RBSE Class 12 Hindi Chapter 8 Tulsidas: Kavitavali & Laxman Murcha | Complete Guide

📅 Saturday, 10 January 2026 📖 3-5 min read
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पाठ-8: तुलसीदास (संपूर्ण महाकाव्य विश्लेषण)

भाग 1: कवितावली (कलयुग वर्णन) | भाग 2: लक्ष्मण मूर्छा और राम का विलाप

गोस्वामी तुलसीदास (1532-1623)
🏹
युगभक्तिकाल (रामभक्ति शाखा)
भाषाअवधी (रामचरितमानस) + ब्रज (कवितावली)
महत्वलोकनायक (समन्वयवादी)
RBSE अंक6 अंक (सप्रसंग व्याख्या)

यह पाठ हिंदी साहित्य का 'माउंट एवरेस्ट' है। इसमें हमें तुलसीदास के दो रूप देखने को मिलते हैं:
1. कवितावली में: एक समाजशास्त्री (Sociologist) जो गरीबी और भूख का आँखों देखा हाल बताता है।
2. रामचरितमानस में: एक मानव हृदय (Human Heart) जो भाई के वियोग में तड़प रहा है।

PART 1: कवितावली (उत्तर कांड) - कलयुग का सत्य

यहाँ तुलसीदास ने मुगलकालीन भारत की भयानक गरीबी का वर्णन किया है। यह वर्णन आज के 'बेरोजगारी' के दौर जैसा ही लगता है।

सवैया 1: पेट की आग (The Fire of Hunger)
"किसबी, किसान-कुल, बनिक, भिखारी, भाट...
आग बड़वागिते बड़ी है आगि पेट की।"

गहन विश्लेषण (Deep Analysis):

तुलसीदास कहते हैं कि समाज का हर वर्ग - मजदूर (किसबी), किसान, व्यापारी (बनिक), भिखारी और चारण (भाट) - सब परेशान हैं। किसी के पास काम नहीं है। लोग इतने भूख से बेहाल हैं कि वे अपने "बेटा-बेटी" तक को बेचने को तैयार हैं।

🔥 मुहावरा डिकोड: "आग बड़वागिते बड़ी है आगि पेट की"
बड़वानल: समुद्र में लगने वाली आग (Forest Fire of Ocean)।
पेट की आग: भूख (Hunger)।
तुलसी कहते हैं कि पेट की आग समुद्र की आग से भी ज्यादा खतरनाक है क्योंकि यह इंसान से नैतिकता (Morality) छीन लेती है। इसे केवल 'राम रूपी घनश्याम' (बादल) ही बुझा सकते हैं।
सवैया 2: बेकारी का आलम (Unemployment)
"खेती न किसान को, भिखारी को न भीख, बलि..."

अकाल ऐसा है कि किसान के पास खेती नहीं है, भिखारी को भीख नहीं मिल रही। लोग एक-दूसरे से पूछते हैं - "का करिये, कित जाइये?" (क्या करें, कहाँ जाएं?)। यह पंक्ति उस समय की 'मंदी' (Recession) का सबसे बड़ा प्रमाण है।

PART 2: लक्ष्मण मूर्छा और राम का विलाप (Human Grief)

यहाँ राम 'भगवान' नहीं, बल्कि एक 'असहाय भाई' हैं। इसे हम "Ramayana Storyboard" की तरह देखेंगे।

[SCENE 1: युद्ध का मैदान | रात का सन्नाटा | राम, लक्ष्मण का सिर गोद में रखकर बैठे हैं] राम (रोते हुए):
"जथा पंख बिनु खग अति दीना,
मनि बिनु फनि, करिबर कर हीना।
अस मम जीवन बंधु बिनु तोही,
जौं जड़ दैव जिआवै मोही।"

अर्थ: हे भाई! जैसे पंख के बिना पक्षी (खग), मणि के बिना सांप (फनि) और सूंड के बिना हाथी (करिबर) दीन-हीन हो जाते हैं, वैसे ही तुम्हारे बिना मेरा जीवन व्यर्थ है।

विशेष (Imp): यहाँ राम का 'नर-लीला' (Human Play) रूप दिख रहा है। वे कहते हैं कि मैं अयोध्या जाकर माँ सुमित्रा को क्या जवाब दूंगा? लोग कहेंगे कि 'पत्नी के लिए भाई को गँवा दिया' (नारि हेतु प्रिय भाई गँवाई)।

[SCENE 2: हनुमान का आगमन | संजीवनी बूटी के साथ]
"हरषि राम भेटेउ हनुमाना,
अति कृतग्य प्रभु परम सुजाना।"

जैसे ही हनुमान आते हैं, शोक का माहौल बदल जाता है। कवि कहते हैं- "करुन महँ बीर रस" (करुण रस के बीच में अचानक वीर रस आ गया)। वैद्य ने इलाज किया और लक्ष्मण उठ बैठे।

PART 3: कुंभकरण की जागृति (The Villain Wakes)

उधर रावण को जब पता चला, तो उसने कुंभकरण को जगाया। कुंभकरण का जागना ऐसा था जैसे "कालु देह धरि" (साक्षात मृत्यु ने शरीर धारण कर लिया हो)।

रावण अपनी व्यथा सुनाता है, लेकिन कुंभकरण (जो राक्षस होते हुए भी ज्ञानी है) उसे डांटता है: "जगदंबा हरि आनि अब, सठ चाहत कल्यान?" (हे मूर्ख! जगत जननी सीता का अपहरण करके अब तू कल्याण चाहता है?)

🎯 बोर्ड परीक्षा प्रश्न (Question Bank)

Q1. "पेट की आग" का शमन कौन कर सकता है?
Ans: तुलसीदास के अनुसार, पेट की आग (भूख) को केवल 'राम रूपी घनश्याम' (कृपा रूपी बादल) ही बुझा सकते हैं। यहाँ राम भक्ति और रोजगार देने वाली सत्ता के प्रतीक हैं।

Q2. 'अर्द्ध राति गइ कपि नहिं आयउ' - इसमें राम की किस मनोदशा का चित्रण है?
Ans: इसमें राम की 'व्याकुलता' और 'अधीरता' (Restlessness) का चित्रण है। वे ईश्वर होते हुए भी एक सामान्य इंसान की तरह समय बीतने पर घबरा रहे हैं।

Q3. 'भ्रातृशोक में हुई राम की दशा' की तुलना किससे की गई है?
Ans: पंख विहीन पक्षी, मणि विहीन सर्प और सूंड विहीन हाथी से।

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