यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय: 20 प्रश्नोत्तर | Class 10 History

📅 Friday, 18 September 2026 📖 पढ़ रहे हैं...

शाला सरल™ · कक्षा 10 · इतिहास · अध्याय 1 · प्रश्नोत्तर विशेष

यूरोप में राष्ट्रवाद: 20 प्रश्नोत्तर
Class 10 History · Questions, Model Answers & Writing Practice

यूरोप में राष्ट्रवाद के प्रश्नों में केवल तिथियाँ और नाम याद रखना पर्याप्त नहीं है। “कैसे”, “क्यों” और “तुलना कीजिए” जैसे प्रश्न यह जाँचते हैं कि आप ऐतिहासिक घटनाओं के बीच संबंध समझते हैं या नहीं। इस विस्तृत अभ्यास लेख में 20 प्रश्न, मॉडल उत्तर, अभ्यास अनुच्छेद और गलत कथन सुधारने के उदाहरण दिए गए हैं। हर उत्तर को कारण → प्रक्रिया → परिणाम के संबंध से तैयार करें।

पहले अपना उत्तर लिखें और फिर मॉडल उत्तर से मिलाएँ। जिस विचार में कठिनाई हो, उसकी विषयवार व्याख्या, तुलना-तालिका और समयरेखा इसी लेख में आगे मिल जाएगी। प्रत्येक प्रश्न का वीडियो लिंक आपको सीधे उसकी व्याख्या तक पहुँचाता है।

अध्याय की शुरुआत करने वाले विद्यार्थी पहले यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय: मूल अध्याय पाठ, नोट्स और वीडियो पढ़ सकते हैं। यह प्रश्नोत्तर लेख उसके बाद उत्तर लिखने के अभ्यास के लिए है।

प्रस्तुति: शाला सरल™ / NCERTClasses · सामग्री एवं लिंक समीक्षा:

इस सामग्री से कैसे पढ़ें?

  1. प्रश्न चुनकर पहले अपना उत्तर लिखें।
  2. मॉडल उत्तर खोलें और छूटे हुए तथ्य व कारण पहचानें।
  3. प्रश्नोत्तर वीडियो में उसी प्रश्न का समय खोलकर व्याख्या सुनें।
  4. जरूरत के अनुसार नीचे के विषयवार नोट्स और समयरेखा से पुनरावृत्ति करें।

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प्रश्नोत्तर वीडियो और अध्याय की पृष्ठभूमि

दोनों वीडियो शाला सरल YouTube चैनल पर हैं। यहाँ पहले 20 प्रश्नों की अभ्यास कक्षा और उसके बाद अध्याय समझने वाला पाठ दिया गया है।

1. 20 प्रश्न और मॉडल उत्तर · 61:18

लघु उत्तर, विस्तृत उत्तर, तुलना और गलत कथन सुधारने का अभ्यास।

YouTube पर वीडियो देखें · अवधि 61:18

2. अध्याय की व्याख्या · 31:20

फ्रांसीसी क्रांति से बाल्कन तक विषयवार समझ।

YouTube पर वीडियो देखें · अवधि 31:20

यूरोप में राष्ट्रवाद: 20 प्रश्न और मॉडल उत्तर

पहले प्रश्न का उत्तर अपनी कॉपी में लिखिए, फिर मॉडल उत्तर खोलकर मुख्य बिंदु मिलाइए। प्रत्येक प्रश्न के नीचे दिया गया वीडियो लिंक उसी प्रश्न की व्याख्या शुरू करता है। ये अध्ययन-अभ्यास के लिए तैयार प्रश्न हैं; इन्हें आधिकारिक पिछले वर्षों के प्रश्न (PYQ) न मानें।

प्रश्न 1. राज्य और राष्ट्र में क्या अंतर है? दोनों का एक-एक मुख्य आधार बताइए।

मॉडल उत्तर देखें
  1. राज्य निश्चित भूभाग पर सर्वोच्च राजनीतिक अधिकार और शासन की व्यवस्था है।
  2. राष्ट्र उन लोगों का समुदाय है जिनमें साझा पहचान, इतिहास और साथ रहने की इच्छा विकसित होती है।
  3. एक शासन के अधीन रहने भर से लोगों में राष्ट्रीय पहचान अपने आप नहीं बनती।

वीडियो में समझें · 02:20

प्रश्न 2. 1789 की फ्रांसीसी क्रांति ने संप्रभुता के विचार में क्या परिवर्तन किया?

मॉडल उत्तर देखें
  1. संप्रभुता शासन का सर्वोच्च निर्णय अधिकार है।
  2. फ्रांसीसी क्रांति ने संप्रभुता राजा से फ्रांसीसी नागरिक समुदाय की ओर स्थानांतरित करने का विचार स्थापित किया।
  3. राष्ट्र का भविष्य नागरिक तय करेंगे, पर शुरुआती राजनीतिक अधिकार सभी को समान रूप से नहीं मिले।

वीडियो में समझें · 03:31

प्रश्न 3. 1804 की नेपोलियन संहिता के तीन प्रमुख सुधार बताइए।

मॉडल उत्तर देखें
  1. नेपोलियन की 1804 की नागरिक संहिता ने जन्म पर आधारित विशेषाधिकार समाप्त किए।
  2. इसने कानून के समक्ष समानता का सिद्धांत स्थापित किया।
  3. इसने संपत्ति के अधिकार को सुरक्षित किया; इससे सार्वभौमिक राजनीतिक समानता स्थापित नहीं हुई।

वीडियो में समझें · 04:45

प्रश्न 4. वियना कांग्रेस कब हुई, उसकी मेजबानी किसने की और उसका मुख्य उद्देश्य क्या था?

मॉडल उत्तर देखें
  1. वियना कांग्रेस 1815 में हुई और ऑस्ट्रिया के चांसलर मेटरनिख ने इसकी मेजबानी की।
  2. इसका उद्देश्य राजवंशीय सत्ता बहाल करके यूरोप में नई रूढ़िवादी व्यवस्था बनाना था।
  3. फ्रांस में बूर्बों राजवंश बहाल हुआ और भविष्य में फ्रांसीसी विस्तार रोकने के लिए उसके पड़ोसी राज्यों को मजबूत किया गया।

वीडियो में समझें · 05:56

प्रश्न 5. ज़ोलवेराइन क्या था, यह कब बना और जर्मन एकीकरण में इसका क्या योगदान था?

मॉडल उत्तर देखें
  1. ज़ोलवेराइन 1834 में प्रशा की पहल पर बना सीमा शुल्क संघ था।
  2. इसने सदस्य राज्यों के बीच शुल्क बाधाएँ हटाईं और पाठ्यपुस्तक के अनुसार मुद्राएँ तीस से अधिक से घटाकर दो कीं।
  3. इसने साझा आर्थिक हितों को बढ़ाकर बाद के राजनीतिक एकीकरण की जमीन मजबूत की; जर्मन साम्राज्य की घोषणा 1871 में हुई।

वीडियो में समझें · 07:08

प्रश्न 6. 18 जनवरी 1871 को जर्मन सम्राट किसे घोषित किया गया और बिस्मार्क की भूमिका क्या थी?

मॉडल उत्तर देखें
  1. 18 जनवरी 1871 को वर्साय में प्रशा के राजा विलियम प्रथम जर्मन सम्राट घोषित हुए।
  2. प्रशा के प्रमुख मंत्री बिस्मार्क ने सेना और नौकरशाही की सहायता से एकीकरण का नेतृत्व किया।
  3. बिस्मार्क सम्राट नहीं थे; नेतृत्व करने वाले मंत्री और सम्राट की भूमिकाएँ अलग थीं।

वीडियो में समझें · 08:25

प्रश्न 7. इटली के एकीकरण में मेत्सिनी, कावूर, गैरीबाल्डी और विक्टर इमैनुएल द्वितीय की भूमिकाएँ बताइए।

मॉडल उत्तर देखें
  1. मेत्सिनी ने एकीकृत इतालवी गणराज्य का विचार फैलाया और यंग इटली संगठन बनाया।
  2. सार्डीनिया पीडमॉन्ट के प्रमुख मंत्री कावूर ने कूटनीति और फ्रांसीसी गठबंधन से एकीकरण को आगे बढ़ाया।
  3. गैरीबाल्डी ने स्वयंसेवकों के साथ दक्षिणी इटली में अभियान चलाया।
  4. विक्टर इमैनुएल द्वितीय को 1861 में एकीकृत इटली का राजा घोषित किया गया।

वीडियो में समझें · 09:35

प्रश्न 8. मारीआन और जर्मनिया किसका प्रतिनिधित्व करती थीं? उनके चित्रण का एक-एक प्रतीक समझाइए।

मॉडल उत्तर देखें
  1. मारीआन फ्रांसीसी राष्ट्र और गणराज्य का स्त्री रूपक थी; लाल टोपी स्वतंत्रता का प्रतीक थी।
  2. जर्मनिया जर्मन राष्ट्र का स्त्री रूपक थी; ओक पत्तों का मुकुट वीरता का प्रतीक था।
  3. इन काल्पनिक स्त्री आकृतियों ने राष्ट्र जैसे अमूर्त विचार को पहचानने योग्य रूप दिया।

वीडियो में समझें · 10:54

प्रश्न 9. फ्रांसीसी क्रांतिकारियों ने सामूहिक राष्ट्रीय पहचान बनाने के लिए कौन-से उपाय किए? पाँच उपाय उनके प्रभाव सहित समझाइए।

मॉडल उत्तर देखें
  1. पितृभूमि और नागरिक की अवधारणाओं ने संविधान के अंतर्गत समान अधिकार वाले समुदाय का आदर्श प्रस्तुत किया।
  2. राजकीय ध्वज की जगह तिरंगा, देशभक्ति के गीत, शपथ और शहीदों की स्मृति ने लोगों को साझा प्रतीकों तथा अनुभवों से जोड़ा।
  3. सक्रिय नागरिकों द्वारा चुनी गई एस्टेट्स जनरल का नाम राष्ट्रीय सभा रखने से राष्ट्र के प्रतिनिधित्व पर बल मिला।
  4. केंद्रीकृत प्रशासन, समान कानून, आंतरिक शुल्कों की समाप्ति तथा समान माप-तौल ने साझा प्रशासनिक और आर्थिक क्षेत्र को मजबूत किया।
  5. पेरिस की फ्रांसीसी भाषा को साझा राष्ट्रीय भाषा के रूप में बढ़ावा दिया गया और क्षेत्रीय बोलियों को हतोत्साहित किया गया।

वीडियो में समझें · 12:10

प्रश्न 10. उन्नीसवीं सदी के शुरुआती यूरोपीय उदारवाद में स्वतंत्रता और समानता के विचार होने पर भी राजनीतिक अधिकार सीमित क्यों थे? फ्रांस के उदाहरण से समझाइए।

