुसार बदल सकती है।
उत्सर्जन और वृक्क
मानव वृक्क की कार्यात्मक इकाई नेफ्रॉन है। इसमें ग्लोमेरुलस में निस्यंदन, नलिकाओं में उपयोगी पदार्थों का चयनात्मक पुनरवशोषण और कुछ पदार्थों का स्रवण होता है। मूत्र वृक्क → मूत्रवाहिनी → मूत्राशय → मूत्रमार्ग से बाहर निकलता है। पौधे कुछ अपशिष्ट पदार्थ पत्तियों, छाल, रेजिन या गोंद में जमा कर सकते हैं।
- रक्त का दोहरा परिसंचरण क्या है?
उत्तर
एक पूर्ण चक्र में रक्त हृदय से दो बार गुजरता है। - इस अध्याय का एक महत्त्वपूर्ण वैज्ञानिक शब्द लिखकर अर्थ बताएँ।
संकेत उत्तर
ऊपर दिए पाठ से किसी एक प्रमुख शब्द की सही परिभाषा लिखें; जैसे अध्याय शीर्षक की अवधारणा। - अध्याय के चित्र/समीकरण/सूत्र से एक निष्कर्ष बताएँ।
संकेत उत्तर
चित्र या सूत्र का एक सत्यापित वैज्ञानिक संबंध लिखें; केवल नाम लिखना पर्याप्त नहीं।
एक आम गलती: केवल परिभाषा याद करना और उसके प्रयोग, चित्र, इकाई या शर्त को छोड़ देना।
6. नियंत्रण एवं समन्वय (6 अंक)
जीवों को बाहरी परिवर्तन पहचानकर उचित प्रतिक्रिया देनी होती है। मनुष्यों में यह कार्य मुख्यतः तंत्रिका तंत्र और अंतःस्रावी तंत्र मिलकर करते हैं। तंत्रिका संकेत प्रायः तीव्र और लक्षित होते हैं, जबकि हार्मोन रक्त के माध्यम से पहुँचकर अपेक्षाकृत धीमी या दीर्घकालिक प्रतिक्रियाएँ भी नियंत्रित कर सकते हैं।
न्यूरॉन और प्रतिवर्ती क्रिया
न्यूरॉन तंत्रिका तंत्र की संरचनात्मक एवं कार्यात्मक इकाई है। डेंड्राइट संकेत ग्रहण करते हैं, कोशिका-काय उन्हें समेकित करता है और अक्षतंतु संकेत को आगे ले जाता है। दो न्यूरॉनों के बीच सिनेप्स पर रासायनिक संदेशवाहक संकेत के संचार में भाग लेते हैं। गर्म वस्तु छूते ही हाथ हटाना प्रतिवर्ती क्रिया है; इसका प्राथमिक समन्वय प्रायः मेरुरज्जु से होता है, यद्यपि मस्तिष्क को भी सूचना मिलती है।
मस्तिष्क के प्रमुख कार्य
अग्र मस्तिष्क सोचने, स्मृति, संवेदनाओं की व्याख्या और ऐच्छिक गतिविधियों से संबंधित है। अनुमस्तिष्क (cerebellum) शरीर का संतुलन और गतिविधियों का समन्वय करता है। मेडुला श्वसन, हृदयगति जैसी अनेक अनैच्छिक क्रियाओं के नियमन में भूमिका निभाता है। मस्तिष्क और मेरुरज्जु केंद्रीय तंत्रिका तंत्र बनाते हैं।
पादप अनुवर्तन और हार्मोन
पौधे तंत्रिकाओं के बिना भी वृद्धि और कोशिकीय परिवर्तन के द्वारा प्रतिक्रिया देते हैं। प्रकाश की दिशा में तने का मुड़ना प्रकाशानुवर्तन और गुरुत्व की दिशा में जड़ों की वृद्धि गुरुत्वानुवर्तन है। ऑक्सिन कोशिका दीर्घीकरण में सहायक होता है; जिबरेलिन तने की वृद्धि, साइटोकाइनिन कोशिका विभाजन, एब्सिसिक अम्ल अनेक तनाव प्रतिक्रियाओं तथा वृद्धि का अवरोध तथा तनाव में रंध्रों के बंद होने में भूमिका में भूमिका निभाता है। हार्मोन के प्रभाव संदर्भ पर निर्भर करते हैं।
मनुष्य में इंसुलिन रक्त-ग्लूकोज़ के नियमन में, थायरॉक्सिन उपापचय में और एड्रेनालिन तनाव के समय शरीर को त्वरित प्रतिक्रिया के लिए तैयार करने में सहायता करता है। थायरॉक्सिन के निर्माण में आयोडीन आवश्यक है। अंतःस्रावी ग्रंथियाँ अपने हार्मोन सीधे रक्त में छोड़ती हैं।
ऑक्सिन और प्रतिपुष्टि नियंत्रण
एक ओर से प्रकाश पड़ने पर प्ररोह के छायादार भाग में ऑक्सिन अधिक एकत्र हो सकता है; वहाँ कोशिकाओं के अधिक लंबा होने से प्ररोह प्रकाश की ओर मुड़ता है। शरीर में हार्मोन का प्रतिपुष्टि नियंत्रण आवश्यक है: उदाहरण के लिए रक्त में ग्लूकोज़ बढ़ने पर इंसुलिन का स्राव बढ़ता है, जिससे ग्लूकोज़ कम करने में सहायता मिलती है।
- प्रतिवर्ती क्रिया क्या है?