मॉडल उत्तर देखें
  1. उदारवादी व्यक्तिगत स्वतंत्रता, कानून के सामने समानता, संविधान और प्रतिनिधि शासन का समर्थन करते थे।
  2. संपत्ति की सुरक्षा पर बल देने वाले प्रभावशाली मध्यवर्गीय उदारवाद में राजनीतिक भागीदारी सभी के लिए समान नहीं थी।
  3. क्रांतिकारी फ्रांस की शुरुआती व्यवस्था में संपत्तिवान पुरुषों को मतदान और निर्वाचित होने का अधिकार मिला; संपत्तिहीन पुरुष तथा महिलाएँ बाहर रहे।
  4. जैकोबिन शासन के संक्षिप्त दौर में सभी वयस्क पुरुषों को मताधिकार मिला, लेकिन महिलाओं को नहीं; बाद में फिर सीमाएँ लगीं।
  5. बाज़ार की स्वतंत्रता और कानूनी समानता को सार्वभौमिक मताधिकार के समान नहीं समझना चाहिए। समान राजनीतिक अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रहे।

वीडियो में समझें · 15:24

प्रश्न 11. नेपोलियन के सुधारों का कई क्षेत्रों में स्वागत क्यों हुआ, और बाद में फ्रांसीसी शासन के विरुद्ध विरोध क्यों बढ़ा? दोनों पक्षों को अलग करके समझाइए।

मॉडल उत्तर देखें
  1. नागरिक संहिता ने जन्म आधारित विशेषाधिकार हटाए, कानून के सामने समानता स्थापित की और संपत्ति के अधिकार को सुरक्षित किया।
  2. नियंत्रित क्षेत्रों में प्रशासनिक सरलता, सामंती बंधनों तथा कृषिदासता से राहत, और नगरों में कारीगर संघों की पाबंदियाँ हटने से विभिन्न समूहों को लाभ मिला।
  3. यातायात और संचार के सुधारों तथा एकरूप व्यवस्था ने व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को सुविधा दी।
  4. इन प्रशासनिक लाभों के साथ राजनीतिक स्वतंत्रता नहीं आई; अधिक कर, सेंसरशिप और जबरन सैन्य भर्ती से असंतोष बढ़ा।
  5. स्थानीय प्रतिक्रियाएँ मिली-जुली थीं और कई स्थानों पर आरंभिक स्वागत बाद में विरोध में बदला।

वीडियो में समझें · 18:38

प्रश्न 12. भाषा, लोकपरंपरा और संगीत ने यूरोप में राष्ट्रीय भावना को कैसे बढ़ाया? पोलैंड के सांस्कृतिक प्रतिरोध को विशेष रूप से समझाइए।

मॉडल उत्तर देखें
  1. रोमानी कलाकारों और विचारकों ने साझा सांस्कृतिक अतीत, लोककथाओं, लोकगीतों तथा परंपराओं से राष्ट्रीय पहचान विकसित करने का प्रयास किया।
  2. पोलैंड के स्वतंत्र राज्य के रूप में लुप्त होने के बाद भी संगीत और लोकनृत्यों ने राष्ट्रीय भावना को जीवित रखा; कारोल कुर्पिन्स्की ने संगीत में राष्ट्रीय संघर्ष व्यक्त किया।
  3. रूसी नियंत्रण वाले पोलिश क्षेत्रों में स्कूलों से पोलिश भाषा हटाकर रूसी थोपी गई।
  4. चर्च की सभाओं और धार्मिक शिक्षा में पोलिश का प्रयोग राष्ट्रीय पहचान तथा प्रतिरोध का माध्यम बना। रूसी में उपदेश देने से इनकार करने वाले पादरियों और बिशपों को कारावास या साइबेरिया निर्वासन का दंड मिला।
  5. यह उदाहरण बताता है कि भाषा और संस्कृति राजनीतिक स्वतंत्रता के अभाव में भी सामूहिक पहचान बनाए रख सकती हैं।

वीडियो में समझें · 21:42

प्रश्न 13. जर्मनी के एकीकरण की प्रक्रिया समझाइए। इसमें प्रशा, बिस्मार्क और विलियम प्रथम की भूमिकाएँ स्पष्ट कीजिए।

मॉडल उत्तर देखें
  1. जर्मन क्षेत्रों में राष्ट्रीय एकता की इच्छा विकसित हो रही थी। ज़ोलवेराइन जैसे आर्थिक सहयोग ने अनुकूल आधार बनाया, लेकिन इससे अपने आप एक राजनीतिक राज्य नहीं बना।
  2. 1848 में उदारवादी मध्यवर्ग ने निर्वाचित संसद के अंतर्गत राष्ट्रीय एकता का प्रयास किया। राजतंत्र और सेना के विरोध तथा सामाजिक समर्थन में कमी के कारण फ्रैंकफर्ट संसद का प्रयास असफल रहा।
  3. इसके बाद प्रशा ने एकीकरण का नेतृत्व किया। उसके प्रमुख मंत्री ऑटो वन बिस्मार्क ने कूटनीति, प्रशा की सेना और प्रशासन की सहायता से प्रक्रिया आगे बढ़ाई।
  4. लगभग सात वर्षों में डेनमार्क, ऑस्ट्रिया और फ्रांस के विरुद्ध हुए तीन युद्धों में प्रशा की विजय ने एकीकरण का मार्ग बनाया। इससे प्रशा की निर्णायक स्थिति मजबूत हुई।
  5. 18 जनवरी 1871 को वर्साय के महल के दर्पण कक्ष में प्रशा के राजा विलियम प्रथम जर्मन सम्राट घोषित हुए। बिस्मार्क एकीकरण के प्रमुख शिल्पकार थे, सम्राट नहीं।
  6. नए जर्मन राज्य में प्रशा का प्रभाव प्रमुख रहा। मुद्रा, बैंकिंग, कानून और न्याय व्यवस्था के आधुनिकीकरण पर बल दिया गया। एकीकरण अंततः प्रशा की राजसत्ता के नेतृत्व में हुआ।

वीडियो में समझें · 24:52

प्रश्न 14. इटली के एकीकरण की प्रक्रिया समझाइए। मेत्सिनी, कावूर, गैरीबाल्डी और विक्टर इमैनुएल द्वितीय की भूमिकाएँ अलग करते हुए प्रमुख चरण लिखिए।

मॉडल उत्तर देखें
  1. उन्नीसवीं शताब्दी के मध्य में इटली अनेक राज्यों में विभाजित था। उत्तर के कुछ क्षेत्रों में ऑस्ट्रियाई हैब्सबर्ग शासन, मध्य में पोप और दक्षिण में बूर्बों शासकों का नियंत्रण था। सार्डिनिया पीडमॉण्ट में इतालवी राजवंश का शासन था।
  2. मेत्सिनी ने संयुक्त इतालवी गणराज्य की कल्पना का प्रचार किया और यंग इटली संगठन बनाया। उनके विचारों ने राष्ट्रवादी कार्यक्रम को दिशा दी, लेकिन आरंभिक क्रांतिकारी प्रयास सफल नहीं हुए।
  3. सार्डिनिया पीडमॉण्ट के राजा विक्टर इमैनुएल द्वितीय के अंतर्गत एकीकरण आगे बढ़ा। प्रमुख मंत्री कावूर ने फ्रांस से गठबंधन किया और 1859 में ऑस्ट्रिया के विरुद्ध सफलता प्राप्त हुई।
  4. 1860 में गैरीबाल्डी और उनके स्वयंसेवकों ने दक्षिणी इटली तथा दोनों सिसिलियों के राज्य में अभियान चलाया। स्थानीय समर्थन से बूर्बों शासन हटाने और दक्षिण को एकीकरण की प्रक्रिया में जोड़ने में सहायता मिली।
  5. 1861 में विक्टर इमैनुएल द्वितीय संयुक्त इटली के राजा घोषित हुए। यह महत्त्वपूर्ण चरण था; वेनेशिया 1866 में और रोम 1870 में इटली में शामिल हुए।
  6. इटली का एकीकरण राष्ट्रवादी विचारों, कूटनीति, राजकीय सैन्य शक्ति और स्वयंसेवकों के अभियानों के संयुक्त योगदान से हुआ। परिणामी व्यवस्था राजतंत्र थी, मेत्सिनी द्वारा कल्पित गणराज्य नहीं।

वीडियो में समझें · 30:45

प्रश्न 15. बाल्कन क्षेत्र में राष्ट्रवादी तनाव क्यों बढ़े? ऑटोमन साम्राज्य के कमजोर होने, क्षेत्रीय दावों और बड़ी यूरोपीय शक्तियों की प्रतिस्पर्धा का संबंध समझाइए।

मॉडल उत्तर देखें
  1. बाल्कन दक्षिण पूर्वी यूरोप का विविध भाषाओं, संस्कृतियों और समुदायों वाला क्षेत्र था। उसके बड़े हिस्से पर ऑटोमन साम्राज्य का नियंत्रण था। सभी बाल्कन समुदायों को एक समान समूह मानना सही नहीं है।
  2. ऑटोमन नियंत्रण कमजोर होने और राष्ट्रवादी विचार फैलने से विभिन्न समुदायों ने स्वतंत्रता तथा राजनीतिक अधिकारों की माँग की। उन्होंने अपने इतिहास और सांस्कृतिक पहचान से इन दावों को आधार दिया।
  3. उभरते बाल्कन राज्यों की क्षेत्रीय आकांक्षाएँ परस्पर टकराती थीं। वे अपना क्षेत्र बढ़ाना चाहते थे, जिससे सीमाओं और प्रभाव को लेकर प्रतिस्पर्धा तथा संघर्ष बढ़े।
  4. रूस, ऑस्ट्रिया हंगरी, जर्मनी और ब्रिटेन जैसी बड़ी शक्तियाँ भी क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ाना तथा प्रतिद्वंद्वियों को रोकना चाहती थीं। उनके हस्तक्षेप ने स्थानीय संघर्षों को व्यापक शक्ति प्रतिस्पर्धा से जोड़ दिया।
  5. कमजोर साम्राज्य, स्वतंत्रता की माँगों, टकराते क्षेत्रीय दावों और बड़ी शक्तियों की प्रतिद्वंद्विता के संयुक्त प्रभाव से बाल्कन अत्यधिक तनावपूर्ण बना।
  6. आक्रामक राष्ट्रवाद और साम्राज्यवादी प्रतिस्पर्धा ने प्रथम विश्वयुद्ध की पृष्ठभूमि बनाने में योगदान दिया। युद्ध को केवल एक समुदाय, एक भावना या एक अकेले कारण का परिणाम मानना अधूरा है।

वीडियो में समझें · 36:49

प्रश्न 16. अभ्यास अनुच्छेद के आधार पर बताइए: फ्रैंकफर्ट संसद कैसा शासन बनाना चाहती थी? महिलाओं की स्थिति में कौन-सा विरोधाभास दिखाई देता है? अध्याय के ज्ञान से संसद की विफलता के दो कारण भी लिखिए।

मॉडल उत्तर देखें
  1. फ्रैंकफर्ट संसद जर्मन एकीकरण के साथ ऐसा संवैधानिक राजतंत्र चाहती थी जिसमें सम्राट संसद के अधीन हो।
  2. महिलाएँ राजनीतिक संगठन, समाचारपत्र और सार्वजनिक सभाओं में सक्रिय थीं, फिर भी विधानसभा के चुनाव में उन्हें मताधिकार नहीं मिला और संसद में वे केवल दर्शक दीर्घा तक सीमित रहीं। यह राजनीतिक सक्रियता और निर्णय के अधिकार के बीच असमानता थी।
  3. प्रशा के राजा फ्रेडरिक विलियम चतुर्थ ने संसद की शर्तों पर ताज स्वीकार नहीं किया और दूसरे राजाओं के साथ विधानसभा का विरोध किया। राजतंत्र, अभिजात वर्ग और सेना की शक्ति संसद के विरुद्ध थी।
  4. मध्यवर्गीय नेतृत्व ने श्रमिकों और कारीगरों की माँगों का विरोध किया, जिससे उसका सामाजिक समर्थन घटा। अंत में सेना के बल पर सभा भंग कर दी गई।

वीडियो में समझें · 43:07

प्रश्न 17. अभ्यास अनुच्छेद के आधार पर समझाइए: व्यापार की बाधाएँ कम होने से आर्थिक एकीकरण कैसे बढ़ता है? इससे राष्ट्रीय भावना को सहायता कैसे मिल सकती है? क्या 1834 को जर्मनी के पूर्ण राजनीतिक एकीकरण का वर्ष कहना सही है?

मॉडल उत्तर देखें
  1. सीमा शुल्क की बाधाएँ हटने और मुद्रा संबंधी जटिलताएँ घटने से वस्तुओं का आवागमन तथा व्यापार आसान हुआ। ज़ोलवेराइन ने साझा आर्थिक क्षेत्र बनाने में सहायता दी।
  2. व्यापारिक संबंध और साझा आर्थिक हित बढ़ने से अलग राज्यों के लोगों को व्यापक एकता के लाभ दिखाई दिए। रेलमार्गों के विस्तार ने इस जुड़ाव और राष्ट्रीय भावना को बल दिया।
  3. 1834 में प्रशा की पहल पर ज़ोलवेराइन बना था। यह आर्थिक संघ था; जर्मनी का राजनीतिक एकीकरण उसी वर्ष पूरा नहीं हुआ। 1871 में जर्मन साम्राज्य की घोषणा हुई।
  4. आर्थिक सहयोग ने राजनीतिक एकता के लिए अनुकूल आधार तैयार किया, पर अंतिम एकीकरण में राजनीतिक नेतृत्व, कूटनीति और युद्धों की भी भूमिका रही।

वीडियो में समझें · 46:19

प्रश्न 18. ब्रिटेन और जर्मनी के राष्ट्र निर्माण की तुलना नेतृत्व, प्रक्रिया तथा शक्ति के प्रयोग के आधार पर कीजिए। क्या दोनों प्रक्रियाओं को सभी समुदायों की समान भागीदारी वाला लोकतांत्रिक एकीकरण कहा जा सकता है?

मॉडल उत्तर देखें
  1. ब्रिटेन में इंग्लैंड की बढ़ती शक्ति और अंग्रेज संसद राष्ट्र निर्माण के केंद्र में थे। जर्मनी में 1848 के उदारवादी प्रयास की विफलता के बाद प्रशा और बिस्मार्क ने नेतृत्व किया।
  2. ब्रिटेन का निर्माण लंबी प्रक्रिया थी: 1688 में संसद का प्रभुत्व बढ़ा, 1707 में इंग्लैंड और स्कॉटलैंड का संघ हुआ और 1801 में आयरलैंड को बलपूर्वक शामिल किया गया।
  3. जर्मनी में प्रशा की सेना, नौकरशाही, कूटनीति और डेनमार्क, ऑस्ट्रिया तथा फ्रांस के विरुद्ध युद्धों की प्रमुख भूमिका रही। 1871 में विलियम प्रथम जर्मन सम्राट घोषित हुए।
  4. दोनों प्रक्रियाओं में एक शक्तिशाली राज्य का प्रभुत्व दिखाई देता है। ब्रिटेन में दमन और असमान शक्ति संबंध थे तथा जर्मन एकीकरण में राजतंत्र और सेना निर्णायक रहे; इसलिए इन्हें सभी की समान लोकतांत्रिक भागीदारी का परिणाम कहना उचित नहीं है।

वीडियो में समझें · 49:34

प्रश्न 19. जर्मन साम्राज्य की घोषणा, फ्रैंकफर्ट संसद, वियना कांग्रेस और ज़ोलवेराइन की स्थापना को सही समयक्रम में वर्ष सहित रखिए। प्रत्येक घटना का एक प्रभाव लिखिए। क्या बाद की घटना का होना पहले से तय था?

मॉडल उत्तर देखें
  1. 1815: वियना कांग्रेस ने नेपोलियन के बाद यूरोप की व्यवस्था को पुनर्गठित किया और राजतंत्रीय तथा रूढ़िवादी व्यवस्था को मजबूत करने का प्रयास किया।
  2. 1834: प्रशा की पहल पर ज़ोलवेराइन बना; व्यापारिक बाधाएँ घटने से जर्मन क्षेत्रों के आर्थिक जुड़ाव को बल मिला।
  3. 1848: फ्रैंकफर्ट संसद ने संवैधानिक राष्ट्रीय एकीकरण का प्रयास किया, लेकिन राजतंत्र और सेना के विरोध तथा घटते सामाजिक समर्थन के कारण सफल नहीं हुई।
  4. 1871: जर्मन साम्राज्य की घोषणा हुई और विलियम प्रथम सम्राट घोषित हुए; राजनीतिक एकीकरण में प्रशा का प्रभुत्व स्थापित हुआ।
  5. यह समयक्रम विभिन्न चरणों को दिखाता है। घटनाओं का बाद में होना अपने आप यह सिद्ध नहीं करता कि हर बाद की घटना पहले से निश्चित थी या केवल पिछली घटना का परिणाम थी।

वीडियो में समझें · 52:50

प्रश्न 20. अभ्यास के लिए दिए गए त्रुटिपूर्ण उत्तर की चार गलतियाँ पहचानिए और प्रत्येक के स्थान पर तथ्यात्मक रूप से सही वाक्य लिखिए। व्यक्ति की भूमिका, घटना का वर्ष, मताधिकार और नेपोलियन की नीतियों का अंतर स्पष्ट रखिए।

मॉडल उत्तर देखें
  1. 1871 में विलियम प्रथम जर्मन सम्राट घोषित हुए। बिस्मार्क प्रशा के प्रमुख मंत्री और जर्मन एकीकरण के मुख्य योजनाकार थे; वे सम्राट नहीं थे।
  2. 1834 में ज़ोलवेराइन आर्थिक संघ बना। जर्मनी का राजनीतिक एकीकरण उसी वर्ष पूरा नहीं हुआ; 1871 में जर्मन साम्राज्य की घोषणा हुई।
  3. फ्रैंकफर्ट विधानसभा के चुनाव में महिलाओं को मताधिकार नहीं मिला और संसद की कार्यवाही में वे दर्शक दीर्घा तक सीमित थीं, यद्यपि वे राजनीतिक आंदोलन में सक्रिय थीं।
  4. 1804 की नागरिक संहिता में कानून के समक्ष समानता और संपत्ति के अधिकार जैसे सुधार थे। सेंसरशिप, बढ़े कर और जबरन सैन्य भर्ती नेपोलियन के व्यापक शासन की विरोध पैदा करने वाली नीतियाँ थीं; इन्हें नागरिक संहिता द्वारा दिए गए अधिकार नहीं कहना चाहिए।

वीडियो में समझें · 55:51

राष्ट्रवाद का अर्थ: राज्य, राष्ट्र और राष्ट्र-राज्य में अंतर

यूरोप में राष्ट्रवाद को समझने का पहला प्रश्न है: लोग किसी भूभाग को अपना देश क्यों मानने लगते हैं? केवल एक राजा के अधीन रहने से साझा राष्ट्रीय पहचान नहीं बन जाती। उन्नीसवीं शताब्दी के यूरोप में अनेक लोगों की निष्ठा स्थानीय क्षेत्र, भाषा, धर्म या राजवंश से जुड़ी थी। राष्ट्रवाद ने यह विचार फैलाया कि साझा पहचान रखने वाले लोगों को अपने राजनीतिक भविष्य के निर्माण में भाग लेना चाहिए।

तीन शब्दों का अलग अर्थ
शब्द मुख्य अर्थ समझने का आधार
राज्य निर्धारित क्षेत्र में शासन, कानून और प्रशासन चलाने वाली राजनीतिक व्यवस्था। इसके भीतर अलग-अलग राष्ट्रीय पहचान वाले समुदाय रह सकते हैं।
राष्ट्र साझा इतिहास, स्मृतियों, राजनीतिक आकांक्षाओं और साथ रहने की भावना से जुड़ा समुदाय। उसका अपना स्वतंत्र राज्य होना आवश्यक नहीं।
राष्ट्र-राज्य ऐसी राज्य व्यवस्था जिसमें अधिकांश नागरिक साझा राष्ट्रीय पहचान और राजनीतिक समुदाय का अनुभव करते हैं। शासन के साथ नागरिकों की पहचान और भागीदारी का संबंध बनता है।

मोबाइल पर पूरी तालिका देखने के लिए दाएँ-बाएँ खिसकाएँ।

समझें: किसी साम्राज्य के निवासी एक ही सम्राट को कर दे सकते हैं, लेकिन उनकी भाषाएँ और राजनीतिक इच्छाएँ अलग हो सकती हैं। इसके विपरीत, अनेक छोटे राज्यों में बँटे लोग स्वयं को एक राष्ट्र का हिस्सा मान सकते हैं। जर्मन एकीकरण के प्रश्न में यही दूसरा संबंध महत्वपूर्ण है।

साझा भाषा या संस्कृति राष्ट्रीय भावना का आधार बन सकती है, पर किसी एक भाषा, धर्म या वंश को राष्ट्र बनने की अनिवार्य शर्त मानना उचित नहीं। राष्ट्रीय पहचान ऐतिहासिक घटनाओं, शिक्षा, सार्वजनिक प्रतीकों और राजनीतिक संघर्षों से विकसित होती है। यह पहले से पूर्ण रूप में मौजूद वस्तु नहीं, लोगों द्वारा बनाया और बदलता हुआ संबंध है।

अर्न्स्ट रेनां ने 1882 के अपने व्याख्यान में राष्ट्र को साझा ऐतिहासिक स्मृतियों और वर्तमान में साथ रहने की इच्छा से समझाया। इस दृष्टि से राष्ट्र केवल अतीत की विरासत नहीं है; उसके सदस्य आज भी साझा जीवन बनाए रखने की सहमति देते हैं। इसलिए राष्ट्रीय एकता को नस्ल या भाषा की एकरूपता तक सीमित करना पर्याप्त नहीं है।

संबंधित अध्ययन: यूरोप में राष्ट्रवाद के अतिरिक्त हिंदी नोट्स और प्रश्नोत्तर.

संदर्भ: [1].