उत्तर
उद्दीपन पर तेज, अनैच्छिक प्रतिक्रिया। - इस अध्याय का एक महत्त्वपूर्ण वैज्ञानिक शब्द लिखकर अर्थ बताएँ।
संकेत उत्तर
ऊपर दिए पाठ से किसी एक प्रमुख शब्द की सही परिभाषा लिखें; जैसे अध्याय शीर्षक की अवधारणा। - अध्याय के चित्र/समीकरण/सूत्र से एक निष्कर्ष बताएँ।
संकेत उत्तर
चित्र या सूत्र का एक सत्यापित वैज्ञानिक संबंध लिखें; केवल नाम लिखना पर्याप्त नहीं।
एक आम गलती: केवल परिभाषा याद करना और उसके प्रयोग, चित्र, इकाई या शर्त को छोड़ देना।
7. जीव जनन कैसे करते हैं? (7 अंक)
जनन से जीव अपनी प्रजाति की निरंतरता बनाए रखते हैं। यह किसी एक जीव के जीवित रहने के लिए आवश्यक नहीं, लेकिन प्रजाति के बने रहने के लिए महत्त्वपूर्ण है। DNA की प्रतिकृति में छोटे अंतर नई विविधताओं का स्रोत बन सकते हैं। जनन के दो व्यापक रूप हैं—अलैंगिक और लैंगिक।
अलैंगिक जनन के तरीके
युग्मकों के संलयन के बिना सामान्यतः एक जनक से संतान बनने को अलैंगिक जनन कहते हैं। अमीबा में द्विखंडन, प्लाज्मोडियम में बहुखंडन, यीस्ट में मुकुलन, स्पाइरोगाइरा में खंडन और राइजोपस में बीजाणु निर्माण इसके उदाहरण हैं। कायिक प्रवर्धन में पौधे की जड़, तना या पत्ती के भाग से नया पौधा बन सकता है; उदाहरण—आलू की आँखों से पौधे। कुछ पौधों में कलम, लेयरिंग या ग्राफ्टिंग जैसी विधियाँ अपनाई जाती हैं।
पुष्पी पौधों में लैंगिक जनन
पुष्प का पुंकेसर परागकण बनाता है और स्त्रीकेसर में वर्तिकाग्र, वर्तिका और अंडाशय होते हैं। परागकण का वर्तिकाग्र तक पहुँचना परागण है; यह निषेचन से अलग प्रक्रिया है। परागनली के माध्यम से नर युग्मक बीजांड तक पहुँचता है, जहाँ युग्मकों के संलयन से युग्मनज बनता है। सामान्यतः निषेचन के बाद बीजांड बीज और अंडाशय फल में विकसित होता है।
मानव जनन और स्वास्थ्य
मानव नर जनन तंत्र में वृषण शुक्राणु तथा टेस्टोस्टेरॉन बनाते हैं। मादा जनन तंत्र में अंडाशय अंडाणु तथा एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरॉन जैसे हार्मोन बनाते हैं। सामान्यतः निषेचन अंडवाहिनी में होता है और विकसित होता भ्रूण गर्भाशय की भीतरी परत में स्थापित होता है। अपरा (placenta) के माध्यम से माता और भ्रूण के बीच पोषक पदार्थों, गैसों तथा कुछ अपशिष्ट पदार्थों का आदान-प्रदान होता है; दोनों का रक्त सामान्यतः सीधे नहीं मिलता।
यदि गर्भावस्था स्थापित नहीं होती तो गर्भाशय की आंतरिक परत का कुछ भाग मासिक धर्म के दौरान बाहर निकलता है। यौवनारंभ में हार्मोन के प्रभाव से जनन-संबंधी परिपक्वता और शारीरिक परिवर्तन होते हैं। प्रजनन स्वास्थ्य में स्वच्छता, वैज्ञानिक जानकारी, सहमति और संक्रमणों की रोकथाम महत्त्वपूर्ण हैं। कंडोम गर्भनिरोध के साथ अनेक यौन-संचारित संक्रमणों का जोखिम घटाने में भी सहायता करते हैं; अन्य गर्भनिरोध विधियाँ संक्रमणों से समान सुरक्षा नहीं देतीं।
मानव जनन एवं गर्भनिरोध
पुरुष जनन तंत्र के प्रमुख अंग वृषण, शुक्रवाहिनी और शिश्न हैं। स्त्री जनन तंत्र में अंडाशय, अंडवाहिनी, गर्भाशय और योनि प्रमुख हैं। गर्भनिरोध की प्रमुख विधियाँ बाधा विधि (कंडोम), हार्मोनल विधि (चिकित्सकीय सलाह से), अंतर्गर्भाशयी युक्ति तथा स्थायी शल्य विधियाँ हैं। कंडोम कुछ यौन संचारित संक्रमणों से बचाव में भी सहायक है।
- अलैंगिक जनन में क्या नहीं होता?