फ्रेडरिक सॉर्यू का 1848 का स्वप्न: चित्र में राष्ट्रवाद

फ्रांसीसी कलाकार फ्रेडरिक सॉर्यू ने 1848 में चार चित्रों की शृंखला के माध्यम से लोकतांत्रिक और सामाजिक गणराज्यों से बने विश्व की कल्पना प्रस्तुत की। उनके प्रसिद्ध चित्र में विभिन्न देशों के लोग स्वतंत्रता की स्त्री प्रतिमा की ओर बढ़ते दिखाई देते हैं। अलग झंडे और पोशाकें उनकी राष्ट्रीय पहचान बताती हैं; एक साझा दिशा स्वतंत्रता और बंधुत्व की आकांक्षा व्यक्त करती है।

स्वतंत्रता की प्रतिमा के एक हाथ में प्रबोधन की मशाल और दूसरे में मनुष्य के अधिकारों का घोषणापत्र है। ये प्रतीक ज्ञान, विवेक और नागरिक अधिकारों को सामने रखते हैं। भूमि पर बिखरे निरंकुश सत्ता के चिह्न पुरानी दमनकारी व्यवस्था के अंत की आशा बताते हैं। धार्मिक आकृतियाँ यहाँ राष्ट्रों के बीच भाईचारे की कल्पना से जुड़ती हैं।

यह चित्र अपने समय की पूरी राजनीतिक वास्तविकता नहीं दिखाता। 1848 में जर्मन भाषी लोग एक संयुक्त जर्मन राष्ट्र-राज्य में नहीं रहते थे। उनका एक साथ दिखाई देना भविष्य की इच्छा है। इसलिए इसे आदर्शलोक की कल्पना समझना चाहिए: कलाकार ने इच्छित समाज चित्रित किया, किसी संपन्न घटना का दृश्य प्रमाण नहीं दिया।

चित्र आधारित उत्तर में तीन बातें जोड़ें: दिखाई देने वाला प्रतीक, उसका अर्थ और ऐतिहासिक संदर्भ। उदाहरण के लिए, अलग राष्ट्रीय झंडे विविध राष्ट्रों की पहचान बताते हैं, जबकि साझा जुलूस उनके बीच सहयोग का आदर्श सामने रखता है।

संदर्भ: [1].

फ्रांसीसी क्रांति और राष्ट्र का विचार

1789 की फ्रांसीसी क्रांति ने राजनीतिक सत्ता के स्रोत पर प्रश्न उठाया। पहले राजा शासन के अधिकार का केंद्र था। क्रांति ने यह विचार स्थापित किया कि संप्रभुता नागरिक समुदाय से आती है और राष्ट्र का भविष्य जनता निर्धारित करेगी। यहाँ संप्रभुता का अर्थ राजनीतिक निर्णय लेने की सर्वोच्च सत्ता है। विषय केवल राजा बदलने का नहीं था; शासन की वैधता का आधार बदल रहा था।

सामूहिक पहचान कैसे बनाई गई?

  • पितृभूमि और नागरिक: ला पात्री तथा ल सित्वायें जैसे विचारों ने लोगों को राजकीय प्रजा से अधिकार रखने वाले नागरिक समुदाय के रूप में देखने का आधार दिया।
  • राष्ट्रीय प्रतीक: राजवंशीय ध्वज के स्थान पर तिरंगा, देशभक्ति के गीत, शपथ और शहीदों का सार्वजनिक स्मरण साझा भावनाओं के माध्यम बने।
  • प्रतिनिधित्व: एस्टेट्स जनरल का राष्ट्रीय सभा के रूप में परिवर्तन राष्ट्र के नाम पर शासन करने के विचार से जुड़ा था।
  • एकीकृत प्रशासन: समान कानून, आंतरिक शुल्कों का अंत और मानकीकृत नाप-तौल ने अलग क्षेत्रों को साझा व्यवस्था में जोड़ा।
  • भाषा: पेरिस में प्रचलित फ्रांसीसी को राष्ट्र की सामान्य भाषा बनाने के प्रयास हुए और क्षेत्रीय बोलियों को हतोत्साहित किया गया।

इन उपायों में प्रतीकात्मक और व्यावहारिक परिवर्तन साथ चलते हैं। झंडा लोगों को भावनात्मक रूप से जोड़ता है, जबकि समान नाप-तौल बाजार और प्रशासन का काम आसान करती है। भाषा की एकरूपता से संचार बढ़ सकता था, लेकिन इसमें स्थानीय भाषाई विविधता पर दबाव भी निहित था।

क्रांतिकारी विचार पुस्तकों, राजनीतिक समूहों और युद्धों से अन्य क्षेत्रों तक पहुँचे। यूरोप के शिक्षित समूहों में जैकोबिन क्लब बने। फ्रांसीसी सेनाओं का विस्तार भी राष्ट्रवाद के प्रसार का माध्यम बना, हालांकि विदेशी शासन का अनुभव आगे चलकर विरोध का कारण बना। उत्तर में नागरिक संप्रभुता → साझा पहचान → संस्थागत परिवर्तन का संबंध स्पष्ट रखना उपयोगी है।

संबंधित अध्ययन: फ्रांसीसी क्रांति की पृष्ठभूमि और अभ्यास.

संदर्भ: [1].

नेपोलियन की नागरिक संहिता: सुधार और नियंत्रण

नेपोलियन की 1804 की नागरिक संहिता को नेपोलियन कोड कहा जाता है। इसने जन्म के आधार पर मिलने वाले विशेषाधिकारों को हटाने, कानून के समक्ष समानता स्थापित करने और संपत्ति के अधिकार को सुरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव किए। फ्रांसीसी नियंत्रण वाले क्षेत्रों में प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक एकरूप बनाने के प्रयास भी हुए।

नेपोलियन की नीतियों के दो अलग प्रभाव
सुधार से मिलने वाली सुविधा विरोध पैदा करने वाला अनुभव
सामंती बंधनों और जागीर संबंधी देयों से राहत। युद्धों के लिए बढ़ते कर और संसाधनों की माँग।
कानून तथा प्रशासन में एकरूपता और संपत्ति की सुरक्षा। स्थानीय लोगों की राजनीतिक स्वतंत्रता पर नियंत्रण।
शिल्प संघों के प्रतिबंध हटने और परिवहन-संचार सुधरने से आर्थिक अवसर। सेंसरशिप और फ्रांसीसी सेना में जबरन भर्ती।

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व्यापारियों के लिए एक जैसी माप और स्पष्ट नियम लेन-देन का जोखिम घटाते थे। किसानों को पुरानी देनदारियों से राहत मिल सकती थी। इसी कारण कुछ स्थानों पर फ्रांसीसी सैनिकों का स्वागत मुक्ति की आशा के साथ हुआ। लेकिन सुधारों के साथ स्वतंत्र राजनीतिक निर्णय का अधिकार नहीं मिला। जब कर, भर्ती और नियंत्रण बढ़े, तो शुरुआती समर्थन विरोध में बदल सकता था।

“नेपोलियन के शासन का मूल्यांकन कीजिए” जैसे प्रश्न में केवल उपलब्धियाँ लिखना अधूरा होगा। पहले सुधारों का प्रभाव बताएँ, फिर दमनकारी नीतियों से उत्पन्न असंतोष समझाएँ। इससे यह भी स्पष्ट होगा कि कोई शासन प्रशासन में आधुनिक हो सकता है, जबकि उसकी राजनीतिक व्यवस्था निरंकुश बनी रहे।

संदर्भ: [1].

कुलीन वर्ग, नया मध्यवर्ग और उदारवादी राष्ट्रवाद

उन्नीसवीं शताब्दी के आरंभ में यूरोप का भूमिस्वामी कुलीन वर्ग सामाजिक और राजनीतिक रूप से प्रभावशाली था। उसकी संपत्ति, प्रतिष्ठा और वैवाहिक संबंध क्षेत्रीय सीमाओं के पार फैले थे। अधिकांश जनसंख्या किसान थी, लेकिन भूमि और खेती की व्यवस्थाएँ पूरे यूरोप में एक जैसी नहीं थीं। मध्य और पूर्वी क्षेत्रों के अनेक हिस्सों में विशाल जागीरों और कृषिदासों का महत्व बना हुआ था।

औद्योगिक उत्पादन, व्यापार और नगरों के विकास से नए सामाजिक समूह उभरे। उद्योगपति, व्यापारी, पेशेवर और शिक्षित मध्यवर्ग जन्म आधारित विशेषाधिकारों की जगह योग्यता, कानून और आर्थिक अवसरों का महत्व चाहते थे। श्रमिक वर्ग भी बढ़ा, जिसकी मजदूरी और काम संबंधी समस्याएँ मध्यवर्ग की प्राथमिकताओं से भिन्न हो सकती थीं।

उदारवाद की राजनीतिक और आर्थिक माँगें

राजनीतिक क्षेत्र में उदारवाद व्यक्तिगत स्वतंत्रता, कानून के समक्ष समानता, संविधान, प्रतिनिधि संस्थाओं और सहमति पर आधारित शासन से जुड़ा था। आर्थिक क्षेत्र में उदारवादी बाजार की स्वतंत्रता और वस्तुओं तथा पूँजी की आवाजाही पर लगी बाधाएँ हटाना चाहते थे। निजी संपत्ति की सुरक्षा उनके लिए विशेष महत्व रखती थी।

इस विरोधाभास को समझना अध्याय का केंद्रीय बिंदु है: समानता की घोषणा और समान राजनीतिक भागीदारी अलग बातें थीं। महिलाओं तथा वंचित पुरुषों ने अधिकारों के विस्तार के लिए संघर्ष किया। अच्छे उत्तर में उदारवाद की उपलब्धियों के साथ उसकी तत्कालीन सामाजिक सीमाएँ भी स्पष्ट होती हैं।

संबंधित अध्ययन: औद्योगीकरण का युग: श्रम, उद्योग और समाज · औद्योगिक क्रांति का परिचय.

संदर्भ: [1].

1834 का ज़ोलवेराइन: आर्थिक एकीकरण की भूमिका

जर्मन भाषी क्षेत्र अनेक राज्यों में बँटे थे। अलग शुल्क, मुद्राएँ और नाप-तौल व्यापार में समय और लागत बढ़ाते थे। व्यापारी को केवल सामान पहुँचाने की समस्या नहीं होती थी; हर सीमा पर शुल्क तथा अलग मानकों का हिसाब भी करना पड़ता था। इसलिए साझा आर्थिक क्षेत्र की माँग राष्ट्रीय एकता की भावना से जुड़ने लगी।

1834 में प्रशा की पहल पर ज़ोलवेराइन नामक सीमा शुल्क संघ बना। अनेक जर्मन राज्य इसमें शामिल हुए। सदस्य क्षेत्रों के बीच शुल्क बाधाएँ घटाने और आर्थिक लेन-देन को सरल बनाने से सहयोग बढ़ा। NCERT के वर्णन के अनुसार मुद्राओं की संख्या तीस से अधिक से घटकर दो हुई। रेल नेटवर्क के विस्तार ने व्यापार, यात्राओं और संपर्क को आगे मजबूत किया।

समझें: एक कपड़ा व्यापारी को कई राज्यों में माल बेचने पर बार-बार शुल्क और माप बदलने पड़ें, तो साझा नियम उसके लिए सीधा आर्थिक लाभ हैं। यही लाभ उसे व्यापक जर्मन सहयोग का समर्थक बना सकता है। इस प्रकार रोजमर्रा के आर्थिक हित राष्ट्रीय भावना को व्यावहारिक आधार देते हैं।

संबंधित अध्ययन: आगे पढ़ें: भूमंडलीकृत विश्व का बनना.

संदर्भ: [1].