उत्तर
युग्मकों का संलयन। - इस अध्याय का एक महत्त्वपूर्ण वैज्ञानिक शब्द लिखकर अर्थ बताएँ।
संकेत उत्तर
ऊपर दिए पाठ से किसी एक प्रमुख शब्द की सही परिभाषा लिखें; जैसे अध्याय शीर्षक की अवधारणा। - अध्याय के चित्र/समीकरण/सूत्र से एक निष्कर्ष बताएँ।
संकेत उत्तर
चित्र या सूत्र का एक सत्यापित वैज्ञानिक संबंध लिखें; केवल नाम लिखना पर्याप्त नहीं।
एक आम गलती: केवल परिभाषा याद करना और उसके प्रयोग, चित्र, इकाई या शर्त को छोड़ देना।
8. आनुवंशिकता (4 अंक)
आनुवंशिकता वह प्रक्रिया है जिससे माता-पिता के लक्षण संतानों में पहुँचते हैं। DNA में निहित जीन आनुवंशिक सूचना की इकाइयाँ हैं। गुणसूत्र DNA और संबंधित प्रोटीनों से बने होते हैं। लैंगिक जनन में माता और पिता दोनों से आनुवंशिक सामग्री मिलने के कारण संतानों में समानताएँ भी होती हैं और भिन्नताएँ भी।
मेंडल का एकसंकर संकरण
ग्रेगर मेंडल ने मटर के पौधों में विपरीत लक्षणों का अध्ययन किया। यदि शुद्ध लंबे पौधे TT और शुद्ध बौने पौधे tt का संकरण कराया जाए तो F₁ पीढ़ी के सभी पौधे Tt (लंबे) होते हैं, क्योंकि इस उदाहरण में लंबापन प्रभावी लक्षण है। F₁ के दो Tt पौधों के संकरण से F₂ में सामान्य मेंडेलीय अपेक्षा के अनुसार जीनोटाइप अनुपात 1 TT : 2 Tt : 1 tt और दृश्य लक्षण अनुपात 3 लंबे : 1 बौना मिलता है। ये सैद्धांतिक अनुपात बड़ी संतति संख्या के लिए अपेक्षित होते हैं; छोटी संख्या में वास्तविक परिणाम अलग हो सकते हैं।
प्रभावी, अप्रभावी और अर्जित लक्षण
प्रभावी लक्षण विषमयुग्मजी दशा में भी व्यक्त हो सकता है; अप्रभावी लक्षण इस सरल उदाहरण में समरूप अप्रभावी दशा में व्यक्त होता है। यह नहीं मानना चाहिए कि हर मानव लक्षण केवल एक प्रभावी-अप्रभावी जीन जोड़ी से तय होता है—कई लक्षण अनेक जीन और पर्यावरण से प्रभावित होते हैं। व्यायाम से विकसित मांसपेशियों जैसे अर्जित लक्षण सामान्यतः सीधे आनुवंशिक रूप से अगली पीढ़ी को नहीं मिलते।
मनुष्यों में लिंग निर्धारण
पाठ्यपुस्तक के सामान्य XX–XY मॉडल में अंडाणु X गुणसूत्र देता है, जबकि शुक्राणु X या Y गुणसूत्र दे सकता है। X शुक्राणु से सामान्यतः XX और Y शुक्राणु से सामान्यतः XY संयोजन बनता है। इसलिए बच्चे के लिंग के लिए माँ को दोष देना वैज्ञानिक रूप से गलत है। वास्तविक जैविक लिंग-विकास में गुणसूत्रों, जीनों और हार्मोन की जटिल भूमिका होती है; कुछ प्राकृतिक विविधताएँ भी पाई जाती हैं।
द्विसंकर संकरण और स्वतंत्र वंशागति
मेंडल के द्विसंकर संकरण में दो लक्षण एक साथ देखे जाते हैं। यदि दो जीन स्वतंत्र रूप से वर्गीकृत हों, तो AaBb × AaBb के F₂ में 9:3:3:1 का लक्षणानुपात मिल सकता है। यह अनुपात तभी अपेक्षित है जब दोनों जीन स्वतंत्र वंशागति दर्शाएँ और पूर्ण प्रभाविता जैसी शर्तें लागू हों।
- एकसंकर F₂ का लक्षणानुपात क्या है?
उत्तर
पूर्ण प्रभाविता की दशा में 3:1। - इस अध्याय का एक महत्त्वपूर्ण वैज्ञानिक शब्द लिखकर अर्थ बताएँ।
संकेत उत्तर
ऊपर दिए पाठ से किसी एक प्रमुख शब्द की सही परिभाषा लिखें; जैसे अध्याय शीर्षक की अवधारणा। - अध्याय के चित्र/समीकरण/सूत्र से एक निष्कर्ष बताएँ।
संकेत उत्तर
चित्र या सूत्र का एक सत्यापित वैज्ञानिक संबंध लिखें; केवल नाम लिखना पर्याप्त नहीं।
एक आम गलती: केवल परिभाषा याद करना और उसके प्रयोग, चित्र, इकाई या शर्त को छोड़ देना।
9. प्रकाश — परावर्तन तथा अपवर्तन (8 अंक)
प्रकाश और परावर्तन
प्रकाश के कारण वस्तुएँ दिखाई देती हैं। किसी सतह से टकराकर प्रकाश का उसी माध्यम में लौटना परावर्तन है। आपतन कोण और परावर्तन कोण अभिलंब से मापे जाते हैं तथा दोनों बराबर होते हैं। आपतित किरण, परावर्तित किरण और अभिलंब एक ही तल में होते हैं। समतल दर्पण में प्रतिबिंब आभासी, सीधा, वस्तु के बराबर आकार का और पार्श्व-उलटा होता है।
गोलीय दर्पण
अवतल दर्पण अंदर की ओर परावर्तक होता है; उत्तल दर्पण बाहर की ओर। अवतल दर्पण वस्तु की स्थिति के अनुसार वास्तविक-उलटा या आभासी-सीधा प्रतिबिंब बना सकता है। उत्तल दर्पण सामान्यतः आभासी, सीधा और छोटा प्रतिबिंब बनाता है; इसलिए वाहन के पश्च-दृश्य दर्पण में उपयोगी है। ध्रुव P, वक्रता केंद्र C, मुख्य फोकस F और वक्रता त्रिज्या R याद रखें। गोलीय दर्पण के लिए छोटे द्वारक के सन्निकटन में R = 2f होता है।
अपवर्तन