1815 की वियना व्यवस्था और नया रूढ़िवाद

नेपोलियन की पराजय के बाद यूरोपीय शक्तियाँ ऐसी व्यवस्था चाहती थीं जिससे राजवंशों की सत्ता स्थिर हो और फ्रांस का विस्तार रोका जा सके। ब्रिटेन, रूस, प्रशा और ऑस्ट्रिया के प्रतिनिधियों ने वियना में समझौता तैयार किया। ऑस्ट्रिया के चांसलर मेतर्निख ने सम्मेलन की मेजबानी की। इसका प्रमुख उद्देश्य राष्ट्रीय आत्मनिर्णय लागू करना नहीं, राजतंत्रीय व्यवस्था और शक्तियों के संतुलन को सुरक्षित करना था।

  • फ्रांस में बूर्बों राजवंश की पुनर्स्थापना हुई और नेपोलियन द्वारा जोड़े गए क्षेत्र वापस लिए गए।
  • फ्रांस की सीमाओं पर मजबूत व्यवस्थाएँ बनाई गईं; उत्तर में बेल्जियम सहित नीदरलैंड का राज्य बना और दक्षिण में जेनोआ को पीडमॉण्ट से जोड़ा गया।
  • प्रशा को पश्चिम में महत्वपूर्ण क्षेत्र तथा सैक्सनी का हिस्सा मिला; ऑस्ट्रिया का उत्तरी इटली पर नियंत्रण रहा।
  • रूस को पोलैंड का एक हिस्सा मिला और 39 राज्यों वाला जर्मन परिसंघ कायम रहा।

रूढ़िवाद परंपरागत संस्थाओं, राजतंत्र, सामाजिक पदक्रम और स्थापित व्यवस्था को महत्व देता था। फिर भी नया रूढ़िवाद हर आधुनिक परिवर्तन का विरोध नहीं करता था। प्रभावी नौकरशाही, आधुनिक सेना और व्यवस्थित अर्थव्यवस्था राजसत्ता मजबूत कर सकती थीं; इसलिए इन्हें अपनाना संभव था।

दूसरी ओर, निरंकुश सरकारों ने आलोचना, प्रेस और राजनीतिक गतिविधियों पर नियंत्रण लगाए। इससे उदारवादी और राष्ट्रवादी विचार समाप्त नहीं हुए; कई कार्यकर्ता भूमिगत संगठनों की ओर गए। वियना व्यवस्था को समझते समय सत्ता की स्थिरता और नागरिक स्वतंत्रता के बीच तनाव पर ध्यान दें। सीमाओं का पुनर्गठन जनसमुदायों की सभी राष्ट्रीय आकांक्षाओं को संतुष्ट नहीं करता था।

संदर्भ: [1].

क्रांतिकारी आंदोलन, 1830 और 1848 की उथल-पुथल

मेत्सिनी और राष्ट्रीय स्वतंत्रता का विचार

इतालवी क्रांतिकारी ज्युसेपे मेत्सिनी ने राष्ट्रीय एकता को स्वतंत्रता और जनभागीदारी से जोड़ा। उन्होंने 1831 में यंग इटली की स्थापना की और आगे यंग यूरोप की भी स्थापना की। उनका लक्ष्य विभाजित इटली को स्वतंत्र और एकीकृत गणराज्य बनाना था। गुप्त संगठन दमन से बचते हुए विचार फैलाने और कार्यकर्ताओं को जोड़ने का माध्यम बने। मेत्सिनी को बाद में एकीकृत इटली के राजा के रूप में प्रस्तुत करना गलत है।

1830 की क्रांतियाँ और यूनान

जुलाई 1830 में फ्रांस के विद्रोह के बाद बूर्बों शासन हटा और लुई फिलिप के नेतृत्व में संवैधानिक राजतंत्र स्थापित हुआ। ब्रसेल्स के विद्रोह से बेल्जियम का नीदरलैंड से अलगाव जुड़ा। ये उदाहरण दिखाते हैं कि वियना की व्यवस्था के विरुद्ध असंतोष सीमाओं के पार फैल रहा था।

यूनान का स्वतंत्रता संघर्ष 1821 में शुरू हुआ। यूनान ओटोमन साम्राज्य के अधीन था। प्रवासी यूनानियों, यूरोपीय सहानुभूति और प्राचीन यूनानी संस्कृति के प्रति आकर्षण ने आंदोलन को समर्थन दिया। कवियों और कलाकारों ने भी जनमत बनाया। 1832 की कुस्तुनतुनिया संधि ने यूनान की स्वतंत्रता को मान्यता दी। 1821 संघर्ष का आरंभ है; 1832 स्वतंत्रता की मान्यता से जुड़ा वर्ष है।

1848: आर्थिक संकट और राजनीतिक आकांक्षाएँ

1830 और 1840 के दशकों में जनसंख्या वृद्धि, रोजगार की कमी, शहरों में भीड़, खाद्य संकट और छोटे उत्पादकों पर प्रतिस्पर्धा का दबाव बढ़ा। कृषि संकट तथा महँगी रोटी गरीब परिवारों के लिए प्रत्यक्ष समस्या थे। राजनीतिक असंतोष इन आर्थिक अनुभवों से जुड़ गया।

1848 में फ्रांस में राजतंत्र गिरा और वयस्क पुरुषों के सार्वभौमिक मताधिकार पर आधारित गणराज्य की घोषणा हुई। अन्य क्षेत्रों में शिक्षित मध्यवर्ग संविधान तथा प्रतिनिधि सरकार चाहता था; श्रमिक और कारीगर जीविका से जुड़े बदलाव चाहते थे। जर्मन, इतालवी और अन्य समुदायों की राष्ट्रीय माँगें भी सक्रिय थीं। इसलिए इन आंदोलनों को केवल “भूख का विद्रोह” या केवल “मध्यवर्ग की क्रांति” कहना अधूरा है। अस्थायी सहयोग के बावजूद अलग वर्गों के हित हमेशा समान नहीं थे।

संदर्भ: [1].

रूमानीवाद, लोकसंस्कृति और पोलिश प्रतिरोध

राष्ट्रवाद केवल संविधान, सेना या युद्ध से नहीं फैला। कविताओं, चित्रों, गीतों, कथाओं और भाषा ने भी लोगों को साझा अतीत से जोड़ा। रूमानीवादी कलाकारों ने भावनाओं, कल्पना और सांस्कृतिक स्मृति पर बल दिया। वे लोकगीतों तथा लोककथाओं में समुदाय की पहचान खोजते थे।

जोहान गॉटफ्रीड हर्डर ने सामान्य लोगों की संस्कृति को महत्व दिया। ग्रिम बंधुओं द्वारा लोककथाओं के संकलन जैसे प्रयासों ने स्थानीय परंपराओं को व्यापक सांस्कृतिक पहचान से जोड़ा। स्थानीय भाषाओं में सामग्री बनने से राष्ट्रीय विचार उन लोगों तक भी पहुँच सकते थे जो शिक्षित अभिजात वर्ग की भाषा या औपचारिक राजनीतिक लेखन से परिचित नहीं थे।

पोलैंड में भाषा प्रतिरोध का माध्यम कैसे बनी?

पोलैंड के विभाजन के बाद उसके क्षेत्र रूस, प्रशा और ऑस्ट्रिया के नियंत्रण में थे। रूसी नियंत्रण वाले पोलिश क्षेत्रों में भाषा और सांस्कृतिक संस्थाओं पर दबाव पड़ा; विद्यालयों से पोलिश भाषा हटाकर रूसी भाषा थोपी गई। 1831 के विद्रोह के दमन के बाद धार्मिक शिक्षा तथा चर्च की गतिविधियों में पोलिश के उपयोग ने प्रतिरोध का रूप लिया। रूसी भाषा के थोपे जाने का विरोध करने वाले धार्मिक व्यक्तियों को दंड और निर्वासन का सामना करना पड़ा।

यहाँ भाषा का महत्व केवल बातचीत तक सीमित नहीं था। पोलिश का प्रयोग अपनी पहचान बनाए रखने और विदेशी नियंत्रण को चुनौती देने का सार्वजनिक तरीका बन गया। इस उदाहरण को पूरे पोलैंड में हर समय एक जैसी नीति लागू होने के दावे में न बदलें; रूसी नियंत्रण वाले क्षेत्रों और संबंधित ऐतिहासिक संदर्भ को स्पष्ट रखें।

उत्तर में संस्कृति का माध्यम, उसका उदाहरण और उसका राजनीतिक प्रभाव जोड़ें। केवल “गीतों से राष्ट्रवाद फैला” लिखने के बजाय बताएँ कि गीत साझा स्मृति जगाते और बिखरे लोगों में अपनापन पैदा करते थे।

संबंधित अध्ययन: मुद्रण संस्कृति और विचारों का प्रसार.

संदर्भ: [1].

फ्रैंकफर्ट संसद: संविधान की आशा और प्रतिनिधित्व की सीमाएँ

1848 की क्रांतियों के दौरान जर्मन क्षेत्रों के उदारवादी राष्ट्रवादियों ने संसदीय प्रक्रिया से एकीकरण का प्रयास किया। NCERT के अनुसार, 18 मई 1848 को 831 निर्वाचित प्रतिनिधि फ्रैंकफर्ट के सेंट पॉल चर्च में एकत्र हुए। उन्होंने ऐसे जर्मन राष्ट्र के लिए संविधान तैयार किया जिसमें राजतंत्र संसद के अधीन संवैधानिक सीमाओं में काम करे।

1849 में प्रशा के राजा फ्रेडरिक विलियम चतुर्थ को प्रस्तावित जर्मन सम्राट के ताज की पेशकश की गई, लेकिन उन्होंने इसे अस्वीकार कर दिया। यह बाद में 1871 में जर्मन सम्राट घोषित हुए विलियम प्रथम से अलग व्यक्ति थे। दोनों घटनाओं और दोनों राजाओं के नाम मिलाना उत्तर की महत्वपूर्ण गलती होगी।

यह प्रयास सफल क्यों नहीं हुआ?

संसद के पास अपने निर्णय लागू कराने की पर्याप्त सैन्य और राजनीतिक शक्ति नहीं थी। राजतंत्र तथा सेना का विरोध मजबूत रहा। संसद पर संपन्न मध्यवर्ग का प्रभाव था और श्रमिकों तथा कारीगरों की माँगों को अपेक्षित समर्थन नहीं मिला। इससे व्यापक जनसमर्थन कमजोर हुआ। राजनीतिक विभाजन और राजकीय दमन के बीच यह प्रयास टिक नहीं सका।

महिलाएँ सक्रिय थीं, फिर मतदान से बाहर क्यों?

महिलाओं ने राजनीतिक संगठन बनाए, समाचारपत्रों और सार्वजनिक आंदोलनों में भाग लिया, फिर भी उन्हें समान राजनीतिक अधिकार नहीं दिए गए। फ्रैंकफर्ट संसद में उन्हें दर्शक दीर्घा तक सीमित रखा गया। उनकी सक्रियता और संस्थागत बहिष्कार का यह अंतर उदारवादी राजनीति की सीमा स्पष्ट करता है।

संदर्भ: [1], [2].