एक पारदर्शी माध्यम से दूसरे में तिरछी प्रवेश करने पर प्रकाश की चाल बदलने के कारण दिशा बदल सकती है; इसे अपवर्तन कहते हैं। विरल से सघन प्रकाशिक माध्यम में जाने पर किरण सामान्यतः अभिलंब की ओर और विपरीत स्थिति में उससे दूर मुड़ती है। अभिलंब पर प्रवेश करने पर दिशा नहीं बदलती। अपवर्तनांक n = निर्वात में प्रकाश की चाल / माध्यम में प्रकाश की चाल है।
लेंस और प्रतिबिंब
उत्तल लेंस अभिसारी तथा अवतल लेंस अपसारी होता है। उत्तल लेंस वस्तु की स्थिति के अनुसार वास्तविक या आभासी प्रतिबिंब दे सकता है, जबकि अवतल लेंस सामान्यतः आभासी, सीधा और छोटा प्रतिबिंब बनाता है। किरण आरेख में मुख्य अक्ष के समानांतर किरण, प्रकाशिक केंद्र से गुजरने वाली किरण और फोकस से संबंधित किरणों का उपयोग करें।
चिह्न परिपाटी एवं गणना
कार्तीय चिह्न परिपाटी में प्रकाश की आपतित दिशा धनात्मक मानी जाती है। इसलिए सामान्यतः दर्पण के सामने रखी वस्तु की दूरी u ऋणात्मक होती है। प्रतिबिंब दूरी v तथा फोकस दूरी f का चिह्न स्थिति पर निर्भर करता है। गणना से पहले सभी दूरियाँ एक ही इकाई में लिखें। आवर्धन प्रतिबिंब की ऊँचाई और वस्तु की ऊँचाई का अनुपात है; चिह्न से सीधा या उलटा होना समझें।
स्नेल का नियम और प्रतिबिंब की स्थितियाँ
स्नेल का नियम: n₁ sin i = n₂ sin r (समदैशिक माध्यमों में)। सापेक्ष अपवर्तनांक n₂₁ = n₂/n₁ = sin i/sin r। अवतल दर्पण में वस्तु C से परे हो तो प्रतिबिंब F और C के बीच वास्तविक, उल्टा और छोटा; C पर हो तो C पर समान आकार; F और P के बीच हो तो दर्पण के पीछे आभासी, सीधा और बड़ा होता है। उत्तल दर्पण वास्तविक वस्तु का हमेशा आभासी, सीधा और छोटा प्रतिबिंब बनाता है। वायु में सामान्य काँच का उत्तल लेंस अभिसारी तथा अवतल लेंस अपसारी होता है; अवतल लेंस वास्तविक वस्तु का आभासी, सीधा और छोटा प्रतिबिंब बनाता है।
- स्नेल का नियम लिखें।
उत्तर
n₁ sin i = n₂ sin r। - इस अध्याय का एक महत्त्वपूर्ण वैज्ञानिक शब्द लिखकर अर्थ बताएँ।
संकेत उत्तर
ऊपर दिए पाठ से किसी एक प्रमुख शब्द की सही परिभाषा लिखें; जैसे अध्याय शीर्षक की अवधारणा। - अध्याय के चित्र/समीकरण/सूत्र से एक निष्कर्ष बताएँ।
संकेत उत्तर
चित्र या सूत्र का एक सत्यापित वैज्ञानिक संबंध लिखें; केवल नाम लिखना पर्याप्त नहीं।
एक आम गलती: केवल परिभाषा याद करना और उसके प्रयोग, चित्र, इकाई या शर्त को छोड़ देना।
10. मानव नेत्र तथा रंग-बिरंगा संसार (4 अंक)
नेत्र की रचना
मानव नेत्र में कॉर्निया प्रकाश के अपवर्तन का बड़ा भाग करता है। परितारिका पुतली के आकार को नियंत्रित कर प्रवेश करने वाले प्रकाश की मात्रा बदलती है। नेत्र लेंस प्रकाश को रेटिना पर केंद्रित करने में सहायता करता है। रेटिना की प्रकाश-संवेदी कोशिकाओं से उत्पन्न संकेत दृष्टि तंत्रिका द्वारा मस्तिष्क तक जाते हैं। वस्तु का वास्तविक और उलटा प्रतिबिंब रेटिना पर बनता है; मस्तिष्क दृश्य की व्याख्या करता है।
समंजन क्षमता
सिलियरी पेशियों की सहायता से नेत्र लेंस की वक्रता और फोकस दूरी बदलने की क्षमता समंजन कहलाती है। सामान्य युवा नेत्र के लिए स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी लगभग 25 सेमी और दूर बिंदु अनंत माना जाता है। पढ़ते समय पुस्तक बहुत पास रखने से तनाव बढ़ सकता है।
दृष्टि दोष
निकट दृष्टि दोष (मायोपिया) में दूर की वस्तु स्पष्ट नहीं दिखती; सामान्य सुधार अवतल लेंस से किया जाता है। दूर दृष्टि दोष (हाइपरमेट्रोपिया) में पास की वस्तु देखने में कठिनाई होती है; उत्तल लेंस सहायक हो सकता है। आयु से संबंधित प्रेसबायोपिया में समंजन क्षमता घटती है; उपयुक्त चश्मे का चयन नेत्र विशेषज्ञ की जाँच के बाद होता है।
प्रिज्म और विक्षेपण
श्वेत प्रकाश प्रिज्म से गुजरकर विभिन्न रंगों में विभक्त हो सकता है; इसे विक्षेपण कहते हैं। दृश्य स्पेक्ट्रम में लाल से बैंगनी तक रंग होते हैं। प्रिज्म में बैंगनी प्रकाश का विचलन लाल से अधिक होता है। वर्षा की बूँदों में अपवर्तन, आंतरिक परावर्तन और विक्षेपण के कारण इंद्रधनुष बनता है।
वायुमंडलीय प्रभाव
वायुमंडलीय अपवर्तन के कारण तारे टिमटिमाते दिखाई दे सकते हैं। सूक्ष्म कणों द्वारा कम तरंगदैर्घ्य के प्रकाश का अपेक्षाकृत अधिक प्रकीर्णन साफ आकाश के नीले दिखाई देने का प्रमुख कारण है। सूर्योदय और सूर्यास्त के समय प्रकाश को वायुमंडल में लंबा रास्ता तय करना पड़ता है, जिससे सूर्य लालिमा लिए दिख सकता है।
- निकट दृष्टिदोष में कौन सा लेंस?
उत्तर
उचित क्षमता का अवतल लेंस। - इस अध्याय का एक महत्त्वपूर्ण वैज्ञानिक शब्द लिखकर अर्थ बताएँ।
संकेत उत्तर
ऊपर दिए पाठ से किसी एक प्रमुख शब्द की सही परिभाषा लिखें; जैसे अध्याय शीर्षक की अवधारणा। - अध्याय के चित्र/समीकरण/सूत्र से एक निष्कर्ष बताएँ।
संकेत उत्तर
चित्र या सूत्र का एक सत्यापित वैज्ञानिक संबंध लिखें; केवल नाम लिखना पर्याप्त नहीं।
एक आम गलती: केवल परिभाषा याद करना और उसके प्रयोग, चित्र, इकाई या शर्त को छोड़ देना।
11. विद्युत (7 अंक)
विद्युत धारा और विभवांतर
किसी चालक के अनुप्रस्थ काट से प्रति इकाई समय में प्रवाहित आवेश की मात्रा विद्युत धारा है। धारा का SI मात्रक ऐम्पियर (A) है। विद्युत विभवांतर प्रति इकाई आवेश किया गया कार्य है; इसका मात्रक वोल्ट (V) है। परिपथ में ऐमीटर श्रेणीक्रम में और वोल्टमीटर संबंधित अवयव के समानांतर जोड़ा जाता है। परंपरागत धारा की दिशा धनात्मक से ऋणात्मक मानी जाती है, जबकि धातु में इलेक्ट्रॉनों की गति विपरीत होती है।
ओम का नियम
नियत ताप जैसी भौतिक परिस्थितियों में अनेक धात्विक चालकों के लिए विभवांतर V और धारा I का अनुपात स्थिर होता है। यही प्रतिरोध R है। V–I ग्राफ सीधी रेखा होता है, यदि चालक ओम के नियम का पालन करे। हर अवयव, जैसे डायोड या ताप बदलता बल्ब, सभी स्थितियों में ओमीय नहीं होता। प्रतिरोध का मात्रक ओम (Ω) है।
प्रतिरोध को प्रभावित करने वाले कारक
एकसमान तार का प्रतिरोध उसकी लंबाई के समानुपाती तथा अनुप्रस्थ क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती होता है। पदार्थ की प्रकृति और तापमान भी महत्त्वपूर्ण हैं। प्रतिरोधकता पदार्थ का गुण है; इसका SI मात्रक Ω m है। मोटा तार समान पदार्थ और लंबाई वाले पतले तार से कम प्रतिरोध रखता है।
श्रेणीक्रम एवं समानांतर संयोजन
श्रेणीक्रम में सभी प्रतिरोधों से समान धारा गुजरती है और कुल प्रतिरोध जुड़ता है। समानांतर संयोजन में प्रत्येक शाखा पर विभवांतर समान होता है; कुल धारा शाखाओं में विभाजित होती है। घरों में उपकरण समानांतर जोड़े जाते हैं ताकि उन्हें लगभग समान आपूर्ति विभवांतर मिले और स्वतंत्र रूप से चलाया जा सके।
ऊष्मीय प्रभाव और शक्ति
विद्युत धारा प्रतिरोध वाले चालक में ऊष्मा उत्पन्न कर सकती है; इसे जूल का ऊष्मीय प्रभाव कहते हैं। इलेक्ट्रिक हीटर में इसका उपयोग होता है। शक्ति ऊर्जा के उपयोग की दर है। विद्युत ऊर्जा की व्यावसायिक इकाई किलोवाट-घंटा (kWh) है, जिसे आम बोलचाल में एक यूनिट कहते हैं। उदाहरण: 1000 W का उपकरण 1 घंटे चले तो आदर्शतः 1 kWh ऊर्जा उपयोग करेगा।
हल किया उदाहरण
यदि 6 Ω प्रतिरोध के सिरों पर 12 V विभवांतर लगाया जाए, तो I = V/R = 12/6 = 2 A। उसी स्थिति में शक्ति P = VI = 12 × 2 = 24 W होगी। हर संख्यात्मक प्रश्न में ज्ञात राशियाँ, सूत्र, मान प्रतिस्थापन और सही इकाई लिखें।
विद्युत ऊर्जा की लागत — हल उदाहरण
यदि 1 kW का हीटर प्रतिदिन 2 घंटे, 30 दिन चले, तो ऊर्जा = 1 × 2 × 30 = 60 kWh = 60 यूनिट। यदि दर ₹6 प्रति यूनिट हो, तो केवल ऊर्जा शुल्क ₹360 होगा; वास्तविक बिल में अन्य शुल्क और कर अलग हो सकते हैं।
- 1 kWh कितने जूल है?