जर्मनी का एकीकरण: प्रशा, बिस्मार्क और विलियम प्रथम

जर्मनी के एकीकरण को समझने के लिए दो अलग प्रश्न पूछिए: लोगों में एक राष्ट्र की इच्छा कैसे बनी और उस इच्छा को राजनीतिक राज्य में किसने बदला? भाषा, संस्कृति, व्यापार तथा उदारवादी आंदोलनों ने राष्ट्रीय भावना बढ़ाई। लेकिन अनेक जर्मन राज्यों को एक राजनीतिक व्यवस्था में लाने का निर्णायक नेतृत्व प्रशा के राजतंत्र ने किया। इसलिए इस प्रक्रिया में जनभावना और राज्य की शक्ति, दोनों की भूमिका पहचानना आवश्यक है।

1848 के प्रयास के बाद नेतृत्व कैसे बदला?

फ्रैंकफर्ट संसद के उदारवादी प्रतिनिधि संविधान और निर्वाचित संसद के आधार पर जर्मन एकता चाहते थे। उनका प्रयास सफल नहीं हुआ। इसका अर्थ यह नहीं कि राष्ट्रीय एकता की इच्छा समाप्त हो गई। बाद में प्रशा ने सेना, प्रशासन और कूटनीति के सहारे एकीकरण आगे बढ़ाया। प्रशा के बड़े भूस्वामी, जिन्हें युंकर कहा जाता था, राजतंत्र और सेना के प्रभाव के समर्थक थे।

ऑटो वन बिस्मार्क प्रशा के मुख्यमंत्री और एकीकरण के प्रमुख राजनीतिक योजनाकार थे। उन्होंने उपलब्ध राष्ट्रीय भावना को प्रशा के नेतृत्व में संगठित किया। इससे उदारवादियों के संसदीय राष्ट्र के सपने और वास्तव में बने राजतंत्र प्रधान राष्ट्र के बीच अंतर दिखाई देता है। जर्मनी का एकीकरण हुआ, लेकिन उसका रास्ता फ्रैंकफर्ट के प्रतिनिधियों की योजना जैसा नहीं था।

तीन युद्ध और उनका राजनीतिक प्रभाव

  1. 1864: डेनमार्क के विरुद्ध युद्ध। प्रशा और ऑस्ट्रिया ने मिलकर डेनमार्क को पराजित किया। इससे श्लेसविग और होल्सटीन के प्रश्न पर दोनों शक्तियों की भूमिका बढ़ी; बाद में इन्हीं क्षेत्रों का प्रशासन उनके आपसी तनाव का कारण बना।
  2. 1866: ऑस्ट्रिया के विरुद्ध युद्ध। प्रशा की विजय ने जर्मन राजनीति में उसके नेतृत्व को मजबूत किया। ऑस्ट्रिया को शामिल किए बिना जर्मन एकीकरण का रास्ता स्पष्ट हुआ।
  3. 1870–71: फ्रांस के विरुद्ध युद्ध। साझा युद्ध ने दक्षिणी जर्मन राज्यों को भी प्रशा के साथ आने में सहायता की। सैन्य सफलता और राजनीतिक समझौतों से नए साम्राज्य की स्थापना संभव हुई।

18 जनवरी 1871 को फ्रांस के वर्साय महल के दर्पण कक्ष में प्रशा के राजा विलियम प्रथम को नवगठित जर्मन साम्राज्य का सम्राट घोषित किया गया। बिस्मार्क बाद में इस साम्राज्य के चांसलर बने। दोनों व्यक्तियों का योगदान महत्वपूर्ण था, पर उनके पद अलग थे।

एकीकरण के बाद साझा शासन को प्रभावी बनाने के लिए मुद्रा, बैंकिंग, कानून और न्याय व्यवस्था के आधुनिकीकरण पर ध्यान दिया गया। इससे समझ आता है कि राष्ट्र निर्माण केवल घोषणा या सीमा परिवर्तन तक सीमित नहीं था; उसके बाद अलग-अलग क्षेत्रों को प्रशासनिक रूप से जोड़ना भी आवश्यक था।

संदर्भ: [1], [3].

इटली का एकीकरण: विचार, कूटनीति, स्वयंसेवक और राजतंत्र

उन्नीसवीं सदी के मध्य में इटली अनेक राजनीतिक भागों में बँटा था। उत्तरी क्षेत्रों में ऑस्ट्रियाई प्रभाव, मध्य में पोप का शासन और दक्षिण में बूर्बों राजवंश की सत्ता थी। सार्डिनिया-पीडमॉण्ट में इतालवी राजघराना शासन करता था। भाषायी रूपों और स्थानीय पहचानों में भी विविधता थी। इसलिए मानचित्र पर क्षेत्रों को मिलाने के साथ लोगों के बीच साझा इतालवी पहचान विकसित करना भी चुनौती थी।

मेत्सिनी ने राष्ट्रीय एकता का विचार फैलाया

ज्यूसेपे मेत्सिनी एक संयुक्त, स्वतंत्र और गणतांत्रिक इटली चाहते थे। उन्होंने 1831 में यंग इटली संगठन बनाया। उनका योगदान युवाओं को संगठित करना और यह विश्वास फैलाना था कि अलग-अलग राजवंशों में बँटे लोग एक साझा राष्ट्र बना सकते हैं। उनके क्रांतिकारी प्रयास तत्काल सफल नहीं हुए, फिर भी विचारों ने आगे के आंदोलन के लिए आधार तैयार किया।

कावूर की कूटनीति और 1859 का युद्ध

कावूर सार्डिनिया-पीडमॉण्ट के मुख्यमंत्री थे। उनकी कार्यपद्धति राजनयिक गठबंधन और राजकीय शक्ति पर आधारित थी। फ्रांस के साथ सहयोग स्थापित करके उन्होंने ऑस्ट्रियाई प्रभाव को चुनौती दी। 1859 में सार्डिनिया-पीडमॉण्ट और उसके फ्रांसीसी सहयोगी को ऑस्ट्रिया के विरुद्ध सफलता मिली। इस घटना ने उत्तरी इटली में एकीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई।

मेत्सिनी और कावूर को एक ही प्रकार का नेता मानना ठीक नहीं होगा। मेत्सिनी गणतांत्रिक विचार और क्रांतिकारी संगठन से जुड़े थे; कावूर राजतंत्र के अंतर्गत कूटनीतिक समाधान तलाश रहे थे। दोनों के योगदान एक व्यापक प्रक्रिया में जुड़े, लेकिन उनके राजनीतिक लक्ष्य और साधन समान नहीं थे।

गैरीबाल्डी का दक्षिणी अभियान

ज्यूसेपे गैरीबाल्डी ने सशस्त्र स्वयंसेवकों का नेतृत्व किया। उनके समर्थक लाल कमीज़ों के कारण रेड शर्ट्स कहलाए। 1860 में उनका अभियान सिसिली और दक्षिणी इटली पहुँचा। स्थानीय किसानों सहित विभिन्न लोगों का समर्थन मिलने से दक्षिण के बूर्बों शासन को हटाने में सफलता मिली। इस अभियान ने ऐसे क्षेत्रों को एकीकरण की प्रक्रिया से जोड़ा जहाँ केवल उत्तरी राज्य की कूटनीति पर्याप्त नहीं थी।

1861, 1866 और 1870 में क्या अंतर है?

1861 में विक्टर इमैनुएल द्वितीय को इटली का राजा घोषित किया गया। यह इटली राज्य की स्थापना का निर्णायक पड़ाव था। फिर भी उस समय वेनेशिया और रोम उससे बाहर थे। वेनेशिया 1866 में और रोम 1870 में नए राज्य से जुड़े। अतः राजा की घोषणा और बाद के क्षेत्रीय विस्तार को अलग-अलग घटनाओं के रूप में पढ़ें।

इटली की कहानी यह भी बताती है कि राजनीतिक एकीकरण और सामान्य जनता की राष्ट्रीय चेतना एक ही गति से विकसित नहीं होते। किसी क्षेत्र का नए राज्य में शामिल होना और वहाँ रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति का अपने को उसी राष्ट्र का सदस्य समझना अलग प्रक्रियाएँ हैं। शिक्षा, संचार तथा साझा संस्थाओं को इस दूरी को कम करने में समय लगता है।

संदर्भ: [1], [6].

ब्रिटेन का निर्माण: लंबे राजनीतिक परिवर्तन और असमान शक्ति संबंध

ब्रिटेन के निर्माण को किसी एक युद्ध या अचानक हुई राष्ट्रीय क्रांति में समेटना कठिन है। ब्रिटिश द्वीपों में अंग्रेज़, वेल्श, स्कॉट और आयरिश समुदायों की अपनी पहचान तथा परंपराएँ थीं। इंग्लैंड की आर्थिक और राजनीतिक शक्ति बढ़ने के साथ उसके नेतृत्व में नई ब्रिटिश पहचान विकसित हुई। इस प्रक्रिया में संसदीय कानून, राजनीतिक दबाव और सांस्कृतिक प्रभुत्व की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

1688 और 1707 का महत्व

1688 के परिवर्तन ने राजसत्ता के मुकाबले अंग्रेज़ संसद का अधिकार मजबूत किया। आगे चलकर यही संसद इंग्लैंड के प्रभाव के विस्तार का प्रमुख संस्थागत माध्यम बनी। 1707 के ऐक्ट ऑफ यूनियन से इंग्लैंड और स्कॉटलैंड का संघ बना तथा ग्रेट ब्रिटेन की संयुक्त राजनीतिक व्यवस्था स्थापित हुई। नई संसद में अंग्रेज़ सदस्यों का प्रभुत्व था।

यह संबंध सभी समुदायों के लिए समान अनुभव नहीं था। स्कॉटिश हाइलैंड्स में प्रतिरोध करने वाले समुदायों को कठोर दमन और विस्थापन सहना पड़ा। उनकी गैलिक संस्कृति, भाषा और पारंपरिक पहनावे पर दबाव पड़ा। इससे प्रश्न उठता है: साझा राष्ट्रीय पहचान बनाते समय अलग समुदायों की पहचान को कितना सम्मान मिला? इतिहास में एकीकरण के साथ इस शक्ति असमानता को भी पढ़ना आवश्यक है।

आयरलैंड और 1801 का संघ

आयरलैंड में कैथोलिक और प्रोटेस्टेंट समुदायों के बीच असमान राजनीतिक स्थिति थी। अंग्रेज़ सत्ता ने प्रोटेस्टेंट प्रभुत्व को समर्थन दिया। 1798 में वोल्फ टोन और यूनाइटेड आयरिशमेन से जुड़ा विद्रोह असफल रहा। इसके बाद 1801 में आयरलैंड को यूनाइटेड किंगडम में शामिल किया गया। इस घटना को आयरलैंड की स्वतंत्रता प्राप्ति लिखना गलत होगा।

यूनियन जैक, अंग्रेज़ी भाषा और साझा राजकीय प्रतीकों के प्रसार से ब्रिटिश पहचान को मजबूत किया गया। लेकिन प्रभावशाली अंग्रेज़ संस्कृति के अंतर्गत अन्य समुदायों की स्थिति अधीनस्थ बनी रही। ब्रिटेन का उदाहरण दिखाता है कि राष्ट्र निर्माण का अध्ययन केवल नए देश के नाम से नहीं, उस प्रक्रिया में शामिल समुदायों के अनुभवों से भी करना चाहिए।

संदर्भ: [1], [4], [5].