उत्तर
3.6 × 10⁶ J। - इस अध्याय का एक महत्त्वपूर्ण वैज्ञानिक शब्द लिखकर अर्थ बताएँ।
संकेत उत्तर
ऊपर दिए पाठ से किसी एक प्रमुख शब्द की सही परिभाषा लिखें; जैसे अध्याय शीर्षक की अवधारणा। - अध्याय के चित्र/समीकरण/सूत्र से एक निष्कर्ष बताएँ।
संकेत उत्तर
चित्र या सूत्र का एक सत्यापित वैज्ञानिक संबंध लिखें; केवल नाम लिखना पर्याप्त नहीं।
एक आम गलती: केवल परिभाषा याद करना और उसके प्रयोग, चित्र, इकाई या शर्त को छोड़ देना।
12. विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव (6 अंक)
धारा और चुंबकीय क्षेत्र
विद्युत धारा वहन करने वाले चालक के आसपास चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है। सीधे चालक के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ लगभग संकेंद्रित वृत्तों के रूप में होती हैं। क्षेत्र की दिशा दाहिने हाथ के अंगूठे के नियम से समझी जाती है: अंगूठा धारा की दिशा और मुड़ी उँगलियाँ चुंबकीय क्षेत्र की दिशा दर्शाती हैं। चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ बंद वक्र बनाती हैं; वे एक-दूसरे को नहीं काटतीं।
कुंडली और परिनालिका
धारावाही वृत्ताकार कुंडली के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है। अनेक पास-पास लपेटे गए फेरों से बनी लंबी कुंडली परिनालिका (solenoid) कहलाती है। इसके भीतर चुंबकीय क्षेत्र लगभग एकसमान हो सकता है। लोहे के उपयुक्त कोर वाली कुंडली से विद्युत चुंबक बनाया जा सकता है, जिसका उपयोग विद्युत घंटी और कई औद्योगिक उपकरणों में होता है।
चुंबकीय क्षेत्र में चालक पर बल
चुंबकीय क्षेत्र में रखे धारावाही चालक पर बल लग सकता है। बल की दिशा धारा तथा चुंबकीय क्षेत्र दोनों की दिशा पर निर्भर करती है। फ्लेमिंग के बाएँ हाथ के नियम में तर्जनी चुंबकीय क्षेत्र, मध्यमा धारा और अंगूठा बल या गति की दिशा बताता है। यह सिद्धांत विद्युत मोटर की कार्यविधि का आधार है।
विद्युत मोटर
सरल DC मोटर में चुंबकीय क्षेत्र के भीतर धारावाही कुंडली पर बलाघूर्ण लगता है, जिससे वह घूमती है। विभक्त वलय दिक्परिवर्तक प्रत्येक आधे चक्कर के बाद कुंडली में धारा की दिशा बदलकर घूमने की दिशा बनाए रखने में सहायता करता है। मोटर विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में बदलती है।
विद्युत चुंबकीय प्रेरण
जब किसी कुंडली से संबद्ध चुंबकीय फ्लक्स बदलता है तो उसमें प्रेरित विभवांतर उत्पन्न हो सकता है; बंद परिपथ में प्रेरित धारा बह सकती है। फ्लेमिंग के दाएँ हाथ के नियम से चालक की गति, चुंबकीय क्षेत्र और प्रेरित धारा की दिशा समझते हैं। जनित्र में यांत्रिक ऊर्जा विद्युत ऊर्जा में बदली जाती है। मोटर और जनित्र का ऊर्जा रूपांतरण विपरीत दिशा में होता है।
घरेलू विद्युत परिपथ और सुरक्षा
घरेलू विद्युत व्यवस्था में लाइव, न्यूट्रल और अर्थ तार की अलग भूमिकाएँ होती हैं। फ्यूज या उपयुक्त सर्किट ब्रेकर अधिक धारा से सुरक्षा में सहायक है। अर्थिंग उपकरण के धातु आवरण में खराबी होने पर विद्युत आघात का जोखिम घटाती है। गीले हाथों से स्विच न छुएँ और किसी घरेलू लाइव परिपथ पर प्रयोग न करें। घरेलू वायरिंग की मरम्मत प्रशिक्षित व्यक्ति से ही कराएँ।
संक्षिप्त उत्तर देखें
(1) दर्पण: 1/f = 1/v + 1/u; लेंस: 1/f = 1/v − 1/u। (2) अवतल लेंस। (3) 10 Ω। (4) मोटर: विद्युत से यांत्रिक; जनित्र: यांत्रिक से विद्युत।
AC/DC, आवृत्ति और विद्युत सुरक्षा
दिष्ट धारा (DC) की दिशा स्थिर रहती है; प्रत्यावर्ती धारा (AC) की दिशा समय के साथ बदलती है। भारत की घरेलू AC आपूर्ति की नाममात्र आवृत्ति 50 Hz है। अतिभारण में एक परिपथ से उसकी सुरक्षित क्षमता से अधिक धारा ली जाती है; लघुपथन में भिन्न विभव वाले चालकों के अनपेक्षित सीधे संपर्क से बहुत अधिक धारा बह सकती है। फ्यूज/MCB सुरक्षा देते हैं।
- भारत में AC की नाममात्र आवृत्ति?