राष्ट्र की कल्पना: मारीआन, जर्मनिया और चित्रों के प्रतीक

राष्ट्र कोई एक व्यक्ति नहीं है, फिर कलाकार उसे चित्र में कैसे दिखाएँ? उन्होंने अमूर्त विचारों को मानवीय रूप दिया। किसी विचार को व्यक्ति या वस्तु के माध्यम से व्यक्त करना रूपक कहलाता है। स्त्री आकृतियों ने स्वतंत्रता, गणतंत्र और राष्ट्र जैसे विचारों को पहचानने योग्य दृश्य रूप दिया। मारीआन और जर्मनिया किसी वास्तविक रानी के चित्र नहीं, राष्ट्र के रूपक हैं।

मारीआन और जर्मनिया में अंतर

मारीआन फ्रांसीसी राष्ट्र और गणतंत्र की रूपक आकृति बनी। लाल टोपी, तिरंगा और अन्य गणतांत्रिक चिह्न उसके साथ दिखाए गए। सार्वजनिक प्रतिमाओं, सिक्कों और डाक टिकटों में इस आकृति की उपस्थिति ने लोगों को साझा राष्ट्रीय प्रतीक से जोड़ा। मारीआन को किसी एक ऐतिहासिक महिला का नाम मानकर उसकी जीवनी लिखना प्रश्न की माँग से भटकना होगा।

जर्मनिया जर्मन राष्ट्र का रूपक थी। उसके चित्रों में ओक की पत्तियाँ वीरता से जुड़ी थीं। तलवार, टूटी जंजीरें तथा प्रकाश जैसे संकेत चित्र को राजनीतिक अर्थ देते थे। किसी चित्र का उत्तर लिखते समय पहले दिखाई देने वाली वस्तु पहचानें, फिर उसका अर्थ और अंत में उस समय की राष्ट्रीय आशा से संबंध बताइए।

जर्मनिया के चित्र को पढ़ने के लिए प्रमुख संकेत
दृश्य संकेत राजनीतिक अर्थ
टूटी जंजीरें बंधन से मुक्ति।
गरुड़ वाला वक्ष कवच जर्मन साम्राज्य और शक्ति का संकेत।
ओक की पत्तियों का मुकुट वीरता और साहस।
तलवार संघर्ष के लिए तत्परता।
तलवार के आसपास जैतून की शाखा शांति स्थापित करने की इच्छा।
काला, लाल और सुनहरा ध्वज 1848 के उदारवादी राष्ट्रवादियों की आकांक्षा।
उगते सूर्य की किरणें एक नए युग की आशा।

मोबाइल पर पूरी तालिका देखने के लिए दाएँ-बाएँ खिसकाएँ।

एक विचारणीय विरोधाभास भी है: स्त्री आकृति राष्ट्र की प्रतीक बन सकती थी, जबकि वास्तविक महिलाओं को समान राजनीतिक अधिकार प्राप्त नहीं थे। चित्र में सम्मानजनक प्रतिनिधित्व और जीवन में मताधिकार, दोनों को एक जैसा मान लेना सही नहीं होगा।

संदर्भ: [1].

बाल्कन में राष्ट्रवादी तनाव और साम्राज्यवादी प्रतिस्पर्धा

बाल्कन यूरोप का दक्षिण-पूर्वी क्षेत्र है। यहाँ अनेक भाषायी, धार्मिक और जातीय समुदाय रहते थे। इनमें विभिन्न स्लाव समुदायों के साथ यूनानी, अल्बानियाई और रोमानियाई समुदाय भी शामिल थे। इसलिए पूरे बाल्कन की आबादी को एक ही जातीय समूह मानना गलत है। विविधता अपने आप युद्ध का कारण नहीं बनती; राजनीतिक परिस्थितियाँ तय करती हैं कि अलग पहचानों के बीच सहयोग बढ़ेगा या संघर्ष।

ऑटोमन सत्ता के कमजोर होने से नए दावे

इस क्षेत्र का बड़ा हिस्सा लंबे समय तक ऑटोमन साम्राज्य के अधीन था। साम्राज्य का नियंत्रण कमजोर हुआ तो विभिन्न समुदायों के सामने स्वशासन और स्वतंत्र राष्ट्र बनाने की संभावनाएँ खुलीं। राष्ट्रवादी नेताओं ने इतिहास, भाषा और पुराने राज्य संबंधी स्मृतियों के आधार पर स्वतंत्रता की माँग की। इस स्तर पर राष्ट्रवाद साम्राज्य के अधीन लोगों के अधिकारों की भाषा बन सकता था।

समस्या तब बढ़ी जब विभिन्न आंदोलनों ने एक ही क्षेत्र पर दावा किया। आबादी मिली-जुली होने के कारण भाषा या पुराने इतिहास के आधार पर एक सर्वमान्य सीमा खींचना कठिन था। कुछ नए राज्य अधिक क्षेत्र प्राप्त करना चाहते थे और पड़ोसियों की शक्ति से आशंकित थे। इसलिए स्वतंत्रता की आकांक्षा के साथ क्षेत्रीय विस्तार की होड़ भी जुड़ गई।

यूरोपीय महाशक्तियों ने तनाव कैसे बढ़ाया?

रूस, ऑस्ट्रिया-हंगरी, जर्मनी और ब्रिटेन जैसी शक्तियाँ बाल्कन में अपना प्रभाव बढ़ाना चाहती थीं। उनके रणनीतिक हितों ने स्थानीय विवादों को व्यापक अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा से जोड़ दिया। किसी समुदाय या राज्य का समर्थन केवल उसके अधिकारों के कारण नहीं, प्रतिद्वंद्वी शक्ति को रोकने के उद्देश्य से भी किया जा सकता था। इस प्रकार स्थानीय राष्ट्रवाद और साम्राज्यवादी राजनीति एक-दूसरे में उलझने लगे।

बाल्कन का तनाव प्रथम विश्वयुद्ध की पृष्ठभूमि का महत्वपूर्ण हिस्सा था। फिर भी युद्ध को केवल जातीय विविधता का परिणाम कहना अधूरा है। गठबंधनों, सैन्य तैयारी, साम्राज्यवादी प्रतिद्वंद्विता और राजनीतिक निर्णयों ने भी संकट को व्यापक युद्ध में बदलने में भूमिका निभाई। कारण समझाने वाले उत्तर में इन परतों का संबंध दिखाना, केवल घटनाओं की सूची लिखने से अधिक उपयोगी है।

संदर्भ: [1].

जर्मनी, इटली और ब्रिटेन के राष्ट्र निर्माण की तुलना

तीनों उदाहरण साझा राष्ट्रीय राज्य बनने की प्रक्रियाएँ दिखाते हैं, लेकिन उनके नेतृत्व, तरीकों और परिणामों में अंतर था। तुलना वाले उत्तर में पहले आधार तय करें और फिर उसी आधार पर प्रत्येक उदाहरण लिखें। एक देश के नेता की तुलना दूसरे देश की तिथि से करने पर उत्तर असंतुलित हो जाता है।

एक ही परिणाम की दिशा में अलग ऐतिहासिक रास्ते
तुलना का आधार जर्मनी इटली ब्रिटेन
प्रमुख नेतृत्व प्रशा; बिस्मार्क और विलियम प्रथम। सार्डिनिया-पीडमॉण्ट; अलग भूमिकाओं में मेत्सिनी, कावूर, गैरीबाल्डी और विक्टर इमैनुएल द्वितीय। इंग्लैंड की बढ़ती शक्ति और संसदीय व्यवस्था।
प्रमुख तरीके राजकीय सेना, कूटनीति और युद्ध। राष्ट्रीय विचार, राजनयिक गठबंधन, युद्ध और स्वयंसेवी अभियान। संघ संबंधी कानून, राजनीतिक दबाव और सांस्कृतिक प्रभुत्व।
महत्वपूर्ण पड़ाव 1864, 1866, 1870–71 के युद्ध; 18 जनवरी 1871 की घोषणा। 1861 में राज्य की घोषणा; वेनेशिया 1866 और रोम 1870 में जुड़े। 1688 का संसदीय परिवर्तन; 1707 और 1801 के संघ।
प्रभावशाली राजनीतिक केंद्र प्रशा प्रधान साम्राज्य। सावॉय राजघराने के अंतर्गत राजतंत्र। इंग्लैंड प्रधान संयुक्त व्यवस्था।
अध्ययन की महत्वपूर्ण सीमा एकीकरण को 1848 की उदारवादी योजना की सीधी सफलता न मानें। सभी नेताओं के विचार समान और सभी क्षेत्र 1861 में जुड़े हुए न मानें। सभी समुदायों की समान सहमति और समान शक्ति मानकर प्रक्रिया न समझें।

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इन उदाहरणों से निष्कर्ष निकलता है कि राष्ट्र निर्माण की कोई एक सार्वभौमिक विधि नहीं थी। जनभागीदारी, आर्थिक हित, सांस्कृतिक पहचान, राजकीय शक्ति और संघर्ष का अनुपात अलग-अलग था। इसी कारण किसी राष्ट्रीय आंदोलन का मूल्यांकन उसके उद्देश्यों, प्रयुक्त साधनों और विभिन्न समुदायों पर पड़े प्रभावों को साथ देखकर करना चाहिए।

संबंधित अध्ययन: अगला अध्याय: भारत में राष्ट्रवाद · भारत में राष्ट्रवाद के अतिरिक्त नोट्स.

संदर्भ: [1].

महत्वपूर्ण तिथियाँ: 1688 से 1871 तक

तिथि के साथ उसका महत्व याद करें। आर्थिक सहयोग, संविधान बनाने का प्रयास और राजनीतिक एकीकरण अलग घटनाएँ हैं। नीचे एक ही वर्ष की अलग घटनाओं को आवश्यकतानुसार अलग रखा गया है।