उत्तर
50 Hz। - इस अध्याय का एक महत्त्वपूर्ण वैज्ञानिक शब्द लिखकर अर्थ बताएँ।
संकेत उत्तर
ऊपर दिए पाठ से किसी एक प्रमुख शब्द की सही परिभाषा लिखें; जैसे अध्याय शीर्षक की अवधारणा। - अध्याय के चित्र/समीकरण/सूत्र से एक निष्कर्ष बताएँ।
संकेत उत्तर
चित्र या सूत्र का एक सत्यापित वैज्ञानिक संबंध लिखें; केवल नाम लिखना पर्याप्त नहीं।
एक आम गलती: केवल परिभाषा याद करना और उसके प्रयोग, चित्र, इकाई या शर्त को छोड़ देना।
13. हमारा पर्यावरण (5 अंक)
पर्यावरण हमारे आसपास के जैविक तथा अजैविक घटकों का समुच्चय है। पौधे, जंतु, जीवाणु और कवक जैविक घटक हैं; जबकि वायु, जल, प्रकाश, तापमान और मिट्टी अजैविक घटक हैं। किसी क्षेत्र के जीव और उसके भौतिक वातावरण के बीच पारस्परिक संबंधों से पारितंत्र (ecosystem) बनता है। तालाब, जंगल, घास का मैदान प्राकृतिक पारितंत्र हैं; बगीचा और खेत मानव-प्रबंधित पारितंत्र के उदाहरण हैं।
उत्पादक, उपभोक्ता और अपघटक
हरे पौधे तथा कुछ शैवाल प्रकाश-संश्लेषण द्वारा भोजन बनाते हैं, इसलिए इन्हें उत्पादक कहते हैं। जो जीव सीधे या परोक्ष रूप से उत्पादकों पर निर्भर हैं, वे उपभोक्ता हैं। घास खाने वाला हिरण प्राथमिक उपभोक्ता, हिरण को खाने वाला बाघ द्वितीयक उपभोक्ता हो सकता है। मृत जीवों तथा जैविक अवशेषों को विघटित करने वाले जीवाणु और कवक अपघटक हैं। वे पोषक तत्त्वों को फिर मिट्टी एवं पर्यावरण में लौटाते हैं। इनके बिना मृत अवशेष जमा होते जाएँगे और पोषक चक्र बाधित होगा।
खाद्य शृंखला और खाद्य जाल
खाद्य शृंखला जीवों के बीच भोजन और ऊर्जा के स्थानांतरण का क्रम है; उदाहरण: घास → टिड्डा → मेंढक → साँप → बाज। प्रत्येक स्थान को पोषी स्तर कहते हैं। कई खाद्य शृंखलाएँ आपस में जुड़कर खाद्य जाल बनाती हैं। एक जीव अनेक प्रकार का भोजन कर सकता है, इसलिए वास्तविक पारितंत्र में खाद्य जाल अधिक यथार्थ चित्र प्रस्तुत करता है।
ऊर्जा प्रवाह और दस प्रतिशत का नियम
सूर्य अधिकांश पारितंत्रों के लिए ऊर्जा का प्राथमिक स्रोत है। पौधे सौर ऊर्जा का एक भाग रासायनिक ऊर्जा में बदलते हैं। एक पोषी स्तर से अगले पोषी स्तर तक औसतन लगभग 10% ऊर्जा स्थानांतरित होने का नियम पाठ्यपुस्तक में एक उपयोगी सामान्य मॉडल के रूप में दिया जाता है; वास्तविक पारितंत्र में अनुपात बदल सकता है। उदाहरण के लिए, उत्पादकों में 10,000 J ऊर्जा हो तो सरलीकृत मॉडल में प्राथमिक उपभोक्ता को लगभग 1,000 J, द्वितीयक को 100 J और तृतीयक को 10 J प्राप्त होंगे। शेष ऊर्जा जीवन-क्रियाओं, ऊष्मा और अन्य प्रक्रियाओं में खर्च होती है। इसी कारण सामान्यतः खाद्य शृंखलाएँ बहुत लंबी नहीं होतीं। ऊर्जा का प्रवाह एकदिशीय होता है, जबकि पोषक तत्त्वों का पुनर्चक्रण संभव है।
जैव आवर्धन और अपशिष्ट
कुछ अविघटनीय रसायन जीवों के शरीर में जमा हो सकते हैं। खाद्य शृंखला के ऊँचे पोषी स्तरों पर ऐसे पदार्थों की सांद्रता बढ़ने को जैव आवर्धन (biomagnification) कहते हैं। कुछ स्थायी कीटनाशक इसके उदाहरण हैं। इसलिए रसायनों का अनियंत्रित उपयोग पारितंत्र और मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।
जैव निम्नीकरणीय पदार्थ जैसे फल के छिलके और कागज उपयुक्त परिस्थितियों में सूक्ष्मजीवों द्वारा विघटित हो सकते हैं। कई प्लास्टिक और कुछ कृत्रिम रसायन बहुत धीरे टूटते हैं या सामान्य परिस्थितियों में जैविक रूप से नहीं टूटते। केवल ‘प्राकृतिक’ या ‘कृत्रिम’ होना किसी पदार्थ की पर्यावरणीय सुरक्षा का पूर्ण मापदंड नहीं है। कचरे को स्रोत पर अलग करना, पुनः उपयोग और वैज्ञानिक निपटान महत्त्वपूर्ण हैं।
ओजोन परत और उसका संरक्षण
समतापमंडल की ओजोन (O₃) परत सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी (UV) किरणों के बड़े भाग को अवशोषित करती है। कुछ क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFC) जैसे पदार्थ ओजोन के क्षरण में योगदान देते हैं। ओजोन क्षरण और वैश्विक तापवृद्धि अलग वैज्ञानिक समस्याएँ हैं, यद्यपि कुछ पदार्थ दोनों को प्रभावित कर सकते हैं। मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल ओजोन-क्षयकारी पदार्थों को नियंत्रित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समझौता है।
उत्तर देखें
(1) मृत पदार्थों का विघटन और पोषक तत्त्वों का पुनर्चक्रण। (2) शृंखला एक क्रम; जाल कई जुड़ी शृंखलाएँ। (3) लगभग 100 J। (4) स्थायी अविघटनीय प्रदूषकों का खाद्य स्तरों में संचय। (5) हानिकारक UV विकिरण का बड़ा भाग अवशोषित करती है।
- अपघटक कहाँ कार्य करते हैं?
उत्तर
सभी पोषी स्तरों के मृत अवशेषों और अपशिष्ट पर। - इस अध्याय का एक महत्त्वपूर्ण वैज्ञानिक शब्द लिखकर अर्थ बताएँ।
संकेत उत्तर
ऊपर दिए पाठ से किसी एक प्रमुख शब्द की सही परिभाषा लिखें; जैसे अध्याय शीर्षक की अवधारणा। - अध्याय के चित्र/समीकरण/सूत्र से एक निष्कर्ष बताएँ।
संकेत उत्तर
चित्र या सूत्र का एक सत्यापित वैज्ञानिक संबंध लिखें; केवल नाम लिखना पर्याप्त नहीं।
एक आम गलती: केवल परिभाषा याद करना और उसके प्रयोग, चित्र, इकाई या शर्त को छोड़ देना।
सभी 13 अध्याय: एक नजर में पुनरावृत्ति
| अध्याय | सबसे जरूरी अवधारणा | अंक |
|---|---|---|
| 1. रासायनिक अभिक्रियाएँ | समीकरण, अभिक्रिया के प्रकार, ऑक्सीकरण | 6 |
| 2. अम्ल, क्षारक एवं लवण | pH, उदासीनीकरण, सामान्य लवण | 7 |
| 3. धातु एवं अधातु | सक्रियता श्रेणी, आयनिक बंध, संक्षारण | 5 |
| 4. कार्बन के यौगिक | सहसंयोजक बंध, समजातीय श्रेणी, साबुन | 7 |
| 5. जैव प्रक्रम | पोषण, श्वसन, परिवहन, उत्सर्जन | 8 |
| 6. नियंत्रण एवं समन्वय | न्यूरॉन, प्रतिवर्ती क्रिया, हार्मोन | 6 |
| 7. जनन | अलैंगिक/लैंगिक जनन, पुष्प, मानव जनन | 7 |
| 8. आनुवंशिकता | जीन, प्रभावी-अप्रभावी लक्षण, मेंडल | 4 |
| 9. प्रकाश | परावर्तन, अपवर्तन, दर्पण/लेंस | 8 |
| 10. मानव नेत्र | दृष्टि दोष, विक्षेपण, प्रकीर्णन | 4 |
| 11. विद्युत | ओम नियम, प्रतिरोध, शक्ति | 7 |
| 12. चुंबकीय प्रभाव | चुंबकीय क्षेत्र, मोटर, जनित्र | 6 |
| 13. हमारा पर्यावरण | खाद्य शृंखला, ऊर्जा प्रवाह, ओजोन | 5 |
| कुल | 80 |
त्वरित सूत्र-संग्रह
प्रकाश: दर्पण: 1/f = 1/v + 1/u; दर्पण आवर्धन: m = −v/u; लेंस: 1/f = 1/v − 1/u; लेंस आवर्धन: m = v/u; लेंस की शक्ति P = 1/f (f मीटर में, P डायोप्टर में)। सभी गणनाओं में निर्धारित कार्तीय चिह्न परिपाटी लागू करें।
विद्युत: I = Q/t; V = W/Q; V = IR; R = ρl/A; श्रेणीक्रम में R = R₁ + R₂ + …; समानांतर में 1/R = 1/R₁ + 1/R₂ + …; P = VI = I²R = V²/R; विद्युत ऊर्जा E = Pt। 1 kWh = 3.6 × 10⁶ J।
रसायन: अभिक्रिया का समीकरण परमाणुओं की संख्या के अनुसार संतुलित करें; pH का संबंध H⁺ आयनों की सांद्रता से है—pH में 1 इकाई अंतर का अर्थ H⁺ सांद्रता में 10 गुना अंतर (आदर्श जलीय संदर्भ में)।
जीव विज्ञान: एकसंकर संकरण के सरल मेंडलीय उदाहरण में F₂ पीढ़ी का प्ररूप अनुपात 3:1 तथा जीनप्ररूप अनुपात 1:2:1 हो सकता है; यह सभी वास्तविक आनुवंशिक लक्षणों का सार्वभौमिक अनुपात नहीं है।
अंतिम सप्ताह की विज्ञान पुनरावृत्ति
दिन 1–2: रसायन के चारों अध्यायों के समीकरण, pH और कार्बन यौगिक। दिन 3–4: जीव विज्ञान के नामांकित चित्र, प्रक्रियाएँ और मेंडल के प्रश्न। दिन 5: प्रकाश के किरण आरेख तथा विद्युत के संख्यात्मक प्रश्न। दिन 6: चुंबकीय प्रभाव, मानव नेत्र और पर्यावरण। दिन 7: समयबद्ध मॉडल पेपर, गलतियों की सूची और कमजोर अवधारणाओं का दोहराव। यह केवल एक सुझाव है; विद्यालय के निर्धारित पाठ्यक्रम और व्यक्तिगत तैयारी के अनुसार बदलें।
स्रोत और उपयोग संबंधी सूचना
मुख्य पाठ्यक्रम संदर्भ: माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, राजस्थान — कक्षा 10 पाठ्यक्रम 2026–27 (PDF)। अवधारणाओं का स्वतंत्र संक्षेपण कक्षा 10 की विज्ञान पाठ्यपुस्तक के स्तर के अनुरूप किया गया है। चित्र 13.1 और 13.2 इसी लेख के लिए तैयार मौलिक SVG योजनाचित्र हैं।
संपादन: NCERTClasses टीम। परीक्षा से पहले बोर्ड की नवीनतम अधिसूचना और विद्यालय के निर्देश अवश्य देखें।

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