यूरोप में राष्ट्रवाद की घटनाओं का समयक्रम
वर्ष या तिथि घटना और उसका महत्व
1688 इंग्लैंड में राजसत्ता के मुकाबले संसद की शक्ति बढ़ी; आगे के राजनीतिक परिवर्तन का आधार बना।
1707 एक्ट ऑफ यूनियन से इंग्लैंड और स्कॉटलैंड मिलकर ग्रेट ब्रिटेन का राज्य बने।
1789 फ्रांसीसी क्रांति ने नागरिक संप्रभुता और राष्ट्र के विचार को नया महत्व दिया।
1801 आयरलैंड को यूनाइटेड किंगडम में शामिल किया गया।
1804 नेपोलियन की नागरिक संहिता आई; कानून और संपत्ति संबंधी सुधार हुए।
1815 वियना व्यवस्था ने राजवंशीय पुनर्स्थापना और यूरोपीय शक्ति संतुलन को प्राथमिकता दी।
1821 ओटोमन शासन के विरुद्ध यूनान का स्वतंत्रता संघर्ष शुरू हुआ।
1830 फ्रांस में जुलाई क्रांति हुई; बेल्जियम का नीदरलैंड से अलगाव भी इसी दौर से जुड़ा।
1831 मेत्सिनी ने यंग इटली की स्थापना की।
1831 रूसी सत्ता के विरुद्ध पोलिश विद्रोह का दमन हुआ।
1832 कुस्तुनतुनिया संधि में यूनान की स्वतंत्रता को मान्यता मिली।
1834 प्रशा की पहल पर ज़ोलवेराइन बना; आर्थिक सहयोग का विस्तार हुआ।
1848 सॉर्यू ने स्वतंत्र राष्ट्रों और गणराज्यों के आदर्श विश्व की चित्रात्मक कल्पना की।
1848 फ्रांस में गणराज्य स्थापित हुआ; यूरोप के अनेक क्षेत्रों में राजनीतिक और सामाजिक आंदोलन हुए।
18 मई 1848 फ्रैंकफर्ट संसद सेंट पॉल चर्च में एकत्र हुई।
1849 फ्रेडरिक विलियम चतुर्थ ने फ्रैंकफर्ट संसद द्वारा प्रस्तावित जर्मन ताज अस्वीकार किया।
1859 फ्रांस के सहयोग से सार्डिनिया-पीडमॉण्ट ने ऑस्ट्रियाई सेना को हराया।
1860 गैरीबाल्डी के स्वयंसेवकों ने दक्षिणी इटली और सिसिली में अभियान चलाया।
1861 विक्टर इमैनुएल द्वितीय संयुक्त इटली के राजा घोषित हुए।
1864 प्रशा और ऑस्ट्रिया ने डेनमार्क के विरुद्ध युद्ध लड़ा।
1866 प्रशा ने ऑस्ट्रिया को हराया; इसी वर्ष वेनेशिया इटली में शामिल हुआ।
1867 प्रशा के नेतृत्व में उत्तरी जर्मन परिसंघ बना।
1870 फ्रांस-प्रशा युद्ध शुरू हुआ; फ्रांसीसी सैनिक हटने के बाद रोम इटली में शामिल हुआ।
18 जनवरी 1871 वर्साय में विलियम प्रथम जर्मन सम्राट घोषित हुए।

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कठिन शब्दों के सरल अर्थ

अध्याय के 12 उपयोगी शब्द
शब्द सरल अर्थ
संप्रभुता किसी राजनीतिक समुदाय के लिए निर्णय लेने की सर्वोच्च सत्ता।
राष्ट्रवाद साझा राष्ट्रीय पहचान और राजनीतिक भविष्य से जुड़ाव की भावना तथा विचार।
निरंकुशवाद ऐसा शासन जिसमें शासक की शक्ति पर प्रभावी संवैधानिक नियंत्रण न हो।
उदारवाद व्यक्तिगत स्वतंत्रता, कानूनी समानता और सहमति पर आधारित शासन को महत्व देने वाला विचार।
रूढ़िवाद परंपरागत संस्थाओं और स्थापित व्यवस्था को सुरक्षित रखने पर जोर देने वाला विचार।
मताधिकार निर्वाचन में वोट देने का अधिकार।
जनमतसंग्रह किसी विशिष्ट प्रस्ताव पर लोगों से सीधे मतदान द्वारा निर्णय लेना।
सीमा शुल्क निर्धारित सीमा से वस्तुओं की आवाजाही पर लगाया जाने वाला कर।
रूमानीवाद भावना, कल्पना और लोकसंस्कृति को महत्व देने वाली सांस्कृतिक प्रवृत्ति।
रूपक अमूर्त विचार को पहचान योग्य रूप में दिखाना; जैसे राष्ट्र को स्त्री आकृति देना।
कृषिदासता जमींदारी व्यवस्था से बँधे कृषक की स्थिति, जिसमें उसकी स्वतंत्रता सीमित होती थी।
साम्राज्यवाद अन्य क्षेत्रों पर राजनीतिक, आर्थिक या सैन्य प्रभुत्व स्थापित करने की नीति।

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इतिहास के उत्तर स्पष्ट कैसे लिखें?

  1. प्रश्न की माँग पहचानें: कारण, परिणाम, तुलना और मूल्यांकन में अलग तरह का उत्तर चाहिए।
  2. सीधा आरंभ करें: पहले वाक्य में विषय का अर्थ या प्रश्न का मुख्य उत्तर दें।
  3. प्रत्येक बिंदु समझाएँ: तथ्य के बाद लिखें कि उसका प्रभाव क्यों महत्वपूर्ण था।
  4. सही पहचान रखें: व्यक्ति, पद, तिथि और देश के नाम मिलाकर न लिखें।
  5. अंतिम जाँच करें: प्रश्न का हर भाग पूरा हुआ हो और अनावश्यक विवरण हट गया हो।

कारण → घटना → परिणाम का उदाहरण: जर्मन राज्यों की अलग शुल्क व्यवस्थाएँ व्यापार महँगा बनाती थीं। इस समस्या को घटाने के लिए 1834 में प्रशा की पहल पर ज़ोलवेराइन बना। सदस्य क्षेत्रों के आर्थिक संपर्क और साझा हित मजबूत हुए, जिससे राष्ट्रीय एकता की भावना को समर्थन मिला। इससे उसी वर्ष राजनीतिक एकीकरण होने का निष्कर्ष नहीं निकलता।

शब्द-सीमा प्रश्नपत्र के निर्देशों के अनुसार रखें। तुलना में दोनों पक्षों पर एक ही आधार लागू करें और स्रोत आधारित प्रश्न में दिए अनुच्छेद या चित्र से प्रमाण जोड़ें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1815, 1834, 1848 और 1871 में क्या अंतर है?

1815 वियना व्यवस्था, 1834 ज़ोलवेराइन, 1848 क्रांतियों तथा फ्रैंकफर्ट संसद और 1871 जर्मन साम्राज्य की घोषणा से जुड़ा है। इन्हें एकीकरण की एक ही घटना न समझें।

जर्मनी के सम्राट बिस्मार्क थे या विलियम प्रथम?

विलियम प्रथम सम्राट घोषित हुए। बिस्मार्क प्रशा के प्रधानमंत्री, एकीकरण के प्रमुख राजनीतिक शिल्पकार और बाद में जर्मन साम्राज्य के चांसलर थे।

फ्रैंकफर्ट संसद का ताज किस राजा ने ठुकराया?

प्रशा के फ्रेडरिक विलियम चतुर्थ ने 1849 में प्रस्तावित ताज अस्वीकार किया। वे 1871 में सम्राट बने विलियम प्रथम से अलग राजा थे।

क्या ज़ोलवेराइन बनने से जर्मनी तुरंत एक देश बन गया?

नहीं। यह सीमा शुल्क संघ था। उसने आर्थिक सहयोग और संपर्क बढ़ाया; एकीकृत जर्मन साम्राज्य की घोषणा बाद में हुई।

क्या महिलाओं ने राष्ट्रवादी आंदोलनों में भाग लिया?

हाँ। उन्होंने संगठन, समाचारपत्र और सार्वजनिक गतिविधियों में भाग लिया। फिर भी फ्रैंकफर्ट संसद के चुनाव में मताधिकार नहीं मिला और सभा में दर्शक दीर्घा तक सीमित रहीं।

इटली के एकीकरण का वर्ष 1861 लिखें या 1870?

1861 में इटली के राज्य की घोषणा हुई। वेनेशिया 1866 और रोम 1870 में जुड़ा। उत्तर में प्रश्न के अनुसार घोषणा और बाद के क्षेत्रीय एकीकरण के चरण स्पष्ट करें।

नेपोलियन का स्वागत बाद में विरोध में क्यों बदला?

प्रशासनिक सुधारों से शुरुआती आशाएँ बनीं, लेकिन कर, सेंसरशिप, जबरन सैन्य भर्ती और राजनीतिक नियंत्रण ने असंतोष बढ़ाया।

क्या राष्ट्रवाद हमेशा लोकतंत्र के साथ जुड़ा रहा?

नहीं। शुरुआत में उदारवादी स्वतंत्रता की माँगों से उसका गहरा संबंध था। आगे राजतंत्रों और शक्तिशाली राज्यों ने राष्ट्रीय भावना का प्रयोग अपनी सत्ता तथा विस्तार के लिए भी किया।

पुनरावृत्ति और अगला अध्याय

अपनी कॉपी में तीन छोटे अभ्यास करें। पहले 1789, 1804, 1815, 1834, 1848 और 1871 की घटनाओं का एक-एक वाक्य लिखें। फिर जर्मनी, इटली और ब्रिटेन के राष्ट्र निर्माण की तुलना करें। अंत में समझाएँ कि स्वतंत्रता और समानता की माँग करने वाले कुछ उदारवादी महिलाओं तथा संपत्तिहीन पुरुषों को राजनीतिक अधिकार देने में क्यों पीछे रहे।

उत्तर जाँचते समय चार बातें देखें: तथ्य सही हैं, प्रश्न का सीधा उत्तर है, कारण और परिणाम जुड़े हैं, तथा व्यक्तियों की भूमिकाएँ अलग हैं। जो उत्तर अधूरा हो, उसके विषय को दोबारा पढ़कर अपने शब्दों में लिखें।

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इसके बाद भारत में राष्ट्रवाद पढ़ें। तुलना करते समय देखें कि यूरोप के राष्ट्र निर्माण और भारत के औपनिवेशिक शासन-विरोधी आंदोलन की परिस्थितियाँ कैसे अलग थीं। साझा पहचान की भूमिका दोनों में दिखाई देती है, पर उनके राजनीतिक संदर्भ को एक जैसा नहीं मानना चाहिए। भारत में राष्ट्रवाद का टेस्ट इस तुलना के बाद करें।

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संदर्भ और तथ्य-जाँच का आधार

यह मौलिक अध्ययन लेख NCERT के अध्याय-क्रम और नीचे दिए ऐतिहासिक संस्थानों के विवरणों के आधार पर तैयार किया गया है। अभ्यास के अनुच्छेद और मॉडल उत्तर सीखने के लिए लिखे गए हैं। मूल पुस्तक के चित्रों और मानचित्रों को पढ़ते समय उनके शीर्षक, संकेत और प्रसंग भी देखें।

  1. NCERT: India and the Contemporary World–II, Chapter 1 — The Rise of Nationalism in Europe (2026–27) — अध्याय की अवधारणाएँ, चित्र-प्रतीक और विद्यालय स्तर का घटनाक्रम।
  2. जर्मन बुंडेस्टाग: फ्रैंकफर्ट की 1848–49 की राष्ट्रीय सभा — राष्ट्रीय सभा, संविधान और प्रशा के राजा को ताज की पेशकश का संस्थागत इतिहास।
  3. जर्मन ऐतिहासिक संग्रहालय: ऑटो फ़ॉन बिस्मार्क — प्रशा के मंत्री-प्रधान और जर्मन साम्राज्य के चांसलर की भूमिकाएँ।
  4. ब्रिटिश संसद: 1707 का संघ — इंग्लैंड और स्कॉटलैंड के संसदीय संघ की पृष्ठभूमि।
  5. ब्रिटिश संसद: आयरलैंड के साथ संसदीय संघ — 1800 के अधिनियम और 1801 से प्रभावी संघ का अंतर।
  6. अमेरिकी विदेश विभाग का इतिहास कार्यालय: इटली का एकीकरण — 1861 का राज्य, 1866 में वेनेशिया और 1870 में रोम।
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